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  • IND vs SL: श्रीलंका पहुंचते ही टीम इंडिया की बढ़ी चिंता, प्रैक्टिस मैच पर बारिश का खतरा

    IND vs SL: श्रीलंका पहुंचते ही टीम इंडिया की बढ़ी चिंता, प्रैक्टिस मैच पर बारिश का खतरा


    नई दिल्ली। श्रीलंका दौरे पर पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम को पहले ही बड़ा झटका लग सकता है। 7 अगस्त से कोलंबो में शुरू होने वाले तीन दिवसीय अभ्यास मैच पर बारिश का खतरा मंडरा रहा है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार मैच के तीनों दिन तेज बारिश की संभावना है, जिससे टीम इंडिया की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।

    तीनों दिन बारिश की संभावना
    मौसम एजेंसी AccuWeather के अनुसार 7 से 9 अगस्त के बीच कोलंबो में लगातार बारिश होने की संभावना है। पहले दिन बारिश की आशंका 91 फीसदी तक जताई गई है, जबकि लगभग पूरे दिन बादल छाए रहने का अनुमान है। कैंडी से कोलंबो के बीच भी लगातार बारिश दर्ज की गई है, जिससे मैदान की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

    टेस्ट सीरीज से पहले अहम था अभ्यास मैच
    यह तीन दिवसीय मुकाबला भारतीय टीम के लिए श्रीलंका की परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने का महत्वपूर्ण अवसर था। 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाले पहले टेस्ट से पहले टीम इसी मैच के जरिए संयोजन और रणनीति पर काम करना चाहती थी। यदि मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ता है, तो युवा टीम को बिना पर्याप्त मैच अभ्यास के टेस्ट सीरीज में उतरना पड़ सकता है।

    पहले से चोटों की चुनौती
    बारिश की चिंता के बीच टीम पहले ही कुछ खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर परेशान है। स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट के कारण पूरी सीरीज से बाहर हो चुके हैं। उनकी जगह आकिब नबी को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। वहीं युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन की उपलब्धता भी फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर है।

    भारतीय टेस्ट टीम
    शुभमन गिल (कप्तान)
    केएल राहुल (उप-कप्तान)
    यशस्वी जायसवाल
    ऋषभ पंत (विकेटकीपर)
    ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर)
    साई सुदर्शन*
    रवींद्र जडेजा
    कुलदीप यादव
    मानव सुतार
    मोहम्मद सिराज
    प्रसिद्ध कृष्णा
    गुरनूर बराड़
    देवदत्त पडिक्कल
    सारांश जैन
    आकिब नबी
    साई सुदर्शन की अंतिम उपलब्धता फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।

    वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से यह दौरा भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे में अभ्यास मैच पर बारिश का खतरा टीम की तैयारियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • बुमराह की गैरमौजूदगी में तेज गेंदबाजी की नई परीक्षा, श्रीलंका दौरे पर किस पर दांव लगाएगा भारत?

    बुमराह की गैरमौजूदगी में तेज गेंदबाजी की नई परीक्षा, श्रीलंका दौरे पर किस पर दांव लगाएगा भारत?


    नई दिल्ली । भारत के श्रीलंका दौरे से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह चोट के कारण दो मैचों की टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। बाएं घुटने में लगातार बनी परेशानी और अंतिम फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर पाने के कारण चयनकर्ताओं ने उन्हें आराम देने का फैसला किया है। उनकी जगह जम्मू कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है।

    बुमराह की गैरमौजूदगी ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण का पूरा संतुलन बदल दिया है। पिछले कुछ वर्षों में नई गेंद से बुमराह और मोहम्मद सिराज की जोड़ी विपक्षी बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रही है। अब टीम प्रबंधन को श्रीलंका की परिस्थितियों के अनुसार नई रणनीति तैयार करनी होगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सिराज के साथ नई गेंद कौन संभालेगा।

    सबसे मजबूत दावेदार के रूप में प्रसिध कृष्णा का नाम सामने आ रहा है। उनकी अतिरिक्त उछाल और लंबी कद-काठी श्रीलंका की पिचों पर उपयोगी साबित हो सकती है। यदि टीम तीन तेज गेंदबाजों के साथ उतरती है तो आकिब नबी को भी डेब्यू का मौका मिल सकता है। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन और इंडिया ए के लिए प्रभावी गेंदबाजी ने उन्हें राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाया है।

