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  • पुलित्जर पुरस्कार नहीं मिलने पर ट्रंप ने जताई नाराजगी, रूस जांच की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर साधा निशाना

    पुलित्जर पुरस्कार नहीं मिलने पर ट्रंप ने जताई नाराजगी, रूस जांच की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल पुरस्कार के बाद अब पुलित्जर पुरस्कार नहीं मिलने पर भी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने दावा किया कि लेखन के क्षेत्र में उनके काम के लिए उन्हें पुलित्जर सम्मान मिलना चाहिए था। बुधवार को दक्षिण कैरोलिना में आयोजित एक रैली के दौरान उन्होंने यह बात कही। इस मौके पर ट्रंप ने रूस से जुड़े मामलों की जांच पर रिपोर्टिंग करने वाले उन पत्रकारों की भी आलोचना की, जिन्हें पुलित्जर पुरस्कार दिया गया था। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर चर्चा शुरू हो गई और कई यूजर्स ने उनकी लेखन क्षमता पर सवाल उठाए।

    ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके साथ ही उन्होंने लेखन के लिए पुलित्जर पुरस्कार पर भी अपना दावा जताया। उनका आरोप था कि रूस से जुड़े मामलों पर रिपोर्टिंग करने वाले जिन पत्रकारों को यह सम्मान दिया गया, उनकी रिपोर्टिंग गलत थी। ट्रंप के मुताबिक, ऐसे पत्रकारों को पुरस्कार नहीं मिलना चाहिए था।

    रूस से संबंधित जांच और उसकी मीडिया रिपोर्टिंग पहले भी अमेरिकी राजनीति में विवाद का विषय रही है। इस बार ट्रंप ने पुरस्कार विजेता पत्रकारों की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए सम्मान के फैसले की आलोचना की। हालांकि, उनके बयान में रिपोर्टिंग की किन विशिष्ट खबरों या तथ्यों को गलत बताया गया, इसका विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।

    ट्रंप अब तक 19 किताबें लिख चुके हैं। उनकी चर्चित पुस्तकों में ‘द आर्ट ऑफ द डील’ शामिल है। इस पुस्तक के जरिए वह कारोबारी दुनिया में अपनी पहचान और व्यावसायिक अनुभवों को सामने रख चुके हैं। पुलित्जर पुरस्कार के लिए अपना दावा पेश करते समय उन्होंने अपने लेखन का उल्लेख किया, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस पुस्तक या रचना के आधार पर इस सम्मान के हकदार होने की बात कर रहे थे।

    उनके बयान पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने ट्रंप की लेखन क्षमता को लेकर व्यंग्य किया। एक यूजर ने टिप्पणी की कि जो व्यक्ति बच्चों की किताब तक नहीं लिख सकता, वह पुलित्जर पुरस्कार पाने की उम्मीद कैसे कर सकता है। एक अन्य यूजर ने उनके अंग्रेजी लिखने और बोलने के तरीके पर तंज कसते हुए कहा कि उनके वाक्यों को समझने के लिए खोजी दल की जरूरत पड़ सकती है। ये प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर उनके दावे को लेकर होने वाली आलोचना का हिस्सा रहीं।

    पुलित्जर पुरस्कार को दुनिया के प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है। यह मुख्य रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम के लिए दिया जाता है, लेकिन इसका दायरा केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं है। साहित्य, नाटक और संगीत के क्षेत्र में भी इस पुरस्कार के तहत सम्मान प्रदान किए जाते हैं। इसकी प्रतिष्ठा के कारण इसे कई बार पत्रकारिता के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जैसी अहमियत वाला सम्मान भी कहा जाता है।

    ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब वह पहले भी नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में युद्ध रुकवाने का श्रेय लेते हुए नोबेल पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी का उल्लेख किया है। अब पुलित्जर पुरस्कार को लेकर दिए गए बयान में भी उन्होंने अपने काम को सम्मान के योग्य बताया और पूर्व में सम्मानित पत्रकारों की आलोचना की।

    हालांकि, किसी पुरस्कार के लिए पात्रता और चयन का फैसला संबंधित पुरस्कार संस्था के नियमों तथा निर्णायक प्रक्रिया के आधार पर होता है। ट्रंप के बयान से उनकी व्यक्तिगत अपेक्षा सामने आती है, जबकि रूस से जुड़ी रिपोर्टिंग और पुरस्कार विजेताओं के काम को लेकर उठाए गए उनके सवालों का आकलन संबंधित खबरों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना जरूरी है।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के लिए अमेरिका जिम्मेदार, ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कूटनीति पर दिया जोर

    होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के लिए अमेरिका जिम्मेदार, ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कूटनीति पर दिया जोर

    नई दिल्ली । होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को क्षेत्रीय असुरक्षा के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति और राजनीतिक बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए। तेहरान में सोमवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने पड़ोसी देशों से क्षेत्र की सुरक्षा के लिए साझा व्यवस्था विकसित करने की अपील भी की।

    अराघची के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के क्षेत्र में असुरक्षा की प्रमुख वजह अमेरिका की नीतियां और ईरान के खिलाफ जारी सैन्य तथा आर्थिक दबाव हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय परिस्थितियों को और तनावपूर्ण बनाया है। ईरान का कहना है कि मौजूदा संकट को केवल सैन्य शक्ति के इस्तेमाल से हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित देशों के बीच संवाद और राजनीतिक प्रयास आवश्यक हैं।

    ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय देशों के नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्था बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल का स्वागत किया जाना चाहिए, जिसके तहत विदेशी सेनाओं की मौजूदगी के बिना क्षेत्र के देश अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करें। उनके अनुसार, क्षेत्र की स्थिरता के लिए स्थानीय देशों की भागीदारी और आपसी सहयोग महत्वपूर्ण है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला रणनीतिक समुद्री मार्ग है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इसका विशेष महत्व है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के कुल तेल और अन्य हाइड्रोकार्बन परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इस कारण यहां जहाजों की आवाजाही में बाधा आने या सुरक्षा संकट बढ़ने से ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव का प्रभाव इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर भी दिखाई दे रहा है। ईरान इस जलमार्ग पर अपने नियंत्रण का दावा करता रहा है, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकेबंदी बनाए रखी है। दोनों देशों के बीच तनाव और समुद्री गतिविधियों को लेकर मतभेदों ने क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ाई हैं। ऐसे माहौल में अराघची ने कूटनीतिक समाधान और क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही है।

    रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी ईरान के साथ बातचीत के दौरान क्षेत्रीय संकट का समाधान खोजने के लिए राजनीतिक प्रयासों का समर्थन किया। तेहरान की यात्रा के दौरान उन्होंने अराघची और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की। रूस ने ईरान के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक संबंध जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। लावरोव ने कहा कि मॉस्को दोनों देशों के बीच सहयोग और विभिन्न परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।

    रूस और ईरान का कहना है कि क्षेत्रीय विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास जारी रहने चाहिए। दोनों देशों के बीच चर्चा में ऊर्जा, परिवहन और आर्थिक सहयोग से जुड़े विषय भी शामिल रहे। रूस ने क्षेत्रीय संकट को कम करने और राजनीतिक समाधान की संभावनाओं पर काम करने की इच्छा जताई है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध बने रहने के कारण तनाव कम करने की राह चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    अराघची के बयान से स्पष्ट है कि ईरान क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विदेशी सैन्य मौजूदगी के बजाय पड़ोसी देशों की भागीदारी वाली व्यवस्था का समर्थन कर रहा है। वहीं, रूस भी कूटनीति और बातचीत के जरिए तनाव कम करने की बात कर रहा है। आने वाले समय में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित देश आपसी मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने के लिए किस तरह आगे बढ़ते हैं।

  • रूसी तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों को ट्रंप ने टैरिफ से दी छूट, अमेरिकी राष्ट्रपति ने फैसले की बताई वजह

    रूसी तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों को ट्रंप ने टैरिफ से दी छूट, अमेरिकी राष्ट्रपति ने फैसले की बताई वजह

    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जुड़े प्रावधानों को लागू नहीं किया है। इस फैसले के बाद अमेरिकी राजनीति में बहस शुरू हो गई है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। वहीं, ट्रंप ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह अमेरिका के हित में है और इससे दुनिया को भी फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अभी कई लोगों को उनके फैसले का वास्तविक अर्थ समझ नहीं आया है।

    जिन पांच देशों को इस टैरिफ से छूट मिली है, उनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। ये देश रूस से तेल और गैस खरीदते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले के तहत इन देशों पर प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ फिलहाल लागू नहीं होगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी ऊर्जा खरीद से जुड़े व्यापारिक संबंधों को लेकर अमेरिका में चर्चा जारी है।

