Tag: Rahul Gandhi

  • एलन मस्क ने राहुल गांधी को कहा थैंक्यू, स्टारलिंक लाइसेंस पर उठाए सवाल; भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लेकर बढ़ी चर्चा

    एलन मस्क ने राहुल गांधी को कहा थैंक्यू, स्टारलिंक लाइसेंस पर उठाए सवाल; भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लेकर बढ़ी चर्चा

    नई दिल्ली: अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बीच भारत में स्टारलिंक की सेवाओं को लेकर सोशल मीडिया पर बातचीत हुई है। राहुल गांधी के जवाब पर मस्क ने प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें धन्यवाद कहा और मामले को चिंताजनक बताया। मस्क ने इससे पहले सवाल उठाया था कि उनकी कंपनी स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और वह पिछले पांच वर्षों से भारत सरकार के कानूनों तथा आवश्यकताओं का पालन करने की बात कह रही है, इसके बावजूद भारत में उसे अब तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला है। राहुल गांधी ने जवाब में लिखा था कि एलन मस्क का भारत में स्वागत है और दूसरे व्यक्ति से मिलने पर उन्हें इस मामले के बारे में और जानकारी मिलेगी। हालांकि, राहुल गांधी ने अपने संदेश में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। इस बातचीत के बाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत और कंपनियों के लिए लागू नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    मस्क ने राहुल गांधी के संदेश के जवाब में कहा कि यह स्थिति वास्तव में चिंताजनक है। इससे पहले भी वह भारत में स्टारलिंक की सेवाओं को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली समूह भारतीय बाजार में अपनी एकाधिकार वाली स्थिति बनाए रखने के लिए उनकी कंपनी को रोक रहे हैं। मस्क ने इस कथित रोक को भारतीय लोगों के हितों के खिलाफ बताया था। हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि देश में दूरसंचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष और बिना भेदभाव वाली नियामकीय व्यवस्था लागू है। स्टारलिंक, स्पेसएक्स की उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा है, जो सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी भारतीय बाजार में सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर रही है। इस बीच लाइसेंस, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा संबंधी मंजूरियों को लेकर अलग-अलग पक्षों के बयान सामने आए हैं।

    स्टारलिंक की ओर से भारतीय बाजार में प्रवेश की तैयारियों को लेकर भी जानकारी दी गई है। कंपनी की अधिकारी लॉरेन ड्रेयर ने कहा था कि भारत में सेवा शुरू करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की तैयारी में निवेश किया गया है। कंपनी भारत में अपनी उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने के लिए तैयार होने की बात कह चुकी है। हालांकि, सेवा शुरू करने के लिए केवल लाइसेंस मिलना पर्याप्त नहीं है। संबंधित कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा मंजूरी जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होंगी। भारत में उपग्रह संचार सेवाओं के क्षेत्र में स्टारलिंक के अलावा जियो सैटकॉम और यूटेलसैट वनवेब भी मौजूद हैं। इन कंपनियों को देश में सेवाएं शुरू करने के लिए लाइसेंस दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद व्यावसायिक स्तर पर सेवा शुरू करने से पहले निर्धारित नियामकीय और सुरक्षा शर्तों का पालन करना जरूरी है। इसी वजह से लाइसेंस मिलने और सेवाओं के वास्तविक संचालन के बीच अंतर बना हुआ है।

    भारत सरकार ने मस्क के आरोपों के जवाब में कहा है कि देश में सैटेलाइट संचार समेत सभी दूरसंचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष व्यवस्था लागू है। सरकार के अनुसार, नियामकीय नियमों या उन्हें लागू करने की प्रक्रिया को अनुचित बताना सही नहीं है। दूरसंचार सेवाओं के लिए निर्धारित लाइसेंस शर्तों के तहत प्रत्येक उपग्रह संचार कंपनी को सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के पालन की पुष्टि करनी होती है। इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हों। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियम किसी एक कंपनी को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए हैं, बल्कि सभी संबंधित कंपनियों पर लागू होते हैं।

    संचार राज्यमंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि सैटेलाइट संचार सेवाओं से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर गृह मंत्रालय विचार कर रहा है। आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद कंपनियों को सेवाएं शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बताया कि दूरसंचार विभाग ने सैटेलाइट संचार कंपनियों को लाइसेंस देने के साथ अस्थायी स्पेक्ट्रम भी आवंटित किया है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया का संबंध किसी एक कंपनी से नहीं है। ऐसे में स्टारलिंक की भारत में शुरुआत का मामला कंपनी की तैयारियों के साथ सुरक्षा मंजूरी और अन्य नियामकीय आवश्यकताओं पर भी निर्भर करता है।

  • प्रियंका-राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर दूसरी FIR, आकाशवाणी भवन में जाने की कोशिश और पुलिस से धक्कामुक्की का आरोप

