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  • देश में अगले साल आ सकते हैं 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट…. RBI ने शुरू की तैयारी

    देश में अगले साल आ सकते हैं 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट…. RBI ने शुरू की तैयारी


    नई दिल्ली।
    भारत (Inida) में जल्द ही कटे-फटे और गंदे नोटों की समस्या हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India ) ने देश में पॉलीमर (Polymer) यानी प्लास्टिक के नोट लाने का नीतिगत फैसला कर लिया है और अगले साल तक 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट बाजार में उतारे जा सकते हैं। क्रेडिट कार्ड की तरह कड़े होने के बजाय ये नोट बेहद पतले, हल्के और लचीले होंगे।

    भारत में पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट चलन में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल दस व बीस रुपये के प्लास्टिक नोट बाजार में लाए जाएंगे। इसमें सुरक्षा के उन्हीं उन्नत नियमों का पालन किया जाएगा जो कागज के नोट छापने में अपनाए जाते हैं। अगले साल यह नोट बाजार में आ सकते हैं।

    रिजर्व बैंक ने पॉलीमर शीट आपूर्ति के लिए निजी कंपनियों को भी आमंत्रित किया है। शुरुआती चरण सफल रहा तो बड़े नोट भी चरणबद्ध तरीके से लाए जाएंगे। इन पॉलीमर नोटों के लिए डिजाइन, आकार व छपाई उसी तरह होगी जैसे कागज के नोट पर होगी। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए इन नोटों में विशेष तकनीक अपनाई जाएगी।

    रिजर्व बैंक के अधिकारियों के मुताबिक पॉलीमर नोटों के प्रचलन में आने की समय सीमा नहीं बताई जा सकती। इतना जरूर है कि पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट लाने का नीतिगत निर्णय हो चुका है और चार चरणों से गुजरने के बाद पॉलीमर नोट छापे जाएंगे।


    पतले, लचीले प्लास्टिक सब्सट्रेट से बनेंगे नोट

    इस पूरी प्रक्रिया में वक्त लगना स्वाभाविक है। इसमें मौसम, इस्तेमाल के तौर-तरीकों व जनता की सहूलियत का भी ध्यान रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में कितने नोट तैयार होंगे इसका आकलन बाजार में दस व बीस रुपये मूल्य वर्ग के नोटों की उपलब्धता, एटीएम व बैंकों की जरूरत के हिसाब से तय होगा। यह नोट एक पतले, लचीले प्लास्टिक सब्सट्रेट से बनेंगे। ये क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह कठोर नहीं हल्के, लचीले होंगे।

    पहले भी हो चुकी है कवायद…वर्ष 2012 में भारत सरकार ने मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला समेत कुछ शहरों में 10 रुपये के एक अरब पॉलीमर नोटों के परीक्षण को मंजूरी दी थी। लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी।


    कटे-फटे नोटों से निजात

    लोगों को कटे, फटे व गंदे नोटों से निजात मिलेगी। इसे वह आसानी से ले जा सकेंगे। पॉलीमर करेंसी नोट में नए सुरक्षा फीचर होंगे। इससे नकली नोट तैयार होने की संभावना न के बराबर हो जाएगी। पॉलीमर नोटों में माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और विशेष स्याही जैसी उन्नत, सुविधाओं का उपयोग होगा। कागज के मुकाबले इनके निर्माण पर खर्च भी कम आएगा। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड जैसे कई देशों में पॉलीमर नोट कई वर्षों से चलन में हैं।

    नोटों की छपाई पर बढ़ रहा खर्च
    रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, नोटों की छपाई पर व्यय वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये हो गया, यह पिछले वर्ष 5,101.4 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि मुख्य रूप से नोटों की बढ़ती मांग के कारण हुई है। वित्त वर्ष 2025 में, लगभग 23.8 अरब गंदे नोटों का निस्तारण किया गया। 10 रुपये और 20 रुपये जैसे कम मूल्यवर्ग के नोटों की जांच सबसे पहले होने की संभावना है।

  • 16 से 19 जुलाई के बीच कई शहरों में अलग-अलग दिनों पर बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले जरूर देखें अपने शहर की छुट्टियों की सूची

    16 से 19 जुलाई के बीच कई शहरों में अलग-अलग दिनों पर बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले जरूर देखें अपने शहर की छुट्टियों की सूची


