Tag: Sensex

  • शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 650 अंक उछला, निफ्टी 24,000 के पार; वैश्विक संकेतों से निवेशकों का बढ़ा भरोसा

    शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 650 अंक उछला, निफ्टी 24,000 के पार; वैश्विक संकेतों से निवेशकों का बढ़ा भरोसा


    नई दिल्ली ।
    सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का उत्साह बढ़ा दिया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बढ़े भरोसे के बीच घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत में बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स लगभग 650 अंकों की तेजी के साथ 78 हजार के स्तर को पार कर गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 24 हजार के ऊपर पहुंचकर मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।

    विश्लेषकों के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए हालिया आर्थिक संकेत रहे। जून महीने के रोजगार आंकड़े अपेक्षा से कमजोर रहने के बाद निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में और बढ़ोतरी से बच सकता है। इससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी और उभरते बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार को भी इसका सकारात्मक लाभ मिला।

    बाजार खुलते ही विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटो, पूंजीगत वस्तुओं और चुनिंदा आईटी कंपनियों के शेयरों ने शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की। निवेशकों का रुझान मजबूत कंपनियों और बड़े बाजार पूंजीकरण वाले शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ प्रमुख बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि अन्य में सीमित बढ़त रही। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण मजबूती दिखाई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की धारणा में सुधार भी बाजार की तेजी को समर्थन दे रहा है।

    अमेरिकी शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिश्रित प्रदर्शन देखने को मिला। प्रमुख औद्योगिक सूचकांक ने नए रिकॉर्ड स्तर को छुआ, जबकि तकनीकी क्षेत्र के कुछ शेयरों में दबाव रहा। इसके बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े ताजा आंकड़ों ने निवेशकों के बीच यह उम्मीद बढ़ाई कि आगे चलकर ब्याज दरों को लेकर राहत मिल सकती है, जिसका सकारात्मक असर वैश्विक निवेश भावना पर पड़ा है।

    अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी भारतीय बाजार के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। कच्चे तेल के दाम नियंत्रित रहने से आयात लागत और महंगाई के दबाव में कमी आने की संभावना रहती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट आय पर पड़ सकता है। यही कारण है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी को भी बाजार के लिए अनुकूल कारक माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, विदेशी निवेश प्रवाह और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेत मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन की मजबूत शुरुआत ने निवेशकों के विश्वास को नई मजबूती प्रदान की है।

  • शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 395 अंक और निफ्टी 122 अंक चढ़ा

    शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 395 अंक और निफ्टी 122 अंक चढ़ा


    नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार ने बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की खरीदारी से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में अच्छी तेजी देखने को मिली। बीच-बीच में मुनाफावसूली के चलते हल्की बिकवाली जरूर हुई, लेकिन बाजार पर खरीदारी का दबदबा बना रहा।

    कारोबार के पहले घंटे के बाद सुबह 10:15 बजे बीएसई सेंसेक्स 395.44 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,874.11 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी 122.15 अंक यानी 0.51 प्रतिशत चढ़कर 23,987.90 अंक के स्तर पर पहुंच गया।

    सेंसेक्स ने 66.54 अंकों की बढ़त के साथ 76,545.21 अंक पर कारोबार की शुरुआत की थी। शुरुआती खरीदारी के दम पर सूचकांक लगातार ऊपर बढ़ता गया, हालांकि बीच-बीच में मुनाफावसूली का असर भी देखने को मिला। इसके बावजूद बाजार की सकारात्मक धारणा कायम रही।

    इसी तरह निफ्टी ने 31.90 अंकों की बढ़त के साथ 23,897.65 अंक पर ओपनिंग की। कारोबार के दौरान यह करीब 10 बजे 23,996.40 अंक तक पहुंच गया और बाद में मामूली उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती के साथ कारोबार करता रहा।

    शुरुआती कारोबार में महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, नेस्ले, हिंदुस्तान यूनिलीवर और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। इनमें करीब 2.01 प्रतिशत से 2.99 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई।

    वहीं दूसरी ओर टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एचसीएल टेक्नोलॉजी, डॉ. रेड्डीज लेबोरेट्रीज और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इन शेयरों में 0.77 प्रतिशत से 2.08 प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई।

