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  • सोशल मीडिया की चमक से दूर रख रहे सीनियर खिलाड़ी ईशान किशन बोले वैभव का पूरा ध्यान सिर्फ क्रिकेट पर होना चाहिए

    सोशल मीडिया की चमक से दूर रख रहे सीनियर खिलाड़ी ईशान किशन बोले वैभव का पूरा ध्यान सिर्फ क्रिकेट पर होना चाहिए


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा जिस युवा खिलाड़ी की हो रही है वह हैं महज 15 वर्ष के वैभव सूर्यवंशी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार शुरुआत करने वाले इस युवा बल्लेबाज ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में केवल 18 गेंदों में अर्धशतक लगाकर सभी को प्रभावित किया। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने उन्हें रातोंरात सुर्खियों में ला दिया लेकिन भारतीय टीम के सीनियर खिलाड़ी इस बात का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं कि इतनी कम उम्र में मिली लोकप्रियता उनके खेल पर असर न डाले।

    भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने दूसरे टी20 मुकाबले के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैभव सूर्यवंशी को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि पूरी टीम की कोशिश है कि युवा बल्लेबाज का ध्यान सोशल मीडिया की चर्चाओं और बाहरी शोर से हटाकर केवल क्रिकेट पर केंद्रित रहे। ईशान के अनुसार कम उम्र में प्रसिद्धि मिलने के साथ कई तरह के आकर्षण और दबाव भी आते हैं लेकिन सही मार्गदर्शन मिलने पर खिलाड़ी लंबा और सफल करियर बना सकता है।

    ईशान किशन ने कहा कि वैभव काफी समझदार खिलाड़ी हैं और उन्हें अच्छी तरह पता है कि मैदान पर कैसे खेलना है और मैदान के बाहर किस तरह व्यवहार करना है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस माहौल और पृष्ठभूमि से वैभव आते हैं वहां कई बार दोस्त और सोशल मीडिया जैसी चीजें ध्यान भटका सकती हैं। ऐसे में टीम के सीनियर खिलाड़ी लगातार उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि केवल वह ही नहीं बल्कि अभिषेक शर्मा अक्षर पटेल और टीम के कई अन्य खिलाड़ी भी वैभव से लगातार बातचीत करते रहते हैं। सभी का उद्देश्य यही है कि युवा बल्लेबाज सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं या आलोचनाओं से प्रभावित न हो। अगर किसी मैच में रन नहीं बनते हैं तो भी उसका असर उनकी बॉडी लैंग्वेज या आत्मविश्वास पर नहीं पड़ना चाहिए। सीनियर खिलाड़ी चाहते हैं कि वैभव अपने खेल को लगातार बेहतर बनाने पर ध्यान दें क्योंकि यही उनके उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी होगी।

    दूसरी ओर ईशान किशन ने भी दूसरे टी20 मुकाबले में शानदार प्रदर्शन कर अपनी उपयोगिता साबित की। उन्होंने केवल 44 गेंदों में 81 रनों की विस्फोटक पारी खेली जिसमें नौ चौके और दो शानदार छक्के शामिल रहे। उनके साथ तिलक वर्मा ने भी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 29 गेंदों पर नाबाद 60 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों की बेहतरीन साझेदारी की बदौलत भारत ने निर्धारित 20 ओवर में पांच विकेट पर 219 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया।

    भारतीय गेंदबाजों ने भी बल्लेबाजों का पूरा साथ दिया और जिम्बाब्वे की टीम को लक्ष्य तक पहुंचने का मौका नहीं दिया। शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर भारत ने मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ युवा खिलाड़ियों और अनुभवी क्रिकेटरों के बीच बेहतर तालमेल भी देखने को मिला जो आने वाले समय में भारतीय टीम के लिए बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों को सीनियर क्रिकेटरों का मार्गदर्शन मिलना भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अगर वह इसी तरह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित रखते हैं तो आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट को एक और बड़ा सितारा मिल सकता है।

  • घरेलू क्रिकेट के स्टार से भारत के नए तेज गेंदबाज बने यश ठाकुर जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू कर शुरू किया अंतरराष्ट्रीय सफर

    घरेलू क्रिकेट के स्टार से भारत के नए तेज गेंदबाज बने यश ठाकुर जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू कर शुरू किया अंतरराष्ट्रीय सफर


