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  • NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग

    NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने NEET परीक्षा विवाद पेपर लीक और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के जरिए अपने आरोपों और मांगों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है लेकिन सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे नजरअंदाज कर रही है। राहुल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ धक्का मुक्की की और उन्हें घसीटा गया जिससे उनके मुंह से खून निकल आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनके कान में सरकार बदलने की बात कही।

    राहुल गांधी ने कहा कि NEET पेपर लीक का असर केवल परीक्षा देने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है बल्कि लगभग साढ़े सात करोड़ छात्र और उनके परिवार इससे प्रभावित हुए हैं। उनका आरोप था कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं लेकिन किसी भी बड़े मामले में दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है और मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े वीडियो भी दिखाए और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने भविष्य को लेकर आवाज उठा रहे थे तब उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है न कि उन्हें दबाना।

    राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार NEET परीक्षा की तैयारी पर लगभग उतनी ही राशि खर्च करते हैं जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर खर्च करती है। उनके अनुसार लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक आर्थिक और मानसिक संघर्ष करते हैं लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार ने उसे कमजोर किया है।

    इस दौरान राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। दूसरी मांग छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। तीसरी मांग प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो उसे जवाबदेही तय करनी होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष छात्रों की हर लोकतांत्रिक मांग के साथ खड़ा है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और यदि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा खत्म हो गया तो देश की प्रतिभा और विकास दोनों प्रभावित होंगे। इसी कारण विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सरकार से जवाब मांगता रहेगा।

    Tags (English)

    Rahul Gandhi, NEET Paper Leak, Dharmendra Pradhan, Student Protest, Indian Politics

  • छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज


    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को राजनीतिक माहौल बेहद गरम रहा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी सहित कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में लिया। कुछ घंटों बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और संसद में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग दोहराई।

    रिहाई के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सुबह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छात्रों के साथ हुई घटना पर संसद में चर्चा कराने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए सरकार की सहमति आवश्यक होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर बहस कराने में रुचि नहीं रखती इसलिए विपक्ष ने लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

    राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई तथा छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष चाहता है कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान निकल सके।

    दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिहाई के बाद कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए संसद में कानून लाने की आवश्यकता बताई।

    वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी छात्रों का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों के हित में लगातार काम कर रही है और केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

    भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए राहुल गांधी के आचरण की आलोचना की और कहा कि विरोध प्रदर्शन की भी एक मर्यादा होती है। भाजपा का कहना है कि संसद के भीतर सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है लेकिन अराजकता फैलाने की राजनीति उचित नहीं है।

    दिनभर चले इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी और अन्य हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया। इसके बावजूद छात्रों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष लगातार संसद में चर्चा और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है जबकि सरकार अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।

  • NEET मुद्दे पर देशभर में तेज हुआ आंदोलन, शहर-शहर सड़कों पर उतरी कांग्रेस, जंतर-मंतर पर CJP का धरना जारी

    NEET मुद्दे पर देशभर में तेज हुआ आंदोलन, शहर-शहर सड़कों पर उतरी कांग्रेस, जंतर-मंतर पर CJP का धरना जारी


    नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था और NEET परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब राष्ट्रीय स्तर पर फैलता नजर आ रहा है। जंतर-मंतर से शुरू हुए आंदोलन में अब छात्रों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के साथ कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल भी शामिल हो गए हैं। संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और राहुल गांधी की हिरासत के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है।

    जंतर-मंतर से शुरू होकर कई राज्यों तक पहुंचा आंदोलन
    दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ प्रदर्शन अब कई राज्यों में फैल चुका है। प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज की स्थिति बनी तथा कई लोगों को हिरासत में लिया गया। सोशल मीडिया पर घायल छात्रों के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद इस मुद्दे पर देशभर में चर्चा तेज हो गई।

