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  • CBI निदेशक चयन प्रक्रिया पर बड़ा विवाद: राहुल गांधी ने जताई असहमति, पारदर्शिता पर उठाए सवाल

    CBI निदेशक चयन प्रक्रिया पर बड़ा विवाद: राहुल गांधी ने जताई असहमति, पारदर्शिता पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । देश की प्रमुख जांच एजेंसी के शीर्ष पद के चयन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया पर असहमति जताते हुए इसे अपारदर्शी और असंतुलित बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में विपक्ष की भूमिका को प्रभावी रूप से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन प्रभावित होता है।

    राहुल गांधी ने अपने असहमति नोट में कहा कि चयन प्रक्रिया के दौरान उन्हें आवश्यक और महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। उनका कहना है कि उम्मीदवारों के प्रदर्शन का आकलन करने वाली विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट उन्हें समय पर नहीं दी गई, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा संभव नहीं हो पाती।

    उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी नेता की भूमिका केवल औपचारिक नहीं होती, बल्कि यह सुनिश्चित करना उसका संवैधानिक दायित्व है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो। लेकिन जब जरूरी जानकारी ही साझा नहीं की जाती, तो प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाती है।

    राहुल गांधी के अनुसार, चयन समिति की बैठकों में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज पहली बार बैठक के दौरान ही प्रस्तुत किए जाते हैं, जिससे गहन अध्ययन का अवसर नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में किसी भी उम्मीदवार के बारे में स्वतंत्र राय बनाना कठिन हो जाता है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रक्रिया में पहले से तय परिणाम की संभावना दिखाई देती है, क्योंकि जानकारी का असमान वितरण निष्पक्ष निर्णय को प्रभावित करता है। उनके अनुसार, यदि प्रक्रिया वास्तव में पारदर्शी होती, तो सभी सदस्यों को समान रूप से सभी मूल्यांकन रिपोर्ट और विवरण पहले से उपलब्ध कराए जाते।

    अपने नोट में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने पहले भी इस प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं और सुधार के सुझाव दिए थे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि बार-बार उठाए गए मुद्दों को नजरअंदाज करना चिंता का विषय है और इससे संस्थागत पारदर्शिता पर प्रश्न उठते हैं।

    यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चा हो रही है। विपक्ष का कहना है कि चयन प्रक्रियाओं में सुधार और अधिक पारदर्शिता जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की आशंका समाप्त हो सके।

    इस विवाद ने एक बार फिर चयन प्रणाली की कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और बहस के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • केरल CM चेहरा तय करने की कवायद तेज, नेताओं से बातचीत के बाद अब अंतिम निर्णय का इंतजार

    केरल CM चेहरा तय करने की कवायद तेज, नेताओं से बातचीत के बाद अब अंतिम निर्णय का इंतजार

    नई दिल्ली।  केरल विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद अब Kerala में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। 140 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, लेकिन अब असली चर्चा नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर हो रही है।
    कांग्रेस नेतृत्व इस बार सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री चुनने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi ने दिल्ली में पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ मैराथन बैठक की। इस दौरान उन्होंने जमीनी हालात और विधायकों की राय के साथ-साथ जनता की भावनाओं को भी समझने की कोशिश की।
    सूत्रों के मुताबिक, अब फैसला पूरी तरह कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के हाथ में है। खरगे के बेंगलुरु से दिल्ली लौटने के बाद उनकी सोनिया गांधी से अंतिम दौर की चर्चा होगी, जिसके बाद नए मुख्यमंत्री के नाम पर औपचारिक मुहर लगाई जाएगी। माना जा रहा है कि यह घोषणा बुधवार तक हो सकती है।
    सीएम पद की दौड़ में तीन बड़े नाम सबसे आगे हैं रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल। इन नेताओं को लेकर पार्टी के भीतर लगातार मंथन चल रहा है। राहुल गांधी ने इन नामों पर राय जानने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं से व्यक्तिगत बातचीत भी की है, ताकि एक ऐसा चेहरा चुना जा सके जो सभी गुटों को स्वीकार्य हो।
    इस प्रक्रिया में केवल विधायकों की राय ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों की भूमिका और जनता की पसंद को भी अहमियत दी जा रही है। पार्टी का कहना है कि यूडीएफ गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना भी इस फैसले का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
    चुनाव परिणामों के बाद से ही कांग्रेस हाईकमान लगातार बैठकों में व्यस्त है और हर स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। अजय माकन और मुकुल वासनिक जैसे पर्यवेक्षकों ने पहले ही विधायकों से फीडबैक ले लिया है, जिसे अंतिम निर्णय में शामिल किया जाएगा।
    अब पूरे राजनीतिक गलियारों की नजर इस बात पर टिकी है कि केरल की कमान आखिर किसे सौंपी जाएगी। कांग्रेस के लिए यह फैसला न सिर्फ सरकार गठन का हिस्सा है, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा भी तय करेगा।
  • केरल की CM कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार, वेणुगोपाल बन सकते हैं कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव

    केरल की CM कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार, वेणुगोपाल बन सकते हैं कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव


    नई दिल्ली ।
    केरल की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां चुनावी जीत के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। कांग्रेस के भीतर लंबे समय से जारी विचार-विमर्श और गुटीय संतुलन की कोशिशों के बावजूद अभी तक किसी एक नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।

    राज्य में पार्टी की जीत के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि नेतृत्व का फैसला जल्दी हो जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक अलग-अलग राय सामने आने के कारण प्रक्रिया जटिल होती चली गई। इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा K. C. Venugopal के नाम को लेकर है, जिन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत संगठनात्मक चेहरा माना जाता है।

    वेणुगोपाल को लेकर यह चर्चा तेज है कि यदि उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जाती है, तो इससे पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है जो विभिन्न गुटों के बीच संतुलन स्थापित करने की क्षमता रखते हैं और संगठन को एकजुट रख सकते हैं।

    कांग्रेस के अंदर यह भी माना जा रहा है कि केरल में नेतृत्व का फैसला केवल राज्य स्तर की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय रणनीति पर भी पड़ेगा। ऐसे में पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो स्थानीय राजनीति और केंद्रीय नेतृत्व दोनों के बीच मजबूत कड़ी बन सके।

    केरल कांग्रेस लंबे समय से आंतरिक मतभेदों और नेतृत्व को लेकर खींचतान का सामना करती रही है। विभिन्न वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने समर्थक खेमे हैं, जो इस निर्णय प्रक्रिया को और जटिल बना रहे हैं। ऐसे माहौल में पार्टी के लिए किसी एक नाम पर सहमति बनाना आसान नहीं रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि वेणुगोपाल को यह जिम्मेदारी दी जाती है, तो यह पार्टी के लिए एक रणनीतिक कदम साबित हो सकता है। इससे न केवल संगठनात्मक स्थिरता बढ़ेगी, बल्कि दिल्ली और राज्य नेतृत्व के बीच तालमेल भी मजबूत होगा।

    इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि इस फैसले का असर सहयोगी दलों और राज्य की सामाजिक संरचना पर भी पड़ेगा। केरल की राजनीति में समुदाय आधारित संतुलन का हमेशा महत्वपूर्ण स्थान रहा है, और किसी भी निर्णय में इसका ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।

    हालांकि, इस संभावित फैसले के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अन्य दावेदारों और उनके समर्थकों की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। लंबे समय से मुख्यमंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे नेता इस फैसले को आसानी से स्वीकार करेंगे या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है।

    फिलहाल पार्टी नेतृत्व लगातार विचार-विमर्श में जुटा हुआ है और अंतिम निर्णय आने वाले समय में सामने आ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या K. C. Venugopal वास्तव में केरल की कमान संभालेंगे या पार्टी किसी अन्य संतुलित विकल्प की ओर जाएगी।

  • अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    नई दिल्ली ।
    सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई एक बार फिर हुई, जिसमें अब अगली तारीख 21 मई 2026 तय कर दी गई है। यह मामला कई साल पुराने उस बयान से जुड़ा बताया जाता है, जो कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान गृहमंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए कथित टिप्पणी से संबंधित है। इसी टिप्पणी को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

    कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन फिलहाल किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सका। इसी वजह से अदालत ने अगली सुनवाई के लिए नई तारीख निर्धारित कर दी। यह मामला लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में चल रहा है और समय-समय पर इसकी सुनवाई होती रही है।