    नई दिल्ली। भारत को जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में एक नया तेज गेंदबाज मिला जब विदर्भ के यश ठाकुर ने भारतीय टीम के लिए अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। यह पल केवल एक खिलाड़ी के करियर की नई शुरुआत नहीं था बल्कि वर्षों की मेहनत संघर्ष और लगातार बेहतरीन प्रदर्शन का परिणाम भी था। घरेलू क्रिकेट में अपनी तेज रफ्तार सटीक लाइन लेंथ और डेथ ओवरों में शानदार गेंदबाजी के दम पर पहचान बनाने वाले यश ठाकुर ने आखिरकार भारतीय टीम की नीली जर्सी पहनने का सपना पूरा कर लिया।

    28 दिसंबर 1998 को कोलकाता में जन्मे यश ठाकुर ने घरेलू क्रिकेट में विदर्भ का प्रतिनिधित्व किया और वहीं से अपने क्रिकेट करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। शुरुआत से ही उन्होंने अपनी गेंदबाजी में अनुशासन बनाए रखा और हर टूर्नामेंट में लगातार विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। रणजी ट्रॉफी विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंटों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें देश के उभरते तेज गेंदबाजों की सूची में शामिल कर दिया।

    यश ठाकुर की सबसे बड़ी ताकत उनकी सटीक लाइन लेंथ धीमी गेंदों का प्रभावी इस्तेमाल और डेथ ओवरों में बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की क्षमता है। यही वजह रही कि आईपीएल में भी उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। लखनऊ सुपर जायंट्स और पंजाब किंग्स जैसी टीमों की ओर से खेलते हुए उन्होंने कई अहम मौकों पर विकेट हासिल किए और अपनी उपयोगिता साबित की। आईपीएल में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने उनके लिए भारतीय टीम के दरवाजे खोल दिए।

    भारतीय चयनकर्ताओं ने पहले उन्हें इंडिया ए टीम में शामिल किया जहां श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने शानदार गेंदबाजी की। ट्राई सीरीज के तीन मुकाबलों में पांच विकेट लेने के साथ ही श्रीलंका ए के खिलाफ अनऑफिशियल टेस्ट मैचों में भी पांच विकेट हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह बड़े स्तर पर खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसी प्रदर्शन का इनाम उन्हें जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम में चयन के रूप में मिला और दूसरे टी20 मुकाबले में उन्हें डेब्यू कैप पहनने का अवसर प्राप्त हुआ।

    यश ठाकुर का सफर केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह संघर्ष और समर्पण की कहानी भी है। उनके पिता हमेशा चाहते थे कि उनका बेटा एक दिन भारत के लिए खेले और अब यश ने टीम इंडिया के लिए मैदान पर उतरकर उस सपने को साकार कर दिया। यह उपलब्धि उन सभी युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है जो घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का सपना देखते हैं।

    अगर उनके क्रिकेट रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यश ठाकुर ने टी20 क्रिकेट के 74 मुकाबलों में 110 विकेट लेकर अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया है। आईपीएल के 22 मैचों में उनके नाम 27 विकेट दर्ज हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 32 मैचों में 93 विकेट हासिल किए हैं जबकि लिस्ट ए क्रिकेट के 57 मुकाबलों में 90 विकेट लेकर अपनी निरंतरता साबित की है। यही आंकड़े बताते हैं कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य के लिए एक ऐसा तेज गेंदबाज मिला है जो आने वाले वर्षों में टीम की गेंदबाजी आक्रमण का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

  • टीम इंडिया की फिर बादशाहत, जिम्बाब्वे पर जीत के साथ ICC टी20 रैंकिंग में नंबर-1 पर कब्जा

    टीम इंडिया की फिर बादशाहत, जिम्बाब्वे पर जीत के साथ ICC टी20 रैंकिंग में नंबर-1 पर कब्जा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ सीरीज अपने नाम कर ली, बल्कि आईसीसी टी20 टीम रैंकिंग में भी एक बार फिर दुनिया की नंबर-1 टीम बनने का गौरव हासिल कर लिया। हरारे में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में भारत ने मेजबान जिम्बाब्वे को 90 रन से करारी शिकस्त देकर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने इंग्लैंड को पीछे छोड़ते हुए टी20 रैंकिंग का शीर्ष स्थान भी वापस हासिल कर लिया।

    आईसीसी की 25 जुलाई को जारी ताजा टीम रैंकिंग के अनुसार भारत और इंग्लैंड दोनों के 268 रेटिंग अंक हैं, लेकिन बेहतर दशमलव रेटिंग के आधार पर भारत पहले स्थान पर पहुंच गया है। इंग्लैंड अब दूसरे नंबर पर खिसक गया है। भारत ने करीब दो सप्ताह पहले इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज गंवाने के बाद नंबर-1 की कुर्सी खो दी थी, लेकिन जिम्बाब्वे दौरे पर लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उसने फिर से शीर्ष पर वापसी कर ली।

