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  • वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से भारत में महंगाई का खतरा, दूसरे दौर के प्रभावों पर गहरी नजर

    वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से भारत में महंगाई का खतरा, दूसरे दौर के प्रभावों पर गहरी नजर


    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक अनिश्चितताओं और भू राजनीतिक तनावों के बीच देश की मौद्रिक नीति को लेकर बेहद सतर्क और संतुलित रुख अपनाने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक किसी भी प्रकार के जल्दबाजी वाले निर्णय से बच रहा है और आगे की दिशा आर्थिक आंकड़ों और जोखिमों के विस्तृत आकलन के आधार पर तय की जाएगी। उन्होंने इसे वेट एंड वॉच की स्थिति बताया और कहा कि मौजूदा समय में स्थिरता बनाए रखना प्राथमिकता है।

    अपने एक अंतरराष्ट्रीय संबोधन में उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था पर बाहरी दबावों और वैश्विक घटनाक्रमों के संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा और अप्रत्यक्ष प्रभाव भारत की आर्थिक संरचना पर भी पड़ सकता है क्योंकि इस क्षेत्र की भूमिका भारत के व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और विदेशी आय के प्रवाह में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि पश्चिम एशिया भारत के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार क्षेत्र है, जो देश के निर्यात का बड़ा हिस्सा, आयात का महत्वपूर्ण भाग और कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग आधा हिस्सा उपलब्ध कराता है। इसके साथ ही उर्वरक आयात और विदेशी रेमिटेंस में भी इस क्षेत्र का योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह की गहरी आर्थिक निर्भरता के कारण किसी भी प्रकार की आपूर्ति बाधा का प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है।

    आरबीआई गवर्नर ने विशेष रूप से दूसरे दौर के प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक आपूर्ति व्यवधान यदि लंबे समय तक बने रहते हैं तो उनका असर धीरे धीरे कीमतों और उत्पादन लागत पर फैल सकता है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है। इस प्रकार की स्थिति केवल अस्थायी नहीं होती बल्कि आर्थिक संतुलन को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है।

    मौद्रिक नीति को लेकर उन्होंने दोहराया कि केंद्रीय बैंक वर्तमान में तटस्थ रुख बनाए हुए है और हाल के महीनों में की गई ब्याज दरों में कटौती के बाद अब स्थिति का गहन मूल्यांकन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति पूरी तरह डेटा आधारित दृष्टिकोण अपनाती है और बदलते आर्थिक संकेतकों के अनुसार लगातार जोखिमों का पुनर्मूल्यांकन करती रहती है ताकि नीति निर्णय संतुलित और प्रभावी बने रहें।

    डिजिटल अर्थव्यवस्था के संदर्भ में उन्होंने देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन की सराहना की और बताया कि यूनिफाइड पेमेंट सिस्टम के माध्यम से लेनदेन में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारत की डिजिटल प्रगति को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि एक नए डिजिटल लोन सिस्टम पर काम चल रहा है जिसका उद्देश्य छोटे किसानों और छोटे व्यवसायों को त्वरित और आसान ऋण उपलब्ध कराना है।

    वित्तीय अनुशासन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि देश का राजकोषीय घाटा पिछले वर्षों की तुलना में लगातार कम हुआ है, जो आर्थिक प्रबंधन में सुधार का संकेत है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सरकारी ऋण अनुपात में भी धीरे धीरे सुधार देखा जा रहा है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिलती है।

  • आरबीआई की सख्ती से बैंक शेयरों पर दबाव, 95 अरब डॉलर घटा मार्केट कैप; आगे और गिरावट की आशंका

    आरबीआई की सख्ती से बैंक शेयरों पर दबाव, 95 अरब डॉलर घटा मार्केट कैप; आगे और गिरावट की आशंका


    मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया सख्त नीति और रुपये को संभालने के प्रयासों का असर बैंकिंग शेयरों पर दिखने लगा है। पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय बैंकों की मार्केट वैल्यू करीब 95 अरब डॉलर घट गई है, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह दबाव और बढ़ सकता है।

