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  • न्यूजीलैंड में टीम इंडिया का विजय रथ थमा… T-20 क्रिकेट में 6 साल में 10 जीत के बाद हारा भारत

    न्यूजीलैंड में टीम इंडिया का विजय रथ थमा… T-20 क्रिकेट में 6 साल में 10 जीत के बाद हारा भारत


    ऑकलैंड।
    न्यूजीलैंड (New Zealand) ने टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले (Fourth Match T20 series) में भारत (India) को 87 रनों से हराया. यह पांच मैचों की टी20 सीरीज में कीवी टीम की पहली जीत रही. शुक्रवार (30 अक्टूबर) को ऑकलैंड (Auckland) के ईडन पार्क में मिली इस हार के साथ ही भारतीय टीम का न्यूजीलैंड की धरती पर लगातार 10 टी20 मैचों से चला आ रहा अजेय अभियान भी थम गया. ग्लेन फिलिप्स (Glenn Phillips) के तूफानी शतक और जैकब डफी (Jacob Duffy) की घातक गेंदबाजी ने मेजबान टीम की जीत की कहानी लिखी।

    भारतीय टीम ने 2020 से 2026 के बीच न्यूजीलैंड में लगातार 10 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में हार नहीं झेली थी. शुक्रवार को यह सिलसिला टूट गया. रनों के लिहाज से यह टी20 इंटरनेशनल में भारत की दूसरी सबसे बड़ी हार भी रही. हालांकि, शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर टीम इंडिया टी20 सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुकी है।

    एक देश में किसी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ लगातार जीत (फुल मेम्बर)
    11 भारत बनाम श्रीलंका (भारत में, 2016-23)
    10 भारत बनाम न्यूजीलैंड (न्यूजीलैंड में, 2020-26)
    9 न्यूजीलैंड बनाम बांग्लादेश (न्यूजीलैंड में, 2010-22)
    9 पाकिस्तान बनाम जिम्बाब्वे (जिम्बाब्वे में, 2011-21)

    T20I में भारत की सबसे बड़ी हार (रनों के हिसाब से)
    125 रन बनाम इंग्लैंड, नॉटिंघम 2026
    87 रन बनाम न्यूजीलैंड, ऑकलैंड 2026
    80 रन बनाम न्यूजीलैंड, वेलिंगटन 2019
    76 रन बनाम साउथ अफ्रीका, अहमदाबाद 2026

    टॉस जीतकर भारत ने पहले गेंदबाजी चुनी, लेकिन न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने 20 ओवर में सात विकेट पर 259 रन ठोक दिए. यह टी20 इंटरनेशनल में न्यूजीलैंड का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है. ग्लेन फिलिप्स ने भारतीय गेंदबाजों पर हमला बोलते हुए 49 गेंदों पर 107 रन बनाए. उनकी पारी में छह चौके और 10 छक्के शामिल रहे. यह उनके टी20 इंटरनेशनल करियर का तीसरा शतक था. माइकल ब्रेसवेल ने भी महज 25 गेंदों पर 65 रनों की पारी खेली।

    दोनों ने पांचवें विकेट के लिए सिर्फ 41 गेंदों पर 115 रन जोड़कर मैच का रुख बदल दिया. ग्लेन फिलिप्स ने नितीश कुमार रेड्डी के 16वें ओवर में लगातार चार छक्के लगाए और इस ओवर में कुल 32 रन आए. माइकल ब्रेसवेल ने भी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी. न्यूजीलैंड ने आखिरी पांच ओवर में 85 रन बटोरकर स्कोर 259 तक पहुंचा दिया. फिन एलन ने 17 गेंदों पर 31 और डेरिल मिचेल ने नौ गेंदों पर 24 रन बनाए. भारत के लिए मयंक यादव ने तीन विकेट हासिल किए. अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव और नितीश कुमार रेड्डी को एक-एक सफलता मिली।

    डफी ने झटके चार विकेट
    260 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को जैकब डफी ने शुरुआती ओवर में ही दो बड़े झटके दिए. उन्होंने संजू सैमसन को चार रनों पर और ईशान किशन को बिना खाता खोले आउट कर दिया. इसके बाद अभिषेक शर्मा और श्रेयस अय्यर ने तेजी से रन जुटाने की कोशिश की. अभिषेक ने 15 गेंदों पर 27 रन बनाए, जबकि श्रेयस के बल्ले से 11 गेंदों पर 22 रन निकले. दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 46 रन जोड़े, लेकिन मैथ्यू फिशर ने अभिषेक को आउट कर साझेदारी तोड़ दी. इसके बाद एडम मिल्ने ने 143 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डालकर भारतीय कप्तान श्रेयस को बोल्ड कर दिया।

    लगातार विकेट गिरने के कारण भारतीय टीम बड़े लक्ष्य के दबाव से उबर नहीं सकी और 87 रनों से मुकाबला गंवा दिया. हार के बावजूद अर्शदीप सिंह के लिए यह मुकाबला खास रहा. उन्होंने मिचेल सेंटनर को आउट कर मेन्स टी20 इंटरनेशनल में 150 विकेट पूरे किए. वह इस उपलब्धि तक पहुंचने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने।

  • टीम इंडिया के गेंदबाजी मैनेजमेंट पर कैफ का बड़ा बयान, अय्यर की कप्तानी में बार-बार दोहराई जा रही गलतियां

    टीम इंडिया के गेंदबाजी मैनेजमेंट पर कैफ का बड़ा बयान, अय्यर की कप्तानी में बार-बार दोहराई जा रही गलतियां


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीम इंडिया की कप्तानी और गेंदबाजी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने कप्तान श्रेयस अय्यर के फैसलों पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि उन्हें गेंदबाजों को बेहतर तरीके से मैनेज करना सीखना होगा। कैफ के मुताबिक भारतीय टीम के खिलाफ बड़े स्कोर बनना अब एक बार की घटना नहीं रह गई है बल्कि यह लगातार दोहराया जा रहा पैटर्न बन गया है।