    टी20 रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया 260 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि न्यूजीलैंड 247 अंकों के साथ चौथे नंबर पर मौजूद है। दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर हैं। जिम्बाब्वे 202 अंकों के साथ 12वें स्थान पर बना हुआ है। भारत यदि सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला भी जीत लेता है तो उसकी नंबर-1 स्थिति और मजबूत हो जाएगी।

    दूसरे टी20 मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 44 गेंदों में 81 रन की तूफानी पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में नौ चौके और दो छक्के लगाए। दूसरी ओर तिलक वर्मा ने केवल 20 गेंदों में नाबाद 60 रन बनाकर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। उनकी विस्फोटक पारी में पांच चौके और तीन छक्के शामिल रहे। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी 25 रन का उपयोगी योगदान दिया, जबकि युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने 20 रन बनाए। निर्धारित 20 ओवर में भारत ने पांच विकेट के नुकसान पर 219 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।

    220 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकी। पूरी टीम 17.5 ओवर में 129 रन पर सिमट गई। ब्रायन बेनेट ने 32 रन और तादिवानाशे मारुमानी ने 24 रन बनाए, जबकि रेयान बर्ल ने 20 रन की पारी खेली। हालांकि कोई भी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सका।

    भारत की ओर से अभिषेक शर्मा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट झटके। यश ठाकुर और प्रिंस यादव ने दो-दो विकेट लेकर जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। ईशान किशन को उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

    टी20 प्रारूप में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही टीम इंडिया अब वनडे और टी20 दोनों प्रारूपों में दुनिया की नंबर-1 टीम बन चुकी है। वहीं टेस्ट रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर है और भारत चौथे स्थान पर मौजूद है। अब क्रिकेट प्रेमियों की नजर सीरीज के अंतिम मुकाबले पर होगी, जहां भारत क्लीन स्वीप के इरादे से मैदान में उतरेगा।

  • सीरीज जीतने उतरेगा भारत, वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी सबकी निगाहें; दूसरे टी20 में जिम्बाब्वे की वापसी की चुनौती

    सीरीज जीतने उतरेगा भारत, वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी सबकी निगाहें; दूसरे टी20 में जिम्बाब्वे की वापसी की चुनौती


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का दूसरा मुकाबला शनिवार को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। पहला मैच जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना चुकी भारतीय टीम इस मुकाबले में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। वहीं मेजबान जिम्बाब्वे की कोशिश वापसी करते हुए सीरीज को निर्णायक मुकाबले तक ले जाने की होगी।

    पहले टी20 में भारतीय टीम ने हर विभाग में शानदार प्रदर्शन किया था। तेज गेंदबाजों ने अनुशासित गेंदबाजी करते हुए जिम्बाब्वे को महज 125 रन पर समेट दिया। युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव ने अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को परेशान करते हुए 18 रन देकर दो विकेट झटके। प्रिंस यादव ने भी दो सफलताएं हासिल कीं, जबकि अशोक शर्मा ने भी प्रभावशाली गेंदबाजी कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    स्पिन विभाग में रवि बिश्नोई ने अपनी फिरकी का जादू बिखेरा। उनकी सटीक गेंदबाजी के सामने जिम्बाब्वे के बल्लेबाज खुलकर रन नहीं बना सके। भारतीय गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन ने मेजबान टीम को बड़ा स्कोर खड़ा करने का मौका नहीं दिया।

    बल्लेबाजी में सबसे ज्यादा चर्चा 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की रही। युवा बल्लेबाज ने केवल 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेलकर कई रिकॉर्ड अपने नाम किए और मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया। ईशान किशन ने भी 35 रन की उपयोगी पारी खेली, जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर 28 रन बनाकर नाबाद लौटे और टीम को जीत तक पहुंचाया।