    ट्रंप ने रविवार को मियामी में मीडिया से बातचीत के दौरान अपने निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों को अभी यह जानकारी नहीं है कि उनके फैसले का वास्तविक मतलब क्या है। उनके मुताबिक, समय के साथ इस निर्णय के पीछे का उद्देश्य समझ में आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका कदम अमेरिका के हित में होगा और वैश्विक स्तर पर भी इसका लाभ देखने को मिल सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में इस फैसले से होने वाले संभावित लाभों का विस्तृत विवरण नहीं दिया।

    इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत रूस से संबंधित नए प्रतिबंध कानून के कुछ प्रावधानों को लागू करने से छूट दी गई। अमेरिकी कांग्रेस ने सितंबर में इस कानून को पारित किया था। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल था। भारत और चीन समेत पांच देशों को इस कार्रवाई से फिलहाल राहत मिलने के बाद कानून के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    आदेश के अनुसार, यह छूट तब तक लागू रहेगी, जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री और वित्त मंत्री यह तय नहीं कर लेते कि आगे क्या कार्रवाई आवश्यक है। इस व्यवस्था के कारण संबंधित देशों पर टैरिफ लगाने का निर्णय तत्काल लागू नहीं हुआ है। हालांकि, इससे भविष्य में टैरिफ लगाने की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती। आगे की कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगी।

    ट्रंप के इस कदम की आलोचना उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के साथ-साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने भी की है। दोनों दलों के नेताओं ने पिछले महीने इस कानून को भारी बहुमत से पारित किया था। ऐसे में राष्ट्रपति के फैसले को लेकर अमेरिकी राजनीतिक हलकों में मतभेद सामने आए हैं। आलोचकों का मानना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए इस कानून का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

    दक्षिण कैरोलिना की रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह रूस पर दबाव बनाने का विकल्प चुनतीं, ताकि युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया जा सके और गैस की कीमतें कम हों। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भरोसा नहीं होने की बात भी कही। इस कानून का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ रखा गया है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि रूस से ऊर्जा खरीद और उस पर प्रतिबंधों को लेकर अमेरिकी प्रशासन तथा कांग्रेस के कुछ नेताओं के बीच मतभेद बने हुए हैं।

  • ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार पहुंचा, मिडिल ईस्ट तनाव और रूस की सप्लाई चिंता से बढ़ी ईंधन महंगाई की आशंका

    ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार पहुंचा, मिडिल ईस्ट तनाव और रूस की सप्लाई चिंता से बढ़ी ईंधन महंगाई की आशंका

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 3.7 प्रतिशत बढ़कर 109.86 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई। मई के बाद यह इसका सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल डब्ल्यूटीआई की कीमत में भी तेजी दर्ज की गई और यह 3.5 प्रतिशत बढ़कर 101.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस तेजी के बाद भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल के पीछे मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और रूस से तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं। ऊर्जा ठिकानों के आसपास हमलों की खबरों और होर्मुज जलडमरूमध्य के क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा की है। कारोबारियों को चिंता है कि यदि इस क्षेत्र में तेल की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से तेल परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा रहता है। इस रास्ते से होने वाली आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर पड़ सकता है। इसी वजह से क्षेत्रीय तनाव के घटनाक्रम पर तेल बाजार की नजर बनी हुई है।

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष भी तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल है। दोनों देशों के बीच युद्ध के दौरान रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। यदि रूस की रिफाइनिंग क्षमता या निर्यात व्यवस्था प्रभावित होती है, तो बाजार में तेल और उससे बनने वाले ईंधन की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

    रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। वैश्विक बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए रूस से डीजल की आपूर्ति से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, अमेरिका में इस संबंध में प्रस्तावित समझौते का विरोध करने के लिए सांसदों ने विधेयक पेश किया है। इसके साथ ही रूस की रिफाइनरियों पर हमलों के कारण वहां से होने वाली आपूर्ति को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। इन परिस्थितियों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है।

    भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर अर्थव्यवस्था, महंगाई और ईंधन की लागत पर पड़ने की आशंका रहती है। पेट्रोल और डीजल परिवहन व्यवस्था से लेकर वस्तुओं की ढुलाई तक कई क्षेत्रों की लागत को प्रभावित करते हैं।

    हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। घरेलू कीमतों पर रुपये और डॉलर की विनिमय दर, तेल कंपनियों की लागत तथा सरकार की नीतियों सहित कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। इसलिए फिलहाल केवल वैश्विक कीमतों में तेजी के आधार पर घरेलू ईंधन की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    आगे कच्चे तेल की कीमतों का रुख मुख्य रूप से मध्य पूर्व के हालात और रूस से आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि तनाव बढ़ता है और सप्लाई प्रभावित रहती है, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं, परिस्थितियों में सुधार और आपूर्ति सामान्य होने पर बाजार को राहत मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा भारत में ईंधन की कीमतों को लेकर बनी चिंताओं के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

  • अमेरिकी-रूसी डीजल समझौते पर जेलेंस्की का विरोध, ट्रंप की अपील ठुकराकर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने का ऐलान

    अमेरिकी-रूसी डीजल समझौते पर जेलेंस्की का विरोध, ट्रंप की अपील ठुकराकर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने का ऐलान

    नई दिल्ली ।रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिका और यूक्रेन के संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को मानने से इनकार कर दिया है, जिसमें यूक्रेन से रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के लिए कहा गया था। जेलेंस्की के इस रुख से दोनों देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

    यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है, जब अमेरिका ने पिछले सप्ताह रूस पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी। इसके बदले रूस ने वैश्विक बाजार में बड़ी मात्रा में डीजल की आपूर्ति करने पर सहमति जताई। इस समझौते को लेकर यूक्रेन ने नाराजगी जाहिर की है। जेलेंस्की का मानना है कि रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाली अतिरिक्त राहत युद्ध जारी रखने की उसकी क्षमता को मजबूत कर सकती है।

    यूक्रेन ने इस समझौते को कमजोर फैसला बताते हुए चिंता जताई है कि रूस को ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई युद्ध जारी रखने में मदद कर सकती है। जेलेंस्की का कहना है कि रूस को आर्थिक राहत मिलने से यूक्रेन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई लंबी खिंच सकती है। इस समझौते की यूरोप में भी आलोचना हुई है। यूक्रेन का रुख है कि रूस की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले उसकी सैन्य क्षमता और युद्ध से जुड़े संसाधनों को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं।

    इस बीच, ट्रंप ने एक साक्षात्कार में जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा कि उनके साथ बातचीत करना आसान नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि जेलेंस्की समझौता करने की बात तो करते हैं, लेकिन वास्तव में इसके लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह यूक्रेनी राष्ट्रपति के बड़े प्रशंसक नहीं हैं और उनके नेतृत्व में यूक्रेन को भारी नुकसान हुआ है।

    ट्रंप ने रूस और यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं की तुलना करते हुए कहा कि रूस एक बड़ा देश है और उसके पास बड़ी संख्या में सैनिक उपलब्ध हैं, जबकि यूक्रेन के पास इतनी बड़ी जनशक्ति नहीं है। उन्होंने रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों की भी आलोचना की। उनका तर्क है कि डीजल उत्पादन से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने को लेकर अमेरिका और यूक्रेन के बीच मतभेद ऐसे समय सामने आए हैं, जब ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को लेकर अस्थायी संघर्षविराम की कोशिशें भी प्रभावित हुई हैं। यूक्रेन का कहना है कि रूस की ओर से उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहने के कारण वह एकतरफा तौर पर अपनी कार्रवाई रोककर नहीं रख सकता। कीव के अनुसार, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की किसी भी व्यवस्था में दोनों पक्षों की ओर से समान प्रतिबद्धता जरूरी है।

    इस घटनाक्रम से अमेरिका और यूक्रेन के बीच कूटनीतिक मतभेद और गहरे होने की आशंका बढ़ी है। एक ओर ट्रंप प्रशासन ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोकने पर जोर दे रहा है, वहीं यूक्रेन अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करने को तैयार नहीं दिख रहा। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनती है या नहीं, इसका असर युद्ध की आगे की दिशा और रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रमों पर पड़ सकता है।

  • रूस से डीजल आपूर्ति पर ट्रंप ने दी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, बोले- इससे पुतिन की युद्ध क्षमता बढ़ेगी

    रूस से डीजल आपूर्ति पर ट्रंप ने दी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, बोले- इससे पुतिन की युद्ध क्षमता बढ़ेगी


