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  • सचिन, युवराज और गंभीर को टीम से बाहर करने पर सालों बाद चर्चा, संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए

    सचिन, युवराज और गंभीर को टीम से बाहर करने पर सालों बाद चर्चा, संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में टीम चयन को लेकर हमेशा चर्चा होती रही है। किसी खिलाड़ी को टीम में जगह देना हो या किसी अनुभवी क्रिकेटर को बाहर बैठाने का फैसला लेना हो, चयनकर्ताओं के लिए यह जिम्मेदारी आसान नहीं होती। सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के करियर में भी ऐसे दौर आए, जब उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। इन फैसलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर और चयनकर्ता संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभवों के आधार पर इस तरह के फैसलों की परिस्थितियों पर चर्चा की है।

    संदीप पाटिल भारतीय क्रिकेट के उन पूर्व खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने मैदान पर खेलने के साथ-साथ चयनकर्ता की भूमिका भी निभाई। चयन समिति में रहते हुए उन्हें कई बार ऐसे फैसले लेने पड़े, जिनका सीधा असर स्थापित खिलाड़ियों के करियर पर पड़ता था। भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए प्रदर्शन, फिटनेस, टीम की जरूरत और उपलब्ध विकल्पों जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है। किसी खिलाड़ी का बड़ा नाम या पुराना रिकॉर्ड हमेशा उसकी जगह सुनिश्चित नहीं करता। चयनकर्ताओं के सामने यह चुनौती रहती है कि वे व्यक्तिगत लोकप्रियता के बजाय टीम के हित और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

    सचिन तेंदुलकर का करियर भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित अध्यायों में से एक रहा है। उन्होंने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व किया और कई रिकॉर्ड बनाए। इसके बावजूद उनके करियर में भी ऐसे मौके आए, जब उनके चयन या टीम में भूमिका को लेकर चर्चा हुई। युवराज सिंह ने भारत की कई महत्वपूर्ण जीतों में योगदान दिया और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। वहीं, गौतम गंभीर ने भी भारतीय टीम के लिए अहम पारियां खेलीं। इन खिलाड़ियों के अनुभव बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे समय तक प्रदर्शन करने के बावजूद टीम में जगह बनाए रखना लगातार चुनौतीपूर्ण रहता है।

    टीम चयन के फैसलों में केवल किसी खिलाड़ी का पिछला प्रदर्शन ही निर्णायक नहीं होता। चयनकर्ता यह भी देखते हैं कि टीम को किस तरह के संयोजन की जरूरत है, खिलाड़ी का हालिया प्रदर्शन कैसा है और आगामी मुकाबलों की परिस्थितियों के लिए कौन उपयुक्त होगा। कई बार किसी खिलाड़ी को बाहर रखने का फैसला अस्थायी होता है, जबकि कुछ परिस्थितियों में टीम में बदलाव लंबे समय के लिए भी हो सकता है। ऐसे फैसलों के कारण प्रशंसकों और पूर्व खिलाड़ियों के बीच बहस होना स्वाभाविक है, क्योंकि लोकप्रिय खिलाड़ियों से दर्शकों की भावनाएं जुड़ी रहती हैं।

    संदीप पाटिल के अनुभवों के संदर्भ में चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी का एक और पहलू सामने आता है। खिलाड़ियों के साथ निजी संबंध, दोस्ती या व्यक्तिगत समीकरण चयन प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करने चाहिए। चयनकर्ता का दायित्व टीम के लिए उपयुक्त खिलाड़ियों का चुनाव करना है, भले ही किसी फैसले से लोकप्रिय खिलाड़ी या उनके प्रशंसक निराश हों। हालांकि, सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर को टीम से बाहर किए जाने के अलग-अलग कारण रहे होंगे। इन तीनों के मामलों को एक जैसा मानना उचित नहीं है, क्योंकि उनके करियर, प्रदर्शन और टीम की जरूरतें अलग-अलग समय पर अलग थीं।

    भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर होने वाली चर्चाएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि टीम बनाना केवल नामों का चुनाव नहीं, बल्कि परिस्थितियों और रणनीति के बीच संतुलन बनाने की प्रक्रिया है। संदीप पाटिल जैसे पूर्व खिलाड़ियों के अनुभव इस प्रक्रिया को समझने का अवसर देते हैं। किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर रखने का फैसला उसके पूरे करियर का मूल्यांकन नहीं होता, बल्कि अक्सर किसी खास समय की जरूरतों और उपलब्ध विकल्पों से जुड़ा होता है। इसलिए पुराने चयन फैसलों को समझने के लिए उस समय की परिस्थितियों और संबंधित खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

  • भुवनेश्वर कुमार पर फिर भरोसा, क्या टीम इंडिया के पास तेज गेंदबाजों की कमी, बुमराह के बाद कौन बनेगा अगला सहारा

    भुवनेश्वर कुमार पर फिर भरोसा, क्या टीम इंडिया के पास तेज गेंदबाजों की कमी, बुमराह के बाद कौन बनेगा अगला सहारा


