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  • Russia से कच्चे तेल के आयात में कटौती… विदेश सचिव बोले- भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं

    Russia से कच्चे तेल के आयात में कटौती… विदेश सचिव बोले- भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं


    नई दिल्ली।
    भारत (India) द्वारा रूस (Russia) से कच्चे तेल के आयात में कटौती (Reduction Imports Crude Oil) की खबरों के बीच विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ किया है कि देश की ऊर्जा नीति और इससे जुड़े सभी फैसले राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिए जाते रहेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा आयोजित एक विशेष ब्रीफिंग में विदेश सचिव ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में लिए जाने वाले निर्णय, चाहे सरकार द्वारा हों या व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा, राष्ट्रीय हितों से निर्देशित होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कच्चे तेल की वास्तविक खरीद का निर्णय तेल कंपनियाँ बाजार की परिस्थितियों के आधार पर करती हैं।

    विक्रम मिस्री ने कहा कि तेल कंपनियाँ उपलब्धता, जोखिम, लागत और लॉजिस्टिक्स जैसे कई कारकों का आकलन कर निर्णय लेती हैं और वे अपनी आंतरिक जवाबदेही तथा वित्तीय जिम्मेदारियों का पालन करती हैं। उन्होंने कहा, “किसी भी समय ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसलों में वित्तीय और लॉजिस्टिक पहलुओं सहित कई जटिल कारक शामिल होते हैं।” विदेश सचिव ने दोहराया कि भारत एक विकासशील देश है और तेल एवं गैस क्षेत्र में शुद्ध आयातक (नेट इम्पोर्टर) है। देश की कुल जरूरतों का लगभग 80–85 प्रतिशत हिस्सा आयात पर निर्भर होने के कारण महँगाई का जोखिम बना रहता है।

    उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
    उन्होंने कहा, “जब आप इतने बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर होते हैं, तो आयात लागत से उत्पन्न महँगाई की चिंता स्वाभाविक है। यही कारण है कि भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने रूस से कच्चे तेल का आयात कम करने के सवाल पर कहा कि ऊर्जा खरीद के लिए कई स्रोतों को बनाए रखना हमारी रणनीति रही है। वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हाल के वर्षों में आई अस्थिरता का उल्लेख करते हुए मिस्री ने कहा कि भारत, अन्य देशों की तरह, स्थिर कीमतों और भरोसेमंद आपूर्ति में साझा रुचि रखता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत न केवल ऊर्जा का बड़ा उपभोक्ता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में एक स्थिरता प्रदान करने वाला कारक भी है।

    भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं
    उन्होंने कहा कि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं है और कच्चे तेल का आयात दर्जनों देशों से करता है। बाज़ार की परिस्थितियों के अनुसार आयात स्रोतों का मिश्रण बदलना स्वाभाविक है। विदेश सचिव ने कहा, “हमारी ऊर्जा नीति के प्रमुख आधार हैं- पर्याप्त उपलब्धता, उचित कीमत और आपूर्ति की विश्वसनीयता। जितने अधिक विविध हमारे आयात स्रोत होंगे, उतनी ही अधिक हमारी ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत होगी।”

  • रूस ने फिर दिखाई दोस्ती, विदेश मंत्री बोले- भारत की अध्यक्षता में BRICS का हम करेंगे समर्थन

    रूस ने फिर दिखाई दोस्ती, विदेश मंत्री बोले- भारत की अध्यक्षता में BRICS का हम करेंगे समर्थन


    मास्को।
    रूस (Russia) के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Foreign Minister Sergei Lavrov) ने सोमवार को कहा कि भारत (India) की अध्यक्षता में हम ब्रिक्स (BRICS) और उनके एजेंडे का पूरा समर्थन करेंगे। एक इंटरव्यू में लावरोव ने कहा कि आज के समय को देखते हुए भारत का एजेंडा बेहद प्रासंगिक, तार्किक है। वह आतंकवाद (Terrorism) और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) से जुड़ा है। लावरोव ने कहा कि मेरी राय में भारत की अध्यक्षता में जो एजेंडा प्रस्तुत किया जा रहा है, वह भविष्य की तैयारी और वर्तमान चुनौतियों का समाधान करता है। हम इसका सक्रिय रूप से समर्थन करेंगे।

    रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का जोर आतंकवाद विरोधी गतिविधियों पर है जो बेहद जरूरी भी है। क्योंकि इस समय विश्व के कई हिस्से आतंकवाद प्रभावित हैं। अफगानिस्तान सीमा, भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान गलियारे के साथ-साथ अन्य जगहों पर आतंकी गतिविधियां देखी जा रही है।

    यह प्राथमिकता हमारे लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर जब हम संयुक्त राष्ट्र में भारत के साथ मिलकर एक वैश्विक आतंकवाद विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इसका मसौदा पहले ही तैयार हो चुका है, हालांकि अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है।

    लावरोव ने कहा, भारत की अध्यक्षता खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों, सूचना प्रौद्योगिकी, को प्राथमिकता देती है। भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें रूस को आमंत्रित किया गया है, और हम एजेंडे में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

  • रूस से तेल आयात पर क्या बदलेगा भारत का रुख? ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

    रूस से तेल आयात पर क्या बदलेगा भारत का रुख? ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब


    नई दिल्ली । यूएस-इंडिया ट्रेड डील के ऐलान के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया था कि भारत अब रूस से तेल की खरीद रोक देगा। इस बयान के बाद अब भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को रूसी तेल आयात को लेकर अपने पहले से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए साफ कहा है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

    विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, ‘भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखना हमारी नीति का अहम हिस्सा है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार कई बार सार्वजनिक मंचों से यह स्पष्ट कर चुकी है कि 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।’

    MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘वैश्विक बाजार की स्थिति और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के अनुसार ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का केंद्र है। भारत के फैसले इसी सोच के आधार पर लिए गए हैं और भविष्य में भी इसी दिशा में आगे बढ़ेंगे।’

    रूसी तेल को लेकर भारत ने दोहराया अपना रुख

    अमेरिका लंबे समय से चाहता है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना पूरी तरह बंद करे। इस पर भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि देश की ऊर्जा आवश्यकताएं किसी भी अन्य दबाव से ऊपर हैं। रूस से तेल आयात को लेकर यह भारत का लगातार रुख रहा है। अमेरिका का कहना है कि रूस तेल से होने वाली आय का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में करता है, जबकि रूस इन आरोपों को लगातार खारिज करता आया है।

    व्हाइट हाउस के बयान के बाद सामने आया MEA का पक्ष

    विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया व्हाइट हाउस के उस दावे के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि भारत ने रूस से सीधे या किसी तीसरे देश के माध्यम से तेल खरीद रोकने और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह बयान उस समय सामने आया था, जब अमेरिका ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटाने का ऐलान किया था।

    रूसी तेल पर भारत की स्वतंत्रता पर क्रेमलिन की टिप्पणी

    इस बीच, जब इस मुद्दे पर क्रेमलिन से सवाल किया गया तो उसने कहा कि भारत को जहां से चाहे वहां से तेल खरीदने का पूरा अधिकार है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस तथ्य से भली-भांति अवगत है कि वह भारत का अकेला तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्तिकर्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी अन्य देशों से इन उत्पादों की खरीद करता रहा है, इसलिए इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

  • 50 साल बाद पहली बार रूस-अमेरिका के बीच कोई परमाणु सीमा नहीं, न्यू स्टार्ट संधि समाप्त, वैश्विक सुरक्षा पर चिंता

    50 साल बाद पहली बार रूस-अमेरिका के बीच कोई परमाणु सीमा नहीं, न्यू स्टार्ट संधि समाप्त, वैश्विक सुरक्षा पर चिंता


