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  • गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में लौटी खरीदारी, सेंसेक्स 287 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.48 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में लौटी खरीदारी, सेंसेक्स 287 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.48 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए मंगलवार को मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और घरेलू स्तर पर फार्मा तथा पीएसयू बैंक शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को सहारा दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में बंद हुए।

    30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,656.09 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 116 अंकों यानी 0.48 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 24,335.55 के स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले सोमवार के कारोबार में बाजार में कमजोरी देखने को मिली थी।

    मंगलवार को सेंसेक्स 77,369.11 के पिछले बंद स्तर की तुलना में 73.61 अंक नीचे 77,295.49 पर खुला। शुरुआती कमजोरी के बाद सूचकांक ने तेजी पकड़ी और दिन के दौरान 297.28 अंक की बढ़त के साथ 77,666.39 के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया।

    निफ्टी भी 24,219.05 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 43.29 अंक की गिरावट के साथ 24,175.75 पर खुला। कारोबार के दौरान खरीदारी बढ़ने से इसमें सुधार आया और सूचकांक 115.5 अंक की तेजी के साथ 24,334.55 के इंट्रा-डे उच्च स्तर तक पहुंचा।

    बाजार की तेजी में फार्मा, हेल्थकेयर और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक में मजबूती दिखाई दी। इसके विपरीत निजी क्षेत्र के बैंक और मेटल से जुड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला।

    व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप में 0.54 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.10 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि निवेशकों की दिलचस्पी चुनिंदा बड़ी और मध्यम कंपनियों में बनी रही।

    निफ्टी 50 में अदाणी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थकेयर, अपोलो हॉस्पिटल्स, इंडिगो, अदाणी पोर्ट्स, श्रीराम फाइनेंस, इंफोसिस और इटरनल प्रमुख तेजी वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर एचडीएफसी लाइफ, सिप्ला और ओएनजीसी कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे।

    बाजार की धारणा को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी समर्थन मिला। अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर बाजार की अपेक्षाओं के मुकाबले अपेक्षाकृत कम सख्ती रहने की धारणा बनी, जिससे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में हालिया ऊंचाई से कुछ नरमी आई। ऊर्जा लागत में राहत ने घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बनाया।

    विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों ने हेल्थकेयर और वित्तीय क्षेत्र जैसे अपेक्षाकृत रक्षात्मक तथा घरेलू मांग पर आधारित क्षेत्रों की ओर रुख किया। घरेलू बॉन्ड बाजार में स्थिरता के संकेतों ने भी बाजार धारणा को सहारा दिया। हालांकि, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी बनी हुई है।

    बाजार participants अब महंगाई के आगामी आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख अधिकारियों की टिप्पणियों पर नजर रख रहे हैं। इन संकेतों से आगे ब्याज दरों की दिशा और वैश्विक निवेश धारणा को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

    निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार में सावधानी बनी रह सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों तथा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में संभावित बदलाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे माहौल में मंगलवार की तेजी ने निवेशकों को राहत जरूर दी, लेकिन आगे के कारोबार में वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया तनाव के बीच शेयर बाजार गिरा, सेंसेक्स 172 अंक टूटा और निफ्टी 24,220 पर बंद

    कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया तनाव के बीच शेयर बाजार गिरा, सेंसेक्स 172 अंक टूटा और निफ्टी 24,220 पर बंद


    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में शुरुआती बढ़त के बावजूद प्रमुख सूचकांक कारोबार के अंत तक लाल निशान में पहुंच गए। निवेशकों के बीच बॉन्ड यील्ड बढ़ने और ईरान से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सतर्कता दिखाई दी, जिसका असर बाजार की धारणा पर पड़ा।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 171.72 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,369.11 पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 32.95 अंक यानी 0.14 प्रतिशत फिसलकर 24,219.05 पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों ने दिन का कारोबार गिरावट के साथ समाप्त किया।

    हालांकि, बाजार ने सोमवार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की थी। सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 77,540.83 के स्तर के मुकाबले 88.72 अंक की बढ़त लेकर 77,629.56 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 248.56 अंक चढ़कर 77,789.40 के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से सेंसेक्स 339.17 अंक गिरकर 77,201.66 के निचले स्तर तक भी पहुंच गया।