    नई दिल्ली । करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। 36 साल की उम्र में टीम इंडिया के पेस अटैक में दोबारा जगह बनाने वाले भुवनेश्वर के लिए यह वापसी उनके अनुभव और शानदार प्रदर्शन का इनाम मानी जा रही है। लेकिन इसके साथ ही भारतीय तेज गेंदबाजी की गहराई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुने गए भुवनेश्वर की वापसी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जसप्रीत बुमराह के बाद भारतीय तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी उठाने के लिए भरोसेमंद विकल्प कौन है।
    भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था। अब उसी टीम के विरुद्ध उनकी वापसी की कहानी दिलचस्प संयोग लेकर आई है। भुवनेश्वर ने अपने करियर में 21 टेस्ट 87 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 121 वनडे मुकाबले खेले हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रही है। इसके अलावा वह सटीक यॉर्कर और नियंत्रित लाइन लेंथ से बल्लेबाजों को परेशान करने में माहिर हैं। पिछले दो आईपीएल सीजन में उनके प्रदर्शन ने भी चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। करीब आठ की इकॉनमी से 45 विकेट लेने वाले भुवनेश्वर ने साबित किया है कि अनुभव और कौशल के दम पर वह अब भी प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं।
    भुवनेश्वर की वापसी को समझने के लिए भारतीय क्रिकेट के पुराने उदाहरणों पर भी नजर डालना जरूरी है। पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने भी 2011 विश्व कप के बाद करीब पांच साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद 2016 में टीम इंडिया में वापसी की थी। उस समय उनकी उम्र भी लगभग 36 साल थी। नेहरा ने इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित की और 2017 में संन्यास लिया। ऐसे में भुवनेश्वर की वापसी को उम्र के लिहाज से असामान्य नहीं कहा जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या यह वापसी केवल उनके मौजूदा प्रदर्शन का परिणाम है या भारतीय टीम को अनुभवी तेज गेंदबाजों की कमी भी महसूस हो रही है।
    जसप्रीत बुमराह भारतीय गेंदबाजी की सबसे मजबूत कड़ी हैं लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में टीम को संतुलित रखने की चुनौती बनी रहती है। मोहम्मद शमी लंबे समय तक इस भूमिका को मजबूती से निभाते रहे हैं लेकिन उन्हें लगातार मौके मिलने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मोहम्मद सिराज ने भी कई मुकाबलों में अपनी क्षमता दिखाई है लेकिन सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी भूमिका और निरंतरता को लेकर चर्चा जारी है। दूसरी ओर अर्शदीप सिंह प्रसिद्ध कृष्णा हर्षित राणा और मयंक यादव जैसे गेंदबाजों ने अलग-अलग मौकों पर उम्मीद जगाई है। इसके बावजूद किसी एक तेज गेंदबाज को तीनों प्रारूपों में लंबे समय तक भरोसेमंद विकल्प मानना अभी आसान नहीं है।
    भारतीय क्रिकेट के पास बड़ा घरेलू ढांचा आईपीएल जैसा प्रतिस्पर्धी मंच और खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। बल्लेबाजी में हर दौर के बाद नई पीढ़ी सामने आती रही है। सचिन तेंदुलकर सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी आए। अब युवा बल्लेबाज भी अपनी जगह बनाने लगे हैं। तेज गेंदबाजी में हालांकि ऐसी निरंतरता उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं देती। चोटें कार्यभार प्रबंधन और प्रदर्शन में उतार चढ़ाव तेज गेंदबाजों के करियर को प्रभावित करते रहे हैं।
    भुवनेश्वर कुमार की वापसी इसलिए केवल एक खिलाड़ी की वापसी नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल भी है। बुमराह जैसा गेंदबाज हर पीढ़ी में नहीं मिलता और किसी दूसरे खिलाड़ी से हूबहू उनकी जगह लेने की उम्मीद करना भी सही नहीं होगा। लेकिन टीम के पास ऐसे विकल्प जरूर होने चाहिए जो उनकी अनुपस्थिति में गेंदबाजी को मजबूती दे सकें। न्यूजीलैंड सीरीज भुवनेश्वर के लिए खुद को दोबारा साबित करने का मौका होगी। साथ ही यह चयनकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण परीक्षा होगी कि वे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा तेज गेंदबाजों को किस तरह तैयार करते हैं। आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही है कि भुवी के बाद कौन और भविष्य में बुमराह की गैरमौजूदगी में टीम इंडिया की अगुवाई कौन करेगा।
  • कोहली, रोहित और धोनी की राह पर श्रेयस अय्यर, रांची में वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत के साथ रिकॉर्ड सुधारने उतरेगा भारत

    कोहली, रोहित और धोनी की राह पर श्रेयस अय्यर, रांची में वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत के साथ रिकॉर्ड सुधारने उतरेगा भारत