    नई दिल्ली। रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों पर लगी अंतिम बड़ी कानूनी पाबंदी अब समाप्त हो गई है। 5 फरवरी 2026 को न्यू स्टार्ट संधि की अवधि पूरी हो गई, जिससे लगभग 50 साल बाद दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों-जैसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, सबमरीन-लॉन्च मिसाइलें और बॉम्बर-पर कोई बाध्यकारी सीमा नहीं रही। विशेषज्ञ इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं।

    न्यू स्टार्ट संधि क्या थी?
    न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटीNew START2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के बीच हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक समझौता था। यह संधि उन रणनीतिक हथियारों की तैनाती को सीमित करती थी जो देश के महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते थे। इसे 2011 में लागू किया गया और मूलतः 10 साल के लिए थी। 2021 में इसे राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 5 साल बढ़ाकर 2026 तक कर दिया।

    संधि का इतिहास
    परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की पहल शीत युद्ध के समय से चली आ रही है। 1970 के दशक में SALT समझौते ने संख्या पर सीमा लगाई, लेकिन कटौती नहीं की।

    1991: START I – हजारों हथियारों में कटौती

    1993: START II – और कटौती, पर पूरी तरह लागू नहीं

    2002: SORT – 1,700-2,200 वारहेड्स पर सहमति, जांच-पड़ताल सीमित

    2010: न्यू स्टार्ट – रणनीतिक हथियारों पर बाध्यकारी सीमा

    2021 के बाद स्थिति
    2023 में रूस ने निरीक्षण बंद कर दिया, लेकिन सीमा पालन का दावा जारी रखा। इसका कारण यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की भूमिका बताया गया। अब संधि पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और दोनों देश स्वतंत्र हैं।

    रूस का बयान
    रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अब न्यू स्टार्ट संधि के तहत कोई दायित्व या पारस्परिक घोषणा दोनों देशों पर लागू नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया।

    संभावित असर

    संधि समाप्त होने के बाद रूस और अमेरिका दोनों अपनी मिसाइलों और रणनीतिक वारहेड्स की संख्या बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी और लॉजिस्टिक कारणों से यह तुरंत संभव नहीं है, लेकिन लंबी अवधि में हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है।

    वैश्विक संतुलन

    रूस और अमेरिका के पास दुनिया के 90% से अधिक परमाणु हथियार हैं। जनवरी 2025 तक रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 वारहेड्स थे। अन्य देशों जैसे चीन600), फ्रांस290और ब्रिटेन225के पास अपेक्षाकृत कम हथियार हैं।

    विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी
    सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से वैश्विक परमाणु होड़ तेज हो सकती है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार, दोनों देश अपनी तैनात क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं।

    संधि समाप्त होने से पहले पोप लियो और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने दोनों देशों से अपील की कि वे परमाणु सीमाओं को बनाए रखें और नई, सत्यापनीय संधि पर तुरंत बातचीत शुरू करें। गुतारेस ने चेतावनी दी कि दशकों में पहली बार दुनिया सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बिना किसी बाध्यकारी सीमा के दौर में प्रवेश कर रही है, जिससे हथियारों के इस्तेमाल का जोखिम सबसे अधिक बढ़ गया है।

  • रूस का ट्रंप को जवाब…. भारत को तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता, कोई नई बात नहीं

    रूस का ट्रंप को जवाब…. भारत को तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता, कोई नई बात नहीं


    मास्को।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच नए व्यापार समझौते (New trade Agreements.) के बाद एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा या नहीं? हालांकि, इस मुद्दे पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन रूस (Russia) ने अब इस पर स्पष्ट जवाब दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने हाल ही में दावा किया था कि भारत अब रूसी तेल की खरीद रोक देगा, लेकिन रूस ने इस पर प्रतिकार करते हुए कहा है कि भारत पूरी तरह से स्वतंत्र है कि वह किस देश से तेल खरीदे।

    रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत कोई एकमात्र देश नहीं है जो रूस से तेल खरीदता है। भारत हमेशा से विभिन्न देशों से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता रहा है, और इसमें कोई नई बात नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ जानते हैं कि भारत रूस का एकमात्र तेल आपूर्तिकर्ता नहीं है। यह बयान ट्रंप के उस दावे पर आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका से तेल खरीदने पर सहमति जताई है। पेस्कोव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रूस को इस मामले में नई दिल्ली से कोई जानकारी नहीं मिली है, और रूस अपने भारत के साथ संबंधों को बहुत महत्व देता है।

    ट्रंप का दावा और भारत का रुख
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते में भारत के लिए टैरिफ में कमी शामिल है, और इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। हालांकि, इस पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, और न ही प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट में रूस से तेल खरीदने पर कोई उल्लेख किया गया है। रूसी तेल आयात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के बयान में कोई प्रतिबद्धता या समझौता नहीं था, जबकि ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद यह तय हुआ कि भारत अमेरिकी तेल का आयात बढ़ाएगा और रूस से तेल खरीदने की मात्रा घटाएगा।

    भारत और रूस के ऊर्जा संबंध
    रूस के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत रूस से प्रतिदिन 15 लाख से 20 लाख बैरल तेल आयात करता है, जो अमेरिका से प्राप्त शेल तेल के मुकाबले कहीं ज्यादा है। शेल तेल हल्के ग्रेड का होता है, जबकि रूस का यूराल तेल भारी और सल्फर युक्त होता है। इस वजह से भारत को अमेरिकी कच्चे तेल को अन्य ग्रेड के तेल के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। इसलिए, रूस का कहना है कि ट्रंप का दावा एक तरह से दिखावा हो सकता है, क्योंकि अमेरिकी तेल रूस के तेल का सीधे विकल्प नहीं बन सकता। यह स्थिति दिखाती है कि भारत और रूस के बीच तेल संबंधों में कोई तत्काल बदलाव होने की संभावना नहीं है, और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विभिन्न स्रोतों से आपूर्ति पर निर्भर रहेगा।

  • यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत

    यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत


    न्यूयॉर्क।
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) (United Nations General Assembly (UNGA) ने रूस पर दबाव बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। इसमें रूस से यूक्रेनी बच्चों को तुरंत और बिना शर्त वापस लौटाने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मानवीय संकट पर केंद्रित है, जहां कथित तौर पर हजारों बच्चों को जबरन रूसी क्षेत्र में निर्वासित किया गया है। इस महत्वपूर्ण मसौदा प्रस्ताव पर बुधवार को मतदान हुआ, जिसमें भारत ने मतदान से परहेज किया।

    193 सदस्यीय महासभा में ‘यूक्रेनी बच्चों की वापसी’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को 91 देशों ने समर्थन दिया, 12 देशों ने इसका विरोध किया और 57 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत के साथ-साथ बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, मिस्र, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका ने भी वोटिंग से परहेज किया। बता दें कि यह प्रस्ताव रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले पेश किया गया था। भारत ने फिलहाल वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।


    प्रस्ताव में क्या कहा गया?

    प्रस्ताव में युद्ध के बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई गई, विशेषकर उन यूक्रेनी बच्चों की स्थिति पर जिन्हें 2014 के बाद अपने परिवारों से अलग कर रूस-नियंत्रित इलाकों में ले जाया गया या रूस भेजा गया।


    महासभा ने रूस से मांग की कि वह-

    – जबरन ले जाए गए सभी यूक्रेनी बच्चों को तुरंत, सुरक्षित और बिना शर्त वापस भेजे।
    – बच्चों के जबरन निर्वासन, परिवारों से अलगाव, नागरिकता बदलने, दत्तक ग्रहण या फॉस्टर केयर में रखने जैसी सभी कार्रवाइयों को तुरंत रोके।
    – इस तरह के मामलों में जिम्मेदार लोगों की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करे।

    प्रस्ताव ने रूस द्वारा 2022 के बाद किए गए उन कानूनी बदलावों पर भी आपत्ति जताई, जिनसे यूक्रेनी अनाथ बच्चों या अभिभावक-विहीन बच्चों को रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है।