    राहुल गांधी की हिरासत के बाद बढ़ा सियासी तापमान
    मंगलवार शाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद कांग्रेस ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। वहीं, सरकार का कहना है कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।

    संसद में भी गूंजा मामला
    संसद के मानसून सत्र में भी NEET और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने परीक्षा प्रणाली और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है और प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना नियमों के विरुद्ध है।

    बारिश के बीच भी जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी
    बुधवार सुबह दिल्ली में बारिश के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या पहले से अधिक दिखाई दी। आयोजकों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    अहमदाबाद सहित कई शहरों में प्रदर्शन
    दिल्ली के अलावा अहमदाबाद में करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। वहीं हैदराबाद, मुंबई, प्रयागराज सहित कई शहरों में भी प्रदर्शन आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया।

    प्रीति जिंटा ने दी प्रतिक्रिया
    बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने कहा कि छात्रों का समर्थन करना और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उचित है, लेकिन यह भी जरूरी है कि शांतिपूर्ण आंदोलन का दुरुपयोग देशविरोधी तत्व न कर सकें। उन्होंने सोशल मीडिया पर बढ़ती नफरत और विभाजनकारी माहौल पर भी चिंता जताई।

    राज्यसभा में चर्चा की मांग
    आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सदन का कामकाज स्थगित कर NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की कथित विफलता, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चर्चा कराने की मांग की है।

    आंदोलन जारी रखने का ऐलान
    जंतर-मंतर पर धरना दे रहे आयोजकों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं कांग्रेस ने भी राहुल गांधी की हिरासत के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज करने के संकेत दिए हैं।

  • दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर मप्र में प्रदर्शन, विधानसभा में धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक

    दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर मप्र में प्रदर्शन, विधानसभा में धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक


    भोपाल।
    दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में मंगलवार को मध्य प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। प्रदेशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच विधानसभा में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर कांग्रेस विधायक देर रात तक धरने पर बैठे हुए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी उनके साथ धरने में शामिल हैं।

    मंगलवार को जीतू पटवारी लोकभवन के सामने धरने पर बैठे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वहां से हटाकर वाहन में बैठा लिया। कुछ देर बाद वे सीधे विधानसभा पहुंचे और धरना दे रहे विधायकों का समर्थन किया।

    दरअसल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसी के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी प्रदेश में प्रदर्शन किया।

    विधानसभा में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना जारी

    मंगलवार को शाम तक विधानसभा की कार्यवाही के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। कुछ विधायक विरोध जताने के लिए फर्श पर भी लेट गए। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने धरना खत्म कराने की कोशिश की लेकिन विधायक नहीं माने। बाद में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी बातचीत के लिए पहुंचे। इस दौरान उनकी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से तीखी बहस हुई और कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की।

    भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, कटनी, खंडवा, हरदा, शाजापुर, टीकमगढ़, रतलाम, डबरा और खरगोन समेत कई जिलों में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन, रैली और नारेबाजी की। कुछ जगह चक्काजाम और पुलिस से धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। देर रात तक अधिकांश जिलों में प्रदर्शन समाप्त हो गए, जबकि विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का धरना जारी है।

  • मेलबर्न मीट्स मोदी कार्यक्रम में नहीं थी भाड़े की भीड़…. आयोजक बोले… माफी मांगे राहुल गांधी और खरगे

    मेलबर्न मीट्स मोदी कार्यक्रम में नहीं थी भाड़े की भीड़…. आयोजक बोले… माफी मांगे राहुल गांधी और खरगे


    नई दिल्ली।
    ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न (Melbourne, Australia) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के स्वागत के लिए आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ (Melbourne Meets Modi) कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) को एक खुला खत लिखा है. इस खत में उन्होंने कांग्रेस नेताओं की तरफ से लगाए गए उन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है, जिसमें कार्यक्रम में शामिल लोगों को ‘पेड क्राउड’ यानी पैसे देकर जुटाई गई भीड़ बताया गया था. आयोजकों ने दोनों नेताओं से यह आरोप वापस लेने के साथ ही सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