    नई दिल्ली ।
    अगले सप्ताह बैंकिंग सेवाओं से जुड़ा कोई भी आवश्यक कार्य करने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए बैंक अवकाश की जानकारी पहले से जानना महत्वपूर्ण होगा। 16 जुलाई से 19 जुलाई के बीच देश के अलग-अलग शहरों में स्थानीय पर्वों, स्मृति दिवस और साप्ताहिक अवकाश के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि बैंक पहुंचने से पहले अपने शहर में लागू अवकाश की स्थिति अवश्य जांच लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    16 जुलाई को देश के कुछ चुनिंदा शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इस दिन भुवनेश्वर, देहरादून और इंफाल में स्थानीय पर्वों और सांस्कृतिक आयोजनों के चलते बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। ओडिशा में रथ यात्रा तथा उत्तराखंड में हरेला पर्व के अवसर पर अवकाश रहेगा, जबकि संबंधित स्थानीय अवकाश के कारण इंफाल में भी बैंक सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इन शहरों में ग्राहकों को अपने बैंकिंग कार्य निर्धारित तिथि से पहले या बाद में निपटाने की योजना बनानी चाहिए।

    17 जुलाई को बैंक अवकाश केवल मेघालय की राजधानी शिलांग में रहेगा। यहां तिरोत सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर सरकारी अवकाश घोषित होने के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। यह अवकाश केवल स्थानीय स्तर पर लागू होगा, इसलिए देश के अन्य हिस्सों में सामान्य बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी।

    18 जुलाई को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में द्रुकपा त्शे-जी पर्व के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। यह पर्व स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, जिसके कारण इस दिन बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज नहीं होगा। गंगटोक के अलावा देश के अधिकांश शहरों में बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे।

    19 जुलाई को रविवार होने के कारण पूरे देश में सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक शाखा स्तर पर बंद रहेंगे। यह नियमित साप्ताहिक अवकाश है और देशभर में लागू होगा। जिन ग्राहकों को नकद जमा, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट या अन्य शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता है, उन्हें रविवार से पहले अपने कार्य पूरे करने चाहिए।

    हालांकि शाखाएं बंद रहने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, कार्ड भुगतान और अन्य ऑनलाइन सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक धन हस्तांतरण, बिल भुगतान, बैलेंस जांच और अन्य डिजिटल लेनदेन पहले की तरह कर सकेंगे।

    भारतीय रिजर्व बैंक प्रत्येक वर्ष और प्रत्येक महीने के लिए बैंक अवकाश की सूची जारी करता है, जिसमें राष्ट्रीय अवकाशों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों और शहरों के स्थानीय त्योहारों एवं विशेष अवसरों को भी शामिल किया जाता है। यही कारण है कि पूरे देश में सभी शहरों में एक ही दिन बैंक बंद नहीं रहते। ऐसे में किसी भी महत्वपूर्ण बैंकिंग कार्य के लिए शाखा जाने से पहले अपने शहर में लागू अवकाश की जानकारी की पुष्टि करना ग्राहकों के लिए सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। इससे समय की बचत होगी और बैंकिंग कार्य बिना किसी अनावश्यक परेशानी के पूरे किए जा सकेंगे।

  • भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल, 674.19 अरब डॉलर पर पहुंचा फॉरेक्स रिजर्व; गोल्ड रिजर्व भी मजबूत हुआ

    भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल, 674.19 अरब डॉलर पर पहुंचा फॉरेक्स रिजर्व; गोल्ड रिजर्व भी मजबूत हुआ

    नई दिल्ली । भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत देते हुए देश के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.26 अरब डॉलर बढ़कर 674.193 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पिछले सप्ताह आई गिरावट के बाद यह वृद्धि देश की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

    आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में केवल विदेशी मुद्रा भंडार ही नहीं, बल्कि देश के स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्टिंग सप्ताह के दौरान गोल्ड रिजर्व का मूल्य 2.669 अरब डॉलर बढ़कर 105.205 अरब डॉलर हो गया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में भी वृद्धि दर्ज हुई और इसका मूल्य बढ़कर 18.623 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

    इससे पहले 26 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 5.65 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि हाल के सप्ताहों में भंडार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन इसके बावजूद भारत दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाले देशों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच देश की वित्तीय स्थिरता को मजबूत आधार प्रदान करता है।

