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  • विदिशा में डकैती: चौकीदार पर पत्थर बरसाकर बदमाशों ने 29 लाख रुपये की 12 किलो चांदी लूटी

    विदिशा में डकैती: चौकीदार पर पत्थर बरसाकर बदमाशों ने 29 लाख रुपये की 12 किलो चांदी लूटी


    विदिशा । मध्य प्रदेश के विदिशा में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात को एक बड़ी डकैती की घटना सामने आई है। खरीफाटक रोड पर स्थित अरिहंत ज्वेलर्स की दुकान पर आठ से अधिक हथियारबंद बदमाशों ने हमला कर 29 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की 12 किलो चांदी लूट ली। इस डकैती में बदमाशों ने सबसे पहले वहां तैनात चौकीदारों पर पत्थर फेंके और फिर दुकान का शटर उखाड़कर अंदर रखी सोने और चांदी की ज्वेलरी चुरा ली।

    सीसीटीवी फुटेज के अनुसार यह घटना रात के ढाई बजे के आसपास हुई थी। बदमाशों ने बाउंड्रीवाल कूदकर दुकान तक पहुंचने का रास्ता बनाया। यहां तक कि उन्होंने दुकान के पीछे की बाउंड्री को तोड़ दिया और तारफेंसिंग हटा दी। घटना के दौरान चौकीदार अतरसिंह विश्वकर्मा और अमित शर्मा को बदमाशों ने पत्थरों से हमला किया और उन्हें करीब 500 मीटर तक खदेड़ा।

    सूचना मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने बताया कि इस घटना के बाद पुलिस ने आठ टीमों का गठन किया है। इनमें से कुछ टीमों को आसपास के जिलों में भेजा गया है और कुछ तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। पुलिस को शक है कि बदमाश चार पहिया वाहन का इस्तेमाल कर फरार हुए हो सकते हैं और वह अन्य जिलों से आए हो सकते हैं।

    एसपी ने बताया कि व्यापारियों को पहले ही सतर्क किया गया था कि वे अपनी दुकानों में ज्यादा ज्वेलरी न रखें। इस घटना के बाद व्यापारियों में दहशत फैल गई है और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है और जल्द ही बदमाशों को पकड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • 4,400 से 1.4 लाख तक: 25 साल में सोने ने दिया निवेशकों को सबसे शानदार रिटर्न

    4,400 से 1.4 लाख तक: 25 साल में सोने ने दिया निवेशकों को सबसे शानदार रिटर्न


    नई दिल्ली।पिछले 25 वर्षों में अगर किसी निवेश ने लगातार और मजबूत रिटर्न दिया है, तो वह सोना रहा है। वर्ष 1999 के अंत में सोने की कीमत लगभग ₹4,400 प्रति 10 ग्राम थी। दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर ₹1.4 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर चुकी है। इस दौरान सोने ने औसतन 14.3% सालाना रिटर्न दिया, जो भारतीय शेयर बाजार और अन्य पारंपरिक निवेश विकल्पों से कहीं अधिक है।विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में यह तेजी कई कारणों से आई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती ने सोने की मांग को बढ़ाया। ब्याज दरों में कमी से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे डॉलर में कारोबार होने वाली कीमती धातुएँ अन्य मुद्राओं के लिए सस्ती पड़ीं। इसका सीधा असर सोने की कीमतों और मांग पर पड़ा।

    वर्ष 2025 सोने और चांदी दोनों के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। इस साल सोने की कीमतों में 70% से अधिक की तेजी आई, जबकि चांदी ने 160% तक का उछाल दिखाया। यह प्रदर्शन 1979 के बाद सबसे मजबूत सालाना बढ़त माना जा रहा है। न केवल भारत, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं ने निवेशकों को आकर्षित किया।इसी अवधि में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। पिछले 25 वर्षों में सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमशः लगभग 11.5% और 11.7% का औसत सालाना रिटर्न दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सेंसेक्स को चांदी के बराबर रिटर्न देना होता, तो आज इसका स्तर लगभग 1.6 लाख अंक के आसपास होता, जबकि वास्तविकता में यह करीब 85,000 के स्तर पर है।

