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  • Stock Market Closing: बैंकिंग शेयरों की तेजी और क्रूड ऑयल में नरमी से लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ भारतीय बाजार

    Stock Market Closing: बैंकिंग शेयरों की तेजी और क्रूड ऑयल में नरमी से लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ भारतीय बाजार

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। निवेशकों की सकारात्मक धारणा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 373.76 अंकों की बढ़त के साथ 78,954.76 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 11.35 अंक चढ़कर 24,636.00 पर पहुंच गया। निफ्टी का 24,600 के ऊपर बंद होना बाजार की मजबूती का संकेत माना जा रहा है।

    कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंतिम चरण में चुनिंदा हैवीवेट और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। इससे पहले मंगलवार की गिरावट के बाद भी बाजार ने वापसी करते हुए लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज की है। निवेशकों का मानना है कि घरेलू आर्थिक संकेतकों और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार से आगे भी बाजार को समर्थन मिल सकता है।

    सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो पीएसयू बैंक शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मीडिया, रियल्टी, ऑटो, मेटल और आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली के कारण गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद व्यापक बाजार में स्मॉलकैप शेयरों की मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा।

    निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में एसबीआई, बीईएल, टाइटन, श्रीराम फाइनेंस, सिप्ला और इटरनल में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। वहीं पावर ग्रिड, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, टीसीएस और बजाज ऑटो के शेयर दबाव में रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और पश्चिम एशिया में समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की दिशा में जारी कूटनीतिक प्रयासों ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है। इससे महंगाई पर दबाव कम होने और कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर कॉर्पोरेट मुनाफे पर पड़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा बाजार में बना हुआ है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के स्थिर नीतिगत रुख और आर्थिक विकास को लेकर सकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है। बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में आई खरीदारी इसी भरोसे को दर्शाती है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों की संभावना निवेशकों को आकर्षित कर सकती है।

    हालांकि कुछ क्षेत्रों में मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन स्मॉलकैप और चुनिंदा वैल्यू शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। विशेष रूप से ऊर्जा, टेलीकॉम और रिटेल से जुड़े कारोबार में लंबी अवधि की संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी। इससे बाजार का समग्र रुख सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहे।

  • शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सकारात्मक रुख देखने को मिला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 250 अंकों की बढ़त के साथ 78,850 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी मामूली तेजी के साथ 24,650 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती घंटे में निवेशकों की ओर से बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कारोबार के दौरान निवेशकों का रुझान चुनिंदा बड़े शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहा।

    आज के कारोबार में बैंकिंग कंपनियों के शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी निवेशकों ने भरोसा दिखाया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर मजबूत निवेश गतिविधियों और चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी के कारण बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के चलते निवेशक सतर्क भी नजर आए और सीमित दायरे में कारोबार जारी रहा।

    इसी बीच रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की कंपनी जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की। कंपनी का शेयर राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज पर 245 रुपये और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 242 रुपये के स्तर पर सूचीबद्ध हुआ। यह कंपनी के 225 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक रहा। मजबूत लिस्टिंग ने उन निवेशकों को शुरुआती दिन ही लाभ दिया जिन्होंने कंपनी के सार्वजनिक निर्गम में निवेश किया था।

    कंपनी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम 30 जुलाई से 3 अगस्त के बीच निवेशकों के लिए खुला था। इस इश्यू का प्राइस बैंड 214 से 225 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। निवेशकों की अच्छी भागीदारी के चलते इस निर्गम को लगभग 7.97 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं और निवेशकों के सकारात्मक रुख का लाभ कंपनी को सूचीबद्ध होने के पहले ही दिन मिला।

    दूसरी ओर एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग सभी प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और विभिन्न आर्थिक संकेतकों का असर एशियाई बाजारों पर स्पष्ट रूप से नजर आया। वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिला-जुला प्रदर्शन दर्ज किया गया, जहां डाउ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में हल्की गिरावट रही।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो हाल के सात कारोबारी दिनों में उन्होंने कुल 2,703 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की है। हालांकि ताजा कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों की ओर से सीमित बिकवाली दर्ज की गई, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को संतुलित बनाए रखा। पिछले कारोबारी दिन भी सेंसेक्स 152 अंकों की बढ़त के साथ 78,581 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन शुरुआती तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी भी घरेलू बाजार में बना हुआ है और आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कॉर्पोरेट गतिविधियों पर भी बाजार की नजर रहेगी।