    यूक्रेन का दावा: 20000 से अधिक बच्चों के मामले की जांच
    यूक्रेन की उप विदेश मंत्री मारियाना बेट्सा ने महासभा में मसौदा प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 तक 6395 बच्चों की जबरन ट्रांसफर/डेपोर्टेशन की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20,000 से अधिक मामलों की जांच जारी है।


    रूस का जवाब: झूठे आरोपों से भरा प्रस्ताव

    रूस की उप स्थायी प्रतिनिधि मारिया जाबोलोत्स्काया ने मसौदा प्रस्ताव को झूठे आरोपों से भरा बताया। उन्होंने कहा कि कई बच्चे युद्ध क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए हैं या अपने परिवारों से बिछड़ गए थे, जिसे उल्लंघन नहीं माना जा सकता। यूक्रेनी शरणार्थियों के लिए रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना स्वेच्छिक और बिना किसी दबाव के है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के पक्ष में हर वोट झूठ, युद्ध और टकराव के समर्थन में है, जबकि विरोध में दिया गया हर वोट शांति के पक्ष में है।


    यूएन महासभा अध्यक्ष की टिप्पणी

    यूएन महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बैरबॉक ने कहा कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद से महासभा ने लगातार अपनी आठ अलग-अलग प्रस्तावों में रूस से तत्काल और बिना शर्त वापसी की मांग की है। उन्होंने कहा- यूक्रेनी बच्चों का मामला खाली संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। यह पूरी स्थिति रूस के आक्रमण का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से न सिर्फ यूक्रेन बल्कि अन्य क्षेत्रों और वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।

  • भारत दौरे से पहले पुतिन ने अमेरिकी टैरिफ पर दिया बयान, बोले- PM मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं

    भारत दौरे से पहले पुतिन ने अमेरिकी टैरिफ पर दिया बयान, बोले- PM मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं


    नई दिल्‍ली । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर आ रहे हैं. अपने भारत दौरे के दौरान वो कई बड़े समझौते साइन कर सकते हैं. इसी बीच भारत पर अमेरिका की तरफ से लगाए टैरिफ को लेकर उन्होंने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं हैं. यह बयान उन्होंने उस सवाल के जवाब में दिया जिसमें पूछा गया था कि क्या अमेरिका भारत पर टैरिफ के जरिए दबाव डाल रहा है.

    पुतिन ने PM मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना की
    पुतिन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता और भारत-रूस संबंधों के भविष्य के बारे में भी पूछा गया. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुनिया ने भारत की अडिग नीति देखी है और देश को अपने नेतृत्व पर गर्व होना चाहिए. पुतिन ने यह भी बताया कि भारत और रूस के बीच 90 प्रतिशत से अधिक द्विपक्षीय लेन देन सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं.

    मोदी से मित्रता और आगामी भारत दौरा
    पुतिन ने कहा कि उन्हें अपने मित्र, प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए यात्रा करने में बहुत खुशी हो रही है. उन्होंने यह भी बताया कि दोनों नेताओं ने अगली बैठक भारत में आयोजित करने पर सहमति जताई है.

    भारत-रूस सहयोग और ऐतिहासिक संबंध
    पुतिन ने कहा कि बहुत सारी बातें चर्चा के लिए हैं, क्योंकि भारत और रूस के बीच सहयोग का दायरा बहुत व्यापक है. उन्होंने दोनों देशों के बीच के विशिष्ट ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित किया. उन्होंने भारत की आजादी के बाद की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि सिर्फ 77 साल के अल्प समय में, देश ने अद्भुत विकास हासिल किया है.

    बता दें कि पुतिन अब तक भारत के नौ दौरे कर चुके हैं, जिनमें से तीन मोदी के कार्यकाल में (2016, 2018 और 2021) हुए. दिसंबर में यह उनका दसवां दौरा होगा. वहीं प्रधानमंत्री मोदी सात बार रूस जा चुके हैं.