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  • दूसरे टी20 में भी बारिश बन सकती है विलेन भारत इंग्लैंड मुकाबले पर मौसम की टेढ़ी नजर

    दूसरे टी20 में भी बारिश बन सकती है विलेन भारत इंग्लैंड मुकाबले पर मौसम की टेढ़ी नजर


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शनिवार को मैनचेस्टर के ऐतिहासिक ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जाएगा लेकिन मुकाबले से पहले सबसे बड़ी चिंता मौसम को लेकर बनी हुई है। पहले टी20 मैच में बारिश के कारण इंग्लैंड की पारी शुरू ही नहीं हो सकी थी और मुकाबला रद्द करना पड़ा था। अब दूसरे मैच पर भी बारिश का खतरा मंडरा रहा है जिससे क्रिकेट प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है।

    मौसम पूर्वानुमान के अनुसार शनिवार को मैनचेस्टर में पूरे दिन बादल छाए रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक दिन में बारिश की संभावना करीब 57 प्रतिशत है जबकि मैच के दौरान भी वर्षा होने के करीब 55 प्रतिशत आसार बताए गए हैं। शाम के समय लगभग दो घंटे तक बारिश होने का अनुमान है। ऐसे में यदि मौसम ने साथ नहीं दिया तो लगातार दूसरा मुकाबला भी प्रभावित हो सकता है।

    हालांकि भारतीय टीम चाहेगी कि इस बार पूरा मैच खेला जाए ताकि पहले मुकाबले में दिखाई गई शानदार बल्लेबाजी का फायदा उठाया जा सके। पहले टी20 में भारतीय बल्लेबाजों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 20 ओवर में सात विकेट पर 189 रन बनाए थे। युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने विस्फोटक अंदाज में सिर्फ 24 गेंदों पर 59 रन की शानदार पारी खेली थी। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी जिम्मेदारी निभाते हुए 47 गेंदों में 68 रन बनाए और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

    मध्यक्रम में शिवम दुबे ने भी शानदार फिनिशिंग करते हुए 21 गेंदों में नाबाद 42 रन बनाए। हालांकि संजू सैमसन सिर्फ एक रन बनाकर आउट हो गए जबकि ईशान किशन खाता भी नहीं खोल सके। तिलक वर्मा भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। इसके बावजूद भारतीय बल्लेबाजों ने बड़ा स्कोर खड़ा किया था लेकिन लगातार बारिश के कारण इंग्लैंड की पारी शुरू नहीं हो सकी और मैच बेनतीजा समाप्त हुआ।

    ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर भारत का रिकॉर्ड संतुलित रहा है। टीम इंडिया ने यहां अब तक दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं जिनमें एक में जीत और एक में हार मिली है। इस मैदान पर भारत ने अपना आखिरी टी20 मुकाबला वर्ष 2018 में खेला था जहां टीम ने इंग्लैंड को आठ विकेट से हराया था। उस मैच में केएल राहुल ने नाबाद शतक लगाकर टीम को शानदार जीत दिलाई थी।

    अब भारतीय टीम की कोशिश होगी कि मौसम साफ रहे और सीरीज में बढ़त हासिल करने का मौका मिले। दूसरी ओर इंग्लैंड भी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर वापसी करना चाहेगा। ऐसे में यदि बारिश बीच में बाधा नहीं बनी तो क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है।

  • दिल्ली में ट्रायल में हुए रिजेक्ट, पिता ने तीन दिन में बदल दी किस्मत: संजू सैमसन ने सुनाया संघर्ष का प्रेरक किस्सा

    दिल्ली में ट्रायल में हुए रिजेक्ट, पिता ने तीन दिन में बदल दी किस्मत: संजू सैमसन ने सुनाया संघर्ष का प्रेरक किस्सा


    नई दिल्ली । टी20 विश्व कप 2026 में भारत की खिताबी जीत के अहम नायकों में शामिल विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने अपने क्रिकेट करियर के शुरुआती संघर्षों का भावुक किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की टीम में बार-बार जगह नहीं मिलने के बाद उनके पिता ने ऐसा फैसला लिया जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।

    जियोस्टार के शो ‘सुपरस्टार्स’ में बातचीत के दौरान संजू ने कहा कि बचपन में वह अपने दोस्तों को डीडीसीए की जैकेट पहनकर दिल्ली की टीम के लिए खेलते देखते थे। इससे उनके मन में भी दिल्ली का प्रतिनिधित्व करने का सपना जगा। उन्होंने कई बार ट्रायल दिए, स्टेट कैंप तक पहुंचे और अच्छे रन भी बनाए, लेकिन अंतिम टीम में कभी जगह नहीं मिली।