  • सेंसेक्स निफ्टी में गुरुवार को रहेगा उतार चढ़ाव या मिलेगी तेजी निवेश से पहले जान लें अहम संकेत

    सेंसेक्स निफ्टी में गुरुवार को रहेगा उतार चढ़ाव या मिलेगी तेजी निवेश से पहले जान लें अहम संकेत


    नई दिल्ली। गुरुवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार की नजर घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के संकेतों पर रहेगी। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है और निवेशक हर नए आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में गुरुवार का दिन भी निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि कई ऐसे फैक्टर हैं जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजारों का रुख भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत पर असर डाल सकता है। अगर अमेरिका और एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो सेंसेक्स और निफ्टी मजबूत शुरुआत कर सकते हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और डॉलर इंडेक्स की चाल भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    गुरुवार के कारोबार में बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर खास नजर रहेगी। अगर इन प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी का माहौल बना रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी गतिविधि देखने को मिल सकती है क्योंकि हाल के दिनों में इन शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को किसी भी अफवाह या छोटी अवधि की तेजी को देखकर जल्दबाजी में निवेश नहीं करना चाहिए। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर ही भरोसा बनाए रखना चाहिए। अच्छे वित्तीय प्रदर्शन मजबूत प्रबंधन और भविष्य की विकास संभावनाओं वाली कंपनियां लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।

    गुरुवार को कई कंपनियों के तिमाही नतीजे भी निवेशकों के लिए अहम रहेंगे। उम्मीद से बेहतर या कमजोर परिणाम संबंधित शेयरों के साथ पूरे सेक्टर की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा देश और विदेश से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर भी बाजार की नजर रहेगी। महंगाई ब्याज दर और औद्योगिक उत्पादन से जुड़े संकेत भविष्य की निवेश रणनीति तय करने में मदद करेंगे।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नए निवेशक बिना पूरी जानकारी के किसी भी शेयर में पैसा लगाने से बचें। निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति कारोबार का भविष्य और जोखिम का सही आकलन करना जरूरी है। अगर किसी शेयर में बहुत तेजी आ चुकी है तो उसमें प्रवेश करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं गिरावट के दौरान मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

    कुल मिलाकर गुरुवार का कारोबारी सत्र कई महत्वपूर्ण संकेतों के बीच शुरू होगा। बाजार में तेजी और गिरावट दोनों की संभावना बनी रहेगी इसलिए निवेशकों को धैर्य के साथ सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए। सही रिसर्च और संतुलित निवेश रणनीति ही लंबे समय में बेहतर लाभ दिलाने का सबसे सुरक्षित तरीका मानी जाती है।

  • बुधवार का शेयर बाजार आउटलुक ग्लोबल संकेतों और कंपनियों के नतीजों से तय होगी बाजार की दिशा

    बुधवार का शेयर बाजार आउटलुक ग्लोबल संकेतों और कंपनियों के नतीजों से तय होगी बाजार की दिशा


    नई दिल्ली । बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बुधवार का सत्र कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के आधार पर तय होगा। पिछले कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और ऐसे में निवेशक हर नई खबर पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि विदेशी बाजारों का रुख कैसा रहता है और घरेलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियों से जुड़े संकेत क्या मिलते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार बुधवार को सबसे ज्यादा नजर विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की खरीद और बिकवाली पर रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से बाजार में खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं अगर बिकवाली का दबाव बढ़ता है तो बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता भी बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रदर्शन भी भारतीय शेयर बाजार पर असर डालेगा। अमेरिका और एशियाई बाजारों की चाल निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो इसका असर कई सेक्टरों पर पड़ सकता है जबकि रुपये में मजबूती निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है।

    कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बुधवार के कारोबार में अहम भूमिका निभाएंगे। जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं कमजोर नतीजों वाली कंपनियों के शेयर दबाव में आ सकते हैं। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर पर निवेशकों की विशेष नजर बनी रहेगी क्योंकि इन क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन का सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ता है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना चाहिए और गुणवत्ता वाले शेयरों पर ही फोकस करना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में आने वाले उतार चढ़ाव अवसर भी बन सकते हैं लेकिन अल्पकालिक निवेश करने वालों को जोखिम प्रबंधन के साथ आगे बढ़ना चाहिए। किसी भी खबर के आधार पर भावनात्मक निर्णय लेने के बजाय निवेश से पहले पूरी जानकारी और विश्लेषण करना बेहतर रहेगा।