    नई दिल्ली: भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का दूसरा मुकाबला 9 अक्टूबर को रांची के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में खेला जाएगा। भारतीय टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर कर रहे हैं। सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने आठ विकेट से जीत दर्ज की थी। अब टीम की कोशिश दूसरे मैच में भी जीत हासिल कर सीरीज में 2-0 की बढ़त बनाने की होगी। यह मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम सात बजे शुरू होगा।

    रांची का मैदान टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए अब तक अच्छा साबित हुआ है। यहां खेले गए चार मुकाबलों में भारत ने तीन में जीत दर्ज की है, जबकि एक मैच में उसे हार का सामना करना पड़ा। इस बार वेस्टइंडीज की टीम पहली बार रांची में टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेलेगी। ऐसे में मेजबान टीम अपने घरेलू मैदान के रिकॉर्ड को कायम रखने के इरादे से उतरेगी, जबकि कैरेबियाई टीम के सामने इस मैदान पर अपनी पहली चुनौती का सामना करने का मौका होगा।

    रांची में भारतीय टीम को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एकमात्र हार न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली थी। 27 जनवरी 2023 को खेले गए उस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को 21 रन से हराया था। उस समय भारतीय टीम की कप्तानी हार्दिक पंड्या के हाथों में थी। इसके अलावा भारत ने इस मैदान पर श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले खेले हैं और तीन मैचों में जीत हासिल की है।

    रांची में भारत की जीतों का सिलसिला अलग-अलग कप्तानों के नेतृत्व में देखने को मिला है। यहां पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 12 फरवरी 2016 को खेला गया था। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को 69 रन से हराया था। इसके बाद 7 अक्टूबर 2017 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम ने विराट कोहली के नेतृत्व में नौ विकेट से जीत दर्ज की। वहीं, 19 नवंबर 2021 को रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने न्यूजीलैंड को सात विकेट से मात दी थी। अब श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम के सामने इसी जीत के रिकॉर्ड को आगे बढ़ाने का अवसर है।

    भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के कुल रिकॉर्ड में भी भारतीय टीम आगे है। दोनों देशों के बीच अब तक 32 मैच खेले गए हैं। इनमें भारत ने 21 मुकाबले जीते हैं, जबकि वेस्टइंडीज को 10 मैचों में सफलता मिली है। एक मुकाबला बेनतीजा रहा है। इस आंकड़े के आधार पर भारत का पलड़ा भारी दिखाई देता है, लेकिन दूसरे टी20 में टीम को जीत दर्ज करने के लिए मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करना होगा।

    दूसरे मुकाबले के लिए भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नमन धीर, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव और मयंक यादव शामिल हैं। संजू सैमसन और ईशान किशन दोनों विकेटकीपर के विकल्प हैं। भारतीय टीम के घोषित स्क्वॉड में वैभव सूर्यवंशी, रवि बिश्नोई, प्रिंस यादव और नीतीश कुमार रेड्डी समेत 15 खिलाड़ी शामिल हैं।

    वेस्टइंडीज की संभावित प्लेइंग इलेवन में शाई होप, कामिल पूरन, शिमरॉन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोमारियो शेफर्ड, मैथ्यू फोर्ड, रोस्टन चेज, अकील हुसैन, शमर स्प्रिंगर और शमर जोसेफ के नाम हैं। टीम के घोषित स्क्वॉड में आमिर जंगू, गुडाकेश मोती, कीमो पॉल और क्वेंटिन सैम्पसन भी शामिल हैं। रांची में होने वाला यह मुकाबला भारत के लिए सीरीज में बढ़त मजबूत करने और अपने घरेलू रिकॉर्ड को कायम रखने का मौका होगा।

  • वैभव सूर्यवंशी के इंतजार की कहानी, VVS ने बड़े मैच में उतारा अब GG क्यों रोक रहे हैं बेबी बॉस का बल्ला

    वैभव सूर्यवंशी के इंतजार की कहानी, VVS ने बड़े मैच में उतारा अब GG क्यों रोक रहे हैं बेबी बॉस का बल्ला


    नई दिल्ली। वैभव सूर्यवंशी का नाम इन दिनों भारतीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले युवा खिलाड़ियों में शामिल है लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 में टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलने के बाद उनके फैंस का इंतजार और बढ़ गया है। लखनऊ में खेले गए मुकाबले में टीम मैनेजमेंट ने संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की ओपनिंग जोड़ी पर भरोसा बनाए रखा। भारत ने मुकाबला आसानी से जीत लिया और ऐसे में इस संयोजन को बदलने की कोई तत्काल जरूरत भी नजर नहीं आई। इसके बावजूद अब रांची में होने वाले दूसरे टी20 से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गौतम गंभीर वैभव सूर्यवंशी को मौका देंगे या फिर उन्हें एक और मैच बेंच पर बैठकर देखना पड़ेगा।

    वैभव की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि महज 15 साल की उम्र में उन्होंने जिस तरह क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बनाई है उसने उन्हें सामान्य युवा खिलाड़ी से कहीं आगे पहुंचा दिया है। आईपीएल में उनके आक्रामक अंदाज ने क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींचा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी की झलक दिखाई है। जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में अर्धशतक लगाने के बाद यह साफ हो गया कि वैभव सिर्फ उम्र की वजह से चर्चा में नहीं हैं बल्कि उनके बल्ले में बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता भी मौजूद है।