    हालांकि वर्तमान स्तर अभी भी फरवरी 2026 में दर्ज रिकॉर्ड उच्च स्तर 728.494 अरब डॉलर से नीचे है, फिर भी हालिया बढ़ोतरी को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार आयात भुगतान, विनिमय दर की स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक वित्तीय झटकों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है और अर्थव्यवस्था की साख को बल मिलता है।

    इस बीच, आरबीआई की संशोधित फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक (एफसीएनआर-बी) जमा योजना का भी सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। बैंकिंग क्षेत्र के अनुसार, इस योजना के तहत विदेशों से धन का प्रवाह धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शुरुआती चरण में बैंकों ने लगभग 3 से 4 अरब डॉलर तक की जमा राशि जुटाई है और आने वाले समय में इसमें और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बैंकिंग क्षेत्र का अनुमान है कि संशोधित एफसीएनआर-बी योजना के माध्यम से समय के साथ 40 से 50 अरब डॉलर तक की नई जमा राशि आकर्षित की जा सकती है। विशेष रूप से खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के बीच इस योजना को लेकर रुचि बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। बैंक इस उद्देश्य से जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं और प्रवासी भारतीय ग्राहकों से सीधे संपर्क कर योजना की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची ब्याज दरें, आरबीआई द्वारा हेजिंग लागत से जुड़ी सुविधा और बेहतर निवेश विकल्प इस योजना को अधिक आकर्षक बना रहे हैं। यदि आने वाले महीनों में विदेशी निवेश और एनआरआई जमा में निरंतर बढ़ोतरी जारी रहती है, तो इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूती मिल सकती है। यह स्थिति न केवल देश की बाहरी वित्तीय क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और निवेशकों के विश्वास को भी और सुदृढ़ बनाएगी।

  • RBI की बड़ी कार्रवाई, नियमों के उल्लंघन पर बैंक ऑफ बड़ौदा और GIC हाउसिंग फाइनेंस पर लाखों रुपये का जुर्माना

    RBI की बड़ी कार्रवाई, नियमों के उल्लंघन पर बैंक ऑफ बड़ौदा और GIC हाउसिंग फाइनेंस पर लाखों रुपये का जुर्माना

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग नियमों के पालन में लापरवाही बरतने पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा और जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने दोनों संस्थानों पर कुल 66.7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नियामकीय प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों में की गई है। साथ ही RBI ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय का ग्राहकों के खातों, जमा राशि या बैंकिंग सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    RBI के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा पर 63.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच के दौरान पाया गया कि बैंक ने कुछ ऋण खातों में निर्धारित सीमा से अधिक ब्याज वसूला, जो लागू नियामकीय निर्देशों के अनुरूप नहीं था। इसके अलावा बैंक कुछ ग्राहकों से संबंधित केवाईसी दस्तावेज निर्धारित समय के भीतर केंद्रीय रजिस्ट्री में अपलोड करने में भी विफल रहा। केंद्रीय बैंक ने इसे अनुपालन संबंधी गंभीर चूक माना है।

    वहीं जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस पर 3.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच में सामने आया कि कंपनी अपने ऋण खातों के जोखिम का निर्धारित अंतराल पर मूल्यांकन नहीं कर रही थी। नियमानुसार ऐसे खातों की कम से कम प्रत्येक छह महीने में समीक्षा की जानी चाहिए, लेकिन कंपनी इस प्रक्रिया का समय पर पालन नहीं कर सकी। इसी आधार पर नियामकीय कार्रवाई की गई।

    RBI ने कहा है कि वित्तीय संस्थानों के लिए नियामकीय मानकों का पालन अनिवार्य है। बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण और अनुपालन की समीक्षा की जाती है। जहां भी नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं, वहां निर्धारित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है।

    केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि लगाया गया जुर्माना केवल नियामकीय कमियों से संबंधित है और इसका उद्देश्य संस्थानों को नियमों के बेहतर पालन के लिए प्रेरित करना है। यह कार्रवाई किसी ग्राहक के खाते, जमा राशि, ऋण अनुबंध या बैंकिंग लेनदेन की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं डालती। ग्राहकों की धनराशि पूरी तरह सुरक्षित है और बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह सामान्य रूप से जारी रहेंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में RBI ने अनुपालन मानकों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे ग्राहक हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का समय पर पालन करें। नियमों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर केंद्रीय बैंक लगातार निगरानी रख रहा है और आवश्यक होने पर दंडात्मक कार्रवाई भी कर रहा है।