    बुधवार के कारोबार में बाजार की शुरुआत हल्की तेजी या कमजोरी के साथ हो सकती है लेकिन दिनभर विभिन्न आर्थिक और वैश्विक संकेतों के आधार पर उतार चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी होगा कि वे बाजार की हर गतिविधि पर नजर रखें और सोच समझकर निवेश संबंधी निर्णय लें। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आर्थिक आधार और लंबी अवधि की विकास संभावनाओं के चलते भारतीय शेयर बाजार भविष्य में सकारात्मक प्रदर्शन कर सकता है लेकिन फिलहाल सतर्कता के साथ निवेश करना ही सबसे बेहतर रणनीति मानी जा रही है।

  • जुलाई में शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़े करीब 2 फीसदी; आईटी शेयरों का दबदबा

    जुलाई में शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़े करीब 2 फीसदी; आईटी शेयरों का दबदबा


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार ने जुलाई 2026 में मजबूती का प्रदर्शन किया। घरेलू और वैश्विक बाजारों के उतार-चढ़ाव के बीच प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया। जुलाई महीने में दोनों बेंचमार्क इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। महीने के आखिरी कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 0.21 प्रतिशत की तेजी के साथ 78,094.64 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.27 प्रतिशत बढ़कर 24,383.60 अंक के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

    जुलाई में निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने 2.53 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.81 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि निवेशकों का भरोसा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी।

    आईटी सेक्टर ने मारी बाजी

    जुलाई महीने में सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी सेक्टर सबसे शानदार प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 16.77 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई और यह महीने का सबसे बड़ा गेनर बना। विशेषज्ञों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े वैश्विक रुझानों के बीच आईटी कंपनियों में दोबारा खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा पहली तिमाही के बेहतर नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।

    आईटी के अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 9.96 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 9.49 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 8.67 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 8.55 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। वहीं निफ्टी फार्मा में 4.77 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज में 2.50 प्रतिशत और निफ्टी मेटल में 1.60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    इन सेक्टरों में रही कमजोरी

    जहां कई सेक्टरों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं कुछ क्षेत्रों में दबाव भी देखने को मिला। जुलाई में निफ्टी एनर्जी इंडेक्स 2.54 प्रतिशत गिरावट के साथ सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। इसके अलावा निफ्टी इंडिया डिफेंस में 1.98 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.48 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    इन शेयरों ने निवेशकों को दिया बड़ा फायदा

    जुलाई में कई कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। कल्याण ज्वैलर्स इंडिया के शेयर में 60 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया। इसके अलावा ई-क्लार्क्स सर्विसेज, सीई इन्फो सिस्टम्स, लोढ़ा डेवलपर्स, एचईजी, इन्फो एज (इंडिया), एटीएम, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जैसे शेयरों में भी करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई।

    हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट भी देखने को मिली। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, बंधन बैंक, थर्मैक्स, तेजस नेटवर्क्स, सुजलॉन एनर्जी, जीई वर्नोवा टीएंडडी इंडिया, सीमेंस एनर्जी इंडिया और गुजरात एनर्जी जैसी कंपनियों के बाजार मूल्य में 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

    आगे बाजार की दिशा पर नजर

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई में चुनिंदा शेयरों में तेजी के पीछे कंपनियों के तिमाही नतीजे और आईटी सेक्टर में बढ़ी खरीदारी प्रमुख कारण रहे। वैश्विक स्तर पर एआई से जुड़े शेयरों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय आईटी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों के तिमाही परिणाम, वैश्विक बाजारों की चाल, ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेगा।

  • अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव

    अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। इसी दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

    बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले करीब 250 से 300 अंकों की कमजोरी के साथ खुला जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 80 से 100 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में निवेशकों ने नई खरीदारी से दूरी बनाई और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया जिससे बाजार में दबाव बना रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय वैश्विक घटनाक्रम भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है।

    एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भी मिला जुला रहा। जापान के निक्केई और टॉपिक्स सूचकांक दबाव में रहे जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती गिरावट के बाद संभलता नजर आया। हांगकांग के हैंगसेंग फ्यूचर्स में हल्की मजबूती देखने को मिली लेकिन कुल मिलाकर एशियाई बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रहा। निवेशक फिलहाल किसी बड़े फैसले से पहले वैश्विक घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

    वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। डॉव जोन्स एसएंडपी 500 और नैस्डैक तीनों प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के बावजूद भू राजनीतिक तनाव ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। हालांकि बाद में अमेरिकी फ्यूचर्स में हल्की रिकवरी देखने को मिली लेकिन उसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर नहीं दिखाई दिया।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेने से बचना चाहिए। वैश्विक हालात सामान्य होने तक बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि अल्पकालिक निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और विदेशी बाजारों में स्थिरता लौटती है तो भारतीय शेयर बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर नए संकेत पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