    एशियन गेम्स के दौरान वीवीएस लक्ष्मण की कोचिंग में वैभव को पाकिस्तान के खिलाफ गोल्ड मेडल मुकाबले जैसे बड़े मैच में प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया था। उस समय उम्र को उनकी कमजोरी नहीं माना गया और टीम ने उनकी क्षमता पर भरोसा जताया। अब भारतीय टीम की जिम्मेदारी गौतम गंभीर के पास है और उनका नजरिया मौजूदा संयोजन को मजबूत बनाए रखने पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। लखनऊ में संजू और अभिषेक से बड़ी पारी नहीं आई लेकिन भारत ने मुकाबला आसानी से अपने नाम कर लिया। ऐसे में टीम मैनेजमेंट के पास विजयी संयोजन को बरकरार रखने का मजबूत तर्क मौजूद है।

    फिर भी वैभव को लेकर सवाल इसलिए बना हुआ है क्योंकि किसी खिलाड़ी की वास्तविक क्षमता का अंदाजा उसे लगातार मौके देने के बाद ही लगाया जा सकता है। अगर टीम में जगह बनाने के लिए हर बार मौजूदा खिलाड़ियों का अच्छा प्रदर्शन ही कसौटी बनेगा तो फिर नए खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर कब मिलेगा। वैभव को टीम में शामिल करने का मतलब सिर्फ किसी खिलाड़ी को बाहर करना नहीं होगा बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य के एक बेहद रोमांचक विकल्प को आजमाना भी होगा।

    अब नजरें रांची पर टिक गई हैं। यहां वैभव को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है। बिहार से आने वाले इस युवा बल्लेबाज को देखने के लिए दर्शकों की दिलचस्पी साफ दिखाई दे रही है। रांची महेंद्र सिंह धोनी का शहर है और यहां क्रिकेट को लेकर जुनून किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में दर्शक चाहते हैं कि उन्हें इस नए युवा सितारे का बल्ला भी मैदान पर देखने को मिले।

    हालांकि टीम मैनेजमेंट को सिर्फ दर्शकों की मांग के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। क्रिकेट में संतुलन और टीम की जरूरत सबसे महत्वपूर्ण होती है। लेकिन वैभव जैसे एक्स फैक्टर को ज्यादा समय तक बाहर रखना भी सवाल खड़े करता है। फिलहाल वैभव तैयार हैं फैंस तैयार हैं और रांची का माहौल भी तैयार है। अब फैसला गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट को करना है कि प्लेइंग इलेवन की पर्ची में इस बार बेबी बॉस का नाम आएगा या उनका इंतजार एक मैच और लंबा होगा।

  • संजू सैमसन की लगातार नाकामी से फैन्स नाराज, 4 टी20 में 29 रन के बाद वैभव सूर्यवंशी की एंट्री को लेकर बढ़ा दबाव

    संजू सैमसन की लगातार नाकामी से फैन्स नाराज, 4 टी20 में 29 रन के बाद वैभव सूर्यवंशी की एंट्री को लेकर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में शानदार जीत दर्ज की। भारत ने यह मैच 8 विकेट से अपने नाम किया। मुकाबले में कप्तान श्रेयस अय्यर ने तूफानी शतक जड़कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। हालांकि इस शानदार जीत के बीच विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन का खराब फॉर्म एक बार फिर चर्चा में आ गया। संजू इस मुकाबले में भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे और महज 11 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।

    संजू सैमसन के लिए हालिया मुकाबले बेहद निराशाजनक रहे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ 9 गेंदों पर 11 रन बनाने से पहले वह पाकिस्तान के खिलाफ सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हुए थे। उससे पहले श्रीलंका के खिलाफ उनके बल्ले से 7 रन निकले थे जबकि जापान के खिलाफ वह 9 रन ही बना सके थे। इस तरह उनकी पिछली चार टी20 पारियों को देखें तो संजू के बल्ले से कुल 29 रन ही निकले हैं। लगातार चार मैचों में बड़ी पारी नहीं खेल पाने के कारण अब उनके प्रदर्शन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि इन खराब पारियों से पहले संजू ने अफगानिस्तान के खिलाफ 17 सितंबर को शानदार अर्धशतक लगाया था। उन्होंने 35 गेंदों पर 50 रन की पारी खेली थी। उस पारी के बाद उम्मीद थी कि संजू लगातार अपने बल्ले का दम दिखाएंगे लेकिन इसके बाद उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। लगातार छोटी पारियों ने टीम में उनकी जगह को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

    संजू की लगातार नाकामी के बाद सोशल मीडिया पर फैन्स का एक वर्ग अब युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौका देने की मांग कर रहा है। 15 साल के वैभव भारतीय क्रिकेट में अपनी कम उम्र और आक्रामक बल्लेबाजी के कारण पहले ही काफी चर्चा बटोर चुके हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली और वह बाहर बैठकर मुकाबला देखते नजर आए। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई फैन्स ने टीम मैनेजमेंट के फैसले पर सवाल खड़े किए।