    यह खुला खत उन कम्युनिटी वॉलंटियर्स की तरफ से जारी किया गया है, जिन्होंने 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में हुए कार्यक्रम के लिए सिडनी से मेलबर्न तक ‘मोदी एयरवेज’ नाम की चार्टर्ड फ्लाइट का इंतजाम किया था. आयोजकों का साफ कहना है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के आने-जाने और रहने का खर्च बीजेपी, भारत सरकार या ऑस्ट्रेलिया सरकार ने नहीं उठाया था. उन्होंने बताया कि सभी लोगों ने अपना खर्च खुद उठाया, जबकि कुछ लोग सामुदायिक सहयोग से इस कार्यक्रम में पहुंचे थे।

    आयोजकों में से एक, अमित कारंत ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की ऐसी टिप्पणी बेहद निराशाजनक है. उनके मुताबिक सिडनी, एडिलेड, पर्थ और ब्रिस्बेन समेत ऑस्ट्रेलिया के अलग-अलग शहरों से लोग अपनी मर्जी से मेलबर्न पहुंचे थे. किसी भी सरकारी एजेंसी या राजनीतिक दल ने उनके आने-जाने पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया. यह पूरी व्यवस्था स्थानीय वॉलंटियर्स ने आपस में मिलकर संभाली थी।

    आयोजकों का कहना है कि कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने कार्यक्रम को ‘प्रायोजित’ बताकर वहां पहुंचे हजारों भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की ईमानदारी और उनकी स्वतंत्र सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस चार्टर्ड फ्लाइट से सफर करने वालों में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, वहां के पक्के निवासी, कामकाजी पेशेवर, कारोबारी, छात्र और बुजुर्ग शामिल थे.

    खत में लिखा गया है कि इन लोगों को भाड़े की राजनीतिक भीड़ कहना सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि यह उन हजारों प्रवासियों की गरिमा का अपमान है. ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला भारतीय समुदाय किसी एक राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा है. वहां कांग्रेस को पसंद करने वाले लोग भी हैं, बीजेपी को चाहने वाले भी और ऐसे भी कई लोग हैं जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।


    महीनों की कड़ी मेहनत पर कांग्रेस ने फेरा पानी

    आयोजकों ने बताया कि इस चार्टर्ड फ्लाइट का इंतजाम करने में महीनों की प्लानिंग लगी थी, जिसके लिए यात्रियों से तालमेल बिठाने से लेकर कागजी कार्रवाई तक पर दिन-रात काम किया गया. कई वॉलंटियर्स ने अपने बिजनेस समेत परिवारों को छोड़कर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में पूरा योगदान दिया. इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के सामने तीन बड़ी मांगें रखी हैं. पहली, ये कि सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाए कि इस फ्लाइट के लिए बीजेपी या भारत सरकार ने कोई फंडिंग नहीं की थी. दूसरी, ‘पेड क्राउड’ वाले आरोप वापस लिए जाएं. वहीं, तीसरी मांग यह है कि सभी वॉलंटियर्स, यात्रियों सहित पूरे भारतीय समुदाय से सार्वजनिक माफी मांगी जाए।


    मार्वल स्टेडियम में जुटे थे 30 हजार लोग

    मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में 9 जुलाई को आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए थे. इस दौरान पीएम मोदी के साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन भी मंच पर मौजूद थीं. आयोजकों ने साफ कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन भारत की घरेलू राजनीति के चक्कर में विदेश में रह रहे भारतीय समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल राहुल गांधी के पोस्टर पर विवाद दिग्विजय सिंह का वीडियो वायरल मंत्री का ऑटो चलाना बना चर्चा का विषय

    मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल राहुल गांधी के पोस्टर पर विवाद दिग्विजय सिंह का वीडियो वायरल मंत्री का ऑटो चलाना बना चर्चा का विषय