    बाजार की चौड़ाई भी सकारात्मक रही। शुरुआती एक घंटे में 2,732 शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें 1,837 शेयर बढ़त के साथ हरे निशान में रहे, जबकि 895 शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

    सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 19 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 11 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी के 50 शेयरों में से 30 बढ़त और 20 गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

    गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। बीएसई सेंसेक्स 249.70 अंक (0.33 प्रतिशत) टूटकर 76,478.67 अंक पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 80.50 अंक (0.34 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 23,865.75 अंक पर बंद हुआ था।

  • तेल सस्ता तो बाजार मजबूत: निफ्टी-सेंसेक्स ने तीसरे सप्ताह भी दिखाई तेजी, आगे इन आंकड़ों पर रहेगी नजर

    तेल सस्ता तो बाजार मजबूत: निफ्टी-सेंसेक्स ने तीसरे सप्ताह भी दिखाई तेजी, आगे इन आंकड़ों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने लगातार तीसरे सप्ताह मजबूती का प्रदर्शन करते हुए निवेशकों का भरोसा कायम रखा। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट और पश्चिम एशिया में भू राजनीतिक तनाव कम होने से बाजार को मजबूत समर्थन मिला। इसके साथ ही भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते की उम्मीदों ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन निफ्टी और सेंसेक्स दोनों बढ़त के साथ बंद हुए और पूरे सप्ताह बाजार सकारात्मक दायरे में बना रहा।

    साप्ताहिक कारोबार के दौरान निफ्टी में 0.18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई जबकि अंतिम कारोबारी सत्र में यह 24 हजार 56 अंक पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 109 अंक की बढ़त के साथ 77 हजार 100 अंक पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह सेंसेक्स में करीब 0.39 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। हालांकि प्रमुख सूचकांकों की मजबूती के बीच व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य होते हालात से कच्चे तेल की कीमतें फिर से युद्ध पूर्व स्तर के करीब पहुंच गई हैं। इसका सीधा फायदा भारत जैसे तेल आयातक देशों को मिल रहा है। सस्ता कच्चा तेल महंगाई पर दबाव कम करता है और चालू खाते के घाटे तथा राजकोषीय स्थिति को भी बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक के लिए मौद्रिक नीति में लचीलापन बनाए रखने की संभावना मजबूत होती है।

    इस सप्ताह सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। निजी बैंकों के शेयरों को भी आरबीआई की एफसीएनआर जमा स्वैप योजना से जुड़ी स्पष्टता का लाभ मिला। दूसरी ओर धातु क्षेत्र के शेयरों पर कमोडिटी कीमतों में गिरावट का असर दिखाई दिया जबकि उपभोक्ता मांग को लेकर बनी चिंताओं के कारण कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी दबाव में रहा।

    हालांकि बाजार के लिए कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में मानसून का असमान वितरण कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकता है जिससे महंगाई बढ़ने का जोखिम बना रहेगा। इसके बावजूद निवेशकों का रुझान फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है।

    तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निकट भविष्य में निफ्टी के लिए 24 हजार 400 और 24 हजार 500 अंक प्रमुख प्रतिरोध स्तर रहेंगे जबकि 23 हजार 900 और 23 हजार 800 अंक मजबूत समर्थन माने जा रहे हैं। बैंक निफ्टी के लिए 57 हजार 500 से 57 हजार 400 का दायरा सपोर्ट और 58 हजार 900 से 59 हजार का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

    आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों पर रहेगी। इसके साथ ही अमेरिका के पीसीई महंगाई आंकड़े नॉन फार्म पेरोल बेरोजगारी दर तथा भारत के औद्योगिक उत्पादन और जून महीने के पीएमआई आंकड़े भी बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में लंबी अवधि के निवेश के अवसर अभी भी बने हुए हैं।

  • दिनभर की मजबूत तेजी के बाद बाजार ने संभाली बढ़त, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद; ऑटो शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

