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  • एलआरएस के तहत विदेशी शेयर-बॉन्ड में भारतीयों का निवेश 111% बढ़ा, अगस्त में 321.53 मिलियन डॉलर पहुंचा

    एलआरएस के तहत विदेशी शेयर-बॉन्ड में भारतीयों का निवेश 111% बढ़ा, अगस्त में 321.53 मिलियन डॉलर पहुंचा


    नई दिल्ली । विदेशी शेयर और बॉन्ड बाजारों में भारतीयों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक के अक्टूबर 2026 बुलेटिन के अनुसार, उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत अगस्त 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट बाजारों में भारतीयों का निवेश सालाना आधार पर 111 प्रतिशत बढ़कर 321.53 मिलियन डॉलर पहुंच गया। अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 152.18 मिलियन डॉलर था। एक साल के भीतर निवेश में दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारतीय निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाती है।

    हालांकि, मासिक आधार पर विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश में लगभग सात प्रतिशत की गिरावट आई। इससे पहले जून 2026 में इस श्रेणी में निवेश 460 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इस लिहाज से अगस्त में दर्ज आंकड़ा जून के उच्चतम स्तर से कम रहा, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें उल्लेखनीय वृद्धि बनी रही।

    आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उदारीकृत प्रेषण योजना के तहत कुल बाहरी प्रेषण 28.98 अरब डॉलर रहा। अगस्त 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट बाजारों में निवेश का हिस्सा कुल एलआरएस प्रेषण का लगभग 11.7 प्रतिशत था। अगस्त 2025 में यह अनुपात केवल 5.8 प्रतिशत रहा था। यानी कुल प्रेषण में विदेशी वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश की हिस्सेदारी एक साल में दोगुने से अधिक हो गई।

    एलआरएस के तहत सभी श्रेणियों में किए गए कुल बाहरी प्रेषण में भी वृद्धि दर्ज की गई। अगस्त 2026 में यह राशि बढ़कर 2.74 अरब डॉलर हो गई, जबकि अगस्त 2025 में 2.64 अरब डॉलर थी। इस तरह सालाना आधार पर कुल प्रेषण में 3.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जुलाई 2026 के 2.58 अरब डॉलर के मुकाबले अगस्त में यह लगभग छह प्रतिशत अधिक रहा।

    विदेश यात्रा एलआरएस के तहत खर्च की सबसे बड़ी श्रेणी बनी हुई है। अगस्त 2026 में भारतीयों ने विदेश यात्रा पर 1.63 अरब डॉलर खर्च किए, जो कुल बाहरी प्रेषण का करीब 59 प्रतिशत था। यह खर्च पिछले वर्ष की तुलना में लगभग एक प्रतिशत और जुलाई 2026 के मुकाबले 11.4 प्रतिशत अधिक रहा। आंकड़े बताते हैं कि विदेश यात्रा से जुड़े भुगतान कुल प्रेषण में सबसे बड़ा हिस्सा बनाए हुए हैं।

    कारोबारी यात्रा पर खर्च में सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी देखने को मिली। जुलाई 2026 में इस मद में 10.9 मिलियन डॉलर भेजे गए थे, जबकि अगस्त में यह राशि बढ़कर 51 मिलियन डॉलर हो गई। इस प्रकार एक महीने के भीतर कारोबारी यात्रा से संबंधित प्रेषण लगभग पांच गुना बढ़ गया।

    अन्य श्रेणियों में उपहार के रूप में विदेश भेजी गई राशि अगस्त में 215.72 मिलियन डॉलर रही। निकट संबंधियों के भरण-पोषण के लिए 275.43 मिलियन डॉलर भेजे गए। वहीं, विदेश में अचल संपत्ति खरीदने के लिए 39.59 मिलियन डॉलर और विदेशी बैंकों में जमा करने के लिए 50.78 मिलियन डॉलर का प्रेषण दर्ज किया गया।

    विदेश में चिकित्सा उपचार के लिए भेजी गई राशि में भी वृद्धि हुई। अगस्त 2026 में इस उद्देश्य से किया गया प्रेषण सालाना आधार पर 21.3 प्रतिशत बढ़कर 4.84 मिलियन डॉलर पहुंच गया। कुल आंकड़ों से स्पष्ट है कि एलआरएस के तहत भारतीयों का पैसा विदेश यात्रा, परिवार के भरण-पोषण, संपत्ति खरीद और विदेशी वित्तीय बाजारों में निवेश जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए भेजा जा रहा है। इनमें विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश की बढ़ती हिस्सेदारी अगस्त के आंकड़ों का एक प्रमुख पहलू रही।

  • पीएम मोदी का यूपी और ओडिशा दौरा कल, वाराणसी में एयर डिस्प्ले और भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं का उद्घाटन

    पीएम मोदी का यूपी और ओडिशा दौरा कल, वाराणसी में एयर डिस्प्ले और भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं का उद्घाटन