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार को कई घटनाएं चर्चा का विषय बनी रहीं। छतरपुर में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर लगे पोस्टर में राहुल गांधी के हाथ में संविधान की उलटी प्रति दिखाई देने से पार्टी विपक्ष के निशाने पर आ गई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा जिसमें वह एक मशहूर फिल्मी डायलॉग पूरा नहीं कर सके। दूसरी ओर प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग का ऑटो चलाते हुए वीडियो भी लोगों का ध्यान खींचता रहा।

    छतरपुर में कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर प्रेस वार्ता आयोजित की थी। हालांकि कार्यक्रम के मुद्दों से ज्यादा चर्चा मंच पर लगे पोस्टर और बैनर की हुई। पोस्टर में राहुल गांधी के हाथ में संविधान की प्रति उलटी दिखाई दे रही थी। वहीं एक अन्य बैनर में उनके चेहरे पर केक लगा हुआ नजर आया। कांग्रेस नेताओं ने इसे प्रिंटिंग की तकनीकी गलती बताया लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे पर पार्टी की आलोचना की।

    इसी बीच भोपाल में मीसाबंदियों के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले पर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संविधान की सबसे अधिक अनदेखी और दुरुपयोग कांग्रेस के शासनकाल में हुआ है। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद पोस्टर विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

    उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी एक कार्यक्रम के दौरान अलग कारण से सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम की एंकर ने पहले उनसे फिल्मों के शौक के बारे में पूछा जिस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि सिनेमा का शौक किसे नहीं होता। इसके बाद उनसे मशहूर फिल्मी डायलॉग ये ढाई किलो का हाथ पूरा करने के लिए कहा गया। सवाल सुनकर दिग्विजय सिंह हंस पड़े लेकिन उन्होंने डायलॉग पूरा करने के बजाय बात को टाल दिया। इसके बाद उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जाने लगा।

    इधर प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। अपने विधानसभा क्षेत्र में मीसाबंदी रहे बुजुर्ग रामकुमार पटेल से मुलाकात करने पहुंचे सारंग ने कुछ समय के लिए ऑटो की ड्राइविंग सीट संभाली और ऑटो चलाया। उन्होंने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया जिसके बाद यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    इन घटनाओं के बीच राजनीतिक गलियारों में प्रशासनिक हलचल की भी चर्चा रही। बताया जा रहा है कि एक विभाग में नए डायरेक्टर के रूप में पदभार संभालने वाले युवा आईएएस अधिकारी ने लंबे समय से प्रभाव रखने वाले एक अधिकारी की जिम्मेदारियों और प्रभाव को सीमित करना शुरू कर दिया है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और यह चर्चा राजनीतिक तथा प्रशासनिक हलकों तक सीमित है।

    कुल मिलाकर प्रदेश की राजनीति में एक ही दिन पोस्टर विवाद नेताओं के वायरल वीडियो और प्रशासनिक चर्चाओं ने सियासी माहौल को गर्माए रखा।

  • राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पत्र, कहा- क्रॉस वोटिंग का खतरा, फिर भी हो रही बड़ी भूल

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पत्र, कहा- क्रॉस वोटिंग का खतरा, फिर भी हो रही बड़ी भूल


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा Meenakshi Natarajan को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से दो बार प्रत्याशी रह चुके Naresh Gyanchandani ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए पार्टी नेतृत्व को बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi Vadra को संबोधित करते हुए कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार के चयन में पार्टी से गंभीर चूक हुई है और इससे क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ सकता है।

    सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी
    नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी पार्टी नेतृत्व को आगाह किया था कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार का चयन बेहद सावधानी से किया जाए। उनका दावा है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के सामने क्रॉस वोटिंग की चुनौती बनी हुई है और ऐसे समय में उम्मीदवार चयन को लेकर व्यापक सहमति जरूरी थी। ज्ञानचंदानी ने लिखा कि यदि किसी ऐसे नेता को उम्मीदवार बनाया जाता, जिसकी संगठन और विधायकों पर मजबूत पकड़ हो, तो पार्टी की सीट अधिक सुरक्षित रहती।

