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  • महंगाई में मामूली बढ़ोतरी के बीच खाद्य कीमतों का दबाव कायम, तेलंगाना सबसे महंगा राज्य, मध्य प्रदेश भी ऊंचे स्तर पर

    महंगाई में मामूली बढ़ोतरी के बीच खाद्य कीमतों का दबाव कायम, तेलंगाना सबसे महंगा राज्य, मध्य प्रदेश भी ऊंचे स्तर पर

    नई दिल्ली । भारत में खुदरा महंगाई दर जुलाई 2026 में मामूली बढ़ोतरी के साथ 4.45 प्रतिशत पर पहुंच गई। जून में यह दर 4.38 प्रतिशत थी। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महंगाई में बढ़ोतरी के बावजूद कुछ जरूरी सब्जियों की कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई है। वहीं सोना, चांदी, अदरक और लहसुन जैसी वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि ने घरेलू बजट पर दबाव बनाए रखा।

    जुलाई में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई 4.84 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.96 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे साफ है कि महंगाई का असर ग्रामीण उपभोक्ताओं पर अपेक्षाकृत अधिक रहा। खाद्य महंगाई दर भी जुलाई में 5.52 प्रतिशत रही। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 5.05 प्रतिशत दर्ज की गई।

    खाद्य वस्तुओं में कुछ उत्पादों की कीमतों में उपभोक्ताओं को राहत मिली। जुलाई में आलू के दाम सालाना आधार पर 16.56 प्रतिशत घटे। इसी तरह भिंडी की कीमत में 5.52 प्रतिशत, मटर में 5.27 प्रतिशत और टमाटर में 4.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे सब्जियों की कुछ श्रेणियों में कीमतों का दबाव कम हुआ है।

    हालांकि दूसरी ओर कई वस्तुओं ने महंगाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। जुलाई में चांदी की ज्वेलरी की कीमतों में सालाना आधार पर 109.84 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज हुई। अदरक की कीमत 83.62 प्रतिशत और लहसुन की कीमत 35.36 प्रतिशत बढ़ी। सोना, हीरा और प्लैटीनम ज्वेलरी की कीमतों में भी 32.98 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। प्याज की कीमत में 22.54 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    अन्य क्षेत्रों में फूड एंड बेवरेज श्रेणी की महंगाई 5.24 प्रतिशत रही। पान, तंबाकू और संबंधित उत्पादों में 4.79 प्रतिशत, परिवहन में 4.43 प्रतिशत, कपड़े और जूते में 3.38 प्रतिशत तथा शैक्षणिक सेवाओं में 3.64 प्रतिशत महंगाई दर्ज हुई। स्वास्थ्य क्षेत्र में महंगाई अपेक्षाकृत कम 1.34 प्रतिशत रही।

    राज्यों के स्तर पर तेलंगाना में जुलाई के दौरान सबसे अधिक 6.32 प्रतिशत खुदरा महंगाई दर्ज की गई। आंध्र प्रदेश में यह 5.72 प्रतिशत, तमिलनाडु में 5.44 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 4.91 प्रतिशत और कर्नाटक में 4.89 प्रतिशत रही। इससे अलग-अलग राज्यों में कीमतों के दबाव में अंतर भी सामने आया।

    महंगाई के मौजूदा रुझान पर भारतीय रिजर्व बैंक की नजर बनी हुई है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत रखा है। आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण निकट अवधि में महंगाई के दबाव में वृद्धि हो सकती है।

    जून में महंगाई दर बढ़ने के बाद जुलाई के आंकड़े भी यह संकेत देते हैं कि कीमतों का दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि सब्जियों जैसी कुछ जरूरी वस्तुओं में गिरावट से आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है, लेकिन खाद्य पदार्थों, कीमती धातुओं और कुछ मसालों की तेजी चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले महीनों में मानसून, खाद्य आपूर्ति, वैश्विक बाजार और ऊर्जा कीमतें महंगाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

  • ब्रिक्स देशों के फास्ट पेमेंट सिस्टम और सीबीडीसी को जोड़ने पर चर्चा, सीमा पार भुगतान सस्ता और तेज बनाने की तैयारी

    ब्रिक्स देशों के फास्ट पेमेंट सिस्टम और सीबीडीसी को जोड़ने पर चर्चा, सीमा पार भुगतान सस्ता और तेज बनाने की तैयारी