    कुछ यूजर्स का कहना है कि संजू को काफी मौके मिल चुके हैं और अगर उनका बल्ला लगातार खामोश है तो युवा खिलाड़ी को आजमाने पर विचार किया जाना चाहिए। एक यूजर ने कहा कि अब संजू से आगे बढ़ने का समय आ गया है। वहीं कुछ फैन्स ने मुख्य कोच गौतम गंभीर और चयनकर्ताओं पर भी सवाल उठाए और पूछा कि आखिर वैभव को प्लेइंग इलेवन में मौका कब मिलेगा।

    हालांकि सिर्फ चार पारियों के आधार पर किसी खिलाड़ी के भविष्य पर फैसला करना आसान नहीं होता। संजू के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव है और वह कई मौकों पर अपनी बल्लेबाजी से टीम को मैच जिता चुके हैं। ऐसे में टीम मैनेजमेंट उनके अनुभव पर भरोसा जारी रखता है या युवा वैभव को मौका देकर भविष्य की तैयारी शुरू करता है यह आने वाले मुकाबलों में साफ होगा।

    फिलहाल भारत ने सीरीज में जीत के साथ शुरुआत कर दी है और अब नजर अगले मुकाबले पर है। एक तरफ संजू सैमसन के बल्ले से बड़ी पारी की उम्मीद होगी तो दूसरी तरफ फैन्स की निगाहें 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी। अगर टीम मैनेजमेंट प्लेइंग इलेवन में बदलाव करता है तो वैभव को मौका मिलना इस सीरीज की सबसे बड़ी चर्चाओं में से एक हो सकता है।

  • NZ Tour: टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान… 4 साल बाद भुवनेश्वर कुमार की वापसी

    NZ Tour: टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान… 4 साल बाद भुवनेश्वर कुमार की वापसी


    नई दिल्ली।
    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Cricket Control Board of India- BCCI) की पुरुष चयन समिति ने आगामी न्यूजीलैंड दौरे (New Zealand Tour) के लिए टीम इंडिया (Team India) और इंडिया ‘ए’ के स्क्वाड का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

    इस दौरे पर भारतीय टीम मेजबान न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की रोमांचक टी20 सीरीज खेलेगी, जबकि इंडिया ‘ए’ की टीम न्यूजीलैंड ‘ए’ के खिलाफ तीन मल्टी-डे (चार दिवसीय) मैच खेलेगी. वनडे और टेस्ट सीरीज के लिए टीमों की घोषणा फिलहाल बाद में की जाएगी।

    इस स्क्वाड की सबसे बड़ी खबर अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी है, जिन्हें एक बार फिर नीली जर्सी में गेंदबाजी का जिम्मा सौंपा गया है. श्रेयस अय्यर को टीम की कमान सौंपी गई है, जबकि उपकप्तानी की जिम्मेदारी तिलक वर्मा को दी गई है।


    क्यों हुई भुवनेश्वर कुमार की वापसी?

    भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी टी20 मुकाबला नवंबर 2022 में एडिलेड ओवल में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेला था. इसके बाद से वह टीम से बाहर चल रहे थे, लेकिन पिछले दो आईपीएल (IPL) सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के लिए उनके शानदार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    पिछले दो संस्करणों में शानदार गेंदबाजी करते हुए उन्होंने कुल 45 विकेट झटके और टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई. नई गेंद से उनकी स्विंग और अनुभव को देखते हुए उन्हें एक बार फिर नेशनल टीम में मौका मिला है. हालांकि, इस चयन के चलते भुवनेश्वर कुमार को हांगकांग सिक्सेस से हटना होगा, जहां उन्हें हाल ही में कप्तान बनाया गया था।

    टी20 टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), अक्षर पटेल, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, नमन धीर, प्रिंस यादव, मयंक यादव, अर्शदीप सिंह, भुवनेश्वर कुमार, वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव.

    इंडिया ‘ए’ टीम: ध्रुव जुरेल (कप्तान/विकेटकीपर), यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, रविचंद्रन स्मरण, ऋषभ पंत* (विकेटकीपर – फिटनेस के अधीन), वाशिंगटन सुंदर, आकिब नबी, आकाश दीप, अंशुल कंबोज, मानव सुथार, मुकेश चौधरी, साई सुदर्शन, यश राठौड़ और मुकेश कुमार।

  • शून्य पर आउट हुए विराट कोहली ने फील्डिंग में जीता दिल, नन्ही फैन की आवाज पर दिया ऐसा प्यारा रिएक्शन

    शून्य पर आउट हुए विराट कोहली ने फील्डिंग में जीता दिल, नन्ही फैन की आवाज पर दिया ऐसा प्यारा रिएक्शन