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश और ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वाराणसी में औद्योगिक विकास से जुड़ी नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर डिस्प्ले में शामिल होंगे। दौरे के अगले चरण में वह ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर पहुंचेंगे, जहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे।

    प्रधानमंत्री का कार्यक्रम उद्योग, रोजगार, महिला भागीदारी, रक्षा क्षमताओं और डिजिटल वित्तीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी पहलों पर केंद्रित रहेगा। दोनों राज्यों में प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए विनिर्माण क्षेत्र और वित्तीय तकनीक से संबंधित सुविधाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

    वाराणसी में प्रधानमंत्री सुबह करीब 11 बजे अरविंद लिमिटेड की नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन करेंगे। आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं पर आधारित इस इकाई से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। परियोजना में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे महिला-नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

    इस इकाई में तैयार होने वाले परिधानों को कंपनी के वैश्विक ग्राहक नेटवर्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाएगा। इससे वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं। परियोजना को उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    वाराणसी में प्रधानमंत्री दोपहर करीब एक बजे नमो घाट पर भारतीय वायुसेना के एयर डिस्प्ले-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। ‘विंग्स ओवर गंगा’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसकी परिचालन क्षमता और हवाई कौशल प्रदर्शित किया जाएगा।

    एयर डिस्प्ले में तेजस, एलसीएच प्रचंड, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे। इनके साथ परिवहन विमानों की भी भागीदारी होगी। भारतीय थलसेना और नौसेना की मौजूदगी के माध्यम से तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त संचालन क्षमता को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में वायुसेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम हवाई करतब दिखाएंगी। इन प्रदर्शनों में विमानों और हेलीकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल, नियंत्रित उड़ान और संचालन संबंधी दक्षता देखने को मिलेगी।

    वाराणसी के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री ओडिशा रवाना होंगे। शाम करीब 4:45 बजे भुवनेश्वर में वह RBI के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

    RBI का नया डेटा सेंटर देश की वित्तीय प्रणाली के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें चार अत्याधुनिक डेटा सेंटर होंगे, जहां महत्वपूर्ण भुगतान और निपटान प्रणालियों सहित RBI की प्रमुख डिजिटल सेवाओं से जुड़े सिस्टम संचालित किए जाएंगे। इस सुविधा को अपटाइम इंस्टीट्यूट के टियर-IV मानक का प्रमाणन मिला है, जो डेटा सेंटर की परिचालन मजबूती और विश्वसनीयता से संबंधित उच्च स्तर का मानक है।

    भुवनेश्वर में स्थापित होने वाला साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान वित्तीय क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता, शोध और प्रशिक्षण को बढ़ावा देगा। यहां क्वांटम कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य उन्नत तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थानों की साइबर सुरक्षा क्षमता मजबूत करना और नई तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ तैयार करना है।

  • रुपए को मजबूती देने और विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार और आरबीआई के कदमों को एसोचैम का समर्थन

    रुपए को मजबूती देने और विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार और आरबीआई के कदमों को एसोचैम का समर्थन


    नई दिल्ली:  
    रुपए में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेश के रुझानों के बीच सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों को उद्योग संगठन एसोचैम ने समर्थन दिया है। संगठन का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच रुपए को सहारा देने, निवेशकों का भरोसा मजबूत करने और दीर्घकालिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयास सही दिशा में हैं। एसोचैम के मुताबिक, भारत की आर्थिक बुनियाद को मजबूत बनाए रखते हुए स्थायी पूंजी प्रवाह बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

    एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के मौजूदा दौर में व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार और आरबीआई के समन्वित प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने रुपए की दीर्घकालिक मजबूती को देश की आर्थिक स्थिति और लगातार विदेशी पूंजी आकर्षित करने की क्षमता से जोड़कर देखा। संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि केवल अस्थायी पूंजी प्रवाह के बजाय लंबे समय तक टिकने वाले निवेश को बढ़ावा देना जरूरी है।

    मिंडा ने पूर्व आरबीआई गवर्नर डी. सुब्बाराव के विचारों का भी समर्थन किया। सुब्बाराव ने कहा था कि रुपए की दीर्घकालिक मजबूती अंततः भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और निरंतर पूंजी प्रवाह आकर्षित करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। एसोचैम अध्यक्ष के अनुसार, संगठन इस विचार से सहमत है और सरकार तथा आरबीआई की ओर से पहले ही उठाए गए कदमों को महत्वपूर्ण मानता है।

    एसोचैम ने दावा किया कि हाल में किए गए उपायों से रुपया अपने हालिया निचले स्तरों से उबरने में सफल रहा है। संगठन ने 31 अगस्त को समाप्त हुई 133 अरब डॉलर की एफसीएनआर (बी) मोबिलाइजेशन विंडो का भी उल्लेख किया। इस पहल को विदेशी मुद्रा जुटाने से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में अहम बताया गया।

    संगठन के मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी. शर्मा ने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। इसके प्रमुख आधारों में पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आरबीआई का 7.1 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान और महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए अपनाई गई संतुलित मौद्रिक नीति शामिल हैं। उनके मुताबिक, ये कारक देश की आर्थिक स्थिरता को समर्थन देते हैं।

