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  • UP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का एक्शन, आरोपियों के घरों पर मारे छापे

    UP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का एक्शन, आरोपियों के घरों पर मारे छापे


    लखनऊ।
    अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir offering theft case) में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. इस केस की जांच कर रही टीमों ने रविवार को अयोध्या में रहने वाले सभी आरोपियों के घरों पर छापेमारी की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अपनी जांच में तेजी ला रही है, ताकि इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों का पूरी तरह खुलासा हो सके. पुलिस इस मामले के हर एक पहलू को गहराई से देख रही है, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

    जांच टीम ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए अयोध्या में रहने वाले आरोपियों के घरों पर कार्रवाई की है. पुलिस की अलग-अलग टीमें अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, करुणेश पांडे और रमा शंकर मिश्रा के घर पहुंचीं. इन सभी ठिकानों पर पुलिस पूरी बारीकी से तलाशी ले रही है, ताकि केस से जुड़े अहम सबूत जुटाए जा सकें. जांच टीमें एक-एक घर के कोने खंगाल रही हैं ताकि कोई भी सबूत छूटने न पाए।


    दो नाम छोड़कर बाकी सभी के परिवारों से पूछताछ

    कार्रवाई के दौरान लोकल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस इन आरोपियों के परिवार के सदस्यों से कड़ी पूछताछ कर रही है. हालांकि, जांच टीम सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और प्रतापगढ़ के रहने वाले अविनाश शुक्ला को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों के परिजनों से सवाल-जवाब करने में जुटी है. साथ ही पुलिस आस-पड़ोस में रहने वाले लोगों से भी इन आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है. पुलिस यह जानना चाहती है कि इन लोगों की गतिविधियां पिछले कुछ समय में कैसी रही हैं।

    इस मामले की गहराई से जांच कर रही टीमें सिर्फ चोरी की कड़ियों को ही नहीं जोड़ रहीं, बल्कि आरोपियों की कमाई के जरियों का भी पता लगा रही हैं. अपराध के जरिए जो पैसा या संपत्ति जुटाई गई है, उसके सोर्स को ट्रेस किया जा रहा है. आरोपियों के पास मौजूद संपत्तियां कहां से आईं और उनके पास फंड कहां से आ रहा था, इसकी पूरी हिस्ट्री निकाली जा रही है. पुलिस बैंकों के खातों और लेन-देन की भी जांच कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि पैसे को कहां-कहां भेजा गया या किस काम में इस्तेमाल किया गया।

    इस मामले में गिरफ्तार किए गए ये सभी आरोपी राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और कैश को गिनने के काम से जुड़े हुए थे. जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि इन्होंने वहीं से पैसों का हेरफेर किया. जांच टीमों ने अब तक इस मामले में करीब 79 लाख 85 हजार रुपये बरामद कर लिए हैं. इस मामले में पुलिस ने चोरी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया है।

    यह बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई तीन सदस्यों की SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है. कोर्ट ने दो दिन पहले ही सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक के लिए जेल भेजा था. पुलिस सोमवार को इन सभी आरोपियों को दोबारा कोर्ट में पेश करेगी. मामले की कड़ियों को जोड़ने और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस अदालत से इन सभी की कस्टडी रिमांड मांगेगी, ताकि बाकी की रकम और संपत्ति का भी पता लगाया जा सके।

  • चढ़ावा गबन मामले पर गरमाई सियासत, पवन पांडेय बोले- 'बुलडोजर नहीं चला, न्याय में भी दो आंख'

    चढ़ावा गबन मामले पर गरमाई सियासत, पवन पांडेय बोले- 'बुलडोजर नहीं चला, न्याय में भी दो आंख'


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने एक बार फिर इस मुद्दे पर भाजपा सरकार और ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं ने करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंचाई है।

