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  • वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

    वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी अनिश्चितता के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बीते सप्ताह उल्लेखनीय मजबूती का प्रदर्शन किया। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों, सरकार के बड़े विनिर्माण संबंधी फैसलों और निवेशकों के सकारात्मक रुख ने घरेलू बाजार को सहारा दिया। इसी का परिणाम रहा कि सप्ताह के दौरान प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए और निवेशकों का भरोसा कायम रहा।

    सप्ताह भर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 582.06 अंकों यानी करीब 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए मजबूत स्थिति में रहा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 127.40 अंकों यानी लगभग 0.5 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को बाजार में खरीदारी का उत्साह और अधिक बढ़ गया। सेंसेक्स 964.58 अंकों की छलांग लगाकर 78,151.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी इस बात का संकेत रही कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी घरेलू निवेशकों का विश्वास भारतीय अर्थव्यवस्था पर बना हुआ है।

    सप्ताह के दौरान निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर बनी रही। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल पैदा किया। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर इन घटनाओं का सीमित प्रभाव देखने को मिला, क्योंकि घरेलू स्तर पर कई सकारात्मक आर्थिक संकेतकों ने बाजार को संतुलित बनाए रखा।

    बाजार को सबसे बड़ा सहारा प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों से मिला। कई बड़ी कंपनियों ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिससे आईटी और चुनिंदा अन्य क्षेत्रों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली दो बड़ी विनिर्माण योजनाओं को मंजूरी दिए जाने से औद्योगिक विकास और निवेश को लेकर सकारात्मक माहौल बना। इन घोषणाओं ने दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को लेकर निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी क्षेत्र पूरे सप्ताह सबसे अधिक चर्चा में रहा। इस क्षेत्र में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई, जिससे तकनीकी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, प्राइवेट बैंक और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर रियल्टी, मेटल, डिफेंस, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक जैसे कुछ क्षेत्रों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में ही अधिक भरोसा दिखाया।

    हालांकि प्रमुख सूचकांकों में मजबूती रही, लेकिन व्यापक बाजार अपेक्षाकृत कमजोर नजर आया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सप्ताह के दौरान गिरावट दर्ज की गई। वहीं बाजार की अस्थिरता दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स भी बढ़ा, जो यह संकेत देता है कि वैश्विक परिस्थितियों को लेकर निवेशकों के बीच सतर्कता अभी भी बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों, प्रबंधन के भविष्य के संकेतों, मानसून की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कॉर्पोरेट प्रदर्शन मजबूत बना रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।

  • शानदार तेजी के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 965 अंक उछला तो निफ्टी 24,334 के पार; बैंकिंग और आईटी शेयरों ने दिखाई दमदार मजबूती

    शानदार तेजी के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 965 अंक उछला तो निफ्टी 24,334 के पार; बैंकिंग और आईटी शेयरों ने दिखाई दमदार मजबूती

    नई दिल्ली ।सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बड़ी राहत दी। वैश्विक स्तर पर मिले-जुले संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का मजबूत माहौल देखने को मिला। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 964.58 अंकों की बढ़त के साथ 78,151.45 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त ने बाजार में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाया।

    कारोबार की शुरुआत भी सकारात्मक रही। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से ऊपर खुला और दिनभर खरीदारी के दम पर लगातार मजबूत बना रहा। कारोबार के दौरान यह 78,282.55 के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी ने भी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखते हुए दिन के दौरान 24,367.30 का इंट्रा-डे हाई बनाया। बाजार बंद होने तक प्रमुख सूचकांक अपने ऊंचे स्तरों के करीब बने रहे, जिससे पूरे कारोबारी सत्र में सकारात्मक रुझान देखने को मिला।