    नई दिल्ली ।
    ब्रिक्स देशों के बीच सीमा पार भुगतान को अधिक तेज, सस्ता और सुविधाजनक बनाने के लिए फास्ट पेमेंट सिस्टम और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी सीबीडीसी को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि इस दिशा में अभी कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत सितंबर 2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है।

    संजय मल्होत्रा ने कहा कि सीमा पार भुगतान ब्रिक्स देशों की साझा प्राथमिकताओं में शामिल है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था में लागत, समय और तकनीकी प्रक्रियाओं को कम करने की पर्याप्त गुंजाइश है। इसी उद्देश्य से अलग-अलग देशों के तेज भुगतान नेटवर्क को जोड़ने और डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

    सीबीडीसी किसी देश के केंद्रीय बैंक की ओर से जारी डिजिटल मुद्रा होती है। भारत में डिजिटल रुपया इसी दिशा में विकसित की गई व्यवस्था है। यदि अलग-अलग देशों की ऐसी डिजिटल मुद्राओं और तेज भुगतान प्रणालियों के बीच तकनीकी कनेक्टिविटी विकसित होती है, तो भविष्य में सीमा पार लेनदेन को कम समय में पूरा करने की संभावना बढ़ सकती है।

    आरबीआई गवर्नर के अनुसार, अभी यह प्रक्रिया शुरुआती चर्चा के चरण में है और किसी अंतिम व्यवस्था या समयसीमा की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, ब्रिक्स देशों के बीच भुगतान ढांचे को बेहतर बनाने की कोशिश वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में स्थानीय मुद्राओं और डिजिटल भुगतान प्रणालियों की भूमिका बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

    भारत इस पूरी रणनीति में रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे रहा है। आरबीआई ने कई देशों के साथ स्थानीय मुद्रा आधारित व्यापार व्यवस्था विकसित की है। इंडोनेशिया, मालदीव, मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात के साथ द्विपक्षीय स्थानीय मुद्रा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए गवर्नर ने कहा कि ऐसे लेनदेन का दायरा बढ़ाने के लिए और प्रयास किए जाने चाहिए।

    स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ने से कारोबार के लिए किसी तीसरी मुद्रा पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे कुछ मामलों में लेनदेन की लागत घटाने और भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद मिल सकती है। भारत के लिए यह रुपये के अंतरराष्ट्रीय उपयोग को बढ़ाने और वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका मजबूत करने का अवसर भी है।

    संजय मल्होत्रा ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने बैंकों से एआई को केवल जोखिम के तौर पर देखने के बजाय तकनीकी अवसर के रूप में अपनाने की अपील की। बैंकों को अपने एआई मॉडल की सूची तैयार करने और बोर्ड स्तर पर एआई गवर्नेंस से जुड़ी नीतियां लागू करने की सलाह दी गई है।

    वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने पश्चिम एशिया के तनाव और अन्य भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को निकट अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए संभावित जोखिम बताया। ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति के स्रोतों में विविधता, एथेनॉल मिश्रण, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और मुक्त व्यापार समझौतों जैसे कदमों को आर्थिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

    आरबीआई गवर्नर ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली की स्थिति को भी मजबूत बताया। उनके मुताबिक बैंकों के पास बेहतर पूंजी आधार, कम गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां और स्वस्थ लाभप्रदता है। ऐसे में वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बैंकिंग क्षेत्र अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है।

    ब्रिक्स के बीच भुगतान प्रणालियों और सीबीडीसी की संभावित कनेक्टिविटी आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था को बदलने वाली पहल बन सकती है। हालांकि अभी यह चर्चा के स्तर पर है, लेकिन इसके आगे बढ़ने पर व्यापार, पर्यटन और अन्य सीमा पार लेनदेन में भुगतान की लागत और समय कम करने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

  • UPI Payment पर MDR की चर्चा के बीच सरकार ने साफ किया पूरा गणित, जानिए किसे देना पड़ सकता है शुल्क

    UPI Payment पर MDR की चर्चा के बीच सरकार ने साफ किया पूरा गणित, जानिए किसे देना पड़ सकता है शुल्क

