Tag: Sensex

  • वैश्विक अनिश्चितता और आईटी सेक्टर पर दबाव का असर, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

    वैश्विक अनिश्चितता और आईटी सेक्टर पर दबाव का असर, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

    नई दिल्ली । सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांकों ने उल्लेखनीय गिरावट के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक आर्थिक संकेतों, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता के रद्द होने तथा आईटी सेक्टर में बढ़ी बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन अंतिम घंटों में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक टूटकर 76 हजार के स्तर के आसपास बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 24 हजार के महत्वपूर्ण स्तर के करीब फिसल गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के सप्ताहों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे कई बड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया।

    बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों की ओर से मिले कमजोर संकेतों और भविष्य के कारोबार को लेकर सतर्क अनुमान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके परिणामस्वरूप भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली दर्ज की गई। सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे आईटी सूचकांक दिन के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।

    जानकारों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं और तकनीकी निवेश से जुड़ी वैश्विक मांग को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं। यही कारण है कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने तकनीकी शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाने का फैसला किया। इसका सीधा असर बाजार के समग्र प्रदर्शन पर पड़ा।

    हालांकि, बाजार में हर तरफ निराशा का माहौल नहीं था। हेल्थकेयर, फार्मा, रक्षा, ऊर्जा और धातु क्षेत्रों से जुड़े कुछ शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इन सेक्टरों ने निवेशकों को सीमित राहत प्रदान की और बाजार में गिरावट को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद की। सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश में कई निवेशकों ने इन क्षेत्रों की ओर रुख किया।

    दिलचस्प बात यह रही कि बड़े शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। दोनों श्रेणियों के सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे यह संकेत मिला कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी चुनिंदा कंपनियों और विकास आधारित क्षेत्रों में बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक और निवेश गतिविधियां इन वर्गों को समर्थन प्रदान कर रही हैं।

    अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता रद्द होने की खबर ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी सतर्कता बढ़ा दी। निवेशकों को आशंका है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का प्रभाव भारतीय बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम, मानसून की प्रगति, कॉर्पोरेट नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव और सतर्क कारोबार का माहौल जारी रह सकता है।

  • बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार लाल निशान में खुला, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार लाल निशान में खुला, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांच कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला शुक्रवार को थम गया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में पहुंच गए। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया और निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स सैकड़ों अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। शुरुआती घंटे में गिरावट और गहरी होती गई तथा सेंसेक्स में 700 अंकों से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं निफ्टी भी लगभग एक प्रतिशत तक टूटकर कारोबार करता दिखाई दिया। हाल के दिनों में बाजार में बनी मजबूत तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने को भी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली के कारण संबंधित सूचकांक में तेज गिरावट दर्ज की गई। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में कमजोर रहे और कई दिग्गज कंपनियां टॉप लूजर्स की सूची में शामिल हो गईं। वैश्विक आईटी उद्योग से जुड़े संकेतों और भविष्य के कारोबारी अनुमानों में नरमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जिसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया।

    आईटी क्षेत्र के अलावा रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, धातु और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान बना रहा। इसके बावजूद व्यापक बाजार पर बिकवाली का दबाव हावी रहा और अधिकांश सेक्टर नकारात्मक दायरे में कारोबार करते दिखाई दिए।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, हालांकि इनकी कमजोरी बड़े सूचकांकों की तुलना में सीमित रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूलना एक सामान्य प्रक्रिया है। उनके अनुसार बाजार की दीर्घकालिक तस्वीर अभी भी सकारात्मक बनी हुई है और मौजूदा गिरावट को बड़े रुझान में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कई बुनियादी संकेतक अभी भी मजबूत बने हुए हैं। महंगाई पर नियंत्रण, आर्थिक गतिविधियों में सुधार और ऊर्जा कीमतों में नरमी जैसे कारक बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    वैश्विक स्तर पर भी मिले-जुले संकेत देखने को मिले। अधिकांश एशियाई बाजार दबाव में कारोबार करते रहे, जबकि अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहने से भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलने की संभावना बनी हुई है। इससे भविष्य में महंगाई और लागत दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की रणनीति और सेक्टर आधारित प्रदर्शन आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को संतुलित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है।