    मोहम्मद कैफ ने अय्यर की कप्तानी में गेंदबाजी में बदलाव करने के तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कप्तान को यह समझना जरूरी है कि किस गेंदबाज से किस समय गेंदबाजी करानी चाहिए। खासतौर पर टी20 क्रिकेट में डेथ ओवरों के लिए विशेषज्ञ गेंदबाजों को बचाकर रखना बेहद अहम होता है। कैफ ने अर्शदीप सिंह और भुवनेश्वर कुमार जैसे अनुभवी गेंदबाजों के इस्तेमाल पर भी अपनी राय रखी। उनके अनुसार अर्शदीप डेथ ओवरों में भारत के प्रमुख बाएं हाथ के गेंदबाज हैं जबकि भुवनेश्वर के पास नई गेंद और आखिरी ओवरों में गेंदबाजी करने का अनुभव है। ऐसे में कप्तान को इन गेंदबाजों के ओवर सही समय के लिए बचाकर रखने चाहिए।

    कैफ ने भारतीय टीम के खिलाफ बन रहे बड़े स्कोर का आंकड़ा भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि साल 2026 से पहले भारतीय पुरुष टी20 टीम ने कभी भी 250 या उससे ज्यादा रन नहीं दिए थे। लेकिन अय्यर की कप्तानी में महज चार महीनों के भीतर भारत को तीन बार इस स्थिति का सामना करना पड़ा है। इंग्लैंड ने साउथैम्प्टन में 3 विकेट पर 257 रन बनाए थे। वेस्टइंडीज ने रांची में 4 विकेट पर 252 रन का स्कोर खड़ा किया जबकि न्यूजीलैंड ने ऑकलैंड में 7 विकेट पर 259 रन बना दिए। कैफ के मुताबिक लगातार इतने बड़े स्कोर बनना गेंदबाजी रणनीति की समीक्षा की जरूरत बताता है।

    हालांकि कैफ ने यह भी स्पष्ट किया कि हर महंगे गेंदबाजी प्रदर्शन के लिए कप्तान को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। ऑकलैंड में नीतीश कुमार रेड्डी ने चार ओवर में 64 रन खर्च किए। वहीं न्यूजीलैंड के ग्लेन फिलिप्स और माइकल ब्रेसवेल ने 41 गेंदों में 115 रन जोड़कर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। न्यूजीलैंड ने आखिरी नौ ओवरों में 146 रन बनाए। इस दौरान भारतीय गेंदबाज रन रोकने में नाकाम रहे। कैफ ने अर्शदीप सिंह को भारतीय आक्रमण का ऐसा गेंदबाज बताया जिसने कुछ हद तक नियंत्रण बनाए रखा।

    नीतीश कुमार रेड्डी की भूमिका को लेकर भी कैफ ने अपनी राय रखी। उनका मानना है कि नीतीश को पांचवें या छठे गेंदबाजी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए। उनसे मुख्य तेज गेंदबाज जैसी जिम्मेदारी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उनके ओवर मध्यक्रम के दौरान पूरे कराए जाने चाहिए ताकि विशेषज्ञ गेंदबाजों पर दबाव कम रहे।

    श्रेयस अय्यर के लिए चिंता सिर्फ कप्तानी तक सीमित नहीं है। उनका बल्ला भी पिछले कुछ मुकाबलों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया है। 6 अक्टूबर को लखनऊ में वेस्टइंडीज के खिलाफ 43 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाने के बाद अय्यर की पिछली आठ पारियों में 40 1 16 22 42 7 5 और 22 रन की पारियां शामिल हैं। ऐसे में न्यूजीलैंड के खिलाफ हार के बाद उनकी कप्तानी के साथ बल्लेबाजी पर भी चर्चा तेज हो गई है।

  • नंबर-3 से नंबर-5 पर आते ही बदला तिलक वर्मा का अंदाज, अब पहली गेंद से बाउंड्री लगाने की रहती है कोशिश

    नंबर-3 से नंबर-5 पर आते ही बदला तिलक वर्मा का अंदाज, अब पहली गेंद से बाउंड्री लगाने की रहती है कोशिश

    नई दिल्ली । भारतीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा ने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव के साथ अपनी रणनीति में भी बदलाव किया है। पहले तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले तिलक अब पांचवें या छठे नंबर पर उतर रहे हैं। इस नई भूमिका में उनका लक्ष्य शुरुआत से ही तेजी से रन बनाना है। हालांकि, वह परिस्थितियों को समझकर ही आक्रामक शॉट खेलने का फैसला करते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 मुकाबले से पहले उन्होंने अपने बदले हुए बल्लेबाजी अंदाज और रन चेज के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति के बारे में बताया।

    तिलक के मुताबिक, उनके पास पहले से ही बड़े शॉट खेलने की क्षमता थी और उन्होंने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए भी खूब रन बनाए हैं। लेकिन अब पांचवें या छठे नंबर पर आने के बाद उनकी सोच में थोड़ा बदलाव आया है। इस क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए वह पहली ही गेंद से बाउंड्री लगाने का मौका तलाशते हैं। हालांकि, इसके लिए गेंद का उनके अनुकूल होना जरूरी है। यदि पहली गेंद पर बड़ा शॉट खेलने का सही अवसर नहीं मिलता, तो वह जल्दबाजी करने के बजाय पारी को आगे बढ़ाने पर ध्यान देते हैं।

    तिलक ने बताया कि ऐसी स्थिति में वह शुरुआत में सिंगल और डबल लेकर स्कोर आगे बढ़ाते हैं। साथ ही मैदान में खाली जगह तलाशकर चौके लगाने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते समय केवल आक्रामक होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मैच की परिस्थिति के अनुसार जोखिम लेना भी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर वह क्रीज पर समय बिताते हैं और मुकाबले को अंतिम ओवरों तक ले जाने की कोशिश करते हैं।
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    तिलक की यह रणनीति न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में देखने को मिली थी। क्राइस्टचर्च में खेले गए इस मैच में भारतीय टीम 181 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुश्किल स्थिति में पहुंच गई थी। ऐसे समय में तिलक ने नीतीश रेड्डी के साथ मिलकर पारी को संभाला। उन्होंने 26 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए और टीम को चार विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। दोनों बल्लेबाजों के बीच सातवें विकेट के लिए 69 रन की नाबाद साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को उस मुकाबले में जीत तक पहुंचाया।

