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  • वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा, सेंसेक्स 77 हजार के पार पहुंचा, शुरुआती कारोबार में दिखी चौतरफा तेजी

    वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा, सेंसेक्स 77 हजार के पार पहुंचा, शुरुआती कारोबार में दिखी चौतरफा तेजी

    नई दिल्ली । मजबूत वैश्विक संकेतों और घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी के चलते भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को सकारात्मक शुरुआत की। कारोबार के शुरुआती चरण में ही सेंसेक्स 77 हजार अंक के स्तर को पार कर गया, जबकि निफ्टी भी उल्लेखनीय बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस मजबूती ने निवेशकों के बीच भरोसे को और मजबूत किया तथा अधिकांश प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का माहौल देखने को मिला।

    शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 683 अंकों की बढ़त के साथ 77,425 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 205 अंक मजबूत होकर 24,168 के करीब कारोबार करता दिखा। प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक माहौल बना रहा।

    बाजार की इस तेजी में सूचना प्रौद्योगिकी और मेटल सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे संबंधित सूचकांक प्रमुख बढ़त वाले सेक्टरों में शामिल रहे। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, प्राइवेट बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कमोडिटी क्षेत्र से जुड़े शेयरों ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में सीमित दबाव देखने को मिला, हालांकि इसका व्यापक बाजार की दिशा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।

    प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक रुझान दर्ज किया गया। बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, सीमेंट और मेटल क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों का विश्वास विभिन्न सेक्टरों में व्यापक रूप से बना हुआ है और बाजार की तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के कारोबारी सत्रों में बाजार में आई गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आने और घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने भी बाजार की धारणा को मजबूत किया है। यही कारण है कि बाजार में निवेशकों का विश्वास लगातार बेहतर होता दिखाई दे रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों का सकारात्मक रुख भी भारतीय बाजार के लिए सहायक साबित हुआ। एशिया के अधिकांश प्रमुख शेयर बाजार बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जबकि अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बेहतर रुझान का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला, जिससे शुरुआती कारोबार में खरीदारी का दबदबा बना रहा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पिछले कारोबारी सत्र में सीमित निकासी दर्ज की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में उल्लेखनीय निवेश जारी रखा। घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया और बाजार को स्थिरता प्रदान की। यही संतुलन शुक्रवार की शुरुआत में भी सकारात्मक माहौल बनाए रखने में महत्वपूर्ण रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेश प्रवाह और कॉरपोरेट परिणामों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि यही कारक निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • भारी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, 24,000 के करीब पहुंचा निफ्टी लेकिन वैश्विक तनाव से ऊपरी स्तरों पर दबाव कायम

    भारी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, 24,000 के करीब पहुंचा निफ्टी लेकिन वैश्विक तनाव से ऊपरी स्तरों पर दबाव कायम

    नई दिल्ली । बुधवार की तेज गिरावट के बाद गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार ने राहत की सांस ली और शुरुआती कारोबार में सकारात्मक रुख के साथ शुरुआत की। शुरुआती घंटों में निवेशकों की चुनिंदा खरीदारी के दम पर प्रमुख सूचकांक बढ़त में दिखाई दिए। हालांकि बाजार में रिकवरी के संकेत जरूर मिले, लेकिन निवेशकों का विश्वास अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है। वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच बाजार की चाल अब भी सतर्कता का संकेत दे रही है।

    कारोबार की शुरुआत में निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने बढ़त दर्ज की। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 24,000 के करीब पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स भी हरे निशान में कारोबार करता दिखाई दिया। पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शुरुआती बढ़त को स्थायी मजबूती का संकेत नहीं माना जा सकता।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के सामने ऊपरी स्तरों पर अब भी मजबूत प्रतिरोध मौजूद है। यदि सूचकांक 24,000 के आसपास मजबूती के साथ टिककर कारोबार करता है और कुछ समय तक स्थिरता बनाए रखता है, तभी आगे की रिकवरी को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव भी लगातार बना रह सकता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहने की संभावना है।