    एसोचैम ने विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए वित्त मंत्रालय की ओर से हाल में घोषित कदमों का भी स्वागत किया। इनमें आयकर संशोधन अध्यादेश, 2026 शामिल है। इसके तहत 1 अप्रैल 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई के निवेश पर मिलने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट का प्रावधान किया गया है। संगठन ने इसे विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया।

    इसके अलावा, एसोचैम ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी के दौरान दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर यानी एलटीसीजी और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी को लेकर निवेशकों की राय पर विचार करने की बात कही थी।

    हालांकि, संगठन ने कर व्यवस्था में और सुधार की जरूरत भी बताई। एसोचैम के अनुसार, कर ढांचे को अधिक तर्कसंगत बनाने, नियमों की व्याख्या सरल करने और दीर्घकालिक इक्विटी निवेश को प्रोत्साहित करने वाले उपायों पर विचार किया जाना चाहिए। संगठन ने अल्पकालिक पूंजी प्रवाह की तुलना में लंबे समय तक बने रहने वाले निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

    एसोचैम ने कहा कि भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से वह सरकार, आरबीआई और बाजार नियामक सेबी के साथ मिलकर काम जारी रखेगा। संगठन का मानना है कि स्थिर आर्थिक नीतियां, स्पष्ट कर व्यवस्था और भरोसेमंद निवेश माहौल दीर्घकालिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • आज 17 अक्टूबर को बैंक खुले हैं या बंद, जानें तीसरे शनिवार और महा सप्तमी की छुट्टी का पूरा अपडेट

    आज 17 अक्टूबर को बैंक खुले हैं या बंद, जानें तीसरे शनिवार और महा सप्तमी की छुट्टी का पूरा अपडेट

    नई दिल्ली ।शनिवार को बैंक जाने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए 17 अक्टूबर 2026 की तारीख महत्वपूर्ण है। आज देश के अधिकांश हिस्सों में बैंक शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी, लेकिन त्रिपुरा में महा सप्तमी के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में बैंक से जुड़ा जरूरी काम करने से पहले अपने राज्य और स्थानीय शाखा में लागू छुट्टी की जानकारी लेना जरूरी है। अक्टूबर में त्योहारों के कारण अलग-अलग राज्यों में बैंक कई दिनों तक बंद रहने वाले हैं।

    भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, देश में बैंक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहते हैं। इसके अलावा रविवार को भी बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज नहीं होता। महीने के पहले और तीसरे शनिवार को सामान्य तौर पर बैंक खुले रहते हैं। इसी नियम के तहत शनिवार, 17 अक्टूबर को देश के अधिकांश राज्यों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

    इसका मतलब है कि भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और अन्य प्रमुख बैंकों की शाखाएं अधिकांश क्षेत्रों में खुली रहेंगी। ग्राहक नकद जमा करने, निकासी, चेक से जुड़े कार्यों और अन्य शाखा आधारित सेवाओं के लिए बैंक जा सकते हैं। हालांकि, स्थानीय त्योहारों और राज्यवार अवकाश के कारण कुछ स्थानों पर स्थिति अलग हो सकती है।

    त्रिपुरा में आज बैंक बंद रहेंगे। राज्य में महा सप्तमी के पर्व के कारण बैंक शाखाओं में सार्वजनिक अवकाश निर्धारित है। इसलिए त्रिपुरा के ग्राहकों को आज बैंक से संबंधित काम के लिए शाखा जाने से पहले अगली कार्यदिवस की योजना बनानी पड़ सकती है। अन्य राज्यों में भी त्योहारों के अनुसार अलग-अलग तारीखों पर बैंकिंग कामकाज प्रभावित होगा।

    अक्टूबर 2026 में दुर्गा पूजा, दशहरा, विजयादशमी, आयुध पूजा, लक्ष्मी पूजा और अन्य क्षेत्रीय पर्वों के कारण कई राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। इन छुट्टियों की तारीखें राज्य और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई हैं। इसलिए किसी एक राज्य में बैंक बंद होने का अर्थ यह नहीं है कि उसी दिन पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं भी बंद रहेंगी।

    19 अक्टूबर को दुर्गा पूजा, महाष्टमी, महानवमी, आयुध पूजा और विजयादशमी से संबंधित अवसरों पर त्रिपुरा, मिजोरम, ओडिशा, तमिलनाडु, असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और मेघालय में बैंक बंद रहने का उल्लेख है।

    20 अक्टूबर को दशहरा, विजयादशमी, महानवमी, आयुध पूजा और दुर्गा पूजा के कारण कई राज्यों में बैंकिंग अवकाश रहेगा। इनमें मध्य प्रदेश के साथ गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तराखंड, असम, तेलंगाना, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, केरल, दिल्ली, गोवा, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और अन्य राज्य शामिल हैं।

