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  • संत वेश में प्रदर्शन पर घिरे पप्पू यादव, वाराणसी में तहरीर, राहुल, डिंपल समेत अन्य नेताओं पर FIR की मांग

    संत वेश में प्रदर्शन पर घिरे पप्पू यादव, वाराणसी में तहरीर, राहुल, डिंपल समेत अन्य नेताओं पर FIR की मांग

    वाराणसी। संसद परिसर में संत वेशभूषा पहनकर किए गए राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में शनिवार को काशी के संत समाज ने सांसद पप्पू यादव समेत प्रदर्शन में शामिल अन्य नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कोतवाली थाने में तहरीर सौंपी।

    पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास के नेतृत्व में संतों के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि संसद में संतों का वेश धारण कर राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक प्रदर्शन किया गया, जिससे संत समाज की गरिमा और करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।

    महंत बालक दास ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने के कई तरीके हैं, लेकिन संतों की वेशभूषा और धार्मिक परंपराओं का राजनीतिक मंच पर उपयोग करना अनुचित और निंदनीय है। उनके अनुसार, संत समाज सदैव राष्ट्र और समाज के हित में कार्य करता रहा है और संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर संत स्वरूप का राजनीतिक प्रदर्शन पूरे संत समाज की छवि को प्रभावित करता है।

    संत समाज की ओर से दी गई तहरीर में पप्पू यादव के साथ राहुल गांधी, डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद तथा प्रदर्शन में शामिल अन्य नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

    तहरीर सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत और समर्थक भी मौजूद रहे। मामले पर डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल ने बताया कि संत समाज के प्रतिनिधिमंडल से शिकायत प्राप्त हुई है और उसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

  • पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा

    पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा


    नई दिल्ली । लोकसभा ने बुधवार को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों पर रोक लगाने से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026 को विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया। हालांकि सदन में सबसे ज्यादा चर्चा बिल से अधिक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर रही। करीब पचास मिनट के भाषण के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए जिससे सदन का माहौल बेहद गर्म हो गया।

    राहुल गांधी ने परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र मेहनत के बावजूद परीक्षा प्रक्रिया की खामियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल परीक्षा व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में सरकार असफल रही है और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    भाषण के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिन पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संसदीय मर्यादा का पालन करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से अपने शब्द वापस लेने और सदन से माफी मांगने की मांग की। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कई बार हस्तक्षेप करते हुए असंसदीय शब्दों के प्रयोग पर आपत्ति जताई और उन्हें कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए।

    राहुल गांधी ने अपने संबोधन में यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गृह मंत्री की ओर से पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इस दावे का सरकार ने कड़ा विरोध किया। किरेन रिजिजू ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि गोली चलाने जैसे आदेश किसी मंत्री द्वारा नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सक्षम अधिकारी देते हैं। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोप बिना किसी प्रमाण के लगाना उचित नहीं है और नेता प्रतिपक्ष को सदन से माफी मांगनी चाहिए।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अध्यक्ष से अनुरोध किया कि विवादित शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए। हंगामे के बीच कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने नारेबाजी की जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई। बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

    राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि देश का भविष्य सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है और प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को केवल औपचारिक कदम बताते हुए कहा कि इससे समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।

    उधर सरकार ने संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी बल्कि उसे प्रभावी तरीके से लागू करना भी उतना ही जरूरी है।

  • कंगना ने राहुल गांधी पर किया तीखा हमला, कहा -‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसा काम…

    कंगना ने राहुल गांधी पर किया तीखा हमला, कहा -‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसा काम…


    नई दिल्ली।
    बीजेपी सांसद कंगना रनौत (BJP MP Kangana Ranaut) सोमवार को मॉनसून सत्र (Monsoon Session) में शामिल होने के लिए लोकसभा (Lok Sabha) पहुंचीं। इस दौरान कंगना ने यूपीए सरकार के दौरान एजुकेशन पर किए गए खर्च और पेपर लीक से जुड़ा परीक्षा संशोधन बिल पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण पेश किया है।

    कंगना ने कहा ‘हमारे प्रधानमंत्री जी ने ये पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ा उदाहरण पेश किया है। ऐसे नेता जो इतने समर्पित हैं हर छोटे से लेकर बड़े मुद्दे के लिए वे जिस तरह से देशवासियों के लिए समर्पित हैं ये पूरे विश्व के लिए प्रेरणा है। आपने देखा उन्होंने जिस तरह से कमेटी गठित की है और हाई पावर पैक्ट बनाया है जो कि परीक्षाओं के लिए काम करेगा और इसको भ्रष्टाचार मुक्त बनाएगा। चाहे परीक्षा का यह संशोधन बिल अचानक आया हो लेकिन ये प्रधानंत्री की प्रतिबद्धता है।’