    संजू ने बताया कि एक ट्रायल के बाद जब चयनित खिलाड़ियों की सूची जारी हुई तो उसमें उनका नाम नहीं था। वह और उनके पिता चुपचाप घर लौट आए। घर पहुंचते ही उनके पिता विश्वनाथन ने मां से कहा कि अब परिवार को केरल जाना होगा। मां ने बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए कुछ साल रुकने की सलाह दी, लेकिन पिता अपने फैसले पर अडिग रहे।

    उन्होंने कहा कि पिता ने साफ शब्दों में कहा कि अब और इंतजार नहीं होगा। तीन दिन के भीतर टिकट बुक हुई और पूरा परिवार ट्रेन से केरल रवाना हो गया। वहीं से उनके क्रिकेट करियर का नया अध्याय शुरू हुआ और उन्होंने केरल की ओर से खेलना शुरू किया।

    संजू ने दिल्ली में अपने बचपन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता दिल्ली पुलिस की फुटबॉल टीम से जुड़े थे और रोज अभ्यास के लिए जाते थे। खेल का माहौल देखकर बचपन से ही उन्हें भी खिलाड़ी बनने की प्रेरणा मिली। पुलिस कॉलोनी की सड़कों पर टेनिस बॉल से गली क्रिकेट खेलते-खेलते उनका क्रिकेट के प्रति जुनून बढ़ता गया।

    उन्होंने बताया कि उनके पिता ने कभी फुटबॉल खेलने के लिए मजबूर नहीं किया। हालांकि वे फुटबॉल भी खेलते थे, लेकिन पिता ने उनकी बल्लेबाजी देखकर महसूस किया कि क्रिकेट में उनका भविष्य बेहतर हो सकता है। इसके बाद उन्होंने संजू और उनके भाई दोनों को क्रिकेट पर पूरा ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

    संजू ने दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम (तत्कालीन फिरोज शाह कोटला) से जुड़ी एक खास याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक बार उनके पिता की वहां ड्यूटी थी। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध कर उन्हें नेट्स में अभ्यास करने का मौका दिलाया। संजू, उनके भाई और पिता ने करीब एक घंटे तक नेट्स में अभ्यास किया। संजू ने कहा कि उन्हें आज भी समझ नहीं आता कि उस समय उनके पिता ने यह कैसे संभव किया, लेकिन वही पल उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।

    संजू सैमसन की यह कहानी बताती है कि प्रतिभा के साथ सही समय पर लिया गया साहसी फैसला और परिवार का अटूट विश्वास किसी भी खिलाड़ी की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

  • आईपीएल में बरसाए रन फिर भी नहीं खुला टीम इंडिया का दरवाजा आखिर कब मिलेगा वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका

    आईपीएल में बरसाए रन फिर भी नहीं खुला टीम इंडिया का दरवाजा आखिर कब मिलेगा वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा बल्लेबाजों में शामिल वैभव सूर्यवंशी का अंतरराष्ट्रीय डेब्यू फिलहाल एक बार फिर टल गया है। इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 श्रृंखला के पहले मुकाबले में भी टीम प्रबंधन ने उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं दी। चेस्टर ले स्ट्रीट में जैसे ही कप्तान श्रेयस अय्यर ने प्लेइंग इलेवन का एलान किया वैसे ही करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की उम्मीदों को झटका लगा क्योंकि वैभव का नाम उसमें शामिल नहीं था। लगातार दूसरी श्रृंखला में मौका नहीं मिलने के बाद अब यह सवाल और तेज हो गया है कि आखिर इस युवा बल्लेबाज को भारतीय टीम के लिए पदार्पण करने के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा।

    वैभव सूर्यवंशी पिछले कुछ महीनों से अपने प्रदर्शन के दम पर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। आईपीएल 2026 में उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए 16 पारियों में 776 रन बनाए और पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की। उनका स्ट्राइक रेट भी 237 से अधिक रहा जिसने क्रिकेट विशेषज्ञों को प्रभावित किया। इसके अलावा अंडर 19 विश्व कप में उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया जबकि हाल ही में भारत ए की ओर से खेलते हुए उन्होंने श्रीलंका में त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में केवल 29 गेंदों पर 94 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का एक और शानदार उदाहरण पेश किया।

    इतने बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलना लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे पहले आयरलैंड दौरे पर भी उन्हें दोनों टी20 मुकाबलों में बाहर बैठना पड़ा था। उस श्रृंखला में भारतीय शीर्ष क्रम उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका और टीम को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद माना जा रहा था कि इंग्लैंड दौरे पर वैभव को जरूर मौका मिलेगा लेकिन टीम प्रबंधन ने अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा जताना बेहतर समझा।

    क्रिकेट के कई पूर्व दिग्गज पहले ही संकेत दे चुके थे कि वैभव का डेब्यू तुरंत नहीं होगा। उनका मानना था कि टीम प्रबंधन युवा बल्लेबाज को सही समय पर मौका देना चाहता है ताकि उस पर अतिरिक्त दबाव न बने। हालांकि प्रशंसकों का तर्क है कि जब कोई खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट आईपीएल और जूनियर स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा हो तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर भी मिलना चाहिए।

    बैटिंग कोच सितांशु कोटक पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अंतिम फैसला मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर की रणनीति के अनुसार लिया जाएगा। ऐसे में यह साफ है कि वैभव को मौका कब मिलेगा इसका फैसला टीम प्रबंधन की योजनाओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल भारतीय टीम ने पहले मुकाबले में संजू सैमसन अभिषेक शर्मा ईशान किशन श्रेयस अय्यर तिलक वर्मा शिवम दुबे अक्षर पटेल हर्षित राणा रवि बिश्नोई अर्शदीप सिंह और वरुण चक्रवर्ती के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया।

    वैभव सूर्यवंशी के लिए यह इंतजार भले ही लंबा होता जा रहा हो लेकिन उनकी उम्र और प्रदर्शन दोनों यह संकेत देते हैं कि भविष्य पूरी तरह उनके पक्ष में है। यदि वह इसी तरह रन बनाते रहे और अपने खेल में निरंतरता बनाए रखी तो भारतीय टीम में उनका पदार्पण केवल समय की बात होगी। अब सभी की नजरें इंग्लैंड के खिलाफ अगले मुकाबलों पर रहेंगी जहां शायद भारतीय क्रिकेट को अपना नया युवा सितारा पहली बार नीली जर्सी में खेलते हुए देखने का मौका मिल जाए।

  • टीम इंडिया का बड़ा उलटफेर आयरलैंड ने 2-0 से किया क्लीन स्वीप इतिहास में पहली बार भारत हारा टी20 सीरीज

    टीम इंडिया का बड़ा उलटफेर आयरलैंड ने 2-0 से किया क्लीन स्वीप इतिहास में पहली बार भारत हारा टी20 सीरीज


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम को बेलफास्ट में ऐसा झटका लगा जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की होगी। सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में आयरलैंड ने रोमांचक मुकाबले में भारत को महज 1 रन से हराकर दो मैचों की सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली। यह पहला मौका है जब भारत को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले पहला मुकाबला भी आयरलैंड ने 34 रन से जीतकर भारत पर दबाव बना दिया था और दूसरे मैच में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी आयरलैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम ने 17 रन के स्कोर पर पहला विकेट गंवा दिया। इसके बाद रॉस अडायर और कप्तान लोर्कन टकर भी जल्दी पवेलियन लौट गए जिससे मेजबान टीम दबाव में नजर आई। हालांकि हैरी टेक्टर और बेंजामिन कैलिट्ज ने चौथे विकेट के लिए 65 रन जोड़कर पारी को संभाल लिया। टेक्टर ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए 47 गेंदों में 53 रन बनाए जबकि कैलिट्ज ने सिर्फ 23 गेंदों पर 37 रन की तेजतर्रार पारी खेली। जॉर्ज डॉकरेल ने भी उपयोगी 19 रन जोड़े और आयरलैंड ने निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट पर 154 रन का प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा किया।

    भारतीय गेंदबाजों में प्रिंस यादव सबसे सफल रहे जिन्होंने 3 विकेट हासिल किए। अर्शदीप सिंह और शिवम दुबे ने दो-दो विकेट लिए जबकि हर्षित राणा को एक सफलता मिली। गेंदबाजों ने वापसी जरूर कराई लेकिन बल्लेबाजों पर जिम्मेदारी आ गई।

    155 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। पहले ही ओवर में संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर भी केवल 10 रन बनाकर चलते बने जबकि ईशान किशन भी 12 रन से आगे नहीं बढ़ सके। शुरुआती चार विकेट जल्दी गिरने से भारत पूरी तरह दबाव में आ गया।

    इसके बाद अक्षर पटेल और तिलक वर्मा ने पारी संभालने की कोशिश की। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए अहम साझेदारी निभाई लेकिन अक्षर 14 रन बनाकर आउट हो गए। तिलक वर्मा ने एक छोर संभाले रखा और 46 गेंदों में 55 रन की संघर्षपूर्ण अर्धशतकीय पारी खेली। शिवम दुबे ने 20 रन और हर्षित राणा ने 21 रन बनाकर मैच को रोमांचक बनाया लेकिन आखिरी क्षणों में भारतीय टीम जीत से सिर्फ एक रन दूर रह गई। निर्धारित 20 ओवर में भारत 9 विकेट पर 153 रन ही बना सका।

    आयरलैंड की ओर से जय मूंदड़ा और मैथ्यू हॉलार्ड ने तीन-तीन विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। मैथ्यू हम्फ्रीज और हैरी टेक्टर ने भी एक-एक विकेट हासिल कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    इस ऐतिहासिक जीत के साथ आयरलैंड ने न केवल पहली बार भारत के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीती बल्कि 2-0 से क्लीन स्वीप कर अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया। दूसरी ओर भारतीय टीम के लिए यह हार कई सवाल छोड़ गई है खासकर शीर्ष क्रम की नाकामी और बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी को लेकर। अब टीम इंडिया की नजर इंग्लैंड दौरे पर होगी जहां उसे पांच टी20 और तीन वनडे मैचों की चुनौती का सामना करना है।

  • टॉप ऑर्डर फ्लॉप खराब कॉम्बिनेशन और कमजोर बल्लेबाजी टीम इंडिया की हार के पांच बड़े कारण

    टॉप ऑर्डर फ्लॉप खराब कॉम्बिनेशन और कमजोर बल्लेबाजी टीम इंडिया की हार के पांच बड़े कारण


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम को आयरलैंड के खिलाफ पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में हार का सामना करना पड़ा है। बेलफास्ट में खेले गए दूसरे मुकाबले में एक रन की रोमांचक हार के साथ भारत ने दो मैचों की सीरीज 2 0 से गंवा दी। इस हार ने टीम इंडिया की तैयारियों रणनीति और बल्लेबाजी क्रम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी सीरीज के दौरान भारतीय टीम कई विभागों में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी और यही उसकी हार का सबसे बड़ा कारण बना।

    सबसे बड़ी चिंता टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर का खराब प्रदर्शन रहा। सलामी बल्लेबाजों और शुरुआती क्रम के बल्लेबाजों ने दोनों मुकाबलों में निराश किया। संजू सैमसन पूरी सीरीज में रन बनाने के लिए संघर्ष करते नजर आए। पहले मैच में वह केवल पांच रन बना सके जबकि दूसरे मुकाबले में बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। अभिषेक शर्मा ने पहले मैच में शानदार 49 रन बनाए लेकिन दूसरे मैच में शून्य पर आउट हो गए। ईशान किशन भी दोनों मैचों में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे और कुल मिलाकर केवल 13 रन ही बना सके। शुरुआती बल्लेबाजों की नाकामी ने पूरी टीम पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया।

    दूसरा बड़ा कारण कप्तान श्रेयस अय्यर का फीका प्रदर्शन रहा। बतौर कप्तान यह उनकी पहली टी20 सीरीज थी और उनसे बड़ी पारी की उम्मीद थी लेकिन उनका बल्ला पूरी तरह शांत रहा। दो मुकाबलों में वह केवल 13 रन बना सके। कप्तान का खराब प्रदर्शन टीम के आत्मविश्वास पर भी असर डालता है और यही इस सीरीज में देखने को मिला।

    भारतीय टीम का मध्यक्रम भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। हार्दिक पांड्या की गैरमौजूदगी साफ महसूस हुई। अक्षर पटेल शिवम दुबे और अन्य बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में असफल रहे। तिलक वर्मा ने दूसरे मैच में अर्धशतक जरूर लगाया लेकिन उनका स्ट्राइक रेट टी20 क्रिकेट के हिसाब से काफी धीमा रहा। तेजी से रन नहीं बनने के कारण टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकी और इसका फायदा आयरलैंड को मिला।

    टीम चयन और प्लेइंग इलेवन का संतुलन भी सवालों के घेरे में रहा। पहले मुकाबले में दो स्पिनरों के साथ उतरने का फैसला परिस्थितियों के अनुकूल नहीं था। वॉशिंगटन सुंदर से केवल एक ओवर गेंदबाजी कराई गई जिसमें उन्होंने 19 रन खर्च किए। वहीं तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा को मौका देना भी टीम के लिए महंगा साबित हुआ। उन्होंने चार ओवर में बिना विकेट लिए 57 रन लुटा दिए जिससे आयरलैंड को खुलकर खेलने का मौका मिल गया।

    पांचवां बड़ा कारण युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं देना माना जा रहा है। पहले मैच में बल्लेबाजी के खराब प्रदर्शन के बावजूद टीम प्रबंधन ने दूसरे मुकाबले में भी उन्हें अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया। भारत ए के लिए हालिया शानदार प्रदर्शन के बाद उम्मीद थी कि उन्हें अवसर मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव जैसे आक्रामक बल्लेबाज मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते थे।

    इस सीरीज ने भारतीय टीम को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल प्रतिभा के दम पर लगातार सफलता हासिल नहीं की जा सकती। बेहतर टीम संयोजन स्पष्ट बल्लेबाजी क्रम और परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाना उतना ही जरूरी है। आगामी बड़े टूर्नामेंटों से पहले टीम प्रबंधन को इन कमियों पर गंभीरता से काम करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी निराशाजनक हार से बचा जा सके।

  • क्या BCCI ने कर दी जल्दबाजी? चैंपियन कप्तानों की विदाई के बाद टीम इंडिया के प्रदर्शन पर उठे सवाल

    क्या BCCI ने कर दी जल्दबाजी? चैंपियन कप्तानों की विदाई के बाद टीम इंडिया के प्रदर्शन पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI एक बार फिर अपने कप्तानी से जुड़े फैसलों को लेकर चर्चा के केंद्र में है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टीम ने आईसीसी टूर्नामेंटों में शानदार सफलता हासिल की, लेकिन इन सफलताओं के बावजूद कप्तानी में किए गए बदलावों ने क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कोई कप्तान टीम को विश्व स्तर पर सफलता दिला रहा हो तो क्या उसे अचानक नेतृत्व से हटाना उचित फैसला माना जा सकता है।

    भारतीय क्रिकेट के हालिया घटनाक्रम इसी बहस को और तेज कर रहे हैं। रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। उनकी रणनीति, अनुभव और शांत नेतृत्व की हर तरफ सराहना हुई। लेकिन खिताब जीतने के कुछ समय बाद ही कप्तानी में बदलाव करते हुए टीम की कमान शुभमन गिल को सौंप दी गई। इसके बाद भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ वनडे सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों के बाद कई पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों ने सवाल उठाया कि क्या सफल कप्तान को इतनी जल्दी बदलना जरूरी था।

    इसी तरह टी20 क्रिकेट में सूर्यकुमार यादव ने भारत को विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी आक्रामक सोच, बेहतरीन कप्तानी और मैच के अनुसार रणनीति बनाने की क्षमता ने टीम इंडिया को आईसीसी टी20 विश्व कप का खिताब दिलाया। इसके बावजूद कप्तानी में बदलाव करते हुए उन्हें नेतृत्व से हटा दिया गया और टीम की कमान श्रेयस अय्यर को सौंप दी गई। इतना ही नहीं टीम चयन में भी सूर्यकुमार यादव की भूमिका सीमित होती दिखाई दी।

    नए कप्तान और नए कोचिंग सेटअप के साथ भारतीय टीम को अपने पहले ही बड़े मुकाबले में आयरलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। बेलफास्ट में मिली इस हार ने कप्तानी परिवर्तन को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी टीम में बदलाव जरूरी होते हैं, लेकिन बदलाव का समय और तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि सफल कप्तानों को बिना स्पष्ट कारण नेतृत्व से हटाया जाता है तो उसका असर टीम के मनोबल और ड्रेसिंग रूम के माहौल पर भी पड़ सकता है।

    हालांकि दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जा रहा है कि किसी भी क्रिकेट टीम में भविष्य को ध्यान में रखते हुए नए खिलाड़ियों और नए नेताओं को तैयार करना आवश्यक होता है। लंबी अवधि की योजनाओं के तहत बोर्ड कई बार कठिन फैसले लेता है ताकि आने वाले वर्षों में टीम मजबूत बनी रहे। ऐसे निर्णयों का मूल्यांकन केवल कुछ मैचों के आधार पर करना भी उचित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल इतना तय है कि लगातार कप्तानी में बदलाव और शुरुआती हार के बाद BCCI के फैसले चर्चा के केंद्र में हैं। आने वाले महीनों में नए नेतृत्व का प्रदर्शन ही तय करेगा कि यह बदलाव भारतीय क्रिकेट के लिए दूरगामी सफलता का आधार बनता है या फिर चैंपियन कप्तानों को समय से पहले हटाने का फैसला एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित होता है।

  • पहले ही मैच में कप्तानी की कड़ी परीक्षा, श्रेयस अय्यर के साथ जुड़ा ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई कप्तान नहीं चाहेगा

    पहले ही मैच में कप्तानी की कड़ी परीक्षा, श्रेयस अय्यर के साथ जुड़ा ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई कप्तान नहीं चाहेगा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम  का आयरलैंड दौरा उम्मीदों के विपरीत शुरुआत के साथ आगे बढ़ा। बेलफास्ट में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में मेजबान आयरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को 34 रन से शिकस्त दे दी। यह मुकाबला सिर्फ हार की वजह से ही चर्चा में नहीं रहा बल्कि भारतीय टीम के नए कप्तान श्रेयस अय्यर के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया जिसे कोई भी कप्तान अपने करियर की शुरुआत में नहीं देखना चाहता।

    श्रेयस अय्यर पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारत की कप्तानी कर रहे थे लेकिन उनका डेब्यू जीत के बजाय हार के साथ समाप्त हुआ। इसी के साथ वह उन चुनिंदा भारतीय कप्तानों की सूची में शामिल हो गए जिन्होंने अपने पहले टी20 कप्तानी मैच में हार का सामना किया। यह हार इसलिए भी बड़ी मानी जा रही है क्योंकि भारत का जनवरी 2024 से चला आ रहा टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में अजेय रहने का सिलसिला भी टूट गया।

    मुकाबले में आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 183 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। जवाब में भारतीय बल्लेबाजी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे और पूरी टीम 18.5 ओवर में 148 रन पर सिमट गई। भारतीय बल्लेबाज बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे जबकि आयरलैंड के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। परिणामस्वरूप भारत को 34 रन से हार झेलनी पड़ी।

    इस हार के साथ श्रेयस अय्यर का नाम भारतीय क्रिकेट के कुछ बड़े कप्तानों के साथ एक अनचाही सूची में जुड़ गया। इससे पहले विराट कोहली भी अपने टी20 कप्तानी डेब्यू में जीत दर्ज नहीं कर सके थे। साल 2017 में कानपुर में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए अपने पहले टी20 मुकाबले में भारत को सात विकेट से हार मिली थी। विराट के नाम एक और अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। वह भारत के ऐसे पहले कप्तान बने जिन्होंने टेस्ट वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों में कप्तानी की शुरुआत हार के साथ की।

    साल 2022 में ऋषभ पंत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टी20 सीरीज में कप्तानी का मौका मिला था। उस मुकाबले में भारत ने 211 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था लेकिन गेंदबाज लक्ष्य का बचाव नहीं कर सके और पंत का कप्तानी डेब्यू भी हार के साथ समाप्त हुआ।

    इसके बाद साल 2024 में शुभमन गिल को जिम्बाब्वे दौरे पर पहली बार टी20 टीम की कमान मिली थी। हरारे में खेले गए पहले मुकाबले में भारत को 13 रन से हार मिली थी। हालांकि गिल ने शानदार वापसी करते हुए पूरी सीरीज 4-1 से अपने नाम की और आलोचकों को करारा जवाब दिया था।

    अब साल 2026 में श्रेयस अय्यर भी इसी सूची का हिस्सा बन गए हैं। हालांकि क्रिकेट में एक मुकाबला किसी कप्तान की क्षमता तय नहीं करता। भारतीय टीम के सामने अब सीरीज में वापसी करने का मौका है और श्रेयस अय्यर की कोशिश होगी कि अगले मुकाबलों में टीम बेहतर प्रदर्शन करे तथा अपनी कप्तानी का सफल आगाज जीत के साथ आगे बढ़ाए। भारतीय टीम के पास मजबूत बल्लेबाजी और अनुभवी गेंदबाजी आक्रमण है इसलिए अगले मैचों में वापसी की पूरी उम्मीद बनी हुई है।

  • 15 साल के वैभव सूर्यवंशी का धमाका! 29 गेंदों में 94 रन ठोककर इंटरनेशनल डेब्यू के दरवाजे पर पहुंचे युवा स्टार

    15 साल के वैभव सूर्यवंशी का धमाका! 29 गेंदों में 94 रन ठोककर इंटरनेशनल डेब्यू के दरवाजे पर पहुंचे युवा स्टार


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट को एक और बड़ा सितारा मिल गया है। महज 15 साल की उम्र में अपने विस्फोटक बल्लेबाजी अंदाज से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचने वाले वैभव सूर्यवंशी अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई सीरीज के फाइनल में उन्होंने जिस तरह की बल्लेबाजी की उसने चयनकर्ताओं के साथ-साथ क्रिकेट विशेषज्ञों को भी प्रभावित कर दिया है। अब माना जा रहा है कि 26 जून को आयरलैंड के खिलाफ होने वाले पहले टी20 मुकाबले में उन्हें भारतीय टीम की ओर से खेलने का मौका मिल सकता है।

    बिहार के इस युवा बल्लेबाज ने बेहद कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई है। वैभव की सबसे बड़ी ताकत उनका निडर खेल और दबाव भरे मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करना है। यही वजह है कि उन्हें अब नॉकआउट मुकाबलों का नया किंग कहा जाने लगा है। इस साल उन्होंने पांच करो या मरो मुकाबले खेले हैं जिनमें चार अर्धशतक और एक शतक लगाया है। खास बात यह है कि तीन बार वह 90 से अधिक रन बनाकर आउट हुए लेकिन कभी व्यक्तिगत उपलब्धि के लिए अपनी बल्लेबाजी की रफ्तार धीमी नहीं की।

    श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई सीरीज के फाइनल में वैभव ने अपने करियर की सबसे यादगार पारियों में से एक खेली। भारतीय टीम के लिए ओपनिंग करने उतरे इस युवा बल्लेबाज ने सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 10 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। यानी उन्होंने अपने 94 में से 88 रन केवल बाउंड्री से जुटाए। शतक से महज कुछ कदम दूर रह जाने के बावजूद उनकी इस पारी ने मैच का रुख बदल दिया और विरोधी टीम पर जबरदस्त दबाव बना दिया।

    वैभव की बल्लेबाजी का अंदाज उन्हें अपनी उम्र के खिलाड़ियों से अलग बनाता है। वह बड़े शॉट खेलने से नहीं घबराते और मैच की स्थिति के अनुसार तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा माना जा रहा है। उनके प्रदर्शन ने यह भी साबित किया है कि दबाव जितना बढ़ता है उनका खेल उतना ही निखरता है।

    अब क्रिकेट प्रेमियों की नजरें भारत के आयरलैंड दौरे पर टिकी हैं। भारतीय टीम वहां दो टी20 मैच खेलेगी। पहला मुकाबला 26 जून और दूसरा 28 जून को बेलफास्ट में खेला जाएगा। यदि वैभव को पहले ही मैच में मौका मिलता है तो वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने वाले खिलाड़ियों में शामिल हो जाएंगे। इतना ही नहीं वे महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के सबसे कम उम्र में भारत के लिए डेब्यू करने के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकते हैं।

    आयरलैंड दौरे के बाद भारत को इंग्लैंड के खिलाफ भी टी20 सीरीज खेलनी है। ऐसे में यदि वैभव को मौका मिलता है और वह अपनी फॉर्म बरकरार रखते हैं तो भारतीय क्रिकेट को एक नया सुपरस्टार मिल सकता है। फिलहाल पूरे देश की नजरें 26 जून पर टिकी हैं जब यह युवा बल्लेबाज अपने सपनों की उड़ान भर सकता है।

  • ‘टीम इंडिया के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है’: डेब्यू सीरीज में चमके गुरनूर बरार, सफलता का बताया राज

    ‘टीम इंडिया के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है’: डेब्यू सीरीज में चमके गुरनूर बरार, सफलता का बताया राज


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट को एक और उभरता हुआ तेज गेंदबाज मिल गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने अपने पहले दोनों वनडे मुकाबलों में तीन-तीन विकेट लेकर यह साबित कर दिया कि वह भविष्य में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

    लखनऊ में खेले गए मुकाबले के बाद गुरनूर बरार ने अपनी सफलता के पीछे घरेलू क्रिकेट और इंडिया ए टीम में मिले अनुभव को सबसे बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि इंडिया ए का मंच उनके लिए सीखने और खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुआ है।

    गुरनूर ने कहा कि जब उन्हें इंडिया ए टीम में चुना गया था, तब वह बेहद उत्साहित थे। उनके अनुसार, इंडिया ए में खेलते समय उन्होंने वही रणनीति अपनाई जो वह रणजी ट्रॉफी में इस्तेमाल करते थे। हार्ड लेंथ पर लगातार तेज गेंदबाजी करना और गेंद को स्विंग कराना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने बताया कि इंडिया ए में मिले अनुभव ने उन्हें यह विश्वास दिया कि वह बड़े स्तर पर भी उसी आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकते हैं।

    युवा तेज गेंदबाज ने कहा कि उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलते समय भी अपनी स्वाभाविक गेंदबाजी पर भरोसा रखा। उन्होंने किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं लिया और अपनी मजबूत पक्षों पर ध्यान केंद्रित किया। बरार का मानना है कि अभी भी उनके प्रदर्शन में और सुधार की काफी गुंजाइश है और आने वाले मैचों में वह और बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं।

    उन्होंने टीम प्रबंधन और गेंदबाजी कोच की भी जमकर तारीफ की। गुरनूर ने कहा कि उन्हें कोचिंग स्टाफ से पूरा समर्थन मिला है। टीम प्रबंधन ने उन्हें कोई नई तकनीक अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि उनकी मौजूदा क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए अपनी ताकत के अनुसार गेंदबाजी करने की सलाह दी। यही भरोसा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मददगार साबित हुआ।

    गुरनूर बरार ने कहा कि वह भगवान के आभारी हैं कि उन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और वह आने वाले वर्षों में टीम इंडिया के लिए बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य केवल टीम में जगह बनाना नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की सफलताओं में महत्वपूर्ण योगदान देना है।

    आईपीएल 2026 में गुरनूर बरार गुजरात टाइटंस का हिस्सा रहे। हालांकि उन्हें अधिक मैच खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन टीम के साथ बिताया गया समय उनके लिए बेहद मूल्यवान रहा। उन्होंने बताया कि गुजरात टाइटंस के ड्रेसिंग रूम में अनुभवी खिलाड़ियों और कोचों से बहुत कुछ सीखने को मिला।

    बरार ने कहा कि टीम में मुख्य कोच आशीष नेहरा के अलावा कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और इशांत शर्मा जैसे अनुभवी गेंदबाज मौजूद थे। उनके साथ समय बिताने और बातचीत करने से उन्हें गेंदबाजी के कई तकनीकी और मानसिक पहलुओं को समझने का मौका मिला।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार शुरुआत के बाद अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें गुरनूर बरार पर टिकी हैं। यदि वह इसी तरह निरंतर प्रदर्शन करते रहे, तो भारतीय तेज गेंदबाजी को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प मिल सकता है।

  • क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा 'सुपर वेडनेसडे': एक ही दिन में खेले जाएंगे 7 महामुकाबले, 16 घंटे तक मचेगा बल्लेबाजों का धमाल

    क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा 'सुपर वेडनेसडे': एक ही दिन में खेले जाएंगे 7 महामुकाबले, 16 घंटे तक मचेगा बल्लेबाजों का धमाल


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक क्रिकेट के इतिहास में आज का दिन यानी 17 जून खेल प्रेमियों के लिए किसी ऐतिहासिक उत्सव या बड़ी दावत से कम नहीं होने वाला है। आज दुनिया के अलग-अलग कोनों और मैदानों पर एक या दो नहीं, बल्कि कुल 7 बड़े क्रिकेट मुकाबले खेले जाने का एक अनोखा संयोग बना है।
    इन 7 मैचों में से 6 मुकाबले सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय (इंटरनेशनल) स्तर के हैं, जबकि एक मैच ‘लिस्ट ए’ क्रिकेट का हिस्सा है। इस खेल महाकुंभ की सबसे खास और गौरवशाली बात यह है कि आज अकेले भारत की तीन अलग-अलग राष्ट्रीय टीमें तीन अलग-अलग देशों में अपनी चुनौती पेश करने के लिए मैदान पर उतर रही हैं। भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे से शुरू होने वाला यह दे-दनादन क्रिकेट का सिलसिला देर रात या यूं कहें कि अगले दिन 18 जून की भोर में 3 बजे तक लगातार जारी रहेगा, जिससे प्रशंसकों को करीब 16 घंटे तक नॉन-स्टॉप रोमांच देखने को मिलेगा।

    भारतीय टीमों के इस त्रिकोणीय अभियान की बात करें तो आज इंडिया ए, मुख्य पुरुष टीम इंडिया और भारतीय महिला क्रिकेट टीम तीनों एक्शन में दिखाई देंगी। सबसे पहले सुबह 10 बजे श्रीलंका की धरती पर खेली जा रही ट्राई-नेशन वनडे सीरीज में इंडिया ए की भिड़ंत अफगानिस्तान ए से होने जा रही है।

    इसके ठीक बाद, दोपहर 1:30 बजे मुख्य भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम लखनऊ के इकाना स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के दूसरे बेहद महत्वपूर्ण वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच में जीत के इरादे से उतरेगी। वहीं, शाम के समय महिला क्रिकेट का रोमांच चरम पर होगा, जब हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला टीम शाम 7:00 बजे आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 के एक बेहद अहम मुकाबले में नीदरलैंड की टीम का सामना करेगी।

    भारत के अलावा आज के इस महाशेड्यूल में बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया की टीमों का भी जबरदस्त दबदबा देखने को मिलने वाला है। आज इन दोनों देशों की भी दो-दो टीमें मैदान पर एक-दूसरे से लोहा लेंगी। दोपहर 1:30 बजे बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के बीच पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पहला मुकाबला खेला जाएगा। इसके ठीक बाद, दोपहर 3:00 बजे महिला टी20 विश्व कप के अंतर्गत बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया की महिला टीमें एक बार फिर आमने-सामने होंगी, जो दोनों देशों के प्रशंसकों के लिए बेहद दिलचस्प होने वाला है।

    फुटबॉल जैसी गति के साथ टी20 और वनडे के इस रोमांच के बीच पारंपरिक और क्लासिक टेस्ट क्रिकेट के प्रेमियों के लिए भी आज का दिन बेहद खास है। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की मजबूत टीमों के बीच खेली जा रही टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला भी आज दोपहर 3:30 बजे से शुरू होने जा रहा है, जो पांच दिनों तक क्रिकेट की सर्वोच्च कला का प्रदर्शन करेगा।

    दिन के अंतिम हिस्से में महिला टी20 विश्व कप का एक और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, जिसमें रात 11:00 बजे साउथ अफ्रीका और पाकिस्तान की महिला टीमें एक-दूसरे के खिलाफ अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से मैदान संभालेंगी। इस प्रकार सुबह से लेकर देर रात तक चलने वाला यह शेड्यूल क्रिकेट के हर प्रारूप के प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध करने के लिए पूरी तरह तैयार है।