    बाजार की दिशा पर वैश्विक घटनाक्रम का भी स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि ऊर्जा लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो महंगाई, कंपनियों के परिचालन खर्च और कॉर्पोरेट आय पर दबाव बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।

    गुरुवार के कारोबार में कुछ बड़े शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। चुनिंदा लार्जकैप कंपनियों में खरीदारी के कारण प्रमुख सूचकांकों को शुरुआती मजबूती मिली। विशेष रूप से फार्मा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही, जबकि रियल एस्टेट सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बना रहा, जिससे इस सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दिया।

    विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निवेशक व्यापक खरीदारी के बजाय गुणवत्ता वाले और मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति पहले की तुलना में सीमित बनी हुई है और अधिकांश निवेशक वैश्विक संकेतों पर करीबी नजर रख रहे हैं। यही वजह है कि हर बढ़त पर सीमित मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक माहौल में स्थिरता आती है और घरेलू बाजार महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हो सकता है। फिलहाल बाजार में सावधानी के साथ निवेश की रणनीति अपनाई जा रही है और विशेषज्ञ भी चुनिंदा क्षेत्रों में संतुलित निवेश की सलाह दे रहे हैं।

  • आज बाजार में दिख सकता है उतार चढ़ाव विदेशी संकेतों के बीच समझदारी से निवेश करने की सलाह

    आज बाजार में दिख सकता है उतार चढ़ाव विदेशी संकेतों के बीच समझदारी से निवेश करने की सलाह


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में आज नौ जुलाई को कारोबार की शुरुआत सतर्क माहौल के बीच हल्की मजबूती के साथ होने की संभावना जताई जा रही है। वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों के कारण निवेशक पूरे दिन सोच समझकर कदम उठा सकते हैं। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी सीमित बढ़त के साथ खुल सकते हैं लेकिन दिनभर बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और मजबूत कंपनियों में ही निवेश की सलाह दे रहे हैं।

    बीते कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार ने स्थिर प्रदर्शन किया था जबकि विदेशी बाजारों में अलग अलग रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजारों में सीमित बढ़त दर्ज की गई जबकि एशियाई बाजारों में मिला जुला कारोबार देखने को मिला। इसका असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर भी दिखाई दे सकता है। निवेशकों की नजर आज वैश्विक आर्थिक संकेतों कच्चे तेल की कीमतों डॉलर की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद बिक्री पर बनी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी बैंकिंग एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर के शेयर आज बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि इन क्षेत्रों में खरीदारी का माहौल बना रहता है तो प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ कारोबार कर सकते हैं। दूसरी ओर मुनाफावसूली बढ़ने पर बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। इसलिए हर तेजी को लंबी अवधि का संकेत मानना फिलहाल उचित नहीं होगा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल तय करने में अहम रहेंगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं वैश्विक स्तर पर किसी भी नकारात्मक खबर या आर्थिक अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर तुरंत दिखाई दे सकता है। इसलिए निवेशकों को हर बड़ी खबर पर नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।

    विश्लेषकों का कहना है कि छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी गतिविधि देखने को मिल सकती है लेकिन इनमें जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। ऐसे शेयरों में निवेश केवल पर्याप्त जानकारी और रणनीति के साथ ही करना बेहतर माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि अल्पकालिक उतार चढ़ाव से घबराने के बजाय निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार निर्णय लें।

    दीर्घकालिक निवेश करने वालों के लिए मौजूदा बाजार अभी भी कई अच्छे अवसर उपलब्ध करा सकता है। मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों के शेयरों में चरणबद्ध निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न दे सकता है। वहीं इंट्रा डे ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को बाजार खुलने के बाद शुरुआती रुझान को ध्यान से समझकर ही कोई बड़ा फैसला लेना चाहिए।

    कुल मिलाकर आज भारतीय शेयर बाजार में हल्की सकारात्मक शुरुआत की उम्मीद है लेकिन पूरे कारोबारी सत्र के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे माहौल में धैर्य संतुलित रणनीति और सोच समझकर किया गया निवेश ही बेहतर परिणाम देने की संभावना रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अफवाहों के बजाय आधिकारिक आंकड़ों और विश्वसनीय बाजार संकेतों के आधार पर लिया गया निर्णय निवेशकों के लिए अधिक लाभदायक साबित होगा।

