Tag: Ram Mandir

  • राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग

    राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरे गिरोह में चोरी की मुख्य जिम्मेदारी अविनाश शुक्ला को सौंपी गई थी। सीसीटीवी फुटेज में वह सबसे अधिक बार चढ़ावे की रकम निकालते हुए दिखाई दिया, जबकि अन्य आरोपी उसे कवर देने के लिए आसपास मौजूद रहते थे।

    एसआईटी की जांच में सामने आया था कि 40 दिनों के दौरान चढ़ावे की रकम करीब 70 बार चोरी की गई। इनमें लगभग 50 बार अविनाश शुक्ला को नकदी निकालते हुए कैमरों में देखा गया। पुलिस ने भी अपनी विवेचना में सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। फुटेज के विश्लेषण में एसआईटी की रिपोर्ट की पुष्टि हुई कि अधिकांश मामलों में रकम अविनाश ने ही पार की।

    पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में अविनाश शुक्ला ने स्वीकार किया था कि अधिकतर मौकों पर चोरी की जिम्मेदारी उसी को दी जाती थी। हालांकि एसआईटी की विस्तृत जांच अंतिम चरण में है, जबकि पुलिस की विवेचना अभी जारी रहेगी।

    अनुकल्प और लवकुश बनाते थे पूरी रणनीति
    जांच में यह भी सामने आया कि टिन्नू यादव और गणनाकर्मी सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत से यह पूरा खेल चलता था। दोनों का काम यह सुनिश्चित करना था कि किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की नजर आरोपियों की गतिविधियों पर न पड़े। कब और किस तरह रकम निकालनी है, इसकी पूरी योजना अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा तैयार करते थे। योजना के अनुसार सबसे पहले अविनाश शुक्ला रकम निकालता था, जबकि कई मौकों पर मनीष और रमाशंकर ने भी नकदी चोरी की। बाद में सभी आरोपियों के बीच रकम का बंटवारा कर दिया जाता था।

    लगभग हर दिन दो बार की जाती थी चोरी
    सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ से यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपी लगभग हर दिन दो बार चढ़ावे की रकम पार करते थे। रिमांड के दौरान अविनाश, अनुकल्प और लवकुश ने बताया था कि अधिकांश दिनों में दो बार चोरी की जाती थी, जबकि अवसर मिलने पर तीन बार भी नकदी निकाल ली जाती थी। कभी-कभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर चोरी करना संभव नहीं हो पाता था। जांच के अनुसार, यह पूरा खेल आरोपियों के काम पर लगाए जाने के समय से ही लगातार चल रहा था।

  • Ram Mandir में बढ़ी सख्ती…. 13 नए कैमरों से चढ़ावे की निगरानी, 27 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात

    Ram Mandir में बढ़ी सख्ती…. 13 नए कैमरों से चढ़ावे की निगरानी, 27 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात


    अयोध्या।
    श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने चढ़ावे की सुरक्षा और गणना प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त बना दिया है। नई व्यवस्था के तहत गणनास्थल की निगरानी बढ़ाने के लिए 13 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे (13 Additional CCTV Cameras) लगाए गए हैं, जबकि दान पेटियों को मंदिर परिसर से गणना केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए 27 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों ( 27 Additional Security Personnel ) की तैनाती की गई है।

    नई व्यवस्था के अनुसार अब गणनास्थल पर कुल 43 अधिकृत लोग मौजूद रहेंगे। जिन स्थानों पर पहले कैमरों का कवरेज नहीं था, वहां अतिरिक्त सीसीटीवी लगाए गए हैं, ताकि पूरी गणना प्रक्रिया लगातार निगरानी में रहे। दान पेटियों को मंदिर से गणनास्थल तक ले जाने के लिए 27 सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये सभी सुरक्षाकर्मी एसआईएस के हैं।

    इसके अलावा पुलिस बल की तैनाती भी दान पेटी और गणनास्थल के बीच विभिन्न पिलरों पर कर दी गई। विशेष रूप से पिलर नंबर-34 पर तीन अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, क्योंकि इसी स्थान पर गुप्त दान पेटी रखी गई है। पहले पुलिस कर्मियों को सुरक्षा में नहीं लगाया गया था। पूरी जिम्मेदारी ट्रस्ट व बैंक के कर्मी ही संभालते थे। ट्रस्ट ने वित्तीय लेन-देन की व्यवस्था भी बदल दी है।

