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  • टीम इंडिया फिर बल्लेबाजी में फ्लॉप, इंग्लैंड ने 9 विकेट से रौंदकर सीरीज पर किया कब्जा

    टीम इंडिया फिर बल्लेबाजी में फ्लॉप, इंग्लैंड ने 9 विकेट से रौंदकर सीरीज पर किया कब्जा


    नई दिल्ली । ब्रिस्टल में खेले गए चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से करारी शिकस्त देकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने इतिहास रचते हुए पहली बार भारत के खिलाफ दो या उससे अधिक मैचों वाली टी20 द्विपक्षीय सीरीज अपने नाम कर ली।

    इससे पहले दोनों देशों के बीच खेली गई छह टी20 द्विपक्षीय सीरीज में भारत ने पांच जीती थीं, जबकि एक सीरीज बराबरी पर समाप्त हुई थी। वहीं टीम इंडिया को आयरलैंड के बाद लगातार दूसरी टी20 सीरीज में हार झेलनी पड़ी। इससे पहले 2019 में भारत लगातार दो टी20 सीरीज न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया से हारा था।

    पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर सिर्फ 158 रन ही बना सकी। कप्तान श्रेयस अय्यर ने शानदार 80 रन बनाकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।

    युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी 15 रन बनाकर आउट हो गए, जबकि अभिषेक शर्मा 16 रन ही बना सके। ईशान किशन का खराब फॉर्म जारी रहा और वह केवल 4 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। शिवम दुबे ने 22 रन, तिलक वर्मा ने 11 रन, वॉशिंगटन सुंदर ने 5 रन और अक्षर पटेल ने सिर्फ 1 रन का योगदान दिया। भारतीय बल्लेबाजी एक बार फिर बड़े स्कोर तक पहुंचने में नाकाम रही।

    159 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की। फिल साल्ट ने नाबाद 59 रन बनाए, जबकि कप्तान हैरी ब्रूक ने सिर्फ 35 गेंदों में 79 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारतीय गेंदबाजों को पूरी तरह बेअसर कर दिया। ब्रूक ने अपनी पारी में 8 चौके और 4 छक्के लगाए। हालांकि जोस बटलर केवल 8 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन इसके बाद इंग्लैंड ने कोई और विकेट नहीं गंवाया।

    इंग्लैंड ने सिर्फ 13.5 ओवर में लक्ष्य हासिल कर भारत को 9 विकेट से हराया और सीरीज पर कब्जा जमा लिया। अब दोनों टीमों के बीच पांचवां और अंतिम टी20 मुकाबला 11 जुलाई को साउथेम्प्टन में खेला जाएगा, जहां भारत सम्मान बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगा।

  • ब्रिस्टल में टीम इंडिया का बुरा हाल, हैरी ब्रूक की तूफानी पारी से इंग्लैंड ने सीरीज पर किया कब्जा

    ब्रिस्टल में टीम इंडिया का बुरा हाल, हैरी ब्रूक की तूफानी पारी से इंग्लैंड ने सीरीज पर किया कब्जा


    नई दिल्ली । ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली। इस हार के साथ ही भारतीय टीम ने 2019 के बाद पहली बार लगातार दो टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज गंवाई हैं। इससे पहले भारत आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज 0-2 से हार चुका था।

    पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर 158 रन ही बना सकी। बल्लेबाज एक बार फिर बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे और टीम चुनौतीपूर्ण स्कोर तक नहीं पहुंच सकी। जवाब में इंग्लैंड ने सिर्फ 13.5 ओवर में एक विकेट खोकर 159 रन बनाते हुए मुकाबला 37 गेंद शेष रहते अपने नाम कर लिया।

    गेंदों के लिहाज से यह भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीसरी सबसे बड़ी हार रही। वहीं 150 से अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने विकेटों के लिहाज से अपनी संयुक्त रूप से दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

    इंग्लैंड की जीत के हीरो कप्तान हैरी ब्रूक रहे, जिन्होंने सिर्फ 35 गेंदों में 79 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने चौकों और छक्कों की बरसात करते हुए भारतीय गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। दूसरी ओर फिल साल्ट ने 42 गेंदों में नाबाद 59 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 68 गेंदों में 146 रन की अविजित साझेदारी कर मैच पूरी तरह इंग्लैंड के पक्ष में कर दिया।

    यह जीत इंग्लैंड के लिए ऐतिहासिक भी रही। पहली बार उसने भारत को दो या उससे अधिक मैचों की द्विपक्षीय टी20 सीरीज में हराया है। इससे पहले दोनों देशों के बीच खेली गई छह टी20 द्विपक्षीय सीरीज में भारत ने पांच जीती थीं, जबकि एक सीरीज बराबरी पर समाप्त हुई थी।

    अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का पांचवां और अंतिम टी20 मुकाबला 11 जुलाई को साउथेम्प्टन के द रोज बाउल स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम सम्मान बचाने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, जबकि इंग्लैंड की नजर क्लीन स्वीप पर होगी।

  • वियतनाम में गूंजेगा भारत का दम, पिकलबॉल वर्ल्ड कप के लिए मजबूत टीम का ऐलान, हर्ष मेहता बने कप्तान

    वियतनाम में गूंजेगा भारत का दम, पिकलबॉल वर्ल्ड कप के लिए मजबूत टीम का ऐलान, हर्ष मेहता बने कप्तान