  • कच्चे तेल में उछाल और वैश्विक तनाव का असर, तीन महीने की सबसे बड़ी गिरावट के साथ धड़ाम हुए सेंसेक्स-निफ्टी

    कच्चे तेल में उछाल और वैश्विक तनाव का असर, तीन महीने की सबसे बड़ी गिरावट के साथ धड़ाम हुए सेंसेक्स-निफ्टी


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और निवेशकों की सतर्कता के चलते घरेलू बाजार में पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बिकवाली हावी रही। दिन के अंत में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके साथ ही पिछले कई कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला भी थम गया और निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी दर्ज की गई।

    बाजार बंद होने पर बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15 प्रतिशत टूटकर 76,503.60 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 516.65 अंक यानी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,882.05 अंक पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान दोनों सूचकांकों ने दिन का निचला स्तर भी छुआ और पिछले तीन महीनों की सबसे बड़ी दैनिक गिरावट दर्ज की।

    गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी उल्लेखनीय कमजोरी के साथ बंद हुए। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि बिकवाली लगभग सभी वर्गों के शेयरों में फैली रही और निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाना उचित समझा।

    सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो बैंकिंग, निजी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, एफएमसीजी, मीडिया, ऑटो, ऑयल एंड गैस तथा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक दबाव रहा। हालांकि फार्मा और मेटल क्षेत्र में भी गिरावट दर्ज हुई, लेकिन अन्य क्षेत्रों की तुलना में नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौरान निवेशक रक्षात्मक क्षेत्रों की ओर झुकाव दिखाते हैं, जिससे कुछ सेक्टरों में गिरावट सीमित रही।

    दिनभर की बिकवाली का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव माना गया। हालिया घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में हालात फिर से संवेदनशील हो गए हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों में छह प्रतिशत से अधिक की तेजी ने आयातक देशों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की महंगाई का असर महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है।

    विदेशी घटनाक्रम का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दिया। रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर बंद हुआ, जिससे आयात लागत बढ़ने की आशंका और मजबूत हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर टिकती हैं तो भारतीय बाजारों में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

    तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 23,780 से 23,750 अंक का दायरा महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर से नीचे टिकता है तो गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं 24,020 से 24,050 अंक का स्तर निकट अवधि में प्रमुख प्रतिरोध रहेगा। बाजार की अगली दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने और अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • आज का शेयर बाजार 8 जुलाई 2026: बैंकिंग और आईटी शेयरों से उम्मीद, वैश्विक संकेत तय करेंगे बाजार की दिशा

    आज का शेयर बाजार 8 जुलाई 2026: बैंकिंग और आईटी शेयरों से उम्मीद, वैश्विक संकेत तय करेंगे बाजार की दिशा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में 8 जुलाई का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिला है और अब निवेशकों की नजर घरेलू आर्थिक संकेतों के साथ साथ वैश्विक बाजारों की गतिविधियों पर भी टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज बाजार की शुरुआत हल्के उतार चढ़ाव के साथ हो सकती है लेकिन कारोबार के दौरान कई सेक्टरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिल सकती है।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी बनी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी को मजबूती मिल सकती है। वहीं यदि मुनाफावसूली का दौर बढ़ता है तो बाजार पर दबाव भी देखने को मिल सकता है।

    आज बैंकिंग आईटी ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं। बैंकिंग शेयरों में स्थिरता और आईटी कंपनियों में वैश्विक मांग के संकेत बाजार को समर्थन दे सकते हैं। ऑटो सेक्टर में भी अच्छी बिक्री के आंकड़ों की उम्मीद निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है। वहीं मानसून की अच्छी प्रगति का असर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े शेयरों पर भी दिखाई दे सकता है।

    रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतें भी आज बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है तो इसका फायदा भारतीय बाजार को मिल सकता है। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को आज जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए। बाजार खुलने के शुरुआती एक घंटे के दौरान रुझान स्पष्ट होने के बाद ही नई खरीदारी करना अधिक सुरक्षित माना जा सकता है। जिन निवेशकों का नजरिया लंबी अवधि का है वे मजबूत कंपनियों में गिरावट आने पर चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपना सकते हैं।

    आज मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी हलचल देखने को मिल सकती है लेकिन इनमें जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। ऐसे में केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही निवेश करना बेहतर रहेगा। इंट्राडे ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को स्टॉप लॉस का सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि अचानक आने वाले उतार चढ़ाव से नुकसान सीमित रखा जा सके।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद और लगातार बढ़ते निवेश के कारण लंबी अवधि में शेयर बाजार की तस्वीर सकारात्मक बनी हुई है। हालांकि अल्पकाल में वैश्विक घटनाक्रम ब्याज दरों के संकेत और विदेशी बाजारों की चाल के कारण अस्थिरता बनी रह सकती है।

    कुल मिलाकर 8 जुलाई का कारोबारी दिन अवसर और सावधानी दोनों का संकेत दे रहा है। निवेशकों को अफवाहों या अपुष्ट जानकारी के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए और केवल विश्वसनीय आंकड़ों तथा अपनी वित्तीय योजना के अनुसार ही निर्णय लेना चाहिए। समझदारी और धैर्य के साथ किया गया निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की संभावना बढ़ा सकता है।

  • सेंसेक्स-निफ्टी सीमित बढ़त के साथ खुले, आईटी सेक्टर में खरीदारी रही हावी, एफपीआई के रुख में बदलाव से बाजार को मिला सहारा

    सेंसेक्स-निफ्टी सीमित बढ़त के साथ खुले, आईटी सेक्टर में खरीदारी रही हावी, एफपीआई के रुख में बदलाव से बाजार को मिला सहारा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत सीमित बढ़त के साथ की। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट स्तर पर कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि आईटी क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। निवेशकों का रुझान फिलहाल चुनिंदा सेक्टरों की ओर बना हुआ है और बाजार में सतर्क आशावाद का माहौल देखने को मिल रहा है।

    शुरुआती कारोबार में आईटी कंपनियों के शेयर सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बने। इस क्षेत्र में लगातार खरीदारी के कारण संबंधित सेक्टोरल इंडेक्स अन्य सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता नजर आया। इसके अलावा वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, ऑटो, हेल्थकेयर, ऑयल एंड गैस, रियल्टी और सर्विसेज सेक्टर में भी सकारात्मक कारोबार देखने को मिला, जिससे बाजार का समग्र रुख संतुलित बना रहा।

    दूसरी ओर धातु, रक्षा, मीडिया, मैन्युफैक्चरिंग, सार्वजनिक उपक्रमों और कमोडिटी से जुड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन क्षेत्रों में बिकवाली के कारण कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते रहे। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल मजबूत बुनियादी संकेतों वाले क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    लार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। व्यापक बाजार में किसी बड़ी तेजी या गिरावट के बजाय संतुलित कारोबार देखने को मिला। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक फिलहाल बड़े फैसले लेने के बजाय बाजार के अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

    आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के साथ कुछ वित्तीय और उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों में अच्छी मजबूती देखने को मिली। वहीं कुछ औद्योगिक, स्टील, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा। बाजार का यह मिश्रित प्रदर्शन निवेशकों की सेक्टर आधारित रणनीति को दर्शाता है, जहां अलग-अलग उद्योगों में अलग रुख अपनाया जा रहा है।

    वैश्विक बाजारों का प्रभाव भी भारतीय शेयर बाजार पर सीमित रूप से दिखाई दिया। अधिकांश एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल रहा, जबकि अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों में आई मजबूती का सकारात्मक असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी दिखाई दिया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में जिन दो प्रमुख कारणों से बाजार पर दबाव बना हुआ था, उनमें अब राहत के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी से आयात लागत को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख भी बदलता नजर आ रहा है। लगातार बिकवाली के बाद अब विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी शुरू होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय खरीदारी भी बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है। विदेशी और घरेलू निवेशकों की भागीदारी से बाजार में संतुलन बना हुआ है, जिससे आने वाले समय में निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो भारतीय शेयर बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर आगामी आर्थिक संकेतकों, कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक बाजारों की दिशा पर बनी हुई है।