    उन्होंने आगे कहा ‘राहुल गांधी जी देख रहे हैं कि यूपीए के समय में क्या होता था शिक्षा का एकदम नाम मात्र बजट होता था। तो यह कहते हैं न खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे तो ये खंभा नोचने जैसा काम है।’


    परीक्षा से जुड़ा कड़े कानून वाला विधेयक पेश

    आपको बता दें कि पेपर लीक पर कड़े प्रावधान वाला परीक्षा संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया गया है। संशोधित विधेयक का नाम ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा कार्मिक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे पेश किया है। विधेयक में दोषियों के लिए 10 साल तक के जेल, 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने, संपत्ति जब्ती जैसे कड़े प्रावधान हैं।


    टास्क फोर्स का भी गठन

    प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए दिग्गज टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई पावर टास्क फोर्स के गठन का एलान किया है। पीएम ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो में कहा ‘विद्यार्थियों के भविष्य के लिए भारत सरकार लगातार कई कदम उठा रही है. जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, वो जेलों में सड़ रहे हैं। हम फास्ट ट्रैक कोर्ट बना चुके हैं। हम नया कानून बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।’


    पीएम ने खुद दी जानकारी

    पीएम ने आगे कहा ‘हमारी परीक्षा पद्धति भरोसेमंद, पारदर्शी हो और सबसे ज्यादा टेक्नोलॉजी का इ्स्तेमाल हो, इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, हमने विश्व प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई-पावर टास्क फोर्स गठित करने का फैसला लिया है। ये टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर ध्यान देगी और इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता जल्द से जल्द तय की जाएगी।’

  • मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया

    मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को देशभर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उनकी शानदार उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मीराबाई की मेहनत अनुशासन और संघर्ष करोड़ों भारतीयों विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मीराबाई चानू की विजयी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि मीराबाई ने अपनी अटूट मेहनत दृढ़ संकल्प और अनुशासन के दम पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा शान से लहराया है। राहुल ने लिखा कि हर भारतीय को उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व है और उनकी उपलब्धि देश के लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मीराबाई चानू को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि को भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम को भी रजत पदक जीतने पर शुभकामनाएं दीं। खड़गे ने कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का सम्मान बढ़ाया है और उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने का ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। इससे पहले वह 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वहीं 2014 के ग्लासगो खेलों में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई का यह स्वर्ण भारत का पहला गोल्ड मेडल भी बना। दूसरी ओर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता और भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    मीराबाई चानू पिछले कई वर्षों से भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रही हैं। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरे स्वर्ण पदक के साथ अपने शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है। उनकी इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण के दम पर भारतीय खिलाड़ी विश्व मंच पर लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर सकते हैं।

  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में लगे 'थैंक्यू राहुल गांधी' के पोस्टर

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में लगे 'थैंक्यू राहुल गांधी' के पोस्टर


    नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली की सियासत में पोस्टर वार शुरू हो गई है। दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस (DPYC) ने राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में ‘थैंक्यू राहुल गांधी’ लिखे होर्डिंग्स लगाकर इसे छात्रों के आंदोलन और कांग्रेस के अभियान की सफलता बताया।

    दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने कहा कि जिस इस्तीफे की संभावना तक नहीं मानी जा रही थी, वह लगातार आंदोलन कर रहे छात्रों और राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए गए अभियान का परिणाम है। उनके मुताबिक, यह घटनाक्रम छात्रों की एकजुटता और संघर्ष की ताकत को दर्शाता है।

    युवा कांग्रेस का कहना है कि राजधानी में लगाए गए ये पोस्टर राहुल गांधी के प्रति युवाओं के समर्थन और आभार को व्यक्त करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं। संगठन का दावा है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस लगातार छात्रों के साथ खड़ी रही है।

    हालांकि, अक्षय लाकड़ा ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी युवा कांग्रेस का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अब भी बाकी हैं।

    युवा कांग्रेस की पहली मांग प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की है। वहीं दूसरी मांग यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं देश के छात्रों से माफी मांगें। संगठन ने कहा कि इन मांगों के पूरा होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

  • राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, घायल छात्र को दिखाकर उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

    राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, घायल छात्र को दिखाकर उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल


    नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को अपने आवास 10 जनपथ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीट पेपर लीक मामले और छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक छात्र को मीडिया के सामने पेश किया और उसकी चोटें दिखाते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

    राहुल गांधी ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की स्थिति के लिए मंत्री जिम्मेदार हैं और इसी कारण हजारों छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं।

    घायल छात्र की चोटें दिखाईं
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने छात्र के हाथ, पीठ और छाती पर लगी चोटों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था, तभी पैलेट गन से घायल हो गया।

    20 जुलाई की झड़प का मामला
    गौरतलब है कि 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा निकाले गए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस घटना में 100 से अधिक छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

    छात्र की आंख की रोशनी पर संकट
    राहुल गांधी के साथ मौजूद छात्र की पहचान साहिल लोचाब (19) के रूप में हुई, जो दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ का निवासी है। परिवार के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पैलेट लगने से उसकी दाहिनी आंख गंभीर रूप से घायल हो गई। उसका उपचार एम्स के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में हुआ, जहां सर्जरी भी की गई। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया है कि घायल आंख की रोशनी लौटने की संभावना करीब एक प्रतिशत ही है, क्योंकि आंख की पुतली को गंभीर क्षति पहुंची है।

    पुलिस अधिकारी बनने का था सपना
    साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) का छात्र है। उसकी मां ज्योति ने बताया कि वह पहले भी CJP के प्रदर्शनों में शामिल हो चुका था। 20 जुलाई को भी वह यह कहकर घर से निकला था कि यह उसकी पढ़ाई और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने बताया कि साहिल का सपना पुलिस अधिकारी बनने का था।

  • जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात

    जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात


    नई दिल्ली । जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन ने देश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। लंबे समय तक आंदोलन को सीमित मानकर चल रही केंद्र सरकार ने अब अपना रुख बदलते हुए सक्रिय पहल शुरू कर दी है। राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और सरकार ने न केवल अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से संपर्क किया बल्कि आंदोलन में घायल छात्रों से मिलने के लिए केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल भी भेजा। इसके साथ ही संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की विपक्ष की मांग को भी सरकार ने स्वीकार कर लिया।

    नीट पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन शुरुआती दिनों में सीमित दायरे में दिखाई दे रहा था। जंतर मंतर पर कम संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी को देखते हुए माना जा रहा था कि यह आंदोलन ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा। लेकिन जैसे जैसे छात्रों का समर्थन बढ़ा और संसद मार्च के बाद आंदोलन ने नया स्वरूप लिया वैसे वैसे राजनीतिक माहौल भी बदलने लगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के धरने ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी। इसके बाद सरकार ने तेजी से अपनी रणनीति में बदलाव किया। कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मिलने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह पहुंचे और उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। इससे पहले आंदोलन के प्रतिनिधियों को सरकार से मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था लेकिन बाद में परिस्थितियां तेजी से बदल गईं।

    सरकार ने संसद में इस पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए भी सहमति जताई। हालांकि विपक्ष ने इस पर नई शर्त रखते हुए कहा कि चर्चा तभी सार्थक होगी जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

    इस बीच सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा करते हुए बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने लिखा कि सभी ने उन्हें याद दिलाया है कि देश और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अभी बाकी है। वांगचुक ने कहा कि वह भी जीना चाहते हैं और अपने छात्रों तथा शिक्षा से जुड़े कार्यों में जल्द लौटना चाहते हैं लेकिन आंदोलन के उद्देश्यों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर युवाओं में पहले से ही असंतोष था। यही कारण है कि आंदोलन धीरे धीरे व्यापक समर्थन हासिल करता गया और सरकार को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संसद में होने वाली चर्चा और सरकार के अगले कदम इस पूरे विवाद का क्या समाधान निकालते हैं।

  • धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, छात्रों पर कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री माफी मांगें : राहुल गांधी

    धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, छात्रों पर कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री माफी मांगें : राहुल गांधी


    नई दिल्ली।
    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने, पेपर लीक मामलों पर जवाबदेही तय न करने और छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 152 से अधिक प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिससे 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों पर बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से छात्रों से माफी की मांग की।

    राहुल गांधी ने यहां कांग्रेस नए मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में 20 जुलाई को छात्रों के ‘संसद चलो’ मार्च और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और प्रस्तुति दिखाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस और सुरक्षाबलों ने बर्बर कार्रवाई की। छात्रों को पीटा गया, घसीटा गया और उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपनाया गया।

