Tag: Ram Mandir

  • शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी

    शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी


    अयोध्या  अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दानपात्रों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों को लेकर देशभर में चर्चा के बीच द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने मंदिरों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जबलपुर प्रवास के दौरान उन्होंने कहा कि मंदिरों को केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से संचालित किया जाना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने सनातन धर्म बोर्ड या सनातन धर्म संरक्षण समिति के गठन की मांग भी रखी।

    परमहंसी गंगा आश्रम के लिए रवाना होने से पहले जबलपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जब किसी कार्य की जिम्मेदारी उन लोगों को सौंप दी जाती है, जिन्हें उस विषय का पर्याप्त ज्ञान और अनुभव नहीं होता, तब इस प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं। उनका कहना था कि मंदिरों की देखरेख करने वाले कई अधिकारी और कर्मचारी मंदिरों को धार्मिक आस्था के केंद्र के बजाय पर्यटन स्थल के रूप में देखते हैं, जबकि करोड़ों श्रद्धालु वहां दर्शन, साधना और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति के लिए जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के अधिकांश मंदिर शासन के अधीन हैं और इनकी देखरेख करने वाले अधिकारियों का लगातार तबादला होता रहता है। ऐसे में उन्हें न तो धार्मिक परंपराओं की गहरी समझ होती है और न ही शास्त्रों, विधि-विधान तथा पाप-पुण्य की अवधारणा का पर्याप्त ज्ञान होता है। यही कारण है कि मंदिरों के संचालन और संरक्षण में अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।

    अयोध्या में सामने आई कथित चोरी की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी मेहनत और विश्वास की कमाई मंदिरों में अर्पित करते हैं, इसलिए उस धन का उपयोग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि किसी ने इस प्रकार का अपराध किया है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि मंदिरों की आय का उपयोग गौशालाओं, पाठशालाओं, यज्ञशालाओं, धर्मशालाओं और औषधालयों जैसे जनकल्याणकारी कार्यों में होना चाहिए। इसके साथ ही मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों का भी समुचित विकास किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।

    उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद यह अपेक्षा थी कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा पद्धति और परंपराओं को अधिक मजबूती मिलेगी, लेकिन कई क्षेत्रों में यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्थलों का संचालन ऐसे लोगों को सौंपा जाना चाहिए जिन्हें धर्म, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों की समझ हो। उन्होंने सरकारों से भी आग्रह किया कि वे मंदिरों की संपत्तियों और धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं, लेकिन धार्मिक संस्थानों के धन और संचालन में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचें।

  • राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच

    राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच


    लखनऊ ।
    श्रीराम मंदिर (Shri Ram Temple) के चंदा गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज न कराना सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो ट्रस्ट ने केस दर्ज नहीं कराया है। गबन के साक्ष्य मिल चुके हैं, बड़ी रकम भी बरामद हुई और संदिग्ध भी पकड़े गए, उसके भी रिपोर्ट न करना गंभीर सवाल खड़े करता है। सीधेतौर पर अब ट्रस्ट के बड़े जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

    प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट ने मामला दबाए रखा था। जब मीडिया में उजागर हुआ तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली। जो पदाधिकारी आएदिन तमाम बयान देते रहते थे वह अब सामने आने को तैयार नहीं हैं। इस बीच ट्रस्ट ने खुद ही संदिग्ध पकड़े। उनकी निशानदेही पर रकम बरामद की। मतलब इससे साबित हो चुका है कि चंदा राशि चोरी की गई। ऐसे में ट्रस्ट को मामले में केस दर्ज करवाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। एफआईआर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई जा रही है? इसकी वजह नहीं पता चल रही है। हालांकि ऐसे में कयास है कि किसी न किसी को बचाने के लिए पर्दा डाला जा रहा है।


    अब एसआईटी आगे, सब पीछे

    मामले में भले ही एसआईटी (SIT) गठित कर दी गई हो लेकिन मामला आपराधिक है। इसलिए केस दर्ज होना चाहिए थे। उसके साथ एसआईटी की भी जांच जारी रहती। चूंकि अब एसआईटी गठित हो चुकी है तो पूरा मामला पीछे छूट जाएगा, खासकर एफआईआर न दर्ज करवाने वाला। अब हर सवाल पर यही होगा कि एसआईटी जांच कर रही है, उसके बाद ही कुछ कार्रवाई की जाएगी।

    ये किसी ट्रस्ट का काम नहीं
    जिस तरह से अब तक संदिग्ध पकड़े गए और फिर नकदी बरामद की गई, ये कार्य करना किसी ट्रस्ट या निजी संस्था आदि का नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि चोरी हुई है तो पहले एफआईआर करवानी चाहिए। फिर पुलिस या अन्य जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपियों से पूछताछ, बरामदगी आदि की कार्रवाई करती।