    पवन पांडेय ने कहा कि इतिहास में महमूद गजनवी पर कई बार मंदिरों को लूटने के आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन उनके अनुसार राम मंदिर चढ़ावा मामले में जिस तरह की कथित घटनाएं सामने आई हैं, वे उससे भी अधिक गंभीर हैं। उन्होंने कहा, “40 दिनों में 70 बार लूटा, इन्होंने तो लूटने में गजनवी को भी पीछे छोड़ दिया।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जिन लोगों पर राम मंदिर की व्यवस्था, सुरक्षा और श्रद्धालुओं के चढ़ावे की जिम्मेदारी थी, वही लोग कथित तौर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहे। उनके अनुसार यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ विश्वासघात है।

    पूर्व मंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अपराधों पर सख्त कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन इस मामले में वैसी कठोर कार्रवाई दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि यदि यह इतना बड़ा मामला है तो निष्पक्ष और तेज जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    पवन पांडेय ने कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और करोड़ों लोगों की आस्था के आधार पर बना है। ऐसे में यदि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े किसी भी प्रकार के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रह सके।

    राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर पहले भी विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से जांच की मांग उठाई जा चुकी है। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई कर रही हैं। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

  • राम मंदिर विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री की दो टूक, बोले- सरकारी सजा से नहीं बचेंगे, ईश्वर का न्याय भी होगा

    राम मंदिर विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री की दो टूक, बोले- सरकारी सजा से नहीं बचेंगे, ईश्वर का न्याय भी होगा

    छतरपुर। अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी के मामले को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। इस बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने भगवान के मंदिर और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ छल किया है तो वह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ विश्वासघात है। ऐसे लोगों को कानून के साथ-साथ ईश्वरीय न्याय का भी सामना करना पड़ेगा।

    इंडोनेशिया में आयोजित हनुमान कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि मंदिर में चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी केवल धन की चोरी नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की श्रद्धा और विश्वास की चोरी है। उन्होंने कहा कि जो लोग भगवान के नाम पर चढ़ाई गई राशि में अनियमितता करते हैं वे महापाप के भागीदार बनते हैं।

    उन्होंने अपने संबोधन में रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि माता सीता का हरण करने वाले रावण का पूरा वंश नष्ट हो गया था। उसी प्रकार यदि कोई भगवान श्रीराम के मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ करता है तो उसे भी उसके कर्मों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को केवल सरकारी कार्रवाई ही नहीं बल्कि ईश्वर के न्याय का भी सामना करना होगा।

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज होना एक महत्वपूर्ण कदम है लेकिन जांच को पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार यदि निष्पक्ष जांच होगी तो पूरे प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों और जिम्मेदार लोगों का भी खुलासा होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

    राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी का मुद्दा उस समय सामने आया जब इस मामले को लेकर शिकायतें और आरोप सार्वजनिक हुए। इसके बाद जांच की मांग तेज हुई और विभिन्न स्तरों पर बैठकों तथा प्रशासनिक कार्रवाई का दौर शुरू हुआ। बाद में विशेष जांच के आधार पर संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और कई लोगों को नामजद किया गया।

    मामले के बीच ट्रस्ट में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के पद छोड़ने की खबर भी सामने आई। हालांकि पूरे प्रकरण की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सत्य देर-सवेर सामने आता है और न्याय की प्रक्रिया पर विश्वास रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में किसी भी दोषी को उसके कर्मों का फल अवश्य मिलता है।


  • अयोध्या विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- प्रमाण हैं तो SIT को दें, बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करें

    अयोध्या विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- प्रमाण हैं तो SIT को दें, बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करें


    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया में आयोजित एक जनसभा के दौरान विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और जय श्रीराम का उद्घोष करने वालों पर कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आरोप जनता स्वीकार नहीं करेगी।

    सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय ऐसा था जब कुछ राजनीतिक दल और उनके समर्थक यह कहते थे कि भगवान राम का अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का विरोध करने के लिए अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ी गई और मंदिर निर्माण रोकने के प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर वे लोग थे जो जय श्रीराम का नारा लगाने वालों पर लाठीचार्ज और गोली चलाने तक से पीछे नहीं हटते थे, लेकिन आज वही लोग आस्था के साथ खिलवाड़ होने का आरोप लगा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग राम नवमी, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, कांवड़ यात्रा और दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान कानून व्यवस्था बिगड़ने का आरोप झेलते रहे, वे अब अयोध्या को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जनता को स्वीकार नहीं है।

    योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि उसने देश में भ्रष्टाचार और बेईमानी को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि देश को केवल लूटा ही नहीं गया बल्कि उसकी व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया गया। ऐसे लोग अब अयोध्या और धार्मिक आस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जो उचित नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच होगी और सच सभी के सामने लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    अपने संबोधन के अंत में सीएम योगी ने विपक्ष से अपील की कि यदि उनके पास किसी भी आरोप से जुड़े तथ्य या प्रमाण हैं तो उन्हें विशेष जांच दल यानी एसआईटी के सामने प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि यदि कोई ठोस सबूत नहीं है तो बेबुनियाद आरोप लगाने से बचना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

  • ट्रस्ट में हलचल, जांच के बीच बड़े अधिकारियों के हटने और कई कर्मियों पर शिकंजे के संकेत

    ट्रस्ट में हलचल, जांच के बीच बड़े अधिकारियों के हटने और कई कर्मियों पर शिकंजे के संकेत


    नई दिल्ली । राम मंदिर से जुड़े दान संग्रह में कथित अनियमितताओं की जांच अब एक नए और अहम मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। जांच एजेंसियों और ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी स्वेच्छा से अपने पदों से अलग हो सकते हैं। माना जा रहा है कि यह कदम जांच की पारदर्शिता बनाए रखने और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया के तहत उठाया जा सकता है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी स्पष्ट नहीं है।

    सूत्रों के मुताबिक जांच के दायरे में अब केवल संदिग्ध कर्मचारियों तक ही मामला सीमित नहीं रहा, बल्कि उन सभी जिम्मेदार पदों की भूमिका भी परखी जा रही है जिन पर दान प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी। इसमें गणना करने वाले कर्मियों, कैश हैंडलिंग से जुड़े कर्मचारियों और कुछ बैंक कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि किसी भी वित्तीय प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी होती है, और यदि इसमें चूक हुई है तो उसकी भी जांच जरूरी है।

    जांच से जुड़े संकेतों के अनुसार कुछ नाम ऐसे भी सामने आए हैं जिन पर आगे चलकर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इनमें कथित रूप से रकम के हेरफेर में शामिल कर्मचारियों के साथ कुछ बैंकिंग स्तर के लोग भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, हालांकि यह जांच की दिशा और निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।

    इसी बीच ट्रस्ट प्रशासन से जुड़े कुछ वरिष्ठ नाम भी चर्चा में आए हैं। सूत्रों के अनुसार महासचिव स्तर के पदाधिकारियों सहित कुछ अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के ट्रस्ट से अलग होने की संभावना जताई जा रही है। इसे प्रशासनिक जवाबदेही और संगठनात्मक शुद्धिकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

    जांच टीम ने मंदिर परिसर में नियुक्तियों और व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा भी शुरू कर दी है। 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अब तक की नियुक्तियों, प्रशासनिक फैसलों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। मंदिर परिसर में लगभग 800 कर्मी कार्यरत बताए जाते हैं, जिनमें एक बड़ा हिस्सा ट्रस्ट द्वारा नियुक्त है।

    सूत्रों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक लंबे समय से तैनात कर्मी की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिसकी सेवा अवधि लगभग 17 वर्षों से अधिक बताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि इतने लंबे कार्यकाल में उसकी जिम्मेदारियां और कार्यक्षेत्र किस प्रकार का रहा और क्या उसमें किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत के संकेत मिलते हैं।

    फिलहाल पूरा मामला जांच के प्रारंभिक लेकिन महत्वपूर्ण चरण में है, जहां दस्तावेज, बयान और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि यह जांच किन बड़े निष्कर्षों और कार्रवाई तक पहुंचती है।

  • राम मंदिर दान घोटाला जांच में उलझन, सीसीटीवी बैकअप और फुटेज विवाद बना बड़ी चुनौती