    21 अक्टूबर को विजयादशमी और दुर्गा पूजा के अवसर पर त्रिपुरा, कर्नाटक, सिक्किम, असम, पश्चिम बंगाल और केरल सहित कुछ क्षेत्रों में बैंक बंद रहेंगे। 22 और 23 अक्टूबर को दुर्गा पूजा के कारण सिक्किम में अवकाश रहेगा।इसके बाद 26 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा, विलय दिवस और महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर त्रिपुरा में बैंक बंद रहने का उल्लेख है। 29 अक्टूबर को करवा चौथ के कारण चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बैंकिंग अवकाश रहेगा। वहीं, 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे।

    बैंक जाने से पहले ग्राहकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि छुट्टियां राज्यवार लागू होती हैं और सभी राज्यों में एक जैसी नहीं होतीं। यदि किसी दिन शाखा बंद रहती है, तो एटीएम, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इन सेवाओं के माध्यम से हर तरह का शाखा आधारित काम पूरा नहीं किया जा सकता।

    इसलिए 17 अक्टूबर को बैंक जाने वाले ग्राहकों के लिए मुख्य बात यह है कि देश के अधिकांश हिस्सों में तीसरे शनिवार को बैंक खुले रहेंगे, जबकि त्रिपुरा में महा सप्तमी के कारण शाखाएं बंद रहेंगी। किसी जरूरी वित्तीय काम के लिए निकलने से पहले अपनी स्थानीय शाखा की स्थिति और लागू अवकाश की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

  • आरबीआई के सख्त विदेशी मुद्रा नियमों का असर, डॉलर के मुकाबले रुपया 95.76 पर खुला, एक प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुई भारतीय मुद्रा

    आरबीआई के सख्त विदेशी मुद्रा नियमों का असर, डॉलर के मुकाबले रुपया 95.76 पर खुला, एक प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुई भारतीय मुद्रा

    नई दिल्ली ।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने और कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए उठाए गए सख्त कदमों के बाद सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया एक प्रतिशत से अधिक मजबूत होकर 95.76 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ था और यह 97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गई थी। ऐसे में केंद्रीय बैंक के नए उपायों के बाद रुपये में आई मजबूती को विदेशी मुद्रा बाजार के घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

    रुपये की मजबूती का असर ऑफशोर कारोबार में भी दिखाई दिया। एक महीने के नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) बाजार में भारतीय मुद्रा एक समय 94.17 प्रति डॉलर तक पहुंच गई थी। इस स्तर पर रुपये में लगभग 2.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, बाद में इसमें कुछ नरमी आई और बढ़त घटकर करीब 0.7 प्रतिशत रह गई। इससे स्पष्ट हुआ कि शुरुआती मजबूती के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा।

    अक्टूबर की शुरुआत में आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन को लेकर कई नियामकीय बदलावों की घोषणा की थी। इन उपायों के तहत बिना हेजिंग वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (एफईआरआर) नाम से एक नई व्यवस्था लागू की। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में अनियंत्रित गतिविधियों पर रोक लगाना और कारोबार को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

    नए निर्देशों के अनुसार, अधिकृत डीलर भारतीय रुपये से संबंधित ऐसे विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध को दोबारा बुक नहीं कर सकेंगे, जिसे पहले रद्द किया जा चुका है। हालांकि, अनुबंध की निर्धारित अवधि पूरी होने पर उसके रोलओवर की अनुमति बनी रहेगी। इस व्यवस्था के जरिए पहले रद्द किए गए अनुबंधों को दोबारा बुक करने से जुड़ी गतिविधियों पर नियंत्रण रखने का प्रयास किया गया है।

    आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध करने वाले ग्राहकों के लिए भी नियम सख्त किए हैं। अब अधिकृत डीलरों को ग्राहकों से लिखित घोषणा लेनी होगी कि जिस मूल जोखिम से बचाव के लिए हेजिंग की जा रही है, उसके लिए किसी अन्य अधिकृत डीलर के साथ पहले से हेजिंग नहीं की गई है। इस शर्त का उद्देश्य एक ही जोखिम के लिए अलग-अलग जगहों पर दोहरी हेजिंग की संभावना को नियंत्रित करना है।

    एफईआरआर व्यवस्था के तहत 20 लाख डॉलर से अधिक मूल्य वाले कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए अधिकृत डीलरों को अनुबंध मूल्य के रुपये में समतुल्य का 20 प्रतिशत नकद रिजर्व आरबीआई के पास रखना होगा। यह रिजर्व अनुबंध की समाप्ति तक प्रतिदिन बनाए रखना अनिवार्य है। केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई उपयोगकर्ता कई लेनदेन के माध्यम से नियामकीय नियमों को दरकिनार करने का प्रयास करता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

    शनिवार को आरबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू करने समेत कई अन्य कदम उठाए थे। ये उपाय ऐसे समय में किए गए, जब रुपया 97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया था। इससे पहले पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में भी बढ़ोतरी की थी और संकेत दिया था कि आवश्यकता पड़ने पर मौद्रिक नीति को और सख्त किया जा सकता है। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की आगे की चाल पर इन उपायों का असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर भविष्य की दिशा को निश्चित नहीं कहा जा सकता।

  • रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI के नए कदम, तेल कंपनियों को सीधे डॉलर और फॉरेक्स सौदों पर सख्ती

    रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI के नए कदम, तेल कंपनियों को सीधे डॉलर और फॉरेक्स सौदों पर सख्ती

    नई दिल्ली ।डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी कमजोरी को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य डॉलर की अतिरिक्त मांग कम करना और रुपये पर पड़ रहे दबाव को नियंत्रित करना है। इसके तहत सरकारी तेल कंपनियों को सीधे डॉलर उपलब्ध कराने की व्यवस्था के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम भी सख्त किए गए हैं। इन उपायों से रुपये को राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि इसकी मजबूती की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    रुपये पर दबाव बढ़ने के पीछे महंगे कच्चे तेल, डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार से पैसा निकालने जैसे कारण बताए गए हैं। भारत को विदेशों से कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है। ऐसे में तेल कंपनियों की डॉलर मांग का असर विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ सकता है। RBI की नई व्यवस्था इसी मांग को सीधे पूरा करने और बाजार में अतिरिक्त दबाव घटाने की कोशिश है।

    इस व्यवस्था के तहत इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां अपनी रोजाना की डॉलर जरूरत सीधे RBI से पूरी कर सकेंगी। यह व्यवस्था 12 अक्टूबर 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है। अब तक तेल कंपनियां विदेशों से कच्चा तेल खरीदने के भुगतान के लिए बाजार से डॉलर खरीदती थीं। बड़ी कंपनियों की एक साथ बढ़ी मांग से डॉलर की उपलब्धता और रुपये की विनिमय दर पर दबाव पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक से सीधे डॉलर मिलने पर बाजार में उनकी खरीद की जरूरत कम हो सकती है।

    RBI ने विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव सौदों पर भी सीमाएं सख्त की हैं। जिन सौदों के पीछे वास्तविक लेनदेन या जरूरत नहीं होती, उनमें डॉलर से जुड़ी पोजिशन लेने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है। इसके अलावा, रुपये से संबंधित कुछ रद्द किए गए विदेशी मुद्रा अनुबंधों को दोबारा बुक करने पर रोक लगाने का फैसला भी किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य बाजार में अनावश्यक गतिविधियों को सीमित करना है।

    विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव के कुछ सौदों के लिए बैंकों को 20 प्रतिशत राशि रिजर्व के रूप में रखने का नियम भी लागू किया गया है। यह व्यवस्था पात्र विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर लागू होगी। दो मिलियन डॉलर से अधिक के कुछ हेजिंग सौदे इससे प्रभावित हो सकते हैं। इससे कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचाव की लागत बढ़ने की आशंका है। स्टील, ऑटोमोबाइल, केमिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है।

    रुपये की आगे की चाल को लेकर कुछ बैंकर्स ने डॉलर के मुकाबले 95 से 95.50 के स्तर का अनुमान जताया है। हालांकि, यह बाजार का अनुमान है, निश्चित परिणाम नहीं। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और डॉलर की मांग पर दबाव बना रह सकता है। इसी तरह, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने या वहां निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पैसा निकाल सकते हैं। इसके विपरीत, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश बढ़ने पर डॉलर की आवक को समर्थन मिल सकता है।

    RBI रुपये को स्थिर रखने के साथ आर्थिक विकास की रफ्तार पर भी प्रतिकूल असर नहीं पड़ने देना चाहता। ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी से होम लोन, कार लोन और कारोबारी कर्ज महंगे हो सकते हैं। इससे कंपनियों की लागत और लोगों के खर्च पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल डॉलर की मांग और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने वाले उपायों पर जोर दिया है। रुपये को स्थायी राहत कितनी मिलेगी, यह कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों के फैसलों पर निर्भर करेगा।

  • आरबीआई 12 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियों के लिए खोलेगा विशेष डॉलर विंडो, रुपए को समर्थन देने के साथ विदेशी मुद्रा नियम भी सख्त

    आरबीआई 12 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियों के लिए खोलेगा विशेष डॉलर विंडो, रुपए को समर्थन देने के साथ विदेशी मुद्रा नियम भी सख्त

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपए को समर्थन देने और सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत केंद्रीय बैंक 12 अक्टूबर 2026 से एक विशेष डॉलर विंडो खोलेगा। यह सुविधा अगले आदेश तक जारी रहेगी। आरबीआई ने मौजूदा बाजार परिस्थितियों का आकलन करने के बाद यह फैसला लिया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सरकारी तेल विपणन कंपनियों को उनकी दैनिक जरूरत के अनुसार डॉलर उपलब्ध कराना है।