    इस ताजा कार्रवाई को भी वित्तीय क्षेत्र में बेहतर प्रशासन और मजबूत नियामकीय व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। RBI का संदेश स्पष्ट है कि बैंकिंग प्रणाली में नियमों के पालन से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी।

  • बैंक ऑफ बड़ौदा ने वसूला तय सीमा से अधिक ब्याज….. RBI ने ठोका 63.60 लाख का जुर्माना

    बैंक ऑफ बड़ौदा ने वसूला तय सीमा से अधिक ब्याज….. RBI ने ठोका 63.60 लाख का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    देश के प्रमुख सरकारी बैंकों (Public sector Banks) में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) पर भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) ने 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक ने यह कार्रवाई बैंक द्वारा कुछ लोन खातों में तय सीमा से अधिक ब्याज वसूलने और KYC (Know Your Customer) नियमों का पालन नहीं करने के कारण की है। RBI के इस कदम से साफ संदेश गया है कि बैंकिंग नियमों के उल्लंघन पर किसी भी बैंक को राहत नहीं दी जाएगी, चाहे वह सरकारी बैंक ही क्यों न हो।

    क्या है मामला?
    RBI के अनुसार, यह मामला बैंक की 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के निरीक्षण के दौरान सामने आया। जांच में पाया गया कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने कुछ ग्राहकों से निर्धारित दर से अधिक ब्याज वसूला। इसके अलावा कई खातों में ग्राहकों की KYC जानकारी को तय समय सीमा के अंदर CKYCR (Central KYC Records Registry) में अपडेट नहीं किया गया, जो RBI के नियमों का उल्लंघन है।

    कारण बताओ नोटिस
    इन खामियों के सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने बैंक ऑफ बड़ौदा को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया और उससे स्पष्टीकरण मांगा। बैंक को लिखित जवाब देने के साथ-साथ व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने का भी अवसर दिया गया। हालांकि, RBI ने बैंक की दलीलों को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद 30 जून 2026 को बैंक पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश जारी कर दिया गया।

    RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल नियामकीय नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक और उसके ग्राहकों के बीच हुए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर कोई असर पड़ेगा। यानी बैंक की सामान्य बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी और ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    KYC नियमों का सही तरीके से पालन नहीं
    इसी कार्रवाई के तहत रिजर्व बैंक ने एक अन्य मामले में GIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर भी 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी पर KYC नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करने का आरोप था। RBI ने नोटिस, लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद कंपनी की दलीलों को भी असंतोषजनक पाया और 24 जून 2026 को जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया।

    बैंकिंग एक्सपर्ट का मानना है कि हाल के सालों में RBI नियमों के पालन को लेकर काफी सख्त हुआ है। KYC, ब्याज दरों की पारदर्शिता और ग्राहक हितों की सुरक्षा को लेकर केंद्रीय बैंक लगातार निगरानी बढ़ा रहा है। ऐसे में सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए RBI के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करना बेहद जरूरी हो गया है।

    बैंक ऑफ बड़ौदा पर लगाया गया यह जुर्माना ग्राहकों के लिए एक संदेश है कि बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए RBI लगातार सक्रिय है। वहीं, ग्राहकों के लिए यह राहत की बात है कि इस कार्रवाई का उनकी जमा राशि, बैंक खाते या बैंक की नियमित सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

  • RBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भारत का विदेशी कर्ज 762.8 अरब डॉलर के पार; निजी क्षेत्र की बढ़ी उधारी बनी प्रमुख वजह

    RBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भारत का विदेशी कर्ज 762.8 अरब डॉलर के पार; निजी क्षेत्र की बढ़ी उधारी बनी प्रमुख वजह

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 के अंत तक भारत का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 762.8 अरब डॉलर, यानी लगभग 72.2 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इसमें 26.3 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट में विदेशी कर्ज बढ़ने के साथ-साथ उससे जुड़े कई ऐसे संकेत भी सामने आए हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए राहत और सतर्कता दोनों का संदेश देते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी का असर देश के डेट-टू-जीडीपी अनुपात पर भी दिखाई दिया है। मार्च 2025 में यह अनुपात 19.8 प्रतिशत था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 20.8 प्रतिशत हो गया। इसका अर्थ है कि देश की अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में विदेशी देनदारियों का अनुपात बढ़ा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्तर अभी भी नियंत्रण में है, लेकिन आने वाले समय में इस पर लगातार निगरानी बनाए रखना आवश्यक होगा।

    रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि विदेशी कर्ज में वृद्धि का प्रमुख कारण सरकारी उधारी नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र की बढ़ी हुई विदेशी फंडिंग है। रिपोर्ट के अनुसार गैर-वित्तीय कॉरपोरेट कंपनियों, वाणिज्यिक बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने कारोबार के विस्तार और निवेश आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेशों से अधिक उधार लिया है। कुल विदेशी कर्ज में गैर-वित्तीय कॉरपोरेट क्षेत्र की हिस्सेदारी 36.4 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक दर्ज की गई है।

    रिपोर्ट में वैल्यूएशन इफेक्ट का भी उल्लेख किया गया है। विभिन्न वैश्विक मुद्राओं और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले विनिमय दरों में हुए बदलाव के कारण भारत के विदेशी कर्ज पर अतिरिक्त दबाव कम हुआ। केंद्रीय बैंक के अनुसार यदि विनिमय दरों का यह प्रभाव नहीं होता, तो विदेशी कर्ज में वृद्धि 26.3 अरब डॉलर के बजाय लगभग 51 अरब डॉलर तक पहुंच सकती थी। इससे स्पष्ट होता है कि मुद्रा विनिमय में आए बदलावों ने कुल देनदारी के आंकड़े को सीमित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    विदेशी कर्ज की मुद्रा संरचना पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी सबसे अधिक 55.5 प्रतिशत रही। इसके बाद भारतीय रुपये में 29.4 प्रतिशत कर्ज दर्ज किया गया। जापानी येन की हिस्सेदारी 6.4 प्रतिशत, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स 4.3 प्रतिशत और यूरो की हिस्सेदारी 3.7 प्रतिशत रही। कर्ज के स्वरूप में सबसे बड़ा हिस्सा ऋण यानी लोन का रहा, जिसकी हिस्सेदारी कुल विदेशी कर्ज में 34.7 प्रतिशत दर्ज की गई।

    हालांकि विदेशी कर्ज बढ़ने के बावजूद कुछ आर्थिक संकेतकों ने राहत भी दी है। रिपोर्ट के अनुसार देश की डेट सर्विसिंग क्षमता में सुधार हुआ है। चालू प्राप्तियों के मुकाबले कर्ज और ब्याज चुकाने का अनुपात घटकर 5.8 प्रतिशत रह गया है, जबकि एक वर्ष पहले यह 6.6 प्रतिशत था। इसका अर्थ है कि भारत की कर्ज चुकाने की क्षमता पहले की तुलना में बेहतर हुई है।

    रिजर्व बैंक ने यह भी बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में बना हुआ है। 672 अरब डॉलर से अधिक के फॉरेक्स रिजर्व को बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा कवच माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और नियंत्रित कर्ज प्रबंधन नीति के कारण भारत फिलहाल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना करने की बेहतर स्थिति में है, हालांकि निजी क्षेत्र की बढ़ती विदेशी उधारी पर भविष्य में सतर्क निगरानी बनाए रखना आवश्यक रहेगा।

  • July Bank Holiday 2026: जुलाई में 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, छुट्टियों की पूरी लिस्ट देखकर ही करें जरूरी काम की प्लानिंग

    July Bank Holiday 2026: जुलाई में 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, छुट्टियों की पूरी लिस्ट देखकर ही करें जरूरी काम की प्लानिंग

    नई दिल्ली। जुलाई 2026 की शुरुआत के साथ ही बैंक ग्राहकों के लिए छुट्टियों का कैलेंडर जानना जरूरी हो गया है। यदि आपको बैंक शाखा में जाकर नकदी जमा करनी है, चेक क्लियर कराना है, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना है या किसी अन्य बैंकिंग सेवा का लाभ लेना है, तो पहले अपने शहर की अवकाश सूची जरूर देख लें। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार, जुलाई महीने में विभिन्न राज्यों में स्थानीय पर्व, सांस्कृतिक आयोजनों और नियमित साप्ताहिक अवकाश को मिलाकर कुल 12 दिन बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहेगा।

    हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि सभी छुट्टियां पूरे देश में एक साथ लागू नहीं होंगी। बैंक अवकाश की व्यवस्था राज्यवार और स्थानीय त्योहारों के आधार पर तय होती है। इसका मतलब है कि जिस दिन किसी राज्य में बैंक बंद रहेंगे, उसी दिन दूसरे राज्यों में बैंक सामान्य रूप से खुले भी रह सकते हैं। इसलिए ग्राहकों को अपने शहर और राज्य के अनुसार बैंक अवकाश की जानकारी पहले से प्राप्त कर लेनी चाहिए।

    महीने की शुरुआत में 5 जुलाई को रविवार होने के कारण देशभर में बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद 6 जुलाई को मिजोरम की राजधानी आइजोल में एमएचआईपी डे के अवसर पर स्थानीय बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। 9 जुलाई को मेघालय के शिलॉन्ग में बेह देइंखलाम पर्व के कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं 11 जुलाई को दूसरे शनिवार और 12 जुलाई को रविवार के कारण देशभर के सभी सरकारी और निजी बैंक शाखाओं में नियमित अवकाश रहेगा।

    जुलाई के मध्य में भी कई राज्यों में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी। 16 जुलाई को रथ यात्रा, कांग रथयात्रा और हरेला पर्व के अवसर पर भुवनेश्वर, देहरादून, इम्फाल और शिलॉन्ग में बैंक बंद रहेंगे। इसके अगले दिन 17 जुलाई को शिलॉन्ग में यू तिरोत सिंह की पुण्यतिथि पर स्थानीय अवकाश रहेगा। 18 जुलाई को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में द्रुकपा त्शे-जी पर्व के अवसर पर बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। 19 जुलाई को रविवार होने से पूरे देश में बैंकिंग अवकाश रहेगा।

    महीने के अंतिम सप्ताह में भी कुछ स्थानों पर बैंक बंद रहेंगे। 22 जुलाई को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में खर्ची पूजा के अवसर पर बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। इसके अलावा 25 जुलाई को चौथा शनिवार और 26 जुलाई को रविवार होने के कारण पूरे देश में सभी बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को अपने जरूरी बैंकिंग कार्य इन तिथियों को ध्यान में रखकर पहले ही पूरे कर लेने चाहिए।

    बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों की डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसी सभी ऑनलाइन सुविधाएं पहले की तरह चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक धन हस्तांतरण, बिल भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी और नकदी निकासी जैसे अधिकांश कार्य बिना किसी रुकावट के कर सकेंगे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक शाखा में जाकर किए जाने वाले कार्यों की योजना पहले से बना लेने पर अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है। खासतौर पर व्यापारियों, वेतनभोगी कर्मचारियों और ऐसे ग्राहकों के लिए, जिन्हें शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता होती है, बैंक अवकाश की जानकारी पहले से होना बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

  • RBI का बड़ा फैसला, बैंक और NBFC की मनमानी पर लगेगी लगाम, मिस-सेलिंग रोकने के लिए 2027 से लागू होंगे सख्त नियम

    RBI का बड़ा फैसला, बैंक और NBFC की मनमानी पर लगेगी लगाम, मिस-सेलिंग रोकने के लिए 2027 से लागू होंगे सख्त नियम

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से मिस-सेलिंग के खिलाफ नया नियामकीय ढांचा जारी किया है। यह फ्रेमवर्क 1 जनवरी 2027 से लागू होगा और इसके तहत बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों तथा अन्य विनियमित संस्थाओं को ग्राहकों की जरूरत, वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता के अनुरूप ही उत्पादों की पेशकश करनी होगी। इस कदम को वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    लंबे समय से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि कई बैंक और वित्तीय संस्थान अपने बिक्री लक्ष्य पूरे करने के लिए ग्राहकों को ऐसे उत्पाद बेच देते हैं जिनकी उन्हें आवश्यकता नहीं होती। कई मामलों में ऋण लेने वाले ग्राहकों को अतिरिक्त बीमा योजनाएं खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता है, जबकि कुछ निवेश उत्पादों से जुड़े जोखिमों की पूरी जानकारी भी साझा नहीं की जाती। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट नियम निर्धारित किए हैं ताकि ग्राहकों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।