    राम मंदिर दान घोटाला जांच में उलझन, सीसीटीवी बैकअप और फुटेज विवाद बना बड़ी चुनौती


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े दान संग्रह में कथित अनियमितताओं के मामले ने जांच एजेंसियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेष जांच दल यानी एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठोस डिजिटल साक्ष्यों को एकत्र करना है, क्योंकि घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों का बैकअप सीमित अवधि का ही है। जानकारी के अनुसार, सिस्टम में केवल लगभग 45 दिन का ही रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है, जिससे पुराने समय की गतिविधियों की पुष्टि कर पाना बेहद कठिन हो गया है।

    जांच में सामने आया है कि उपलब्ध फुटेज में कुछ जगहों पर छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं, जिससे मामले की जटिलता और बढ़ गई है। इसी कारण अब जांच मुख्य रूप से फोरेंसिक विश्लेषण, कर्मचारियों के बयान और पूछताछ में सामने आ रहे तथ्यों पर केंद्रित हो गई है। एसआईटी लगातार संदिग्ध कर्मचारियों और संबंधित पदाधिकारियों से अलग अलग पूछताछ कर रही है ताकि घटनाक्रम की परतें खोली जा सकें।

    राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक पूर्व पदाधिकारी द्वारा लगाए गए आरोपों में यह भी कहा गया था कि कुछ महीनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग डिलीट की गई थी। हालांकि तकनीकी सीमाओं और बैकअप उपलब्ध न होने के कारण इन दावों की पुष्टि करना कठिन साबित हो रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि हाल के 45 दिनों में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसके साक्ष्य मिलने की संभावना अधिक है, लेकिन उससे पहले की घटनाओं को प्रमाणित करना चुनौतीपूर्ण है।

    सूत्रों के अनुसार, जांच में अब तक पूछताछ के दौरान कई विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। कुछ संदिग्धों ने लंबे समय से वित्तीय हेरफेर की बात स्वीकार करने के संकेत दिए हैं, जिससे जांच को एक नई दिशा मिली है। हालांकि यह स्पष्ट करना अभी बाकी है कि कथित गड़बड़ी कब से और किस स्तर पर चल रही थी।

    जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कथित रूप से नकदी और अन्य चढ़ावे की राशि के प्रबंधन में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। लेकिन बिना मजबूत डिजिटल साक्ष्य के केवल बयानों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इसी वजह से एसआईटी का फोकस अब तकनीकी जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और क्रॉस वेरिफिकेशन पर बढ़ गया है।

    पूरे मामले में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सीमित सीसीटीवी डेटा और विवादित आरोपों के बीच वास्तविक सच्चाई को निष्पक्ष तरीके से सामने लाया जाए। जांच आगे बढ़ने के साथ ही उम्मीद है कि नए तथ्य सामने आएंगे, जो पूरे प्रकरण की परतें खोल सकते हैं।

  • शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी

    शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी


    अयोध्या  अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दानपात्रों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों को लेकर देशभर में चर्चा के बीच द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने मंदिरों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जबलपुर प्रवास के दौरान उन्होंने कहा कि मंदिरों को केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से संचालित किया जाना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने सनातन धर्म बोर्ड या सनातन धर्म संरक्षण समिति के गठन की मांग भी रखी।

    परमहंसी गंगा आश्रम के लिए रवाना होने से पहले जबलपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जब किसी कार्य की जिम्मेदारी उन लोगों को सौंप दी जाती है, जिन्हें उस विषय का पर्याप्त ज्ञान और अनुभव नहीं होता, तब इस प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं। उनका कहना था कि मंदिरों की देखरेख करने वाले कई अधिकारी और कर्मचारी मंदिरों को धार्मिक आस्था के केंद्र के बजाय पर्यटन स्थल के रूप में देखते हैं, जबकि करोड़ों श्रद्धालु वहां दर्शन, साधना और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति के लिए जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के अधिकांश मंदिर शासन के अधीन हैं और इनकी देखरेख करने वाले अधिकारियों का लगातार तबादला होता रहता है। ऐसे में उन्हें न तो धार्मिक परंपराओं की गहरी समझ होती है और न ही शास्त्रों, विधि-विधान तथा पाप-पुण्य की अवधारणा का पर्याप्त ज्ञान होता है। यही कारण है कि मंदिरों के संचालन और संरक्षण में अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।