    निफ्टी 50 भी 24,252 के पिछले बंद स्तर से मामूली बढ़त के साथ 24,285.05 पर खुला। कारोबार के दौरान सूचकांक ने 24,313 का इंट्रा-डे उच्चतम स्तर बनाया। इसके बाद इसमें गिरावट आई और निफ्टी 24,144.30 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि कारोबार के अंतिम चरण में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और यह 24,220 के करीब बंद हुआ।

    व्यापक बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.13 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि बड़ी कंपनियों के साथ-साथ छोटे और मध्यम शेयरों में भी निवेशकों की धारणा पूरी तरह मजबूत नहीं रही।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में आईटी, एनर्जी, मेटल और रियल एस्टेट को छोड़कर ज्यादातर सूचकांक गिरावट में बंद हुए। पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब एक प्रतिशत की गिरावट रही। निजी बैंक, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र भी दबाव में रहे। वहीं धातु और ऊर्जा से जुड़े शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी।

    निफ्टी 50 में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टीएमपीवी के शेयरों में प्रमुख गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर जेएसडब्ल्यू स्टील, हिंडाल्को, टाटा स्टील, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, डॉ. रेड्डीज और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती मजबूती के बाद ट्रेडर्स ने ईरान पर संभावित नए अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले अपनी पोजीशन कम की। निफ्टी कारोबार के दौरान 24,200 के अहम सपोर्ट स्तर से नीचे गया, लेकिन बंद होने तक इस स्तर के आसपास वापस आ गया।

    आने वाले सत्र में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ईरान पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंध और उसके जवाब में आने वाली प्रतिक्रिया बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा एनएसई की मासिक एफएंडओ एक्सपायरी भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटना होगी।

    तकनीकी स्तर पर 24,200 से 24,000 के बीच निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं 24,350 का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है। इस स्तर के ऊपर टिकने पर बाजार में तेजी मजबूत हो सकती है, जबकि सपोर्ट टूटने पर दबाव बढ़ने की संभावना रहेगी।

  • शुरुआती तेजी के बाद सपाट बंद हुआ भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 3 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,252 पर पहुंचा

    शुरुआती तेजी के बाद सपाट बंद हुआ भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 3 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,252 पर पहुंचा


    नई दिल्ली । 
    भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआती तेजी के बाद कारोबार सीमित दायरे में रहा और दोनों प्रमुख सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। दिनभर उतार चढ़ाव के बीच सेंसेक्स 3 अंक की मामूली तेजी के साथ 77,540.83 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 20.15 अंक यानी 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,252.00 पर पहुंच गया।

    बाजार को सबसे ज्यादा समर्थन मेटल और बैंकिंग शेयरों में हुई खरीदारी से मिला। निफ्टी मेटल इंडेक्स 0.86 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला प्रमुख सेक्टर रहा। इसके अलावा निफ्टी बैंक और निफ्टी पीएसई दोनों में 0.46 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी रियल्टी भी 0.40 प्रतिशत चढ़ा।

    वित्तीय सेवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े शेयरों में भी खरीदारी दिखाई दी। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस इंडेक्स 0.22 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रा 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। डिफेंस से जुड़े शेयरों में भी मजबूती रही और निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स 0.32 प्रतिशत ऊपर रहा।

    दूसरी ओर कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी एफएमसीजी 0.74 प्रतिशत, ऑटो 0.60 प्रतिशत, आईटी 0.46 प्रतिशत, कंजप्शन 0.40 प्रतिशत और हेल्थकेयर 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इससे बाजार की कुल तेजी सीमित रही और प्रमुख सूचकांक लगभग सपाट स्तर पर टिके रहे।

    व्यापक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी अपेक्षाकृत मजबूत रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 64.20 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63,735.75 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 136.30 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की तेजी रही और यह 19,977.75 के स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिला कि बड़े शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी का रुझान अधिक रहा।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में पावर ग्रिड, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एनटीपीसी, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, टाइटन, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं ट्रेंट, मारुति सुजुकी, इंडिगो, एचसीएल टेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंफोसिस, एमएंडएम, टेक महिंद्रा, आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक और बजाज फाइनेंस पर दबाव रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई को लेकर बनी आशंकाएं भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। घरेलू स्तर पर महंगाई के जोखिम, सीमित लिक्विडिटी और रिजर्व बैंक के रुख से जुड़े संकेतों के कारण भारत की 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड दो महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई है।