    हालांकि आकिब नबी का अंतरराष्ट्रीय अनुभव नहीं है लेकिन चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा जताकर साफ संकेत दिया है कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए युवा खिलाड़ियों को अवसर दिया जाएगा। जम्मू कश्मीर से आने वाले आकिब नबी घरेलू क्रिकेट में पिछले दो सत्रों में 100 से अधिक विकेट लेकर चर्चा में आए थे और इंडिया ए के लिए भी प्रभावशाली प्रदर्शन कर चुके हैं।

    श्रीलंका की पिचें आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं लेकिन नई गेंद से शुरुआती विकेट निकालना हमेशा अहम रहता है। ऐसे में मोहम्मद सिराज पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी। उन्हें न सिर्फ आक्रमण की अगुवाई करनी होगी बल्कि युवा गेंदबाजों का मार्गदर्शन भी करना पड़ेगा। भारतीय टीम चाहे दो तेज गेंदबाजों के साथ खेले या तीन के साथ लेकिन सिराज की भूमिका निर्णायक रहने वाली है।

    टीम प्रबंधन के सामने एक और चुनौती गेंदबाजों के कार्यभार को संतुलित रखने की होगी। आगामी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को देखते हुए बुमराह पर किसी तरह का जोखिम नहीं लिया गया है। यही वजह है कि मेडिकल टीम और चयन समिति ने उन्हें पूरी तरह फिट होने तक आराम देने का फैसला किया है ताकि वह भविष्य की महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं में पूरी क्षमता के साथ वापसी कर सकें।

    अब सभी की नजर भारत की अंतिम प्लेइंग इलेवन पर रहेगी। क्या टीम अनुभव पर भरोसा करेगी या फिर युवा आकिब नबी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलेगा यह मैच से पहले साफ होगा। इतना तय है कि बुमराह की अनुपस्थिति ने भारतीय टीम को प्लान बी पर काम करने के लिए मजबूर कर दिया है और श्रीलंका दौरा युवा तेज गेंदबाजों के लिए खुद को साबित करने का बड़ा मंच बन सकता है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स: 10 मिनट में भारत को दो गोल्ड, प्रीति-जैस्मिन ने जीती बॉक्सिंग फाइनल, अब तक मिले 7 गोल्ड

    कॉमनवेल्थ गेम्स: 10 मिनट में भारत को दो गोल्ड, प्रीति-जैस्मिन ने जीती बॉक्सिंग फाइनल, अब तक मिले 7 गोल्ड

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महज 10 मिनट के अंतराल में दो स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिए। पहले प्रीति पवार ने महिला 54 किग्रा वर्ग का फाइनल जीतकर गोल्ड दिलाया, इसके तुरंत बाद जैस्मिन लांबोरिया ने महिला 57 किग्रा वर्ग के खिताबी मुकाबले में जीत दर्ज कर भारत की झोली में सातवां स्वर्ण पदक डाल दिया।

    जैस्मिन ने फाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकाएला वॉल्स को हराया, जबकि प्रीति पवार ने कनाडा की सवाना डोलमागो को शिकस्त देकर स्वर्ण पदक हासिल किया। इन दोनों जीतों के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 27 पहुंच गई, जिसमें 7 गोल्ड शामिल हैं। भारत फिलहाल पदक तालिका में छठे स्थान पर है।

    अब 8 और भारतीय मुक्केबाज गोल्ड की दौड़ में
    भारतीय बॉक्सिंग टीम का अभियान अभी जारी है। दिनभर में आठ भारतीय मुक्केबाज अपने-अपने फाइनल मुकाबलों में स्वर्ण पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। इनमें जदुमणि सिंह (55 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), अंकुश पंघाल (80 किग्रा) और नरेंद्र बरवाल (90+ किग्रा) शामिल हैं।