    नई दिल्ली । अमेरिका और रूस के बीच डीजल आपूर्ति को लेकर हुए कथित समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। इस फैसले के तहत रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दिए जाने की बात कही गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस कदम पर नाराजगी जताई और इसे अनुचित बताया। उनका कहना है कि इससे रूस की युद्ध लड़ने की क्षमता मजबूत हो सकती है।

    ट्रंप ने दावा किया कि रूस तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में उपलब्ध कराएगा। उन्होंने नवंबर में पांच लाख टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति और इसके बाद मात्रा बढ़ाने की संभावना का भी उल्लेख किया। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी वैश्विक बाजारों में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए तत्परता जताई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी डीजल की बिक्री के लिए अस्थायी छूट जारी की है। इससे अप्रैल 2027 तक आपूर्ति का रास्ता खुलने की बात कही गई है। हालांकि, समझौते की शर्तों और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।

    अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.37 डॉलर प्रति गैलन और डीजल की कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन बताई गई है। फरवरी के अंत से पेट्रोल की कीमत में 46 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 67 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होने का दावा किया गया है। ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। ट्रंप ने कहा कि किसानों, ट्रक चालकों और आम अमेरिकी नागरिकों के लिए ईंधन की कीमतें कम करना उनकी प्राथमिकता है।

    जेलेंस्की ने रूसी डीजल की बिक्री पर प्रतिबंधों में छूट देने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे रूस को आर्थिक लाभ मिल सकता है। उनके मुताबिक, अतिरिक्त आय से पुतिन युद्ध को लंबा खींचने और यूक्रेन पर अधिक आक्रामक हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस फैसले से अधिक लोगों की जान जा सकती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान बढ़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने मॉस्को पर कई प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में रूसी ईंधन की बिक्री को राहत देने का फैसला अमेरिकी नीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस समझौते से ईंधन की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सावधानी जताई है। विशेषज्ञ क्लेटन सीगल के अनुसार, इस फैसले से कीमतों में बड़ी गिरावट आने की संभावना सीमित है, जबकि रूस और पुतिन को लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञ माइकल लिंच ने भी कीमतों पर इसके असर को लेकर संदेह जताया। उनका कहना है कि यदि अमेरिका रूस से डीजल खरीदता है, तो रूस के मौजूदा ग्राहक अन्य देशों से ईंधन खरीदने लग सकते हैं। ऐसी स्थिति में बाजार में आपूर्ति का वितरण बदल सकता है, लेकिन कीमतों में उल्लेखनीय कमी होना निश्चित नहीं है।

    इस बीच, क्रेमलिन ने कहा कि ट्रंप ईरान से जुड़े संघर्ष का समाधान निकालने की कोशिशों में रूस की भूमिका का स्वागत करते हैं। ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने पर तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है। उन्होंने शुक्रवार को न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज में एक चुनावी रैली के दौरान यह बात कही। रूस से डीजल आपूर्ति पर राहत देने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब ऊर्जा की कीमतें और युद्ध से जुड़े घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए हैं।

  • रूस से डीजल खरीदेंगे ट्रंप, जेलेंस्की भड़के, बोले- पुतिन को फायदा देना युद्ध में निवेश जैसा

    रूस से डीजल खरीदेंगे ट्रंप, जेलेंस्की भड़के, बोले- पुतिन को फायदा देना युद्ध में निवेश जैसा


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार को तत्काल 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, नवंबर में रूस 5 लाख मीट्रिक टन डीजल और देगा, जिसके बाद 10 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी। ईंधन की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने की कोशिशों के बीच हुए इस ऐलान पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे रूस के खिलाफ युद्ध रोकने के प्रयासों को कमजोर करने वाला फैसला बताते हुए कहा कि मॉस्को को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने से मिलने वाला पैसा यूक्रेन के खिलाफ जंग जारी रखने में इस्तेमाल हो सकता है।

    ट्रंप ने पुतिन से बातचीत के बाद किया समझौते का ऐलान
    ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद इस समझौते की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार को डीजल की आपूर्ति करेगा। उनके मुताबिक, शुरुआती खेप के बाद नवंबर में 5 लाख मीट्रिक टन और फिर 10 लाख मीट्रिक टन डीजल दिया जाएगा।

    यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब ट्रंप प्रशासन 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इस आपूर्ति समझौते की शर्तों और इसे लागू करने की समयसीमा को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    जेलेंस्की बोले- रूस को पैसा देना युद्ध में निवेश जैसा
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस के साथ हुए इस समझौते की आलोचना की। उनका कहना है कि मॉस्को को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने का अवसर देने से उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन मिल सकते हैं।

    जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पुतिन को इस तरह का लाभ देने से सभ्य दुनिया को न तो शांति मिलेगी और न ही कोई फायदा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस इस डीजल से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल और अधिक हिंसा तथा धोखे के लिए करेगा।

    जेलेंस्की के मुताबिक, रूस की आमदनी बढ़ाने वाला ऐसा फैसला युद्ध खत्म करने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में मॉस्को पर दबाव बढ़ाने की जरूरत है, ताकि वह युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार हो।

    अमेरिका में मौजूद यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल के बीच हुआ ऐलान
    इस समझौते की घोषणा उस समय की गई, जब यूक्रेन का एक प्रतिनिधिमंडल रूस के साथ जारी संघर्ष का समाधान तलाशने के लिए अमेरिका में मौजूद था। ऐसे में ट्रंप के ऐलान ने यूक्रेन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    जेलेंस्की ने इस फैसले को मजबूत साझेदारों की ओर से लिया गया कमजोर निर्णय बताया। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल का इस्तेमाल केवल एक मोहरे के रूप में किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमारी टीम का इस्तेमाल सिर्फ एक मोहरे के रूप में किया जा रहा है। यह सही नहीं है और साझेदारों को एक-दूसरे के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।”

    ईंधन की कीमतें घटाने की कोशिश और रूस को मिलने वाला आर्थिक लाभ
    ट्रंप प्रशासन के सामने ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने की चुनौती है। रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ने पर अमेरिकी बाजार को अतिरिक्त ईंधन मिल सकता है, लेकिन इस कदम का भू-राजनीतिक असर भी महत्वपूर्ण है।

    जेलेंस्की की आपत्ति का मुख्य आधार यही है कि रूस को पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से मिलने वाली कमाई उसके युद्ध संबंधी खर्चों में मदद कर सकती है। उनके मुताबिक, रूस को आर्थिक लाभ देने के बजाय उस पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि युद्ध समाप्त करने की संभावनाएं मजबूत हों।

    इस तरह डीजल आपूर्ति का यह प्रस्ताव एक ओर अमेरिकी ईंधन बाजार से जुड़ा है, तो दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध और शांति वार्ता पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर विवाद खड़ा कर रहा है।

  • रूस के भीषण मिसाइल हमलों से यूक्रेन में मची तबाही…. 33 लोगों की मौत

    रूस के भीषण मिसाइल हमलों से यूक्रेन में मची तबाही…. 33 लोगों की मौत


    कीव।
    रूस- यूक्रन (Russia-Ukraine War) के बीच जंग जारी है। दोनों देश एक दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। इस बीच पूर्वी यूक्रेन (Ukraine) में रूस (Russia) की ओर से किए गए हवाई हमलों में 33 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि इस घटना 18 अन्य घायल हो गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (President Volodymyr Zelenskyy) ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। गुरुवार सुबह क्रामाटोर्स्क शहर में एक सामान्य सार्वजनिक बस स्टॉप को निशाना बनाया गया, जिसमें 12 लोगों की जान चली गयी। बता दें कि रूस ने सर्दियों की शुरुआत से पहले यूक्रेन पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे राजधानी कीव में बिजली संकट गहरा गया है।

    क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख वादिम फिलाश्किन ने कहा कि दोनेत्स्क क्षेत्र के क्रामातोर्स्क और स्लोवियांस्क में सुरक्षा की स्थिति में तेजी से आई गिरावट के कारण सार्वजनिक परिवहन रोक दिया गया है। फिलाश्किन ने रूस पर नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में हमें यात्रियों और चालकों की जान जोखिम में डालने का कोई अधिकार नहीं है। क्रामातोर्स्क और स्लोवियांस्क के निवासियों की सुरक्षा सबसे अहम है।

    बता दें कि रूस ने इससे एक दिन पहले पूर्वी यूक्रेन के प्राइलुकी में मिसाइल हमले किए थे, जिनमें पांच बच्चों समेत 22 लोगों की मौत हो गई थी और 54 अन्य घायल हो गए थे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि जैसे-जैसे सर्दी नजदीक आ रही है, रूस की ओर से रोजाना किए जाने वाले मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ सकते हैं। उन्होंने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के सदस्य देशों से अतिरिक्त रक्षा सहायता की अपील की।

