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  • कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी की चिंताओं ने निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 366.36 अंक यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 73,343.33 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने 123.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,687.75 के स्तर पर कारोबार शुरू किया।

    कारोबार के दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ा। सेंसेक्स दिन के शुरुआती कारोबार में 73,005.11 के निचले स्तर तक पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी 50 ने 22,554.85 का न्यूनतम स्तर छुआ। निफ्टी में 22,700 का स्तर टूटने से बाजार की कमजोरी को लेकर चिंता बढ़ी। व्यापक बाजार में भी गिरावट देखने को मिली और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयर दबाव में रहे।

    निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.04 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 0.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। क्षेत्रवार कारोबार में ऑटोमोबाइल, धातु और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखाई दी। निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी हेल्थकेयर सूचकांकों में 0.98 प्रतिशत तक की गिरावट रही। निफ्टी फार्मा भी 0.78 प्रतिशत कमजोर हुआ। इसके अलावा एफएमसीजी, रियल्टी, सीमेंट और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में बड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तुलना में बेहतर रहा है। व्यापक बाजार में ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंताएं बढ़ने के कारण निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत आकर्षक मूल्यांकन वाले बड़े शेयरों की ओर हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के समय में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तेजी को कंपनियों की कमाई के बजाय बाजार में उपलब्ध तरलता से भी समर्थन मिला था। ऐसे में ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों में सुधार की संभावना बनी हुई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड वायदा एक प्रतिशत से अधिक चढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तेल महंगा होने से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर निवेशकों की कारोबारी धारणा पर पड़ सकता है।

    तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,590 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो बाजार में सुधार की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि, तेजी के मजबूत संकेत के लिए निफ्टी का 22,840 के स्तर से ऊपर लौटना जरूरी बताया गया। हालिया गिरावट और 22,700 के स्तर के नीचे कारोबार ने बाजार में संभावित सुधार को लेकर सतर्कता बढ़ाई है।

    इस बीच, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 1,022 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी करीब 1,614 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। इसके बावजूद शुरुआती कारोबार में बाजार गिरावट से नहीं उबर सका।

    एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में दो प्रतिशत तक गिर गए। इसके विपरीत, अमेरिकी बाजारों में बुधवार को तेजी दर्ज की गई थी। प्रौद्योगिकी शेयरों में मजबूती के कारण नैस्डैक लगभग एक प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त रही। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों के बेहतर कारोबारी नतीजों ने अमेरिकी बाजारों को समर्थन दिया था।

  • शेयर बाजार में भारी बिकवाली, सेंसेक्स 876 अंक टूटा और निफ्टी 23 हजार के स्तर से नीचे फिसला

    शेयर बाजार में भारी बिकवाली, सेंसेक्स 876 अंक टूटा और निफ्टी 23 हजार के स्तर से नीचे फिसला


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों और प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में मुनाफावसूली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 876.37 अंक यानी 1.17 प्रतिशत टूटकर 73,852.90 पर आ गया। वहीं, निफ्टी 257.20 अंक यानी 1.11 प्रतिशत गिरकर 22,888.95 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ निफ्टी 23,000 के मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया।

    सोमवार के कारोबार में बाजार के ज्यादातर प्रमुख क्षेत्रों में कमजोरी रही। निजी बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, एफएमसीजी और आईटी शेयरों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों की बिकवाली का असर बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के सूचकांकों पर भी पड़ा। बाजार में व्यापक गिरावट से संकेत मिला कि निवेशक वैश्विक परिस्थितियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा। यह 1.85 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.58 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 1.44 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 1.28 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी सर्विसेज 1.25 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.20 प्रतिशत और निफ्टी कंजप्शन 1.05 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निफ्टी इंडिया डिफेंस में भी 0.94 प्रतिशत की गिरावट रही।

    बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच निफ्टी पीएसयू बैंक एकमात्र ऐसा प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक रहा, जिसने तेजी दर्ज की। यह 2.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मार्जिन और एसेट क्वालिटी स्थिर रहने की उम्मीदों से समर्थन मिला। इसके विपरीत, निजी बैंकों में तिमाही नतीजों और मुनाफे के मार्जिन को लेकर चिंताओं के कारण दबाव बना रहा।