    दूसरी ओर, जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी पहले मुकाबले में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। वेस्ली मधेवेरे ने 39 रन और रयान बर्ल ने 26 रन बनाकर कुछ संघर्ष जरूर किया, लेकिन बाकी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। गेंदबाजी में ब्लेसिंग मुजारबानी ने दो विकेट लेकर प्रभावित किया, लेकिन अन्य गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में नाकाम रहे।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिच पहले मुकाबले में तेज गेंदबाजों के लिए मददगार साबित हुई थी। हालांकि शुरुआती झटकों के बाद बल्लेबाजों ने भी यहां खुलकर रन बनाए। इस मैदान पर अब तक 84 टी20 मुकाबले खेले जा चुके हैं, जिनमें पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने 45 और लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम ने 37 मैच जीते हैं। पहली पारी का औसत स्कोर 155 रन, जबकि दूसरी पारी का औसत 133 रन रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार दूसरे टी20 के दौरान हरारे में मौसम साफ रहने की संभावना है और बारिश की आशंका बेहद कम है। ऐसे में पूरे 20 ओवर का मुकाबला देखने को मिल सकता है।

    भारतीय टीम की सबसे बड़ी उम्मीद एक बार फिर युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी, कप्तान श्रेयस अय्यर, ईशान किशन और तेज गेंदबाज मयंक यादव पर रहेगी। यदि टीम इंडिया पहले मैच जैसी लय बरकरार रखती है तो उसके पास सीरीज अपने नाम करने का शानदार मौका होगा। वहीं जिम्बाब्वे को मुकाबले में बने रहने के लिए बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

  • 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, पहला इंटरनेशनल अर्धशतक मां, परिवार और कोच को किया समर्पित

    15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, पहला इंटरनेशनल अर्धशतक मां, परिवार और कोच को किया समर्पित


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में ऐसी धमाकेदार पारी खेली, जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने 19 गेंदों में 50 रन ठोककर न सिर्फ टीम इंडिया को शानदार शुरुआत दिलाई, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए। मैच के बाद वैभव ने अपनी इस यादगार पारी को अपनी मां, परिवार, कोच और उन सभी लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने उनके कठिन समय में उनका साथ दिया।

    हरारे में खेले गए मुकाबले में वैभव ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने केवल 18 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और 19 गेंदों की पारी में 4 चौके तथा 4 छक्के लगाए। इस प्रदर्शन के साथ वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए।

    15 साल 118 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर वैभव ने इंग्लैंड के लुई ब्रूस का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 16 साल 56 दिन की उम्र में टी20 इंटरनेशनल फिफ्टी लगाई थी। इतना ही नहीं, वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक बनाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। उन्होंने नेपाल के कुशल मल्ला का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने 2020 में 15 साल 340 दिन की उम्र में यह कारनामा किया था।

    बीसीसीआई द्वारा साझा किए गए वीडियो में वैभव ने कहा कि करियर की शुरुआत में ऐसी पारियां आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देती हैं। उन्होंने बताया कि बल्लेबाजी के दौरान वह पूरी तरह अपनी लय में थे और अपनी स्वाभाविक खेल शैली पर भरोसा करते हुए शॉट्स लगाए। उन्होंने कहा कि यह अर्धशतक उनके परिवार, कोच और उन सभी लोगों के लिए है, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया।

    मैच के दौरान अर्धशतक पूरा करने के बाद वैभव ने दोनों हाथों से सिर के ऊपर ‘ए’ का निशान बनाया। इस खास सेलिब्रेशन के बारे में उन्होंने खुलासा किया कि यह उनकी मां आरती को समर्पित था। वहीं, ‘थंब्स अप’ का इशारा उन्होंने भारतीय बल्लेबाज रिंकू सिंह के साथ हुई बातचीत से प्रेरित होकर किया।

    हरारे का मैदान वैभव के लिए लगातार यादगार साबित हो रहा है। इसी वर्ष उन्होंने आईसीसी अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों पर 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी। इससे पहले सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ 68 रन बनाकर भारत को रिकॉर्ड छठा अंडर-19 विश्व कप खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

    हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ पिछली टी20 सीरीज में उन्हें तीन मौकों पर बड़ी पारी खेलने का अवसर नहीं मिला, लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले ही मैच में उन्होंने शानदार वापसी कर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया। वैभव ने कहा कि हरारे का माहौल उन्हें पसंद है, लेकिन वह इसे हल्के में नहीं लेते। उनका लक्ष्य हर मैच में टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करना और अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना है।

    15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रिकॉर्डतोड़ अर्धशतक लगाकर वैभव सूर्यवंशी ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य का एक और बड़ा सितारा मिल चुका है।

  • रोहित पर भरोसा बरकरार, शमी और संजू बाहर, अभिनव मुकुंद ने चुनी अपनी ड्रीम वर्ल्ड कप टीम