    तिलक ने बताया कि उस समय उन्होंने नीतीश रेड्डी से कहा था कि अगर दोनों बल्लेबाज मिलकर यहां से मैच जिता देते हैं तो यह बेहद खास होगा। उन्होंने साथी खिलाड़ी को क्रीज पर टिके रहने, मुकाबले को आगे तक ले जाने और फिर परिस्थितियों के अनुसार खेलने की सलाह दी थी। तिलक के अनुसार, रन चेज में धैर्य बनाए रखना और सही समय पर तेजी से रन बनाना काफी महत्वपूर्ण होता है।

    आखिरी ओवरों में गेंदबाजों पर दबाव बनाने को लेकर भी तिलक की सोच स्पष्ट है। उनका मानना है कि डेथ ओवर्स में बल्लेबाज के मुकाबले गेंदबाज अधिक दबाव में होता है। वह इसी सकारात्मक सोच के साथ बल्लेबाजी करते हैं कि गेंदबाज पर दबाव होने के कारण उससे रन देने की गलती हो सकती है। इस मानसिकता से उन्हें मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते समय आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद मिलती है।

    न्यूजीलैंड दौरे पर पहुंचने से पहले भारतीय टीम ने घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज खेली थी। लगातार व्यस्त कार्यक्रम के कारण नए माहौल और समय क्षेत्र के अनुसार खुद को ढालना आसान नहीं था। तिलक ने माना कि परिस्थितियों से तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली टीम इस वजह से बहाने नहीं बना सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन से युवा क्रिकेटरों के लिए उदाहरण पेश करना चाहिए। मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी टीम बैठकों में स्पष्ट किया है कि टी20 टीम का प्रदर्शन पूरे दौरे के लिए अच्छा माहौल तैयार कर सकता है।

    भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। अब टीम की नजर बाकी दोनों मैच जीतकर सीरीज में 5-0 से क्लीन स्वीप करने पर है। तिलक ने इसे भारतीय टीम और दर्शकों के लिए अच्छा अवसर बताया। चौथा टी20 मुकाबला 30 अक्टूबर को ऑकलैंड में खेला जाना है।

  • Ind vs NZ: चौथा टी-20 आज ऑकलैंड में… टीम इंडिया यहां कभी नहीं हारी…. हर बार किया चेज

    Ind vs NZ: चौथा टी-20 आज ऑकलैंड में… टीम इंडिया यहां कभी नहीं हारी…. हर बार किया चेज


    ऑकलैंड।
    टीम इंड‍िया (Team India) न्यूजीलैंड (New Zealand) के ख‍िलाफ टी20 सीरीज ( T20 series) 3-0 से जीत चुकी है, अब टी20 सीरीज का कारवां ऑकलैंड (Auckland) के ईडन पार्क पहुंच चुका है.इसी ऑकलैंड के मैदान में दोनों ही टीमों के बीच चौथा टी20 (Fourth T20) होना है, लेकिन यहां भारतीय टीम ने कभी भी हार नहीं देखी है और खास बात यह है कि हर बार टीम इंड‍िया यहां की चेजमास्टर है, यानी टीम ने हर मैच चेज करते हुए जीता है।

    वहीं अगर यह कहा जाए कि न्यूजीलैंड का यह छोटा सा ग्राउंड भारत के लिए जैसे अपना घर बन गया है. तो यह बात अत‍िरेक नहीं होगी।


    ऑकलैंड में बदलेगी टीम इंडिया की प्लेइंग XI? गंभीर के सामने दो रास्ते

    यहां टीम इंडिया ने अब तक कुल तीन टी20 इंटरनेशनल खेले हैं और तीनों के तीनों जीते हैं. यहां भारतीय टीम को एक भी हार नहीं म‍िली है, टीम इंड‍िया का र‍िकॉर्ड यहां 100 प्रतिशत जीत का है. मुकाबला शुक्रवार (30 अक्टूबर) को है।


    भारत ने कब-कब खेले हैं ऑकलैंड में टी20 मैच

    1- दोनों ही टीमों के बीच इस मैदान पर पहला टी20 मैच 8 फरवरी 2019 को खेला गया. न्यूजीलैंड ने 158 रन बनाए. उस मुकाबले में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ क्रुणाल पंड्या थे, उन्होंने 4 ओवर में 28 रन देकर 3 विकेट झटके थे. भारत ने 18.5 ओवर में 7 विकेट से जीत हासिल कर ली. भारतीय टीम के रनचेज में रोहित शर्मा ने 50 तो श‍िखर धवन ने 30 रन बनाए. वहीं ऋषभ पंत तब तीसरे नंबर पर खेलने उतरे थे और 28 गेंदों पर 40 रनों की नाबाद पारी खेली थी, महेंद्र स‍िंह धोनी भी 20 रन बनाकर नाबाद लौटे थे।

    2- इस मैदान पर दोनों ही टीमों के बीच दूसरा टी20 24 जनवरी 2020 को हुआ. मेजबान टीम 203 तक पहुंची. भारत ने 19 ओवर में 204 रन बनाकर 6 विकेट से 6 गेंद शेष रहते हुए जीत दर्ज की. तब उस जीत के स्टार ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ श्रेयस अय्यर थे, जो इस समय मौजूदा टीम के कप्तान हैं. ऐसे में यह मैदान उनके लिए यादगार है।

    3- ईडन पार्क की धरती पर दोनों ही देशों के बीच तीसरा टी20 26 जनवरी 2020 को हुआ. न्यूजीलैंड 132 पर सिमट गई. भारत ने 17.3 ओवर में 7 विकेट से मैच अपने नाम कर लिया. ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ केएल राहुल ने उस मुकाबले में 50 गेंदों पर 57 रनों की पारी खेली थी. वहीं श्रेयस अय्यर ने तब भी इस मैदान पर 33 गेंदों पर 44 रन बनाए थे।