    अब किसी भी बैंक ट्रांजैक्शन के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, मुख्य अभियंता जगदीश आफले और चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इससे पहले यह व्यवस्था डॉ. अनिल मिश्रा देखते थे और बैंक संबंधी दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर होते थे, जबकि कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी के डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग किया जाता था।


    अभी भी हाउसकीपिंग कर्मी कर रहे दान राशि की गणना

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जेल भेजे गए गणनाकर्मियों को छोड़कर अन्य सभी पुराने गणनाकर्मी ही दान राशि का हिसाब-किताब कर रहे हैं। ये सभी वही कर्मचारी हैं, जिनको सैनिक सिक्योरिटी कंपनी की तरफ से हाउसकीपिंग के काम के लिए नियुक्त किया गया था। सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद इन सभी को क्यों नहीं बदला गया।

    दरअसल, ट्रस्ट की सिफारिश पर 46 कर्मियों को आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए नियुक्त करने के लिए बैंक ने कंपनी को पत्र भेजा था। सैनिक सिक्योरिटी कंपनी ने सभी की नियुक्ति कर दी थी। नियुक्त किए गए कर्मियों को बतौर हाउसकीपिंग के काम के लिए रखा गया था। लेकिन, वहां पर इन सभी को गणना जैसे संवेदनशील काम में लगा दिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक, घटना का खुलासा होने और आरोपियों के जेल जाने के बाद अन्य किसी गणनाकर्मी को नहीं हटाया गया। वह जस का तस गणना के कार्य में लगे हैं। सवाल है कि आखिर इन सभी को क्यों नहीं बदला गया, जिससे गणना प्रक्रिया में और पारदर्शिता लाई जा सके।


    केवल ये कदम उठाए

    अब तक नियमों को ताक पर रखकर गणना होती थी। अब बाकायदा तय ड्रेस में गणनाकर्मी गणना कर रहे हैं। सभी बिना जेब वाले कपड़े पहन रहे हैं। वीडियोग्राफी भी हो रही है। वहीं, निगरानी बढ़ाई गई है। लेकिन, पूरा स्टाफ नहीं बदला गया है। सूत्र बताते हैं कि एसओपी की कुछ शर्तों को पूरा कर मामला दुरुस्त करने का दावा किया जा रहा है। सवाल है कि कंपनी से करार खत्म कर मानक के अनुरूप गणनाकर्मियों की तैनाती क्यों नहीं की जा रही है।


    नए एसपी सुरक्षा को पूरी तरह मिली कमान

    अयोध्या में तैनात रहे एसपी सुरक्षा बलरामाचारी का 25 मई को यूपी-112 तबादला हुआ था। लेकिन, तब से वह रिलीव नहीं हुए थे। तीन जुलाई को नवागत एसपी सुरक्षा विजय शंकर मिश्रा ने बतौर एसपी सुरक्षा ज्वॉइन कर लिया था। चूंकि ट्रस्ट की बैठक थी, इसलिए बलरामाचारी को रिलीव नहीं किया गया था। मंगलवार को वह रिलीव हो गए। अब सुरक्षा व्यवस्था की पूरी कमान विजय शंकर मिश्रा के पास है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस…. आरोपियों ने उगले राज…. पूछताछ में बताया हेराफेरी का तरीका

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस…. आरोपियों ने उगले राज…. पूछताछ में बताया हेराफेरी का तरीका


    लखनऊ/अयोध्या।
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Offering Theft) मामले में रिमांड पर लिए गए तीनों आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि चोरी के रुपये वह अपने करीबियों और रिश्तेदारों को भेजते थे और फिर उनसे अपने खातों में रकम ट्रांसफर करवाते थे, ताकि रकम का स्रोत छिपा रहे और शक न हो। बैंक डिटेल से इसकी पुष्टि भी हुई है। पूछताछ में तीनों आरोपियों अनुकल्प मिश्रा (Anukalp Mishra), लवकुश मिश्रा (Lav-Kush Mishra) और करुणेश पांडेय (Karunesh Pandey) ने कई और राज उगले हैं। बृहस्पतिवार को रकम, जेवर की बरामदगी हो सकती है।

    कोर्ट की अनुमति के बाद पुलिस ने बुधवार सुबह करीब सात बजे जिला जेल से आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लिया। आरोपियों ने चोरी स्वीकारते हुए बताया कि टिन्नू व गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत होने से रकम पार करने में दिक्कत नहीं होती थी। आरोपियों ने बताया है कि नकदी व जेवर छिपाकर रखे हैं।