    नई दिल्ली। विराट कोहली भले ही वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में बल्ले से खास कमाल नहीं कर सके लेकिन मैदान पर उनका एक छोटा सा रिएक्शन फैंस का दिल जीत गया। मुकाबले के दौरान विराट कोहली शून्य पर आउट होकर पवेलियन लौट गए थे। हालांकि जब वह दूसरी पारी में भारतीय टीम के लिए फील्डिंग करने मैदान पर उतरे तो स्टेडियम में मौजूद फैंस का उत्साह एक बार फिर देखने लायक था। इसी दौरान विराट और एक नन्ही फैन के बीच हुआ प्यारा सा पल कैमरे में कैद हो गया जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    विराट कोहली को देखने और उनकी बल्लेबाजी का लुत्फ उठाने के लिए बड़ी संख्या में फैंस स्टेडियम पहुंचे थे। विराट की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मैदान पर वह जहां भी दिखाई देते हैं वहां दर्शकों का जोश अचानक बढ़ जाता है। वेस्टइंडीज के खिलाफ इस सीरीज के पहले मुकाबले में विराट ने शानदार शतक लगाकर अपनी फॉर्म का संकेत दिया था। ऐसे में तीसरे वनडे में भी फैंस को उनसे बड़ी पारी की उम्मीद थी लेकिन वह खाता खोले बिना ही आउट हो गए।

    बल्लेबाजी में निराशा के बावजूद फील्डिंग के दौरान विराट कोहली को देखकर फैंस का उत्साह कम नहीं हुआ। इसी बीच स्टैंड में बैठी एक छोटी बच्ची अपने पसंदीदा क्रिकेटर का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश करने लगी। बच्ची ने मासूम अंदाज में विराट को आवाज लगाई और कहा कि विराट मेरी तरफ तो देख लो। उसकी यह गुहार कुछ ही देर में विराट तक पहुंच गई।

    मैदान पर फील्डिंग कर रहे विराट कोहली की नजर जब उस नन्ही फैन पर पड़ी तो उन्होंने उसकी ओर देखकर हाथ हिला दिया। विराट का यह छोटा सा रिएक्शन बच्ची के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं था। अपने पसंदीदा क्रिकेटर को अपनी ओर देखते और हाथ हिलाते देखकर बच्ची खुशी से झूम उठी। उसके चेहरे की खुशी देखकर आसपास मौजूद लोगों के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई।

    विराट कोहली और उनकी इस नन्ही फैन का यह पल अब सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है। फैंस विराट के इस सादगी भरे अंदाज की तारीफ कर रहे हैं। क्रिकेट के मैदान पर आक्रामक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले विराट का अपने फैंस के प्रति यह प्यारा व्यवहार लोगों को काफी पसंद आया है। खासकर उस बच्ची के लिए यह पल शायद हमेशा यादगार रहने वाला है।

    विराट कोहली के लिए वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरा वनडे बल्लेबाजी के लिहाज से भले ही अच्छा नहीं रहा लेकिन फील्डिंग के दौरान उनका यह अंदाज चर्चा में आ गया। विराट की लोकप्रियता सिर्फ उनके प्रदर्शन तक सीमित नहीं है बल्कि फैंस के साथ उनका जुड़ाव भी उन्हें खास बनाता है। स्टेडियम में मौजूद उस बच्ची की एक छोटी सी गुहार और विराट का हाथ हिलाकर जवाब देना इसका खूबसूरत उदाहरण है।

    अब विराट कोहली अगली बार न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में नीली जर्सी में नजर आ सकते हैं। वनडे वर्ल्ड कप 2027 को देखते हुए विराट के प्रदर्शन पर सभी की नजरें रहेंगी। फैंस उम्मीद कर रहे होंगे कि मैदान पर अगली बार विराट बल्ले से भी ऐसा ही जवाब दें जैसा उन्होंने अपनी नन्ही फैन को दिया और एक बड़ी पारी खेलकर फिर सुर्खियां बटोरें।

  • सूर्यकुमार यादव को रणजी टीम में भी नहीं मिली जगह, उपलब्धता बताने के बाद चयन से बाहर होने पर उठे बड़े सवाल

    सूर्यकुमार यादव को रणजी टीम में भी नहीं मिली जगह, उपलब्धता बताने के बाद चयन से बाहर होने पर उठे बड़े सवाल


    नई दिल्ली। सूर्यकुमार यादव के क्रिकेट करियर को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टीम इंडिया से बाहर होने के बाद अब उन्हें मुंबई की रणजी ट्रॉफी टीम में भी जगह नहीं मिली है। खास बात यह है कि मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की चयन बैठक से पहले सूर्यकुमार यादव से पूछा गया था कि क्या वह रणजी ट्रॉफी का मुकाबला खेलना चाहते हैं। बताया गया कि सूर्या ने इसके लिए अपनी सहमति भी जताई थी। इसके बावजूद जब मुंबई की टीम का ऐलान हुआ तो उनका नाम स्क्वॉड में नहीं था। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में नई चर्चा छेड़ दी है।