    ट्रिपल जंप में भारत को दो और पदक
    एथलेटिक्स में भी भारत का प्रदर्शन दमदार रहा। प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता, जबकि सेल्वा प्रभु ने 16.52 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण जाम्बिया के जॉर्डन स्कॉट ने 16.72 मीटर की छलांग के साथ जीता।

    प्रीति और जैस्मिन का शानदार रिकॉर्ड
    हरियाणा की प्रीति पवार इससे पहले 2022 एशियन चैंपियनशिप और 2023 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वह पेरिस ओलिंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने 2026 एशियन चैंपियनशिप और 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीते हैं।

    वहीं जैस्मिन लांबोरिया, जो वर्तमान में 57 किग्रा वर्ग की विश्व नंबर-1 मुक्केबाज हैं, 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप और वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल की भी स्वर्ण विजेता हैं। उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता था और पेरिस ओलिंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

    जूडो में उन्नति क्वार्टर फाइनल में
    जूडो की महिला 63 किग्रा स्पर्धा में उन्नति शर्मा ने राउंड ऑफ-16 में लामुलेला मागागुला को हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया।

    आज 44 गोल्ड मेडल इवेंट्स
    शनिवार को कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 44 स्वर्ण पदक मुकाबले खेले जा रहे हैं। भारत के खिलाड़ी बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, पैरा एथलेटिक्स, जूडो, ट्रैक साइक्लिंग और लॉन बॉल्स में भी पदक जीतने की चुनौती पेश कर रहे हैं।

    अन्य प्रमुख अपडेट
    – पैरा एथलेटिक्स की पुरुष 1500 मीटर T54 स्पर्धा में रमेश शनमुगम सातवें स्थान पर रहे।
    – महिला 10,000 मीटर रेस वॉक में भारत की रवीना गायकवाड़ को तीन रेड कार्ड मिलने के कारण अयोग्य (डिस्क्वालिफाई) घोषित कर दिया गया।
    – लॉन बॉल्स में भारतीय जोड़ी नवनीत सिंह और दिनेश कुमार का मुकाबला इंग्लैंड से होगा, जबकि नयनमोनी सैकिया महिला सिंगल्स में दक्षिण अफ्रीका की खिलाड़ी के खिलाफ उतरेंगी।

  • 'कैप नंबर 278 अब यहीं तक': अजिंक्य रहाणे ने लिया संन्यास, भारतीय क्रिकेट का भरोसेमंद बल्लेबाज बोला अलविदा

    'कैप नंबर 278 अब यहीं तक': अजिंक्य रहाणे ने लिया संन्यास, भारतीय क्रिकेट का भरोसेमंद बल्लेबाज बोला अलविदा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत, संयमित और भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाने वाले अजिंक्य रहाणे ने आखिरकार क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। 2020-21 की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टीम इंडिया को अविस्मरणीय जीत दिलाने वाले रहाणे ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए अपने दो दशक लंबे क्रिकेट सफर को विराम दिया। उनके इस फैसले के साथ भारतीय क्रिकेट का एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसे साहस, धैर्य और टीम भावना के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

    संन्यास की घोषणा करते हुए रहाणे ने लिखा कि कैप नंबर 278 अब यहीं तक है। उन्होंने अपने प्रशंसकों, साथियों और भारतीय क्रिकेट से जुड़े हर व्यक्ति का आभार जताते हुए कहा कि हर शुरुआत का एक अंत होता है और उन्हें लगता है कि अब आगे बढ़ने का यही सही समय है। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी में हमेशा सही टाइमिंग पर भरोसा किया और अब संन्यास लेने के लिए भी यही सही समय है।

    मुंबई के डोंबिवली से निकलकर भारतीय टीम तक का सफर तय करने वाले रहाणे ने कहा कि उनका बचपन सिर्फ एक सपना लेकर बीता कि एक दिन भारत की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने हमेशा देश और टीम को खुद से ऊपर रखा और पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेला। उनका मानना रहा कि अगर नीयत साफ हो तो खेल हमेशा आपका साथ देता है।