    रुपये को संभालने की कोशिश, बैंकों पर असर

    रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया।

    इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विदेशी निवेशकों की निकासी

    आंकड़ों के मुताबिक मार्च के पहले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों ने वित्तीय कंपनियों के शेयरों से लगभग 327 अरब रुपये (करीब 3.5 अरब डॉलर) निकाल लिए। इसी दौरान बैंकिंग इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह बियर मार्केट की सीमा (20% गिरावट) के करीब पहुंच गया।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    क्रांति बथिनी का कहना है कि मौद्रिक नीति के सख्त बने रहने से बैंक स्टॉक्स पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि गिरावट के बाद इन शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक होने की बात भी उन्होंने कही।

    पूरे बाजार पर असर का खतरा

    रिपोर्ट्स के अनुसार बैंकिंग शेयर लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर के भारतीय शेयर बाजार का करीब एक-तिहाई हिस्सा हैं। ऐसे में बैंक शेयरों में कमजोरी बनी रहती है तो इसका असर व्यापक बाजार पर पड़ सकता है।

    उम्मीद की किरण भी
    कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत रहने से बैंकिंग सेक्टर संभल सकता है। फिलहाल बैंकिंग इंडेक्स करीब 1.5 गुना वन-ईयर फॉरवर्ड प्राइस-टू-बुक पर ट्रेड कर रहा है, जो 2020 के बाद निचले स्तरों में है। Citibank ने भी सरकारी बैंकों की तुलना में निजी बैंकों को प्राथमिकता देना शुरू किया है।

    आगे का खतरा

    रिपोर्ट्स के मुताबिक Jefferies का अनुमान है कि करेंसी ट्रेड्स पर बैंकों को करीब 50 अरब रुपये तक का नुकसान हो सकता है। वहीं Fitch Ratings के अनुसार सख्त वित्तीय हालात से बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 20-30 बेसिस प्वाइंट तक घट सकता है।
    रजत अग्रवाल ने कहा कि हाल की तेज क्रेडिट ग्रोथ पर वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे कारकों का असर देखने लायक होगा।
    कुल मिलाकर, आरबीआई की सख्ती, विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते बैंकिंग सेक्टर पर निकट भविष्य में दबाव बना रह सकता है, हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है।

  • RBI का 3 सरकारी बैंकों पर बड़ा एक्शन… लगाया 2.17 करोड़ से अधिक का जुर्माना

    RBI का 3 सरकारी बैंकों पर बड़ा एक्शन… लगाया 2.17 करोड़ से अधिक का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) ने अलग-अलग नियमों और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के कारण तीन सार्वजनिक बैंकों (Three Public Sector Banks) पर कुल दो करोड़ 17 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। रिजर्व बैंक ने एक बयान में बताया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर 95.40 लाख रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर 63.60 लाख रुपये, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स पर भी तीन लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।


    यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

    आरबीआई के मुताबिक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग की समुचित व्यवस्था न करने और परिसंपत्ति वर्गीकरण तंत्र में मानवीय हस्तक्षेप करने के लिए 95.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आरबीआई ने पाया कि बैंक ने धोखाधड़ी वाले लेनदेन की रिपोर्टिंग के लिए ग्राहकों को अलग-अलग चैनलों पर 24 घंटे रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई।


    बैंक ऑफ इंडिया

    इसके अलावा, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बैंक पर प्राथमिक सेक्टर को लोन देने और जमा पर ब्याज संबंधी नियमों के उल्लंघन का आरोप है। बैंक ने प्राथमिक क्षेत्रों के 25 हजार रुपये तक के लोन देने पर भी सर्विस चार्ज, निरीक्षण शुल्क और प्रोसेसिंग चार्ज वसूले थे। इसके अलावा बैंक ने सावधि जमा खातों पर मैच्योरिटी की तारीख से पैसे ग्राहकों को देने की तारीख तक के लिए ब्याज भुगतान नहीं किया।


    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर केवाईसी और बुनियादी बचत बैंक जमा खाता संबंधी नियमों के उल्लंघन के कारण 63.60 लाख का जुर्माना लगा है। वह तय समय सीमा के भीतर केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री में कुछ ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड अपडेट करने में विफल रहा था। इसके अलावा बैंक को कुछ ग्राहकों के एक से अधिक बुनियादी बचत बैंक जमा खाता खोलने का भी दोषी पाया गया।


    पाइन लैब्स पर भी एक्शन

    केंद्रीय बैंक ने पाइन लैब्स को प्रीपेड भुगतान तंत्र संबंधी नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया और उस पर तीन लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आरबीआई ने बताया कि तीन सार्वजनिक बैंकों और पाइन लैब्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। लिखित जवाब और मौखिक सुनवाई में दिये गये जवाब असंतोषजनक पाए जाने के बाद जुर्माने की कार्रवाई की गई है।


    एचएसबीसी पर भी लगा था जुर्माना

    हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉरपोरेशन (एचएसबीसी) पर 31.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। बैंक पर निष्क्रिय खातों और बिना दावे वाली जमा राशि से जुड़े कुछ निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप है। बैंक की निगरानी संबंधी जांच उसके 31 मार्च, 2025 तक के वित्तीय हालात के आधार पर की गई थी। जांच में आरबीआई के निर्देशों के पालन में कमी मिलने के आधार पर बैंक को नोटिस जारी किया गया। आरबीआई ने कहा कि नोटिस पर बैंक के जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियां और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद यह पाया गया कि बैंक पर लगे आरोप सही हैं। इसी कारण उस पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया।

  • 7 मार्च 2026 बैंक अपडेट: शनिवार को बैंक खुलेंगे या बंद, राज्यवार जानकारी

    7 मार्च 2026 बैंक अपडेट: शनिवार को बैंक खुलेंगे या बंद, राज्यवार जानकारी


    नई दिल्ली।सोमवार से शुक्रवार तक भागदौड़ भरी जिंदगी के बाद कई लोग शनिवार को अपने बैंक से जुड़े काम निपटाना पसंद करते हैं। लेकिन अक्सर यही सवाल उठता है कि बैंक शनिवार को खुले हैं या बंद। इस कन्फ्यूजन का कारण यह है कि कुछ शनिवार बैंक खुले रहते हैं, जबकि कुछ पर वे बंद होते हैं। हालांकि डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग की सुविधाओं ने कैश निकालना, पैसे भेजना और RTGS, NEFT या IMPS जैसी ट्रांजैक्शन को कहीं से भी करना आसान कर दिया है, फिर भी कई कार्य ऐसे हैं जिनके लिए बैंक जाकर अधिकारी से मिलना जरूरी होता है।

    आज 7 मार्च 2026 को कई लोगों के मन में यही सवाल होगा कि बैंक खुले हैं या बंद। RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार बैंक हर शनिवार नहीं खुलते। दूसरे और चौथे शनिवार को सभी शेड्यूल्ड और नॉन-शेड्यूल्ड बैंक बंद रहते हैं। महीने के पहले, तीसरे और पांचवे शनिवार आमतौर पर बैंक खुले रहते हैं, जब तक कि किसी विशेष पर्व या छुट्टी के कारण बंद न हों। 7 मार्च 2026 महीने का पहला शनिवार है और RBI की छुट्टियों की लिस्ट में कोई त्योहार या अवकाश दर्ज नहीं है, इसलिए पूरे भारत में बैंक खुलेंगे।

    मार्च 2026 में बैंक कई दिन बंद रहेंगे। पहले 2, 3 और 4 मार्च को होली और होलिका दहन के अवसर पर अलग-अलग राज्यों में बैंक बंद रहे। आने वाले हफ्तों में भी कई बैंक अवकाश पर रहेंगे।

    मुख्य बंद रहने वाले दिन और राज्य:

    13 मार्च 2026: मिजोरम में चपचार कुट त्योहार

    17 मार्च 2026: जम्मू-कश्मीर में शब-ए-कद्र

    19 मार्च 2026: महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, मणिपुर, जम्मू-कश्मीर, गोवा, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और श्रीनगर में गुड़ी पड़वा, उगादी, तेलुगु न्यू ईयर, सजिबू नोंगमापनबा और प्रथम नवरात्र

    20 मार्च 2026: जम्मू-कश्मीर, केरल, श्रीनगर और आंध्र प्रदेश में ईद-उल-फितर और जुमात-उल-विदा

    21 मार्च 2026: असम, गुजरात, मिजोरम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, चंडीगढ़, तमिलनाडु, उत्तराखंड, सिक्किम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, गोवा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मेघालय और श्रीनगर में रमजान-ईद, खुतुब-ए-रमजान और सरहुल

    26 मार्च 2026: मिजोरम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तराखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, मुंबई, नागपुर, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में राम नवमी

    इसलिए आज 7 मार्च को घर से निकलने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके राज्य या शहर में बैंक खुले हैं। अगर आपके काम के लिए बैंक जाना आवश्यक है तो यह जानकारी आपके लिए मददगार साबित होगी। यह है कि इस महीने बैंक की खुलने और बंद रहने की तिथियां जानना जरूरी है ताकि आप अपने बैंकिंग कार्य बिना परेशानी के निपटा सकें।
  • डिजिटल फ्रॉड के शिकार हुए तो मिलेगी राहत, RBI देगा 25 हजार रुपये तक का मुआवजा

    डिजिटल फ्रॉड के शिकार हुए तो मिलेगी राहत, RBI देगा 25 हजार रुपये तक का मुआवजा

    नई दिल्ली। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के मामलों के बीच आम बैंक ग्राहकों को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। अब यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है।

    दरअसल, इसी साल फरवरी में RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए ग्राहकों को सुरक्षा देने के लिए इस योजना की घोषणा की थी। इसके तहत धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन की स्थिति में पीड़ित ग्राहक को शर्तों के साथ मुआवजा दिया जाएगा।

    एक बार ही मिलेगा मुआवजा

    RBI के प्रस्ताव के मुताबिक किसी ग्राहक को जीवन में केवल एक बार ही यह क्षतिपूर्ति दी जाएगी। यह भी तभी संभव होगा जब जांच में यह पाया जाए कि धोखाधड़ी जानबूझकर नहीं हुई और ग्राहक ने अनजाने में अपना पैसा गंवाया है।

    गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि अगर किसी ग्राहक के साथ धोखाधड़ी हो जाती है, चाहे उसमें उसकी गलती हो या किसी और की, तब भी बिना ज्यादा सवाल पूछे 25,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है, बशर्ते ट्रांजैक्शन अनजाने में हुआ हो।

    ग्राहक को भी उठाना होगा कुछ नुकसान

    प्रस्ताव के अनुसार धोखाधड़ी की कुल राशि का 15 प्रतिशत हिस्सा खाताधारक को खुद वहन करना होगा। वहीं, अगर ठगी की रकम इससे ज्यादा है, तब भी मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये ही रहेगी।

    कब से लागू होगा नियम

    यह प्रस्तावित नियम 1 जुलाई 2026 या उसके बाद किए गए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर लागू होंगे। केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे पर 6 अप्रैल 2026 तक सभी हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।

    मुआवजा पाने के लिए जरूरी शर्त

    इस योजना का लाभ लेने के लिए पीड़ित ग्राहक को

    धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन की जानकारी अपने बैंक को देनी होगी

    साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करनी होगी

    यह शिकायत 5 कैलेंडर दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा

    ग्राहक सुरक्षा नियमों में भी बदलाव

    RBI ने डिजिटल बैंकिंग में ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नियमों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव भी दिया है। ड्राफ्ट के अनुसार OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या अन्य इलेक्ट्रॉनिक ऑथेंटिकेशन के जरिए मंजूर किए गए ट्रांजैक्शन को अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन माना जाएगा।

    इसमें ऐसे मामलों को भी शामिल किया जाएगा, जहां ठग खुद को वैध प्राप्तकर्ता बताकर या दबाव बनाकर ग्राहकों से पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।
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  • RBI का बड़ा ऐलान… साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को मिलेगा 25000 रुपये तक मुआवजा

    RBI का बड़ा ऐलान… साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को मिलेगा 25000 रुपये तक मुआवजा


    नई दिल्ली।
    साइबर फ्रॉड (Cyber ​​fraud) के शिकार लोगों को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की ओर से थोड़ी राहत मिलने वाली है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने डिजिटल फ्रॉड में हो रही बढ़ोतरी के बीच ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के लिए 25,000 रुपये तक की मुआवजा देने की घोषणा की। आइए जानते हैं कि ये मुआवजा किसे और कैसे मिलेगा।


    किस तरह के पीड़ित को मिलेगा मुआवजा?

    साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को 25,000 रुपये का मुआवजा उन मामलों में भी दिया जाएगा जहां ग्राहक गलती से अपना वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) धोखेबाजों के साथ साझा कर देते हैं। मतलब ये कि अगर आपने गलती से स्कैमर को ओटीपी शेयर कर दिया है और आपके बैंक से पैसे कट गए हैं तो आप इस स्कीम का लाभ लेने के लिए योग्य हैं।

    सिर्फ एक बार ही लाभ
    रिजर्व बैंक के गवर्नर ने स्पष्ट किया था कि पीड़ित को जीवन में केवल एक बार ही मुआवजा मिलेगा। कहने का मतलब है कि अगर आपके साथ बार-बार साइबर फ्रॉड होता है तो इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा। आरबीआई अधिकारियों के मुताबिक डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में दो-तिहाई मामले 50,000 रुपये से कम के हैं। धोखाधड़ी से प्रभावित लोगों में से ज्यादातर को इस सुविधा से लाभ होगा। कैल्कुलेशन पर गौर करें तो धोखाधड़ी की राशि में से 15 प्रतिशत का नुकसान ग्राहक को उठाना होगा और 15 प्रतिशत का नुकसान संबंधित बैंक उठाएगा। शेष 70 प्रतिशत राशि केंद्रीय रिजर्व बैंक देगा। हालांकि किसी भी स्थिति में ग्राहक को 25,000 रुपये से अधिक का हर्जाना नहीं मिलेगा। आरबीआई 70 प्रतिशत नुकसान की भरपाई के लिए अपनी सरप्लस आय का इस्तेमाल करेगा। गर्वनर के मुताबिक इसके लिए केंद्रीय बैंक के पास पर्याप्त पैसा है। हालांकि, इस योजना का फ्रेमवर्क अभी तैयार नहीं है।


    साइबर फ्रॉड से कैचे बचे

    साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए जरूरी है कि OTP, पासवर्ड, PIN, CVV कभी किसी को न बताएं। अनजान लिंक / QR कोड पर क्लिक / स्कैन न करें । मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखें और 2FA (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) जरूर चालू करें। UPI और बैंकिंग में सावधानी पेमेंट से पहले हमेशा रिसीवर का नाम चेक करें। बैंक ऐप से ही ट्रांजेक्शन करें। अनजान नंबर से बैंक कॉल आए तो काट दें और खुद बैंक के ऑफिशियल नंबर पर कॉल करें। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें। इसके अलावा, cybercrime.gov.in पर कंप्लेंट दर्ज करें। वहीं, बैंक को तुरंत बताएं और अकाउंट फ्रीज/ब्लॉक करवाएं। साइबर फ्रॉड के मामले में अपने नजदीकी साइबर थाना जाकर भी आपको शिकायत दर्ज करानी होती है।

  • KYC-सुरक्षित बैंकिंग की ओर पहला कदम… RBI कर रहा लोगों को जागरूक

    KYC-सुरक्षित बैंकिंग की ओर पहला कदम… RBI कर रहा लोगों को जागरूक


    नई दिल्ली।
    भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) मंगलवार को बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स (Business Correspondents) और स्वयं सहायता समूहों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। केवाईसी- सुरक्षित बैंकिंग (KYC- Secure Banking) की ओर पहला कदम विषय पर आयोजित कार्यशाला में लोगों को जागरुक किया गया। लोगों को समझाया गया कि सुरक्षित बैंकिंग के लिए केवाईसी कितना जरूरी है।


    13 फरवरी तक आयोजन

    आरबीआई द्वारा हर वर्ष जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इस बार वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 का आयोजन 13 फरवरी तक किया जा रहा है, जिसमें केवाईसी को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोगों को केवाईसी से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां दी जाएंगी। इसमें बताया जाएगा कि केवाईसी एक जरूरी नियम है, लेकिन इसे पूरा करना आसान है। इसके लिए सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, लोगों को सेंट्रल केवाईसी (सीकेवाईसी) की सुविधा के बारे में भी जानकारी दी जाएगी, जिससे केवाईसी प्रक्रिया और आसान हो जाती है।


    बैंक खाते का गलत इस्तेमाल न करें

    अभियान के दौरान लोगों को फर्जी कॉल, मैसेज और लिंक से सावधान रहने के लिए भी जागरूक किया जाएगा, क्योंकि इन्हीं के चलते कई बार साइबर ठगी होती है और लोगों को आर्थिक नुकसान भी होता है। कई बार लालच में आकर लोग अपने बैंक खाते का गलत इस्तेमाल करने देते हैं, जिससे उन्हें गंभीर कानूनी और आर्थिक परेशानी हो सकती है। सप्ताह के दौरान आरबीआई, बैंकों और अन्य संस्थाओं के सहयोग से देशभर में जागरूकता कार्यक्रम और संपर्क अभियान चलाए जाएंगे। इन गतिविधियों को पूरे साल जारी रखने की योजना है, जिससे कि लोगों पर इसका स्थायी असर पड़े।


    भरोसेमंद बैंकिंग व्यवस्था की नींव है KYC

    आरबीआई की तरफ से कहा गया है कि केवाईसी केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सुरक्षित और भरोसेमंद बैंकिंग व्यवस्था की नींव है। सभी संबंधित संस्थाओं से अपील की गई है कि वह इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। मंगलवार को कार्यशाला का उद्घाटन आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक रोहित पी दास, आरबीआई के मुख्य महाप्रबंधक चंदन कुमार ने किया। इस मौके पर नाबार्ड और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

  • भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक उछाल..

    भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक उछाल..


    नई दिल्ली।भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर जबरदस्त मजबूती देखने को मिली है। 16 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 14.167 बिलियन डॉलर की तेज बढ़त के साथ 701.360 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। यह उछाल न केवल हाल के महीनों में सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि में से एक माना जा रहा है, बल्कि यह भारत की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक भरोसे को भी दर्शाता है।इससे पहले 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में केवल 392 मिलियन डॉलर की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। ऐसे में एक ही सप्ताह में 14 अरब डॉलर से अधिक की छलांग को अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ बेहद सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

    भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स यानी एफसीए इस वृद्धि में प्रमुख कारण रहा। 16 जनवरी को समाप्त सप्ताह में एफसीए में 9.652 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ, जिससे इसकी कुल वैल्यू बढ़कर 560.518 बिलियन डॉलर हो गई। एफसीए में अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनका मूल्यांकन डॉलर के संदर्भ में किया जाता है।सोने के भंडार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 4.623 बिलियन डॉलर बढ़कर 117.454 बिलियन डॉलर हो गई। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है और इसमें बढ़ोतरी भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को मजबूत बनाती है।

    हालांकि, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी एसडीआर और आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजिशन में हल्की गिरावट दर्ज की गई। एसडीआर की वैल्यू 35 मिलियन डॉलर घटकर 18.704 बिलियन डॉलर रह गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में रिजर्व पोजिशन 73 मिलियन डॉलर घटकर 4.684 बिलियन डॉलर पर आ गई।आंकड़ों पर नजर डालें तो इससे पहले 17 अक्टूबर 2025 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 702.25 बिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंचा था। वहीं, देश का अब तक का ऑल-टाइम हाई विदेशी मुद्रा भंडार 704.89 बिलियन डॉलर रहा है, जो सितंबर 2024 में दर्ज किया गया था। मौजूदा आंकड़े उस रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी देश के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक सेहत का अहम संकेतक होता है। यह न केवल आयात भुगतान और बाहरी झटकों से निपटने में मदद करता है, बल्कि मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। जब डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है, तब केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपये को सहारा देता है।

    बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार इस बात का संकेत भी है कि देश में विदेशी निवेश और डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे भारत की वैश्विक व्यापार क्षमता बढ़ती है और अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलती है। कुल मिलाकर, विदेशी मुद्रा भंडार में यह उछाल भारत की आर्थिक स्थिति के लिए बेहद सकारात्मक और भरोसेमंद संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

  • कृषि व ग्रामीण श्रमिकों के लिए राहत: दिसंबर में खाद्य महंगाई दर नकारात्मक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट

    कृषि व ग्रामीण श्रमिकों के लिए राहत: दिसंबर में खाद्य महंगाई दर नकारात्मक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट


    नई दिल्ली। दिसंबर 2025 में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई दर नकारात्मक रही जिससे इन वर्गों के लिए महंगाई के बोझ में राहत मिली है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार कृषि श्रमिकों के लिए अखिल भारत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सीपीआई-एल 0.04 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए (सीपीआई-आरएल) 0.11 प्रतिशत सालाना आधार पर दर्ज किया गया।

    मंत्रालय ने बताया कि खाद्य महंगाई इस दौरान कृषि श्रमिकों के लिए -1.8 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए -1.73 प्रतिशत रही। इस नकारात्मक महंगाई का मुख्य कारण खाद्य उत्पादन में वृद्धि के साथ कीमतों में गिरावट है। हाल के महीनों में उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में आई यह कमी विशेष रूप से कमजोर वर्गों के लिए राहत का संदेश लेकर आई है। इससे उनके पास खर्च करने के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है और जीवन स्तर में सुधार की संभावना बढ़ती है।

    श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन श्रम ब्यूरो ने जून 2025 से कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष 2019=100 निर्धारित किया है। इस नए आधार वर्ष में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 787 गांवों से आंकड़े एकत्रित किए गए। पुराने 1986-87=100 सीरीज को बदलकर सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल की नई सीरीज लाई गई है। नई सीरीज में सूचकांक की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए दायरा और कवरेज काफी हद तक बढ़ाया गया और इसमें कार्यप्रणालीगत सुधार भी किए गए।

    इस बीच सामान्य खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2025 में 1.33 प्रतिशत रही जो नवंबर में 0.71 प्रतिशत थी। वहीं थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर दिसंबर में 0.83 प्रतिशत दर्ज की गई जबकि नवंबर में यह -0.32 प्रतिशत थी। थोक महंगाई में वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्मित वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है।

    आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में खुदरा महंगाई दर करीब 2 प्रतिशत रह सकती है। इसकी वजह जीएसटी में कटौती और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट को बताया गया है।
    विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई में आई यह कमी आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे उनकी खरीद क्षमता बढ़ती है और जीवन यापन में आसानी होती है। सरकार की नीतियों और उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रहने की उम्मीद है।