  • वैश्विक संकेतों और मजबूत खरीदारी से बाजार में लौटी रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी मजबूती के साथ बंद, ऑटो और रियल्टी शेयरों ने दिखाई ताकत

    वैश्विक संकेतों और मजबूत खरीदारी से बाजार में लौटी रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी मजबूती के साथ बंद, ऑटो और रियल्टी शेयरों ने दिखाई ताकत

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चौथे सत्र में मजबूती का सिलसिला कायम रखते हुए बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। सकारात्मक वैश्विक संकेतों, प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी और निवेशकों के बेहतर भरोसे के चलते बाजार में पूरे दिन उत्साह का माहौल बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे बाजार की सकारात्मक धारणा और मजबूत हुई।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 521.16 अंकों की बढ़त के साथ 78,285.07 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 159.50 अंक चढ़कर 24,430.35 अंक के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार से ही दोनों सूचकांकों में तेजी का रुख दिखाई दिया और दिनभर खरीदारी का दबदबा बना रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 78,398.06 अंक और निफ्टी 24,458.65 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सफल रहे।

    व्यापक बाजार में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों तक ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। बाजार की व्यापक मजबूती को निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के रूप में देखा।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो तथा ऑयल एंड गैस कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा मेटल, फार्मा, हेल्थकेयर और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि आईटी, मीडिया और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, जिसके कारण इन क्षेत्रों के सूचकांक दबाव में रहे।

    प्रमुख कंपनियों में एचडीएफसी बैंक, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, बजाज ऑटो और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर कोटक महिंद्रा बैंक, टीसीएस, कोल इंडिया, बजाज फिनसर्व और मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद बाजार की समग्र दिशा सकारात्मक बनी रही।

    बाजार में आई इस तेजी का सीधा लाभ निवेशकों को भी मिला। कारोबार समाप्त होने तक सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 482.33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब दो लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का मनोबल और मजबूत हुआ।

    विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में नरमी, कच्चे तेल की अपेक्षाकृत स्थिर कीमतें, पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों से पहले सकारात्मक माहौल तथा घरेलू स्तर पर मजबूत खरीदारी ने बाजार को मजबूती प्रदान की है। इन कारकों ने निवेशकों के विश्वास को बढ़ाया और बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    तकनीकी संकेतक भी फिलहाल बाजार के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर टिके हुए हैं, जिससे निकट अवधि में सकारात्मक रुझान बने रहने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी आने वाले सत्रों में प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार करने में सफल रहता है तो बाजार में तेजी का अगला चरण देखने को मिल सकता है। वहीं, किसी भी सीमित गिरावट की स्थिति में निचले स्तरों पर खरीदारी का समर्थन मिलने की संभावना बनी हुई है, जिससे बाजार की मजबूती आगे भी बरकरार रह सकती है।

  • बाजार में लौटा निवेशकों का भरोसा, चौथे दिन भी जारी रही तेजी; बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार उछाल

    बाजार में लौटा निवेशकों का भरोसा, चौथे दिन भी जारी रही तेजी; बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार उछाल

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। लगातार चौथे सत्र में बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की, जिससे निवेशकों का विश्वास और मजबूत होता नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 24,350 के स्तर के पार पहुंच गया। बाजार की इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग शेयरों का रहा, जहां निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के कई प्रमुख बैंकों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

    कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों का रुझान मजबूत बना रहा। बेहतर मानसून की संभावनाओं, घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार और विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने बाजार के माहौल को सकारात्मक बनाए रखा। शुरुआती सत्र में प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।