  • आज शेयर बाजार में रह सकती है तेजी की धार, निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और प्रमुख सेक्टरों पर

    आज शेयर बाजार में रह सकती है तेजी की धार, निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और प्रमुख सेक्टरों पर


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत सकारात्मक माहौल के साथ होने की उम्मीद जताई जा रही है। बीते कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार ने मजबूती दिखाई है और निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीदें बाजार को मजबूती प्रदान कर सकती हैं। हालांकि दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद और लगातार बढ़ रही निवेश गतिविधियां शेयर बाजार को समर्थन दे रही हैं। विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी आज बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से खरीदारी जारी रहती है, तो बाजार में तेजी का रुख और मजबूत हो सकता है। वहीं किसी भी नकारात्मक वैश्विक संकेत का असर बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है।

    आज आईटी, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़े शेयर निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। पिछले कुछ समय से आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली है, जबकि बैंकिंग सेक्टर भी बाजार को सहारा देता नजर आ रहा है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी निवेशकों की विशेष नजर रह सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक मानी जा रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में कमी से महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है। इसका सकारात्मक असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखाई देता है।

    विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही महत्वपूर्ण स्तरों के आसपास कारोबार कर रहे हैं। यदि बाजार शुरुआती बढ़त को बनाए रखने में सफल रहता है, तो निवेशकों का उत्साह और बढ़ सकता है। हालांकि मुनाफावसूली के कारण बीच-बीच में दबाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार की दिशा दिनभर बदलती परिस्थितियों के अनुसार तय होगी।

    खुदरा निवेशकों के लिए सलाह दी जा रही है कि वे अफवाहों या त्वरित लाभ के लालच में निवेश करने के बजाय मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों का चयन करें। लंबी अवधि की निवेश रणनीति अपनाने वाले निवेशकों के लिए मौजूदा बाजार परिस्थितियां बेहतर अवसर प्रदान कर सकती हैं। वहीं अल्पकालिक निवेशकों को स्टॉप लॉस का उपयोग करते हुए सतर्कता बरतनी चाहिए।

    कुल मिलाकर आज का कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेतों के साथ शुरू हो सकता है। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू स्तर पर निवेशकों का भरोसा कायम रहता है, तो बाजार में मजबूती का रुख देखने को मिल सकता है। हालांकि किसी भी अप्रत्याशित घटनाक्रम को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहना होगा।

  • भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी, निफ्टी 24,000 के ऊपर मजबूत बंद

    भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी, निफ्टी 24,000 के ऊपर मजबूत बंद

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी का सिलसिला जारी रहा। वैश्विक संकेतों में सुधार और घरेलू सेक्टरों में मजबूत खरीदारी के चलते बाजार हरे निशान में बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निवेशकों का भरोसा मजबूत दिखाई दिया और प्रमुख सूचकांकों ने सकारात्मक रुख बनाए रखा।

    30 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स BSE Sensex 347.14 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,155.62 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, व्यापक बाजार की मजबूती के चलते Nifty 50 भी 96.55 अंक या 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,085.70 पर बंद हुआ।

    दिन की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने हल्की बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया था और धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ने से इंट्रा-डे में नए उच्च स्तर भी देखने को मिले। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,218.99 और निफ्टी 24,108.20 के स्तर तक पहुंचा, जिससे बाजार में तेजी का माहौल मजबूत हुआ।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.52 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.79 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक और मेटल सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन सेक्टरों में 1 से 2 प्रतिशत तक की बढ़त देखी गई। वहीं आईटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी हल्की तेजी रही। इसके विपरीत ऑटो, रियल्टी और एफएमसीजी शेयरों में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

    कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों ने बाजार की तेजी में योगदान दिया। Trent Limited, Bharat Electronics Limited और Hindalco Industries जैसे शेयरों में मजबूती देखने को मिली। वहीं कुछ शेयरों जैसे टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, सिप्ला और ओएनजीसी में मुनाफावसूली देखी गई।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों में कमी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सुधार के संकेतों से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की संभावनाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की उम्मीदों ने भी बाजार को समर्थन दिया है।

    इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी बाजार को राहत दी है। तेल की कीमतें तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचने से भारत के आयात बिल में कमी की उम्मीद बढ़ी है, जिससे महंगाई पर नियंत्रण की संभावना मजबूत हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद है कि ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन भविष्य की दिशा को लेकर दिए जाने वाले संकेत बाजार की चाल तय करेंगे।

    तकनीकी विश्लेषण में निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 24,100 से 24,200 का दायरा तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर पार होता है तो बाजार में आगे और तेजी की संभावना बन सकती है।

  • वैश्विक तनाव घटा, घरेलू बाजार चमका; बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर, मिडकैप-स्मॉलकैप में भी जोरदार तेजी

    वैश्विक तनाव घटा, घरेलू बाजार चमका; बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर, मिडकैप-स्मॉलकैप में भी जोरदार तेजी

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र की मजबूती ने भारतीय पूंजी बाजार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तक पहुंचा दिया है। निवेशकों के बढ़ते भरोसे, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक बार फिर 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गया। यह लगभग छह सप्ताह का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है और इससे बाजार की सकारात्मक धारणा को नई मजबूती मिली है।

    हाल के दिनों में वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में आए बदलावों का असर भारतीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। पश्चिम एशिया से जुड़े तनावों में नरमी और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर सामने आए सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों की चिंताओं को कम किया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए राहत का माहौल बनाया है। इसका सीधा प्रभाव निवेशकों के विश्वास और बाजार की दिशा पर देखा गया।

    विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतों में कमी से महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। इन परिस्थितियों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल मजबूत हुआ है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान बाजार में आई तेजी ने कंपनियों के कुल मूल्यांकन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।

    बाजार की यह मजबूती केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही है। व्यापक बाजार में भी उत्साह दिखाई दिया है। मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप श्रेणी के शेयरों ने हाल के महीनों में बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में तेजी केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेशकों की भागीदारी विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों में फैल रही है। व्यापक भागीदारी को किसी भी तेजी के टिकाऊ होने का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

    हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बिकवाली का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है, फिर भी घरेलू निवेशकों की लगातार सक्रियता बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। व्यवस्थित निवेश योजनाओं और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने बाजार को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में विदेशी निवेश का प्रवाह भी सकारात्मक होता है तो बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

    भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं भी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। संरचनात्मक सुधारों, मजबूत कॉरपोरेट बैलेंस शीट, बढ़ते पूंजीगत निवेश और बेहतर नकदी प्रवाह जैसे कारक कंपनियों की विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट क्षेत्र ने कर्ज के स्तर को नियंत्रित करने और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है, जिसका लाभ अब बाजार मूल्यांकन में दिखाई दे रहा है।

    बुधवार के कारोबार में भी प्रमुख सूचकांकों ने सकारात्मक रुख बनाए रखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे निवेशकों का उत्साह और मजबूत हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चरण में बैंकिंग, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    कुल मिलाकर, वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और घरेलू आर्थिक मजबूती के संयुक्त प्रभाव ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। बीएसई का बाजार पूंजीकरण 5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचना न केवल निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से बाजार में लौटी तेजी, इस सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी में दर्ज की गई शानदार बढ़त

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से बाजार में लौटी तेजी, इस सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी में दर्ज की गई शानदार बढ़त


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच भारतीय शेयर बाजार ने इस सप्ताह उल्लेखनीय मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी देखने को मिला। लगातार दो सप्ताह की कमजोरी के बाद बाजार ने वापसी करते हुए प्रमुख सूचकांकों को ऊंचे स्तरों तक पहुंचाया।

    सप्ताह के दौरान निवेशकों की धारणा में सुधार का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद रही। भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी की संभावना के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सकारात्मक माहौल बना, जिसका लाभ भारतीय इक्विटी बाजार को मिला। साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी ने आयात-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत का संकेत दिया।

    कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी लगभग दो प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,600 अंक के ऊपर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज कर 75,500 अंक के स्तर को पार करने में सफल रहा। पूरे सप्ताह के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांकों ने मजबूत प्रदर्शन किया और निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

    विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति को लेकर बनी अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। लार्ज-कैप कंपनियों में निवेशकों का भरोसा कायम रहा, जबकि हाल के महीनों में तेज बढ़त हासिल कर चुके मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में सीमित मुनाफावसूली देखने को मिली।

    वित्तीय क्षेत्र इस सप्ताह बाजार का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। निजी बैंकों में निवेशकों की सक्रिय खरीदारी और सकारात्मक नियामकीय माहौल ने बैंकिंग शेयरों को समर्थन दिया। इसके अलावा उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की कंपनियों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर आय वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित हुए।

    दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में बना रहा। अमेरिका में आर्थिक अनिश्चितताओं और तकनीकी खर्च में संभावित कमी की आशंकाओं ने आईटी शेयरों की गति को सीमित किया। वहीं धातु क्षेत्र पर भी दबाव देखने को मिला, क्योंकि चीन में मांग कमजोर रहने की चिंताओं और कमोडिटी कीमतों में नरमी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए चुनौती बनी रही। सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री की, हालांकि सप्ताह के अंतिम चरण में यह दबाव कुछ कम होता दिखाई दिया। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार खरीदारी जारी रखी और बाजार को मजबूत समर्थन प्रदान किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। घरेलू महंगाई से जुड़े आंकड़े, चीन के औद्योगिक उत्पादन के संकेतक और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति निवेशकों की नजर में रहेंगे। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होती है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली घटती है, तो भारतीय शेयर बाजार में तेजी का रुख आगे भी जारी रह सकता है।

  • वैश्विक राहत संकेतों से भारतीय बाजार में रिकॉर्ड तेजी, बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने बढ़ाई निवेशकों की दौलत

    वैश्विक राहत संकेतों से भारतीय बाजार में रिकॉर्ड तेजी, बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने बढ़ाई निवेशकों की दौलत

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में शानदार प्रदर्शन किया। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया, जिसके चलते घरेलू बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी के परिणामस्वरूप निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब 10 लाख करोड़ रुपये का इजाफा दर्ज किया गया।

    कारोबार समाप्त होने पर प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों की सकारात्मक धारणा और वैश्विक संकेतों के समर्थन से बाजार ने पूरे सत्र के दौरान मजबूती बनाए रखी। बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी उल्लेखनीय खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की व्यापक भागीदारी स्पष्ट हुई।

    बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 462 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि निवेशकों ने वैश्विक परिस्थितियों में सुधार की उम्मीदों को सकारात्मक रूप से लिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को सबसे अधिक राहत इस बात से मिली कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम होने की संभावना दिखाई दी।

    कारोबारी सत्र के दौरान बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के शेयरों में मजबूत खरीदारी दर्ज की गई। निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के शेयरों ने बाजार को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में दो से तीन प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली।

    मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग के शेयरों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। आमतौर पर जोखिम वाले माने जाने वाले इन शेयरों में खरीदारी यह संकेत देती है कि बाजार सहभागियों का भरोसा केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक स्तर पर सकारात्मक धारणा बनी रही। इससे बाजार की मजबूती और अधिक व्यापक दिखाई दी।

    विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरें रहीं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ था। यदि किसी समझौते की दिशा में ठोस प्रगति होती है तो इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और निवेश माहौल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    इसी उम्मीद का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिसे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए सकारात्मक माना जाता है। कम तेल कीमतें महंगाई के दबाव को घटाने, चालू खाते के संतुलन को बेहतर बनाने और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने में सहायक हो सकती हैं। यही कारण है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी को शेयर बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया।

    हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि वैश्विक घटनाक्रमों में किसी भी प्रकार का बदलाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है। फिर भी मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का भरोसा मजबूत दिखाई दे रहा है और घरेलू आर्थिक संकेतक भी बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं।

    दिनभर की तेज बढ़त ने यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होने की संभावना भारतीय बाजार के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव से डगमगाया निवेशकों का भरोसा, तेल कीमतों में उछाल के बीच गिरावट के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