    प्रियंका-राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर दूसरी FIR, आकाशवाणी भवन में जाने की कोशिश और पुलिस से धक्कामुक्की का आरोप

    नई दिल्ली: दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने एक और FIR दर्ज की है। इस मामले में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में रुकावट डालने और सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप है। यह इस प्रदर्शन को लेकर दर्ज की गई दूसरी FIR है। पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारी बिना अनुमति आकाशवाणी भवन के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, जिसके दौरान सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।

    पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि इसके लिए किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी। प्रदर्शनकारियों की इस कोशिश के दौरान वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। पुलिस का कहना है कि इस घटनाक्रम में आकाशवाणी भवन के दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। दोनों का मेडिकल कराया गया है। पुलिस ने प्रदर्शन वाली जगह और भवन परिसर की तस्वीरें भी जुटाई हैं। इसके अलावा कुछ दीवारों को नुकसान पहुंचने की बात भी पुलिस की ओर से कही गई है।

    FIR में सरकारी काम में बाधा डालने और सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी से जुड़े आरोपों को शामिल किया गया है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। आकाशवाणी भवन में प्रवेश की कोशिश, सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई कथित धक्का-मुक्की और परिसर में हुए नुकसान से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा के अलावा कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम दर्ज किए गए हैं।

    नई FIR को लेकर राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले ही 45 FIR दर्ज हैं और उनके लिए हर FIR एक “मेडल” की तरह है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य 100 FIR तक पहुंचने का है। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को उठाने के कारण विपक्षी नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

    चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद बना हुआ है। विपक्षी नेता SIR से जुड़े मुद्दों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहे हैं। इसी दौरान प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। अब दूसरी FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। एक तरफ पुलिस प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में रुकावट और सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की को आधार बनाकर कार्रवाई कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है। इस मामले में पुलिस द्वारा जुटाए गए फोटो और अन्य जानकारी जांच का हिस्सा हैं।

  • राहुल गांधी की ‘सरप्राइज पॉलिटिक्स’: छोटा दस्ता, अचानक धरना और सरकार पर सीधा वार

    राहुल गांधी की ‘सरप्राइज पॉलिटिक्स’: छोटा दस्ता, अचानक धरना और सरकार पर सीधा वार


    नई दिल्ली। अचानक धरना, पुलिस थाने की ओर कूच या बिना पूर्व सूचना किसी जगह पहुंच जाना राहुल गांधी की हालिया राजनीति में ‘सरप्राइज’ एक अहम रणनीति के तौर पर उभरता दिख रहा है। पिछले कुछ महीनों में उनके ऐसे कई कदम सामने आए हैं, जिनमें बड़ी भीड़ के बजाय सीमित लोगों के साथ अचानक एक्शन लेकर राजनीतिक और मीडिया का ध्यान खींचने की कोशिश नजर आती है।

    औचक एक्शन, कम लोगों के साथ मैदान में उतरना
    राहुल गांधी इन दिनों मोदी सरकार को घेरने के लिए विरोध प्रदर्शन के पारंपरिक तरीकों से अलग रास्ता अपनाते दिख रहे हैं। कभी अचानक धरना, कभी पुलिस थाने की ओर मार्च और कभी किसी तय कार्यक्रम से अलग मौके पर पहुंच जाना—इन कदमों में एक बात समान रहती है, वह है औचक कार्रवाई।

    6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी मार्च के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला। पुलिस ने संसद मार्ग पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। इसके बाद राहुल गांधी ने बैरिकेड पार किया और प्रियंका गांधी के साथ आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंचकर धरना शुरू कर दिया। यह प्रदर्शन करीब आठ घंटे तक चला और बाद में पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया।

    अगले दिन भी विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी का काफिला अचानक जंतर-मंतर की ओर बढ़ा। इस तरह के कदमों ने पुलिस और प्रशासन के सामने पहले से तय विरोध-प्रदर्शन के प्रबंधन को चुनौती दी है।

    नया नहीं है यह तरीका
    हालांकि राहुल गांधी के लिए अचानक मैदान में उतरना कोई बिल्कुल नया प्रयोग नहीं है। इसकी झलक कई साल पहले भट्टा-पारसौल आंदोलन के दौरान भी दिखाई दी थी। उस समय वह बाइक से पश्चिमी उत्तर प्रदेश पहुंचे थे और किसानों से मुलाकात की थी।

    फर्क इतना है कि हाल के वर्षों में इस तरह के राजनीतिक कदमों की आवृत्ति और दृश्यता बढ़ी है। अब अचानक किए गए किसी एक्शन को सोशल मीडिया और न्यूज कवरेज के जरिए बड़े राजनीतिक संदेश में बदलने की कोशिश भी दिखाई देती है।