    दिनभर की मजबूत तेजी के बाद बाजार ने संभाली बढ़त, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद; ऑटो शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती घंटों में बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ आगे बढ़े, हालांकि दिन के अंतिम चरण में मुनाफावसूली और कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के दबाव के कारण बढ़त सीमित हो गई। इसके बावजूद बाजार हरे निशान में बंद होने में सफल रहा, जिससे निवेशकों का भरोसा कायम रहने के संकेत मिले।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 109 अंक की बढ़त के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी 34 अंकों की मजबूती के साथ 24,056 के स्तर पर पहुंच गया। सुबह के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने तेज रफ्तार दिखाई थी और एक समय सेंसेक्स 77,800 के पार तथा निफ्टी 24,260 के ऊपर पहुंच गया था। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ा और शुरुआती बढ़त का बड़ा हिस्सा कम हो गया।

    बाजार की शुरुआत सकारात्मक वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच हुई थी। निवेशकों ने ऑटो, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी दिखाई, जिससे सूचकांकों को मजबूती मिली। हालांकि आईटी, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार को सीमित कर दिया। इन क्षेत्रों में कमजोरी के कारण दिन के अंतिम घंटों में बाजार पर दबाव बढ़ा।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑटो सेक्टर सबसे मजबूत रहा। वाहन कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। उद्योग जगत का मानना है कि कच्चे माल की लागत में कमी, सप्लाई चेन की स्थिति में सुधार और उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी से ऑटो कंपनियों के प्रदर्शन को समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा एफएमसीजी और रियल्टी क्षेत्र ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया।

    दूसरी ओर आईटी और धातु क्षेत्र के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर बनी अनिश्चितता और निर्यात आधारित कंपनियों पर संभावित असर के कारण निवेशकों ने इन क्षेत्रों में सतर्क रुख अपनाया। कुछ बड़े आईटी और मेटल शेयरों में कमजोरी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।

    वृहद बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जिससे दोनों सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा बड़े और मजबूत शेयरों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं, जबकि छोटे शेयरों में सतर्कता बरती जा रही है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम बनी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार विदेशी बिकवाली तेजी की गति को सीमित कर सकती है। हालांकि घरेलू निवेशकों की सक्रिय भागीदारी फिलहाल बाजार को समर्थन दे रही है।

    इस बीच भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले बढ़त के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को सहारा दिया है, जिससे आयात लागत और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर पहली तिमाही के कारोबारी नतीजों, मानसून की प्रगति और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। यदि ये कारक अनुकूल रहते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है, हालांकि उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • कच्चे तेल में नरमी से शेयर बाजार को मिला नया दम, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, आईटी और रियल्टी शेयरों में बढ़ी चमक

    कच्चे तेल में नरमी से शेयर बाजार को मिला नया दम, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, आईटी और रियल्टी शेयरों में बढ़ी चमक

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत दर्ज की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का भरोसा बढ़ने से प्रमुख सूचकांक तेजी के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में आईटी, रियल्टी और बैंकिंग क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान प्रमुख रूप से देखने को मिला, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा और कारोबारी माहौल सकारात्मक बना रहा।

    कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल करते हुए ऊंचे स्तर पर कारोबार किया, जबकि निफ्टी भी मजबूती के साथ आगे बढ़ा। शुरुआती घंटों में बाजार की चाल से यह संकेत मिला कि निवेशक घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा बाजार में स्थिरता और तेल कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दे रहा है।

    बाजार में सबसे अधिक मजबूती सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों में देखने को मिली। आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से इस क्षेत्र का सूचकांक तेजी से ऊपर गया। वहीं रियल एस्टेट क्षेत्र में भी निवेशकों की सक्रियता बढ़ी, जिससे संबंधित कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान दिखाई दिया।

    लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। व्यापक बाजार में खरीदारी के संकेत इस बात को दर्शाते हैं कि तेजी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, व्यापक भागीदारी किसी भी तेजी को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में रहे। एशियाई बाजारों में अधिकांश प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इससे निवेशकों की धारणा को समर्थन मिला। हालांकि कुछ बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला, फिर भी क्षेत्रीय स्तर पर जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सुधार का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचना भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। तेल कीमतों में कमी से आयात बिल पर दबाव घट सकता है, जिससे चालू खाता घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला दबाव कम होने से महंगाई को नियंत्रित रखने में भी सहायता मिल सकती है।

    अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक नियंत्रित रहती हैं तो इसका लाभ आर्थिक विकास दर पर भी दिखाई दे सकता है। कम लागत वाले आर्थिक माहौल में उद्योगों की लाभप्रदता बढ़ सकती है और निवेश गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। यही वजह है कि बाजार ने तेल कीमतों में आई गिरावट को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।

    फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की दिशा और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है। गुरुवार की शुरुआती तेजी ने यह संकेत जरूर दिया है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल मजबूत बना हुआ है और बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहा है।

  • गिरावट के बाद शेयर बाजार की शानदार वापसी, आईटी और बैंकिंग शेयरों ने भरी रफ्तार; निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    गिरावट के बाद शेयर बाजार की शानदार वापसी, आईटी और बैंकिंग शेयरों ने भरी रफ्तार; निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    नई दिल्ली । पिछले कारोबारी सत्र की कमजोरी को पीछे छोड़ते हुए भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को शानदार वापसी दर्ज की। दिनभर खरीदारी का मजबूत रुख देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों की सकारात्मक भागीदारी और प्रमुख क्षेत्रों में खरीदारी के कारण बाजार ने एक बार फिर मजबूती का संकेत दिया। सेंसेक्स में करीब 800 अंकों की तेजी दर्ज हुई, जबकि निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार करने में सफल रहा।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 790.54 अंकों की बढ़त के साथ 76,991.22 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 197.55 अंक चढ़कर 24,021.65 पर पहुंच गया। बाजार की शुरुआत भी सकारात्मक रही और दिनभर निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर बना रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 77,190.37 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,090.05 तक पहुंच गया।

    बाजार में तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी निवेशकों ने सक्रियता दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा विभिन्न वर्गों के शेयरों में बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि व्यापक स्तर पर निवेशकों की भागीदारी बाजार की मजबूती का सकारात्मक संकेत मानी जाती है।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन दोनों क्षेत्रों के सूचकांकों में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर ऑटोमोबाइल और धातु क्षेत्र के कुछ शेयरों में दबाव दिखाई दिया, जिसके कारण इन सेक्टरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    दिनभर के कारोबार में कई प्रमुख कंपनियों के शेयर निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। एविएशन, वित्तीय सेवाओं और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में मजबूत तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत ऊर्जा और धातु क्षेत्र की कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। हालांकि इन चुनिंदा शेयरों की कमजोरी बाजार की समग्र तेजी को प्रभावित नहीं कर सकी।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों द्वारा की गई खरीदारी ने बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। तकनीकी चार्ट पर निफ्टी ने मजबूत तेजी का संकेत देने वाला पैटर्न बनाया है, जिससे निकट भविष्य में बाजार की दिशा को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमुख सूचकांक का महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर बने रहना निवेशकों के विश्वास को मजबूत करता है।

    तकनीकी विश्लेषण के आधार पर निफ्टी ने एक बार फिर अपने महत्वपूर्ण औसत स्तर के ऊपर जगह बनाई है। साथ ही बाजार की गति को मापने वाले प्रमुख संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि हालिया करेक्शन के बाद बाजार में खरीदारी की वापसी हो रही है और निवेशकों का रुझान फिर से सकारात्मक बना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 24,140 से 24,170 के बीच का क्षेत्र महत्वपूर्ण प्रतिरोध साबित हो सकता है। यदि सूचकांक इस दायरे को पार कर स्थिरता बनाए रखने में सफल रहता है तो आगे और तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 23,900 से 23,870 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। जब तक निफ्टी इस दायरे के ऊपर बना रहेगा, तब तक बाजार की समग्र धारणा सकारात्मक रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

  • आज बाजार में अस्थिरता के आसार, 22 जून को रह सकता है शेयर मार्केट में दबाव और रिकवरी दोनों

    आज बाजार में अस्थिरता के आसार, 22 जून को रह सकता है शेयर मार्केट में दबाव और रिकवरी दोनों


    नई दिल्ली । सप्ताह की शुरुआत में निवेशक आमतौर पर सतर्क रुख अपनाते हैं। ग्लोबल मार्केट से मिले संकेतों के आधार पर सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की बढ़त या गिरावट दोनों ही देखने को मिल सकती है। यदि अमेरिकी और एशियाई बाजारों में मजबूती रहती है तो भारतीय बाजार में भी सकारात्मक शुरुआत संभव है।