    बड़ी कंपनियों के अलावा मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 641.80 अंक यानी 1.09 प्रतिशत टूटकर 58,487.95 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 194.05 अंक यानी 1.01 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 18,935.75 पर आ गया। इससे स्पष्ट हुआ कि बिकवाली का असर बाजार के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिला।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में भारतीय स्टेट बैंक, अदाणी पोर्ट्स, एलएंडटी और इंडिगो बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एनटीपीसी और एचडीएफसी बैंक समेत कई प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक, आईटीसी, टाइटन, टेक महिंद्रा, एमएंडएम और पावर ग्रिड भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    वैश्विक बाजार की परिस्थितियों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। अमेरिका की ओर से रूस से जुड़े प्रमुख प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने की बात कही गई। इससे वैश्विक बाजार में रूसी ईंधन की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बनी। हालांकि, भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

    कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, निजी बैंकिंग और आईटी शेयरों में बिकवाली तथा तिमाही नतीजों को लेकर बनी चिंताओं के बीच बाजार दबाव में रहा। निफ्टी का 23,000 से नीचे बंद होना और मिडकैप-स्मॉलकैप में गिरावट निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है।

  • अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे तिमाही नतीजे, विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव

    अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे तिमाही नतीजे, विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला सप्ताह कई अहम संकेत लेकर आने वाला है। सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। पिछले सप्ताह प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई थी। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह तेजी आगे भी जारी रहती है या बाजार में एक बार फिर दबाव देखने को मिलता है।

    बीते सप्ताह निफ्टी 50 में 2.77 प्रतिशत और सेंसेक्स में 3.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में नई खरीदारी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड के दबाव में कमी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को समर्थन दिया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भी दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार दूसरे सत्र में तेजी रही। इससे हालिया गिरावट के बाद बाजार में आई रिकवरी को मजबूती मिली।

    शुक्रवार को सेंसेक्स 413.66 अंक यानी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,729.27 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 148.80 अंक यानी 0.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,146.15 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 2,256.94 अंक और निफ्टी में 625.7 अंक की बढ़त रही। अब बाजार की नजर इस तेजी के आगे बने रहने की संभावनाओं पर है।

    अगले सप्ताह सितंबर तिमाही के नतीजे निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक होंगे। बाजार यह आकलन करेगा कि हालिया तेजी केवल आईटी शेयरों तक सीमित रहती है या बैंकिंग, उपभोक्ता और औद्योगिक क्षेत्रों में भी खरीदारी का रुझान दिखाई देता है। कंपनियों के राजस्व, मुनाफे, मार्जिन और मांग की स्थिति से जुड़े आंकड़ों पर खास ध्यान दिया जाएगा।

    कंपनियों के प्रबंधन की टिप्पणियां और आने वाली तिमाहियों के लिए जारी किया जाने वाला कारोबारी मार्गदर्शन भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकता है। बेहतर नतीजे और सकारात्मक भविष्य के संकेत शेयरों में खरीदारी बढ़ा सकते हैं। इसके विपरीत, कमजोर वित्तीय प्रदर्शन या कारोबार को लेकर सतर्क अनुमान निवेशकों को सावधानी बरतने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई का रुख भी बाजार के लिए अहम रहेगा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कुछ कमी आने से बाजार को राहत मिली है, लेकिन आगे उनकी गतिविधियों पर नजर बनी रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली दोबारा बढ़ती है, तो प्रमुख सूचकांकों पर दबाव आ सकता है। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की लगातार खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।

    वैश्विक बॉन्ड यील्ड में होने वाला बदलाव भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत होगा। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयरों का मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है, क्योंकि निवेशकों के लिए निश्चित आय वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इसके विपरीत, बॉन्ड यील्ड में नरमी आने पर जोखिम वाले निवेश विकल्पों में रुचि बढ़ने की संभावना रहती है। मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदें भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।

    कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत और लाभ मार्जिन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। वहीं, वैश्विक तनाव बढ़ने से वित्तीय बाजारों में अस्थिरता आ सकती है।

    कुल मिलाकर, अगले सप्ताह शेयर बाजार में कंपनियों के नतीजों और घरेलू-वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच निवेशकों की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी। बीते सप्ताह की तेजी के बाद बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है, यह काफी हद तक इन कारकों से मिलने वाले संकेतों पर निर्भर करेगा।

  • एलटीसीजी टैक्स हटाने पर चर्चा से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 1,109 अंक उछला और निफ्टी 22,721 के पार पहुंचा

    एलटीसीजी टैक्स हटाने पर चर्चा से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 1,109 अंक उछला और निफ्टी 22,721 के पार पहुंचा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को जोरदार तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान प्रमुख सूचकांकों में मजबूत बढ़त देखने को मिली। सेंसेक्स 1,109.10 अंक यानी 1.54 प्रतिशत चढ़कर 73,033.78 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 358.60 अंक यानी 1.60 प्रतिशत की तेजी के साथ 22,721.95 पर बंद हुआ। बाजार में खरीदारी का प्रमुख केंद्र आईटी शेयर रहे। इसके साथ ही अन्य क्षेत्रों के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली।