    पुलिस तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित उसी बाग में लेकर गई जहां चोरी की रकम का बंटवारा किया जाता था। इस स्थान का खुलासा पहले रिमांड पर रहे आरोपी अविनाश शुक्ला ने किया था। तीनों आरोपियों से मौके पर ले जाकर इसका सत्यापन कराया गया। पुलिस ने आरोपियों के बयानों का मिलान भी किया।

    फर्जी रसीदें छपवाई थीं
    आरोपियों ने एक दान राशि संबंधी पर्ची बरामद कराई है। आरोपियों ने बताया कि जब दान लेकर पर्ची दी जाती थी, तो उन्होंने फर्जी रसीदें छपवाई थीं। लोगों से चंदे के नाम पर रकम लेकर फर्जी रसीदें पकड़ा देते थे और रकम अपनी जेब में रख लेते थे।

  • राम मंदिर दान विवाद पर उद्धव ठाकरे का हिंदुत्व दांव, 'राम रक्षा आंदोलन' से BJP पर साधा निशाना

    राम मंदिर दान विवाद पर उद्धव ठाकरे का हिंदुत्व दांव, 'राम रक्षा आंदोलन' से BJP पर साधा निशाना


    नई दिल्ली । अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे पर राम रक्षा आंदोलन की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व के नाम पर सत्ता हासिल करने वालों ने अब मंदिरों और आस्था का भी राजनीतिक इस्तेमाल शुरू कर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदुओं को जागरूक करने की जरूरत है क्योंकि उनका वशीकरण किया गया है।

    मुंबई के दादर स्थित हनुमान मंदिर में उद्धव ठाकरे ने हनुमान चालीसा हनुमान स्तोत्र और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ किया। इसके बाद आयोजित सभा में उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यदि किसी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा धन सुरक्षित नहीं है तो इसकी जांच पूरी पारदर्शिता से होनी चाहिए। उनका कहना था कि जिस पर आरोप लगे हों उसी से जांच नहीं कराई जा सकती क्योंकि इससे निष्पक्ष परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती।

    उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर हिंदुत्व के राजनीतिक उपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि भगवान राम किसी एक दल के नहीं बल्कि पूरे देश के हैं। उन्होंने कहा कि यदि हिंदुत्व के नाम पर मंदिरों और धार्मिक आस्था का दुरुपयोग किया जाएगा तो समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से राम रक्षा आंदोलन को गांव गांव तक ले जाने का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आस्था और जवाबदेही का विषय है।

    उधर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि आखिरकार उद्धव ठाकरे को भगवान राम की याद आ गई। उन्होंने कहा कि यदि वे भगवान राम के बताए मार्ग पर चलेंगे तो यह उनके लिए भी अच्छा होगा। फडणवीस ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उद्धव केवल एक दिन नहीं बल्कि नियमित रूप से राम रक्षा का पाठ करेंगे।

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद का मामला जून में सामने आया था। राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल की शुरुआती जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई और चढ़ावे की सुरक्षा तथा गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच अभी जारी है और प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

    उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि मंदिरों से जुड़े अन्य मामलों में भी पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि यदि धार्मिक संस्थानों की गरिमा बनाए रखनी है तो किसी भी तरह की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना ने हमेशा हिंदुत्व को सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों से जोड़ा है और आगे भी उसी विचार के साथ काम करती रहेगी।

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच शुरू हुआ राम रक्षा आंदोलन अब महाराष्ट्र की राजनीति में नया मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है जबकि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर भी सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह

    MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह


    भोपाल।
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता (Senior Congress leader) दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के मुद्दे को लेकर दो अक्टूबर (गांधी जयंती) से उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) से अयोध्या (Ayodhya) तक ‘गैर-राजनीतिक’ पदयात्रा करेंगे। सिंह ने इस बात की घोषणा भोपाल में अपने सरकारी आवास के बाहर एक बैनर लगाने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मैंने अपने घर के बाहर एक बैनर लगाया है, जिस पर लिखा है चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित है। आगे उन्होंने कहा कि अब यह बैनर सभी मंदिरों के बाहर लगना चाहिए कि चंदा चोरों से सावधान।