    मार्शल आर्ट से राजनीति तक
    राहुल गांधी अपने फिटनेस और मार्शल आर्ट्स अभ्यास को लेकर भी सार्वजनिक तौर पर बात करते रहे हैं। भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान उन्होंने शाम के समय जिउ-जित्सु और मार्शल आर्ट्स से जुड़े अभ्यास को लेकर वीडियो भी साझा किए थे। उनका कहना रहा है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य फिटनेस के साथ युवाओं को मार्शल आर्ट्स से जोड़ना भी है।

    फिटनेस को लेकर राहुल गांधी ने अगस्त 2026 में भी बताया था कि वह व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद करीब एक घंटा शारीरिक प्रशिक्षण के लिए निकालते हैं। उनके मुताबिक इसमें ताकत, एरोबिक क्षमता और लचीलेपन पर काम शामिल होता है।

    धरना पॉलिटिक्स में फिटनेस भी जरूरी
    सड़क पर उतरकर किए जाने वाले लंबे राजनीतिक प्रदर्शनों में शारीरिक ऊर्जा भी एक अहम पहलू बन जाती है। राहुल गांधी के हालिया प्रदर्शनों में इसका उदाहरण देखने को मिला है। आकाशवाणी भवन के बाहर उनका धरना कई घंटे चला, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।

    यानी जिस फिटनेस को राहुल गांधी पहले निजी अनुशासन के तौर पर पेश करते रहे हैं, उसे अब उनकी सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस भी पिछले कुछ समय से राहुल गांधी की सड़क पर उतरकर सीधे विरोध करने वाली छवि को प्रमुखता देती दिख रही है।

    ‘अड़ियल तेवर’ या सोची-समझी रणनीति?
    हाल के प्रदर्शनों में राहुल गांधी का तरीका सरकार के साथ सीधे टकराव वाला नजर आया है। चाहे प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ते हुए धरने पर बैठना हो या संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर टिके रहना—उनके इन कदमों में पीछे हटने के बजाय मौके पर बने रहने का संदेश प्रमुख रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषण में इसे एक ऐसी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य सिर्फ अपनी मांग दर्ज कराना नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन पर तत्काल राजनीतिक दबाव बनाना और घटनाक्रम को सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में लाना भी है। हालिया प्रदर्शनों में राहुल गांधी के अचानक लिए गए फैसलों ने इसी तरह की चर्चा को बढ़ाया है।

    ‘ब्रांड मोदी’ के सामने अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश
    राहुल गांधी के सामने राजनीतिक चुनौती यह भी है कि नरेंद्र मोदी की राजनीति लंबे समय से एक मजबूत और स्थापित राजनीतिक ब्रांड के रूप में सामने रही है। ऐसे में राहुल गांधी की सार्वजनिक छवि को उससे अलग रूप देने की कोशिश कांग्रेस की मौजूदा रणनीति का हिस्सा दिखाई देती है।

    एक तरफ नरेंद्र मोदी की स्थापित सत्ता और संगठन आधारित राजनीति है, तो दूसरी ओर राहुल गांधी की ओर से सड़क पर उतरने, अचानक विरोध करने और टकराव की स्थिति में पीछे नहीं हटने वाली छवि को उभारने का प्रयास नजर आता है।

    हालिया घटनाक्रम से यह जरूर स्पष्ट है कि राहुल गांधी की राजनीति में सरप्राइज, सीमित टीम के साथ अचानक एक्शन और दृश्यता वाले विरोध प्रदर्शन का इस्तेमाल बढ़ा है। अब यह रणनीति कांग्रेस को कितना राजनीतिक लाभ देती है और जनता के बीच राहुल गांधी की छवि को किस दिशा में ले जाती है, इसका आकलन आने वाले समय में राजनीतिक घटनाक्रम और जन प्रतिक्रिया से होगा।

  • सुबह मार्च, दोपहर में आकाशवाणी भवन में धरना, रात में हिरासत, राहुल-प्रियंका के प्रदर्शन में दिनभर क्या-क्या हुआ

    सुबह मार्च, दोपहर में आकाशवाणी भवन में धरना, रात में हिरासत, राहुल-प्रियंका के प्रदर्शन में दिनभर क्या-क्या हुआ


    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन ने मंगलवार को कई घंटे तक दिल्ली की सड़कों पर राजनीतिक हलचल बनाए रखी। सुबह चुनाव आयोग की ओर मार्च से शुरू हुआ विरोध दोपहर में आकाशवाणी भवन परिसर में धरने में बदल गया और करीब नौ घंटे बाद रात में दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। दोनों को बाद में रिहा कर दिया गया।

    INDIA ब्लॉक के नेता SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग से मिलने और ज्ञापन सौंपने की मांग की। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैठक का समय नहीं मांगा था।