    इस विशेष सुविधा के तहत तीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को डॉलर की आपूर्ति की जाएगी। इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन शामिल हैं। आरबीआई निर्धारित बैंकों के माध्यम से इन कंपनियों को डॉलर बेचेगा। केंद्रीय बैंक ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब विदेशी मुद्रा बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकारी तेल कंपनियों की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई। हालांकि, इस सुविधा के तहत डॉलर की कुल मात्रा या प्रत्येक कंपनी के लिए निर्धारित सीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

    विशेष डॉलर विंडो शुरू करने के साथ आरबीआई ने विदेशी मुद्रा हेजिंग सुविधाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी नियम कड़े किए हैं। केंद्रीय बैंक ने रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और एक ही जोखिम के लिए कई जगह हेजिंग करने की संभावना को रोकने के उद्देश्य से दस्तावेजीकरण संबंधी शर्तें लागू की हैं। नए नियमों के अनुसार, अधिकृत डीलरों को ऐसे उपयोगकर्ताओं से लिखित आश्वासन लेना होगा और उसे अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखना होगा, जो भारतीय रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध करते हैं।

    इस लिखित आश्वासन में उपयोगकर्ता को पुष्टि करनी होगी कि संबंधित अंतर्निहित जोखिम के लिए किसी दूसरे अधिकृत डीलर के साथ हेजिंग नहीं की गई है। इस तरह एक ही जोखिम के आधार पर अलग-अलग अधिकृत डीलरों के माध्यम से हेजिंग करने पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह दस्तावेजीकरण अधिकृत डीलरों की जिम्मेदारी होगी। उन्हें उपयोगकर्ता से आश्वासन प्राप्त करने के साथ उसे अपने पास सुरक्षित भी रखना होगा।

    विदेशी मुद्रा बाजार के व्यवस्थित संचालन के लिए आरबीआई ने रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों को दोबारा बुक करने पर भी प्रतिबंध लगाया है। नए निर्देश जारी होने के बाद किसी अधिकृत डीलर के साथ रद्द किए गए रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध को दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध डिलीवरेबल और नॉन-डिलीवरेबल, दोनों प्रकार के अनुबंधों पर लागू होगा। अधिकृत डीलरों को अपने ग्राहकों को ऐसे अनुबंध फिर से बुक करने की अनुमति नहीं देनी होगी।

    केंद्रीय बैंक ने बिना अंतर्निहित जोखिम के किए जाने वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा भी घटा दी है। अब सभी अधिकृत डीलरों के लिए ऐसे लेनदेन की सीमा पांच मिलियन डॉलर के बराबर निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, दो मिलियन डॉलर से अधिक की नोशनल वैल्यू वाले रुपए से जुड़े सभी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान लागू किया गया है।

    ऐसे अनुबंधों के मामले में अधिकृत डीलरों को आरबीआई के पास विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व बनाए रखना होगा। इस रिजर्व की राशि प्रत्येक लेनदेन की नोशनल वैल्यू के भारतीय रुपए में बराबर मूल्य का 20 प्रतिशत होगी। यह राशि नकद के रूप में रखनी होगी। इन उपायों के जरिए आरबीआई ने सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर जरूरतों को पूरा करने के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव बाजार में हेजिंग और लेनदेन से जुड़े नियमों को अधिक सख्त बनाया है।

  • RBI ने Paytm Payments Bank को शेड्यूल्ड बैंकों की सूची से भी हटाया, अप्रैल में लाइसेंस हुआ था रद्द

    RBI ने Paytm Payments Bank को शेड्यूल्ड बैंकों की सूची से भी हटाया, अप्रैल में लाइसेंस हुआ था रद्द


    नई दिल्ली। पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने PPBL को RBI एक्ट, 1934 की दूसरी अनुसूची यानी शेड्यूल्ड बैंकों की सूची से बाहर कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अप्रैल 2026 में RBI पहले ही बैंक का लाइसेंस रद्द कर चुका है और उसके बाद बैंक को बंद करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

    31 जुलाई को जारी हुई थी अधिसूचना
    RBI ने 7 अक्टूबर को बताया कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक को दूसरी अनुसूची से बाहर करने की अधिसूचना 31 जुलाई 2026 को जारी की गई थी। इसे सितंबर में भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इसका मतलब है कि PPBL अब RBI एक्ट की दूसरी अनुसूची में शामिल शेड्यूल्ड बैंकों की सूची का हिस्सा नहीं है।

    साधारण भाषा में समझें तो RBI एक्ट की दूसरी अनुसूची में शामिल बैंकों को शेड्यूल्ड बैंक कहा जाता है। इन बैंकों पर संबंधित नियामकीय व्यवस्था लागू होती है और उन्हें कानून के तहत कुछ सुविधाएं और अधिकार मिलते हैं। PPBL को इस सूची से बाहर करना उसके खिलाफ चल रही लंबी नियामकीय कार्रवाई का अगला कदम है।