    इस केस में वादी पक्ष की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि वे कोर्ट के एक पुराने आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। वकील की ओर से यह भी कहा गया कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें राहुल गांधी की आवाज का नमूना जांच के लिए देने की बात शामिल थी। इस फैसले के बाद भी मामला आगे बढ़ता रहा और अब अदालत ने वादी पक्ष को अपनी दलीलों के लिए अंतिम मौका भी दिया है।

    यह पूरा मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत में चल रही प्रक्रिया के बीच दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों को मजबूती से पेश कर रहे हैं। अब सभी की नजरें 21 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।

  • तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में लंबे इंतजार और गहन राजनीतिक हलचलों के बाद आखिरकार वह क्षण आ गया जिसने राज्य की सत्ता संरचना को नया रूप दे दिया। चेन्नई में आयोजित एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह में लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने Thalapathy Vijay ने आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस घटना को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां परंपरागत राजनीतिक ढांचे से बाहर निकलकर एक नए नेतृत्व ने जिम्मेदारी संभाली है।

    इस समारोह की खास बात यह रही कि इसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख राजनीतिक नेता भी शामिल हुए। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कार्यक्रम में मौजूद रहकर नई सरकार को शुभकामनाएं दीं और इसे जनता की बदलती सोच का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने इस बार नई पीढ़ी, नए विचार और नई राजनीतिक कल्पना को अवसर दिया है, जो आने वाले समय में शासन की दिशा तय कर सकता है।

    इसी अवसर पर Mallikarjun Kharge ने भी विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से सामाजिक न्याय, समानता और प्रगतिशील विचारों पर आधारित रही है और उम्मीद है कि नई सरकार इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाएगी। उनके अनुसार यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक सोच के विकास का संकेत है।

    शपथ ग्रहण समारोह चेन्नई के प्रमुख आयोजन स्थल पर बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया, जहां राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। माहौल में उत्साह और ऐतिहासिक बदलाव की झलक साफ दिखाई दे रही थी। लंबे समय से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है और राज्य को एक नई सरकार और नया नेतृत्व मिल गया है।

    मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में थलपति विजय ने खुद को जनता का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक सफर किसी पारंपरिक राजनीतिक परिवार से नहीं जुड़ा है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन ने उन्हें इस स्थान तक पहुंचाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार झूठे वादों की बजाय ठोस काम और पारदर्शी प्रशासन पर ध्यान देगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिवर्तन तमिलनाडु की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत है, जहां जनता ने एक गैर-पारंपरिक नेतृत्व को मौका दिया है। यह बदलाव न केवल सत्ता परिवर्तन है, बल्कि राजनीतिक सोच और जन अपेक्षाओं में आए बदलाव का भी प्रतीक है।

    नई सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरे और प्रशासनिक अनुभव के साथ विकास कार्यों को गति दे। रोजगार, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दे आने वाले समय में सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।

    इस तरह तमिलनाडु ने एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत की है, जहां नेतृत्व, उम्मीदें और जनता की भूमिका मिलकर एक नए शासन मॉडल की ओर इशारा कर रही हैं।

  • केरल में CM फेस पर सस्पेंस: राहुल का फॉर्मूला लागू, विधायक तय करेंगे मुख्यमंत्री; सतीशन-वेणुगोपाल-चेन्नीथला रेस में आगे

    केरल में CM फेस पर सस्पेंस: राहुल का फॉर्मूला लागू, विधायक तय करेंगे मुख्यमंत्री; सतीशन-वेणुगोपाल-चेन्नीथला रेस में आगे


    नई दिल्ली। केरल में चुनावी जीत के बाद सत्ता की तस्वीर तो साफ हो गई है, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सरकार बनने जा रही है, लेकिन कांग्रेस के भीतर सीएम फेस को लेकर मंथन तेज हो गया है। इस बीच राहुल गांधी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार फैसला हाईकमान नहीं, बल्कि विधायक करेंगे।

    सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी चाहते हैं कि विधायक दल की बैठक में आम सहमति से नेता चुना जाए और वही मुख्यमंत्री बने। उन्होंने अपने इस रुख की जानकारी पार्टी पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन को भी दे दी है, जो तिरुअनंतपुरम जाकर विधायकों की राय जानेंगे।