    बाजार की तेजी में सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों ने निभाई। निजी बैंकों में मजबूत खरीदारी के कारण निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक सबसे अधिक बढ़त दर्ज करने वाला सेक्टर रहा। इसके अलावा आईटी, बैंकिंग, रियल्टी और ऑटो सेक्टर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े शेयरों ने प्रमुख सूचकांकों को मजबूती प्रदान की। निफ्टी 50 में टेक महिंद्रा, टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर प्रमुख बढ़त दर्ज करने वालों में शामिल रहे।

    हालांकि बाजार का रुख पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। फार्मा, हेल्थकेयर, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में कुछ दबाव देखने को मिला। इसी तरह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित कमजोरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर इन वर्गों पर देखने को मिला, लेकिन बड़े शेयरों में मजबूत खरीदारी ने पूरे बाजार को सकारात्मक दिशा दी।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कई कारोबारी सत्रों से सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद बाजार ने महत्वपूर्ण तकनीकी ब्रेकआउट दिया है। इसे निवेशकों के बढ़ते भरोसे और मजबूत बाजार धारणा का संकेत माना जा रहा है। तकनीकी संकेतकों के अनुसार निफ्टी अभी भी अपने प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि आरएसआई में भी सकारात्मक संकेत दिखाई दिए हैं। इससे निकट भविष्य में बाजार की मजबूती बरकरार रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो निफ्टी आने वाले कारोबारी सत्रों में 24,800 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं 24,200 का स्तर निकट अवधि के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर से नीचे जाता है तो कुछ समय के लिए सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है। फिलहाल घरेलू आर्थिक संकेतकों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी, क्योंकि यही कारक आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • वैश्विक तनाव के बीच सपाट बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से 393 अंक फिसला, निफ्टी भी बढ़त गंवाकर बंद

    वैश्विक तनाव के बीच सपाट बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से 393 अंक फिसला, निफ्टी भी बढ़त गंवाकर बंद

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की खरीदारी से बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली, लेकिन दिन के दूसरे हिस्से में मुनाफावसूली हावी होने से अधिकांश बढ़त खत्म हो गई। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 1.44 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,186.87 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 5.75 अंक की गिरावट के साथ 24,072.75 अंक पर बंद हुआ।

    कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रही। सेंसेक्स करीब 203 अंकों की बढ़त के साथ खुला और दिन के दौरान 77,579.69 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में बिकवाली बढ़ने से यह अपने इंट्रा-डे हाई से करीब 393 अंक नीचे फिसलकर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी भी शुरुआती मजबूती के साथ 24,186.50 अंक तक पहुंचा, लेकिन अंतिम घंटों में मुनाफावसूली के चलते अपनी अधिकांश बढ़त गंवा बैठा।

    बाजार की व्यापक तस्वीर मिश्रित रही। कारोबार के दौरान लगभग 1,947 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 2,119 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए और 194 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.41 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 1.48 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा मीडिया, आईटी, ऑटो, एफएमसीजी और फार्मा शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर रियल्टी, पीएसयू बैंक, मेटल, प्राइवेट बैंक और बैंकिंग शेयरों पर दबाव बना रहा। रियल्टी इंडेक्स में सबसे अधिक करीब एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी 50 के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में एचसीएल टेक, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), विप्रो, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस और महिंद्रा एंड महिंद्रा शामिल रहे। वहीं इटरनल, एसबीआई लाइफ, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण निवेशक पूरे सत्र के दौरान सतर्क बने रहे। महंगाई से जुड़ी चिंताओं का असर विशेष रूप से बैंकिंग और रियल्टी शेयरों पर देखने को मिला। हालांकि कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क दोबारा लागू होने और चुनिंदा कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों के चलते केमिकल सेक्टर में मजबूती बनी रही।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही परिणाम, प्रबंधन की भविष्य की रणनीति, मानसून की प्रगति, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम पर रहेगी। यही कारक निकट भविष्य में भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने दिखाई मजबूती, उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स 130 अंक चढ़कर हरे निशान पर बंद

    पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने दिखाई मजबूती, उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स 130 अंक चढ़कर हरे निशान पर बंद