    बाजार के प्रदर्शन में आईटी क्षेत्र सबसे आगे रहा। निफ्टी आईटी सूचकांक 5.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन का सबसे बड़ा लाभ दर्ज करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक बना। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल में भी तेजी दर्ज की गई। ज्यादातर क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में रहे, जबकि निफ्टी फार्मा लगभग बिना बदलाव के बंद हुआ।

    बड़ी कंपनियों के शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप श्रेणियों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 624.65 अंक यानी 1.06 प्रतिशत बढ़कर 59,459.20 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 21.60 अंक यानी 0.11 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 19,447.40 पर बंद हुआ। इन आंकड़ों से बाजार की विभिन्न श्रेणियों में सकारात्मक रुख दिखाई दिया, हालांकि स्मॉलकैप शेयरों में बढ़त तुलनात्मक रूप से सीमित रही।

    सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा और इन्फोसिस समेत कई प्रमुख शेयरों में तेजी रही। हिंदुस्तान यूनिलीवर, ट्रेंट, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, टाइटन, बीईएल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, एसबीआई, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और अदाणी पोर्ट्स भी बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी और इटरनल के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स यानी एलटीसीजी टैक्स को लेकर सामने आई चर्चा रही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि बजट से संबंधित बातचीत के दौरान सरकार एलटीसीजी टैक्स हटाने को लेकर लोगों की राय जानना चाहती है। इक्विटी निवेश पर लगने वाले कर को लेकर निवेशकों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बीच इस बयान को बाजार की धारणा से जोड़कर देखा गया। हालांकि, टैक्स हटाने के किसी अंतिम फैसले की जानकारी नहीं दी गई।

    इसके अतिरिक्त, प्रौद्योगिकी कंपनियों की उम्मीद से बेहतर कमाई ने कॉर्पोरेट मुनाफे में बढ़ोतरी को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। इससे बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी को समर्थन मिला। रुपये में स्थिरता और बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई। इन परिस्थितियों के बीच वित्तीय क्षेत्र के शेयरों पर भी निवेशकों का ध्यान बढ़ा।

    मंगलवार के कारोबार में आईटी शेयरों की अगुवाई, एलटीसीजी टैक्स पर चर्चा और कंपनियों की कमाई से जुड़ी उम्मीदों ने बाजार को सहारा दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। अब निवेशकों की नजर एलटीसीजी टैक्स को लेकर आगे होने वाली चर्चाओं और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन से जुड़े संकेतों पर बनी रहेगी।

  • महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी बाजार की नजर, आठ हफ्ते बाद सेंसेक्स-निफ्टी में लौटी तेजी

    महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी बाजार की नजर, आठ हफ्ते बाद सेंसेक्स-निफ्टी में लौटी तेजी


    नई दिल्ली:
    भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला सप्ताह अहम रहने वाला है। निवेशकों की नजर भारत और अमेरिका से जारी होने वाले आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी। इन कारकों के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियां बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। अमेरिका में महंगाई, घरों की बिक्री और खुदरा बिक्री से जुड़े आंकड़े जारी होंगे। वहीं, भारत में खुदरा और थोक महंगाई, बेरोजगारी, व्यापार संतुलन तथा विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े सामने आएंगे। इन आंकड़ों से आर्थिक स्थिति के बारे में संकेत मिल सकते हैं, जिन पर निवेशकों की प्रतिक्रिया बाजार में उतार-चढ़ाव के रूप में दिखाई दे सकती है। बीते सप्ताह भारतीय बाजार में तेजी दर्ज की गई थी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों साप्ताहिक आधार पर बढ़त के साथ बंद हुए, जो आठ सप्ताह बाद पहली बार हुआ। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशक पिछले सप्ताह की तेजी के साथ नए आर्थिक संकेतों पर भी नजर रखेंगे।

    कच्चे तेल की कीमत अगले सप्ताह बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारकों में शामिल रहेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। तेल की कीमतों में बदलाव का असर निवेशकों की धारणा और बाजार की गतिविधियों पर पड़ सकता है। इस बीच रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी चर्चा में है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बातचीत सफल रही है। उनके मुताबिक, रूस अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में तुरंत तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और उसके तुरंत बाद दस लाख टन डीजल की आपूर्ति की जाएगी। इस घोषणा के संभावित प्रभाव को लेकर बाजार की नजर बनी रह सकती है। जानकारों के मुताबिक, रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ने से वैश्विक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कीमतों की वास्तविक दिशा बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