    राहुल गांधी ने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और सरकार छात्रों की समस्याओं के प्रति बिल्कुल संवेदनशील नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक, परीक्षाओं में अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी ने करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया है। इसके बावजूद किसी भी बड़े मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली।

    राहुल गांधी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में 152 से अधिक प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। इन घटनाओं का सीधा असर 7.5 करोड़ छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में भी अब तक किसी को प्रभावी सजा नहीं मिली और सरकार लगातार जवाबदेही से बच रही है।

    उन्होंने कहा कि देश के परिवार अपने बच्चों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं पर भारी आर्थिक बोझ उठा रहे हैं। राहुल गांधी के अनुसार, भारत सरकार का वार्षिक शिक्षा बजट लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये है, जबकि भारतीय परिवार केवल नीट परीक्षा की तैयारी और उससे जुड़े खर्चों पर लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में विफल रही है।

    राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया गया है। शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं ने युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों को न्याय दिलाने के लिए धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना चाहिए।

    राहुल गांधी ने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों पर बल प्रयोग और कथित बर्बरता के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

    राहुल गांधी ने 20 और 21 जुलाई को छात्रों के समर्थन में हुए विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र केवल निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। सरकार उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च के दौरान जब पुलिस उन्हें हटाने आई तो उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। उन्हें घसीटा गया, जिससे उनके मुंह से खून निकला और उन्हें चोटें आईं। व्यक्तिगत चोट का मुद्दा महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन छात्रों के भविष्य का सवाल सबसे बड़ा मुद्दा है।

    राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी छात्रों के मुद्दों को देशभर में उठाती रहेगी और पेपर लीक, भर्ती घोटालों, शिक्षा की बढ़ती लागत तथा युवाओं की बेरोजगारी जैसे विषयों पर सरकार को जवाबदेह बनाने का अभियान जारी रखेगी।

  • NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग

    NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने NEET परीक्षा विवाद पेपर लीक और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के जरिए अपने आरोपों और मांगों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है लेकिन सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे नजरअंदाज कर रही है। राहुल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ धक्का मुक्की की और उन्हें घसीटा गया जिससे उनके मुंह से खून निकल आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनके कान में सरकार बदलने की बात कही।

    राहुल गांधी ने कहा कि NEET पेपर लीक का असर केवल परीक्षा देने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है बल्कि लगभग साढ़े सात करोड़ छात्र और उनके परिवार इससे प्रभावित हुए हैं। उनका आरोप था कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं लेकिन किसी भी बड़े मामले में दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है और मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े वीडियो भी दिखाए और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने भविष्य को लेकर आवाज उठा रहे थे तब उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है न कि उन्हें दबाना।

    राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार NEET परीक्षा की तैयारी पर लगभग उतनी ही राशि खर्च करते हैं जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर खर्च करती है। उनके अनुसार लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक आर्थिक और मानसिक संघर्ष करते हैं लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार ने उसे कमजोर किया है।

    इस दौरान राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। दूसरी मांग छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। तीसरी मांग प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो उसे जवाबदेही तय करनी होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष छात्रों की हर लोकतांत्रिक मांग के साथ खड़ा है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और यदि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा खत्म हो गया तो देश की प्रतिभा और विकास दोनों प्रभावित होंगे। इसी कारण विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सरकार से जवाब मांगता रहेगा।

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    Rahul Gandhi, NEET Paper Leak, Dharmendra Pradhan, Student Protest, Indian Politics

  • छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज


    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को राजनीतिक माहौल बेहद गरम रहा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी सहित कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में लिया। कुछ घंटों बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और संसद में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग दोहराई।

    रिहाई के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सुबह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छात्रों के साथ हुई घटना पर संसद में चर्चा कराने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए सरकार की सहमति आवश्यक होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर बहस कराने में रुचि नहीं रखती इसलिए विपक्ष ने लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

    राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई तथा छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष चाहता है कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान निकल सके।

    दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिहाई के बाद कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए संसद में कानून लाने की आवश्यकता बताई।

    वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी छात्रों का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों के हित में लगातार काम कर रही है और केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

    भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए राहुल गांधी के आचरण की आलोचना की और कहा कि विरोध प्रदर्शन की भी एक मर्यादा होती है। भाजपा का कहना है कि संसद के भीतर सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है लेकिन अराजकता फैलाने की राजनीति उचित नहीं है।

    दिनभर चले इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी और अन्य हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया। इसके बावजूद छात्रों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष लगातार संसद में चर्चा और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है जबकि सरकार अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।