    एसआईटी जुटाएगी ब्योरा, संदिग्धों से पूछताछ भी करेगी

    राम मंदिर के चढ़ावे में गबन के मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र भी सक्रिय हो गया है। रविवार को पीएमओ की तरफ से एक बड़े अफसर के मंदिर पहुंचने की चर्चा है। अफसर अपने स्तर से जांच पड़ताल के बाद जानकारी जुटाकर पीएमओ को देंगे। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

    वहीं, मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) सोमवार को अयोध्या पहुंचेगी। टीम ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जानकारी लेने के साथ मंदिर के कर्मचारियों और चिह्नित संदिग्धों से पूछताछ करेगी। ट्रस्ट की ओर से की गई अब तक की जांच का पूरा ब्योरा भी जुटाएगी।

    इस बीच एक सप्ताह पहले उजागर हुए इस मामले में गबन के साक्ष्य मिलने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। मंदिर की दान राशि में हेरफेर का मामला बीते सप्ताह उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारी तब से खुद ही गोपनीय जांच में जुटे हैं। ट्रस्ट के ऑफिस के पास किसी भी बाहरी शख्स के जाने पर रोक है।

    इन सबके बीच शनिवार को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं।

    चर्चा थी कि एसआईटी रविवार से जांच शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू करेगी। टीम केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं की जांच ही नहीं, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी की संलिप्तता या प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलने पर उनके अधिकार सीमित किए जा सकते हैं।


    चंपत राय बीमार, अनिल मिश्रा चिकित्सकीय जांच के लिए केरल गए

    राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी के अयोध्या पहुंचने की तैयारी के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।

    सूत्रों के अनुसार चंपत राय को जुकाम के साथ शुगर बढ़ने की शिकायत है, जिसके चलते वह स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। अनिल मिश्रा आंखों की जांच और चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।

  • दिग्विजय सिंह का अयोध्या दौरा 26 मार्च को, रामलला के करेंगे दर्शन

    दिग्विजय सिंह का अयोध्या दौरा 26 मार्च को, रामलला के करेंगे दर्शन


    भोपाल । मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह 26 मार्च को अयोध्या की यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वे राम मंदिर अयोध्या में विराजमान रामलला के दर्शन करेंगे और हनुमानगढ़ी में भी पूजा-अर्चना करेंगे। राम मंदिर निर्माण के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा होगा, जिसे लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोण से यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    दिग्विजय सिंह ने मंदिर निर्माण के दौरान एक संकल्प लिया था कि जब तक प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर पूर्ण रूप से तैयार नहीं हो जाता, तब तक वे अयोध्या जाकर दर्शन नहीं करेंगे। अब जब राम मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है, तो वे अपने उसी संकल्प को पूरा करने के लिए अयोध्या जा रहे हैं।

    उनकी यह यात्रा केवल एक धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि उनके व्यक्तिगत संकल्प और विश्वास को भी दर्शाती है। लंबे समय से राम मंदिर निर्माण को लेकर देशभर में चर्चा और भावनात्मक जुड़ाव रहा है, ऐसे में मंदिर निर्माण के बाद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों के अयोध्या दौरे भी लगातार हो रहे हैं।

    अयोध्या, जो कि अयोध्या में स्थित है, हिंदू आस्था का एक प्रमुख केंद्र है और राम मंदिर निर्माण के बाद इसकी धार्मिक महत्ता और भी बढ़ गई है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दिग्विजय सिंह का यह दौरा भी इसी क्रम में देखा जा रहा है, जहां वे व्यक्तिगत श्रद्धा के साथ भगवान श्रीराम के दर्शन करेंगे।

    राजनीतिक दृष्टि से भी यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दिग्विजय सिंह लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उनके हर कदम पर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहती है। हालांकि, उनके इस दौरे को व्यक्तिगत आस्था और संकल्प से जोड़कर देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार अयोध्या प्रवास के दौरान वे मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। साथ ही वे हनुमानगढ़ी में भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे, जो अयोध्या का एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।

    राम मंदिर का निर्माण देश के लिए एक ऐतिहासिक और भावनात्मक घटना रहा है और इसके पूर्ण होने के साथ ही अयोध्या एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। इस बीच, दिग्विजय सिंह का यह दौरा उनके व्यक्तिगत संकल्प की पूर्ति के साथ-साथ आस्था और श्रद्धा का भी प्रतीक बनकर सामने आया है।