    रहाणे के करियर का सबसे स्वर्णिम अध्याय 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा माना जाता है। एडिलेड टेस्ट में भारत के 36 रन पर ऑलआउट होने और विराट कोहली के स्वदेश लौटने के बाद टीम पूरी तरह दबाव में थी। ऐसे मुश्किल समय में रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर शानदार शतक लगाकर टीम में नया आत्मविश्वास भरा। उनकी कप्तानी में युवा और चोटों से जूझ रही भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में 2-1 से हराकर इतिहास रच दिया। यही वजह है कि उन्हें आज भी मेलबर्न का हीरो कहा जाता है।

    रहाणे लंबे समय तक विदेशी परिस्थितियों में भारत के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज रहे। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 5077 रन, 12 शतक और 26 अर्धशतक दर्ज हैं। वनडे में उन्होंने 2962 रन बनाए, जिसमें तीन शतक और 24 अर्धशतक शामिल रहे। टी-20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने 375 रन बनाए। तीनों प्रारूपों को मिलाकर रहाणे ने भारत के लिए 8414 अंतरराष्ट्रीय रन बनाए और 15 शतक जड़े।

    वह 2015 विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा रहे। इसके अलावा 2023 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र में भी उन्होंने भारत के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी टेस्ट खेलने के बाद उन्हें टीम में दोबारा मौका नहीं मिला। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर वापसी की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रीय टीम में वापसी का सपना पूरा नहीं हो सका।

    अपने विदाई संदेश में रहाणे ने कहा कि क्रिकेट ने उन्हें जीत भी दिखाई और हार भी, लेकिन एक जगह वह कभी नहीं हारे और वह था लोगों का प्यार। उन्होंने कहा कि अब वह अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को अपने अनुभव और खेल से सीखे गए मूल्यों को देना चाहते हैं ताकि भारतीय क्रिकेट आगे भी नई ऊंचाइयों को छूता रहे।

    अजिंक्य रहाणे भले ही मैदान पर अब बल्लेबाजी करते नजर नहीं आएंगे, लेकिन उनकी शांत कप्तानी, कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने का जज्बा और मेलबर्न में खेली गई ऐतिहासिक पारी भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगी।

  • बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर

    बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर


    नई दिल्ली। जिम्बाब्वे दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम ने सिर्फ सीरीज जीतकर ही नहीं बल्कि अपने बदले हुए अंदाज से भी सभी का ध्यान आकर्षित किया है। इस बदलाव के केंद्र में अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण रहे जिन्होंने बिना किसी बयानबाजी और विवाद के केवल तीन मैचों में टीम के भीतर नया आत्मविश्वास पैदा कर दिया। खिलाड़ियों पर भरोसा जताने की उनकी शैली और शांत नेतृत्व ने यह साबित किया कि सफल कोचिंग केवल रणनीति तक सीमित नहीं होती बल्कि ड्रेसिंग रूम का माहौल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के दौरान भारतीय टीम लगातार हार और आलोचनाओं का सामना कर रही थी। टीम चयन से लेकर रणनीति तक कई फैसलों पर सवाल उठे थे। ऐसे समय में जब गौतम गंभीर उपलब्ध नहीं थे तब वीवीएस लक्ष्मण ने अंतरिम कोच की जिम्मेदारी संभाली और खिलाड़ियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित किया। उन्होंने किसी भी खिलाड़ी पर सार्वजनिक दबाव बनाने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाने पर जोर दिया।

    इसका असर मैदान पर भी साफ दिखाई दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी समेत कई खिलाड़ियों ने खुलकर लक्ष्मण के मार्गदर्शन की सराहना की। टीम के भीतर आत्मविश्वास और सहजता का माहौल बना जिससे खिलाड़ी बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपना स्वाभाविक खेल दिखा सके। लंबे समय बाद भारतीय ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा स्पष्ट नजर आई।

    वीवीएस लक्ष्मण की चयन नीति भी चर्चा का विषय बनी। उन्होंने टीम में बदलाव जरूर किए लेकिन केवल प्रयोग करने के लिए नहीं बल्कि खिलाड़ियों की क्षमता और टीम की जरूरत को ध्यान में रखकर फैसले लिए। दूसरे टी20 मुकाबले में यश ठाकुर को मौका दिया गया जबकि सीरीज अपने नाम करने के बाद तीसरे मैच में सूर्यांश शेडगे को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। इससे खिलाड़ियों को यह संदेश मिला कि प्रदर्शन और तैयारी के आधार पर सभी को अवसर मिलेगा।