    अगले सप्ताह निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी एक अहम संकेतक रहेगी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड लगातार पांच प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। निवेशक इसके स्तर और इसमें होने वाले बदलावों पर नजर रखेंगे। इसके साथ अमेरिका के महंगाई आंकड़े, खुदरा बिक्री और घरों की बिक्री से जुड़े आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकते हैं। भारत में खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़ों के अलावा बेरोजगारी, व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार की जानकारी भी जारी होने वाली है। इन आंकड़ों के आधार पर निवेशक घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन कर सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच इन आर्थिक संकेतकों पर बाजार की प्रतिक्रिया आने वाले सप्ताह में देखने को मिल सकती है।

    बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में बढ़त दर्ज की गई। सेंसेक्स 562.63 अंक यानी 0.78 प्रतिशत की तेजी के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 98.50 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की मजबूती रही और यह 22,520.45 के स्तर पर बंद हुआ। आठ सप्ताह बाद यह पहला मौका था, जब दोनों प्रमुख सूचकांक साप्ताहिक आधार पर बढ़त के साथ बंद हुए। क्षेत्रवार प्रदर्शन में बीएसई टेलीकॉम सबसे आगे रहा और इसमें 3.72 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। बीएसई एफएमसीजी में 2.43 प्रतिशत, बीएसई पीएसयू बैंक में 2.31 प्रतिशत, बीएसई फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.03 प्रतिशत और बीएसई आईटी में 0.76 प्रतिशत की बढ़त रही। हालांकि, सभी क्षेत्रों में तेजी नहीं रही। बीएसई रियल्टी में 4.19 प्रतिशत और बीएसई मेटल में 4.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई यूटिलिटी 2.48 प्रतिशत, बीएसई कमोडिटीज 2.46 प्रतिशत और बीएसई पावर 2.22 प्रतिशत कमजोर हुए। आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा तय करने में आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक संकेतों की भूमिका अहम रह सकती है।

  • शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता

    शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 9 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाली है। लगातार दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी के सामने अब बाजार को संभालने की चुनौती है। 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी और सेंसेक्स 1045 अंक से ज्यादा टूटकर 71593.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में करीब 1.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22231.80 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का यह स्तर करीब 18 महीने का निचला स्तर माना जा रहा है।

    बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद मौद्रिक नीति का रुख भी सख्त किया गया है। रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया है। महंगाई के दबाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच RBI का यह फैसला बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका रहती है जिसका असर निवेश और मुनाफे की उम्मीदों पर पड़ सकता है।

    दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है इसलिए महंगा तेल देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है। इसका असर रुपये और शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ा दबाव बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही कमजोर रुपया बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों में उतार चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 8 अक्टूबर की गिरावट में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे जबकि मेटल रियल्टी और ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    अब 9 अक्टूबर को निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी। सितंबर तिमाही के नतीजों का दौर शुरू हो चुका है और TCS के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है लेकिन कमजोर नतीजे मौजूदा दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना जरूरी है। बाजार में भारी उतार चढ़ाव के बीच किसी भी शेयर में केवल गिरावट देखकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है। 9 अक्टूबर को कच्चे तेल की चाल रुपये की स्थिति विदेशी निवेशकों की गतिविधियां RBI की नीति और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल है और निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है।

  • शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को लगातार दो कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद तेजी लौटी। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 879.09 अंक यानी 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 288.65 अंक यानी 1.30 प्रतिशत मजबूत होकर 22,520.45 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे आईटी शेयरों में खरीदारी की प्रमुख भूमिका रही। इसके साथ ही लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी दिखाई दी। हाल की गिरावट के बाद शेयरों के आकर्षक मूल्य स्तर पर खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग से बाजार को सहारा मिला।

    शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक रहा। इसमें लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मेटल, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कमोडिटीज भी बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार के प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में केवल निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में रहा। इससे संकेत मिला कि तेजी का दायरा आईटी शेयरों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में भी खरीदारी देखने को मिली।