    बैंकिंग और IT सेक्टर पर नजर
    बाजार में बैंकिंग और IT सेक्टर हमेशा प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो इन सेक्टरों में तेजी देखी जा सकती है। वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की हलचल बनी रह सकती है।

    वैश्विक संकेत तय करेंगे दिशा
    कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर इंडेक्स बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर कच्चे तेल में तेजी आती है तो भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, विदेशी बाजारों में स्थिरता या तेजी से घरेलू बाजार को समर्थन मिल सकता है।

     निवेशकों के लिए सावधानी जरूरी
    विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे समय में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। छोटे समय के ट्रेड में जोखिम अधिक हो सकता है, इसलिए स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है।

    कुल मिलाकर 22 जून को शेयर बाजार में हल्की तेजी के साथ उतार-चढ़ाव का माहौल रह सकता है। बाजार किसी एक दिशा में मजबूत ट्रेंड बनाने से पहले वैश्विक संकेतों का इंतजार कर सकता है।

  • अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से शेयर बाजार में लौटी मजबूती, लगातार दूसरे सप्ताह निफ्टी और सेंसेक्स ने दिखाई दमदार बढ़त

    अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से शेयर बाजार में लौटी मजबूती, लगातार दूसरे सप्ताह निफ्टी और सेंसेक्स ने दिखाई दमदार बढ़त

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भारतीय शेयर बाजार को सप्ताहभर सकारात्मक दिशा प्रदान की। निवेशकों के बीच बढ़े भरोसे का असर यह रहा कि प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज करने में सफल रहे। हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन पूरे सप्ताह का प्रदर्शन निवेशकों के लिए उत्साहजनक रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया। इससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता में राहत मिली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। इसी का लाभ भारतीय बाजार को भी मिला, जहां निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में जमकर खरीदारी की।

    सप्ताह के दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने मजबूत प्रदर्शन किया। हालांकि अंतिम कारोबारी सत्र में आईटी शेयरों में बिकवाली और निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूली के कारण बाजार पर दबाव देखने को मिला। इसके बावजूद पूरे सप्ताह का रुख सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक उल्लेखनीय बढ़त के साथ बंद हुए। इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार में कायम है।

    कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी बाजार को महत्वपूर्ण समर्थन दिया। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में गिरावट का सीधा असर उन अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करती हैं। भारत के लिए यह स्थिति महंगाई नियंत्रण, व्यापार संतुलन और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से सकारात्मक मानी जाती है। इसी कारण निवेशकों ने कई क्षेत्रों में सक्रियता दिखाई।

    सप्ताह के दौरान भारतीय मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति बेहतर होने से विदेशी निवेशकों के दृष्टिकोण में सुधार देखा गया। वित्तीय बाजारों में मुद्रा की स्थिरता को निवेश के लिए अनुकूल संकेत माना जाता है और इसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखाई दिया।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु, रियल एस्टेट, फार्मा और रक्षा क्षेत्र के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और इस क्षेत्र ने सप्ताह के दौरान उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की। मजबूत ऑर्डर बुक, दीर्घकालिक विकास संभावनाएं और सरकारी नीतिगत समर्थन इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

    इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में रहा। वैश्विक स्तर पर तकनीकी सेवाओं की मांग को लेकर जारी चिंताओं और कमजोर कारोबारी अनुमानों के कारण आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इससे संबंधित सूचकांक सप्ताह के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।

    मौद्रिक नीति के मोर्चे पर भी निवेशकों की नजरें बनी हुई हैं। प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाए जा रहे सतर्क रुख के कारण ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं भारत में भी नीति निर्माताओं का दृष्टिकोण फिलहाल संतुलित और सावधानीपूर्ण माना जा रहा है।

    आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मानसून की प्रगति, कृषि क्षेत्र की गतिविधियों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। विशेष रूप से खरीफ फसलों की बुआई और ग्रामीण मांग से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव में और कमी आती है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की सतर्क निगाह बनी रहेगी।