    युवा खिलाड़ियों के साथ लक्ष्मण का जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लंबे समय तक काम करने के कारण वह उभरते क्रिकेटरों की मानसिकता और उनकी जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं। शुभमन गिल यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे कई खिलाड़ियों ने उनके मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा है। यही अनुभव अंतरिम कोच के रूप में भी उनके काम आया।

    हालांकि तीन मैचों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि टीम की सभी समस्याएं समाप्त हो गई हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़े जिससे फील्डिंग अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। बल्लेबाजी और रणनीति में सुधार जरूर दिखाई दिया लेकिन फील्डिंग में निरंतरता लाने की जरूरत बनी हुई है।

    वीवीएस लक्ष्मण इससे पहले भी कई बार अंतरिम मुख्य कोच की भूमिका निभा चुके हैं और हर बार उनके काम की सराहना हुई है। इसके बावजूद उन्होंने स्थायी मुख्य कोच बनने के बजाय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। अब उनके हालिया प्रदर्शन के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भारतीय क्रिकेट को भविष्य में अलग अलग प्रारूपों के लिए अलग मुख्य कोच की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    फिलहाल इतना तय है कि जिम्बाब्वे दौरे ने यह साबित कर दिया है कि टीम की सफलता केवल रणनीति या तकनीक पर निर्भर नहीं करती बल्कि खिलाड़ियों के भीतर विश्वास जगाने और उन्हें खुलकर खेलने का माहौल देने वाला नेतृत्व भी उतना ही अहम होता है। वीवीएस लक्ष्मण ने अपने शांत स्वभाव और संतुलित फैसलों से यही संदेश पूरी क्रिकेट दुनिया को दिया है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने जीते 12 पदक, दो सिल्वर के बाद भी मेडल टैली में नौवें नंबर पर बरकरार

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने जीते 12 पदक, दो सिल्वर के बाद भी मेडल टैली में नौवें नंबर पर बरकरार


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। छठे दिन दो और रजत पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है और वह मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 34 स्वर्ण सहित 78 पदकों के साथ शीर्ष पर काबिज है।
    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। छठे दिन दो और रजत पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है और वह मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 34 स्वर्ण सहित 78 पदकों के साथ शीर्ष पर काबिज है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ऑस्ट्रेलिया का जलवा बरकरार, भारत 12 पदकों के साथ नौवें स्थान पर; मुक्केबाजी में तीन और मेडल पक्के

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत की झोली में दो और रजत पदक आए, जिससे देश के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई। हालांकि इसके बावजूद भारत मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया ने अपने दमदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए शीर्ष स्थान पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है।

    मेडल तालिका में ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे है। उसने अब तक कुल 78 पदक जीते हैं, जिनमें 34 स्वर्ण, 17 रजत और 27 कांस्य पदक शामिल हैं। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का दबदबा लगभग हर खेल में देखने को मिल रहा है और फिलहाल उसके आसपास कोई अन्य देश नजर नहीं आ रहा।

    दूसरे स्थान पर कनाडा है, जिसने अब तक 35 पदक अपने नाम किए हैं। कनाडा के खाते में 13 स्वर्ण, 10 रजत और 12 कांस्य पदक हैं। तीसरे स्थान पर इंग्लैंड काबिज है, जिसके खिलाड़ियों ने 43 पदक जीते हैं। इनमें 10 स्वर्ण, 18 रजत और 15 कांस्य पदक शामिल हैं। मेजबान स्कॉटलैंड 7 स्वर्ण सहित 15 पदकों के साथ चौथे स्थान पर है, जबकि नाइजीरिया 6 स्वर्ण और कुल 11 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर बना हुआ है।

    भारत ने अब तक 2 स्वर्ण, 7 रजत और 3 कांस्य पदक जीतकर कुल 12 पदक हासिल किए हैं। छठे दिन महिला वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में मिले दो रजत पदकों ने भारत की पदक संख्या में इजाफा किया, हालांकि मेडल तालिका में उसकी रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ और वह नौवें स्थान पर कायम है।

    महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में हरजिंदर कौर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाकर यह उपलब्धि हासिल की।

    एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालते हुए रजत पदक जीता। इसके साथ ही वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए और भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

    मुक्केबाजी में भी भारत का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। प्रीति, प्रिया और जादुमणि सिंह ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले सभी मुक्केबाजों का पदक सुनिश्चित हो जाता है। ऐसे में भारत के खाते में कम से कम तीन और कांस्य पदक पक्के हो चुके हैं, जिन्हें बेहतर रंग में बदलने का मौका अब सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में मिलेगा।

    भारतीय दल से आने वाले दिनों में वेटलिफ्टिंग, मुक्केबाजी, कुश्ती और एथलेटिक्स जैसी स्पर्धाओं में और पदकों की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों का मौजूदा प्रदर्शन जारी रहता है तो भारत मेडल तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं

    ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह और महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की सराहना की है। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भारत के खेल इतिहास में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुलवीर सिंह को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर दौड़ में भारत के लिए पहला पदक जीतना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि गुलवीर की यह सफलता देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी और आने वाले वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

    गुलवीर सिंह ने ग्लासगो में बारिश के बीच बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार दौड़ लगाई। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी भारतीय धावक पूरे मुकाबले में शीर्ष धावकों के साथ बने रहे और अंतिम लैप में जबरदस्त गति दिखाते हुए 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। इससे पहले उनके नाम एशियन गेम्स का कांस्य पदक और एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दो स्वर्ण पदक भी दर्ज हैं।

    वहीं महिला वेटलिफ्टिंग में हरजिंदर कौर ने भी भारत का गौरव बढ़ाया। उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग में कुल 227 किलोग्राम भार उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। स्नैच राउंड में हरजिंदर ने 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा की शार्लेट सिमोन्यू ने 240 किलोग्राम कुल वजन उठाकर जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नया फीबे हेमन ने 218 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

    हरजिंदर की उपलब्धि पर अमित शाह ने कहा कि वेटलिफ्टिंग में भारत का पदक जीतने का सिलसिला लगातार जारी है। उन्होंने लिखा कि यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है तथा भविष्य में भी उनसे ऐसे ही उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग हमेशा से भारत के सबसे मजबूत खेलों में शामिल रही है और इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों ने इस परंपरा को कायम रखा है। दूसरी ओर एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक पदक यह संकेत देता है कि अब भारत लंबी दूरी की दौड़ जैसी चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

    गुलवीर सिंह और हरजिंदर कौर की इन उपलब्धियों ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के अभियान को नई मजबूती दी है। दोनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से देशवासियों में उत्साह है और भारतीय दल से आगामी मुकाबलों में भी पदकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

  • शुभमन गिल ने फिर हासिल किया वनडे का ताज, 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी टी20 रैंकिंग के टॉप-50 में पहुंचे

    शुभमन गिल ने फिर हासिल किया वनडे का ताज, 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी टी20 रैंकिंग के टॉप-50 में पहुंचे


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के लिए आईसीसी की ताजा रैंकिंग खुशखबरी लेकर आई है। कप्तान शुभमन गिल ने एक बार फिर वनडे क्रिकेट में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज का स्थान हासिल कर लिया है, जबकि 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में 230 पायदान की जबरदस्त छलांग लगाकर क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियां भारतीय क्रिकेट की मजबूत होती नई पीढ़ी की तस्वीर पेश करती हैं।

    आईसीसी द्वारा जारी नई वनडे रैंकिंग में शुभमन गिल ने न्यूजीलैंड के डेरिल मिचेल को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। डेरिल मिचेल जनवरी से नंबर-1 बल्लेबाज बने हुए थे, लेकिन हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय मुकाबले नहीं खेलने के कारण उनकी रेटिंग प्रभावित हुई। इसका फायदा शुभमन गिल को मिला और उन्होंने एक बार फिर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वनडे बल्लेबाज का ताज अपने नाम कर लिया।