    दिग्विजय सिंह के पक्ष में खुली पैरवी
    अपने बयान में ज्ञानचंदानी ने स्पष्ट रूप से Digvijaya Singh का नाम लेते हुए कहा कि अगर उन्हें दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जाता तो कांग्रेस की सीट पूरी तरह सुरक्षित रहती। उनके अनुसार दिग्विजय सिंह का प्रदेश के विधायकों और संगठन पर प्रभाव है, जिससे किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग की आशंका कम हो सकती थी। ज्ञानचंदानी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें लंबे समय से दिग्विजय सिंह समर्थक नेता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनका खुला विरोध कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नए संकेत दे रहा है।

    कांग्रेस के भीतर बढ़ी हलचल
    मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच असहमति की चर्चाएं पहले से चल रही थीं, लेकिन अब पहली बार किसी वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक मंच पर फैसले का विरोध किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस की स्थिति पहले ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में पार्टी के भीतर असंतोष के सार्वजनिक होने से नेतृत्व की चिंता बढ़ सकती है।

    बीजेपी ने साधा निशाना
    कांग्रेस में उभरे इस विवाद पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी Ashish Agrawal ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर तंज कसते हुए कहा कि अंतर्कलह और गुटबाजी कांग्रेस की पुरानी पहचान रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी के अपने नेता ही शीर्ष नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं और क्रॉस वोटिंग की आशंका जता रहे हैं, तो यह कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहमति का संकेत है। भाजपा ने इसे संगठनात्मक कमजोरी बताते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक हमला भी बोला।

    राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान
    मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस जहां अपने उम्मीदवार के पक्ष में एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है, वहीं पार्टी के भीतर से उठ रहे विरोध के स्वर नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस असंतोष को किस तरह संभालती है और क्या पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल हो पाती है।

  • NEET अभ्यर्थी की मौत पर सियासी और सामाजिक चिंता, परिवार से राहुल गांधी की बातचीत चर्चा में

    NEET अभ्यर्थी की मौत पर सियासी और सामाजिक चिंता, परिवार से राहुल गांधी की बातचीत चर्चा में


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मऊगंज की NEET अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कथित पेपर लीक से निराश होकर जान देने वाली छात्रा के परिवार से कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने फोन पर बात की और संवेदना व्यक्त की। बातचीत के दौरान आकांक्षा की मां भावुक हो गईं और कहा कि उनकी बेटी ही परिवार का सबसे बड़ा सहारा थी।

    “आप तो देश की रक्षा कर रहे हैं, मेरा बच्चा वापस नहीं आएगा”
    शुक्रवार को हुई इस बातचीत का वीडियो Vikrant Bhuria ने सोशल मीडिया पर साझा किया। फोन पर राहुल गांधी ने आकांक्षा की मां से कहा कि उन्होंने छात्रा की चिट्ठी पढ़ी है और उसे पढ़कर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्होंने परिवार से पूछा कि यदि उनके लायक कोई मदद हो तो वे जरूर बताएं। इस पर आकांक्षा की मां ने भावुक स्वर में कहा, “आप तो खुद देश की रक्षा कर रहे हैं। मेरा तो जो गया, वह लौटकर नहीं आएगा।”

    “उसकी कोई गलती नहीं थी, उसने सिर्फ पढ़ाई की थी”
    बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि आकांक्षा की कोई गलती नहीं थी। उसने केवल मेहनत से पढ़ाई की थी और डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उन्होंने छात्रा के परिवार द्वारा पढ़ाई के लिए लिए गए कर्ज का भी जिक्र किया। आकांक्षा की मां ने कहा कि उनकी बेटी ने वर्षों मेहनत की थी और उसे भरोसा था कि अच्छे अंक आने पर वह डॉक्टर बन जाएगी। उनका कहना था कि यदि पेपर लीक जैसी स्थिति नहीं होती तो शायद यह दुखद घटना नहीं होती। उन्होंने कहा, “हमारा तो कोई दूसरा सहारा भी नहीं है। वही हमारे परिवार की उम्मीद थी। उसके भरोसे ही हम जीवन जी रहे थे।”