    यानी कुल म‍िलाकर भारतीय टीम ने यहां तीनों मैच दूसरी पारी में हैं और चेज करते हुए जीते हैं.अब शुक्रवार (30 अक्टूबर) को यहीं चौथा टी20 है. सीरीज में पहले तीन मैच जीतकर टीम इंडिया 3-0 की बढ़त बना चुकी है।

    श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम फॉर्म में है. अब ईडन पार्क पहले का र‍िकॉर्ड न्यूजीलैंड टीम के लिए डरावना रहा है, ऐसे में उस पर एक्स्ट्रा प्रेशर वाला रहेगा. सवाल यह है कि पहले तीन मैचों में हार का सिलसिला कीवी टीम तोड़ पाएगी या नहीं, क्योंकि इतिहास साफ कहता है ईडन पार्क पर टीम इंडिया का राज चलता है।

  • टीम इंडिया के सामने अजीब उलझन….. जगह तीन और दावेदार चार….

    टीम इंडिया के सामने अजीब उलझन….. जगह तीन और दावेदार चार….


    नई दिल्ली।
    टीम इंडिया (Team India) के सामने अजीब उलझन है. जो बल्लेबाज (Batsman) रन बना रहे हैं, उन्हें बाहर बैठाना आसान नहीं और ईशान किशन (Ishan Kishan) की वापसी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में सवाल सिर्फ प्लेइंग-11 का नहीं, बल्लेबाजी क्रम और रोटेशन पॉलिसी का भी है।

    टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में ऐसा तूफान मचाया कि विरोधी गेंदबाजों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) ने 38 गेंदों में 113 रन ठोक दिए, वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) ने ओपनिंग में उतरकर अपने तेवर दिखाए और भारत ने 199 रनों का लक्ष्य महज 13.2 ओवरों में हासिल कर लिया. इस धमाकेदार जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त भी बना लीय़

    लेकिन इस जीत के बीच टीम इंडिया के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसका जवाब ढूंढना आसान नहीं होगा. अभिषेक शर्मा का बल्ला आग उगल रहा है, वैभव सूर्यवंशी ने ओपनिंग में अपना दावा मजबूत किया है और संजू सैमसन (Sanju Samson) भी पहले से रन बनाकर आ रहे हैं. अब ईशान किशन फिट होकर टीम में वापसी करते हैं तो आखिर किसका पत्ता कटेगा?


    शतक जड़ने वाले को बाहर बैठाएंगे या तूफानी ओपनर को?

    ईशान किशन की वापसी का इंतजार खत्म होते ही भारतीय टीम के सामने चयन की पहेली खड़ी हो सकती है. एक तरफ अभिषेक हैं, जो अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से मैच का रुख पलटने की ताकत रखते हैं. दूसरी तरफ वैभव हैं, जिन्हें ओपनिंग में उतारने का फैसला तीसरे टी20 में देखने को मिला. वहीं संजू सैमसन भी इस समीकरण के अहम खिलाड़ी हैं.

    अभिषेक को बाहर बैठाने का फैसला उनके हालिया प्रदर्शन के सामने मुश्किल होगा. वैभव को हटाने का मतलब होगा एक ऐसे युवा बल्लेबाज को उसकी पसंदीदा पोजिशन पर लगातार मौके देने की योजना पर सवाल उठना. संजू को बाहर करना भी आसान विकल्प नहीं है, खासकर तब जब वह अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए रन बना रहे हों.

    और ईशान को वापस लाने का सवाल भी उतना ही अहम है. जब कोई खिलाड़ी फिट होकर उपलब्ध होता है, तो टीम मैनेजमेंट को उसके चयन और बाकी खिलाड़ियों की भूमिकाओं पर फैसला करना ही पड़ता है. ऐसे में असली चुनौती सिर्फ किसी एक नाम को चुनना नहीं, बल्कि ऐसा संयोजन तैयार करना है जिसमें खिलाड़ियों की खूबियों का सही इस्तेमाल हो सके.


    वैभव ओपनिंग करेंगे तो संजू का क्या होगा?

    तीसरे टी20 में ईशान की गैरमौजूदगी के बीच वैभव सूर्यवंशी को ओपनिंग का मौका मिला. इससे बल्लेबाजी क्रम को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई. वैभव की सबसे बड़ी ताकत पारी की शुरुआत में गेंदबाजों पर हमला करना है. उन्हें तीसरे नंबर पर उतारने के प्रयोग पर पहले भी सवाल उठे हैं.

    लेकिन वैभव को ओपनिंग में खिलाने का मतलब यह भी है कि टीम को बाकी बल्लेबाजों के क्रम पर विचार करना होगा. न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में संजू सैमसन तीसरे नंबर पर उतरे. अब अगर वैभव को ओपनिंग में बनाए रखने की योजना है, तो संजू को अपनी भूमिका के हिसाब से ढलना पड़ सकता है.

    यहीं से सवाल और पेचीदा हो जाता है. क्या संजू को वैभव के लिए अपनी पसंदीदा पोजिशन छोड़नी होगी? क्या अभिषेक और वैभव की जोड़ी को बनाए रखने के लिए टीम मैनेजमेंट बाकी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करेगा? और ईशान की वापसी के बाद क्या संजू के लिए प्लेइंग-11 में जगह बनाना और मुश्किल हो जाएगा?

    इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल भारतीय टीम की रोटेशन पॉलिसी को लेकर है. अगस्त से दिसंबर के बीच भारत के कार्यक्रम में अफगानिस्तान के खिलाफ 3, वेस्टइंडीज के खिलाफ 5, न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 और श्रीलंका के खिलाफ 3 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले शामिल हैं. यानी कुल 16 मैचों के इस कार्यक्रम में खिलाड़ियों को अलग-अलग संयोजनों में आजमाने का अवसर था।

    ऐसे में एक विकल्प यह हो सकता था कि टीम मैनेजमेंट पहले से तय करता कि किस खिलाड़ी को कितने मैचों में मौका देना है, किसे आराम दिया जाएगा और किसकी भूमिका क्या होगी. अगर खिलाड़ियों को पहले ही स्पष्ट कर दिया जाता कि उन्हें चार या पांच मैचों के बाद आराम मिल सकता है, तो किसी खिलाड़ी को बाहर बैठाने का फैसला केवल उसके प्रदर्शन से जोड़कर नहीं देखा जाता।

  • चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार का फीका प्रदर्शन, तीन मैचों में 139 रन लुटाए और मिला सिर्फ एक विकेट

    चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार का फीका प्रदर्शन, तीन मैचों में 139 रन लुटाए और मिला सिर्फ एक विकेट


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चार साल बाद वापसी अब तक उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही है। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज में मेरठ के 36 वर्षीय गेंदबाज को शुरुआती तीन मुकाबलों में अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ा है। अपनी स्विंग गेंदबाजी के दम पर दुनिया के बड़े बल्लेबाजों को परेशान करने वाले भुवनेश्वर इस बार रन रोकने और विकेट निकालने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सके। तीन मैचों में उन्होंने कुल 12 ओवर गेंदबाजी करते हुए 139 रन खर्च किए और उनके खाते में केवल एक विकेट आया। ऐसे प्रदर्शन के बाद अब अगले मुकाबलों में उनकी गेंदबाजी पर सभी की निगाहें रहेंगी।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा है। बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाकर विरोधी टीम पर दबाव बनाया है और गेंदबाजों ने भी कई मौकों पर अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि भुवनेश्वर कुमार के लिए शुरुआती मुकाबले चुनौतीपूर्ण साबित हुए। पहले मैच में उन्होंने चार ओवर में 49 रन दिए जबकि दूसरे मुकाबले में उनके खाते से 50 रन खर्च हुए। तीसरे टी20 में भी उन्होंने चार ओवर में 40 रन दिए। हालांकि पिछले दो मैचों की तुलना में उनके प्रदर्शन में कुछ सुधार दिखाई दिया लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिल सका। तीन मैचों में उनकी इकोनॉमी 11.58 रन प्रति ओवर रही है जो टी20 क्रिकेट के लिहाज से काफी महंगी मानी जाती है।

    भुवनेश्वर कुमार को भारतीय क्रिकेट में उनकी शानदार स्विंग गेंदबाजी और शुरुआती ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता के लिए जाना जाता है। नई गेंद से दोनों तरफ स्विंग कराने की उनकी कला ने उन्हें लंबे समय तक टीम इंडिया का अहम गेंदबाज बनाए रखा। लेकिन लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। मैच की परिस्थितियों के अनुसार गेंदबाजी करना और दबाव के बीच सही लाइन और लेंथ बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में भुवनेश्वर को भी अपनी पुरानी लय पाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है।

    टीम प्रबंधन को अनुभव पर भरोसा

    शुरुआती तीन मुकाबलों में महंगे साबित होने के बावजूद टीम प्रबंधन और मुख्य कोच ने भुवनेश्वर कुमार के अनुभव पर भरोसा जताया है। टीम का मानना है कि लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के कारण खिलाड़ी को लय में लौटने में समय लग सकता है। मेरठ के गांधी बाग में क्रिकेट कोच तनकीब अहमद ने भी माना कि लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने पर खिलाड़ी के ऊपर दबाव रहता है। हर खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करना चाहता है और भुवनेश्वर भी आने वाले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कोच अतरह अली के मुताबिक भी वापसी के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव रहता है और खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करता है।

    अगले मुकाबलों में लय हासिल करने की चुनौती

    अब सीरीज के अगले मैच भुवनेश्वर कुमार के लिए काफी अहम होंगे। उन्हें अपनी गेंदबाजी में सटीकता लाने के साथ विकेट निकालने की क्षमता भी दिखानी होगी। शुरुआती ओवरों में रन रोकना और बल्लेबाजों को गलतियां करने के लिए मजबूर करना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। यदि वह अपनी स्विंग और अनुभव का सही इस्तेमाल कर पाए तो टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। फिलहाल उनके प्रदर्शन पर सवाल जरूर उठ रहे हैं लेकिन सीरीज के बाकी मुकाबलों में वापसी करने का अवसर उनके पास है। अब देखना होगा कि अनुभवी भुवी अपने प्रदर्शन में कितना सुधार कर पाते हैं और टीम प्रबंधन के भरोसे पर किस तरह खरे उतरते हैं।

  • भारत की जीत की तैयारी के बीच झटका, ईशान किशन तीसरे टी20 से बाहर, प्लेइंग इलेवन में किसे मिलेगा मौका?

    भारत की जीत की तैयारी के बीच झटका, ईशान किशन तीसरे टी20 से बाहर, प्लेइंग इलेवन में किसे मिलेगा मौका?


    नई दिल्ली । न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन कर रही भारतीय टीम को तीसरे मुकाबले से पहले झटका लगा है। विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन चोट के कारण 27 अक्टूबर को वेलिंगटन में होने वाले तीसरे टी20 मैच में भी नहीं खेल पाएंगे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने उनकी फिटनेस को लेकर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ईशान चोट से उबर रहे हैं लेकिन अभी मैच खेलने के लिए पूरी तरह फिट नहीं हुए हैं। उनकी गैरमौजूदगी में टीम प्रबंधन को प्लेइंग इलेवन के संयोजन पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।

    बीसीसीआई के मुताबिक ईशान किशन को न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दौरान दाहिनी जांघ में हल्की चोट लगी थी। मेडिकल भाषा में इसे लो ग्रेड एडडक्टर स्ट्रेन बताया गया है। चोट के बाद से उनकी रिकवरी पर लगातार नजर रखी जा रही है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ईशान की स्थिति में सुधार हो रहा है लेकिन तीसरे मुकाबले तक उनके पूरी तरह फिट होने की संभावना नहीं है। बीसीसीआई की मेडिकल टीम उनकी प्रगति पर नजर बनाए हुए है। विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को भी तीसरे टी20 के लिए टीम के साथ बनाए रखा गया है।