    दरअसल सिंह ने अपने घर के बार जो बैनर लगाया उस पर लिखा है, ‘जय सिया राम। हमारी आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समूचे देश के द्वारा दिए गए चंदा के चोरों एवं चढ़ावा चोरों का मेरे निवास पर प्रवेश निषेध है।’ इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत में वाद दायर कर राम मंदिर के लिए दिया गया अपना चंदा वापस मांगेंगे क्योंकि उनके धन का दुरुपयोग हुआ है।


    ‘पदयात्रा में हर दिन चलूंगा 10 से 15 किमी पैदल’

    कांग्रेस नेता ने कहा, ‘राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के विरोध में मैं दो अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करूंगा। यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। इसमें किसी दल का झंडा नहीं रहेगा। भगवान राम में आस्था रखने वाले और राम मंदिर में दान देने वाले सभी लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।’ एक प्रश्न के उत्तर में सिंह ने कहा कि यात्रा की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है और वह प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।


    ‘आडवाणी की रथयात्रा के दौरान दिया था चंदा’

    पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा, ‘मैंने लालकृष्ण आडवाणी (वरिष्ठ भाजपा नेता) की रथयात्रा के दौरान चंदा दिया था क्योंकि मुझे भगवान राम और मंदिर पर आस्था है। उस पहले अभियान में एकत्र किए गए चंदे का आज तक कोई हिसाब नहीं दिया गया। उच्चतम न्यायालय के फैसले (जिससे मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ) के बाद फिर से चंदा अभियान चलाया गया।’


    ‘मुकदमा दायर करते हुए वापस मांगूंगा चंदा’

    उन्होंने कहा, ‘मैंने तय किया है कि अयोध्या में मुकदमा दायर करूंगा कि मेरे द्वारा दिया गया चंदा गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। मैं अपना चंदा वापस चाहता हूं।’ सिंह का यह बयान राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की कथित चोरी के आरोपों के संदर्भ में आया, जिनकी जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।


    ‘महाकाल मंदिर के पास की जमीन RSS को दी गई थी’

    सिंह ने दावा किया कि जब दूसरी बार विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने चंदा अभियान चलाया तो उन्होंने संगठन पर भरोसा नहीं होने के कारण उसमें योगदान नहीं दिया और सीधे 1 लाख 11 हजार रुपए का दान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की चोरी हुई है, उसी तरह उज्जैन में भी महाकाल मंदिर के पास की एक बहुमूल्य भूमि भाजपा की सुंदरलाल पटवा सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दे दी थी।


    ‘होटल के लिए अब उस स्कूल को गिराया जा रहा’
    सिंह ने आगे कहा, ‘मेरी सरकार आने के बाद मैंने इस पर आपत्ति जताई थी।’ उन्होंने आरोप लगाया कि अब वहां संचालित एक स्कूल को होटल बनाने के लिए गिराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां ठहरने वाले लोगों को स्वत: वीआईपी दर्शन की सुविधा मिल जाती है और संबंधित संगठन वहां से मिले दान का उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी भी जांच की मांग की जाएगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना


    नई दिल्‍ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. इस बार उन्होंने सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम का 4 मिनट 40 सेकेंड का AI वीडियो शेयर किया और सवाल किया, “क्या फिर चले गए वनवास?” इस वीडियो के जरिए मंदिर में हुई चोरी और उससे जुड़े घटनाक्रम को प्रतीकात्मक अंदाज में दिखाया गया है.

    अखिलेश यादव ने जो वीडियो शेयर किया है, वह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक सिनेमैटिक प्रस्तुति है. इसकी शुरुआत सूनी और शांत अयोध्या से होती है. इसके बाद मंदिर के अंदर भगवान श्रीराम की AI से बनाई गई आकृति दिखाई देती है. पूरे वीडियो में माहौल गंभीर रखा गया है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मंदिर में हुई घटना से अयोध्या का वातावरण बदल गया है.

    वीडियो के अगले हिस्से में मंदिर का वो कोना दिखता है जहां चोरी हुई. विजुअल्स में एक बड़ा दानपात्र और आसपास का सामान नजर आता है. गाना आगे बढ़ने पर अयोध्या के लोग और साधु-संत हाथ जोड़े खड़े दिखाई देते हैं, और प्रभु राम नगरी की सीमा की तरफ बढ़ते हैं. कुल मिलाकर अखिलेश यादव ने इस पूरे वीडियो और भजन के माध्यम से धर्म के नाम पर सरकार को आड़े हाथों लिया है.