    इसके बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ संकेत बाजार के लिए सकारात्मक रहे। हालिया सर्विस पीएमआई आंकड़ों से घरेलू गतिविधियों में मजबूती के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद वित्तीय क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के मूल्यांकन आकर्षक नजर आ रहे हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ के कारण इन शेयरों में वैल्यू खरीदारी देखने को मिली। साथ ही मेटल की स्थिर कीमतों ने कमोडिटी आधारित शेयरों को भी समर्थन दिया।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए मिश्रित रहा। बैंकिंग और मेटल शेयरों की मजबूती ने बाजार को संभाले रखा, जबकि कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी तेजी नहीं आ सकी।

  • भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 325 अंक टूटा और निफ्टी 24,100 के नीचे बंद हुआ, निवेशकों में सतर्कता बढ़ी

    भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 325 अंक टूटा और निफ्टी 24,100 के नीचे बंद हुआ, निवेशकों में सतर्कता बढ़ी

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार बुधवार को कारोबारी सत्र के अंत में लाल निशान में बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और प्रमुख आर्थिक घटनाक्रमों से पहले निवेशकों की सतर्कता का असर घरेलू इक्विटी बाजार पर दिखाई दिया। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 325.78 अंक यानी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,909.68 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 76.60 अंक यानी 0.32 प्रतिशत कमजोर होकर 24,078.30 अंक पर रहा।

    बाजार में बुधवार को व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। प्रमुख सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस सबसे अधिक प्रभावित रहा और इसमें 1.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी एनर्जी 1.18 प्रतिशत कमजोर हुआ। मीडिया, पीएसई, इंफ्रास्ट्रक्चर और कमोडिटीज से जुड़े सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, ऑटो, सर्विसेज, फार्मा और कंजप्शन सूचकांकों में भी कमजोरी रही। इससे संकेत मिला कि बाजार में दबाव केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई प्रमुख क्षेत्रों में निवेशकों ने बिकवाली की।

    हालांकि आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच कुछ राहत दी। दोनों सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। कमजोर रुपये और कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग से आईटी कंपनियों को समर्थन मिलने की बात बाजार जानकारों ने कही।

    लार्जकैप शेयरों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 130.65 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 63,408.75 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 101.70 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की कमजोरी रही और यह 19,707.15 अंक पर रहा।

    सेंसेक्स में कुछ शेयरों ने बाजार की गिरावट को सीमित करने की कोशिश की। एचसीएल टेक, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, टाइटन, टीसीएस, इंफोसिस और ट्रेंट बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बीईएल और इंडिगो में गिरावट दर्ज की गई।

    इसके अलावा एसबीआई, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक भी कमजोर होकर बंद हुए। बैंकिंग, वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव बाजार की कमजोरी का एक कारण रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। बाजार में यह चिंता बनी हुई है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख बनाए रख सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है।

    इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बाद स्थायी कूटनीतिक समाधान को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड पर भी नजर बनी हुई है। ऊंचे क्रूड और बॉन्ड यील्ड का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है। एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया।

    बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ निवेशकों की ओर से चुनिंदा शेयरों में वैल्यू बाइंग देखने को मिली। कमजोर रुपये से आईटी कंपनियों को संभावित लाभ की उम्मीद ने इस क्षेत्र के कुछ शेयरों को समर्थन दिया। हालांकि वैश्विक संकेतों और आगामी अमेरिकी फेड मिनट्स को लेकर बाजार में सावधानी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगी।

  • बुधवार 19 अगस्त को Stock Market का क्या रहेगा हाल? तेजी आएगी या मुनाफावसूली बढ़ाएगी चिंता

    बुधवार 19 अगस्त को Stock Market का क्या रहेगा हाल? तेजी आएगी या मुनाफावसूली बढ़ाएगी चिंता


    नई दिल्ली। बुधवार 19 अगस्त को शेयर बाजार की चाल को लेकर निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर रहेगी। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला है और ऐसे में बुधवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी में हलचल बनी रहने की संभावना है। बाजार की दिशा तय करने में ग्लोबल मार्केट का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां रुपये की चाल कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों से जुड़ी खबरें अहम भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में तेजी या गिरावट किसी एक संकेत पर निर्भर नहीं करती।