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को मजबूती का प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में अच्छी तेजी के बाद दिनभर उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिला, लेकिन कारोबार समाप्त होने तक प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी जारी रखी, जिससे बाजार को समर्थन मिला और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा कायम दिखाई दिया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,185.43 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 26.45 अंक यानी 0.11 प्रतिशत मजबूत होकर 24,078.50 अंक के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बेहतर प्रदर्शन किया और दिन के दौरान सेंसेक्स 77,646.27 अंक तथा निफ्टी 24,220.35 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सफल रहे। हालांकि, बाद में मुनाफावसूली के कारण बढ़त कुछ सीमित हो गई।

    व्यापक बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की निरंतर भागीदारी और मजबूत आर्थिक संकेतकों ने बाजार को वैश्विक दबाव के बीच भी संतुलित बनाए रखा।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑयल एंड गैस, वित्तीय सेवाएं, फार्मा, हेल्थकेयर और ऑटो सेक्टर में भी खरीदारी का माहौल रहा। दूसरी ओर धातु, सूचना प्रौद्योगिकी, एफएमसीजी, मीडिया और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में दबाव बना रहा। धातु कंपनियों पर कच्चे माल की लागत और वैश्विक मांग को लेकर बनी चिंताओं का असर दिखाई दिया।

    प्रमुख कंपनियों में अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी लाइफ, श्रीराम फाइनेंस, आयशर मोटर्स और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, एलएंडटी, जेएसडब्ल्यू स्टील और इंफोसिस के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में सेक्टर आधारित खरीदारी और बिकवाली दोनों का असर बना रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण बाजार पर दबाव बना था, जबकि बुधवार को शुरुआती रिकवरी मुख्य रूप से तकनीकी सुधार के रूप में सामने आई। उनका कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है और पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो भारतीय शेयर बाजार को आगे और समर्थन मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और आगामी आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी, जो आने वाले कारोबारी सत्रों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे फिसला, तीन दिन की तेजी थमी

    पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे फिसला, तीन दिन की तेजी थमी

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन घरेलू बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ और लगातार तीन सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला टूट गया। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई, जिसके चलते अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली हावी रही। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,054.94 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 158.95 अंक यानी 0.66 प्रतिशत टूटकर 24,052.05 अंक पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार से ही बाजार पर दबाव बना रहा और दिनभर बिकवाली का माहौल देखने को मिला। निवेशकों की सतर्क रणनीति के कारण प्रमुख सूचकांक पूरे सत्र में लाल निशान में कारोबार करते रहे।

    बाजार की व्यापक तस्वीर भी कमजोर रही। कारोबार के दौरान लगभग 1,422 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई, जबकि 2,632 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। करीब 190 शेयरों में कोई विशेष बदलाव नहीं आया। व्यापक बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों ही नहीं, बल्कि मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों पर भी बिकवाली का दबाव बना रहा।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा और इसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा पीएसयू बैंक, ऑटो, बैंकिंग और आईटी सेक्टरों में भी उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली। प्राइवेट बैंक, ऑयल एंड गैस, एफएमसीजी, मीडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर भी दबाव में रहे। हालांकि फार्मा और मेटल सेक्टर ने बाजार को कुछ राहत दी। फार्मा सूचकांक में लगभग 1 प्रतिशत और मेटल इंडेक्स में 0.60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे इन क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान बना रहा।

    निफ्टी 50 में शामिल अधिकांश शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एचसीएल टेक्नोलॉजीज, श्रीराम फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ, टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन के शेयर प्रमुख नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, टीसीएस और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में मजबूती देखने को मिली और ये दिन के प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में चुनिंदा रक्षात्मक क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बनी रही।

    विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 57 पैसे कमजोर होकर 96.25 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत से अधिक उछलकर करीब 87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए महंगाई और व्यापार घाटे की चिंता बढ़ा सकती हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

  • सेंसेक्स निफ्टी में आज क्या होगा बड़ा उतार चढ़ाव निवेशकों के लिए 14 जुलाई का पूरा मार्केट आउटलुक