    नई दिल्ली ।यूपीआई से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के बीच पिछले कुछ दिनों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर सवाल उठ रहे थे। खासतौर पर 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के कारण यह आशंका बनी हुई थी कि आने वाले समय में डिजिटल भुगतान महंगा हो सकता है। अब सरकार ने इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    लोकसभा में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 से संबंधित विधेयक पारित होने के बाद सरकार ने यूपीआई भुगतान व्यवस्था और संभावित MDR को लेकर अपना रुख सामने रखा है। सरकार के मुताबिक, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। ऐसे में रोजमर्रा के व्यक्तिगत लेनदेन करने वाले ग्राहकों पर प्रस्तावित व्यवस्था का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

    MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट उस शुल्क को कहा जाता है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी या दुकानदार की ओर से बैंक अथवा भुगतान सेवा उपलब्ध कराने वाली संस्था को दिया जाता है। यह डिजिटल भुगतान की सुविधा से जुड़ी लागत का हिस्सा होता है। इसलिए इसे सीधे ग्राहक पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं माना जाता है।

    सरकार ने कहा है कि यदि भविष्य में यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू किया जाता है तो उसका दायरा सीमित रखा जाएगा। सभी तरह के यूपीआई भुगतान पर एक समान शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं बताई गई है। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले लेनदेन इससे बाहर रहेंगे और अधिकांश छोटे दुकानदारों तथा कारोबारियों पर भी इसका बड़ा असर नहीं पड़ने की बात कही गई है।

    संभावित व्यवस्था के तहत तय सीमा से अधिक मूल्य वाले कुछ चुनिंदा मर्चेंट भुगतान पर MDR लगाया जा सकता है। सरकार के अनुसार, ऐसी स्थिति में शुल्क की राशि काफी कम रखी जा सकती है। यह शुल्क कार्ड के जरिए होने वाले डिजिटल भुगतान पर लगने वाले शुल्क की तुलना में भी कम हो सकता है।

    सरकार ने संभावित MDR की जरूरत के पीछे यूपीआई के लगातार बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण बताया है। डिजिटल भुगतान का दायरा बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने और भुगतान प्रणाली को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार खर्च की आवश्यकता होती है। इसी वजह से डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत और उसके प्रबंधन को लेकर चर्चा चल रही है।

    हालांकि, अभी यूपीआई पर MDR लागू करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वित्त मंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो उसका भुगतान व्यापारी करेंगे, ग्राहकों से सीधे शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं होगी। इससे व्यक्तिगत यूपीआई भुगतान करने वाले लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका फिलहाल नहीं है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी इस विषय में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कह चुके हैं। भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अभी बातचीत जारी है। अंतिम नीति तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन श्रेणियों के मर्चेंट भुगतान को संभावित शुल्क के दायरे में रखा जा सकता है।

    इस बीच वित्त मंत्रालय ने उन दावों को भी गलत बताया है, जिनमें कहा गया था कि किसी बाहरी दबाव के कारण यूपीआई से जुड़ी नीति में बदलाव किया जा रहा है। सरकार का मौजूदा रुख स्पष्ट है कि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा और यदि भविष्य में MDR की व्यवस्था लागू होती है तो उसका दायरा सीमित रखा जाएगा।

    इसलिए फिलहाल सामान्य यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए राहत की स्थिति है। छोटे व्यक्तिगत भुगतान करने वालों को किसी नए शुल्क की चिंता करने की जरूरत नहीं है। दूसरी ओर, व्यापारिक लेनदेन को लेकर अंतिम नियम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संभावित MDR किन भुगतान श्रेणियों पर लागू होगा और उसकी वास्तविक दर कितनी होगी।

  • Stock Market Closing: बैंकिंग शेयरों की तेजी और क्रूड ऑयल में नरमी से लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ भारतीय बाजार

    Stock Market Closing: बैंकिंग शेयरों की तेजी और क्रूड ऑयल में नरमी से लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ भारतीय बाजार

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। निवेशकों की सकारात्मक धारणा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 373.76 अंकों की बढ़त के साथ 78,954.76 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 11.35 अंक चढ़कर 24,636.00 पर पहुंच गया। निफ्टी का 24,600 के ऊपर बंद होना बाजार की मजबूती का संकेत माना जा रहा है।

    कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंतिम चरण में चुनिंदा हैवीवेट और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। इससे पहले मंगलवार की गिरावट के बाद भी बाजार ने वापसी करते हुए लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज की है। निवेशकों का मानना है कि घरेलू आर्थिक संकेतकों और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार से आगे भी बाजार को समर्थन मिल सकता है।

    सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो पीएसयू बैंक शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मीडिया, रियल्टी, ऑटो, मेटल और आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली के कारण गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद व्यापक बाजार में स्मॉलकैप शेयरों की मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा।

    निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में एसबीआई, बीईएल, टाइटन, श्रीराम फाइनेंस, सिप्ला और इटरनल में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। वहीं पावर ग्रिड, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, टीसीएस और बजाज ऑटो के शेयर दबाव में रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और पश्चिम एशिया में समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की दिशा में जारी कूटनीतिक प्रयासों ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है। इससे महंगाई पर दबाव कम होने और कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर कॉर्पोरेट मुनाफे पर पड़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा बाजार में बना हुआ है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के स्थिर नीतिगत रुख और आर्थिक विकास को लेकर सकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है। बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में आई खरीदारी इसी भरोसे को दर्शाती है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों की संभावना निवेशकों को आकर्षित कर सकती है।

    हालांकि कुछ क्षेत्रों में मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन स्मॉलकैप और चुनिंदा वैल्यू शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। विशेष रूप से ऊर्जा, टेलीकॉम और रिटेल से जुड़े कारोबार में लंबी अवधि की संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी। इससे बाजार का समग्र रुख सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहे।

  • प्लास्टिक के 10-20 रुपये के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने फील्ड ट्रायल और लॉन्च प्लान पर दी अहम जानकारी

    प्लास्टिक के 10-20 रुपये के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने फील्ड ट्रायल और लॉन्च प्लान पर दी अहम जानकारी

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक देश में पॉलिमर यानी प्लास्टिक बैंक नोटों को प्रचलन में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल जारी है। इन परीक्षणों के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का अंतिम फैसला लिया जाएगा। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं तो वित्त वर्ष 2027-28 तक इन नोटों को चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाने की संभावना है।

    आरबीआई के अनुसार, पॉलिमर नोटों का परीक्षण देश के विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये नोट भारतीय मौसम, लगातार उपयोग और दैनिक लेनदेन की परिस्थितियों में कितने टिकाऊ और प्रभावी साबित होते हैं। परीक्षण के दौरान नोटों की मजबूती, घिसाव, सुरक्षा और परिचालन संबंधी कई पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।

    केंद्रीय बैंक का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक समय तक उपयोग योग्य रहते हैं। विशेष रूप से 10 और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों का लेनदेन सबसे अधिक होता है, जिसके कारण वे जल्दी खराब हो जाते हैं। ऐसे में पॉलिमर सामग्री से बने नोट लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं और बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता भी कम हो सकती है। इससे नोटों की छपाई और प्रतिस्थापन पर होने वाले खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।

    सरकार पहले ही 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे चुकी है। पायलट परियोजना के तहत दोनों मूल्यवर्ग के बड़ी संख्या में नोट जारी कर विभिन्न परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता का परीक्षण किया जा रहा है। इन परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों और अनुभवों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। इनमें पारदर्शी विंडो, उन्नत सुरक्षा फीचर और नकली नोटों की पहचान आसान बनाने वाली तकनीक शामिल हो सकती है। इससे जालसाजी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही नोटों की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।

    आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागजी मुद्रा को पूरी तरह बंद करने की कोई योजना नहीं है। पॉलिमर नोट जारी होने के बाद भी मौजूदा कागजी नोट कानूनी रूप से मान्य रहेंगे और दोनों प्रकार की मुद्रा समानांतर रूप से प्रचलन में रहेगी। इससे लोगों को नए नोटों को अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और नकदी व्यवस्था पर किसी प्रकार का अचानक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो भारत भी उन देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां पॉलिमर मुद्रा का व्यापक उपयोग किया जाता है। इससे नोटों की उम्र बढ़ाने, नकली मुद्रा पर अंकुश लगाने और नकदी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सभी की नजर फील्ड ट्रायल के परिणामों और आरबीआई के अंतिम निर्णय पर बनी हुई है।

  • आज बैंक खुलेंगे या रहेंगे बंद? आज की आरबीआई हॉलिडे लिस्ट में जानिए आपके राज्य का पूरा हाल