    अगर वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी बाजारों में खरीदारी का माहौल रहता है तो भारतीय शेयर बाजार को भी इसका फायदा मिल सकता है। ऐसी स्थिति में निफ्टी और सेंसेक्स में शुरुआती मजबूती देखने को मिल सकती है। बैंकिंग वित्तीय सेवाओं आईटी और बड़े कंपनियों वाले शेयरों में खरीदारी बाजार को सपोर्ट दे सकती है। हालांकि ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है। इसलिए केवल शुरुआती तेजी देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है।

    दूसरी ओर अगर विदेशी बाजारों में कमजोरी रहती है या निवेशकों के बीच चिंता बढ़ाने वाली खबरें सामने आती हैं तो भारतीय बाजार पर दबाव पड़ सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की तेजी को कमजोर कर सकती है। रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी बाजार के लिए चिंता का कारण बन सकती है। खासतौर पर आयात पर निर्भर कंपनियों और कुछ सेक्टर के शेयरों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

    बुधवार के कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी खास नजर रह सकती है। इसके अलावा आईटी फार्मा ऑटो और मेटल सेक्टर में स्टॉक आधारित गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। किसी खास कंपनी से जुड़ी बड़ी खबर उसके शेयर में सामान्य बाजार से अलग तेज उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती है। इसलिए निवेशकों को केवल इंडेक्स की दिशा देखकर किसी शेयर में पैसा लगाने से बचना चाहिए।

    छोटे निवेशकों के लिए बुधवार का कारोबारी सत्र खासतौर पर सावधानी बरतने वाला हो सकता है। बाजार अगर लगातार ऊपर जाता दिखाई दे तो तेजी के पीछे भागने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और वैल्यूएशन को समझना जरूरी है। इसी तरह अचानक गिरावट आने पर घबराकर मजबूत शेयरों में जल्दबाजी में बिकवाली करना भी नुकसानदेह हो सकता है। शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को अपने स्टॉप लॉस और रिस्क मैनेजमेंट का ध्यान रखना चाहिए।

    कुल मिलाकर 19 अगस्त को शेयर बाजार की दिशा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के बीच तय होगी। बाजार में तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन उतार-चढ़ाव भी बना रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए धैर्य रखना और अपने निवेश लक्ष्य के अनुसार फैसला लेना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। किसी भी शेयर में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति कारोबार की संभावनाओं और जोखिम को समझना जरूरी है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए केवल बाजार की एक दिन की चाल देखकर निवेश का निर्णय नहीं लेना चाहिए।

  • भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेज गिरावट, सेंसेक्स 493 अंक टूटा और निफ्टी 24155 के करीब बंद हुआ

    भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेज गिरावट, सेंसेक्स 493 अंक टूटा और निफ्टी 24155 के करीब बंद हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,235.46 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत गिरकर 24,154.90 पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती कारोबार से ही दबाव दिखाई दिया और दिन बढ़ने के साथ प्रमुख सूचकांकों की कमजोरी बनी रही।

    बाजार की गिरावट में आईटी क्षेत्र की कंपनियों का प्रदर्शन प्रमुख कारणों में रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन का सबसे कमजोर प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक रहा। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में 1.42 प्रतिशत, पीएसयू बैंक में 1.01 प्रतिशत और एफएमसीजी इंडेक्स में 0.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी सर्विसेज इंडेक्स 0.68 प्रतिशत कमजोर रहा, जबकि मेटल इंडेक्स में 0.61 प्रतिशत की गिरावट आई। कंजप्शन इंडेक्स 0.50 प्रतिशत और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स 0.42 प्रतिशत नीचे बंद हुए। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार की व्यापक कमजोरी को बढ़ाने का काम किया।

    हालांकि कुछ क्षेत्रों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स 1.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ प्रमुख लाभार्थियों में रहा। मीडिया इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत, ऑटो में 0.30 प्रतिशत, हेल्थकेयर में 0.21 प्रतिशत और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 0.20 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई।

    बड़े शेयरों के साथ मिडकैप कंपनियों पर भी दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 277.60 अंक यानी 0.44 प्रतिशत गिरकर 63,539.40 पर बंद हुआ। दूसरी ओर निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट रहा और 19,808.85 के स्तर पर कारोबार समाप्त किया। इससे संकेत मिला कि व्यापक बाजार में गिरावट एक समान नहीं रही और कुछ हिस्सों में निवेशकों ने मजबूती बनाए रखी।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, बजाज फिनसर्व और एनटीपीसी बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी तरफ एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर और अल्ट्राटेक सीमेंट समेत कई बड़े शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार के प्रदर्शन पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी प्रभाव रहा। कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। ऊंची तेल कीमतों से भारत जैसे तेल आयातक देश की कंपनियों की लागत और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसके साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी बाजार के sentiment पर दबाव बनाया।

    अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम के समाप्त होने के बाद मध्य पूर्व में तनाव को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे निवेशकों के बीच मुद्रास्फीति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर सावधानी बढ़ी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि से उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के आकर्षण पर भी असर पड़ सकता है।

    आईटी शेयरों पर विशेष दबाव की वजह वैश्विक स्तर पर तकनीकी खर्च को लेकर बनी चिंताएं रहीं। ऊंची ब्याज दरों के लंबे समय तक बने रहने की आशंका से कंपनियों के प्रौद्योगिकी खर्च में कमी आने की संभावना को लेकर निवेशक सतर्क रहे।

    घरेलू अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेतकों को अपेक्षाकृत मजबूत माना जा रहा है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमत और बढ़ती इनपुट लागत कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों, तेल कीमतों और ब्याज दरों से जुड़े घटनाक्रम पर बनी रहने की संभावना है।

  • Stock Market Today: सेंसेक्स 281 अंक गिरकर 78 हजार से नीचे, निफ्टी भी कमजोर; आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली

    Stock Market Today: सेंसेक्स 281 अंक गिरकर 78 हजार से नीचे, निफ्टी भी कमजोर; आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली


    नई दिल्ली । 
    भारतीय शेयर बाजार सोमवार को लगातार दबाव के बीच लाल निशान में बंद हुआ। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,728.16 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32 प्रतिशत टूटकर 24,287.65 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट के बावजूद बाजार के मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।

    सोमवार के कारोबार में आईटी और एफएमसीजी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दिया। निफ्टी आईटी और निफ्टी एफएमसीजी प्रमुख कमजोर सेक्टरों में रहे। इनके अलावा निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके विपरीत रियल्टी और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग मजबूती के साथ बंद हुए। निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी पीएसई में भी तेजी दर्ज की गई।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी और बजाज फाइनेंस बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर इन्फोसिस, एचसीएल टेक, सन फार्मा, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही।

    आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों पर दबाव का असर पूरे बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। इसके अलावा आईटीसी, ट्रेंट, एनटीपीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारती एयरटेल समेत कई बड़े शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। बजाज फिनसर्व, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी में भी गिरावट दर्ज की गई।

    बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 34.85 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 63,817.00 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.70 अंक यानी 0.36 प्रतिशत चढ़कर 19,809.25 पर पहुंच गया।

    बाजार के मौजूदा रुख में ऊर्जा लागत एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कंपनियों की इनपुट लागत पर दबाव बना हुआ है। इसका असर निकट अवधि में निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। हालांकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कई कंपनियों के उम्मीद से बेहतर परिणामों ने आगे की कमाई को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए हैं।

    पहली तिमाही में कम लागत वाली इन्वेंट्री से कई कंपनियों के मुनाफे को सहारा मिला। हालांकि आने वाली तिमाहियों में महंगी इन्वेंट्री की खरीद बढ़ने पर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आने की आशंका बनी हुई है। इसलिए निवेशक कंपनियों की कमाई और लागत के रुझान पर विशेष नजर रख रहे हैं।

    बाजार में निवेशकों का रुझान अब उन सेक्टर और कंपनियों की ओर बढ़ रहा है, जहां भविष्य की कमाई अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है। इसी वजह से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल रही है।

    घरेलू स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और अपेक्षाकृत नरम उपभोक्ता आंकड़ों ने निकट अवधि में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका को कुछ कम किया है। ऐसे संकेत लंबी अवधि में जोखिम लेने की क्षमता को समर्थन दे सकते हैं, लेकिन घरेलू लागत और वैश्विक घटनाक्रम के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

  • भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में बंद, सेंसेक्स 113 अंक फिसला लेकिन 78 हजार के स्तर के ऊपर रहा

    भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में बंद, सेंसेक्स 113 अंक फिसला लेकिन 78 हजार के स्तर के ऊपर रहा