    बैंकिंग सेक्टर ने बाजार की तेजी में अहम भूमिका निभाई। कई प्रमुख निजी बैंकों के शेयरों में उल्लेखनीय खरीदारी देखने को मिली, जिससे बैंकिंग सूचकांक में अच्छी मजबूती आई। वित्तीय क्षेत्र के अलावा रक्षा, दूरसंचार, इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। इन क्षेत्रों में आई मजबूती ने बाजार को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    हालांकि सभी क्षेत्रों में तेजी का माहौल नहीं रहा। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे आईटी सूचकांक पर दबाव बना। इसके अलावा कुछ ऑटो, पेंट और एविएशन कंपनियों के शेयर भी शुरुआती कारोबार में कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। इसके बावजूद बाजार की समग्र दिशा सकारात्मक बनी रही और प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते रहे।

    व्यापक बाजार में भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में सीमित लेकिन स्थिर बढ़त दर्ज की गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि केवल बड़ी कंपनियों तक ही खरीदारी सीमित नहीं रही, बल्कि निवेशकों ने मध्यम और छोटी कंपनियों में भी निवेश करना जारी रखा। व्यापक भागीदारी को बाजार की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग स्थिर स्तर पर खुला। मुद्रा बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव की अनुपस्थिति ने भी निवेशकों को राहत दी। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली, जिसे आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ऊर्जा लागत में कमी का प्रभाव आने वाले समय में कई उद्योगों के परिचालन खर्च पर भी पड़ सकता है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत अनुकूल बने रहते हैं और विदेशी निवेशकों का निवेश जारी रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी कायम रह सकता है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर भी नजर बनाए रखनी होगी।

    लगातार चौथे दिन दर्ज हुई यह तेजी इस बात का संकेत है कि बाजार में फिलहाल निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। आने वाले कारोबारी सत्रों में आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक संकेतों और कॉरपोरेट प्रदर्शन के आधार पर बाजार की आगे की दिशा तय होगी, लेकिन फिलहाल शुरुआती रुझान निवेशकों के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है।

  • 8वें वेतन आयोग से EPF ब्याज और शेयर बाजार की तेजी तक, जानिए दिनभर की 5 सबसे बड़ी कारोबारी हलचलें

    8वें वेतन आयोग से EPF ब्याज और शेयर बाजार की तेजी तक, जानिए दिनभर की 5 सबसे बड़ी कारोबारी हलचलें

    नई दिल्ली । कारोबारी जगत के लिए शुक्रवार का दिन कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से भरा रहा। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ा नया अपडेट सामने आया, वहीं करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों के लिए ब्याज जमा होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। इसके अलावा पूंजी बाजार में अदाणी एंटरप्राइजेज की बड़ी फंड जुटाने की पहल, सोने-चांदी की कीमतों में तेजी और घरेलू शेयर बाजार की मजबूत बढ़त दिनभर चर्चा का केंद्र बनी रही।

    सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े 8वें वेतन आयोग ने आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराने की समय-सीमा बढ़ा दी है। आयोग के लिए विभिन्न विभागों से प्राप्त होने वाला यह डेटा भविष्य में वेतन, पेंशन और भत्तों से संबंधित सिफारिशों का आधार बनेगा। समय-सीमा बढ़ाए जाने से संबंधित विभागों और संस्थानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

    इधर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े करोड़ों खाताधारकों के लिए भी राहतभरी खबर रही। वित्त वर्ष के लिए घोषित ब्याज राशि खातों में जमा किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से पात्र खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि पहुंचाई जाएगी। इससे नौकरीपेशा वर्ग को अपनी बचत पर अतिरिक्त लाभ मिलेगा और लंबे समय से जारी इंतजार समाप्त होगा।

    कॉरपोरेट क्षेत्र में अदाणी एंटरप्राइजेज की क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला। घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से उम्मीद से अधिक रुचि दिखाई गई, जिसके बाद कंपनी ने अपने फंड जुटाने के आकार में भी वृद्धि की। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेशकों के बढ़ते विश्वास और कंपनी की दीर्घकालिक योजनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का संकेत है।