    सीएम पद की रेस में फिलहाल तीन बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं। पहला नाम है केसी वेणुगोपाल का, जो कांग्रेस संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि उन्हें दिल्ली की राजनीति में बनाए रखना ज्यादा जरूरी है, जिससे उनकी दावेदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    दूसरा बड़ा नाम वी. डी. सतीशन का है, जो युवा चेहरा हैं और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उनकी लोकप्रियता और आक्रामक राजनीतिक शैली उनके पक्ष में जाती है, लेकिन हाल के कुछ विवाद उनकी राह में बाधा बन सकते हैं।

    तीसरे दावेदार रमेश चेन्नीथला हैं, जिन्हें अनुभव और वरिष्ठता का बड़ा फायदा मिल सकता है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि लंबे समय से संगठन और सरकार में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें मौका मिलना चाहिए।

    इसके अलावा शशि थरूर का नाम भी चर्चा में है, लेकिन सांसद होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि इससे उपचुनाव का जोखिम खड़ा हो सकता है।

    राजनीतिक समीकरणों के बीच यह भी साफ है कि अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान के शीर्ष नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी की राय से प्रभावित होगा, लेकिन राहुल गांधी का रुख इस बार निर्णायक माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर केरल में मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने की जिम्मेदारी अब विधायकों के कंधों पर है। कांग्रेस इस बार किसी तरह का विवाद या असंतोष नहीं चाहती, इसलिए आम सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि विधायक किस नेता पर भरोसा जताते हैं और किसके सिर पर केरल का ताज सजता है।

  • राहुल गांधी पर CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में बड़ा मामला… क्या आज आएगा अहम फैसला? देशभर की नजर लखनऊ बेंच पर!

    राहुल गांधी पर CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में बड़ा मामला… क्या आज आएगा अहम फैसला? देशभर की नजर लखनऊ बेंच पर!



    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक याचिका पर आज महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। यह मामला कथित आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़ा बताया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, याचिका में मांग की गई है कि राहुल गांधी और उनके परिवार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा विस्तृत जांच की जाए और इस मामले में नियमित आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

    यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है। मामले की सुनवाई पहले 6 मई को नए मामलों की सूची में शामिल थी, लेकिन याची की अर्जेंट अपील पर इसे चैंबर में सुनवाई के लिए मंजूरी दी गई। अब इस पर आज दोपहर 2:15 बजे सुनवाई होनी है।

    याचिकाकर्ता कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दावा किया है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीर जांच आवश्यक है। याचिका में सीबीआई के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग, गृह मंत्रालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को भी पक्षकार बनाया गया है।

    इस पूरे मामले में आरोप है कि राहुल गांधी की संपत्ति उनके ज्ञात आय स्रोतों से अधिक हो सकती है, जिसकी जांच की मांग की गई है।

    फिलहाल अदालत में इस याचिका की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।

  • कंगना रनौत ने फेक न्यूज पर जताई नाराजगी: राहुल गांधी संग शादी वाली अफवाह को बताया पूरी तरह झूठा दावा

    कंगना रनौत ने फेक न्यूज पर जताई नाराजगी: राहुल गांधी संग शादी वाली अफवाह को बताया पूरी तरह झूठा दावा



    नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर वायरल एक फर्जी पोस्ट को लेकर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने कड़ा रुख अपनाया है। इस पोस्ट में यह झूठा दावा किया गया था कि उनका नाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ जोड़कर शादी से जुड़ी टिप्पणी की गई है, जो पूरी तरह असत्य और भ्रामक पाया गया।

    क्या था वायरल दावा?
    इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हुआ, जिसमें यह गलत दावा किया गया कि कंगना रनौत ने कहा है कि अगर राहुल गांधी किसी शर्त को पूरा करते हैं तो वह उनसे शादी कर सकती हैं। इस पोस्ट ने लोगों के बीच भ्रम फैलाया।

    कंगना ने दी सख्त प्रतिक्रिया
    कंगना रनौत ने इस खबर को पूरी तरह फर्जी बताते हुए सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है और यह सिर्फ अफवाह है।कंगना ने फेक न्यूज फैलाने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की झूठी खबरें न केवल गलत हैं बल्कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

    सोशल मीडिया पर बढ़ती फेक न्यूज की समस्या
    यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया पर बिना जांच के खबरें कितनी तेजी से फैल जाती हैं। कई यूजर्स ने भी इस पोस्ट को गलत बताया और कहा कि यह राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों को बदनाम करने की कोशिश है।