    सुबह 11 बजे शुरू हुआ मार्च
    मंगलवार सुबह INDIA ब्लॉक के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च के लिए निकले। राहुल गांधी के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, जया बच्चन, महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेता मौजूद थे।

    मार्च को संसद मार्ग पर बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। इसके बाद कई नेता सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शन के कारण पार्लियामेंट स्ट्रीट पर काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा। राहुल गांधी के हाथ में एक तख्ती भी थी, जिस पर लिखा था- “Gyanesh, it’s done bro.” प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उन्हें CEC से मिलने दिया जाए।

    बैरिकेड पर चढ़े राहुल, लहराया तिरंगा
    मार्च रोके जाने के दौरान राहुल गांधी एक बैरिकेड पर चढ़ गए और हाथ में तिरंगा लेकर उसे लहराया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को हिरासत में लेना शुरू किया। हालांकि, उस समय राहुल गांधी को हिरासत में नहीं लिया गया था। इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ लिया।

    प्रियंका से बात की और आकाशवाणी भवन पहुंचे
    राहुल गांधी ने आकाशवाणी भवन के परिसर में मौजूद अपनी बहन प्रियंका गांधी से बातचीत की और फिर रिसेप्शन गेट की ओर बढ़ गए। वहां कर्मचारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे कुछ देर तनाव की स्थिति बनी। इसके बाद राहुल गांधी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ अंदर चले गए।

    कुछ देर बाद प्रियंका गांधी भी पुलिस की बस से बाहर आईं और अपने भाई के साथ प्रदर्शन में शामिल हो गईं। दोनों आकाशवाणी भवन के गेट नंबर-4 के पास एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए। देखते ही देखते कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए।

    पेड़ के नीचे शुरू हुआ धरना
    राहुल और प्रियंका के धरने की जानकारी फैलते ही आकाशवाणी भवन के आसपास भीड़ बढ़ने लगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, दीपेंद्र हुड्डा, चरणजीत सिंह चन्नी और अन्य नेता भी वहां पहुंचे। धरने की तैयारी के लिए बरगद के पेड़ के नीचे मैट और बाद में गद्दे बिछाए गए। राहुल गांधी ज्यादातर समय बैठे रहे, जबकि प्रियंका गांधी पुलिस अधिकारियों से बातचीत करती रहीं।

    कुछ समय बाद प्रदर्शनकारियों के लिए पानी और खाने-पीने का सामान भी पहुंचा। रिपोर्टों के मुताबिक, चिप्स, भुजिया, चॉकलेट, पानी और सॉफ्ट ड्रिंक के पैकेट मंगाए गए। शाम होने के बाद मच्छर भगाने वाली क्रीम भी धरना स्थल तक पहुंचाई गई।

    राहुल ने कहा- जब तक EC नहीं मिलेगा, धरना जारी रहेगा
    दोपहर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जब तक चुनाव आयोग INDIA ब्लॉक के सांसदों से मिलने का भरोसा नहीं देता, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि देश के साथ जो किया गया है, वह “देशद्रोह” है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

    चुनाव आयोग ने क्या कहा?
    प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था।

    आयोग के मुताबिक, शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना और ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए 2025 में तय प्रक्रिया मौजूद है और उसी के तहत आपसी सहमति से समय तय किया जाना चाहिए।

    बाद की रिपोर्टों के मुताबिक, विपक्षी सांसदों की ओर से करीब 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल मिलने की बात सामने आई थी। चुनाव आयोग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार अपने परिसर में मिलने की बात कही, जबकि विपक्ष की ओर से अलग स्थान पर मिलने का प्रस्ताव रखा गया था।

    शाम ढली, पुलिस ने बढ़ाई कार्रवाई
    शाम तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे रहे। पुलिस प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कोशिश करती रही, लेकिन कई घंटे तक गतिरोध बना रहा। रात करीब 8 बजे दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। पहले कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया गया। इसके बाद TMC सांसद महुआ मोइत्रा और डेरेक ओ’ब्रायन समेत अन्य विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया।

    आखिर में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी को पुलिसकर्मी बस तक ले जाते नजर आए। इसके बाद दोनों को किंग्सवे कैंप ले जाया गया, जहां कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

    SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग में टकराव
    यह पूरा प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच चल रहे विवाद का हिस्सा है। INDIA ब्लॉक के नेताओं का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों से नाम हटाने और अन्य प्रक्रियाओं में गड़बड़ी हुई है। विपक्ष इसी आधार पर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

    मंगलवार का घटनाक्रम इस विवाद को लेकर दिल्ली में विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव का अब तक का बड़ा प्रदर्शन रहा। सुबह का मार्च, बैरिकेड पर राहुल गांधी का तिरंगा लहराना, आकाशवाणी भवन में अचानक धरना और करीब नौ घंटे बाद नेताओं की हिरासत ने पूरे घटनाक्रम को दिनभर सुर्खियों में बनाए रखा।

  • राहुल गांधी ने शुरू की ‘सत्याग्रह’ पहल, लोगों से अन्याय और अधिकारों से जुड़े संघर्ष की कहानी भेजने की अपील

    राहुल गांधी ने शुरू की ‘सत्याग्रह’ पहल, लोगों से अन्याय और अधिकारों से जुड़े संघर्ष की कहानी भेजने की अपील

    नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देशभर में अपने अधिकारों और अलग-अलग मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों की आवाज को एक मंच पर लाने के लिए ‘सत्याग्रह’ नाम से डिजिटल पहल शुरू की है। उन्होंने शनिवार को लोगों से अपील की कि जो भी व्यक्ति किसी अन्याय के खिलाफ लड़ रहा है, वह अपनी कहानी साझा करे। इस पहल के तहत लोगों के संघर्ष और आंदोलनों की जानकारी एक डिजिटल नक्शे पर दिखाई जाएगी, जिससे समान मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे अन्य लोगों और समूहों के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी। राहुल गांधी ने कहा कि नेता विपक्ष के तौर पर वह संसद से लेकर सड़क तक जरूरत पड़ने पर लोगों के साथ खड़े रहेंगे।

    राहुल गांधी ने कहा कि देशभर में लोग अपने हक के लिए लड़ रहे हैं और अक्सर उनकी लड़ाई अकेले रह जाती है। उन्होंने जेन-जी, छात्रों, किसानों, आदिवासियों, दलितों और महिलाओं के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर संघर्ष की अपनी कहानी है, लेकिन अकेले उठने वाली आवाज अक्सर दब जाती है। उनके अनुसार, ‘सत्याग्रह’ का उद्देश्य इन आवाजों को एक साथ लाना है। उन्होंने महात्मा गांधी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य एक बड़ा हथियार है और सत्य के साथ एकजुट होकर खड़ा होना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से अपनी कहानी साझा करने को कहा और बताया कि इसमें करीब दो मिनट लगेंगे।

    इस पहल का नाम महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जुड़ा है। गांधी हेरिटेज पोर्टल महात्मा गांधी के जीवन, लेखन, सत्याग्रह और अन्य गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों का डिजिटल संग्रह उपलब्ध कराता है। उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में गांधीजी के लेखन और पत्राचार का व्यापक संग्रह दर्ज है। हालांकि, दी गई खबर में गांधीजी को भेजे गए 8,500 से अधिक पत्रों का जो विशेष आंकड़ा बताया गया है, उसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से स्पष्ट रूप से नहीं हो सकी। आधिकारिक अभिलेखों में गांधीजी से संबंधित पत्रों का बड़ा संग्रह दर्ज होने की जानकारी उपलब्ध है।

    राहुल गांधी की इस पहल के साथ देश में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और अन्य समूहों की ओर से प्रदर्शन किए गए हैं। 2 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। इसी बीच विपक्षी सांसदों के 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च करने की योजना भी घोषित की गई थी।

    मतदाता सूची से जुड़े विवाद के बीच फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डेटा तक राज्यों की पहुंच, पश्चिम बंगाल में अपीलों और गोवा के 97 मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर में बदलावों की समीक्षा शुरू की है और एक समिति को इसकी जांच की जिम्मेदारी दी है। राहुल गांधी की ‘सत्याग्रह’ पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब देशभर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलनों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवाद सार्वजनिक चर्चा में हैं।

  • बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को वंदे मातरम गाने की दी चुनौती, ऋतिक रोशन की हैरानी भरी प्रतिक्रिया हुई वायरल

    बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को वंदे मातरम गाने की दी चुनौती, ऋतिक रोशन की हैरानी भरी प्रतिक्रिया हुई वायरल

    नई दिल्ली। वंदे मातरम और पितृसत्ता को लेकर बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दी गई चुनौती का मामला एक बार फिर चर्चा में है। करीब एक महीने पुराने इस बयान पर बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    बांसुरी स्वराज ने पुणे में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी थी, जिसमें उन्होंने महिलाओं से पितृसत्ता के खिलाफ आवाज उठाने और इसे खत्म करने की बात कही थी। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में महिलाओं को बेटी, पत्नी या मां की भूमिका तक सीमित किए जाने की बात कही थी और ऐसी सोच के खिलाफ एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया था।

    इसी संदर्भ में बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर वह वास्तव में पितृसत्ता को खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें पूरा वंदे मातरम गाकर दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि उन्हें क्रिसमस कैरल गाने, पूरा वंदे मातरम गाने और शिव तांडव का पाठ करने में कोई परेशानी नहीं है। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी को पूरा वंदे मातरम गाने की चुनौती दी थी।

    बांसुरी स्वराज का यह बयान अगस्त में सामने आया था, लेकिन हाल ही में इसका वीडियो फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। वीडियो पर ऋतिक रोशन की प्रतिक्रिया ने इस मामले को और सुर्खियों में ला दिया। उन्होंने वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा, “Huh? Is this real. Wow.” ऋतिक की इस संक्षिप्त प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रखी।

    राहुल गांधी ने पुणे में महिलाओं को संबोधित करते हुए पितृसत्ता की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को अक्सर बेटी, पत्नी या मां जैसी भूमिकाओं तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान भी है। उन्होंने कहा था कि पितृसत्ता महिलाओं को दबाती, डराती और नियंत्रित करती है तथा इसे खत्म करने के लिए मिलकर काम करना जरूरी है।

    अपने संबोधन में राहुल गांधी ने मनुस्मृति का भी उल्लेख किया था और महिलाओं को सीमित भूमिकाओं में रखने वाली सोच की आलोचना की थी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। इसी क्रम में बांसुरी स्वराज ने वंदे मातरम के पूर्ण गायन को पितृसत्ता के खिलाफ उनके आह्वान से जोड़ते हुए चुनौती दी थी।

    ऋतिक रोशन की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने उनकी फिल्म कृष का जिक्र करते हुए उनसे अपने अंदर के कृष को बाहर लाने की बात कही। एक अन्य यूजर ने इसी पार्टी की नेता कंगना रनौत का जिक्र करते हुए प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने ऋतिक के कमेंट की तारीफ भी की और इसे मजेदार बताया।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ राहुल गांधी का महिलाओं और पितृसत्ता से जुड़ा बयान है, दूसरी तरफ बांसुरी स्वराज की ओर से वंदे मातरम को लेकर दी गई चुनौती और अब ऋतिक रोशन की प्रतिक्रिया है। पुराने वीडियो पर आई नई प्रतिक्रिया ने इस राजनीतिक बयान और उससे जुड़े सोशल मीडिया विमर्श को दोबारा सुर्खियों में ला दिया है।

  • DUSU में NSUI का खाता नहीं खुला, राहुल गांधी ने मांगा जवाब, कन्हैया-विनोद से किए सवाल

    DUSU में NSUI का खाता नहीं खुला, राहुल गांधी ने मांगा जवाब, कन्हैया-विनोद से किए सवाल


    नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के केंद्रीय पैनल में एक भी सीट नहीं जीत पाने के बाद पार्टी के भीतर समीक्षा शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के साथ बैठक कर चुनावी नतीजों, उम्मीदवारों के चयन और प्रचार रणनीति पर चर्चा की। बैठक में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे।

    राष्ट्रपति पद पर भी मुकाबला रहा करीबी

    रिपोर्टों के मुताबिक बैठक में राहुल गांधी ने खास तौर पर राष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मुकाबला करीबी होने के बावजूद अंतिम नतीजा NSUI के पक्ष में नहीं गया। उन्होंने चुनाव के दौरान अपनाई गई रणनीति और संगठन की तैयारियों को लेकर कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ से जवाब मांगा।

    DUSU के चार केंद्रीय पदों में ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद जीते, जबकि उपाध्यक्ष पद पर NSUI से अलग होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। NSUI का आधिकारिक पैनल कोई केंद्रीय सीट नहीं जीत सका।

    टिकट वितरण पर भी उठे सवाल

    बैठक में उम्मीदवारों के चयन और टिकट वितरण को लेकर भी चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, दीपांशु शौकीन को आधिकारिक टिकट नहीं देने के फैसले पर सवाल उठाया गया। शौकीन बाद में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे और उपाध्यक्ष पद जीत लिया।

    इसके अलावा कुछ अन्य उम्मीदवारों के टिकट को लेकर भी संगठन के भीतर असहमति की बात सामने आई है। रिपोर्टों में दावा किया गया कि उम्मीदवारों के चयन से जुड़े फैसलों ने NSUI के वोटों को प्रभावित किया और संगठन के आधिकारिक उम्मीदवारों के सामने बगावत की स्थिति बनी।

    वेणुगोपाल ने भी मांगी रिपोर्ट

    DUSU नतीजों के बाद कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की थी। रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी ने उनसे चुनाव परिणाम और हार के कारणों पर विस्तृत जानकारी लेने को कहा था। इसके बाद NSUI की रणनीति और संगठनात्मक तैयारियों को लेकर बैठक हुई।

    बैठक में प्रचार अभियान, उम्मीदवारों के चयन, जमीनी स्तर पर संगठन की सक्रियता और छात्रों के बीच पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से आगे की छात्र राजनीति के लिए संगठन को मजबूत करने और युवाओं से जुड़ाव बढ़ाने पर भी जोर दिए जाने की रिपोर्ट है।

    युवा मुद्दों से जुड़ाव पर भी चर्चा

    DUSU चुनाव के नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब कांग्रेस की ओर से युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय चुनाव में NSUI का प्रदर्शन पार्टी के लिए समीक्षा का विषय बना है। राहुल गांधी की बैठक में संगठन की कैंपस स्तर की गतिविधियों और छात्रों के बीच संपर्क को लेकर भी चर्चा होने की बात सामने आई है।

    फिलहाल कांग्रेस की ओर से बैठक में राहुल गांधी द्वारा कही गई हर बात का आधिकारिक ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए उनके कथित सवालों और फटकार से जुड़ी जानकारियां मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से सामने आई हैं। चुनाव परिणाम के बाद पार्टी के भीतर अब टिकट वितरण से लेकर चुनावी रणनीति तक की समीक्षा का दौर जारी है।

  • छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर सियासी वार कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को बताया बीजेपी का अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक

    छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर सियासी वार कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को बताया बीजेपी का अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक


    नई दिल्ली । कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी बयानबाजी जारी है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्हें बीजेपी का अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक बताया। विजयवर्गीय ने दावा किया कि राहुल गांधी जहां भी जाते हैं वहां बीजेपी को फायदा होता है। उनकी यह टिप्पणी सुसनेर में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान सामने आई।

    राहुल गांधी ने 19 सितंबर को इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में युवाओं से संवाद किया था। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था परीक्षा प्रणाली रोजगार और छात्रों से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे। राहुल गांधी ने सरकार पर भी सवाल खड़े किए थे। कार्यक्रम में छात्रों की समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था।

    कार्यक्रम के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई। इससे पहले भी बीजेपी नेताओं ने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर सवाल उठाए थे जबकि कांग्रेस ने कार्यक्रम को छात्रों के मुद्दों से जोड़कर अपना पक्ष रखा था। इस पूरे विवाद के बीच कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के कार्यक्रम पर कटाक्ष किया।

    सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष उपचुनाव के लिए बीजेपी प्रत्याशी के समर्थन में रोड शो और सभा के दौरान विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के कार्यक्रम में मनोरंजन और रैपर का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तंज कसा। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी को लेकर कहा कि बीजेपी के लिए वह अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक जैसे हैं और उनके कहीं जाने पर बीजेपी को फायदा होता है।

    विजयवर्गीय की इस टिप्पणी को कांग्रेस और बीजेपी के बीच जारी राजनीतिक वार-पलटवार की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। इंदौर का छात्रों की गूंज कार्यक्रम कांग्रेस के छात्र और युवा संवाद अभियान का हिस्सा था। कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने इसे छात्रों की समस्याओं को सामने रखने वाला मंच बताया था। वहीं बीजेपी की ओर से कार्यक्रम और उसमें उठाए गए राजनीतिक मुद्दों पर सवाल खड़े किए गए थे।

    सुसनेर की सभा में विजयवर्गीय ने स्थानीय कांग्रेस विधायक को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने विकास कार्यों और राजनीतिक समर्थन को लेकर एक उदाहरण देते हुए कांग्रेस प्रत्याशी के जीतने की स्थिति में कागजी कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस प्रत्याशी जीतकर उनके पास काम से संबंधित कागज लेकर आएगा तो वह उन्हें स्वीकार कर लेंगे लेकिन अंत में एक बॉक्स देने की बात कही। विजयवर्गीय ने इसी प्रसंग में कहा कि बॉक्स खोलने पर उसमें घंटी मिलेगी और लोगों को तय करना है कि उन्हें विकास चाहिए या घंटी बजानी है।

    इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े इस अभियान को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक ले जाने की घोषणा भी की है। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने इस अभियान के जरिए युवाओं से शिक्षा रोजगार और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद बढ़ाने की योजना बनाई है।

    इस तरह राहुल गांधी के इंदौर दौरे के बाद छात्रों से जुड़े मुद्दों के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कैलाश विजयवर्गीय की अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक वाली टिप्पणी इसी सियासी टकराव का हिस्सा है और आने वाले दिनों में इस पर कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।

  • SIR विवाद में राहुल गांधी पर राजीव चंद्रशेखर का पलटवार बोले पीएम से माफी मांगें तो फ्रॉड कहना छोड़ दूंगा

    SIR विवाद में राहुल गांधी पर राजीव चंद्रशेखर का पलटवार बोले पीएम से माफी मांगें तो फ्रॉड कहना छोड़ दूंगा