    चांदी की तेजी के पीछे भी विशेष कारण हैं। सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल EV और सेमीकंडक्टर जैसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में इसकी बढ़ती मांग ने कीमतों को समर्थन दिया। द सिल्वर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता और औद्योगिक मांग के बीच चांदी की सप्लाई अपेक्षाकृत धीमी रही, जिससे कीमतों में और तेजी आई।भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति और बचत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड से जुड़े विशेषज्ञ विक्रम धवन का कहना है कि सोने को पोर्टफोलियो में शामिल करना संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। गोल्ड ETF के जरिए निवेश करना आज एक सुरक्षित और आसान विकल्प बन चुका है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि अल्पकाल में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। फिर भी मौजूदा वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों में ये दोनों धातुएँ निवेशकों के लिए मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनी हुई हैं।निवेशक इस तथ्य को भी ध्यान में रखें कि सोना और चांदी लंबे समय में पूंजी सुरक्षा और स्थिर रिटर्न का बेहतर माध्यम साबित हुए हैं। साथ ही, डिजिटल और म्यूचुअल फंड जैसे आधुनिक निवेश विकल्प ने इसे और भी सुलभ बना दिया है।

  • IBJA रिपोर्ट: चांदी और सोने ने तोड़े रिकॉर्ड, निवेशकों के लिए नई रफ्तार

    IBJA रिपोर्ट: चांदी और सोने ने तोड़े रिकॉर्ड, निवेशकों के लिए नई रफ्तार


    नई दिल्ली।देश के सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों ने नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन IBJA की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी ने साल 2025 में 165 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की और 26 दिसंबर को यह ₹2,28,107 प्रति किलो पर पहुंच गई। 19 दिसंबर को चांदी ₹2,00,336 प्रति किलो पर थी, जो मात्र एक हफ्ते में 27,771 रुपए की तेज वृद्धि दर्शाती है। यह लगातार पांचवां सप्ताह है जब चांदी में मजबूती देखने को मिली है।हफ्तेभर के कारोबार में चांदी ने चार बार नया ऑल टाइम हाई बनाया। शुक्रवार को यह ₹9,124 की एकदिनी तेजी के साथ बंद हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी केवल सट्टा नहीं, बल्कि मजबूत मांग और वैश्विक आर्थिक कारकों का नतीजा है।

    सोने की कीमतों में भी उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। 19 दिसंबर को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,31,779 पर था, जो 26 दिसंबर को बढ़कर ₹1,37,956 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह अब तक का उच्चतम स्तर है। घरेलू सोने की कीमतों में यह बढ़त न सिर्फ स्थानीय मांग बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों से भी प्रभावित मानी जा रही है।साल 2025 की शुरुआत के आंकड़े देखें तो 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोना ₹76,162 प्रति 10 ग्राम था। इसका मतलब है कि सोने में इस साल 81 प्रतिशत की बढ़त हुई। वहीं, चांदी ₹86,017 प्रति किलो से बढ़कर ₹2,28,107 प्रति किलो पर पहुंच गई, यानी सालाना आधार पर 165 प्रतिशत की तेज वृद्धि।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में तेजी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहला, अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती के संकेतों से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोना निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन गया। दूसरा, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनाव ने सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत किया। तीसरा, चीन और अन्य देशों के केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोने की खरीद कर रहे हैं।चांदी की कीमतों में उछाल की वजहें थोड़ी अलग हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में बढ़ती खपत ने औद्योगिक मांग को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, अमेरिका में संभावित टैरिफ के डर से कंपनियां चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं। मैन्युफैक्चरर्स भी संभावित उत्पादन बाधा के चलते अग्रिम खरीद कर रहे हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना है।

    IBJA की दरों में GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होते। इसलिए अलग-अलग शहरों में कीमतों में थोड़ी भिन्नता देखी जा सकती है। यही दरें RBI के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंकों के गोल्ड लोन के लिए आधार बनती हैं।विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशक इस तेजी को ध्यान में रखते हुए सोने और चांदी में निवेश की रणनीति बनाएं। खासकर चांदी में लगातार पांचवे सप्ताह तक मजबूती ने निवेशकों और ज्वेलर्स दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और औद्योगिक मांग को देखते हुए, आने वाले हफ्तों में कीमती धातुओं की कीमतों में और उछाल की संभावना भी बनी हुई है।