    यूक्रेनी नेतृत्व ने रूसी अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने वाले अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है। यह भी कहा गया कि केवल शाब्दिक समर्थन काफी नहीं है और इसे तत्काल नये सैन्य रक्षा पैकेजों के रूप में जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। एंटी-बैलिस्टिक क्षमताओं की आपूर्ति, लड़ाकू विमानों के लिए गोला-बारूद और इंटरसेप्टर तकनीक में निवेश प्रतिदिन निर्दोष नागरिकों की जान बचाने में सीधे तौर पर मददगार साबित हो रहा है।

  • रूस में प्लेग की आशंका से बढ़ी चिंता, लैब टेक्नीशियन की मौत के बाद 200 लोग निगरानी में, अमेरिका ने मांगी जानकारी

    रूस में प्लेग की आशंका से बढ़ी चिंता, लैब टेक्नीशियन की मौत के बाद 200 लोग निगरानी में, अमेरिका ने मांगी जानकारी


    नई दिल्ली:
    रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की महिला लैब टेक्नीशियन दर्या शिपिलोवा की संदिग्ध मौत के बाद प्लेग को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लैब में जांच के दौरान जिंदा बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूटने से वह संक्रमित हुई थीं। हालांकि, रूस की स्वास्थ्य निगरानी संस्था रोस्पोट्रेबनादजोर ने इस दावे को खारिज किया है। संस्था के मुताबिक महिला की मौत प्लेग से नहीं, बल्कि अज्ञात निमोनिया से हुई है। जांच किए गए नमूनों में कोई घातक रोगाणु भी नहीं मिला। इसके बावजूद पड़ोसी राज्य बुरियाटिया के प्रमुख एलेक्सी त्सिदेनोव ने मौत की वजह प्लेग होने की आशंका जताई है। वहीं, रोस्पोट्रेबनादजोर के पूर्व प्रमुख गेनेडी ओनिश्चेंको ने कहा कि यह प्लेग नहीं है और ठंड के कारण संक्रमण का प्रसार संभव नहीं है।

    मंगोलिया की सीमा के पास शेलेखोव कस्बे के जिस अस्पताल में महिला को भर्ती कराया गया था, वहां के पूरे स्टाफ को क्वारंटीन कर दिया गया है। स्वतंत्र मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार करीब 200 लोग निगरानी में हैं। अस्पतालों में नए मरीजों की भर्ती रोक दी गई है और कुछ अन्य अस्पताल भी बंद किए गए हैं। लॉकडाउन की चर्चाओं के बीच गवर्नर इगोर कोब्जेव ने लोगों से शांत रहने की अपील की है। एहतियात के तौर पर सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। नजदीकी एल्युमिनियम प्लांट में मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। मेयर मैक्सिम मोदिन के अनुसार, पिछले 10 दिनों में संस्थान के किसी अन्य कर्मचारी में संक्रमण नहीं मिला है। हालांकि, संपर्क में आए लोगों में कोविड-19 और राइनोवायरस के दो-दो मामले मिले हैं।

    मामले पर अमेरिका भी नजर बनाए हुए है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वह संभावित निमोनिक प्लेग से हुई मौत की स्थिति की सीडीसी के साथ निगरानी कर रहा है। अमेरिका ने रूस से मामले की सटीक जानकारी साझा करने की अपील की है। करीब 95 शोधकर्ताओं वाला यह संस्थान साइबेरिया और सुदूर-पूर्वी क्षेत्रों में अति-जोखिम वाले संक्रमणों की रोकथाम से जुड़ा प्रमुख केंद्र है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि वह इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की लैब वर्कर की मौत के मामले पर करीबी नजर रख रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चिंता की कोई बात है।

    रूस में प्लेग फैलने की आशंका के बीच कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान ने अपनी सीमाओं पर स्वास्थ्य नियंत्रण कड़े कर दिए हैं। किर्गिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी सीमा चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा है। सीमा पार करने वाले यात्रियों, वाहनों और सामान की कड़ाई से निगरानी की जा रही है। उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य प्राधिकरण ने रूस और विश्व स्वास्थ्य संगठन के डेटा के आधार पर निगरानी बढ़ाई है, ताकि संभावित संक्रमण को देश में आने से रोका जा सके। कजाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी स्थिति पर लगातार नजर रखने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार संक्रमण फैलने का जोखिम बेहद कम है, लेकिन सीमा पर थर्मल स्क्रीनिंग और जांच की जा रही है।