    ईशान किशन की चोट के कारण दूसरे टी20 मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया था। उन्हें नंबर तीन पर बल्लेबाजी का मौका मिला लेकिन वह इस अवसर को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। वैभव आठ गेंदों पर चार रन बनाकर आउट हो गए थे। इसके बावजूद उनकी प्रतिभा और आक्रामक बल्लेबाजी को देखते हुए टीम प्रबंधन उन्हें एक और मौका दे सकता है। यदि ईशान तीसरे मैच में उपलब्ध नहीं रहते हैं तो वैभव के पास अपनी उपयोगिता साबित करने का अवसर होगा। हालांकि अंतिम प्लेइंग इलेवन का फैसला टीम प्रबंधन ही करेगा।

    दूसरे टी20 में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड के 181 रन के लक्ष्य को छह विकेट खोकर हासिल कर लिया था। भारत ने यह लक्ष्य मैच की आखिरी से पहले वाली गेंद पर पूरा किया। इस जीत में बल्लेबाजों ने अहम भूमिका निभाई और दबाव के बीच टीम को मुकाबले में बनाए रखा। तिलक वर्मा ने सिर्फ 26 गेंदों पर 51 रन की आक्रामक पारी खेलकर भारतीय पारी को मजबूती दी। उनकी बल्लेबाजी ने रन गति बढ़ाने के साथ टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाने में मदद की।

    नमन धीर ने भी 17 गेंदों पर 31 रन बनाकर उपयोगी योगदान दिया। वहीं नीतीश कुमार रेड्डी ने 13 गेंदों पर नाबाद 26 रन बनाते हुए टीम को जीत तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। भारतीय बल्लेबाजों के इस प्रदर्शन से टीम ने पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है। अब तीसरे मुकाबले में भारत की कोशिश जीत हासिल कर सीरीज पर अपनी पकड़ और मजबूत करने की होगी।

    ईशान किशन की गैरमौजूदगी टीम के लिए चुनौती जरूर है लेकिन भारतीय टीम के पास बल्लेबाजी में कई विकल्प मौजूद हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए यह खुद को साबित करने का मौका भी है। दूसरी ओर न्यूजीलैंड की टीम वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। ऐसे में तीसरा टी20 मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम रहने वाला है। भारतीय प्रशंसकों की नजरें ईशान की रिकवरी के साथ इस बात पर भी रहेंगी कि टीम प्रबंधन उनकी जगह किस खिलाड़ी को अंतिम एकादश में शामिल करता है।

  • टी20 फार्मेट में टीम इंडिया की बड़ी उपलब्धि….. 200 मैच जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी

    टी20 फार्मेट में टीम इंडिया की बड़ी उपलब्धि….. 200 मैच जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी


    नई दिल्ली।
    सर्वाधिक बार टी20 विश्व कप (Most T20 World Cup Wins) अपने नाम कर चुकी भारतीय टीम (Indian Team) का खेल के सबसे छोटे प्रारूप में दबदबा है। भारत पाकिस्तान (Pakistan) के बाद महज दूसरी टीम है जिसने टी20 में 300 मैच खेले हैं। भारतीय टीम फिलहाल न्यूजीलैंड दौरे (New Zealand tour) पर है जहां उसे तीनों प्रारूप की सीरीज खेलनी है। भारत ने पांच मैचों की टी20 सीरीज के शुरुआती दो मुकाबले जीतकर बढ़त बना ली है। क्राइस्टचर्च में खेला गया दूसरा टी20 तो भारत के लिए कई मायनों में यादगार रहा है। आइए जानते हैं न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में जीत के साथ ही भारत ने टी20 में ऐसा कौन सा मुकाम हासिल कर लिया जो अब तक दुनिया की कोई अन्य टीम नहीं कर सकी है।


    भारत के लिए क्यों खास रही क्राइस्टचर्च की जीत

    भारत का यह टी20 में 300वां मुकाबला था और टीम ने इसमें रोमांचक जीत दर्ज की। मुकाबले में भारत ने 181 रन के लक्ष्य को 19.5 ओवर में छह विकेट खोकर हासिल कर लिया। तिलक वर्मा ने नाबाद अर्धशतकीय पारी खेलकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई, जबकि नमन धीर और नीतीश कुमार रेड्डी ने भी उपयोगी पारियां खेलीं। इसके साथ ही टीम इंडिया ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी 200वीं जीत भी दर्ज कर ली। इस आंकड़े में केवल सामान्य जीत यानी निर्धारित खेल के आधार पर मिली जीत शामिल हैं। भारत इस प्रारूप में 200 मैच जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई है। भारत से पहले टी20 में अब तक कोई ऐसा नहीं कर सका है। भारत की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि टीम ने सामान्य जीत के अलावा सुपर ओवर में पांच मुकाबले जीते हैं। इसके अलावा 2007 में पाकिस्तान के खिलाफ बॉल-आउट के जरिए भी भारत को जीत मिली थी। नवंबर 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक मुकाबला बारिश के कारण टाई रहा था।

    भारत ने 2006 से 2026 के बीच अब तक 300 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं, जिनमें टीम को 200 मैचों में जीत मिली है। इस सूची में पाकिस्तान दूसरे स्थान पर है। पाकिस्तान ने 304 मुकाबलों में 176 जीत दर्ज की हैं। न्यूजीलैंड 135 जीत के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड क्रमशः 129 और 128 जीत के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। पाकिस्तान ने भले ही भारत के मुकाबले ज्यादा टी20 मैच खेले हैं, लेकिन सर्वाधिक जीत भारत ने ही दर्ज की है।


    विरोधी टीमों के खिलाफ कैसा है भारत का रिकॉर्ड

    टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत का रिकॉर्ड लगभग हर टीम के खिलाफ मजबूत रहा है। ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज और श्रीलंका के खिलाफ भारतीय टीम ने 22-22 मुकाबलों में जीत हासिल की है। वहीं, न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत ने 33 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं, जिनमें 19 में जीत मिली है और 11 में हार का सामना करना पड़ा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत ने सुपर ओवर में भी दो जीत दर्ज की हैं। भारत दुनिया की ऐसी टीम है, जिसका टी20 अंतरराष्ट्रीय में अब तक सामना की गई हर टीम के खिलाफ जीत-हार का रिकॉर्ड सकारात्मक है। बांग्लादेश के खिलाफ भारत ने 18 में से 17 मैच जीते हैं, जबकि अफगानिस्तान के खिलाफ 12 मुकाबलों में उसे एक भी हार नहीं मिली है।


    इस साल टी20 में कैसा रहा प्रदर्शन?