    आज बैंक खुलेंगे या रहेंगे बंद? आज की आरबीआई हॉलिडे लिस्ट में जानिए आपके राज्य का पूरा हाल


    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक के अवकाश कैलेंडर के अनुसार 4 अगस्त 2026, मंगलवार को देशभर में बैंक बंद नहीं रहेंगे। इस दिन केवल त्रिपुरा राज्य में केर पूजा के अवसर पर बैंक अवकाश रहेगा। ऐसे में अगर किसी ग्राहक को बैंक शाखा में जाकर कोई जरूरी काम करना है तो उसे अपने राज्य की छुट्टियों की सूची पहले देख लेनी चाहिए। देश के अधिकांश राज्यों में बैंक सामान्य समय के अनुसार खुले रहेंगे और नियमित बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी।

    त्रिपुरा में मनाया जाने वाला केर पूजा राज्य का एक महत्वपूर्ण पारंपरिक धार्मिक उत्सव है। इसी कारण राज्य के सभी सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंक इस दिन बंद रहेंगे। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक और क्षेत्रीय बैंक सभी शामिल हैं। अगरतला सहित पूरे राज्य में बैंक शाखाओं में नकद लेनदेन, चेक क्लियरेंस और अन्य शाखा आधारित सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी।

    केर पूजा त्रिपुरा की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। यह उत्सव खारची पूजा के लगभग दो सप्ताह बाद आयोजित किया जाता है और राज्य के संरक्षक देवता ‘केर’ को समर्पित होता है। इस दौरान प्रदेश में सुख-समृद्धि, सुरक्षा और शांति की कामना की जाती है। पूजा के दौरान कई पारंपरिक नियमों का पालन किया जाता है और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार निर्धारित क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं लागू रहती हैं।

    इतिहासकारों के अनुसार इस पर्व की शुरुआत त्रिपुरा के माणिक्य राजवंश के शासनकाल में हुई थी। समय के साथ यह राज्य की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गया। आज भी इस आयोजन को सरकारी स्तर पर महत्व दिया जाता है और स्थानीय प्रशासन इसके आयोजन में सहयोग करता है। यही वजह है कि इस अवसर पर राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है।

    हालांकि, त्रिपुरा को छोड़कर देश के अन्य सभी राज्यों में 4 अगस्त को बैंक शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी। ग्राहक जमा, निकासी, ड्राफ्ट, पासबुक अपडेट, ऋण संबंधी सेवाएं और अन्य बैंकिंग कार्य सामान्य तरीके से करा सकेंगे। जिन लोगों को बैंक शाखा में व्यक्तिगत रूप से जाना है, उनके लिए किसी अतिरिक्त अवकाश की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, यदि वे त्रिपुरा से बाहर हैं।

    आरबीआई के अवकाश कैलेंडर के अनुसार अगस्त महीने में कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय छुट्टियां भी निर्धारित हैं। इनमें दूसरे और चौथे शनिवार, सभी रविवार, स्वतंत्रता दिवस, विभिन्न राज्यों के स्थानीय त्योहार, ईद-ए-मिलाद, ओणम, रक्षाबंधन तथा अन्य क्षेत्रीय पर्व शामिल हैं। इन छुट्टियों का प्रभाव संबंधित राज्यों तक सीमित रहेगा, जबकि राष्ट्रीय अवकाश पूरे देश में लागू होंगे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद अधिकांश डिजिटल बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह चालू रहेंगी। ग्राहक इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, डेबिट और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अधिकांश वित्तीय लेनदेन कर सकेंगे। हालांकि, शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता होने पर अवकाश से पहले या बाद का समय चुनना अधिक सुविधाजनक रहेगा।

    ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी महत्वपूर्ण बैंकिंग कार्य से पहले अपने शहर या राज्य में लागू बैंक अवकाश की जानकारी अवश्य जांच लें। इससे अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है और आवश्यक वित्तीय कार्य समय पर पूरे किए जा सकते हैं।

  • बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, आरबीआई के नए फैसले से जमा दरों और फंडिंग रणनीति पर पड़ेगा असर

    बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, आरबीआई के नए फैसले से जमा दरों और फंडिंग रणनीति पर पड़ेगा असर