  • सेंसेक्स निफ्टी की आज कैसी रहेगी दिशा बाजार खुलने से पहले जानिए एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति

    सेंसेक्स निफ्टी की आज कैसी रहेगी दिशा बाजार खुलने से पहले जानिए एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में आज का कारोबारी सत्र कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। निवेशकों की नजर एक ओर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी तो दूसरी ओर विदेशी बाजारों की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में फिलहाल सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के संकेत मौजूद हैं इसलिए कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली थी लेकिन मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और निवेशकों का भरोसा अभी भी भारतीय बाजार को सहारा दे रहा है। अगर विदेशी बाजारों से अच्छे संकेत मिलते हैं और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर किसी तरह की अनिश्चितता बढ़ती है तो बाजार दबाव में भी आ सकता है।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी बाजार को ऊपर ले जाने में मदद कर सकती है जबकि आईटी कंपनियों पर अमेरिकी बाजार और डॉलर की चाल का असर देखने को मिल सकता है। ऑटो सेक्टर में बिक्री के आंकड़े और इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों से जुड़ी खबरें निवेशकों की रुचि बढ़ा सकती हैं। फार्मा सेक्टर भी रक्षात्मक निवेश के लिहाज से मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर परिणाम देने वाली कंपनियों में दबाव बन सकता है। ऐसे में केवल अफवाहों के आधार पर निवेश करने के बजाय कंपनियों की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना जरूरी होगा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिक्री पर भी बाजार की नजर रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार निवेश आता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स में होने वाले बदलाव का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई देगा।

    जानकारों का मानना है कि छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी गतिविधि बनी रह सकती है लेकिन इनमें जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। इसलिए निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी के निवेश से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है। वहीं अल्पकालिक निवेश करने वालों को स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए ताकि अचानक आने वाले उतार चढ़ाव से नुकसान सीमित रखा जा सके।

    कुल मिलाकर आज शेयर बाजार में मिश्रित लेकिन सक्रिय कारोबार देखने को मिल सकता है। वैश्विक संकेत यदि अनुकूल रहे तो बाजार मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है लेकिन किसी भी नकारात्मक खबर के चलते दबाव भी बन सकता है। ऐसे में निवेशकों को धैर्य बनाए रखते हुए सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए और केवल विश्वसनीय जानकारी के आधार पर ही निवेश करना चाहिए।

  • फेड के ब्याज दर फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट, वैश्विक दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती

    फेड के ब्याज दर फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट, वैश्विक दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती

    नई दिल्ली । अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के फैसले से अमेरिकी निवेशकों की उम्मीदों को झटका लगा, जिसके चलते अमेरिकी शेयर बाजार में तेज बिकवाली दर्ज की गई। दूसरी ओर, वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत स्थिर शुरुआत की और शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

    अमेरिका में डॉऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज कारोबार के दौरान 1,100 अंकों से अधिक तक फिसल गया। इसके साथ ही नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांकों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को ब्याज दरों को लेकर अधिक स्पष्ट संकेतों की उम्मीद थी, लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा मौजूदा दरों को बरकरार रखने के फैसले ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसके बाद निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

    फेडरल रिजर्व ने अपनी नीति समीक्षा के बाद ब्याज दरों को 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने का निर्णय लिया। केंद्रीय बैंक ने यह संकेत भी दिया कि महंगाई पर पूरी तरह नियंत्रण पाने की प्रक्रिया अभी जारी है और भविष्य के निर्णय आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे। इसी कारण बाजार को निकट भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिल सकी।

    अमेरिकी बाजार में आई गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया, हालांकि विभिन्न देशों के बाजारों में मिश्रित रुख रहा। कुछ प्रमुख एशियाई सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि कुछ बाजारों में हल्की कमजोरी देखने को मिली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अमेरिकी मौद्रिक नीति के संभावित प्रभाव का आकलन करने में जुटे हुए हैं।

    वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत संतुलित प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान के साथ खुले। बाजार में ऑटोमोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि बैंकिंग और रियल एस्टेट क्षेत्र के कुछ शेयरों पर दबाव बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा और भारतीय अर्थव्यवस्था की अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति ने बाजार को शुरुआती समर्थन दिया।