  • वैश्विक अनिश्चितता और आईटी सेक्टर पर दबाव का असर, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

    वैश्विक अनिश्चितता और आईटी सेक्टर पर दबाव का असर, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

    नई दिल्ली । सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांकों ने उल्लेखनीय गिरावट के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक आर्थिक संकेतों, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता के रद्द होने तथा आईटी सेक्टर में बढ़ी बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन अंतिम घंटों में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक टूटकर 76 हजार के स्तर के आसपास बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 24 हजार के महत्वपूर्ण स्तर के करीब फिसल गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के सप्ताहों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे कई बड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया।

    बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों की ओर से मिले कमजोर संकेतों और भविष्य के कारोबार को लेकर सतर्क अनुमान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके परिणामस्वरूप भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली दर्ज की गई। सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे आईटी सूचकांक दिन के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।

    जानकारों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं और तकनीकी निवेश से जुड़ी वैश्विक मांग को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं। यही कारण है कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने तकनीकी शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाने का फैसला किया। इसका सीधा असर बाजार के समग्र प्रदर्शन पर पड़ा।

    हालांकि, बाजार में हर तरफ निराशा का माहौल नहीं था। हेल्थकेयर, फार्मा, रक्षा, ऊर्जा और धातु क्षेत्रों से जुड़े कुछ शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इन सेक्टरों ने निवेशकों को सीमित राहत प्रदान की और बाजार में गिरावट को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद की। सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश में कई निवेशकों ने इन क्षेत्रों की ओर रुख किया।

    दिलचस्प बात यह रही कि बड़े शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। दोनों श्रेणियों के सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे यह संकेत मिला कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी चुनिंदा कंपनियों और विकास आधारित क्षेत्रों में बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक और निवेश गतिविधियां इन वर्गों को समर्थन प्रदान कर रही हैं।

    अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता रद्द होने की खबर ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी सतर्कता बढ़ा दी। निवेशकों को आशंका है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का प्रभाव भारतीय बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम, मानसून की प्रगति, कॉर्पोरेट नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव और सतर्क कारोबार का माहौल जारी रह सकता है।

  • बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार लाल निशान में खुला, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार लाल निशान में खुला, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांच कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला शुक्रवार को थम गया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में पहुंच गए। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया और निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स सैकड़ों अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। शुरुआती घंटे में गिरावट और गहरी होती गई तथा सेंसेक्स में 700 अंकों से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं निफ्टी भी लगभग एक प्रतिशत तक टूटकर कारोबार करता दिखाई दिया। हाल के दिनों में बाजार में बनी मजबूत तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने को भी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली के कारण संबंधित सूचकांक में तेज गिरावट दर्ज की गई। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में कमजोर रहे और कई दिग्गज कंपनियां टॉप लूजर्स की सूची में शामिल हो गईं। वैश्विक आईटी उद्योग से जुड़े संकेतों और भविष्य के कारोबारी अनुमानों में नरमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जिसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया।

    आईटी क्षेत्र के अलावा रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, धातु और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान बना रहा। इसके बावजूद व्यापक बाजार पर बिकवाली का दबाव हावी रहा और अधिकांश सेक्टर नकारात्मक दायरे में कारोबार करते दिखाई दिए।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, हालांकि इनकी कमजोरी बड़े सूचकांकों की तुलना में सीमित रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूलना एक सामान्य प्रक्रिया है। उनके अनुसार बाजार की दीर्घकालिक तस्वीर अभी भी सकारात्मक बनी हुई है और मौजूदा गिरावट को बड़े रुझान में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कई बुनियादी संकेतक अभी भी मजबूत बने हुए हैं। महंगाई पर नियंत्रण, आर्थिक गतिविधियों में सुधार और ऊर्जा कीमतों में नरमी जैसे कारक बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    वैश्विक स्तर पर भी मिले-जुले संकेत देखने को मिले। अधिकांश एशियाई बाजार दबाव में कारोबार करते रहे, जबकि अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहने से भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलने की संभावना बनी हुई है। इससे भविष्य में महंगाई और लागत दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की रणनीति और सेक्टर आधारित प्रदर्शन आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को संतुलित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है।