    बता दें कि अबतक इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की टीमों ने अनुकल्प मिश्रा समेत सभी सात आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की. करीब डेढ़ से ढाई घंटे चली इस कार्रवाई में अलमारियों और बक्सों का कोना-कोना छाना गया. जांच में सामने आया है कि आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने अपने घर पर सात दिनों की भव्य रामकथा का आयोजन कराया था, जिस पर 50 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे. इस आयोजन के एक वीडियो में चंपत राय भी मौजूद दिख रहे हैं.

    यह पूरा मामला 5 जून 2026 को तब सामने आया था, जब राम मंदिर परिसर में रूटीन चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने कुछ कर्मचारियों की जेब से नकदी बरामद की. इसके बाद 7 जून को जब यह बात पब्लिक हुई, तो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस गबन का मुद्दा उठाकर जांच की मांग की. विपक्ष के दबाव और लोगों के गुस्से को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया.

    फिलहाल मामले की जांच तेज है. प्रशासन लगातार सभी आरोपियों की अवैध संपत्तियों और सबूतों को जुटाने में लगा है, ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके.

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: आरोपी लवकुश मिश्रा के घर चल सकता है बुलडोजर, पत्नी को अवैध निर्माण पर नोटिस

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: आरोपी लवकुश मिश्रा के घर चल सकता है बुलडोजर, पत्नी को अवैध निर्माण पर नोटिस


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने उनकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर बन रही एक इमारत को लेकर नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि प्रारंभिक जांच में निर्माण कार्य में नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। इसलिए एक सप्ताह के भीतर आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा गया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई, जिसमें ध्वस्तीकरण भी शामिल हो सकता है, की जाएगी।

    प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि भवन निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शा और अन्य आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं। यदि अनुमति से जुड़े दस्तावेज समयसीमा के भीतर प्रस्तुत नहीं किए गए, तो अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि संबंधित जमीन लवकुश मिश्रा के राम मंदिर कार्यालय में कार्यरत रहने के दौरान उनकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदी गई थी। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, यह भूमि 16 अक्टूबर 2025 को सोहावल तहसील के मंगसी परगना क्षेत्र में कमल स्वरूप सिंह से खरीदी गई थी।

    रजिस्ट्री के समय इस जमीन का मूल्य 8.8 लाख रुपये दर्ज किया गया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर इसकी वर्तमान बाजार कीमत इससे कहीं अधिक, करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है। इसी भूमि पर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसकी वैधता की अब जांच की जा रही है।

    गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच पहले से जारी है। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। इसी क्रम में अब आरोपी से जुड़े निर्माण और संपत्ति संबंधी मामलों की भी जांच की जा रही है।

    फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि नोटिस के जवाब में संबंधित पक्ष क्या स्पष्टीकरण देता है। इसके बाद अयोध्या विकास प्राधिकरण आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जेल में आरोपियों से दो घंटे पूछताछ, सामने आए कई अहम दावे

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जेल में आरोपियों से दो घंटे पूछताछ, सामने आए कई अहम दावे


    अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की चोरी के मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने जिला जेल में बंद आरोपियों से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने चोरी के तरीके, रकम के इस्तेमाल और दान राशि की गणना प्रक्रिया से जुड़े कई अहम दावे किए। इस दौरान ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम भी एक बार फिर सामने आया। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दूसरी ओर, जांच का दायरा अब आरोपियों की संपत्तियों और बैंक खातों तक भी बढ़ा दिया गया है।

    अविनाश मिश्रा से सबसे लंबी पूछताछ
    सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की, लेकिन सबसे अधिक समय आरोपी अविनाश मिश्रा से सवाल-जवाब में लगाया गया। बताया जा रहा है कि उसके पास से सबसे ज्यादा बरामदगी हुई थी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने और चोरी के नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक बिना किसी संदेह के कैसे गायब होती रही और इसमें किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही।

    पूछताछ में चोरी की कार्यप्रणाली का खुलासा
    सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ के दौरान दान राशि की चोरी की पूरी कार्यप्रणाली पुलिस के सामने रखी। दावा किया गया कि दान राशि की गणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कुछ कमजोरियों का फायदा उठाया जाता था। पुलिस ने यह जानने का प्रयास किया कि रकम किस समय निकाली जाती थी, उसे कैसे छिपाया जाता था और बाद में किस तरीके से मंदिर परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था।