    रोहित पर भरोसा बरकरार, शमी और संजू बाहर, अभिनव मुकुंद ने चुनी अपनी ड्रीम वर्ल्ड कप टीम


    नई दिल्ली । वनडे विश्व कप 2027 को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं और इसी बीच भारत के पूर्व क्रिकेटर अभिनव मुकुंद ने अपनी पसंदीदा 15 सदस्यीय भारतीय टीम का चयन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मुकुंद की टीम में कई अनुभवी खिलाड़ियों को जगह मिली है जबकि कुछ बड़े नामों को बाहर रखकर उन्होंने चयन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सबसे ज्यादा चर्चा तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन के बाहर रहने की हो रही है। इसके अलावा युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा और रिंकू सिंह को भी मुकुंद ने अपनी टीम में शामिल नहीं किया।

    ईएसपीएन क्रिकइन्फो से बातचीत के दौरान अभिनव मुकुंद ने अपनी टीम का खुलासा किया। उन्होंने सलामी बल्लेबाज के रूप में शुभमन गिल और रोहित शर्मा को चुना। हाल के समय में रोहित शर्मा की फॉर्म को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं लेकिन मुकुंद का मानना है कि बड़े टूर्नामेंट में उनका अनुभव और नेतृत्व भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यही वजह रही कि उन्होंने रोहित पर भरोसा कायम रखा जबकि यशस्वी जायसवाल को अपनी टीम में जगह नहीं दी।

    मुकुंद ने तीसरे नंबर पर विराट कोहली को रखा है जबकि चौथे स्थान के लिए श्रेयस अय्यर को चुना। मध्यक्रम को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर केएल राहुल और ईशान किशन को शामिल किया है। संजू सैमसन को टीम से बाहर रखने का फैसला सबसे चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि हाल के वर्षों में उन्होंने सीमित ओवरों के क्रिकेट में कई प्रभावशाली पारियां खेली हैं।

    ऑलराउंडर विभाग में मुकुंद ने हार्दिक पांड्या अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर पर भरोसा जताया है। उनका मानना है कि ये तीनों खिलाड़ी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में संतुलन प्रदान कर सकते हैं। स्पिन आक्रमण की जिम्मेदारी उन्होंने कुलदीप यादव को सौंपी है जो पिछले कुछ समय से लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हैं।

    तेज गेंदबाजी आक्रमण में मुकुंद ने जसप्रीत बुमराह को मुख्य हथियार माना है। उनके साथ अनुभवी मोहम्मद सिराज को शामिल किया गया है। इसके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा हर्षित राणा और युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार को भी टीम में जगह मिली है। गुरनूर बरार का चयन विशेष रूप से चर्चा में है क्योंकि उन्होंने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया है और मुकुंद ने उनके प्रदर्शन पर भरोसा दिखाया है।

    मोहम्मद शमी का टीम से बाहर होना क्रिकेट प्रशंसकों के लिए सबसे बड़ा आश्चर्य माना जा रहा है। शमी लंबे समय से भारत के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में शामिल रहे हैं और बड़े टूर्नामेंटों में उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है। इसके बावजूद मुकुंद ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए युवा गेंदबाजों को प्राथमिकता दी है।

    हालांकि यह केवल अभिनव मुकुंद की व्यक्तिगत पसंद की टीम है और इसका भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड या राष्ट्रीय चयन समिति से कोई संबंध नहीं है। अंतिम टीम का चयन खिलाड़ियों की फॉर्म फिटनेस प्रदर्शन और चयनकर्ताओं की रणनीति के आधार पर किया जाएगा। फिर भी मुकुंद की इस टीम ने वनडे विश्व कप 2027 को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

  • पहले टी20 के लिए आकाश चोपड़ा की भविष्यवाणी, रिंकू सिंह को नहीं मिली जगह, हर्ष दुबे बने सरप्राइज पिक

    पहले टी20 के लिए आकाश चोपड़ा की भविष्यवाणी, रिंकू सिंह को नहीं मिली जगह, हर्ष दुबे बने सरप्राइज पिक


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला गुरुवार को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। इस मुकाबले से पहले पूर्व भारतीय क्रिकेटर और क्रिकेट विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने अपनी पसंदीदा भारतीय प्लेइंग इलेवन का चयन किया है। उनकी टीम में युवा खिलाड़ियों पर खास भरोसा दिखाई देता है। खास बात यह रही कि उन्होंने ऑलराउंडर हर्ष दुबे को अंतिम एकादश में शामिल किया, जबकि रिंकू सिंह और प्रभसिमरन सिंह जैसे खिलाड़ियों को जगह नहीं दी।