    सेंसेक्स निफ्टी में आज क्या होगा बड़ा उतार चढ़ाव निवेशकों के लिए 14 जुलाई का पूरा मार्केट आउटलुक


    नई दिल्ली । 14 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच होने जा रही है। निवेशकों की नजर एक ओर कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों पर रहेगी तो दूसरी ओर वैश्विक बाजारों की चाल भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बीते कारोबारी सत्र में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला था और अब निवेशक यह जानने को उत्सुक हैं कि नया कारोबारी दिन किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की चाल पर विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिकवाली का सीधा असर दिखाई दे सकता है। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी मजबूत रहती है तो बाजार को सहारा मिल सकता है जबकि लगातार बिकवाली होने पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों पर भी निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी क्योंकि इनका असर कई प्रमुख सेक्टरों पर पड़ता है।

    इस सप्ताह कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं। ऐसे में बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहेंगे उनके शेयरों में तेजी आने की संभावना बन सकती है जबकि कमजोर नतीजों का असर संबंधित शेयरों पर दबाव के रूप में दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार के रुझान पर ध्यान देना चाहिए।

    वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत भी आज के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। अमेरिका और एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भारतीय बाजार की शुरुआती चाल को प्रभावित कर सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल रहता है तो घरेलू बाजार में भी उत्साह देखने को मिल सकता है। वहीं किसी बड़े आर्थिक घटनाक्रम या भू राजनीतिक तनाव की स्थिति में बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।

    तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार बाजार फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के बीच कारोबार कर सकता है। यदि प्रमुख सूचकांक शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाते हैं तो चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी बढ़ सकती है। दूसरी ओर कमजोर शुरुआत होने पर मुनाफावसूली का दबाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे माहौल में लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।

    बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को अफवाहों या तेजी से बदलते माहौल में भावनात्मक फैसले लेने से बचना चाहिए। जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश करना और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना हमेशा बेहतर रणनीति मानी जाती है। खासकर नए निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी के किसी भी शेयर में निवेश करने से बचना चाहिए।

    कुल मिलाकर 14 जुलाई का कारोबारी दिन कई अहम आर्थिक संकेतों और कॉरपोरेट नतीजों के कारण बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। निवेशकों को पूरे दिन बाजार की गतिविधियों पर नजर रखते हुए सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए ताकि बदलते माहौल में बेहतर निवेश अवसरों का लाभ उठाया जा सके।

  • मध्य पूर्व संकट से सहमा भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स 77000 के नीचे फिसला निवेशकों की बढ़ी चिंता

    मध्य पूर्व संकट से सहमा भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स 77000 के नीचे फिसला निवेशकों की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारी बिकवाली के साथ हुई और निवेशकों में सतर्कता का माहौल नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 649 अंकों की गिरावट के साथ 76920 के स्तर पर पहुंच गया जबकि निफ्टी 184 अंक टूटकर 24022 पर कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक घटनाक्रमों से बढ़ी अनिश्चितता और ऊर्जा कीमतों में तेजी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया।

    सुबह के कारोबार में केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 280 अंक टूट गया जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।

    सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो सबसे अधिक दबाव मेटल फाइनेंशियल सर्विसेज और कंजम्प्शन शेयरों पर रहा। इसके अलावा ऑटो प्राइवेट बैंक पीएसयू बैंक कमोडिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑयल एंड गैस एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते रहे। केवल आईटी और फार्मा सेक्टर ने मजबूती दिखाई और सीमित बढ़त के साथ कारोबार किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आईटी और दवा कंपनियों को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है इसलिए इन शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में टाटा स्टील इंडिगो मारुति सुजुकी एशियन पेंट्स बजाज फिनसर्व बजाज फाइनेंस एचडीएफसी बैंक एलएंडटी अल्ट्राटेक सीमेंट बीईएल टाइटन महिंद्रा एंड महिंद्रा भारती एयरटेल एसबीआई सन फार्मा आईसीआईसीआई बैंक इन्फोसिस और आईटीसी जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं टीसीएस एचसीएल टेक पावर ग्रिड और एनटीपीसी के शेयर सीमित बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