    कीमती धातुओं के बाजार में भी शुक्रवार को तेजी का रुख देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के प्रभाव से सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो आने वाले समय में दोनों धातुओं की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ती रुचि भी इस तेजी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।

    शेयर बाजार ने भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई और निवेशकों की खरीदारी से बाजार का रुख सकारात्मक बना रहा। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और चुनिंदा बड़े शेयरों में खरीदारी का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया। हालांकि विशेषज्ञों ने निवेशकों को वैश्विक बाजारों, विशेषकर प्रौद्योगिकी क्षेत्र में जारी उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम घरेलू बाजार की दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबारी दिन नौकरीपेशा वर्ग, निवेशकों और पूंजी बाजार से जुड़े सभी वर्गों के लिए महत्वपूर्ण रहा। वेतन आयोग और EPF से जुड़े अपडेट जहां आम कर्मचारियों के लिए अहम रहे, वहीं पूंजी बाजार, बुलियन और कॉरपोरेट गतिविधियों में आई तेजी ने आर्थिक गतिविधियों को नई चर्चा का विषय बना दिया।

  • आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त के साथ बंद, निवेशकों का भरोसा मजबूत

    आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त के साथ बंद, निवेशकों का भरोसा मजबूत

    नई दिल्ली । सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार का समापन किया। शुरुआती सत्र में जोरदार बढ़त दर्ज करने के बाद बाजार ने दिनभर उतार-चढ़ाव का सामना किया, लेकिन अंततः प्रमुख सूचकांक हरे निशान पर बंद होने में सफल रहे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 250 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 77,763 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 90 अंकों से ज्यादा मजबूत होकर 24,270 के ऊपर टिकने में सफल रहा। लगातार दूसरे सत्र में सकारात्मक रुख ने निवेशकों के विश्वास को और मजबूत किया।

    दिनभर के कारोबार में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक सहारा दिया। इस सेक्टर में लगातार खरीदारी देखने को मिली, जिसके कारण प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। मजबूत निवेश के चलते तकनीकी क्षेत्र बाजार की बढ़त का प्रमुख आधार बना और निवेशकों ने इस सेक्टर में विशेष रुचि दिखाई।

    दूसरी ओर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों पर दबाव बना रहा। कई बड़े बैंकिंग शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे बाजार की बढ़त कुछ सीमित रही। इसके बावजूद अन्य क्षेत्रों में हुई खरीदारी ने इस कमजोरी की भरपाई कर दी और प्रमुख सूचकांकों को सकारात्मक दायरे में बनाए रखा।

    कारोबार की शुरुआत भी बेहद उत्साहजनक रही थी। शुरुआती घंटों में सेंसेक्स में 650 अंकों तक की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 24,375 के स्तर के करीब पहुंच गया। आईटी, मेटल, फार्मा और केमिकल सेक्टर में मजबूत खरीदारी के चलते शुरुआती कारोबार में बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि दिन बढ़ने के साथ निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की, जिससे शुरुआती बढ़त कुछ कम हुई, लेकिन बाजार अंत तक मजबूती बनाए रखने में सफल रहा।

    विदेशी संकेतों ने भी घरेलू बाजार के माहौल को समर्थन दिया। वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों और निवेशकों की सकारात्मक धारणा का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। इसी कारण दिनभर निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर बना रहा और कई प्रमुख शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई।

    मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में रुपये में मजबूती दर्ज होने से आयात आधारित कंपनियों और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की स्थिरता और वैश्विक संकेत निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निकट अवधि में निवेशकों को सतर्क आशावादी रणनीति अपनानी चाहिए। उनका मानना है कि निफ्टी का 24,000 के ऊपर बने रहना तेजी के रुख को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि बाजार 24,300 और उसके ऊपर के स्तर को पार करने में सफल रहता है तो आगे और मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं, किसी भी गिरावट की स्थिति में 24,050 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में सीमित सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि निवेशक वैश्विक तकनीकी शेयरों में चल रही गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखें, क्योंकि आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं कारकों का बाजार की चाल पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।