    आकाश चोपड़ा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए वीडियो में टीम का चयन करते हुए सलामी बल्लेबाजी की जिम्मेदारी अभिषेक शर्मा और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को सौंपी है। वैभव ने हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। हालांकि शुरुआती तीन मैचों में वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन आकाश का मानना है कि जिम्बाब्वे दौरा उनके लिए खुद को साबित करने का अच्छा अवसर हो सकता है।

    तीसरे नंबर पर उन्होंने विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन को रखा है। इंग्लैंड के खिलाफ ईशान का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था, लेकिन आकाश को भरोसा है कि वह इस सीरीज में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कप्तान श्रेयस अय्यर को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी की जिम्मेदारी दी गई है। आकाश का मानना है कि अय्यर कप्तानी के साथ साथ बल्लेबाजी में भी टीम के लिए अहम भूमिका निभाएंगे।

    मध्यक्रम में उपकप्तान तिलक वर्मा को पांचवें स्थान पर रखा गया है। इसके बाद ऑलराउंडरों के रूप में शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे और हर्ष दुबे को मौका दिया गया है। हर्ष दुबे को टीम में शामिल करना आकाश चोपड़ा की सबसे बड़ी पसंद माना जा रहा है। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्हें पहली बार इतनी अहम जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई गई है।

    गेंदबाजी विभाग में आकाश ने तेज गेंदबाज मयंक यादव और प्रिंस यादव पर भरोसा जताया है। दोनों अपनी रफ्तार और आक्रामक गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। स्पिन विभाग की जिम्मेदारी रवि बिश्नोई को सौंपी गई है, जिन्हें उन्होंने टीम का इकलौता विशेषज्ञ स्पिनर चुना है।

    आकाश चोपड़ा की इस संभावित प्लेइंग इलेवन में सबसे बड़ा फैसला रिंकू सिंह और प्रभसिमरन सिंह को बाहर रखना रहा। दोनों खिलाड़ी उनकी अंतिम एकादश में जगह नहीं बना सके। इससे साफ है कि उन्होंने इस मुकाबले के लिए संतुलित टीम संयोजन और ऑलराउंड विकल्पों को प्राथमिकता दी है।

    हालांकि यह केवल आकाश चोपड़ा की संभावित प्लेइंग इलेवन है। अंतिम फैसला टीम प्रबंधन और कप्तान श्रेयस अय्यर मैच की परिस्थितियों और पिच को ध्यान में रखते हुए करेंगे। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि भारतीय टीम पहले मुकाबले में किस संयोजन के साथ मैदान पर उतरती है।

    आकाश चोपड़ा की संभावित प्लेइंग इलेवन:
    अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, हर्ष दुबे, मयंक यादव, प्रिंस यादव, रवि बिश्नोई।

  • भारत-जिम्बाब्वे टी20 सीरीज का रोमांच शुरू, इन पांच खिलाड़ियों का प्रदर्शन तय कर सकता है मुकाबले का रुख

    भारत-जिम्बाब्वे टी20 सीरीज का रोमांच शुरू, इन पांच खिलाड़ियों का प्रदर्शन तय कर सकता है मुकाबले का रुख


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का आगाज गुरुवार से होने जा रहा है। इंग्लैंड दौरे के बाद टीम इंडिया अब नई चुनौती के लिए तैयार है। इस बार टीम की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में है और उनका लक्ष्य कप्तान के रूप में विजयी शुरुआत करना होगा। सीरीज में कई युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका मिलेगा, जबकि कुछ अनुभवी चेहरे भी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। ऐसे में पांच भारतीय खिलाड़ियों पर क्रिकेट प्रेमियों की खास नजर रहने वाली है।

    सबसे पहले बात करें युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले वैभव उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके थे। लगातार तीन मैचों में बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहने के बाद अब उनके पास जिम्बाब्वे के खिलाफ खुद को साबित करने का शानदार अवसर है। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले वैभव से टीम इंडिया को तेज शुरुआत की उम्मीद होगी।

    सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा भी इस सीरीज के सबसे अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है और उन्होंने छह टी20 मुकाबलों में 179 रन बनाए हैं। हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के अंतिम तीन मैचों में उनका बल्ला शांत रहा था। ऐसे में वह इस दौरे पर दमदार वापसी करने के इरादे से उतरेंगे। अभिषेक के पास कई व्यक्तिगत रिकॉर्ड अपने नाम करने का भी मौका है।