    सुसाइड नोट में झलका था टूटे सपनों का दर्द
    राहुल गांधी ने बातचीत में आकांक्षा के सुसाइड नोट का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रा को यह महसूस होने लगा था कि परिवार ने उसकी पढ़ाई के लिए जो कर्ज लिया, वह सब व्यर्थ हो गया। उन्होंने कहा कि यह सोचकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितने मानसिक दबाव और दुख से गुजर रही होगी। आकांक्षा की मां ने बताया कि उनकी बेटी को विश्वास था कि पहले प्रयास में उसका चयन हो सकता था, लेकिन कथित पेपर लीक विवाद के बाद उसका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट गया था।

    पिता की बीमारी ने बढ़ाई थी परिवार की चिंता
    बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने आकांक्षा के पिता के स्वास्थ्य के बारे में भी पूछा। परिवार ने बताया कि उन्हें पहले दो बार गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो चुकी हैं और वे आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हैं। उनका एक हाथ ठीक से काम नहीं करता और वे दैनिक कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं। परिवार के अनुसार आकांक्षा घर की सबसे बड़ी संतान थी और भविष्य में परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद उसी से थी।

    आर्थिक सहायता का भी मिला आश्वासन
    बातचीत के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि यदि आगे किसी प्रकार की सहायता की जरूरत हो तो परिवार कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के माध्यम से संपर्क कर सकता है। इस दौरान परिवार के एक सदस्य ने बताया कि आर्थिक सहायता के रूप में कुछ राशि पहले ही प्राप्त हो चुकी है और अतिरिक्त मदद भी मिलने वाली है।

    आकांक्षा चतुर्वेदी का मामला NEET परीक्षा प्रणाली, छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और पेपर लीक जैसे विवादों को लेकर फिर से बहस का विषय बन गया है। छात्रा के सुसाइड नोट और परिवार की स्थिति ने इस घटना को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

  • राहुल गांधी के सामने बड़ी चुनौती, कर्नाटक और केरल कांग्रेस अध्यक्ष पद पर मंथन तेज

    राहुल गांधी के सामने बड़ी चुनौती, कर्नाटक और केरल कांग्रेस अध्यक्ष पद पर मंथन तेज

    नई दिल्ली । कांग्रेस शासित राज्यों कर्नाटक और केरल में संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चा अब केवल औपचारिकता नहीं रही, बल्कि यह सत्ता संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों का अहम राजनीतिक प्रश्न बन चुकी है। पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट अपने-अपने नेताओं के लिए समर्थन जुटाने में सक्रिय हैं, जिससे संगठनात्मक फैसले और भी जटिल होते जा रहे हैं।

    कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती लगातार बनी हुई है। अब प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी एक मजबूत संगठनात्मक चेहरे को आगे लाएगी या फिर सत्ता और संगठन के बीच सामंजस्य बनाए रखने वाला कोई समझौता फार्मूला अपनाया जाएगा। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भी इस बात को लेकर उत्सुकता है कि अगला प्रदेश अध्यक्ष किस दिशा में संगठन को आगे ले जाएगा और आने वाले चुनावों के लिए किस तरह की रणनीति तैयार की जाएगी।

    दूसरी ओर केरल में कांग्रेस की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, जहां पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर है। यहां संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी प्रदेश नेतृत्व पर सबसे अधिक है। प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर यहां भी कई नामों की चर्चा चल रही है और हर गुट अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश में है। केरल में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मतदाता आधार को पुनः संगठित करने और वामपंथी दलों से मुकाबला करने की रणनीति तैयार करना है।

    सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले को संतुलित तरीके से सुलझाने की कोशिश कर रहा है, ताकि किसी भी राज्य में असंतोष की स्थिति न बने। राहुल गांधी की भूमिका इस पूरे संगठनात्मक पुनर्गठन में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वे लगातार राज्यों में संगठन को मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं। कर्नाटक और केरल दोनों ही राज्यों में कांग्रेस के लिए आने वाला समय राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, इसलिए नेतृत्व चयन में हर कदम सावधानी से उठाया जा रहा है।

    पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि संगठन में युवा नेतृत्व को आगे लाने की जरूरत है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हो सके। हालांकि वरिष्ठ नेताओं की राय है कि अनुभव और स्थिरता भी उतनी ही जरूरी है, खासकर उन राज्यों में जहां राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी है। यही वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर अंतिम निर्णय लेना आसान नहीं हो पा रहा है।

    आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व को यह तय करना होगा कि वह संगठनात्मक मजबूती को प्राथमिकता देगा या फिर सत्ता संतुलन के समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला करेगा। यह निर्णय न केवल कर्नाटक और केरल की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाले राष्ट्रीय चुनावों में भी पार्टी की रणनीति पर इसका असर देखा जा सकता है।

  • NEET-UG पेपर लीक मामला गरमाया: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर राहुल के बयान से सियासी घमासान, BJP ने साधा निशाना

    NEET-UG पेपर लीक मामला गरमाया: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर राहुल के बयान से सियासी घमासान, BJP ने साधा निशाना

    नई दिल्ली । NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है और इस बार विवाद की जड़ सुप्रीम कोर्ट में दिए गए एक बयान के बाद सामने आया है, जिसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। राहुल गांधी के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना और तथ्यहीन बताते हुए विपक्ष पर गंभीर मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर चल रही बहस को केंद्र में ला दिया है।

    दरअसल मामला उस समय चर्चा में आया जब NEET-UG पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने यह टिप्पणी की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले की प्रगति पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं। इसी बयान को आधार बनाते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसा और कहा कि अगर प्रधानमंत्री जांच की निगरानी कर रहे हैं, तो क्या उन्होंने पेपर लीक की भी व्यक्तिगत निगरानी की थी। राहुल गांधी का यह बयान तेजी से राजनीतिक बहस का विषय बन गया और कुछ ही समय में विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के इस बयान को गंभीरता से लेते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष के नेता को जिम्मेदारी के साथ बयान देना चाहिए, खासकर तब जब मामला लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा हो। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और संवेदनशील मुद्दों पर अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का यह भी कहना है कि इस तरह की टिप्पणी न केवल राजनीतिक स्तर पर अनावश्यक तनाव पैदा करती है, बल्कि छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताओं को भी कमजोर करती है।

    केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार नेता से अपेक्षा की जाती है कि वह तथ्यों के आधार पर बात करे और समाधान की दिशा में सुझाव दे, न कि केवल सुर्खियां बटोरने के लिए बयानबाजी करे। वहीं बीजेपी प्रवक्ता अमित मालवीय ने भी राहुल गांधी के बयान को तर्क से परे बताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां उनकी गंभीर मुद्दों को समझने की क्षमता पर सवाल खड़े करती हैं।

    दूसरी ओर, बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता मुद्दों की गंभीरता को समझे बिना प्रतिक्रिया देते हैं, जिससे राजनीतिक बहस का स्तर गिरता है।

    गौरतलब है कि NEET-UG परीक्षा, जो मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है, इस वर्ष पेपर लीक के आरोपों के बाद विवादों में आ गई थी। इसके बाद परीक्षा प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे और मामला न्यायालय तक पहुंच गया, जहां फिलहाल इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

    इस पूरे विवाद ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल मामला अदालत की निगरानी में है और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है।