    अयोध्या में सामने आई कथित चोरी की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी मेहनत और विश्वास की कमाई मंदिरों में अर्पित करते हैं, इसलिए उस धन का उपयोग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि किसी ने इस प्रकार का अपराध किया है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि मंदिरों की आय का उपयोग गौशालाओं, पाठशालाओं, यज्ञशालाओं, धर्मशालाओं और औषधालयों जैसे जनकल्याणकारी कार्यों में होना चाहिए। इसके साथ ही मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों का भी समुचित विकास किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।

    उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद यह अपेक्षा थी कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा पद्धति और परंपराओं को अधिक मजबूती मिलेगी, लेकिन कई क्षेत्रों में यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्थलों का संचालन ऐसे लोगों को सौंपा जाना चाहिए जिन्हें धर्म, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों की समझ हो। उन्होंने सरकारों से भी आग्रह किया कि वे मंदिरों की संपत्तियों और धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं, लेकिन धार्मिक संस्थानों के धन और संचालन में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचें।

  • राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच

    राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच


    लखनऊ ।
    श्रीराम मंदिर (Shri Ram Temple) के चंदा गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज न कराना सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो ट्रस्ट ने केस दर्ज नहीं कराया है। गबन के साक्ष्य मिल चुके हैं, बड़ी रकम भी बरामद हुई और संदिग्ध भी पकड़े गए, उसके भी रिपोर्ट न करना गंभीर सवाल खड़े करता है। सीधेतौर पर अब ट्रस्ट के बड़े जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

    प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट ने मामला दबाए रखा था। जब मीडिया में उजागर हुआ तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली। जो पदाधिकारी आएदिन तमाम बयान देते रहते थे वह अब सामने आने को तैयार नहीं हैं। इस बीच ट्रस्ट ने खुद ही संदिग्ध पकड़े। उनकी निशानदेही पर रकम बरामद की। मतलब इससे साबित हो चुका है कि चंदा राशि चोरी की गई। ऐसे में ट्रस्ट को मामले में केस दर्ज करवाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। एफआईआर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई जा रही है? इसकी वजह नहीं पता चल रही है। हालांकि ऐसे में कयास है कि किसी न किसी को बचाने के लिए पर्दा डाला जा रहा है।


    अब एसआईटी आगे, सब पीछे

    मामले में भले ही एसआईटी (SIT) गठित कर दी गई हो लेकिन मामला आपराधिक है। इसलिए केस दर्ज होना चाहिए थे। उसके साथ एसआईटी की भी जांच जारी रहती। चूंकि अब एसआईटी गठित हो चुकी है तो पूरा मामला पीछे छूट जाएगा, खासकर एफआईआर न दर्ज करवाने वाला। अब हर सवाल पर यही होगा कि एसआईटी जांच कर रही है, उसके बाद ही कुछ कार्रवाई की जाएगी।

    ये किसी ट्रस्ट का काम नहीं
    जिस तरह से अब तक संदिग्ध पकड़े गए और फिर नकदी बरामद की गई, ये कार्य करना किसी ट्रस्ट या निजी संस्था आदि का नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि चोरी हुई है तो पहले एफआईआर करवानी चाहिए। फिर पुलिस या अन्य जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपियों से पूछताछ, बरामदगी आदि की कार्रवाई करती।


    एसआईटी जुटाएगी ब्योरा, संदिग्धों से पूछताछ भी करेगी

    राम मंदिर के चढ़ावे में गबन के मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र भी सक्रिय हो गया है। रविवार को पीएमओ की तरफ से एक बड़े अफसर के मंदिर पहुंचने की चर्चा है। अफसर अपने स्तर से जांच पड़ताल के बाद जानकारी जुटाकर पीएमओ को देंगे। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