    सूत्रों का यह भी दावा है कि पूछताछ में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया। आरोपियों ने तौर पर कहा कि दान राशि की गणना प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और जांच एजेंसियां आरोपियों के दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कर रही हैं।

    एक व्यक्ति रकम निकालता, बाकी बनाते थे घेरा
    पूछताछ में सामने आए दावों के अनुसार, चोरी के दौरान एक व्यक्ति दान राशि निकालता था, जबकि बाकी आरोपी उसके चारों ओर इस तरह खड़े रहते थे कि बाहर से किसी को कोई संदेह न हो। इससे सीसीटीवी कैमरों और अन्य कर्मचारियों की नजर सीधे उस व्यक्ति तक नहीं पहुंचती थी।

    सूत्रों के मुताबिक, निकाली गई रकम को तुरंत बाहर नहीं ले जाया जाता था, बल्कि पहले मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपा दिया जाता था। बाद में अनुकूल अवसर मिलने पर उसे परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस दावे की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कर रही है।

    कैमरों की निगरानी से बचने की थी पूरी जानकारी
    जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आरोपियों को मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन और उनकी निगरानी के दायरे की पूरी जानकारी थी। इसी वजह से योजना ऐसे तैयार की जाती थी कि कैमरों की सीधी नजर से बचा जा सके। पुलिस अब कंट्रोल रूम की ड्यूटी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका का भी मिलान कर रही है।

    गणना कक्ष की चाबी को लेकर भी दावा
    पूछताछ में आरोपियों ने तौर पर बताया कि गणना कक्ष की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मियों के पास होती थी। उनका दावा है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया जाता था। हालांकि, बैंक कर्मियों की किसी भूमिका की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दस्तावेजों, ड्यूटी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    पिछले सप्ताह हुई थीं गिरफ्तारियां
    इस मामले में पुलिस ने पिछले सप्ताह मुकदमा दर्ज करने के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले टिन्नू यादव, गिनती इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव तथा रकम गिनने वाले अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल में हुई ताजा पूछताछ को जांच का अहम चरण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार आरोपियों से पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से पूछताछ की गई।

    बैंक ऑफ बड़ौदा ने नोटिस का दिया जवाब
    जांच के दौरान पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा से कुछ खातों की जानकारी मांगी थी, जिस पर बैंक ने जवाब सौंप दिया है। बैंक ने स्पष्ट किया कि उसकी भूमिका केवल ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाले दान तक सीमित है। बैंक के अनुसार, क्यूआर कोड के जरिए प्राप्त राशि सीधे बैंकिंग प्रणाली में दर्ज होती है, जबकि नकद चढ़ावे की गणना, पैकिंग और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बैंक की कोई भूमिका नहीं होती।

    सूत्रों के अनुसार, राम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिलने वाले कुल दान का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त होता है, जबकि सबसे अधिक ऑनलाइन लेनदेन भारतीय स्टेट बैंक के जरिए होता है।

    चंपत राय और अनिल मिश्रा के खातों की भी जांच
    सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा में एक खाता है, जिसे कई वर्ष पहले दिल्ली से अयोध्या स्थानांतरित किया गया था। फिलहाल इस खाते में बहुत कम राशि है और लंबे समय से कोई उल्लेखनीय लेनदेन नहीं हुआ है।

    इसी शाखा में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का भी बैंक खाता है। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने हाल ही में एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए करीब 20 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया था। हालांकि, पुलिस इस जानकारी का सत्यापन कर रही है और अब तक जांच एजेंसियों ने इन खातों का चोरी से कोई सीधा संबंध होने की पुष्टि नहीं की है।

    इन खातों की भी मांगी गई जानकारी
    पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आरोपी अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और सुप्रिया मिश्रा के खातों का विवरण भी मांगा था। बैंक ने अपने जवाब में बताया कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव के नाम से खाते मौजूद हैं, जबकि सुप्रिया मिश्रा के नाम से इस शाखा में कोई खाता नहीं मिला।

    सूत्रों के अनुसार, मनीष यादव के खाते में फिलहाल करीब 1,400 रुपये जमा हैं और पिछले कुछ महीनों से उसमें कोई विशेष लेनदेन नहीं हुआ है। पुलिस अब अन्य बैंकों और वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी की रकम किसी अन्य माध्यम से तो नहीं पहुंचाई गई।

  • भोपाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान राम मंदिर दान मामले की निष्पक्ष जांच की मांग इंडोनेशिया मॉडल का किया जिक्र

    भोपाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान राम मंदिर दान मामले की निष्पक्ष जांच की मांग इंडोनेशिया मॉडल का किया जिक्र


    नई दिल्ली। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राम मंदिर से जुड़े दान विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के धाम से जुड़ा कोई भी मामला केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं होता बल्कि यह पूरे सनातन समाज की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार यदि किसी ने भगवान के धाम में रहकर अनुचित कार्य किया है तो उसे कानून के साथ साथ ईश्वर का भी महादंड मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच पहले से विशेष जांच एजेंसियां और एसआईटी कर रही हैं इसलिए बिना तथ्यों के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए। जब उनसे राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े आरोपों और कुछ नामों पर एफआईआर नहीं होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है इसलिए जांच एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से अपना काम करने देना चाहिए।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सनातन परंपरा से जुड़े लोगों के मन में इस पूरे प्रकरण को लेकर पीड़ा है। उन्होंने बताया कि विदेश यात्रा के दौरान भी उनसे इस विषय पर चर्चा हुई थी और उन्होंने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में भी इस मुद्दे का उल्लेख किया था। उनके अनुसार भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा का विषय है इसलिए इससे जुड़े मामलों में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

    मंदिरों के प्रबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में कुछ धर्म विरोधी ताकतें ऐसा माहौल तैयार कर रही हैं जिससे मंदिरों और संत समाज पर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों की सेवा और प्रबंधन ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए जो पूरी निष्ठा के साथ सनातन परंपरा भगवान और धार्मिक मूल्यों के प्रति समर्पित हों। इससे मंदिरों की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे।

    अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत के मुसलमानों के संदर्भ में इंडोनेशिया का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी होने के बावजूद वहां धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समरसता देखने को मिलती है। उनके अनुसार वहां पांच वक्त की नमाज पढ़ने वाले लोग दीपावली जैसे त्योहार भी मनाते हैं और रामकथा जैसे धार्मिक आयोजनों में भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भी सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने की जरूरत है।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भोपाल में हबीबगंज स्थित कैंसर हीलर सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि समय पर जांच और बेहतर इलाज से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों समाजसेवियों जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार यह सेंटर भोपाल सहित आसपास के जिलों के मरीजों को आधुनिक कैंसर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में नया मोड़.. CCTV में पुलिस के साथ काला बैग ले जाते दिखा अविनाश शुक्ला

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में नया मोड़.. CCTV में पुलिस के साथ काला बैग ले जाते दिखा अविनाश शुक्ला

    अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir Offering Theft Case) की जांच अब हर दिन नए मोड़ ले रही है. 24 सेकंड का एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें अविनाश शुक्ला (Avinash Shukla) पुलिस और बैंक कर्मियों के साथ एक सफेद रंग की कार की ओर जाता दिखाई दे रहा है. जिसमें उसके हाथ में मौजूद काले रंग के बैग है. सूत्रों का दावा है कि इसी बैग में वह नकदी थी, जिसे पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बरामद किया था. इधर, पुलिस ने मामले में गिरफ्तार सभी सात आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी कर तलाशी अभियान चलाया. इस दौरान कुछ घरों से जेवरात और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है. अब पुलिस इन दस्तावेजों का सत्यापन कर यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं चोरी के पैसों से कोई संपत्ति तो नहीं खरीदी गई।

    सामने आया CCTV फुटेज 5 जून 2026 की रात 8 बजकर 13 मिनट का बताया जा रहा है. वीडियो में पुलिस टीम, बैंक कर्मियों के साथ आरोपी अविनाश शुक्ला को एक सफेद कार तक ले जाती दिखाई देती है. फुटेज में अविनाश के हाथ में एक काला बैग भी साफ नजर आता है. सूत्रों के मुताबिक, जब ट्रस्ट को मंदिर से चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जानकारी मिली थी, तब पुलिस ने अविनाश शुक्ला के ठिकाने पर पहुंचकर कार्रवाई की थी. इसी दौरान उसके पास से लगभग पांच लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे. हालांकि पुलिस ने इस बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच से जुड़े सूत्र लगातार इस ओर इशारा कर रहे हैं.