    विदेशी बाजारों की हलचल के बीच भारतीय मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले छह पैसे मजबूत होकर 95.59 के स्तर पर पहुंच गया। मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार की स्थिरता और विदेशी मुद्रा प्रवाह से रुपये को समर्थन मिला, हालांकि वैश्विक घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा काफी हद तक अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान और फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीति पर निर्भर करेगी। वहीं भारतीय बाजार में भी विदेशी निवेश, कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक संकेतकों का असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की निगाहें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार की मजबूती के बीच संतुलन पर बनी हुई हैं।

  • शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

    शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल


    नई दिल्ली । 30 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की चाल कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित हो सकती है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल देखने को मिला है और अब निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों वैश्विक बाजारों की चाल विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी रहेगी। ऐसे में बाजार खुलने से पहले निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किन वजहों से सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो भारतीय बाजार में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता बढ़ती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों को हर खबर पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

    इन दिनों कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर होंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजे देने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बन सकता है। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर निवेशकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने रह सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी करते हैं तो बाजार को मजबूती मिलती है जबकि बिकवाली का असर पूरे बाजार पर दिखाई देता है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती या कमजोरी और रुपये की स्थिति भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करती है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। वहीं तेल की कीमतों में नरमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को किसी भी तेजी या गिरावट में भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए। मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना बेहतर रणनीति मानी जाती है। जिन लोगों की जोखिम उठाने की क्षमता कम है उन्हें एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए। साथ ही पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है ताकि किसी एक सेक्टर में गिरावट आने पर पूरे निवेश पर बड़ा असर न पड़े।

    30 जुलाई का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए कई नए अवसर लेकर आ सकता है लेकिन बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रहना भी उतना ही जरूरी होगा। सही जानकारी मजबूत रिसर्च और धैर्य के साथ लिया गया निवेश निर्णय भविष्य में बेहतर रिटर्न देने में मदद कर सकता है।

  • गिरावट के बाद शेयर बाजार की दमदार वापसी, सेंसेक्स 889 अंक उछला, निफ्टी 24,250 के पार बंद

    गिरावट के बाद शेयर बाजार की दमदार वापसी, सेंसेक्स 889 अंक उछला, निफ्टी 24,250 के पार बंद

    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को जोरदार वापसी करते हुए निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट के बाद घरेलू बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली, जिसके चलते बीएसई सेंसेक्स 889.68 अंकों की बढ़त के साथ 77,654.60 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 264.85 अंकों की छलांग लगाकर 24,250.20 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।

    कारोबार की शुरुआत भी सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से करीब 658 अंक ऊपर खुला और कारोबार के दौरान एक समय लगभग 1,000 अंकों तक उछल गया। इसी तरह निफ्टी ने भी मजबूत शुरुआत की और दिन के दौरान 24,283.55 के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सफल रहा। बाजार में लगातार बनी खरीदारी ने दिन के अंत तक तेजी का माहौल कायम रखा।

    बाजार में आई तेजी का सबसे बड़ा आधार आईटी शेयर रहे, जिनमें मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा फार्मा, मेटल, मीडिया, टेलीकॉम, एफएमसीजी, प्राइवेट बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। केवल रियल एस्टेट सेक्टर दबाव में रहा और लाल निशान में बंद हुआ। व्यापक बाजारों में भी सकारात्मक माहौल दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में करीब 0.82 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 1.48 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही।

    प्रमुख कंपनियों की बात करें तो जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंफोसिस, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली। दूसरी ओर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पावर ग्रिड, आयशर मोटर्स, बजाज ऑटो, बीईएल, ओएनजीसी और एचडीएफसी लाइफ के शेयर दबाव में रहे और इनमें हल्की गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार की इस तेजी का सीधा फायदा निवेशकों को भी मिला। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक ही कारोबारी सत्र में करीब 4 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। इसके साथ ही कुल मार्केट कैप बढ़कर 483 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। इससे यह साफ हुआ कि व्यापक स्तर पर निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत हुआ है और खरीदारी का रुझान बढ़ा है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की गिरावट के बाद निवेशकों ने आकर्षक स्तरों पर खरीदारी की, जिससे बाजार को मजबूती मिली। विशेषज्ञों के अनुसार इसे वैल्यू बाइंग का संकेत माना जा सकता है। हालांकि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक कंपनियों के तिमाही नतीजों, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और कॉरपोरेट नतीजे उम्मीद के अनुरूप आते हैं, तो बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है।