    दूसरी ओर, जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में धमाकेदार प्रदर्शन करने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने इतिहास रच दिया। भारत ने यह सीरीज 3-0 से अपने नाम की और वैभव ने तीन मैचों में 50.33 की शानदार औसत से 151 रन बनाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज भी चुना गया। इसी प्रदर्शन का इनाम उन्हें आईसीसी रैंकिंग में मिला, जहां उन्होंने एक साथ 230 स्थान की छलांग लगाते हुए 536 रेटिंग अंकों के साथ अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 48वीं रैंक हासिल की। महज 15 वर्ष की उम्र में टी20 रैंकिंग के टॉप-50 में पहुंचना उनके उज्ज्वल भविष्य का संकेत माना जा रहा है।

    टी20 बल्लेबाजों की रैंकिंग में भारत के ईशान किशन अब भी दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज बने हुए हैं। उनके खाते में 910 रेटिंग अंक हैं। वहीं तिलक वर्मा दो स्थान की छलांग लगाकर छठे स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि श्रेयस अय्यर सात स्थान की बढ़त के साथ 24वें नंबर पर पहुंच गए हैं। भारतीय बल्लेबाजों का यह शानदार प्रदर्शन टीम की मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप को दर्शाता है।

    गेंदबाजी रैंकिंग में भी भारत को फायदा हुआ है। लेग स्पिनर रवि बिश्नोई ने जिम्बाब्वे सीरीज में तीन विकेट हासिल किए, जिसके बाद उन्होंने 31 स्थान की लंबी छलांग लगाकर टी20 गेंदबाजों की रैंकिंग में 41वां स्थान हासिल कर लिया।

    जिम्बाब्वे की टीम सीरीज हार गई, लेकिन उसके कुछ खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी आईसीसी ने सराहा। बल्लेबाज रयान बर्ल छह स्थान ऊपर चढ़कर संयुक्त रूप से 85वें स्थान पर पहुंच गए, जबकि तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजराबानी 10 स्थान की छलांग लगाकर 26वें नंबर पर पहुंच गए।

    वनडे गेंदबाजी रैंकिंग में भी बदलाव देखने को मिला है। नामीबिया के बाएं हाथ के स्पिनर बर्नार्ड शोल्ट्ज ने नेपाल और नीदरलैंड के खिलाफ आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग-2 ट्राई सीरीज में शानदार प्रदर्शन के दम पर टॉप-7 गेंदबाजों में जगह बना ली है।

    ताजा आईसीसी रैंकिंग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट केवल अनुभवी खिलाड़ियों पर ही नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं के दम पर भी लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। शुभमन गिल की नंबर-1 रैंकिंग और वैभव सूर्यवंशी की ऐतिहासिक छलांग भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

  • भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व

    भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है और देश के पदकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता तब मिली जब तमिलनाडु के प्रतिभाशाली वेटलिफ्टर राजा मुथुपंडी ने पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम कर लिया। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी शानदार सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

    राजा मुथुपंडी ने पूरे मुकाबले के दौरान दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल 286 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 126 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 160 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में बेहद संतुलित और प्रभावशाली रहा। हालांकि स्वर्ण पदक मलेशिया के अजनील बिदिन ने जीता जिन्होंने रिकॉर्ड 299 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान हासिल किया लेकिन राजा मुथुपंडी का रजत पदक भारत के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए राजा मुथुपंडी को बधाई दी और कहा कि पुरुषों के 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में रजत पदक जीतकर उन्होंने पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को उनकी उपलब्धि पर गर्व है और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजा मुथुपंडी की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग से भारत के लिए एक और पदक आना बेहद गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राजा की सफलता से हर भारतीय खुश है और उनका प्रदर्शन देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा। प्रधानमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी प्रतियोगिताओं में और बड़ी सफलताओं की कामना भी की।

    राजा मुथुपंडी का यह पदक भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इससे पहले भारतीय वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीत चुके थे जबकि स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। मीराबाई ने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया है।

    भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। शुरुआती दिनों में ही वेटलिफ्टिंग में मिले इन पदकों ने भारत की पदक तालिका को मजबूत किया है और अन्य खिलाड़ियों का भी मनोबल बढ़ाया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही लय बरकरार रही तो भारत इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर नतीजे हासिल कर सकता है।