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को पूरे कारोबारी सत्र के दौरान सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला। वैश्विक संकेतों, महंगाई के आंकड़ों और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिमों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 113.61 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,079.96 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 40.10 अंक यानी 0.16 प्रतिशत टूटकर 24,395.85 पर बंद हुआ।

    बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद कारोबार का रुख अपेक्षाकृत सीमित रहा। प्रमुख सूचकांकों में मामूली गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी का रुझान दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 97.15 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 64,121.55 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 53.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत बढ़कर 19,875 पर पहुंच गया।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले इंडेक्स में रहा और इसमें 1.55 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। निफ्टी रियल्टी में भी 0.97 प्रतिशत की तेजी रही। इसके अलावा एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, आईटी, कंजम्पशन, मीडिया, पीएसई और ऑटो से जुड़े शेयरों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला।

    दूसरी ओर निफ्टी मेटल, प्राइवेट बैंक, कमोडिटीज, ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसयू बैंक सूचकांकों में कमजोरी रही। इससे बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों के बीच प्रदर्शन में अंतर दिखाई दिया और व्यापक स्तर पर निवेशकों का रुख पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में इंडिगो, एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एलएंडटी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इटरनल, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, एचसीएल टेक, आईटीसी, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा और एमएंडएम में बढ़त रही।

    इसके विपरीत आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट्स, इंफोसिस, टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी और एक्सिस बैंक दबाव में रहे। इन शेयरों में कमजोरी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।

    बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में भारत और अमेरिका के महंगाई आंकड़े भी शामिल रहे। बाजार जानकारों के अनुसार, दोनों देशों में महंगाई के आंकड़े अपेक्षाओं से कम रहने के कारण निवेशकों को कुछ राहत मिली। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक निकट अवधि में मौद्रिक नीति को लेकर सतर्क और संयमित रुख अपना सकते हैं।

    हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार के लिए अभी भी महत्वपूर्ण जोखिम बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए तेल कीमतों में लंबे समय तक तेजी का असर मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।

    मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी निवेशकों को जोखिम लेने से रोक रही है। इसके बावजूद कंपनियों के तिमाही नतीजों से घरेलू मांग और कॉरपोरेट प्रदर्शन को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। मजबूत कंपनियों के नतीजों ने बाहरी दबावों के प्रभाव को सीमित करने में मदद की है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, विदेशी निवेश के प्रवाह और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत संकेतों से प्रभावित हो सकती है। फिलहाल प्रमुख सूचकांकों में सीमित गिरावट और मिडकैप-स्मॉलकैप में मजबूती यह संकेत देती है कि निवेशकों का रुख सतर्क होने के बावजूद पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।

  • कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला

    कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और बढ़ती महंगाई की चिंता के बीच दबाव में नजर आया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,154.25 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 112.10 अंक यानी 0.46 प्रतिशत फिसलकर 24,471.70 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा लेकिन कारोबारी सत्र के आखिरी हिस्से में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों के साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर रही। कच्चे तेल में तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है और यही चिंता बाजार के सेंटीमेंट पर हावी रही।

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.17 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन के प्रमुख कमजोर सेक्टर रहे। इसके अलावा निफ्टी मेटल में 0.95 प्रतिशत निफ्टी इन्फ्रा में 0.86 प्रतिशत निफ्टी कमोडिटीज में 0.84 प्रतिशत निफ्टी कंजप्शन में 0.63 प्रतिशत निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.56 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स भी 0.44 प्रतिशत कमजोर रहा। इन सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार की कुल कमजोरी को और बढ़ाया।

    हालांकि बाजार में कुछ ऐसे सेक्टर भी रहे जिन्होंने गिरावट को सीमित करने का काम किया। निफ्टी फार्मा 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख इंडेक्स में रहा। निफ्टी आईटी में 0.61 प्रतिशत निफ्टी हेल्थकेयर में 0.32 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही। इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने बाजार में जोखिम बढ़ने के बावजूद चुनिंदा रक्षात्मक और मजबूत कंपनियों में खरीदारी बनाए रखी।

    लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कारोबार मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 11.85 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 63,843.85 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 43.20 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,857.15 पर पहुंच गया। सेंसेक्स में इटरनल इन्फोसिस टाइटन एचसीएल टेक और टीसीएस बढ़त के साथ बंद होने वाले प्रमुख शेयरों में रहे। इसके विपरीत अल्ट्राटेक सीमेंट एक्सिस बैंक इंडिगो भारती एयरटेल बजाज फाइनेंस पावर ग्रिड आईटीसी एमएंडएम टाटा स्टील एचयूएल एशियन पेंट्स बजाज फिनसर्व एलएंडटी सन फार्मा मारुति सुजुकी एसबीआई ट्रेंट एचडीएफसी बैंक टेक महिंद्रा एनटीपीसी आईसीआईसीआई बैंक कोटक महिंद्रा बैंक और बीईएल समेत कई दिग्गज शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को एक बार फिर महंगाई और ब्याज दरों के संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में संभावित व्यवधान और अमेरिका ईरान बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। निवेशकों की नजर अब भारत और अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है क्योंकि इनके आधार पर आगे की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार नई दिशा तय कर सकता है। हालांकि विदेशी निवेश की मजबूत आवक और कंपनियों की बेहतर कमाई बाजार के लिए राहत देने वाले संकेत बने हुए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में वैश्विक घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई के आंकड़े भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • शेयर बाजार में आज बनेगा तेजी या गिरावट का माहौल? 11 अगस्त को इन फैक्टर्स पर रहेगी निवेशकों की नजर

    शेयर बाजार में आज बनेगा तेजी या गिरावट का माहौल? 11 अगस्त को इन फैक्टर्स पर रहेगी निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली । 11 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत सावधानी और सतर्कता के साथ होने की उम्मीद है। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी ने दिनभर उतार चढ़ाव के बीच कारोबार किया और अंत में लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। ऐसे में मंगलवार के कारोबार में निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक बाजारों के रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियों कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा माहौल में एकतरफा तेजी की उम्मीद करने के बजाय सेक्टर और शेयर आधारित कारोबार ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

    निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि बाजार फिलहाल संवेदनशील स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले सप्ताह के तकनीकी संकेतों में निफ्टी के लिए करीब 24150 से 24050 का क्षेत्र अहम सपोर्ट जोन माना गया था जबकि 24400 से 24450 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध के तौर पर देखा गया। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो खरीदारी का रुझान बढ़ सकता है जबकि कमजोरी की स्थिति में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

    11 अगस्त को बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रह सकती है। पिछले सत्र में पीएसयू बैंक इंडेक्स पर दबाव देखने को मिला था इसलिए इस सेक्टर में कारोबार करते समय सावधानी जरूरी होगी। दूसरी ओर रियल्टी सेक्टर में मजबूती ने बाजार को कुछ सहारा दिया। ऐसे में जिन सेक्टरों में लगातार खरीदारी दिखाई दे रही है उनमें अवसर तलाशे जा सकते हैं लेकिन किसी भी शेयर में केवल तेजी देखकर जल्दबाजी में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। अगर विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बढ़ती है तो बाजार पर दबाव बन सकता है वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिलने वाले संकेत भी भारतीय बाजार की शुरुआती चाल को प्रभावित कर सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था और उन कंपनियों के लिए चिंता का कारण बन सकती है जिनकी लागत ईंधन पर निर्भर करती है।

    कंपनियों के तिमाही नतीजे भी इस समय बाजार के लिए अहम ट्रिगर बने हुए हैं। बेहतर कमाई और मजबूत भविष्य के संकेत देने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजों वाली कंपनियों में दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सिर्फ इंडेक्स की दिशा देखने के बजाय कंपनियों के नतीजों और उनके कारोबारी प्रदर्शन पर भी नजर रखनी चाहिए। सप्ताह के लिए बाजार के आउटलुक में भी कॉरपोरेट अर्निंग्स और मैक्रो आर्थिक परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना गया है।

    कुल मिलाकर 11 अगस्त को शेयर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है। बाजार अगर महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों के ऊपर बना रहता है तो धीरे धीरे खरीदारी लौट सकती है जबकि कमजोर वैश्विक संकेत विदेशी बिकवाली या अहम सपोर्ट टूटने की स्थिति में दबाव बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए धैर्य रखना जोखिम का सही आकलन करना और बिना पूरी जानकारी के किसी शेयर में बड़ा दांव लगाने से बचना बेहतर रणनीति हो सकती है। यह बाजार विश्लेषण सामान्य जानकारी के लिए है इसे निवेश की सलाह न माना जाए और निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना उचित है।