सोमवार व्रत कथा: भोलेनाथ की कृपा से पूरी होती हैं हर मनोकामनाएं


नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करने और सोमवार व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सच्चे मन से किए गए इस व्रत से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं।

सोमवार व्रत कथा

प्राचीन समय में एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके पास धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण वह बेहद दुखी रहता था। संतान प्राप्ति की इच्छा से वह हर सोमवार व्रत रखता और माता पार्वती के साथ शिवजी की पूजा करता था।

उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने भगवान शिव से उसकी मनोकामना पूर्ण करने का आग्रह किया। पहले तो शिवजी ने कर्म और भाग्य का तर्क दिया, लेकिन माता पार्वती के आग्रह पर उन्होंने साहूकार को पुत्र-प्राप्ति का वरदान दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह पुत्र केवल 12 वर्ष तक ही जीवित रहेगा।

समय बीता और साहूकार के घर पुत्र का जन्म हुआ। जब वह 11 वर्ष का हुआ तो उसे शिक्षा के लिए काशी भेजा गया। रास्ते में एक नगर में राजकुमारी का विवाह हो रहा था। परिस्थितियों के कारण साहूकार के पुत्र का विवाह राजकुमारी से करा दिया गया, लेकिन वह आगे पढ़ाई के लिए काशी चला गया।

काशी में जब वह बालक 12 वर्ष का हुआ, तभी उसकी मृत्यु हो गई। उसके मामा का रो-रोकर बुरा हाल था। तभी वहां से भगवान शिव और माता पार्वती गुजरे। माता पार्वती ने करुणा वश शिवजी से उस बालक को जीवित करने का आग्रह किया। अंततः शिवजी ने प्रसन्न होकर उसे पुनः जीवनदान दे दिया।

बालक शिक्षा पूरी कर जब वापस लौटा, तो उसका परिवार उसे जीवित देखकर अत्यंत प्रसन्न हुआ। उसी रात भगवान शिव ने साहूकार को स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि उसके सोमवार व्रत और कथा के प्रभाव से ही उसके पुत्र को लंबी आयु प्राप्त हुई है।

व्रत का महत्व

सोमवार व्रत और कथा का पाठ करने से-

जीवन के कष्ट दूर होते हैं
संतान सुख की प्राप्ति होती है
वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है
मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया सोमवार व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है। भगवान शिव अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बनाए रखते हैं और उनकी हर इच्छा पूर्ण करते हैं।