    भारतीय बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान पर की गई नई सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है।

    एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल रहा। टोक्यो शंघाई हांगकांग बैंकॉक और सोल के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए जबकि जकार्ता का बाजार हल्की बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। दूसरी ओर शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे लेकिन ताजा घटनाओं के बाद वैश्विक बाजारों का रुख बदल गया।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड चार प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई आयात बिल और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी रहेगी। यदि तनाव और बढ़ता है तो बाजार में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है जबकि हालात सामान्य होने पर निवेशकों का भरोसा दोबारा लौटने की संभावना भी बनी रहेगी।

  • 13 जुलाई को शेयर बाजार में क्या होगा बड़ा उलटफेर या नई तेजी निवेशकों के लिए जानना क्यों है जरूरी

    13 जुलाई को शेयर बाजार में क्या होगा बड़ा उलटफेर या नई तेजी निवेशकों के लिए जानना क्यों है जरूरी


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में 13 जुलाई का कारोबारी दिन निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है और अब सभी की नजर सोमवार के कारोबार पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कंपनियों के तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

    यदि एशियाई और अमेरिकी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार की शुरुआत मजबूती के साथ हो सकती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता सामने आती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

    इस सप्ताह कई बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने वाले हैं। इन नतीजों का असर बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर साफ दिखाई दे सकता है। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं कमजोर नतीजों की स्थिति में मुनाफावसूली का दबाव भी बढ़ सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल तय करेंगी। पिछले कुछ दिनों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है। यदि यह रुझान सोमवार को भी जारी रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी की संभावना मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर बिकवाली बढ़ने पर बाजार में कमजोरी भी आ सकती है।

    तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए कुछ प्रमुख स्तरों पर नजर रखना जरूरी होगा। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर टिकता है तो आगे तेजी का रास्ता खुल सकता है। वहीं महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर टूटने पर बाजार में गिरावट तेज हो सकती है। इसलिए ट्रेडर्स को स्टॉप लॉस के साथ ही कारोबार करने की सलाह दी जा रही है।

    लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य बनाए रखने का है। बाजार में आने वाले छोटे उतार चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना बेहतर रणनीति हो सकती है। जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश करने पर विचार करना चाहिए।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई का कारोबारी दिन कई महत्वपूर्ण संकेत लेकर आएगा। वैश्विक बाजारों की चाल तिमाही नतीजे विदेशी निवेशकों का रुख और आर्थिक घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह होगी कि वे अफवाहों से दूर रहें सही जानकारी के आधार पर निर्णय लें और जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता दें। यही रणनीति उन्हें बाजार के उतार चढ़ाव के बीच बेहतर अवसर दिला सकती है।

  • शेयर बाजार आउटलुक 11 जुलाई जानिए किन फैक्टर्स से तय होगी अगले सप्ताह बाजार की दिशा

    शेयर बाजार आउटलुक 11 जुलाई जानिए किन फैक्टर्स से तय होगी अगले सप्ताह बाजार की दिशा


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा क्योंकि बीएसई और एनएसई दोनों एक्सचेंज साप्ताहिक अवकाश के चलते बंद रहेंगे। हालांकि निवेशकों के लिए यह दिन अगले सप्ताह की रणनीति तैयार करने का अच्छा अवसर हो सकता है। बाजार भले ही बंद रहे लेकिन वैश्विक बाजारों की गतिविधियां कच्चे तेल की कीमतें डॉलर इंडेक्स विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले कारोबारी सत्र की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    बीते कुछ कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है। एक ओर घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेत निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहे हैं तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम बाजार की चाल पर असर डाल रहे हैं। ऐसे में अगले सप्ताह निवेशकों की नजर सबसे पहले वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर रहेगी। यदि अमेरिका और एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में भी अच्छी शुरुआत देखने को मिल सकती है।

