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  • नियम तोड़े, नहीं बख्शेंगे! RBI ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

    नियम तोड़े, नहीं बख्शेंगे! RBI ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

    नई दिल्‍ली। वित्तीय अनुशासन को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। रेगुलेटरी नियमों का लगातार उल्लंघन करने पर आरबीआई ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि ये कंपनियां अब किसी भी तरह का एनबीएफसी से जुड़ा कारोबार नहीं कर सकेंगी। यह फैसला आम निवेशकों और कर्ज लेने वालों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।

    दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई आरबीआई एक्ट, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए की है। केंद्रीय बैंक के अनुसार ये कंपनियां लंबे समय से जरूरी शर्तों और नियामकीय मानकों का पालन नहीं कर रही थीं, जिसके चलते उन्हें एनबीएफसी के रूप में काम करने की अनुमति वापस ले ली गई।

    मामले में सामने आया है कि आरबीआई द्वारा सात जनवरी 2026 को जारी सर्कुलर में बताया गया है कि इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आदेश अलग-अलग तारीखों पर 9 दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच जारी किए गए थे। इसका सीधा मतलब है कि इन तारीखों के बाद ये कंपनियां कानूनी रूप से किसी भी तरह का एनबीएफसी कारोबार नहीं कर सकतीं।

    क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

    आरबीआई के मुताबिक, जिन 35 एनबीएफसी के खिलाफ यह कदम उठाया गया है, उन्होंने कई अहम नियमों का उल्लंघन किया। इनमें न्यूनतम नेट ओन्ड फंड (NOF) बनाए न रखना, पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) का पालन न करना, समय पर वित्तीय रिपोर्टिंग न करना और एसेट क्लासिफिकेशन से जुड़े मानकों की अनदेखी शामिल है। कई कंपनियां लंबे समय से निष्क्रिय (डोरमेंट) स्थिति में थीं, लेकिन इसके बावजूद उनका रजिस्ट्रेशन बरकरार था, जो वित्तीय प्रणाली के लिए जोखिम पैदा कर रहा था।

    आर्थ‍िक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई आरबीआई के ‘स्केल-बेस्ड रेगुलेशन’ और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की नीति का हिस्सा है। इससे पहले भी 2023 और 2024 में कई एनबीएफसी के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।

    ये है 35 NBFCs की पूरी सूची

    सत्य प्रकाश कैपिटल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड

    AG सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    ALB लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड

    ATM क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    कॉर्पोरेट कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

    डेसिसिव फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड

    डिवाइन इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    लिबर्टी प्राइवेट लिमिटेड सेल्स

    पर्ल्स हायर परचेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड

    क्वासर इंडिया फिनकैप प्राइवेट लिमिटेड

    सनलाइफ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    सनराइज मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड

    स्वितो फाइनेंस एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड

    त्रिवेणी विनिमय प्राइवेट लिमिटेड

    ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी मार्केटिंग लिमिटेड

    यूनिट्रॉन फिनलीज लिमिटेड

    वीरा सिक्योरिटीज एंड फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड

    विनी फाइनेंशियल एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    शिवोम इन्वेस्टमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड

    अधिनाथ इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    एग्रोहा सेविंग्स लिमिटेड

    अहुसंस फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    अल्टर इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड

    एसोसिएटेड लीजिंग लिमिटेड

    अटलांटिक लीजिंग लिमिटेड

    BHL फॉरेक्स एंड फिनलीज लिमिटेड

    भरतपुरिया फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड

    दादा देव फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड

    ईस्ट दिल्ली लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड

    इकोनॉमिक कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

    ESN फाइनेंस एंड कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड

    FMI इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    गणपति फिनकैप सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड

    गुडवर्थ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    गोपाल ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड

    बाजार और निवेशकों पर असर

    आरबीआई के इस कदम को वित्तीय बाजार में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। कमजोर और नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों के बाहर होने से एनबीएफसी सेक्टर की साख मजबूत होगी। दूसरी ओर इससे जुड़ा एक पक्ष ये भी है कि जिन निवेशकों या ग्राहकों का पैसा इन कंपनियों में फंसा है, उनके लिए यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है। ऐसे मामलों में निवेशकों को कानूनी रास्ता अपनाना पड़ सकता है, क्योंकि आरबीआई इन कंपनियों के लेन-देन की गारंटी नहीं देता।

    आम जनता के लिए आरबीआई की अहम सलाह

    आरबीआई ने इस मौके पर आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि किसी भी निवेश, लोन या वित्तीय लेन-देन से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित कंपनी आरबीआई में पंजीकृत है या नहीं। इसके लिए आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध एनबीएफसी की सूची देखी जा सकती है।

  • क्रिप्टोकरेंसी पर रोक जरूरी… आयकर विभाग ने किया RBI के रूख का समर्थन

    क्रिप्टोकरेंसी पर रोक जरूरी… आयकर विभाग ने किया RBI के रूख का समर्थन


    नई दिल्ली।
    आयकर विभाग (Income Tax Department) ने बुधवार को क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों (Virtual digital assets Cryptocurrencies) से जुड़े बड़े रिस्क की ओर ध्यान खींचा है। इसके साथ ही विभाग ने भारतीय रिजर्व बैंक के रुख का समर्थन करते हुए इन वित्तीय साधनों के प्रवेश का विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष एक प्रस्तुति में टैक्स अफसरों ने बताया कि कैसे गुमनाम, सीमा रहित और तत्काल धन हस्तांतरण की सुविधा से बिना किसी विनियमित वित्तीय मध्यस्थ के फंड्स को सिस्टम के जरिए भेजना संभव हो पाता है।

    इसके अलावा, विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज, निजी वॉलेट और विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म के कारण अधिकारियों के लिए टैक्सेबल इनकम का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इनमें संपत्ति का असली मालिक भी आसानी से पता नहीं चल पाता।


    अंतरराष्ट्रीय पहलू और चुनौतियां

    विदेशों में होने वाली वर्चुअल डिजिटल संपत्ति की गतिविधियों में अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को भी एक समस्या बताया गया। इसमें कई देशों के नियम शामिल हो सकते हैं, जिससे फंड फ्लो को जांचना, टैक्स लायबिलिटी की पुष्टि करना और वसूली करना लगभग असंभव हो जाता है। हाल के महीनों में सूचना साझा करने के प्रयास होने के बावजूद, यह प्रक्रिया अब भी कठिन बनी हुई है। इससे कर अधिकारियों को लेन-देन की श्रृंखला का सही आकलन और पुनर्निर्माण करने की क्षमता प्रभावित होती है।


    भारत की स्थिति और सुरक्षा उपाय

    भारत उन देशों में शामिल है जो जोरदार लॉबिंग और कुछ सरकारों के दबाव के बावजूद अब तक क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन को मंजूरी देने में हिचकिचा रहे हैं। इससे पहले, कई मौकों पर आरबीआई ने अपनी चिंताएं जताई हैं, जिनमें किसी भी अंतर्निहित परिसंपत्ति की कमी होना शामिल है, जो इसे निवेशकों के लिए जोखिम भरा बनाती है। यहां तक कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी खासतौर पर सावधान हैं क्योंकि वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है।

    आयकर विभाग ने कहा कि चूंकि क्रिप्टो प्लेटफॉर्म विदेशों में काम करते हैं, इसलिए समन जारी करना या टीडीएस वसूलना जैसी कानूनी कार्रवाई करना कठिन हो सकता है। कई एक्सचेंज फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ भी रजिस्टर्ड नहीं हैं और कर विभाग की पहुंच से बाहर हैं। भारतीय कर अधिकारियों ने लाभार्थियों को ट्रैक करने के लिए टीडीएस जैसे सुरक्षा उपाय बनाने की कोशिश की है और क्रिप्टो तथा अन्य वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों में कारोबार करने वाली इकाइयों के पंजीकरण को भी अनिवार्य किया है।

  • डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानिए गिरावट की बड़ी वजहें और बचाव के उपाय

    डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानिए गिरावट की बड़ी वजहें और बचाव के उपाय


    नई दिल्ली
    /भारतीय रुपया इन दिनों गंभीर दबाव में है और डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 91 के पार चला गया जिसने सरकार रिजर्व बैंक निवेशकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं बल्कि घरेलू और वैश्विक कारकों के संयुक्त असर से हुई है। सबसे बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली माना जा रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशक FII भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से तेजी से पैसा निकाल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब 18 अरब डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं। इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपये की मांग कमजोर पड़ी है जिसका सीधा असर मुद्रा विनिमय दर पर दिख रहा है।

    दूसरा अहम कारण डॉलर की वैश्विक मजबूती है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों और मजबूत आर्थिक संकेतों के चलते डॉलर दुनियाभर की मुद्राओं के मुकाबले मजबूत बना हुआ है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है तो वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिका की ओर रुख करते हैं। इसका असर भारत जैसे देशों की मुद्रा पर पड़ता है।भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर कुछ उत्पादों में ऊंची टैरिफ दरें लगाए जाने से भारतीय सामानों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा घटी है। इससे निर्यात से होने वाली डॉलर की आमद सीमित हुई है और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ी है।

    रुपये की गिरावट का असर आम आदमी की जिंदगी पर भी पड़ता है। कमजोर रुपये के कारण कच्चा तेल गैस इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने और महंगाई में दोबारा तेजी आने का खतरा रहता है जिसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ता है।तेल आयात भी रुपये की कमजोरी की एक बड़ी वजह है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इससे व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका है जो मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट को थामने में भारतीय रिजर्व बैंक RBIकी भूमिका बेहद अहम है। आरबीआई जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर बेचकर और तरलता का प्रबंधन कर रुपये की तेज गिरावट को रोक सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक आमतौर पर बहुत ज्यादा हस्तक्षेप से बचता है ताकि बाजार में अस्थिरता न बढ़े।लंबी अवधि में रुपये को स्थिर रखने के लिए सिर्फ मौद्रिक हस्तक्षेप काफी नहीं होगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश FDIऔर दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देना होगा। मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से डॉलर की स्थायी आमद होगी।

    निर्यात बढ़ाना भी रुपये को सहारा देने का एक अहम तरीका है। आईटी फार्मा इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्र के निर्यात में मजबूती आने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ संतुलित और स्पष्ट व्यापार समझौते विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ा सकते हैं।महंगाई पर नियंत्रण भी रुपये की स्थिरता के लिए जरूरी है। अगर महंगाई काबू में रहती है तो आरबीआई को नीतिगत समर्थन बनाए रखने में आसानी होती है और ब्याज दरों पर दबाव कम रहता है। मध्यम से लंबी अवधि में नीतिगत सुधार निवेश अनुकूल माहौल और निर्यात को बढ़ावा देने वाली रणनीतियां रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगा सकती हैं।

  • RBI New Rules: लोन लिमिट पर बैंक अब नहीं कर सकेंगे मनमानी, ग्राहकों की मंजूरी जरूरी

    RBI New Rules: लोन लिमिट पर बैंक अब नहीं कर सकेंगे मनमानी, ग्राहकों की मंजूरी जरूरी


    नई दिल्ली।
    बैंक और लोन ऐप (Banks and Loan apps) अब अपनी मर्जी से लोन की लिमिट को नहीं बढ़ा सकेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने स्पष्ट किया कि ग्राहक की लिखित मंजूरी के बाद ही लोन सीमा को बढ़ाया जा सकता है। बैंकों की लोन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आरबीआई ने नए दिशा-निर्देश (RBI New Rules) जारी किए हैं। रिजर्व बैंक ने डेटा संरक्षण को लेकर साफ किया है कि बिना ग्राहक की मंजूरी के उसका डाटा थर्ड पार्टी से साझा नहीं किया जा सकता।

    गौरतलब है कि बैंकों द्वारा अपनी मर्जी से लोन सीमा बढ़ाए जाने को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। छोटी धनराशि वाले कर्ज को लेकर शिकायतें सबसे अधिक थीं। उदाहरण के लिए अगर किसी ग्राहक ने 20 हजार का लोन मंजूर कराया और तय किस्तों पर ग्राहक द्वारा लोन चुकाया जा रहा है तो कुछ बैंक और लोन ऐप आखिरी किस्त आने से पहले बिना स्वीकृति ग्राहक के खाते में 10 हजार रुपये का लोन जारी कर देते हैं। बैंक इसके पीछे अच्छी साख का तर्क देते हैं। ग्राहक इसे लौटाना चाहे तो बैंक आनाकानी करते हैं और ग्राहक पर जुर्माना लगाया जाता है।

    कर्ज लेने वाले ग्राहकों की एफडी या बचत ब्लॉक न करें
    आरबीआई के नए नियमों के तहत बैंक कर्ज को किसी सावधि जमा यानी एफडी, बचत खाते या सुरक्षा योजना से लिंक नहीं कर सकते। बैंकों को लेकर शिकायत थी कि छोटे ऋण जारी करते वक्त गारंटी के तौर पर ग्राहक की एफडी, खाते या अन्य सुरक्षा योजना को लिंक किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में जब तक ऋण पूरा अदा नहीं होता है या कोई किस्त जमा नहीं जाती है तो बैंक ग्राहक को एफडी तोड़ने की इजाजत नहीं देते।

    आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि घर के खर्च और आय का आकलन बैंकों के लिए करना जरूरी है, लेकिन ऋण के बदले एफडी, खाते या किसी अन्य सुरक्षा को लिंक नहीं किया जा सकता। जरूरत का डेटा ही ले सकेंगे बैंक : कर्ज सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए नए सख्त नियम जारी किए गए हैं। नियमों में डेटा कलेक्शन से लेकर उसकी स्टोरेज, थर्ड-पार्टी शेयरिंग और सभी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की रिपोर्टिंग तक के प्रावधान शामिल हैं। मोबाइल की फाइल, फोटो, कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग आदि किसी भी संवेदनशील डेटा तक पहुंच नहीं होगी। कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन जैसी सुविधाओं का केवल एक बार उपयोग केवाईसी के लिए ही किया जा सकेगा।

    ग्राहकों के हित में अनिवार्य नियम
    – बैंकों को दस्तावेज सत्यापित ई-मेल व एसएमएस पर देने होंगे।
    – धनराशि ऐप या एजेंट नहीं सीधे ग्राहक के खाते में जाएगी।
    – समय से पहले बिना जुर्माने कर्ज चुकाने का अवसर देना होगा।
    – रिकवरी एजेंट की जानकारी ग्राहक को पहले से भेजनी होगी।
    – कोई तीसरी पार्टी पैसे के लेनदेन को नियंत्रित नहीं कर सकती।

  • RBI का बड़ा बयान: 50 पैसे समेत सभी सिक्के हैं वैध, अफवाहों पर न दें ध्यान..

    RBI का बड़ा बयान: 50 पैसे समेत सभी सिक्के हैं वैध, अफवाहों पर न दें ध्यान..

    नई दिल्ली। देश में नकली और असली नोटों के बारे में लोगों को जागरूक करने के बाद अब रिजर्व बैंक ऑफ RBI ने सिक्कों को लेकर भी अहम संदेश जारी किया है। आरबीआई ने लोगों से कहा है कि 50 पैसे और अन्य सभी सिक्कों के बारे में फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और इन्हें बिना झिझक स्वीकार करें।

    आरबीआई के व्हाट्सऐप नंबर पर भेजे गए संदेश में बैंक ने बताया कि एक ही मूल्यवर्ग के सिक्कों के अलग-अलग डिजाइन हो सकते हैं और यह पूरी तरह से वैध हैं। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया कि 50 पैसे 1 रुपये 2 रुपये 5 रुपये 10 रुपये और 20 रुपये के सभी सिक्के वैध मुद्रा हैं और लंबे समय तक चलन में रहते हैं।

    सिक्कों के बारे में भ्रमित होने वाले लोगों के लिए RBI ने अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। बैंक ने कहा “जानकार बनिए सतर्क रहिए।”

    इस संदेश के माध्यम से आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि सिक्कों को अस्वीकार करना अनुचित है और सभी व्यापारियों दुकानदारों और आम लोगों को इन्हें स्वीकार करना चाहिए। इससे देश में मुद्रा का निर्बाध और सुरक्षित लेनदेन सुनिश्चित होगा।

    RBI की यह चेतावनी और मार्गदर्शन समय पर जारी की गई है ताकि लोगों में असली और नकली मुद्रा को पहचानने की जानकारी बनी रहे और किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति न बने।

  • आरबीआई आज करेगा Monetary Policy का ऐलान, जानिए EMI कम होगी या नहीं!

    आरबीआई आज करेगा Monetary Policy का ऐलान, जानिए EMI कम होगी या नहीं!


    मुम्बई।
    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India -RBI) शुक्रवार को द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा (Bi-Monthly Monetary Policy Review) में लिए गए निर्णयों की घोषणा करेगा। विशेषज्ञों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत कटौती किए जाने की उम्मीद जताई है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि तीसरी बार रेपो रेट को स्थिर रखा जा सकता है।

    गवर्नर संजय मल्होत्रा (Governor Sanjay Malhotra)​शुक्रवार सुबह मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे। अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति पर एमपीसी की बैठक बुधवार को शुरू हुई थी। यह बैठक घटती मुद्रास्फीति, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तेज वृद्धि, डॉलर के मुकाबले रुपये के 90 के पार जाने और मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों की पृष्ठभूमि में हो रही है।

    खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट के बीच आरबीआई ने फरवरी से रेपो रेट में तीन किस्तों में कुल एक प्रतिशत की कटौती की है। हालांकि, पिछली दो बार से रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन खुदरा मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट ने प्रमुख अल्पकालिक ऋण दर में कटौती की अतिरिक्त गुंजाइश पैदा कर दी है। आरबीआई गवर्नर ने भी पिछले महीने कहा था कि नीतिगत ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश है।


    कोई बदलाव नहीं होने की संभावना

    हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आरबीआई ब्याज दर में यथास्थिति कायम रख सकता है क्योंकि आर्थिक वृद्धि में तेजी आई है जो राजकोषीय समेकन, लक्षित सार्वजनिक निवेश और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर में कटौती जैसे विभिन्न सुधारों से बनी हुई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुख्य मुद्रास्फीति सरकार द्वारा निर्धारित दो प्रतिशत के निचले स्तर से नीचे बनी हुई है। इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था ने दूसरी तिमाही में अपेक्षा से बेहतर 8.2 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर्ज की है।


    आरबीआई पर जिम्मेदारी

    सरकार ने आरबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनी रहे। आरबीआई के पहली छमाही के अपेक्षा से बेहतर आंकड़ों को देखते हुए अपने जीडीपी वृद्धि अनुमान को संशोधित करके बढ़ाने की भी उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी अनुमान को अक्टूबर में 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया था।