    वहीं, मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) सोमवार को अयोध्या पहुंचेगी। टीम ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जानकारी लेने के साथ मंदिर के कर्मचारियों और चिह्नित संदिग्धों से पूछताछ करेगी। ट्रस्ट की ओर से की गई अब तक की जांच का पूरा ब्योरा भी जुटाएगी।

    इस बीच एक सप्ताह पहले उजागर हुए इस मामले में गबन के साक्ष्य मिलने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। मंदिर की दान राशि में हेरफेर का मामला बीते सप्ताह उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारी तब से खुद ही गोपनीय जांच में जुटे हैं। ट्रस्ट के ऑफिस के पास किसी भी बाहरी शख्स के जाने पर रोक है।

    इन सबके बीच शनिवार को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं।

    चर्चा थी कि एसआईटी रविवार से जांच शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू करेगी। टीम केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं की जांच ही नहीं, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी की संलिप्तता या प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलने पर उनके अधिकार सीमित किए जा सकते हैं।


    चंपत राय बीमार, अनिल मिश्रा चिकित्सकीय जांच के लिए केरल गए

    राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी के अयोध्या पहुंचने की तैयारी के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।

    सूत्रों के अनुसार चंपत राय को जुकाम के साथ शुगर बढ़ने की शिकायत है, जिसके चलते वह स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। अनिल मिश्रा आंखों की जांच और चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।

  • दिग्विजय सिंह का अयोध्या दौरा 26 मार्च को, रामलला के करेंगे दर्शन

    दिग्विजय सिंह का अयोध्या दौरा 26 मार्च को, रामलला के करेंगे दर्शन


    भोपाल । मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह 26 मार्च को अयोध्या की यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वे राम मंदिर अयोध्या में विराजमान रामलला के दर्शन करेंगे और हनुमानगढ़ी में भी पूजा-अर्चना करेंगे। राम मंदिर निर्माण के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा होगा, जिसे लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोण से यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    दिग्विजय सिंह ने मंदिर निर्माण के दौरान एक संकल्प लिया था कि जब तक प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर पूर्ण रूप से तैयार नहीं हो जाता, तब तक वे अयोध्या जाकर दर्शन नहीं करेंगे। अब जब राम मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है, तो वे अपने उसी संकल्प को पूरा करने के लिए अयोध्या जा रहे हैं।

    उनकी यह यात्रा केवल एक धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि उनके व्यक्तिगत संकल्प और विश्वास को भी दर्शाती है। लंबे समय से राम मंदिर निर्माण को लेकर देशभर में चर्चा और भावनात्मक जुड़ाव रहा है, ऐसे में मंदिर निर्माण के बाद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों के अयोध्या दौरे भी लगातार हो रहे हैं।

    अयोध्या, जो कि अयोध्या में स्थित है, हिंदू आस्था का एक प्रमुख केंद्र है और राम मंदिर निर्माण के बाद इसकी धार्मिक महत्ता और भी बढ़ गई है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दिग्विजय सिंह का यह दौरा भी इसी क्रम में देखा जा रहा है, जहां वे व्यक्तिगत श्रद्धा के साथ भगवान श्रीराम के दर्शन करेंगे।

    राजनीतिक दृष्टि से भी यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दिग्विजय सिंह लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उनके हर कदम पर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहती है। हालांकि, उनके इस दौरे को व्यक्तिगत आस्था और संकल्प से जोड़कर देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार अयोध्या प्रवास के दौरान वे मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। साथ ही वे हनुमानगढ़ी में भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे, जो अयोध्या का एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।

    राम मंदिर का निर्माण देश के लिए एक ऐतिहासिक और भावनात्मक घटना रहा है और इसके पूर्ण होने के साथ ही अयोध्या एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। इस बीच, दिग्विजय सिंह का यह दौरा उनके व्यक्तिगत संकल्प की पूर्ति के साथ-साथ आस्था और श्रद्धा का भी प्रतीक बनकर सामने आया है।