    नए नियमों के अनुसार यदि किसी ग्राहक को उसकी आय, निवेश क्षमता या वित्तीय आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होने वाला उत्पाद बेचा जाता है, तो उसे मिस-सेलिंग माना जाएगा। इसी तरह किसी उत्पाद के बारे में अधूरी, भ्रामक या गलत जानकारी देना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ग्राहक की स्पष्ट और सूचित सहमति के बिना किसी वित्तीय उत्पाद की बिक्री पर भी रोक रहेगी। इसके अलावा किसी एक सेवा का लाभ लेने के लिए ग्राहक को दूसरा उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करना भी प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल किया गया है।

    RBI ने डिजिटल युग की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एजेंटों, मार्केटिंग एजेंसियों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स की भूमिका पर भी विशेष ध्यान दिया है। हाल के वर्षों में बैंक और वित्तीय संस्थान अपने उत्पादों के प्रचार के लिए बाहरी एजेंसियों और डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। नए प्रावधानों के तहत यदि कोई एजेंट या प्रचारक किसी उत्पाद के बारे में भ्रामक दावा करता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था पर ही होगी। संस्थाएं यह तर्क देकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगी कि गलती किसी तीसरे पक्ष द्वारा की गई थी।

    नियमों में यह भी कहा गया है कि ग्राहकों को किसी भी वित्तीय उत्पाद की फीस, जोखिम, लॉक-इन अवधि, निकासी नियम और अन्य महत्वपूर्ण शर्तों की जानकारी स्पष्ट रूप से पहले ही उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे ग्राहकों को सूचित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी और बाद में विवाद की संभावनाएं कम होंगी। यदि किसी मामले में मिस-सेलिंग साबित होती है, तो प्रभावित ग्राहक को उचित राहत या धनवापसी भी मिल सकती है।

    केंद्रीय बैंक ने बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन तंत्र पर भी निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। कई बार कर्मचारियों और एजेंटों को दिए जाने वाले इंसेंटिव उन्हें आक्रामक बिक्री के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे ग्राहक हित प्रभावित हो सकते हैं। नए नियमों के तहत संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी प्रोत्साहन नीतियां ग्राहकों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं। हालांकि प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन पूरी तरह समाप्त नहीं किए गए हैं, लेकिन उनके संचालन पर अधिक निगरानी रखी जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फ्रेमवर्क के लागू होने से बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा और वित्तीय उत्पादों की बिक्री अधिक जिम्मेदार तरीके से की जा सकेगी। आने वाले समय में यह व्यवस्था उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और वित्तीय क्षेत्र में बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • शेयर बाजार की तेजी से निवेशकों की बल्ले-बल्ले, टॉप-10 कंपनियों की वैल्यू ₹1.90 लाख करोड़ बढ़ी, ICICI बैंक बना सबसे बड़ा लाभार्थी

    शेयर बाजार की तेजी से निवेशकों की बल्ले-बल्ले, टॉप-10 कंपनियों की वैल्यू ₹1.90 लाख करोड़ बढ़ी, ICICI बैंक बना सबसे बड़ा लाभार्थी

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह दर्ज की गई मजबूत तेजी का सीधा फायदा देश की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों को मिला। बाजार में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, वैश्विक माहौल में सुधार और वित्तीय क्षेत्र में मजबूत खरीदारी के चलते देश की शीर्ष 10 कंपनियों में से 8 के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों ने बाजार की तेजी का नेतृत्व किया, जबकि कुछ चुनिंदा कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट भी देखने को मिली।

    सप्ताह के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,284.61 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी मजबूती दिखाते हुए 256.2 अंक ऊपर चढ़ा। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि की और बड़ी कंपनियों के मूल्यांकन को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में मदद की।

    सबसे अधिक लाभ ICICI बैंक को हुआ, जिसका बाजार पूंजीकरण 56,223 करोड़ रुपये बढ़कर 9.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। बैंकिंग क्षेत्र में मजबूत निवेश और वित्तीय शेयरों में बढ़ती मांग के कारण कंपनी का मूल्यांकन तेजी से बढ़ा। इसके अलावा HDFC बैंक ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अपने मार्केट कैप में 38,571 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की। बैंक का कुल मूल्यांकन बढ़कर लगभग 11.89 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक SBI ने भी शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 36,137 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और इसका कुल मूल्यांकन 9.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास का लाभ इन प्रमुख बैंकिंग संस्थानों को सबसे अधिक मिला।

    वित्तीय सेवाओं की प्रमुख कंपनी बजाज फाइनेंस के बाजार पूंजीकरण में भी 18,366 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपने मूल्यांकन में 14,380 करोड़ रुपये का इजाफा किया। वहीं इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो तथा उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की अग्रणी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में भी वृद्धि हुई। हालांकि अन्य कंपनियों की तुलना में यह बढ़त सीमित रही, फिर भी कंपनी 17.49 लाख करोड़ रुपये से अधिक के मूल्यांकन के साथ देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी रही।

    दूसरी ओर, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को इस सप्ताह नुकसान का सामना करना पड़ा। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 13,296 करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इसी तरह भारतीय जीवन बीमा निगम के मूल्यांकन में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई। इन दोनों कंपनियों को छोड़कर बाकी सभी शीर्ष कंपनियों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक माहौल में सुधार, विदेशी निवेशकों की बढ़ती रुचि और वित्तीय स्थिरता से जुड़े कदमों ने भारतीय बाजारों को मजबूती प्रदान की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया है। यदि यह सकारात्मक माहौल आगे भी बना रहता है तो आने वाले सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार और प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में नई बढ़त देखने को मिल सकती है।

  • आरबीआई नियमों के तहत आज बैंक अवकाश, जून में अलग-अलग राज्यों में कई दिनों तक रहेगी छुट्टी

    आरबीआई नियमों के तहत आज बैंक अवकाश, जून में अलग-अलग राज्यों में कई दिनों तक रहेगी छुट्टी


    नई दिल्ली ।
    बैंकिंग सेवाओं से जुड़े कार्यों की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए 13 जून का दिन महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि महीने के दूसरे शनिवार के चलते देशभर के सरकारी और निजी बैंक बंद रहे। भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित नियमों के अनुसार प्रत्येक माह के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक शाखाओं में सार्वजनिक लेनदेन नहीं होता, जबकि पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को बैंक सामान्य रूप से कार्य करते हैं।

    डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के बावजूद आज भी अनेक ऐसे कार्य हैं, जिनके लिए ग्राहकों को बैंक शाखा में जाना आवश्यक होता है। नया खाता खोलना, पासबुक अपडेट कराना, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना, लॉकर संबंधी औपचारिकताएं पूरी करना या ऋण से जुड़े मामलों में बैंक अधिकारियों से मुलाकात करना जैसे कार्य शाखा स्तर पर ही संपन्न होते हैं। ऐसे में बैंक अवकाश की जानकारी पहले से होना ग्राहकों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

    13 जून को दूसरा शनिवार होने के कारण बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह बंद रहा। इसके बाद रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के कारण लगातार दो दिनों तक शाखा सेवाएं उपलब्ध नहीं रहीं। हालांकि एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और अन्य डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं, जिससे ग्राहकों को दैनिक लेनदेन में किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

    जून माह के दौरान विभिन्न राज्यों और शहरों में स्थानीय पर्व, धार्मिक अवसरों और क्षेत्रीय आयोजनों के कारण भी अलग-अलग दिनों में बैंक अवकाश घोषित किए गए हैं। कुछ राज्यों में विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक अवसरों के चलते बैंक शाखाएं बंद रहेंगी, जबकि अन्य क्षेत्रों में सामान्य कार्य दिवस रहेगा। इस वजह से बैंक ग्राहकों को अपने शहर और राज्य के अवकाश कैलेंडर की जानकारी रखना आवश्यक है।

    बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि अवकाश वाले दिनों में शाखा आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए महत्वपूर्ण वित्तीय कार्यों को पहले से पूरा कर लेना बेहतर होता है। विशेष रूप से व्यवसायियों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और बड़े वित्तीय लेनदेन करने वाले ग्राहकों को बैंक अवकाश की तिथियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    जून माह में निर्धारित शनिवार अवकाश के अलावा कुछ क्षेत्रीय और धार्मिक अवसरों पर भी बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे बैंक शाखा जाने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक अवकाश सूची की पुष्टि कर लें। इससे अनावश्यक यात्रा और समय की बर्बादी से बचा जा सकता है।

    डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं ने बैंक अवकाश के प्रभाव को काफी हद तक कम किया है, लेकिन शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता आज भी बनी हुई है। इसलिए बैंकिंग कार्यों की बेहतर योजना बनाने के लिए अवकाश कैलेंडर की जानकारी रखना ग्राहकों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।