    बाजार में मजबूती का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 904.80 अंक यानी 1.56 प्रतिशत चढ़कर 58,787.30 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 103.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 19,153.70 पर बंद हुआ। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी व्यापक खरीदारी हुई। सेंसेक्स में शामिल आईटीसी, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड बढ़त के साथ बंद हुए। मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, टाटा स्टील, एचयूएल, टाइटन, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, एमएंडएम, इंडिगो, एनटीपीसी, भारती एयरटेल और बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी तेजी रही। सेंसेक्स पैक में केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    बाजार के जानकारों के अनुसार, हाल में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग की, जबकि शॉर्ट पोजिशन बंद किए जाने से भी बाजार को मजबूती मिली। दूसरी तिमाही के नतीजों के शुरुआती संकेतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़ी आय की संभावनाओं को लेकर बढ़ते भरोसे ने आईटी कंपनियों के शेयरों को समर्थन दिया। आईटी क्षेत्र में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों की तेजी में अहम योगदान दिया। दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में मदद की। ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका कम होने के संकेतों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। इससे निवेशकों की चिंताओं को कुछ राहत मिली।

    हालांकि, बाजार में आई तेजी के बावजूद कई चुनौतियां बनी हुई हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर घरेलू शेयर बाजार की रिकवरी पर दबाव डाल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी चरणबद्ध सख्ती वाले रुख के बाद निवेशक ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर अधिक संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस संदर्भ में सोमवार को जारी होने वाले घरेलू उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़ों पर बाजार की नजर रहेगी। महंगाई के ये आंकड़े निवेशकों की उम्मीदों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे भी अहम रहेंगे। कंपनियों का वास्तविक प्रदर्शन तय करेगा कि शुक्रवार को आई तेजी आगे भी कायम रह पाती है या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव बढ़ता है।

  • भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1045 अंक टूटा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर पर बंद

    भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1045 अंक टूटा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर पर बंद

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत फिसलकर 71,593.24 पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,231.80 पर बंद हुआ। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रहा और प्रमुख सूचकांक लगातार कमजोरी में रहे।

    कारोबार के दौरान निफ्टी ने 22,179.90 का न्यूनतम स्तर छुआ। यह उसका 52 हफ्तों का निचला स्तर रहा। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,500.10 अंक यानी 2.53 प्रतिशत गिरकर 57,882.50 पर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी 456.85 अंक यानी 2.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,050.10 पर बंद हुआ।

    गुरुवार को लगभग सभी प्रमुख सेक्टर सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी मेटल में 3.55 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 3.16 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी में 2.82 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी कमोडिटीज 2.81 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 2.79 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.76 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 2.61 प्रतिशत नीचे रहे। इसके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस में 2.52 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 2.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी पीएसई 2.40 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 2.33 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 2.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार के प्रमुख शेयरों में आईटीसी, इंडिगो, पावर ग्रिड, बीईएल, एनटीपीसी, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, सन फार्मा, एचडीएफसी बैंक, इटरनल और एचयूएल प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक और इन्फोसिस बढ़त के साथ बंद हुए।

    बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली बताई गई। कच्चे तेल की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल बताई गई, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के स्तर पर रहा। इन परिस्थितियों के बीच बाजार के सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। मेटल और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।

    हालांकि, बाजार में गिरावट के बीच कुछ शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी तिमाही के शुरुआती नतीजों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली कुछ कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखी गई। सेन्को गोल्ड का शेयर कारोबार के दौरान 11.9 प्रतिशत तक चढ़ा, हालांकि बाद में बाजार का रुख कमजोर होने से इसकी बढ़त कम हो गई। वहीं पीएनजीएस रेवा डायमंड ज्वेलरी के शेयरों में लगातार चौथे दिन तेजी बनी रही। कंपनी की ओर से इस सप्ताह मजबूत नतीजे जारी किए जाने के बाद उसके शेयरों में यह तेजी देखने को मिली। कुल मिलाकर गुरुवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए तेज गिरावट वाला रहा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर तक पहुंच गया।

  • शेयर बाजार में फिर बढ़ा दबाव, सेंसेक्स 429 अंक गिरा; मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी

    शेयर बाजार में फिर बढ़ा दबाव, सेंसेक्स 429 अंक गिरा; मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी

    नई दिल्ली:  भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 72,638.70 पर रहा। वहीं निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत गिरकर 22,603.05 पर बंद हुआ। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव मेटल और रियल्टी शेयरों में देखने को मिला।

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी मेटल 2.33 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 1.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके अलावा निफ्टी ऑटो में 1.58 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज में 1.43 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस में 1.41 प्रतिशत, निफ्टी आईटी में 1.34 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई में 1.22 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।