    नई दिल्ली । केरल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी टकराव और तेज हो गया है। केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने राहुल गांधी को लेकर अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री वी डी सतीशन पर पलटवार किया है। चंद्रशेखर ने कहा कि अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांगते हैं तो वह उन्हें फ्रॉड कहना छोड़ देंगे। यह बयान सतीशन की उस आलोचना के बाद आया जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणियों को राजनीतिक आलोचना मानने से इनकार किया था।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब राजीव चंद्रशेखर ने SIR और चुनावी राजनीति के मुद्दे पर राहुल गांधी की आलोचना की। चंद्रशेखर ने कांग्रेस की राजनीति पर कई आरोप लगाए और कहा कि चुनावों में पार्टी को मिली हार के लिए उसे अपनी राजनीतिक रणनीति पर विचार करना चाहिए। उन्होंने SIR का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूची से फर्जी या अवैध नामों को हटाना जरूरी है। उनके मुताबिक चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    इसके बाद मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर चंद्रशेखर की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। सतीशन ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल राजनीतिक आलोचना नहीं माना जा सकता। उन्होंने SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों पर चंद्रशेखर के रुख की भी आलोचना की।

    सतीशन के बयान के जवाब में चंद्रशेखर ने कहा कि वह आमतौर पर राजनीतिक विरोधियों पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करते लेकिन राहुल गांधी के मामले में उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीति पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों की निंदा होनी चाहिए। ये चंद्रशेखर के राजनीतिक आरोप और उनके द्वारा व्यक्त किया गया नजरिया है जिसे स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

    चंद्रशेखर ने अपने जवाब में सतीशन के सामने एक शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री राहुल गांधी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी के लिए माफी मांगने को कहते हैं और चुनाव आयोग के संबंध में लगाए गए आरोपों पर भी माफी मांगने को कहते हैं तो वह राहुल गांधी को फ्रॉड कहना बंद कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी यह मांग स्वीकार नहीं की जाती और विपक्ष अपनी राजनीतिक रणनीति में झूठ भ्रष्टाचार तथा तुष्टीकरण जैसे मुद्दों को शामिल रखता है तो वह अपनी टिप्पणी दोहराते रहेंगे।

    इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देशभर में चल रही राजनीतिक बहस भी है। बीजेपी जहां इसे मतदाता सूची को व्यवस्थित और साफ करने की प्रक्रिया के तौर पर पेश कर रही है वहीं विपक्षी दल इसके तौर तरीकों और संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। केरल में भी यह मुद्दा बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव का विषय बना हुआ है। चंद्रशेखर पहले भी SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी की आलोचना कर चुके हैं।

    इस बयानबाजी से साफ है कि केरल की राजनीति में SIR को लेकर विवाद केवल चुनाव आयोग की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब बीजेपी और कांग्रेस के शीर्ष राज्य नेताओं के बीच तीखी राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने अपने रुख पर कायम हैं और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और बढ़ सकती है।

  • MP में फिर OBC आरक्षण की गूंज… राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर की ये मांग

    MP में फिर OBC आरक्षण की गूंज… राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर की ये मांग


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एक बार फिर ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) का मुद्दा गर्मा गया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) को चिट्ठी लिखकर राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और इसके तहत रुकी हुई नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की है।

    22 सितंबर को लिखी चिट्ठी राहुल गांधी ने कहा कि शनिवार को इंदौर में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के कई छात्रों ने शिक्षा, रोजगार और अपने भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे उनके सामने रखे थे. इनमें OBC आरक्षण से जुड़ी नियुक्तियों के रुके होने का मुद्दा प्रमुख था।

    राहुल गांधी ने चिट्ठी में कहा कि छात्रों ने बताया कि नियुक्तियों में लंबे समय से हो रही देरी के कारण वे अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं. इन युवाओं ने परीक्षाएं पास कर ली हैं और चयन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन ’87:13′ फॉर्मूले के कारण OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों को होल्ड पर रखा गया है. इसके चलते चयनित अभ्यर्थी 2022 से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का सर्वसम्मति से समर्थन किया था, इसके बावजूद यह मामला अब तक नहीं सुलझ पाया है. उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में हो रही देरी के कारण अभ्यर्थियों को OBC आरक्षण लागू कराने और नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग को लेकर बार-बार सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

    राहुल गांधी ने अपना पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया. उन्होंने लिखा कि इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान OBC वर्ग के छात्रों ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के तहत 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां वर्षों से रुकी हुई हैं. राहुल ने कहा कि छात्र बेहद परेशान हैं और चार साल से अधिक समय से इंतजार कर रहे इन युवाओं का कीमती समय अब और बर्बाद नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से छात्रों की मांग सुनने की अपील करते हुए कहा कि सभी दलों की सर्वसम्मति से पारित 27 प्रतिशत OBC आरक्षण को लागू किया जाए और सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी जाएं।