    मौजूदा कैलेंडर वर्ष 2026 में भारतीय टीम ने अब तक 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं, जिनमें 25 मैचों में जीत हासिल की है। भारत के लिए मौजूदा साल यादगार रहा है क्योंकि इस साल की शुरुआत में ही भारत ने टी20 विश्व कप के खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया था। साल के अंत तक भारतीय टीम को छह और टी20 मुकाबले खेलने हैं। इनमें न्यूजीलैंड के खिलाफ उसकी सरजमीं पर पांच मैचों की टी20 सीरीज के शेष तीन मैच और श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मैदान पर तीन मैच शामिल हैं। ऐसे में भारतीय टीम के पास अपनी जीत की संख्या और बढ़ाने का मौका होगा। न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार दो जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने के करीब पहुंची टीम इंडिया अब मंगलवार को होने वाले तीसरे मुकाबले में भी जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप करने के इरादे से उतरेगी।


  • वैभव सूर्यवंशी को अभी करना होगा इंतजार, मुरली कार्तिक ने समझाई टीम इंडिया की हकीकत, संजू-अभिषेक को हटाना आसान नहीं

    वैभव सूर्यवंशी को अभी करना होगा इंतजार, मुरली कार्तिक ने समझाई टीम इंडिया की हकीकत, संजू-अभिषेक को हटाना आसान नहीं


    नई दिल्ली। आईपीएल में अपने बल्ले से तहलका मचाकर दुनियाभर में चर्चा बटोरने वाले 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी है। कम उम्र में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन करने के बाद हर क्रिकेट प्रेमी उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाना केवल प्रतिभा और बड़े स्कोर बनाने तक सीमित नहीं है। टीम में पहले से मौजूद खिलाड़ियों का प्रदर्शन टीम की रणनीति और सही मौके का इंतजार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। वैभव के लिए अब सबसे बड़ा इम्तिहान अपनी प्रतिभा साबित करने के साथ धैर्य बनाए रखने का है।

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर मुरली कार्तिक ने वैभव की मौजूदा स्थिति पर अपनी राय रखते हुए कहा है कि क्रिकेट में हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को तुरंत प्लेइंग इलेवन में जगह मिल जाए यह जरूरी नहीं है। कई बार खिलाड़ियों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है और इस सच्चाई को स्वीकार करना उनके करियर का अहम हिस्सा होता है। कार्तिक के मुताबिक किसी खिलाड़ी को केवल इसलिए टीम से बाहर नहीं किया जा सकता कि कोई दूसरा युवा खिलाड़ी अधिक रोमांचक प्रतिभा के रूप में सामने आया है। चयन के पीछे ठोस वजह और टीम की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    भारतीय टीम में ओपनिंग की जगह को लेकर इस समय मुकाबला काफी दिलचस्प है। अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे स्थापित खिलाड़ियों के रहते वैभव के लिए तुरंत नियमित जगह बनाना आसान नहीं होगा। दोनों खिलाड़ी 2026 टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में केवल एक युवा खिलाड़ी को मौका देने के लिए मौजूदा संयोजन में बदलाव करना टीम प्रबंधन के लिए आसान फैसला नहीं होगा।

    मुरली कार्तिक ने भी इस बात पर जोर दिया कि केवल बदलाव करने के लिए बदलाव नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि भारतीय ओपनिंग जोड़ी के प्रदर्शन में उतार चढ़ाव जरूर रहा है लेकिन इसी जोड़ी ने टीम को कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में जीत भी दिलाई है। ऐसे में कुछ मैचों के प्रदर्शन के आधार पर स्थापित खिलाड़ियों को बाहर करना सही रणनीति नहीं मानी जा सकती। टीम प्रबंधन को खिलाड़ियों के पिछले योगदान और भविष्य की योजनाओं दोनों को ध्यान में रखकर फैसला लेना होता है।

    वैभव सूर्यवंशी के लिए यशस्वी जायसवाल का उदाहरण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतिभाशाली बल्लेबाज होने के बावजूद सीमित ओवरों की टीम में नियमित जगह हासिल करना आसान नहीं होता। टीम में पहले से मौजूद खिलाड़ियों और टीम संयोजन के कारण कई बार अच्छे खिलाड़ी को भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इससे यह साफ होता है कि प्रतिभा किसी खिलाड़ी को पहचान दिला सकती है लेकिन नियमित अवसर हासिल करने के लिए परिस्थितियों का साथ देना भी जरूरी है।

    कार्तिक के मुताबिक कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर वैभव से इस मुद्दे पर बातचीत कर रहे होंगे। इसका अर्थ यह नहीं है कि युवा बल्लेबाज टीम की योजनाओं से बाहर हैं। बल्कि उन्हें सही समय पर अवसर देने और भविष्य के लिए तैयार रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। वैभव को इस दौरान अपनी फिटनेस तकनीक और बल्लेबाजी की निरंतरता पर ध्यान देना होगा ताकि मौका मिलने पर वह प्रभावशाली प्रदर्शन कर सकें।

    दूसरी ओर संजू सैमसन का हालिया प्रदर्शन वैभव के लिए प्रतिस्पर्धा को और कठिन बना रहा है। टी20 विश्व कप 2026 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे संजू ने अपने पिछले दस मैचों में चार अर्धशतक लगाए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भी उनके प्रदर्शन ने टीम में उनकी दावेदारी को मजबूत किया है। अभिषेक शर्मा और ईशान किशन जैसे विकल्पों की मौजूदगी से भारतीय टीम के पास शीर्ष क्रम में कई विकल्प उपलब्ध हैं।