    बुधवार को कुछ सेक्टरों ने बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी पीएसयू बैंक 1 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। निफ्टी मीडिया में 0.69 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही। इस तरह बैंकिंग क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मजबूती दिखाई दी, जबकि ज्यादातर प्रमुख सेक्टर लाल निशान में रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कारोबार एक जैसा नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 378.60 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 59,382.60 पर बंद हुआ। इसके विपरीत निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 58.25 अंक यानी 0.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,506.95 पर बंद हुआ। इससे बाजार के अलग-अलग हिस्सों में निवेशकों की गतिविधि में अंतर देखने को मिला।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर टाइटन, बीईएल, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एलएंडटी, टाटा स्टील, एमएंडएम, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, इंडिगो, एचयूएल, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट और टेक महिंद्रा में गिरावट रही।

    बाजार में गिरावट को लेकर जानकारों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से उम्मीद के मुताबिक ब्याज दर बढ़ाए जाने के बाद घरेलू बाजार ने मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव पर तेजी से प्रतिक्रिया दी। नीति रुख के न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग की ओर जाने को ब्याज दर चक्र में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा।

    इसके अलावा अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक से पहले अमेरिकी यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के बीच रुपया भी दबाव में रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया। इन वैश्विक और घरेलू कारकों के बीच बुधवार को शेयर बाजार में बिकवाली का रुख हावी रहा।

    ऊंची ब्याज दरों के माहौल में बैंकिंग शेयरों को मार्जिन से संभावित लाभ की उम्मीद का फायदा मिला और इस क्षेत्र के कुछ शेयरों ने बाजार की कमजोरी के विपरीत प्रदर्शन किया। हालांकि, बाजार के अधिकांश हिस्सों में बिकवाली का दबाव बना रहा और इसके चलते सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए।

  • भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी, सेंसेक्स 685 अंक चढ़ा, निफ्टी 0.98 प्रतिशत बढ़कर 22,776 पर बंद

    भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी, सेंसेक्स 685 अंक चढ़ा, निफ्टी 0.98 प्रतिशत बढ़कर 22,776 पर बंद

    नई दिल्ली । पिछले सप्ताह लगातार चार कारोबारी सत्रों में गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में अब लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली है। मंगलवार को घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की बैठक के नतीजों से पहले बाजार में खरीदारी का रुख मजबूत रहा। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 685.34 अंक यानी 0.95 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,067.81 पर बंद हुआ।

    एनएसई निफ्टी 50 भी मंगलवार को 220.35 अंक यानी 0.98 प्रतिशत चढ़कर 22,776.10 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी 50 में ट्रेंट, बीएसई, कोटक महिंद्रा बैंक, नेस्ले इंडिया और एचयूएल के शेयरों में सबसे अधिक तेजी रही। दूसरी ओर कोल इंडिया, टेक महिंद्रा, मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, अल्ट्राटेक सीमेंट, अपोलो हॉस्पिटल और आईटीसी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इस तरह बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती बनी रही।

    व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.08 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 1.56 प्रतिशत चढ़ा। सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी केमिकल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी हेल्थकेयर में 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी रही। इसके विपरीत निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    इस सप्ताह अब तक बाजार में तेजी का असर भी दिखाई दे रहा है। सेंसेक्स इस सप्ताह 1,000 से अधिक अंक चढ़ चुका है, जबकि निफ्टी 50 ने पिछले दो कारोबारी सत्रों में 300 से अधिक अंक जोड़े हैं। आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हुई है और इसके नतीजे 7 अक्टूबर को आने वाले हैं। बाजार की नजर अब मौद्रिक नीति समिति के फैसले पर बनी हुई है। बैठक के परिणाम से पहले बाजार में लगातार दो सत्रों की तेजी देखने को मिली है।

    शेयर बाजार में इस तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को भी एक वजह माना जा रहा है। हालिया तेजी के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। कुछ मध्य पूर्वी देशों की ओर से कच्चे तेल की नई आपूर्ति शुरू होने के बाद कीमतों में यह नरमी देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर बाजार की धारणा पर भी पड़ रहा है।

    वैश्विक संकेतों से भी घरेलू बाजार को समर्थन मिला। बाजार से जुड़े एक विशेषज्ञ के अनुसार, ग्लोबल संकेतों के सहारे लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी सुधार दर्ज किया गया। मंगलवार को अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 0.50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। घरेलू बाजार में आरबीआई एमपीसी के नतीजों से पहले खरीदारी और वैश्विक संकेतों के बीच प्रमुख सूचकांकों ने दिन का कारोबार बढ़त के साथ समाप्त किया।