    क्या ट्रस्ट को पहले से थी चोरी की जानकारी?

    जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की सूचना ट्रस्ट को पहले ही मिल गई थी. बताया जा रहा है कि 5 जून को ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के निर्देश पर प्रतिनिधियों ने पुलिस के साथ आरोपी के ठिकाने पर पहुंचकर प्रारंभिक कार्रवाई की थी. बताया जा रहा है कि पुलिस के संज्ञान में मामला 7 जून को सार्वजनिक होने से पहले ही आ चुका था. हालांकि उस समय पुलिस को ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं दी गई थी>


    रविवार सुबह सभी आरोपियों के घर पहुंची पुलिस

    मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए अयोध्या पुलिस ने रविवार सुबह एक साथ सभी गिरफ्तार आरोपियों के घरों पर छापेमारी की. इस दौरान पुलिस की अलग-अलग टीमें करीब डेढ़ घंटे से ढाई घंटे तक आरोपियों के घरों में मौजूद रहीं. पुलिस ने मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, उसके भतीजे मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, रमा शंकर मिश्रा सहित सभी सात आरोपियों के घरों की बारीकी से तलाशी ली. इस कार्रवाई की अगुवाई डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारी ने की. तलाशी के दौरान परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई, जरूरी दस्तावेजों की जांच हुई और कई बिंदुओं पर लिखापढ़ी भी की गई.


    जिला प्रशासन की टीम भी रही साथ

    इस पूरी कार्रवाई की खास बात यह रही कि केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की टीम भी मौके पर मौजूद रही. प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी तलाशी प्रक्रिया कराई गई. सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक टीम का उद्देश्य कार्रवाई की पारदर्शिता सुनिश्चित करना था. छापेमारी पूरी होने के बाद पुलिस दलों के बाहर निकलने की प्रक्रिया भी प्रशासन की निगरानी में हुई.


    घर-घर हुई बारीकी से तलाशी

    स्वर्गद्वार मोहल्ले में स्थित मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव के घर पुलिस ने कोना-कोना खंगाला. परिजनों की मौजूदगी में अलमारियां खोली गईं, बक्से देखे गए, पर्सों की जांच हुई और घर के अलग-अलग हिस्सों की तलाशी ली गई. करीब ढाई घंटे तक चली इस कार्रवाई के बाद पुलिस टीम वापस लौट गई. तलाशी के दौरान गवाह के रूप में मौजूद एक पड़ोसी ने बताया कि पुलिस ने घर का कोई हिस्सा नहीं छोड़ा. उसके अनुसार पुलिस ने अलमारियों से लेकर बक्सों और अन्य सामान तक की जांच की, लेकिन तलाशी के दौरान कोई बड़ी नकदी या संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई. पुलिस आवश्यक जानकारी और दस्तावेज जुटाकर वापस चली गई. हालांकि पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.


    जेवरात और प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले

    जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कुछ आरोपियों के घरों से जेवरात और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं. अब पुलिस इन दस्तावेजों का सत्यापन कराएगी. जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि जिन संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं, वे कब खरीदी गईं, उनकी कीमत क्या है और खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था. यदि जांच में यह सामने आता है कि चोरी की रकम से कोई संपत्ति खरीदी गई है तो आगे की कानूनी कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।


    आर्थिक लेनदेन की भी होगी जांच

    पुलिस अब केवल बरामद नकदी या दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहना चाहती. जांच का अगला चरण आरोपियों के बैंक खातों, आर्थिक लेनदेन और हाल के वर्षों में हुई संपत्ति खरीद की जांच पर केंद्रित रहेगा. सूत्रों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो आय के स्रोत, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं. इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि कथित चोरी की रकम का उपयोग आखिर कहां और किस रूप में किया गया. हालांकि कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और लगातार छापेमारी भी चल रही है, लेकिन इस मामले में अभी कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं. जैसे:
    – यदि 5 जून को ही पुलिस को जानकारी मिल गई थी तो औपचारिक शिकायत बाद में क्यों दर्ज हुई?
    – CCTV में दिखाई देने वाला काला बैग क्या वास्तव में बरामद नकदी से जुड़ा था?
    – पांच लाख रुपये की बरामदगी का आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहता है?
    – जिन संपत्ति दस्तावेजों की जांच हो रही है, उनका इस मामले से क्या संबंध निकलता है?
    – क्या जांच में और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है?