    ऐसे में वैभव सूर्यवंशी को समझना होगा कि आईपीएल की सफलता उनके करियर की बड़ी उपलब्धि जरूर है लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबी पारी खेलने के लिए धैर्य और निरंतरता भी जरूरी है। कम उम्र में मिली लोकप्रियता उनके लिए अवसरों के दरवाजे खोल सकती है लेकिन दबाव को संभालना और अपने मौके का पूरा फायदा उठाना ही उन्हें आगे बढ़ाएगा। फिलहाल उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इंतजार के इस दौर में खुद को तैयार रखना है क्योंकि टीम इंडिया में जगह बनाने की असली परीक्षा अभी बाकी है।

  • Ind W vs ZIM W : शेफाली-मंधाना की तूफानी पारियां… टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से रौंदा

    Ind W vs ZIM W : शेफाली-मंधाना की तूफानी पारियां… टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से रौंदा


    रायपुर।
    शेफाली वर्मा (Shafali Verma) की तूफानी बल्लेबाजी और स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) की शानदार पारी के दम पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम (Indian Women’s Cricket Team) ने जिम्बाब्वे (Zimbabwe) को दूसरे टी20 मुकाबले में नौ विकेट से हरा दिया। रविवार को खेले गए इस मैच में भारत ने 103 रनों के लक्ष्य को महज 8.5 ओवर में हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने तीन मैचों की टी20 सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। शेफाली वर्मा ने 25 गेंदों में 55 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जबकि कप्तान स्मृति मंधाना 47 रन बनाकर नाबाद लौटीं। दोनों ने पहले विकेट के लिए 96 रनों की साझेदारी कर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। इस सीरीज जीत के साथ स्मृति मंधाना ने पूर्णकालिक कप्तान के रूप में अपने कार्यकाल की शुरुआत भी जीत के साथ की।


    शेफाली वर्मा ने 25 गेंदों में जड़ी फिफ्टी

    103 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया।शेफाली ने महज 25 गेंदों में 55 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी के दौरान चौकों और छक्कों की बरसात की। ऑफ स्पिनर बिलव्ड बिजा की गेंद पर छक्का लगाकर शेफाली ने अपना अर्धशतक पूरा किया। यह उनके टी20 इंटरनेशनल करियर का 22वां अर्धशतक रहा। भारतीय ओपनर ने मिशेल मावुंगा के एक ओवर में लगातार तीन गेंदों पर 4, 4 और 6 रन बटोरकर अपने इरादे साफ कर दिए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के सामने जिम्बाब्वे की गेंदबाज बेबस नजर आईं।


    स्मृति मंधाना ने भी दिखाया दम

    भारतीय कप्तान स्मृति मंधाना ने भी शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने नाबाद 47 रन बनाए और शेफाली के साथ मिलकर टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया। मंधाना ने तेज गेंदबाज न्याशा ग्वांजुरा के खिलाफ लगातार चार चौके जड़कर अपनी लय का प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने ओलिंडर चारे की गेंद पर शानदार इनसाइड-आउट छक्का लगाकर भारत को जीत दिला दी। भारत ने 103 रनों का लक्ष्य सिर्फ 8.5 ओवर में एक विकेट खोकर हासिल कर लिया। शेफाली और मंधाना की साझेदारी ने मुकाबले को एकतरफा बना दिया।

    भारतीय गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे को 102 रन पर रोका
    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रही। निर्धारित 20 ओवर में टीम आठ विकेट खोकर सिर्फ 102 रन बना सकी। तेज गेंदबाज नंदनी शर्मा ने जिम्बाब्वे को शुरुआती झटका दिया। उन्होंने सलामी बल्लेबाज केलिस न्द्लोवु को 11 गेंदों में बिना खाता खोले बोल्ड कर दिया। पावरप्ले में जिम्बाब्वे की टीम एक विकेट के नुकसान पर सिर्फ 20 रन बना सकी। इस दौरान टीम को केवल एक चौका मिला। पावरप्ले समाप्त होने के दो गेंद बाद बिलव्ड बिजा भी पवेलियन लौट गईं, जिससे जिम्बाब्वे की मुश्किलें और बढ़ गईं।


    चिपो तिरिपानो और कप्तान जोसेफिन नकोमो ने संभाली पारी

    शुरुआती झटकों के बाद चिपो तिरिपानो और कप्तान जोसेफिन नकोमो ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 45 रनों की साझेदारी हुई, जो जिम्बाब्वे की पारी की सबसे बड़ी साझेदारी रही। तिरिपानो ने 32 गेंदों में 34 रन बनाए, जबकि नकोमो 27 रन बनाकर नाबाद रहीं। तिरिपानो को 20 और 22 रन के निजी स्कोर पर जीवनदान भी मिला। उन्होंने भारतीय स्पिनर श्री चरणी के खिलाफ लगातार दो रिवर्स स्वीप चौके भी लगाए। इस साझेदारी के दौरान जिम्बाब्वे की टीम ने सात चौके लगाए। सातवें से 15वें ओवर के बीच टीम ने 56 रन जुटाकर स्कोर को आगे बढ़ाया।


    निकी प्रसाद ने एक ओवर में दिए दो झटके

    भारत की ओर से ऑफ स्पिनर निकी प्रसाद ने शानदार गेंदबाजी करते हुए दो विकेट हासिल किए। उन्होंने तिरिपानो को विकेट के पीछे ऋचा घोष के हाथों कैच कराया और फिर न्याशा ग्वांजुरा को एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। निकी प्रसाद लगातार दो विकेट लेकर हैट्रिक के करीब पहुंच गई थीं, लेकिन वह यह उपलब्धि हासिल नहीं कर सकीं। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे को बड़ा स्कोर बनाने से रोक दिया। भारतीय गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन के बाद बल्लेबाजों ने लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है।