    मुंबई को रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन का अपना पहला मुकाबला 11 अक्टूबर से वानखेड़े स्टेडियम में चंडीगढ़ के खिलाफ खेलना है। इस मुकाबले के लिए घोषित टीम की कप्तानी अनुभवी सिद्धेश लाड को सौंपी गई है जबकि युवा बल्लेबाज आयुष म्हात्रे को उपकप्तान बनाया गया है। टीम में यशस्वी जायसवाल मुशीर खान सरफराज खान सुवेद पारकर शम्स मुलानी तनुष कोटियन और तुषार देशपांडे जैसे खिलाड़ी शामिल हैं लेकिन सूर्यकुमार यादव का नाम नदारद है।

    मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के चयन प्रमुख राजेश पवार ने सूर्यकुमार यादव के चयन को लेकर वजह भी बताई है। उनके मुताबिक सूर्या ने पिछले करीब 18 महीनों से कोई रेड बॉल मुकाबला नहीं खेला है। चयनकर्ताओं का मानना है कि उन्हें पहले कुछ मैचों में खेलकर लंबे फॉर्मेट की लय हासिल करनी चाहिए। इसके बाद उन्हें टीम में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब चयनकर्ताओं ने खुद सूर्यकुमार से उनकी उपलब्धता को लेकर संपर्क किया था तो फिर उन्हें शुरुआती मुकाबले के लिए टीम में क्यों नहीं चुना गया।

    सूर्यकुमार यादव ने टी20 क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है। वह टीम इंडिया की कप्तानी भी कर चुके हैं और टी20 विश्व कप में भारत की सफलता के दौरान उनकी भूमिका काफी अहम रही थी। ऐसे में रणजी टीम से बाहर होना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं माना जा रहा है। खासकर तब जब वह खुद रेड बॉल क्रिकेट में वापसी की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।

    मुंबई की टीम के सामने इस सीजन की शुरुआत में एक और चुनौती भी है। पिछले सीजन में टीम की कप्तानी करने वाले शार्दुल ठाकुर शुरुआती मुकाबलों में उपलब्ध नहीं रहेंगे। ट्रेनिंग के दौरान उनकी दाहिने हाथ की बीच वाली उंगली में मामूली फ्रैक्चर हुआ है। माना जा रहा है कि वह कम से कम शुरुआती दो मैचों से बाहर रह सकते हैं।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सूर्यकुमार यादव रणजी क्रिकेट में वापसी के लिए किस तरह की तैयारी करते हैं और मुंबई के चयनकर्ता उन्हें अगले मुकाबलों में मौका देते हैं या नहीं। फिलहाल उनकी गैरमौजूदगी ने भारतीय क्रिकेट में उनके भविष्य को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

  • एशियन गेम्स के बाद टीम इंडिया का बड़ा मिशन, 26 दिनों में 10 टी20 मैच, वेस्टइंडीज से न्यूजीलैंड तक होगा जबरदस्त एक्शन

    एशियन गेम्स के बाद टीम इंडिया का बड़ा मिशन, 26 दिनों में 10 टी20 मैच, वेस्टइंडीज से न्यूजीलैंड तक होगा जबरदस्त एक्शन


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेट टीम अब एक और बड़े और व्यस्त क्रिकेट मिशन के लिए तैयार है। टीम इंडिया को आने वाले 26 दिनों के दौरान लगातार 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने हैं। इस लंबे और व्यस्त कार्यक्रम की शुरुआत वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू टी20 सीरीज से होगी। इसके बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर जाएगी जहां पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। लगातार मुकाबलों और लंबे सफर के कारण खिलाड़ियों के सामने फिटनेस बनाए रखना बड़ी चुनौती रहने वाली है।

    भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 6 अक्टूबर को लखनऊ में खेला जाएगा। यह मैच भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में होगा। इसके बाद 9 अक्टूबर को दूसरा मुकाबला रांची के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में खेला जाएगा। तीसरा टी20 मैच 11 अक्टूबर को इंदौर के होलकर स्टेडियम में होगा। इसके बाद 14 अक्टूबर को हैदराबाद में चौथा मुकाबला खेला जाएगा जबकि सीरीज का पांचवां और आखिरी मैच 17 अक्टूबर को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में होगा।

    वेस्टइंडीज सीरीज खत्म होने के तुरंत बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर रवाना होगी। यहां भी दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला मुकाबला 22 अक्टूबर को क्राइस्टचर्च के हैगली ओवल में होगा। दूसरा मैच भी इसी मैदान पर 24 अक्टूबर को खेला जाएगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को तीसरा टी20 वेलिंगटन के स्काई स्टेडियम में होगा। चौथा मुकाबला 30 अक्टूबर को ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेला जाएगा। दौरे का पांचवां और आखिरी टी20 मुकाबला 1 नवंबर को हैमिल्टन के सेडन पार्क में होगा।

    इस तरह भारतीय टीम को बेहद कम समय में 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से गुजरना होगा। घरेलू सीरीज में लगातार पांच मैच खेलने के बाद खिलाड़ियों को न्यूजीलैंड की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना होगा। अलग मौसम और पिच के साथ लगातार यात्रा भी खिलाड़ियों की परीक्षा लेगी। ऐसे में टीम मैनेजमेंट के सामने खिलाड़ियों के वर्कलोड को संतुलित रखना अहम होगा।