    इस घटना ने अतीत में प्रयोगशालाओं से संक्रमण फैलने की घटनाओं की याद भी ताजा कर दी है। 1967 में जर्मनी में मारबर्ग वायरस पर शोध के दौरान वैज्ञानिक संक्रमित हुए थे और 31 लोग इसकी चपेट में आए थे, जिनमें सात की मौत हुई थी। 1977 में रूस और चीन में इन्फ्लूएंजा के प्रसार को लेकर भी लैब से जुड़े संक्रमण की चर्चा हुई थी। 1978 में ब्रिटेन में बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की लैब से एयर डक्ट के जरिए चेचक फैलने की घटना में जेनेट पार्कर की मौत हुई थी। 2019 में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से कोरोना वायरस के संभावित लीक का दावा भी सामने आया था, जिस पर वैश्विक स्तर पर मतभेद जारी हैं।

  • ब्लैक सी में रूसी ड्रोन ने कार्गो शिप पर किया हमला, कैप्टन की मौत; एक भारतीय घायल, 11 क्रू सदस्य बचाए गए

    ब्लैक सी में रूसी ड्रोन ने कार्गो शिप पर किया हमला, कैप्टन की मौत; एक भारतीय घायल, 11 क्रू सदस्य बचाए गए


    नई दिल्ली: ब्लैक सी में रूसी ड्रोन ने एक कार्गो शिप को निशाना बनाया, जिसमें शिप के कैप्टन की मौत हो गई और कई क्रू सदस्य घायल हो गए। घायलों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। हमले के बाद कार्गो शिप एमवी रोयाद ममादोव में भीषण आग लग गई और बाद में यह डूब गया। शिप पर कुल तीन भारतीय नागरिक मौजूद थे। भारतीय दूतावास के मुताबिक तीनों भारतीय सुरक्षित हैं। इनमें से एक घायल हुआ है और उसका रोमानिया के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। रोमानिया के गृह मंत्रालय ने बताया कि जहाज के 11 क्रू सदस्यों को बचा लिया गया है।

    यह हमला रोमानिया की समुद्री सीमा के बाहर हुआ। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि दो रूसी ड्रोन ने तुर्की के एक नागरिक जहाज को निशाना बनाया। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और क्रू सदस्यों को बचाने के लिए अभियान चलाया गया। रोमानिया की नौसेना प्राधिकरण ने जहाज की पहचान एमवी रोयाद ममादोव के रूप में की है। घटना के बाद जहाज पर मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई की गई।

    जहाज पर तीन भारतीय नागरिकों के मौजूद होने की जानकारी सामने आने के बाद भारतीय दूतावास ने उनकी स्थिति पर नजर रखी। दूतावास ने तीनों भारतीय नागरिकों से बात की और उनकी सुरक्षा की पुष्टि की। इनमें एक भारतीय क्रू सदस्य घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए रोमानिया के अस्पताल ले जाया गया। दूतावास ने अस्पताल के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखने और घायल भारतीय नागरिक को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। अन्य दोनों भारतीय नागरिकों की स्थिति सुरक्षित बताई गई है।

    जानकारी के मुताबिक, एमवी रोयाद ममादोव मक्का यानी कॉर्न लेकर इटली के रेवेना जा रहा था। जहाज सेंट किट्स एंड नेविस के झंडे के साथ चल रहा था और आखिरी बार यूक्रेन के इजमेल बंदरगाह पर रुका था। हमले के दौरान जहाज ब्लैक सी में था। घटना के बाद जहाज में लगी आग और उसके डूबने से क्रू सदस्यों को बचाने की चुनौती बढ़ गई। रोमानिया के अधिकारियों ने अभियान चलाकर 11 क्रू सदस्यों को बचाया।

    यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ब्लैक सी में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक और चिंता के रूप में सामने आई है। जहाज पर सवार भारतीय नागरिकों की स्थिति को लेकर भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहा। फिलहाल तीनों भारतीय नागरिकों के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है, जबकि घायल क्रू सदस्य का रोमानिया के अस्पताल में इलाज जारी है।