    कार्रवाई की शुरुआत 2022 में हुई थी
    पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ RBI की सख्ती अचानक शुरू नहीं हुई थी। मार्च 2022 में केंद्रीय बैंक ने PPBL को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था। RBI ने उस समय बैंक में गंभीर निगरानी संबंधी चिंताओं का हवाला दिया था। साथ ही बैंक को अपनी IT व्यवस्था की व्यापक जांच के लिए बाहरी IT ऑडिट कंपनी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद बैंक पर नियामकीय दबाव लगातार बढ़ता गया और 2024 में RBI ने कई कारोबारी गतिविधियों पर रोक लगा दी।

    जनवरी-फरवरी 2024 में और कड़ी हुई पाबंदियां
    31 जनवरी 2024 और 16 फरवरी 2024 को RBI ने PPBL पर अतिरिक्त कारोबारी पाबंदियां लगाईं। बैंक को ग्राहकों के खातों, वॉलेट और अन्य प्रीपेड साधनों में नए जमा, क्रेडिट या टॉप-अप लेने से रोक दिया गया। इन पाबंदियों के कारण PPBL की सामान्य बैंकिंग गतिविधियां काफी सीमित हो गई थीं।

    अप्रैल 2026 में रद्द कर दिया गया बैंकिंग लाइसेंस
    PPBL के खिलाफ कार्रवाई का सबसे बड़ा कदम 24 अप्रैल 2026 को आया, जब RBI ने उसका बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया। केंद्रीय बैंक ने कहा था कि बैंक का कामकाज उसके और जमाकर्ताओं के हितों के लिए नुकसानदायक तरीके से चलाया जा रहा था। RBI के अनुसार, बैंक का प्रबंधन भी जमाकर्ताओं और जनहित के लिहाज से उचित नहीं था तथा बैंक अपने पेमेंट्स बैंक लाइसेंस की शर्तों का पालन करने में विफल रहा था।

    RBI ने यह भी कहा था कि बैंक को जारी रखना जनहित में उपयोगी नहीं होगा। लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक को बैंकिंग कारोबार करने से रोक दिया गया और RBI ने उसके समापन की प्रक्रिया के लिए हाई कोर्ट का रुख किया।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने भी वाइंडिंग अप का आदेश दिया
    लाइसेंस रद्द होने के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक को बंद करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी PPBL के वाइंडिंग अप का आदेश दिया। यानी अब बैंक को सामान्य बैंकिंग संस्था के रूप में जारी रखने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत बंद किया जाना है।

    ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
    RBI की ताजा कार्रवाई मुख्य रूप से PPBL की शेड्यूल्ड बैंक की स्थिति से जुड़ी है। ग्राहकों के लिहाज से बड़ी बात यह है कि बैंक पर पहले ही नए ग्राहक जोड़ने और नए जमा, क्रेडिट व वॉलेट टॉप-अप जैसी गतिविधियों पर रोक लग चुकी थी। इसके बाद अप्रैल 2026 में बैंकिंग लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया।

    वहीं Paytm ऐप की कई सेवाएं पेटीएम पेमेंट्स बैंक से अलग दूसरे बैंकों के जरिए चलती हैं। इसलिए PPBL के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को Paytm ऐप की सभी सेवाओं के बंद होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। Paytm ने भी स्पष्ट किया है कि उसके UPI, QR पेमेंट, Soundbox, कार्ड मशीन और पेमेंट गेटवे जैसी सेवाएं मल्टी-बैंक व्यवस्था के तहत चलती हैं।

    इस तरह PPBL के खिलाफ कार्रवाई का क्रम अब एक और चरण में पहुंच गया है—पहले नए ग्राहक जोड़ने पर रोक, फिर 2024 में जमा और टॉप-अप जैसी गतिविधियों पर पाबंदी, अप्रैल 2026 में बैंकिंग लाइसेंस रद्द और अब शेड्यूल्ड बैंकों की सूची से बाहर किया जाना। इसके साथ बैंक के वाइंडिंग अप की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।

  • शेयर बाजार में फिर बढ़ा दबाव, सेंसेक्स 429 अंक गिरा; मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी

    शेयर बाजार में फिर बढ़ा दबाव, सेंसेक्स 429 अंक गिरा; मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी

    नई दिल्ली:  भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 72,638.70 पर रहा। वहीं निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत गिरकर 22,603.05 पर बंद हुआ। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव मेटल और रियल्टी शेयरों में देखने को मिला।

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी मेटल 2.33 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 1.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके अलावा निफ्टी ऑटो में 1.58 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज में 1.43 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस में 1.41 प्रतिशत, निफ्टी आईटी में 1.34 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई में 1.22 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।

    बुधवार को कुछ सेक्टरों ने बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी पीएसयू बैंक 1 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। निफ्टी मीडिया में 0.69 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही। इस तरह बैंकिंग क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मजबूती दिखाई दी, जबकि ज्यादातर प्रमुख सेक्टर लाल निशान में रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कारोबार एक जैसा नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 378.60 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 59,382.60 पर बंद हुआ। इसके विपरीत निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 58.25 अंक यानी 0.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,506.95 पर बंद हुआ। इससे बाजार के अलग-अलग हिस्सों में निवेशकों की गतिविधि में अंतर देखने को मिला।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर टाइटन, बीईएल, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एलएंडटी, टाटा स्टील, एमएंडएम, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, इंडिगो, एचयूएल, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट और टेक महिंद्रा में गिरावट रही।