    लगातार क्रिकेट के इस दौर में भारतीय टीम रोटेशन पॉलिसी का सहारा ले सकती है। इससे प्रमुख खिलाड़ियों को जरूरी आराम दिया जा सकता है और युवा खिलाड़ियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। खासकर लंबे टूर्नामेंट और लगातार सीरीज को देखते हुए फिटनेस और रिकवरी पर टीम मैनेजमेंट का विशेष ध्यान रह सकता है।

    भारतीय टीम का लक्ष्य दोनों सीरीज में बेहतर प्रदर्शन करते हुए जीत की लय को बनाए रखना होगा। हालांकि वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड दोनों टीमों को हल्के में लेना भारत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। आने वाले 26 दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं और इस दौरान अनुभव के साथ फिटनेस तथा टीम संयोजन की भी बड़ी परीक्षा होगी।

  • सीरीज जीत के बाद भी बढ़ी टेंशन, आखिरी ODI में 6-7 कैच छूटने पर गिल का फूटा गुस्सा, वर्ल्ड कप से पहले दी कड़ी चेतावनी

    सीरीज जीत के बाद भी बढ़ी टेंशन, आखिरी ODI में 6-7 कैच छूटने पर गिल का फूटा गुस्सा, वर्ल्ड कप से पहले दी कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली। भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज भले ही टीम इंडिया ने 2-1 से अपने नाम कर ली हो लेकिन मुल्लांपुर में खेले गए आखिरी मुकाबले ने भारतीय टीम की तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को हुए इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 351 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया था और वेस्टइंडीज के सामने 352 रन का लक्ष्य रखा था। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज इस स्कोर का बचाव नहीं कर सके। वेस्टइंडीज ने पांच विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया और इस जीत में कप्तान शाई होप की शानदार पारी सबसे बड़ी वजह रही।

    शाई होप ने भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना करते हुए नाबाद 162 रन बनाए। ग्रोइन इंजरी के बावजूद उन्होंने जिस तरह बल्लेबाजी की उसने भारतीय टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं। वेस्टइंडीज ने 352 रन का लक्ष्य 48.2 ओवर में हासिल कर लिया। यह वनडे क्रिकेट में वेस्टइंडीज का सबसे बड़ा सफल रन चेज भी रहा। होप के लिए यह लगातार दूसरा शतक था। इससे पहले गुवाहाटी वनडे में भी उन्होंने शतकीय पारी खेली थी।

    मुकाबला खत्म होने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टीम की कमियों पर खुलकर बात की। गिल की सबसे बड़ी नाराजगी भारतीय टीम की फील्डिंग को लेकर थी। मुकाबले के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने करीब 6-7 कैच छोड़े। इतने मौके गंवाने का सीधा फायदा वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को मिला और शाई होप ने भी मिले मौकों का पूरा फायदा उठाते हुए मैच भारत से दूर कर दिया। गिल ने माना कि वर्ल्ड कप से पहले इस तरह की फील्डिंग चिंता बढ़ाने वाली है और टीम को इस क्षेत्र में तत्काल सुधार करना होगा।

    कप्तान की दूसरी बड़ी चिंता डेथ ओवर्स की गेंदबाजी रही। गिल के मुताबिक आखिरी ओवरों में भारतीय टीम को अपनी रणनीति को लेकर स्पष्टता की जरूरत है। टीम को यह तय करना होगा कि किस स्थिति में बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के लिए आक्रामक गेंदबाजी करनी है और कब रन रोकने के लिए रक्षात्मक फील्ड लगानी है। गिल ने यह भी संकेत दिया कि कई बार टीम डेथ ओवर्स की रणनीति जरूरत से पहले शुरू कर देती है जबकि उस समय मिडिल ओवर्स की तरह गेंदबाजी करने की जरूरत होती है।

    इस हार के बावजूद सीरीज जीतना भारत के लिए राहत की बात है लेकिन वर्ल्ड कप से पहले फील्डिंग और डेथ बॉलिंग जैसी कमजोरियां टीम मैनेजमेंट के लिए गंभीर विषय बन गई हैं। बड़े टूर्नामेंट में छोटी सी गलती भी मुकाबले का रुख बदल सकती है। ऐसे में भारतीय टीम को अगले मुकाबलों में इन कमियों को दूर करने पर खास ध्यान देना होगा।

    दूसरी ओर वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने अपनी शानदार पारी के पीछे पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की सलाह का भी जिक्र किया। होप ने बताया कि धोनी ने उन्हें समझाया था कि बल्लेबाज के पास अक्सर उसकी सोच से ज्यादा समय होता है। इसी सोच के साथ होप अब नतीजे के बजाय अपनी प्रक्रिया पर ध्यान देते हैं। मुल्लांपुर में उनकी पारी ने इसी सोच का शानदार उदाहरण पेश किया और वेस्टइंडीज को ऐतिहासिक जीत दिला दी।