    भारत के खिलाड़ियों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह साबित कर रहा है कि वर्षों की मेहनत आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगा है। राजा मुथुपंडी का रजत पदक भी इसी सफलता की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है जिसने देशवासियों को एक और गर्व का अवसर दिया है।

  • भारतीय जूनियर स्क्वैश टीमों का शानदार प्रदर्शन, पुरुष टीम ने बनाई प्री-क्वार्टर में जगह, महिला टीम ने जीत से किया आगाज

    भारतीय जूनियर स्क्वैश टीमों का शानदार प्रदर्शन, पुरुष टीम ने बनाई प्री-क्वार्टर में जगह, महिला टीम ने जीत से किया आगाज

    नई दिल्ली । कनाडा के ओंटारियो में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश टीम चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने अभियान की जोरदार शुरुआत की है। पुरुष और महिला दोनों टीमों ने अपने शुरुआती मुकाबलों में प्रभावशाली जीत दर्ज कर भारत की मजबूत दावेदारी पेश की। जहां भारतीय पुरुष टीम ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई वहीं महिला टीम ने भी पहले ही मुकाबले में शानदार जीत दर्ज कर आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की है।

    पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप चरण में अपना पहला मुकाबला नीदरलैंड के खिलाफ खेला। गुरवीर सिंह युशा नफीस और आर्यवीर दीवान की तिकड़ी ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए अपने सभी मुकाबले जीते और नीदरलैंड को 3-0 से करारी शिकस्त दी। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे मैच के दौरान आक्रामक खेल दिखाया और विरोधी खिलाड़ियों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।

    ग्रुप चरण के दूसरे मुकाबले में भारत का सामना ब्राजील से हुआ। इस मैच में गुरवीर सिंह को आराम देते हुए पूरव रांभिया को टीम में शामिल किया गया। पूरव युशा नफीस और आर्यवीर दीवान ने शानदार तालमेल के साथ खेलते हुए ब्राजील के खिलाड़ियों को भी 3-0 से हराया। लगातार दूसरी एकतरफा जीत के साथ भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह सुनिश्चित कर ली। टीम का आत्मविश्वास और प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि वह इस बार खिताब की मजबूत दावेदारों में शामिल है।

    महिला वर्ग में भी भारत ने विजयी शुरुआत की। पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय महिला टीम ने चीनी ताइपे के खिलाफ एकतरफा मुकाबला खेलते हुए 3-0 से जीत दर्ज की। सान्वी कलंकी अनिका दुबे और रुद्र सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को कोई मौका नहीं दिया। अब भारतीय महिला टीम का अगला मुकाबला मलेशिया से होगा जहां जीत दर्ज कर वह नॉकआउट चरण की ओर मजबूत कदम बढ़ाना चाहेगी।

    भारतीय महिला टीम की स्टार खिलाड़ी अनाहत सिंह को शुरुआती मुकाबले में आराम दिया गया। अनाहत ने एक दिन पहले ही विश्व जूनियर व्यक्तिगत स्क्वैश खिताब जीतकर इतिहास रचा था। टीम प्रबंधन ने उन्हें पर्याप्त आराम देने का फैसला किया ताकि आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों में वह पूरी ऊर्जा के साथ कोर्ट पर उतर सकें।

    टूर्नामेंट में अन्य प्रमुख टीमों ने भी शानदार शुरुआत की है। मेजबान कनाडा की महिला टीम ने नाइजीरिया को हराकर अपने अभियान का आगाज किया जबकि जापान की पुरुष टीम ने कनाडा को मात दी। वहीं गत चैंपियन मिस्र ने भी अपने खिताब बचाने की मजबूत दावेदारी पेश करते हुए महिला वर्ग में ब्राजील और पुरुष वर्ग में नीदरलैंड तथा न्यूजीलैंड को हराकर जीत दर्ज की।

    भारतीय टीमों के इस दमदार प्रदर्शन से देश के खेल प्रेमियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सभी की नजरें आगामी मुकाबलों पर हैं जहां भारत दोनों वर्गों में पदक और खिताब की चुनौती पेश करने के इरादे से उतरेगा।