     
    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए बल्क डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिससे उन्हें जमा दरें तय करने में पहले की तुलना में अधिक लचीलापन मिलेगा। नए नियमों के तहत बैंक अब बल्क डिपॉजिट की कीमत तय करते समय लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो यानी एलसीआर के रन-ऑफ रेट्स को ध्यान में रख सकेंगे। माना जा रहा है कि यह बदलाव बैंकों की फंडिंग लागत, तरलता प्रबंधन और एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

    रेटिंग एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे बैंक अपनी जरूरतों और जमा की तरलता विशेषताओं के आधार पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों को अधिक प्रभावी तरीके से तय कर सकेंगे। पहले जमा की लिक्विडिटी विशेषताओं के आधार पर ब्याज दरों में अंतर करने की गुंजाइश सीमित थी।

    नए ढांचे के तहत बैंक अलग-अलग प्रकार के डिपॉजिट और उनसे जुड़े तरलता जोखिम को ध्यान में रखते हुए कीमत तय कर पाएंगे। इससे बैंकों को यह आकलन करने में सुविधा होगी कि किसी जमा राशि के अचानक निकलने की स्थिति में उन्हें कितनी नकदी की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए बैंकों को पर्याप्त हाई-क्वालिटी लिक्विड एसेट्स रखने की आवश्यकता होगी, ताकि किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में नकदी की जरूरत पूरी की जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से बैंकों के बीच जमा आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। जिन बैंकों का जमा आधार मजबूत है और जिनके पास करंट अकाउंट तथा सेविंग्स अकाउंट की अच्छी हिस्सेदारी है, उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। वहीं, कमजोर जमा आधार वाले बैंकों को फंड जुटाने के लिए अधिक लागत का सामना करना पड़ सकता है।

    आरबीआई ने नए नियमों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिस्क्लोजर से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया है। बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक जैसी डिपॉजिट कैटेगरी के लिए ब्याज दर तय करने में किसी तरह का भेदभाव न हो। यानी समान परिस्थितियों वाले ग्राहकों के लिए दरों में मनमाना अंतर नहीं किया जा सकेगा।

    संशोधित निर्देशों के अनुसार, सभी बैंक शाखाओं में जमा पर लागू ब्याज दरों को समान रखना जरूरी होगा। हालांकि, बल्क डिपॉजिट के मामले में लिक्विडिटी रिस्क और उससे जुड़ी लागत के आधार पर कीमत तय करने की अनुमति दी गई है। यह व्यवस्था बैंकों को जोखिम और लागत के अनुसार बेहतर रणनीति बनाने में मदद करेगी।

    आरबीआई के नए निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इसके तहत बैंक द्वारा ग्राहकों को दिया जाने वाला वास्तविक ब्याज उनकी वेबसाइट पर पहले से घोषित ब्याज दरों के शेड्यूल के अनुसार ही होना चाहिए। इससे ग्राहकों को भी जमा दरों की जानकारी पहले से उपलब्ध रहेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

    नए नियमों के तहत बैंकों को प्रत्येक कार्य दिवस की सुबह 10 बजे तक अपनी वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट के लिए लागू ब्याज दरें प्रकाशित करनी होंगी। इसके लिए उन्हें 10 मिनट का अतिरिक्त समय यानी ग्रेस पीरियड भी दिया जाएगा। इससे बैंकिंग व्यवस्था में स्पष्टता बढ़ेगी और ग्राहक भी बेहतर जानकारी के आधार पर अपने निवेश संबंधी फैसले ले सकेंगे।

    कुल मिलाकर, आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में तरलता प्रबंधन को मजबूत करने और जमा बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे बैंकों को अपनी वित्तीय रणनीति तैयार करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, जबकि नियामकीय निगरानी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी।

  • आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा बैठक सोमवार से, रेपो रेट यथावत रहने की संभावना

    आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा बैठक सोमवार से, रेपो रेट यथावत रहने की संभावना


    नई दिल्ली।
    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक 3 अगस्त से शुरू होकर पांच अगस्त तक चलेगी। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के निर्णय की जानकारी संजय मल्होत्रा 5 अगस्त को देंगे।

    आर्थिक मामलों के जानकारों ने रविवार को बताया कि आरबीआई पश्चिम एशिया संकट और महंगाई के जोखिमों को देखते हुए इस बार भी अपने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और उसे 5.25 फीसदी पर यथावत (अपरिवर्तित) रख सकता है।