    कप्तान श्रेयस अय्यर पर भी सभी की नजरें रहेंगी। हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की थी और अब उसी लय को टी20 प्रारूप में भी बरकरार रखना चाहेंगे। अय्यर की सबसे बड़ी ताकत परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करना है। वह जरूरत पड़ने पर पारी को संभाल भी सकते हैं और तेजी से रन भी बना सकते हैं। कप्तान के तौर पर उनका प्रदर्शन टीम इंडिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

    तेज गेंदबाज प्रिंस यादव भी इस सीरीज में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने अपनी रफ्तार और सटीक यॉर्कर से प्रभावित किया था, हालांकि विकेट उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले। जिम्बाब्वे के खिलाफ वह नई गेंद और डेथ ओवरों दोनों में टीम के लिए प्रभावी साबित हो सकते हैं। उनकी गति विपक्षी बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

    वहीं तेज गेंदबाज मयंक यादव की वापसी भी क्रिकेट प्रेमियों के लिए उत्साह का विषय है। अपनी तेज रफ्तार के कारण आईपीएल में सुर्खियां बटोर चुके मयंक लंबे समय तक चोट से जूझते रहे हैं। अनुभवी गेंदबाजों की गैरमौजूदगी में उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका मिलने की संभावना है। यदि वह अपनी पुरानी लय में दिखाई देते हैं तो भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को नई धार मिल सकती है।

    युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के इस संतुलित संयोजन के साथ टीम इंडिया जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत के इरादे से मैदान में उतरेगी। अब देखना होगा कि इन पांच खिलाड़ियों में कौन अपने प्रदर्शन से सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ता है और भारत को सीरीज में बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाता है।

  • हरारे में होगी कांटे की टक्कर भारत और जिम्बाब्वे टी20 सीरीज पर सिकंदर रजा का बड़ा बयान जीत हार का फैसला करेगा प्रदर्शन

    हरारे में होगी कांटे की टक्कर भारत और जिम्बाब्वे टी20 सीरीज पर सिकंदर रजा का बड़ा बयान जीत हार का फैसला करेगा प्रदर्शन


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच 23 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह बढ़ गया है। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाने वाले इस मुकाबले से पहले जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस बार सीरीज पूरी तरह संतुलित रहेगी और दोनों टीमों के पास जीत हासिल करने के बराबर अवसर होंगे। रजा का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी टीम को कमजोर या मजबूत नहीं कहा जा सकता और मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम ही बाजी मारेगी।

    सिकंदर रजा ने कहा कि जिम्बाब्वे पिछले कुछ समय से लगातार प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेल रहा है और टीम का आत्मविश्वास पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। उन्होंने विश्वास जताया कि घरेलू परिस्थितियों का फायदा उनकी टीम को मिलेगा और दर्शकों को बेहद रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। उनके अनुसार यह सीरीज किसी भी तरह से एकतरफा नहीं होगी क्योंकि दोनों टीमें बदलाव के दौर से गुजर रही हैं और नई रणनीतियों के साथ मैदान पर उतरेंगी।

    भारतीय टीम के लिए भी यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार टी20 सीरीज गंवाने के बाद टीम इंडिया जीत की राह पर लौटना चाहेगी। कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने यह सीरीज खुद को साबित करने का बड़ा अवसर होगी। कप्तानी संभालने के बाद अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है इसलिए जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज जीतना उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ टीम के मनोबल के लिए भी बेहद जरूरी माना जा रहा है।

    भारत और जिम्बाब्वे के बीच टी20 मुकाबलों का इतिहास देखें तो अब तक दोनों टीमों के बीच कुल दस मैच खेले गए हैं जिनमें भारत ने सात मुकाबलों में जीत दर्ज की है जबकि जिम्बाब्वे तीन बार जीत हासिल करने में सफल रहा है। आंकड़े भले ही भारत के पक्ष में हों लेकिन हाल के वर्षों में जिम्बाब्वे ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है और कई बड़ी टीमों को कड़ी चुनौती दी है। यही कारण है कि इस सीरीज को हल्के में नहीं लिया जा रहा।

    हरारे की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों के लिए संतुलित मानी जाती है। शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद मिलती है जबकि बाद में बल्लेबाज खुलकर रन बना सकते हैं। ऐसे में दोनों टीमों की रणनीति और मैदान पर लिए गए फैसले जीत हार में अहम भूमिका निभाएंगे। भारतीय टीम जहां अपनी मजबूत बल्लेबाजी और अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा करेगी वहीं जिम्बाब्वे घरेलू परिस्थितियों और टीम भावना के दम पर उलटफेर करने की कोशिश करेगा।

    भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज के मुकाबले 23 जुलाई 25 जुलाई और 26 जुलाई को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाएंगे। सभी मैच भारतीय समयानुसार शाम साढ़े चार बजे शुरू होंगे। क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद है कि यह सीरीज रोमांच संघर्ष और बेहतरीन प्रदर्शन से भरपूर होगी तथा दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।

  • हिटमैन का ऐतिहासिक शतक बेकार इंग्लैंड में तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड लेकिन भारत 27 रन से हारा और सीरीज गंवाई

    हिटमैन का ऐतिहासिक शतक बेकार इंग्लैंड में तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड लेकिन भारत 27 रन से हारा और सीरीज गंवाई


    नई दिल्ली। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे मुकाबले में अपने बल्ले से ऐसा प्रदर्शन किया जिसने एक बार फिर उनकी क्लास और अनुभव की झलक दुनिया को दिखा दी। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर रोहित ने 138 रन की शानदार शतकीय पारी खेलते हुए न सिर्फ अपनी फॉर्म में दमदार वापसी की बल्कि आठ साल पुराना अपना ही रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। हालांकि उनकी यह यादगार पारी भारत को जीत नहीं दिला सकी और टीम को 27 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ भारत ने तीन मैचों की वनडे सीरीज 1-2 से गंवा दी जबकि इससे पहले टी20 सीरीज भी इंग्लैंड के नाम रही थी।

    रोहित शर्मा ने अपनी पारी के दौरान शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 17 चौके और 5 छक्के लगाए। शुरुआत से ही उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा और मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए। इस पारी के साथ रोहित इंग्लैंड की धरती पर भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने वर्ष 2017 में ट्रेंट ब्रिज में खेली गई अपनी 137 रन की नाबाद पारी का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया और नया इतिहास रच दिया।

    भारतीय पारी की शुरुआत भी शानदार रही। रोहित शर्मा और कप्तान शुभमन गिल ने पहले विकेट के लिए 147 रन की मजबूत साझेदारी कर टीम को बेहतरीन शुरुआत दिलाई। गिल ने 77 रन की शानदार पारी खेली और रोहित का अच्छा साथ निभाया। गिल के आउट होने के बाद विराट कोहली ने भी जिम्मेदारी संभाली और रोहित के साथ दूसरे विकेट के लिए 113 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। कोहली ने 60 गेंदों में 74 रन बनाते हुए लक्ष्य का पीछा करने की उम्मीदों को जिंदा रखा।

    पहले दो वनडे मुकाबलों में रोहित शर्मा का बल्ला खामोश रहा था जिसके बाद उनकी फॉर्म को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। आलोचकों ने उनकी बल्लेबाजी पर सवाल खड़े किए थे लेकिन तीसरे मुकाबले में उन्होंने अपने अनुभव और क्षमता का शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी आलोचनाओं का जवाब बल्ले से दिया। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास साफ नजर आया और हर शॉट में पुरानी लय दिखाई दी।

    हालांकि रोहित की शानदार पारी के बावजूद भारतीय टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। 388 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट पर 360 रन ही बना सका। रोहित गिल और कोहली के अलावा अन्य बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। ईशान किशन 14 रन बनाकर आउट हो गए जबकि श्रेयस अय्यर बिना खाता खोले पवेलियन लौटे। केएल राहुल केवल 12 रन ही बना सके और अक्षर पटेल भी 2 रन बनाकर सस्ते में आउट हो गए। मध्यक्रम की यही नाकामी भारत की हार की सबसे बड़ी वजह बनी।

    इससे पहले इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। बेन डकेट ने 141 रन की शानदार पारी खेली जबकि जैकब बेथेल ने 91 रन बनाए। अनुभवी बल्लेबाज जो रूट ने नाबाद 74 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और अंत में जोस बटलर ने सिर्फ 13 गेंदों में 41 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत के सामने बेहद कठिन लक्ष्य खड़ा कर दिया।

    भले ही भारत सीरीज हार गया हो लेकिन रोहित शर्मा की रिकॉर्डतोड़ पारी भारतीय क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाएगी। बड़े मैचों में शानदार प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता एक बार फिर साबित हुई है और आने वाले महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों से पहले उनका फॉर्म में लौटना टीम इंडिया के लिए राहत की खबर है।