    आईटी बैंकिंग ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर विशेष नजर बनी रहेगी। इन सेक्टरों की कई बड़ी कंपनियां तिमाही नतीजे जारी करने वाली हैं। यदि कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो संबंधित शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है। वहीं कमजोर नतीजों की स्थिति में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिलेगा क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ही ध्यान देना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में आने वाली गिरावट अच्छे शेयरों में निवेश का अवसर बन सकती है। वहीं छोटे निवेशकों को किसी भी अफवाह के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए।

    अगले कारोबारी सप्ताह में वैश्विक आर्थिक आंकड़े केंद्रीय बैंकों से जुड़े संकेत और कॉरपोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को धैर्य के साथ बाजार पर नजर रखने और सोच समझकर निवेश का फैसला लेने की सलाह दी जा रही है। सही रणनीति और मजबूत कंपनियों का चयन लंबे समय में बेहतर रिटर्न दिलाने में मददगार साबित हो सकता है।

  • आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी ने फिर पार किया 24,200 का अहम स्तर

    आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी ने फिर पार किया 24,200 का अहम स्तर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते सेंसेक्स 700 अंक से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी ने 24,200 के स्तर को फिर से पार कर लिया। बाजार में यह तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आईटी, मेटल, ऑयल एंड गैस, ऑटो और वित्तीय क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। इससे निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दिया।

    बाजार की इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। प्रमुख आईटी कंपनियों के बेहतर कारोबारी संकेतों और सकारात्मक तिमाही प्रदर्शन की उम्मीदों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। इसका असर यह रहा कि आईटी क्षेत्र के बड़े शेयरों में शुरुआती कारोबार से ही मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी का प्रभाव निफ्टी आईटी इंडेक्स पर भी स्पष्ट दिखाई दिया, जिसमें उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। इससे पूरे बाजार का निवेशक मनोबल मजबूत हुआ और अन्य क्षेत्रों में भी खरीदारी का रुख बना रहा।

    आईटी क्षेत्र की मजबूती के साथ-साथ मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों ने भी बाजार को सहारा दिया। धातु कंपनियों में बढ़ती खरीदारी और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में निवेशकों की सक्रियता ने बाजार की व्यापक मजबूती को और बल दिया। बड़े औद्योगिक समूहों के शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे प्रमुख सूचकांकों को अतिरिक्त समर्थन मिला। ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक कारोबार देखने को मिला और कई दिग्गज कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते रहे।

    वित्तीय क्षेत्र की कुछ प्रमुख गैर-बैंकिंग कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉरपोरेट नतीजे उम्मीद के अनुरूप आते हैं और वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते रहते हैं तो घरेलू शेयर बाजार में यह मजबूती आगे भी जारी रह सकती है। लगातार दूसरे दिन आई तेजी ने यह संकेत दिया है कि हाल की गिरावट के बाद निवेशक फिर से गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश करने के लिए सक्रिय हो रहे हैं।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में उभरकर सामने आया है। जब तक सूचकांक इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार में सकारात्मक रुझान जारी रहने की संभावना बनी रह सकती है। यदि खरीदारी का यह सिलसिला आगे भी कायम रहता है तो निफ्टी आने वाले कारोबारी सत्रों में नए ऊंचे स्तरों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, तिमाही नतीजों और अन्य प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर भी लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।

    कारोबार के शुरुआती घंटों में दिखी व्यापक खरीदारी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित तेजी और बड़े शेयरों में निवेशकों की सक्रिय भागीदारी से बाजार का समग्र वातावरण सकारात्मक बना रहा। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही परिणाम और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत यह तय करेंगे कि घरेलू शेयर बाजार अपनी इस तेजी को कितनी मजबूती के साथ आगे बढ़ा पाता है।