    केंद्रीय बैंक ने वृद्धि दर को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट को 1.25 फीसदी की कटौती की थी। आरबीआई वर्तमान रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा है।

  • RBI के नए FD नियम 1 अक्टूबर से लागू, अब हर बैंक शाखा में समान जमा पर मिलेगा एक जैसा ब्याज

    RBI के नए FD नियम 1 अक्टूबर से लागू, अब हर बैंक शाखा में समान जमा पर मिलेगा एक जैसा ब्याज

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए बैंकिंग व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इनके लागू होने के बाद एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में समान अवधि और समान राशि की फिक्स्ड डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दर देने की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। इससे ग्राहकों को बैंक की किसी भी शाखा में समान शर्तों पर एक जैसा ब्याज मिलने का अधिकार मिलेगा।

    RBI के नए निर्देश सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के साथ-साथ स्मॉल फाइनेंस बैंक, रीजनल रूरल बैंक, लोकल एरिया बैंक, पेमेंट बैंक और शहरी सहकारी बैंकों पर भी लागू होंगे। इसका उद्देश्य देशभर में जमा योजनाओं को अधिक पारदर्शी बनाना और ग्राहकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना है। इससे बैंकिंग प्रणाली में एकरूपता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

    नए नियमों के अनुसार यदि कोई ग्राहक किसी बैंक की किसी भी शाखा में समान दिन, समान अवधि और समान राशि की फिक्स्ड डिपॉजिट कराता है तो उस पर मिलने वाली ब्याज दर पूरे बैंक नेटवर्क में एक जैसी होगी। केवल शाखा बदलने के आधार पर ब्याज दर में अंतर नहीं रखा जा सकेगा। इससे ग्राहकों को बेहतर स्पष्टता मिलेगी और शाखा के अनुसार ब्याज दरों में अंतर की स्थिति समाप्त होगी।

    RBI ने बैंकों के लिए ब्याज दरों की जानकारी सार्वजनिक करना भी अनिवार्य किया है। अब सभी बैंक अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं की ब्याज दरों का विवरण पहले से अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराएंगे। इससे ग्राहक निवेश का निर्णय लेने से पहले विभिन्न अवधि की ब्याज दरों की आसानी से तुलना कर सकेंगे। यह व्यवस्था बैंकिंग सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ ग्राहकों के विश्वास को भी मजबूत करेगी।

    बल्क डिपॉजिट से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। बैंकों को प्रत्येक कार्यदिवस सुबह निर्धारित समय तक अपनी वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें अपडेट करनी होंगी। इससे बड़े निवेशकों को रोजाना उपलब्ध दरों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी और निवेश संबंधी निर्णय अधिक जानकारी के आधार पर लिए जा सकेंगे।

    RBI ने बल्क डिपॉजिट और रुपये में किए गए एनआरआई डिपॉजिट के मामले में बैंकों को कुछ परिचालन संबंधी लचीलापन भी दिया है। बैंक अपनी तरलता की आवश्यकता, फंडिंग लागत और नियामकीय मानकों को ध्यान में रखते हुए इन श्रेणियों में ब्याज दर तय कर सकेंगे। हालांकि यह छूट केवल निर्धारित श्रेणियों तक सीमित रहेगी और सामान्य खुदरा ग्राहकों के लिए समान FD पर समान ब्याज का नियम प्रभावी रहेगा।

    महत्वपूर्ण बात यह है कि इन नए नियमों का अर्थ यह नहीं है कि 1 अक्टूबर से सभी बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज दरें स्वतः बढ़ या घट जाएंगी। RBI ने केवल ब्याज निर्धारण की प्रक्रिया और पारदर्शिता से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। ब्याज दरें तय करने का अधिकार पहले की तरह बैंकों के पास ही रहेगा और वे अपनी वित्तीय स्थिति, बाजार की परिस्थितियों तथा धन जुटाने की लागत के आधार पर दरों में परिवर्तन कर सकेंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाएं अधिक स्पष्ट और भरोसेमंद बनेंगी। समान जमा पर समान ब्याज मिलने, ब्याज दरों की सार्वजनिक उपलब्धता और अलग-अलग शाखाओं के बीच असमानता समाप्त होने से निवेशकों को बेहतर निर्णय लेने में सुविधा होगी। इससे बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