    बाजार में गिरावट को लेकर जानकारों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से उम्मीद के मुताबिक ब्याज दर बढ़ाए जाने के बाद घरेलू बाजार ने मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव पर तेजी से प्रतिक्रिया दी। नीति रुख के न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग की ओर जाने को ब्याज दर चक्र में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा।

    इसके अलावा अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक से पहले अमेरिकी यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के बीच रुपया भी दबाव में रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया। इन वैश्विक और घरेलू कारकों के बीच बुधवार को शेयर बाजार में बिकवाली का रुख हावी रहा।

    ऊंची ब्याज दरों के माहौल में बैंकिंग शेयरों को मार्जिन से संभावित लाभ की उम्मीद का फायदा मिला और इस क्षेत्र के कुछ शेयरों ने बाजार की कमजोरी के विपरीत प्रदर्शन किया। हालांकि, बाजार के अधिकांश हिस्सों में बिकवाली का दबाव बना रहा और इसके चलते सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए।

  • आरबीआई ने महंगाई का अनुमान 5.2 प्रतिशत रखा, खाद्य और ईंधन कीमतों के दबाव के बीच रेपो रेट में भी 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी

    आरबीआई ने महंगाई का अनुमान 5.2 प्रतिशत रखा, खाद्य और ईंधन कीमतों के दबाव के बीच रेपो रेट में भी 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी

    नई दिल्ली ।भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान 5.2 प्रतिशत रखा है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि महंगाई का परिदृश्य पिछले वर्ष की तुलना में अब उतना अनुकूल नहीं है। खाद्य और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के साथ आपूर्ति पक्ष से जुड़े जोखिम भी बढ़े हैं। मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने महंगाई के ताजा अनुमान और उससे जुड़े जोखिमों की जानकारी दी।

    आरबीआई के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में CPI महंगाई 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। तीसरी तिमाही में इसके बढ़कर 6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। वहीं, वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 5.6 प्रतिशत रखा गया है। चालू वित्त वर्ष के लिए कोर मुद्रास्फीति का अनुमान 4.4 प्रतिशत है।

    गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अगस्त में CPI महंगाई बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई, जबकि इससे पहले यह 4.5 प्रतिशत थी। इस बढ़ोतरी में खाद्य और ईंधन कीमतों में तेजी की अहम भूमिका रही। उन्होंने कहा कि कोर मुद्रास्फीति में भी वृद्धि हुई है। इससे संकेत मिलता है कि कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव अब अर्थव्यवस्था के अधिक क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है।

    केंद्रीय बैंक के मुताबिक खाद्य महंगाई अब केवल कुछ चुनिंदा वस्तुओं तक सीमित नहीं रही है। चीनी और प्याज जैसी वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। अगस्त में ईंधन महंगाई बढ़ने के पीछे प्रतिकूल आधार प्रभाव भी एक कारण रहा। आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में कोर मुद्रास्फीति 4.2 प्रतिशत रही। वहीं, कीमती धातुओं को अलग रखने पर कोर मुद्रास्फीति 2.9 प्रतिशत दर्ज की गई।

    आरबीआई ने आने वाले महीनों में आपूर्ति पक्ष से जुड़े जोखिमों के बने रहने की आशंका जताई है। कमजोर मानसून, जारी अल नीनो परिस्थितियां, ऊंची ऊर्जा कीमतें और अन्य कमोडिटी की मजबूत कीमतें महंगाई पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। केंद्रीय बैंक ने इस स्थिति को महंगाई के मौजूदा परिदृश्य के लिए प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है।

    आरबीआई के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि CPI बास्केट में शामिल उन वस्तुओं का हिस्सा, जिनकी महंगाई दर 4 प्रतिशत से अधिक है, अगस्त में बढ़कर करीब 37 प्रतिशत हो गया। इससे यह संकेत मिलता है कि कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव अधिक वस्तुओं तक फैल रहा है। केंद्रीय बैंक ने इसी व्यापक दबाव को महंगाई के बदलते परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना है।

    संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई और उसका आउटलुक पिछले वर्ष की तुलना में अब उतना अनुकूल नहीं है। अगले तीन तिमाहियों में औसत CPI मुद्रास्फीति करीब 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि कोर मुद्रास्फीति लगभग 4.4 प्रतिशत रह सकती है। इस आकलन के बीच मौद्रिक नीति को लेकर भी बदलाव किया गया है।

    आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। गवर्नर के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में नीतिगत ब्याज दरों का पुनर्संतुलन आवश्यक हो गया था। महंगाई के बढ़ते दबाव, खाद्य और ऊर्जा कीमतों में तेजी तथा आपूर्ति संबंधी जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को 5.2 प्रतिशत पर रखा है।