    अमेरिका-ईरान तनाव से डगमगाया निवेशकों का भरोसा, तेल कीमतों में उछाल के बीच गिरावट के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण घरेलू निवेशकों का रुख सतर्क नजर आया। कारोबार की शुरुआत में ही प्रमुख शेयर सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला और बाजार गिरावट के साथ खुला।

    विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पैदा हुई आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा प्रभाव उन देशों पर पड़ता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। भारत भी दुनिया के प्रमुख तेल आयातक देशों में शामिल है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में होने वाली हर बड़ी हलचल का असर घरेलू वित्तीय बाजारों पर दिखाई देता है।

    बाजार में शुरुआती कमजोरी के पीछे वैश्विक संकेत भी एक प्रमुख कारण रहे। विदेशी बाजारों में निवेशकों ने बढ़ते तनाव और महंगाई से जुड़ी चिंताओं के बीच जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाई। इसका प्रभाव एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी पड़ा। निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे इक्विटी बाजारों में दबाव बढ़ गया।

    तेल कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया। ऊर्जा लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर कंपनियों की लागत और उपभोक्ता खर्च दोनों पर पड़ता है। यही वजह है कि तेल कीमतों में उछाल को निवेशक अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट आय के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम के रूप में देखते हैं।

    सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऊर्जा और तेल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी। बढ़ती तेल कीमतों से इन कंपनियों को संभावित लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी और कुछ उपभोक्ता आधारित क्षेत्रों के शेयरों में दबाव देखा गया। निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का भी आकलन कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की मौजूदा कमजोरी मुख्य रूप से अनिश्चितता से प्रेरित है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। वहीं यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और हालात सामान्य होते हैं तो बाजारों में स्थिरता लौटने की संभावना भी बनी रहेगी।

    भारत जैसे तेजी से बढ़ते आर्थिक ढांचे के लिए ऊर्जा लागत एक महत्वपूर्ण कारक है। तेल कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी रहने से आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि निवेशक केवल शेयर बाजार के आंकड़ों पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

    फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों, तेल कीमतों की चाल और निवेशकों के जोखिम लेने के रुझान पर निर्भर करेगी। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतक बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • शेयर बाजार आज: क्या 10 जून को भी जारी रहेगी तेजी? निवेशकों की नजर बैंकिंग और वैश्विक संकेतों पर

    शेयर बाजार आज: क्या 10 जून को भी जारी रहेगी तेजी? निवेशकों की नजर बैंकिंग और वैश्विक संकेतों पर


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने 9 जून को शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दो दिनों की गिरावट पर विराम लगाया। बीएसई सेंसेक्स 395 अंकों की बढ़त के साथ 73,919 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 23,242 अंक पर पहुंच गया। इस मजबूती ने निवेशकों के भरोसे को बढ़ाया है और अब 10 जून के कारोबारी सत्र पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बुधवार को बाजार की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों से तय होगी। सबसे बड़ा सहारा बैंकिंग और वित्तीय शेयरों से मिलने की उम्मीद है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक असर बाजार में दिखाई दे रहा है। इसी वजह से सरकारी और निजी बैंकों के शेयरों में खरीदारी का माहौल बना हुआ है।

    वैश्विक स्तर पर भी माहौल कुछ हद तक सकारात्मक नजर आ रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से निवेशकों की चिंता घटी है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट राहत की खबर मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होता है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,200 का स्तर अहम सपोर्ट बन गया है। यदि बाजार इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो आने वाले दिनों में और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं 23,400 से 23,500 का स्तर निकट भविष्य में महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है। निवेशकों को इस दायरे पर विशेष नजर रखने की सलाह दी जा रही है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी लगातार निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। पिछले सत्र में इन दोनों सूचकांकों ने प्रमुख इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया, जो बाजार की व्यापक मजबूती का संकेत है। यदि यही रुझान जारी रहता है तो 10 जून को भी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं।

    हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की भी सलाह दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, अमेरिकी बाजारों का रुख, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। ऐसे में किसी भी निवेश निर्णय से पहले बाजार की चाल और खबरों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर, 10 जून का शेयर बाजार सकारात्मक संकेतों के साथ शुरुआत कर सकता है। यदि बैंकिंग शेयरों में खरीदारी और वैश्विक बाजारों का समर्थन बना रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए यह दिन अवसरों और सतर्कता दोनों का मिश्रण रहने वाला है।

  • बाजार में दमदार वापसी, सेंसेक्स 395 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के ऊपर बंद; मिडकैप-स्मॉलकैप में जोरदार खरीदारी

    बाजार में दमदार वापसी, सेंसेक्स 395 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के ऊपर बंद; मिडकैप-स्मॉलकैप में जोरदार खरीदारी


    नई दिल्ली ।
    घरेलू शेयर बाजार ने मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बावजूद मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती तेजी के बाद बाजार में कुछ समय के लिए दबाव देखने को मिला, लेकिन दिन के दूसरे हिस्से में खरीदारी लौटने से प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने सकारात्मक रुख दिखाया, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की रुचि अधिक मजबूत दिखाई दी।

    कारोबार की शुरुआत उत्साहजनक माहौल में हुई थी। शुरुआती घंटों में प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, लेकिन बाद में मुनाफावसूली और चुनिंदा शेयरों में बिकवाली के कारण बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई। दोपहर तक बाजार पर दबाव इतना बढ़ गया कि प्रमुख सूचकांक लाल निशान तक पहुंच गए। हालांकि इसके बाद निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू की, जिससे बाजार में रिकवरी आई और दिन का समापन मजबूती के साथ हुआ।

    दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 395 अंकों की बढ़त के साथ 73,918 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 भी 119 अंकों की मजबूती के साथ 23,242 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों ने लगभग आधा प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की, जो बाजार में सकारात्मक धारणा को दर्शाता है।

    इस कारोबारी सत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन रहा। बेंचमार्क सूचकांकों की तुलना में छोटे और मझोले शेयरों में कहीं अधिक तेजी देखने को मिली। इससे संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा व्यापक बाजार में बढ़ा है और वे बड़े शेयरों के साथ-साथ उभरती कंपनियों में भी निवेश के अवसर तलाश रहे हैं।

    बाजार में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र ने सबसे अहम भूमिका निभाई। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिसके कारण संबंधित सूचकांक में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज हुई। निजी बैंकिंग शेयरों में भी सकारात्मक रुझान बना रहा। वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की सक्रियता ने पूरे बाजार की दिशा को मजबूत बनाए रखने में योगदान दिया।

    पर्यटन, रक्षा, ऑटोमोबाइल और पूंजी बाजार से जुड़े क्षेत्रों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में आई तेजी ने बाजार के व्यापक दायरे को समर्थन दिया। उपभोक्ता उत्पाद, फार्मा, धातु और अवसंरचना क्षेत्र के शेयरों में भी सकारात्मक कारोबार दर्ज किया गया, जिससे बाजार की मजबूती को अतिरिक्त आधार मिला।

    हालांकि सभी सेक्टर एक जैसी गति से नहीं बढ़े। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कुछ कमजोरी देखने को मिली और चुनिंदा आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र की कुछ प्रमुख कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार की बढ़त कुछ हद तक सीमित रही। फिर भी अधिकांश क्षेत्रों में खरीदारी का माहौल बने रहने से कुल मिलाकर बाजार सकारात्मक दिशा में बंद हुआ।

    व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो विमानन, वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों ने प्रमुख बढ़त हासिल की। दूसरी ओर ऊर्जा, आभूषण, बिजली और तकनीकी क्षेत्र की कुछ कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद व्यापक खरीदारी के चलते बाजार का समग्र रुख मजबूत बना रहा।

    विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में आई यह रिकवरी निवेशकों के बेहतर विश्वास और व्यापक हिस्सेदारी का संकेत है। यदि आने वाले सत्रों में यही रुझान जारी रहता है तो बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। फिलहाल मंगलवार का कारोबार इस बात का संकेत देता है कि निवेशकों की नजर अब केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग में भी अवसर तलाशे जा रहे हैं।