  • 3 से 9 अगस्त के बीच केवल दो दिन बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले छुट्टियों की सूची जरूर देखें

    3 से 9 अगस्त के बीच केवल दो दिन बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले छुट्टियों की सूची जरूर देखें

    नई दिल्ली । अगस्त के पहले पूर्ण सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए बैंक अवकाश की जानकारी पहले से जानना महत्वपूर्ण है। 3 अगस्त से 9 अगस्त 2026 के बीच अधिकांश राज्यों में बैंक सामान्य कार्य दिवसों पर खुले रहेंगे, जबकि सप्ताहांत में निर्धारित अवकाश के कारण दो दिन शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। ऐसे में जिन लोगों को बैंक शाखा में जाकर जरूरी कार्य पूरे करने हैं, उन्हें पहले से अपनी योजना बना लेनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    भारतीय रिजर्व बैंक प्रत्येक महीने विभिन्न राज्यों के लिए बैंक अवकाश का कैलेंडर जारी करता है। इस सूची में राष्ट्रीय अवकाश, क्षेत्रीय त्योहारों से जुड़े अवकाश और साप्ताहिक छुट्टियां शामिल रहती हैं। चूंकि अलग-अलग राज्यों में स्थानीय पर्व और विशेष अवसर अलग हो सकते हैं, इसलिए कुछ स्थानों पर अतिरिक्त अवकाश भी घोषित किए जा सकते हैं। हालांकि 3 अगस्त से 9 अगस्त के बीच सामान्य परिस्थितियों में अधिकांश राज्यों में बैंक सोमवार से शुक्रवार तक नियमित रूप से संचालित होंगे।

    इस सप्ताह के दौरान 3 अगस्त सोमवार, 4 अगस्त मंगलवार, 5 अगस्त बुधवार, 6 अगस्त गुरुवार और 7 अगस्त शुक्रवार को बैंक शाखाएं सामान्य समय के अनुसार खुली रहेंगी। इन दिनों ग्राहक नकद जमा, निकासी, चेक जमा, डिमांड ड्राफ्ट, पासबुक अपडेट, ऋण संबंधी कार्य, खाता खुलवाने तथा अन्य बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। यदि किसी राज्य में स्थानीय अवकाश घोषित नहीं है तो इन दिनों सभी नियमित बैंकिंग गतिविधियां जारी रहेंगी।

    सप्ताह के अंत में 8 अगस्त को महीने का दूसरा शनिवार होने के कारण देशभर में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। इसके अगले दिन 9 अगस्त रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा, जिसके चलते बैंक शाखाओं में कोई नियमित कार्य नहीं होगा। इस प्रकार 3 अगस्त से 9 अगस्त के बीच सामान्य रूप से बैंक केवल दो दिन बंद रहेंगे। हालांकि कुछ राज्यों में स्थानीय त्योहार या विशेष सरकारी अवकाश घोषित होने पर संबंधित क्षेत्रों में अतिरिक्त छुट्टी लागू हो सकती है।

    बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को आवश्यक डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं का लाभ मिलता रहेगा। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, एटीएम से नकद निकासी, आईएमपीएस, एनईएफटी तथा अन्य ऑनलाइन लेनदेन सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी। इससे ग्राहक बिना बैंक शाखा पहुंचे भी अधिकांश वित्तीय कार्य आसानी से कर सकेंगे। हालांकि चेक क्लियरेंस, शाखा में नकद जमा, केवाईसी अपडेट, दस्तावेज सत्यापन तथा कुछ विशेष बैंकिंग प्रक्रियाएं केवल कार्य दिवसों में ही पूरी की जा सकेंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जिन ग्राहकों को बड़े वित्तीय लेनदेन, ऋण संबंधी दस्तावेज जमा करने, चेक क्लियर कराने या अन्य महत्वपूर्ण शाखा आधारित कार्य करने हैं, उन्हें अवकाश से पहले ही यह प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। इससे छुट्टियों के दौरान किसी प्रकार की देरी या असुविधा से बचा जा सकता है। साथ ही बैंक जाने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक अवकाश सूची की जांच करना भी उपयोगी रहेगा, क्योंकि विभिन्न राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अवकाश अलग-अलग हो सकते हैं। समय रहते योजना बनाकर ग्राहक अपनी बैंकिंग जरूरतों को बिना किसी परेशानी के पूरा कर सकते हैं।