    फिलहाल क्या स्थिति है?
    इस पूरे मामले पर राहुल गांधी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यह स्पष्ट हो चुका है कि वायरल दावा पूरी तरह फर्जी था।वर्क फ्रंट की बात करें तो कंगना रनौत हाल ही में फिल्म इमरजेंसी में नजर आई थीं और आने वाले समय में वे अपने नए प्रोजेक्ट्स को लेकर भी चर्चा में बनी हुई हैं।

  • ओम बिड़ला ने राहुल गांधी पर ली चुटकी, संसद में माइक टिप्पणी से बना हल्का-फुल्का माहौल

    ओम बिड़ला ने राहुल गांधी पर ली चुटकी, संसद में माइक टिप्पणी से बना हल्का-फुल्का माहौल


    नई दिल्ली:
    संसद के विशेष सत्र के दौरान उस समय माहौल कुछ देर के लिए हल्का और अनौपचारिक हो गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की एक टिप्पणी पर सदन में मौजूद सांसदों के बीच हंसी का माहौल बन गया। यह घटना उस समय हुई जब सदन में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा चल रही थी और राजनीतिक बहस अपने चरम पर थी।

    चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से एक सांसद अपना वक्तव्य रख रहे थे, तभी यह बात उठी कि उनका माइक्रोफोन सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। इसी दौरान विपक्षी बेंचों की ओर से भी माइक को लेकर प्रतिक्रिया दी गई और सदन में कुछ देर के लिए हल्की अफरा तफरी जैसी स्थिति बन गई।

    इसी मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने मुस्कुराते हुए टिप्पणी की कि माइक चालू है, केवल कुछ लोगों का ही माइक बंद रहता है। उनकी इस बात पर सदन में मौजूद कई सांसदों ने हंसी और मेज थपथपाकर प्रतिक्रिया दी, जिससे कुछ क्षणों के लिए कार्यवाही का माहौल गंभीरता से हटकर हल्का हो गया।

    यह टिप्पणी राजनीतिक चर्चा में भी एक अलग विषय बन गई क्योंकि इससे पहले भी विपक्ष की ओर से समय समय पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि उन्हें संसद में पर्याप्त रूप से बोलने नहीं दिया जाता या उनकी आवाज को दबाया जाता है। इसी पृष्ठभूमि में यह घटना एक प्रतीकात्मक हल्के पल के रूप में देखी जा रही है।

    हालांकि इस हल्के क्षण के बाद सदन की कार्यवाही फिर से गंभीर मुद्दों पर केंद्रित हो गई। विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधान और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा जारी रही, जिन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।

    परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को लेकर कुछ राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं, विशेष रूप से इस बात को लेकर कि जनसंख्या आधारित बदलाव से राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार की ओर से इन विधेयकों को संवैधानिक और प्रशासनिक सुधारों के लिए आवश्यक बताया गया।

    सदन में दिन भर गंभीर बहसों के बीच यह छोटा सा हास्यपूर्ण क्षण भी चर्चा में रहा, जिसने कुछ समय के लिए माहौल को तनावपूर्ण राजनीति से हटाकर हल्केपन की ओर मोड़ दिया।

  • राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा

    राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा


    नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित रन फॉर अंबेडकर और रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन मैराथन 2026 को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला।

    राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का सबसे बड़ा संदेश देश का संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़े लोग अंबेडकर के सिद्धांतों और संविधान को खत्‍म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये ताकतें देश में सभी को समान अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं। राहुल गांधी के मुताबिक भाजपा के नेता अंबेडकर की प्रतिमा के सामने सम्मान जताते जरूर हैं लेकिन असल में उनका उद्देश्य संविधान को नुकसान पहुंचाना है।

    इस कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार संविधान पर प्रहार कर रही है और उसके नेता आक्रामक रवैया अपना रहे हैं। उनके अनुसार सरकार परोक्ष रूप से संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर रही है। पुनिया ने कहा कि यह मैराथन लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित की गई है ताकि सभी मिलकर अंबेडकर की विचारधारा और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हो सकें।

    महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा इसके समर्थन में रही है लेकिन भाजपा के लागू करने के तरीके पर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि बिना नई जनगणना और परिसीमन के इस बिल को लागू करना उचित नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि इसे नई जनगणना के आधार पर ही लागू किया जाना चाहिए न कि 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर।