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  • टीम इंडिया के सामने फिटनेस का बड़ा संकट! गंभीर-अगरकर संग BCCI की अहम बैठक में हार, न्यूजीलैंड दौरे और 2027 वर्ल्ड कप पर चर्चा

    टीम इंडिया के सामने फिटनेस का बड़ा संकट! गंभीर-अगरकर संग BCCI की अहम बैठक में हार, न्यूजीलैंड दौरे और 2027 वर्ल्ड कप पर चर्चा


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए आने वाला समय बेहद अहम माना जा रहा है। हाल के दौरों में मिली हार, लगातार बढ़ती खिलाड़ियों की चोट की समस्या और 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अब गंभीर मंथन करने जा रहा है। 3 सितंबर को मुंबई में होने वाली BCCI की अहम बैठक में टीम इंडिया के मौजूदा प्रदर्शन से लेकर भविष्य की रणनीति तक कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इस बैठक में बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर, मुख्य कोच गौतम गंभीर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण समेत टीम प्रबंधन से जुड़े अन्य अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है।

    बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया को मिली हार की समीक्षा होगा। बोर्ड यह जानने की कोशिश करेगा कि आखिर टीम के प्रदर्शन में कहां कमी रही और भविष्य के बड़े मुकाबलों से पहले किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। कोच गौतम गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर टीम की जरूरतों तथा आगे की योजनाओं को बोर्ड के सामने रख सकते हैं। इसके साथ ही आगामी न्यूजीलैंड दौरे को लेकर भी रणनीति बनाई जाएगी क्योंकि इस सीरीज को भविष्य की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    BCCI के सामने इस समय खिलाड़ियों की फिटनेस सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। कई खिलाड़ी चोट से जूझ रहे हैं और उनकी रिकवरी में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुनी गई टीम में भी कुछ खिलाड़ियों की उपलब्धता फिटनेस टेस्ट पर निर्भर बताई गई है। ऐसे में चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों की मेडिकल स्थिति के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर भी बैठक में चर्चा हो सकती है।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ अगले महीने शुरू होने वाले दौरे पर टीम प्रबंधन तेज गेंदबाजों का मजबूत समूह तैयार करना चाहता है। मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरुनूर बरार, जसप्रीत बुमराह और आकाशदीप जैसे तेज गेंदबाजों की फिटनेस, उपलब्धता और भूमिका पर विचार किया जा सकता है। लगातार क्रिकेट और खिलाड़ियों के कार्यभार को देखते हुए BCCI को यह तय करना होगा कि महत्वपूर्ण खिलाड़ियों को कैसे फिट और फ्रेश रखा जाए।

    हार्दिक पांड्या की फिटनेस भी टीम प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। वनडे विश्व कप की योजनाओं में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है लेकिन लगातार फिटनेस से जुड़ी चिंताओं के कारण टीम संयोजन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में बोर्ड, चयनकर्ता और टीम प्रबंधन को खिलाड़ियों की चोट, वर्कलोड और मैचों की प्राथमिकता पर एक स्पष्ट नीति बनानी होगी।

    कुल मिलाकर 3 सितंबर की यह बैठक केवल पिछली हार का रिव्यू भर नहीं होगी बल्कि टीम इंडिया के भविष्य की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण चर्चा भी साबित हो सकती है। इंग्लैंड और आयरलैंड में मिली निराशा से सबक लेने के साथ BCCI की नजर न्यूजीलैंड दौरे और 2027 विश्व कप पर होगी। आने वाले वर्षों में भारतीय टीम किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी, इसका संकेत इस अहम बैठक से मिल सकता है।

  • टीम इंडिया को मिला हार्दिक का विकल्प 2027 वर्ल्ड कप से पहले नितीश रेड्डी या वॉशिंगटन सुंदर पर दांव लगाएंगे चयनकर्ता

    टीम इंडिया को मिला हार्दिक का विकल्प 2027 वर्ल्ड कप से पहले नितीश रेड्डी या वॉशिंगटन सुंदर पर दांव लगाएंगे चयनकर्ता


    नई दिल्ली । साल 2023 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में मिली हार के बाद टीम इंडिया अब 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों में जुट चुकी है और इस बड़े टूर्नामेंट को ध्यान में रखते हुए टीम मैनेजमेंट के सामने कई अहम सवाल हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण सवाल हार्दिक पंड्या के विकल्प को लेकर है। हार्दिक लंबे समय से भारतीय टीम के सबसे अहम ऑलराउंडरों में शामिल रहे हैं क्योंकि वह बल्लेबाजी के साथ तेज गेंदबाजी का विकल्प भी देते हैं। हालांकि उनकी फिटनेस और चोटों का रिकॉर्ड टीम के लिए चिंता का विषय रहा है। ऐसे में चयनकर्ताओं को 2027 वर्ल्ड कप से पहले एक ऐसा खिलाड़ी तैयार करना होगा जो जरूरत पड़ने पर हार्दिक की भूमिका निभा सके।

    हार्दिक पंड्या की करीब पांच महीने बाद टीम इंडिया में वापसी की उम्मीद जताई जा रही है। उनकी वापसी भारतीय टीम के लिए निश्चित रूप से बड़ी राहत होगी क्योंकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनका अनुभव और मैच जिताने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार हार्दिक अपनी फिटनेस पर काम कर रहे हैं और टीम में वापसी के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। हालांकि फिटनेस से जुड़ी ताजा चुनौतियों के कारण उनकी वापसी को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है।

    लेकिन टीम इंडिया केवल हार्दिक पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं उठा सकती। 2027 वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाना है और वहां की परिस्थितियों को देखते हुए टीम को ऐसे ऑलराउंडर की जरूरत होगी जो बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी प्रभाव छोड़ सके। इस रेस में नितीश कुमार रेड्डी का नाम सबसे आगे नजर आता है। नितीश की सबसे बड़ी ताकत उनकी मध्यम तेज गेंदबाजी है। वह निचले और मध्यक्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करने की क्षमता भी रखते हैं। उन्हें हार्दिक के संभावित बैकअप के रूप में तैयार करने की चर्चा पहले से होती रही है और पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना भी टीम इंडिया के लिए एक भरोसेमंद बैकअप तैयार करने की जरूरत पर जोर दे चुके हैं।

    दूसरी ओर वॉशिंगटन सुंदर भी टीम इंडिया के लिए एक मजबूत विकल्प हैं। वह ऑफ स्पिन के साथ बल्लेबाजी में गहराई देते हैं और परिस्थितियों के अनुसार टीम को अलग संतुलन प्रदान कर सकते हैं। हालांकि वॉशिंगटन की भूमिका हार्दिक से अलग है क्योंकि वह तेज गेंदबाज नहीं हैं। इसलिए यदि टीम को हार्दिक जैसी सीम बॉलिंग क्षमता वाले ऑलराउंडर की जरूरत होगी तो नितीश कुमार रेड्डी का दावा अधिक मजबूत माना जा सकता है।

    वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया के पास अभी पर्याप्त समय है और आने वाले मुकाबले यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि हार्दिक पंड्या के बाद टीम का सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर कौन बनेगा। नितीश कुमार रेड्डी की फिटनेस और लगातार प्रदर्शन उन्हें मजबूत दावेदार बनाते हैं जबकि वॉशिंगटन सुंदर अपनी बहुआयामी क्षमता से चयनकर्ताओं का ध्यान खींच सकते हैं। हालिया रिपोर्टों में दोनों खिलाड़ियों की फिटनेस और आगामी मुकाबलों के लिए उपलब्धता को टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना गया है।

    2027 वर्ल्ड कप में सफलता के लिए टीम इंडिया को केवल हार्दिक पंड्या की वापसी नहीं बल्कि उनका एक मजबूत विकल्प भी तैयार करना होगा। आने वाले महीनों में यही फैसला तय करेगा कि भारतीय टीम का असली ब्रह्मास्त्र कौन बनकर उभरता है।

  • Women's Asia Cup: टीम इंडिया की विजयी शुरुआत…..थाईलैंड को 94 रनों से हराया

    Women's Asia Cup: टीम इंडिया की विजयी शुरुआत…..थाईलैंड को 94 रनों से हराया


    दुबई।
    भारतीय महिला टीम (Indian Women’s Team) ने एशिया कप (Women’s Asia Cup 2026) के अपने पहले मैच में थाईलैंड (Thailand) को हराकर विजयी शुरुआत की है। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवर में नौ विकेट पर 159 रन बनाए। जवाब में थाईलैंड की टीम 16.1 ओवर में 65 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह भारत ने ये मुकाबला 94 रनों से अपने नाम किया। भारत के लिए इस मैच में शेफाली वर्मा ने जहां बल्लेबाजी में कमाल किया तो वहीं, नंदिनी शर्मा और दीप्ति शर्मा ने गेंद से दम दिखाया। दीप्ति ने बिना एक भी रन खर्च किए तीन विकेट झटके।


    भारतीय गेंदबाजों के आगे बिखरी थाईलैंड की बल्लेबाजी

    लक्ष्य का पीछा करते हुए थाईलैंड की बल्लेबाजी अच्छी नहीं रही और उसे शुरुआत से ही झटके पर झटके लगे। थाईलैंड की ओर से सिर्फ नानापट कोंचारोएनकाई ही दहाई अंक तक नहीं पहुंच सकीं। कोंचारोएनकाई के अलावा थाईलैंड का अन्य कोई बल्लेबाज छह रन से भी अधिक नहीं बना सका। कोंचारोएनकाई ने टीम की ओर से सबसे ज्यादा 41 रन बनाए। भारत की गेंदबाजी बेहद शानदार रही। दीप्ति और नंदिनी ने तीन-तीन विकेट लिए, जबकि श्री चरणी को दो और क्रांति गौड़ को एक विकेट मिला।


    मंधाना ने सूजी बेट्स को पीछे छोड़ा

    इससे पहले, थाईलैंड ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया। भारत के लिए स्मृति मंधाना और शेफाली ने पारी की शुरुआत की। भारत को मंधाना के रूप में पहला झटका लगा जो रन आउट होकर पवेलियन लौट गईं। मंधाना ने 10 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 19 रन बनाए। मंधाना इस मैच में भले ही सस्ते में आउट हुईं, लेकिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा कीर्तिमान बना लिया। मंधाना महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाली दूसरी बल्लेबाज बन गई हैं। मंधाना ने इस मामले में सूजी बेट्स को पीछे छोड़ दिया है। बेट्स ने महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10740 रन बनाए हैं। अब मंधाना उनसे आगे निकल गई हैं। मंधाना से आगे अब भारत की पूर्व कप्तान मिताली राज हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर में 10868 रन बनाए हैं।


    शेफाली का अर्धशतक

    थाईलैंड के खिलाफ भारतीय महिला टीम ने अच्छी शुरुआत की। शेफाली वर्मा ने शुरुआत से दी दबाव बनाया। मंधाना के रूप में हालांकि, भारत को पहला झटका लगा। लेकिन शेफाली ने रन गति कम नहीं होने दी और लगातार बड़े शॉट्स लगाती रहीं। भारत ने इस तरह पावरप्ले में एक विकेट के नुकसान पर 65 रन बनाए। महिला टी20 एशिया कप में पावरप्ले का यह सबसे बड़ा स्कोर है। इससे पहले भी ये रिकॉर्ड भारत के ही नाम था। भारतीय टीम ने 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ पावरप्ले में बिना किसी नुकसान के 59 रन बनाए थे। शेफाली ने इसके बाद भी दमदार बल्लेबाजी जारी रखी और 26 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया।


    भारत की पारी लड़खड़ाई

    भारत की बल्लेबाज अच्छी चल रही थी, लेकिन 13वें ओवर में उस समय टीम की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई जब सुलीपोर्न लाओमी ने भारत को लगातार दो झटके दिए। लाओमी ने पहले शेफाली को आउट किया और फिर अगली ही गेंद पर ऋचा घोष को खाता खोले बिना पवेलियन भेजा। इससे पहले, थिपात्चा फुथावोंग ने कप्तान हरमनप्रीत को आउट कर भारत को तीसरा झटका दिया था। हरमनप्रीत पांच रन बनाकर आउट हुईं। शेफाली ने दमदार बल्लेबाजी की और 36 गेंदों पर आठ चौकों और तीन छक्कों की मदद से 64 रन बनाकर आउट हुईं। शेफाली के आउट होते ही भारत की पारी लड़खड़ा गई। भारत ने 137 रन पर नौ विकेट गंवा दिए। अंत में श्री चरणी और क्रांति गौड़ ने 22 रनों की साझेदारी की, जिससे टीम इंडिया का स्कोर 160 के करीब पहुंचा। भारत के लिए क्रांति आठ गेंदों पर 15 और श्री चरणी छह रन बनाकर नाबाद रहीं। थाईलैंड की ओर से सुलीपोर्न ने तीन विकेट लिए, जबकि सुनिदा चातुरोंग्राटाना को दो विकेट मिले। वहीं, थिपात्चा और चानिदा को एक-एक विकेट मिला।


    प्रतिका रावल का डेब्यू

    प्रतिका रावल ने थाईलैंड के खिलाफ मैच से टी20 अंतरराष्ट्रीय में डेब्यू किया। टॉस से पहले प्रतिका को कैप पहनाई गई। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने प्रतिका को कैप दी। प्रतिका के चयन को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं, लेकिन वह आज आखिरकार भारत के लिए टी20 डेब्यू करने में सफल रहीं।

    दोनों टीमों की प्लेइंग-11:
    भारत: शेफाली वर्मा, स्मृति मंधाना, प्रतिका रावल, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), भारती फुलमाली, ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, प्रेमा रावत, एन श्री चरणी, क्रांति गौड़, नंदिनी शर्मा।
    थाईलैंड: अपिसारा सुवानचोंराठी, नाटाकन चांतम, फानिता माया, नानापट कोंचारोएनकाई (विकेटकीपर), चानिदा सुथिरुआंग, नाओमी हेमिल्टन, सुलीपोर्न लाओमी, नानाफट चाएहान, सुनिदा चातुरोंग्राटाना, थिपात्चा फुथावोंग (कप्तान), ओनिचा काम्चोंफू।

  • IND vs SL: ऋषभ पंत की चोट ने बढ़ाई टीम इंडिया की टेंशन, कंधे पर लगी गेंद के बाद नहीं कर सके विकेटकीपिंग; चौथे दिन वापसी की उम्मीद

    IND vs SL: ऋषभ पंत की चोट ने बढ़ाई टीम इंडिया की टेंशन, कंधे पर लगी गेंद के बाद नहीं कर सके विकेटकीपिंग; चौथे दिन वापसी की उम्मीद


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के बीच टीम इंडिया की चिंता ऋषभ पंत की चोट को लेकर बढ़ गई है। मैच के तीसरे दिन पंत विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर नहीं उतर सके। उनकी जगह ध्रुव जुरेल ने विकेट के पीछे जिम्मेदारी संभाली। पंत को दूसरे दिन बल्लेबाजी के दौरान कंधे पर गेंद लगी थी जिसके बाद उनके शरीर पर चोट का असर दिखाई दिया और मूवमेंट भी सामान्य नहीं रही। टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने पंत की स्थिति को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि टीम उनकी चोट पर लगातार नजर रख रही है और उम्मीद है कि वह चौथे दिन विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर लौट सकते हैं।

    मोर्केल के मुताबिक पंत के कंधे पर गेंद लगने के बाद रात में भी उनकी चोट को लेकर चर्चा हुई थी। अगले दिन जब वह वार्मअप के लिए मैदान पर आए तो उनकी मूवमेंट सीमित नजर आई। यही वजह रही कि टीम प्रबंधन ने उन्हें विकेटकीपिंग से दूर रखने का फैसला किया। पंत तीसरे दिन ड्रेसिंग रूम में हाथ पर पट्टी बांधे भी नजर आए। हालांकि फिलहाल उनकी चोट को लेकर कोई गंभीर आधिकारिक अपडेट सामने नहीं आया है और टीम रातभर उनकी स्थिति पर नजर रखेगी।

    पंत का विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर होना टीम इंडिया के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोर्केल ने कहा कि पंत जिस तरह से खेल को पढ़ते हैं और मैदान की परिस्थितियों को समझते हैं वह टीम के लिए काफी उपयोगी है। ऐसे में भारतीय टीम चाहेगी कि पंत जल्द से जल्द पूरी तरह फिट होकर विकेट के पीछे लौटें। चौथे दिन उनकी उपलब्धता को लेकर फैसला उनकी फिटनेस और सुबह की स्थिति देखने के बाद लिया जा सकता है।

    पंत की चोट के बीच ध्रुव जुरेल ने विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाली। जुरेल पहले ही इस टेस्ट में बल्ले से शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं और शतक लगाकर अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं। ऐसे में अगर पंत चौथे दिन भी विकेटकीपिंग नहीं कर पाते हैं तो जुरेल पर एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी होगी। हालांकि टीम की पहली प्राथमिकता पंत को पूरी तरह फिट रखना होगी ताकि चोट आगे गंभीर रूप न ले।

    इसी बीच गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने कुलदीप यादव को लेकर भी अहम बात कही। कुलदीप वायरल फीवर की वजह से कोलंबो टेस्ट के लिए चयन की दौड़ से बाहर रहे। मोर्केल ने कहा कि अंतिम चयन का फैसला उनके हाथ में नहीं है लेकिन अगर कुलदीप पूरी तरह उपलब्ध होते तो उनका नाम निश्चित तौर पर चयन की चर्चा में शामिल होता। टीम प्रबंधन के मुताबिक कुलदीप गॉल से ही वायरल फीवर से जूझ रहे थे और इसी कारण उन्हें दूसरे टेस्ट में नहीं चुना गया।

    अब भारतीय टीम की नजर टेस्ट के चौथे दिन श्रीलंका की पारी को जल्द समेटने पर होगी। भारत ने बोर्ड पर 500 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया है और श्रीलंका के अभी दो विकेट बाकी हैं। मोर्केल ने कहा कि भारत को शुरुआत में एक सफलता हासिल करने पर ध्यान देना होगा और इसके बाद गेंदबाजों को लगातार सही लाइन और लेंथ के साथ दबाव बनाए रखना होगा।

    तीसरे दिन श्रीलंका के निचले क्रम ने भारतीय गेंदबाजों को कुछ समय तक जरूर परेशान किया। सोनल दिनुषा के साथ केशरा नुवंथा और लाहिरू कुमारा ने आखिरी दौर में संघर्ष किया। मोर्केल ने माना कि भारतीय टीम जल्द से जल्द श्रीलंका की पारी खत्म करना चाहती थी लेकिन टेस्ट क्रिकेट में निचले क्रम की साझेदारियां भी मुकाबले का रुख बदल सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कूकाबुरा गेंद के नरम पड़ने के बाद पिच से अतिरिक्त उछाल और तेजी हासिल करना गेंदबाजों के लिए मुश्किल हो सकता है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ऋषभ पंत चौथे दिन विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर उतरेंगे। टीम इंडिया को उम्मीद है कि उनकी चोट रातभर में बेहतर होगी और वह फिर से दस्ताने संभाल पाएंगे। हालांकि अंतिम फैसला उनकी फिटनेस जांच के बाद ही होगा। पंत की वापसी भारत के लिए इसलिए भी अहम होगी क्योंकि टीम मजबूत स्थिति में है और मैच को निर्णायक दिशा में ले जाने के लिए विकेटकीपिंग के साथ उनकी मैदान पर मौजूदगी बड़ा फर्क डाल सकती है।

  • टीम इंडिया को मिला नया शतकवीर, देवदत्त पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट में सेंचुरी लगाकर रचा इतिहास

    टीम इंडिया को मिला नया शतकवीर, देवदत्त पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट में सेंचुरी लगाकर रचा इतिहास


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने एक बार फिर अपने बल्ले का दम दिखाते हुए लगातार दूसरा शतक जड़ दिया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने शानदार धैर्य और बेहतरीन तकनीक का परिचय देते हुए 168 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। इसके साथ ही पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया। इससे पहले गाले में खेले गए सीरीज के पहले टेस्ट में भी उन्होंने शानदार शतकीय पारी खेली थी और अब कोलंबो में भी अपने प्रदर्शन को दोहराकर टीम इंडिया के लिए बड़ी पारी खेली है।

    पडिक्कल ने कोलंबो टेस्ट में 193 गेंदों का सामना करते हुए 117 रन बनाए। उनकी पारी में 12 शानदार चौके शामिल रहे। उनकी बल्लेबाजी की खास बात यह रही कि उन्होंने शुरुआत से ही श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की और मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना विकेट संभालकर रखा। इससे पहले गाले टेस्ट में पडिक्कल ने 167 रन की शानदार पारी खेली थी। उनकी उस पारी की बदौलत भारतीय टीम ने पहला टेस्ट 165 रन से अपने नाम किया था। अब दूसरे टेस्ट में भी शतक लगाकर पडिक्कल ने साबित कर दिया है कि उनका पिछला प्रदर्शन महज संयोग नहीं था।

    लगातार दो टेस्ट में शतक लगाने की उपलब्धि ने पडिक्कल को भारतीय क्रिकेट के एक खास क्लब में पहुंचा दिया है। साल 2018-19 के बाद विदेशी जमीन पर लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले वह पहले भारतीय बल्लेबाज हैं। उनसे पहले चेतेश्वर पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दौरान यह उपलब्धि हासिल की थी। पुजारा ने मेलबर्न टेस्ट में 106 और सिडनी टेस्ट में 193 रन की शानदार पारियां खेली थीं। अब पडिक्कल ने भी लगातार दो विदेशी टेस्ट में शतक लगाकर इस खास रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है।

    कोलंबो टेस्ट में भारतीय टीम की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया को शुरुआती झटका केएल राहुल के रूप में लगा। राहुल केवल 18 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद यशस्वी जायसवाल और पडिक्कल ने पारी को संभालने की कोशिश की। जायसवाल ने 45 रन की उपयोगी पारी खेली लेकिन असिथा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए।

    इसके बाद पडिक्कल ने कप्तान शुभमन गिल के साथ मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए 120 रन की शानदार साझेदारी हुई। गिल ने भी अर्धशतक जमाते हुए 50 रन बनाए लेकिन फर्नांडो की गेंद पर विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हो गए। दूसरी तरफ पडिक्कल लगातार क्रीज पर डटे रहे और अपने शतक तक पहुंचकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

    भारतीय टीम ने इस मुकाबले में कुलदीप यादव की जगह सारांश जैन को मौका दिया है। कुलदीप संक्रमण के कारण मुकाबले के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश जैन इसी मुकाबले से टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण कर रहे हैं। वहीं भारत की नजर अब दूसरे टेस्ट में बड़ी पहली पारी का स्कोर खड़ा करने और सीरीज पर कब्जा मजबूत करने पर है। इस बीच पडिक्कल की लगातार दूसरी शतकीय पारी टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक खबर बनकर सामने आई है।

  • दीप्ति शर्मा की कहानी: भक्ति से ताकत और क्रिकेट में कमाल, विश्व कप फाइनल में ऑलराउंड प्रदर्शन से रचा इतिहास

    दीप्ति शर्मा की कहानी: भक्ति से ताकत और क्रिकेट में कमाल, विश्व कप फाइनल में ऑलराउंड प्रदर्शन से रचा इतिहास


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सफलता की कहानी जब भी लिखी जाएगी तो उसमें दीप्ति शर्मा का नाम बेहद खास अंदाज में दर्ज होगा। गेंद और बल्ले दोनों से टीम के लिए मैच का रुख बदलने वाली दीप्ति ने 2025 वनडे विश्व कप में ऐसा प्रदर्शन किया जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। खुद को बजरंगबली का भक्त बताने वाली दीप्ति मैदान पर भी अपनी टीम के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाती नजर आती हैं। 24 अगस्त 1997 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मी दीप्ति ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और भारतीय टीम के तीनों फॉर्मेट में अपनी उपयोगिता साबित की।

    दीप्ति बाएं हाथ से बल्लेबाजी करती हैं जबकि दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करती हैं। भारतीय टीम के लिए उन्होंने 2014 में वनडे क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। इसके बाद 2016 में टी20 और 2021 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। धीरे धीरे वह टीम इंडिया की ऐसी ऑलराउंडर बन गईं जिनसे किसी भी मुकाबले में बल्ले और गेंद दोनों से महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद रहती है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दबाव की परिस्थितियों में भी वह अपने प्रदर्शन का स्तर बनाए रखने में कामयाब रहती हैं।

    2025 में भारत में खेले गए वनडे विश्व कप में दीप्ति ने अपनी इसी क्षमता का शानदार उदाहरण पेश किया। टूर्नामेंट में उन्होंने नौ मुकाबलों में 215 रन बनाए और तीन अर्धशतक लगाए। गेंदबाजी में उन्होंने 22 विकेट हासिल किए और पूरे टूर्नामेंट की सबसे सफल गेंदबाज बनीं। उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। हालांकि उनका सबसे यादगार प्रदर्शन विश्व कप के फाइनल में आया जहां उन्होंने भारत को चैंपियन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

    फाइनल मुकाबले में दीप्ति ने पहले बल्ले से शानदार पारी खेली और 58 गेंदों पर 58 रन बनाए। उनकी पारी में तीन चौके और एक छक्का शामिल रहा। इसके बाद जब गेंदबाजी की बारी आई तो उन्होंने विपक्षी बल्लेबाजों पर ऐसा शिकंजा कसा कि मैच का रुख भारत की ओर पूरी तरह मुड़ गया। दीप्ति ने 9.3 ओवर में 39 रन देकर पांच विकेट हासिल किए। उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने भारत को 52 रन से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई और टीम पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम करने में सफल रही।

    दीप्ति का रिकॉर्ड सिर्फ विश्व कप तक सीमित नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने सात मैचों की 12 पारियों में 402 रन बनाए हैं और उनके नाम 25 विकेट भी हैं। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 124 मैचों की 106 पारियों में 2771 रन बनाए हैं जिसमें एक शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वाधिक वनडे स्कोर 188 रन है जो भारतीय महिला क्रिकेट में एक बड़ा व्यक्तिगत रिकॉर्ड है। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। 149 मैचों में उनके नाम 1270 रन और 168 विकेट दर्ज हैं।

    दीप्ति की प्रतिभा का सम्मान सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक सीमित नहीं है। वह विमेंस प्रीमियर लीग के साथ ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग और द हंड्रेड जैसी बड़ी विदेशी लीग में भी अपना जलवा दिखा चुकी हैं। उनकी ऑलराउंड क्षमता उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट की बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल करती है। आने वाले वर्षों में भी उनसे कई बड़े प्रदर्शन और रिकॉर्ड की उम्मीद की जा सकती है।

  • WTC में बदला समीकरण: ऑस्ट्रेलिया नंबर-1 पर मजबूत, बांग्लादेश की हार से भारत को राहत; अब श्रीलंका टेस्ट पर नजर

    WTC में बदला समीकरण: ऑस्ट्रेलिया नंबर-1 पर मजबूत, बांग्लादेश की हार से भारत को राहत; अब श्रीलंका टेस्ट पर नजर


    नई दिल्ली। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की प्वाइंट्स टेबल में ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच खेले गए दूसरे टेस्ट के नतीजे का असर साफ दिखाई देने लगा है। मैके में ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को पारी और 51 रन से हराकर न सिर्फ दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबर की बल्कि डब्ल्यूटीसी की तालिका में अपनी स्थिति भी और मजबूत कर ली। इस हार का सीधा फायदा भारतीय टीम को मिला है क्योंकि बांग्लादेश का जीत प्रतिशत गिर गया है और अब अगर भारत श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में जीत दर्ज करता है तो वह बांग्लादेश को पीछे छोड़कर अंक तालिका में ऊपर पहुंच सकता है। ऑस्ट्रेलिया इस समय 80 प्रतिशत जीत के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है जबकि दक्षिण अफ्रीका 75 प्रतिशत जीत के साथ दूसरे नंबर पर है। न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद है। बांग्लादेश को दूसरे टेस्ट से पहले तक 66 प्रतिशत जीत हासिल थी लेकिन ऑस्ट्रेलिया से मिली करारी हार के बाद उसका जीत प्रतिशत घटकर 55.56 हो गया है और टीम चौथे स्थान पर है।

    भारत के लिए यह स्थिति इसलिए अहम हो जाती है क्योंकि टीम इस समय श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेल रही है। पहले टेस्ट में शानदार जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम दूसरे टेस्ट में भी मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश कर रही है। यदि टीम इंडिया कोलंबो टेस्ट अपने नाम करने में सफल रहती है तो डब्ल्यूटीसी प्वाइंट्स टेबल में उसका समीकरण और बेहतर हो सकता है। ऐसे में बांग्लादेश की हार भारतीय टीम के लिए राहत लेकर आई है। हालांकि डब्ल्यूटीसी में सिर्फ जीत ही महत्वपूर्ण नहीं होती बल्कि जीत प्रतिशत के आधार पर टीमों की स्थिति तय होती है इसलिए हर टेस्ट का परिणाम बेहद अहम माना जाता है।

    मैके में खेले गए दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआत से ही बांग्लादेश पर दबाव बनाए रखा। बांग्लादेश की पहली पारी महज 64 रन पर सिमट गई जिसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने 210 रन बनाए और 146 रन की बड़ी बढ़त हासिल की। इसके बाद बांग्लादेश की दूसरी पारी भी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और पूरी टीम सिर्फ 95 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे दिन ही पारी और 51 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस मैच में मिचेल स्टार्क ऑस्ट्रेलिया की जीत के सबसे बड़े नायक रहे। उन्होंने पहली पारी में छह और दूसरी पारी में चार विकेट लेकर मैच में कुल 10 विकेट झटके।

    ऑस्ट्रेलिया की इस शानदार जीत में कप्तान पैट कमिंस और नाथन लायन ने भी अहम भूमिका निभाई। कमिंस ने दोनों पारियों में कुल छह विकेट लिए जबकि लायन ने भी महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। बांग्लादेश ने सीरीज के पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को नौ विकेट से हराकर बड़ा उलटफेर किया था लेकिन दूसरे टेस्ट में कंगारू टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए मेहमान टीम को कोई मौका नहीं दिया। अब सीरीज 1-1 से बराबर हो चुकी है और डब्ल्यूटीसी की दौड़ में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। वहीं भारतीय टीम की नजर अब श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट के नतीजे पर है क्योंकि जीत उसे डब्ल्यूटीसी की तालिका में महत्वपूर्ण बढ़त दिला सकती है।

  • कोलंबो टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, पडिक्कल ने जड़ा अर्धशतक तो गिल ने भी जमाया पचासा

    कोलंबो टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, पडिक्कल ने जड़ा अर्धशतक तो गिल ने भी जमाया पचासा


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली क्रिकेट क्लब स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दूसरे सेशन में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया। टी-ब्रेक तक भारतीय टीम ने पहली पारी में तीन विकेट के नुकसान पर 187 रन बना लिए थे। देवदत्त पडिक्कल ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक पूरा किया जबकि कप्तान शुभमन गिल ने भी बेहतरीन पारी खेलते हुए पचासा जड़ा। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई मजबूत साझेदारी ने भारत को शुरुआती झटकों से उबारकर मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

    पहले टेस्ट में शतक लगाने वाले देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में भी अपनी शानदार फॉर्म जारी रखी। टी-ब्रेक तक वह 117 गेंदों में 63 रन बनाकर क्रीज पर टिके हुए थे। उनकी पारी में सात शानदार चौके शामिल रहे। पडिक्कल ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों का सामना किया और टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

    कप्तान शुभमन गिल ने भी शानदार बल्लेबाजी की और 108 गेंदों पर 50 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में छह चौके लगाए। गिल और पडिक्कल ने तीसरे विकेट के लिए 209 गेंदों पर 120 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस साझेदारी ने भारतीय पारी को मजबूती दी और श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा दिया। हालांकि अर्धशतक पूरा करने के बाद गिल ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और असिथा फर्नांडो की गेंद पर विकेटकीपर निरोशन डिकवेला को कैच दे बैठे।

    भारत की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने शुरुआती दौर में ही केएल राहुल का विकेट गंवा दिया। राहुल सिर्फ 18 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद यशस्वी जायसवाल ने तेज शुरुआत की और कई शानदार चौके लगाए लेकिन वह अपनी पारी को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। जायसवाल 53 गेंदों पर 45 रन बनाकर असिथा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए।

    इन शुरुआती झटकों के बाद गिल और पडिक्कल ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ धैर्य से बल्लेबाजी की और लगातार रन बनाते हुए भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। टी-ब्रेक के समय ऋषभ पंत एक रन बनाकर पडिक्कल का साथ दे रहे थे। श्रीलंका की ओर से असिथा फर्नांडो अब तक दो विकेट ले चुके थे जबकि लाहिरू कुमारा को एक सफलता मिली।

    दूसरे टेस्ट के लिए भारतीय टीम में एक बदलाव किया गया है। कुलदीप यादव की जगह मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। सारांश ने इसी मुकाबले से अपना टेस्ट डेब्यू किया। कप्तान गिल ने टॉस के समय बताया था कि कुलदीप संक्रमण के कारण चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

    वहीं श्रीलंका की टीम में भी एक खिलाड़ी ने टेस्ट डेब्यू किया है। कामिल मिशारा को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। भारतीय टीम दो मैचों की टेस्ट सीरीज में पहले ही 1-0 से आगे है। पहले टेस्ट में भारत ने श्रीलंका को 165 रनों से हराकर शानदार जीत दर्ज की थी। ऐसे में दूसरे टेस्ट में भी भारतीय टीम की नजर जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने पर है।

  • कोलंबो टेस्ट में नहीं खेलेंगे कुलदीप यादव, BCCI ने किया साफ; MP के सारांश जैन को मिला डेब्यू का मौका

    कोलंबो टेस्ट में नहीं खेलेंगे कुलदीप यादव, BCCI ने किया साफ; MP के सारांश जैन को मिला डेब्यू का मौका


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट से पहले भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। स्टार स्पिनर कुलदीप यादव इस मुकाबले में भारतीय प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं हैं। टॉस जीतकर भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और इसके बाद टीम की अंतिम एकादश सामने आई तो उसमें कुलदीप यादव का नाम नहीं था। इसके बाद उनके बाहर रहने को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने बताया कि कुलदीप अभी वायरल बीमारी से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और इसी वजह से वह इस मुकाबले के लिए चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे।

    बीसीसीआई ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि कुलदीप यादव वायरल बीमारी से पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं। इसी कारण उन्हें श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि जरूरत पड़ने पर वह कन्कशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतर सकते हैं। यानी टीम में उनकी मौजूदगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है लेकिन सामान्य परिस्थितियों में वह इस टेस्ट में गेंदबाजी या बल्लेबाजी करते नजर नहीं आएंगे।

    कप्तान शुभमन गिल ने भी टॉस के दौरान कुलदीप की स्थिति को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुर्भाग्य से कुलदीप को इन्फेक्शन हो गया है और इसी कारण वह इस मुकाबले का हिस्सा नहीं हैं। कुलदीप का बाहर होना भारतीय टीम के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि वह टीम के प्रमुख स्पिन विकल्पों में शामिल हैं और टेस्ट क्रिकेट में अपनी विविधतापूर्ण गेंदबाजी से बल्लेबाजों के लिए लगातार परेशानी खड़ी करते रहे हैं।

    कुलदीप यादव इससे पहले गाले में खेले गए पहले टेस्ट का हिस्सा थे। हालांकि उस मुकाबले में उनका प्रदर्शन अपेक्षा के मुताबिक प्रभावी नहीं रहा और उन्हें केवल एक विकेट मिला था। दूसरे टेस्ट से पहले यह चर्चा थी कि टीम मैनेजमेंट उन्हें आराम देकर किसी दूसरे स्पिन विकल्प को मौका दे सकता है। लेकिन अब बीसीसीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि कुलदीप के बाहर रहने की मुख्य वजह उनकी बीमारी है।

    कुलदीप की अनुपस्थिति में भारतीय टीम ने मध्यप्रदेश के अनुभवी ऑलराउंडर सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया है। यह सारांश के अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला मुकाबला है। 33 वर्षीय सारांश लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और मध्यप्रदेश की टीम के लिए उनके प्रदर्शन को काफी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। उन्होंने टीम को रणजी ट्रॉफी का पहला खिताब दिलाने के सफर में भी अहम भूमिका निभाई थी।

    सारांश जैन बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं और दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते हैं। ऐसे में भारतीय टीम को उनसे बल्ले और गेंद दोनों से उपयोगी योगदान की उम्मीद होगी। कुलदीप की गैरमौजूदगी में सारांश के पास खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर साबित करने का बड़ा मौका है। कोलंबो की परिस्थितियों में उनकी ऑफ स्पिन भारतीय टीम के लिए कितनी उपयोगी साबित होती है और डेब्यू मैच में वह कैसा प्रदर्शन करते हैं इस पर क्रिकेट प्रशंसकों की नजर रहेगी।

  • गॉल की जीत ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन खतरा बरकरार, 8 टेस्ट में एक भी बड़ी चूक भारत का बिगाड़ सकती है पूरा खेल

    गॉल की जीत ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन खतरा बरकरार, 8 टेस्ट में एक भी बड़ी चूक भारत का बिगाड़ सकती है पूरा खेल

    नई दिल्ली । श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 165 रनों की शानदार जीत दर्ज कर टीम इंडिया ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त जरूर बना ली है लेकिन वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 के फाइनल की दौड़ में भारत की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। गॉल में मिली जीत से भारतीय टीम के अंक प्रतिशत में सुधार हुआ है और फाइनल की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं लेकिन अंक तालिका में टीम अभी पांचवें स्थान पर ही बनी हुई है। ऐसे में अब बचे हुए आठ टेस्ट मुकाबले भारत के लिए बेहद अहम हो गए हैं और फाइनल की रेस में बने रहने के लिए टीम को लगभग हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।

    गॉल टेस्ट से पहले भारत ने नौ मुकाबलों में चार जीत दर्ज की थीं और उसका पॉइंट्स प्रतिशत 48.15 था। इस जीत के बाद भारत का पीसीटी बढ़कर 53.33 हो गया है। हालांकि इस सुधार के बावजूद भारतीय टीम अभी बांग्लादेश से पीछे है। बांग्लादेश ने पांच टेस्ट में तीन जीत के साथ 66.67 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं और वह चौथे स्थान पर है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 77.78 प्रतिशत के साथ तालिका में सबसे ऊपर है। दक्षिण अफ्रीका 75 प्रतिशत और न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ भारत से आगे हैं। इससे साफ है कि भारत को सिर्फ अपने प्रदर्शन पर निर्भर रहने से काम नहीं चलेगा बल्कि दूसरी टीमों के नतीजे भी फाइनल की तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    भारत के पास अब इस चक्र में आठ टेस्ट मैच बाकी हैं। अगर टीम इन सभी मुकाबलों में जीत दर्ज करती है तो उसका पॉइंट्स प्रतिशत करीब 74.07 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में भारत की फाइनल में पहुंचने की संभावना बेहद मजबूत हो जाएगी। लेकिन समस्या यह है कि इन आठ मुकाबलों में एक भी हार भारत के समीकरण को काफी प्रभावित कर सकती है। एक हार की स्थिति में पीसीटी लगभग 68.52 तक गिर सकता है जबकि दो हार होने पर यह करीब 62.96 और तीन हार की स्थिति में लगभग 57.41 तक पहुंच जाएगा। यानी भारत के लिए अब हर टेस्ट का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

    श्रीलंका के खिलाफ सीरीज का दूसरा और आखिरी मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। भारत की कोशिश इस मुकाबले को जीतकर सीरीज 2-0 से अपने नाम करने की होगी। इसके बाद टीम इंडिया के सामने न्यूजीलैंड की चुनौती होगी जहां उसे दो टेस्ट मैच खेलने हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भारतीय टीम के लिए आसान नहीं होंगी और हाल के वर्षों में कीवी टीम ने भारत को टेस्ट क्रिकेट में कड़ी चुनौती दी है।

    इसके बाद भारत की अगली बड़ी परीक्षा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी होगी। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ घरेलू मैदान पर होने वाली यह सीरीज WTC फाइनल की दौड़ में निर्णायक साबित हो सकती है। भारत अगर ऑस्ट्रेलिया को 4-1 या 3-1 से हराने में सफल रहता है तो उसके फाइनल की राह काफी मजबूत हो जाएगी। इसके उलट सीरीज में ज्यादा नुकसान भारत के समीकरण को मुश्किल बना सकता है।

    WTC में जीत के लिए 12 अंक मिलते हैं जबकि ड्रॉ होने पर चार अंक हासिल होते हैं और हार की स्थिति में कोई अंक नहीं मिलता। यही वजह है कि भारत के लिए अब हर टेस्ट में जीत की अहमियत बढ़ गई है। गॉल की जीत ने टीम इंडिया को राहत जरूर दी है लेकिन फाइनल का टिकट अभी दूर है। आने वाले आठ टेस्ट मुकाबले अब भारत के लिए सिर्फ सीरीज जीतने की लड़ाई नहीं बल्कि WTC फाइनल में जगह बनाने की निर्णायक जंग बनने वाले हैं।