    नई दिल्ली । भारतीय पिकलबॉल एसोसिएशन ने पिकलबॉल वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 30 अगस्त से 6 सितंबर तक वियतनाम के दा नांग शहर में खेला जाएगा, जहां दुनिया की शीर्ष टीमें खिताब के लिए मुकाबला करेंगी। कड़े ट्रायल और चयन प्रक्रिया के बाद चुनी गई भारतीय टीम इस बार विश्व मंच पर दमदार प्रदर्शन करने और खिताब जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेगी।

    भारतीय टीम की कमान अनुभवी खिलाड़ी हर्ष मेहता को सौंपी गई है। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हर्ष से टीम को काफी उम्मीदें हैं। उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी दी है। वहीं युवा प्रतिभा अर्जुन सिंह को अंडर 18 वर्ग की टीम का कप्तान बनाया गया है। अर्जुन पिछले कुछ समय से लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें भारतीय पिकलबॉल का भविष्य माना जा रहा है।

    पुरुष टीम में हर्ष मेहता के अलावा अर्जुन सिंह, अनीश फ्रोलियन और अमन पटेल को जगह मिली है। महिला वर्ग में मिहिका यादव, आलिया इब्राहिम, पर्ल अमलसदीवाला और नाओमी अमलसदीवाला भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। चयनकर्ताओं का मानना है कि अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का यह संतुलित मिश्रण टीम को विश्व कप में मजबूत दावेदार बनाएगा।

    कप्तान बनाए जाने के बाद हर्ष मेहता ने खुशी जताते हुए कहा कि किसी भी खिलाड़ी की व्यक्तिगत प्रतिभा मैच जिता सकती है, लेकिन चैंपियन वही टीम बनती है जो एकजुट होकर खेलती है। उन्होंने विश्वास जताया कि पूरी टीम अपनी क्षमता के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी और भारत को विश्व कप में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास करेगी। साथ ही उन्होंने कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपने के लिए भारतीय पिकलबॉल एसोसिएशन का आभार भी व्यक्त किया।

    महिला टीम की खिलाड़ियों पर्ल अमलसदीवाला और नाओमी अमलसदीवाला ने पिछले एक वर्ष में घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। दोनों खिलाड़ियों ने महिला डबल्स और मिक्स्ड डबल्स स्पर्धाओं में कई महत्वपूर्ण पदक अपने नाम किए हैं। खास बात यह है कि नाओमी अमलसदीवाला और अर्जुन सिंह की जोड़ी मिक्स्ड डबल्स में भारत की सबसे मजबूत जोड़ियों में गिनी जाती है। हाल के महीनों में इस जोड़ी ने विश्व रैंकिंग की कई शीर्ष टीमों को हराकर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया है।

    भारतीय पिकलबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष सूर्यवीर सिंह भुल्लर ने टीम पर भरोसा जताते हुए कहा कि इस बार भारत के पास संतुलित और बेहद मजबूत टीम है। उन्होंने कहा कि हर्ष मेहता के नेतृत्व में सभी खिलाड़ी केवल भागीदारी के लिए नहीं बल्कि विश्व खिताब जीतने के इरादे से वियतनाम जाएंगे। उनका विश्वास है कि भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करेंगे।

    पिछले पिकलबॉल वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था। इस बार लक्ष्य उससे एक कदम आगे बढ़कर स्वर्ण पदक जीतने का है। इसी उद्देश्य से चयनित खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें तकनीकी कौशल, फिटनेस, मानसिक मजबूती और खेल पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारतीय टीम पूरी तैयारी के साथ विश्व कप में उतरकर एक बार फिर देश को गौरवान्वित करने की कोशिश करेगी।

  • करो या मरो मुकाबले में भारत की नजर ब्रिस्टल पर, इसी मैदान पर रोहित के शतक से इंग्लैंड को मिली थी करारी शिकस्त

    करो या मरो मुकाबले में भारत की नजर ब्रिस्टल पर, इसी मैदान पर रोहित के शतक से इंग्लैंड को मिली थी करारी शिकस्त


    नई दिल्ली ।भारत और इंग्लैंड के बीच जारी पांच मैचों की टी20 सीरीज अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गई है। शुरुआती तीन मुकाबलों में दो हार झेलने के बाद भारतीय टीम सीरीज में 0-2 से पिछड़ चुकी है और अब ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में होने वाला चौथा मुकाबला उसके लिए करो या मरो की स्थिति बन गया है। यदि भारत यह मैच हारता है तो इंग्लैंड सीरीज अपने नाम कर लेगा, जबकि जीत मिलने पर भारतीय टीम वापसी की उम्मीदें जिंदा रख सकेगी।

    ब्रिस्टल का मैदान भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए खास महत्व रखता है। टीम इंडिया ने यहां अब तक केवल एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला है, लेकिन उस मैच की याद आज भी भारतीय फैंस के दिलों में ताजा है। वर्ष 2018 में इसी मैदान पर भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की थी और उस मुकाबले के नायक रहे थे रोहित शर्मा। उन्होंने महज 56 गेंदों में नाबाद 100 रन की विस्फोटक पारी खेलकर इंग्लैंड के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की थी। विराट कोहली ने भी 43 रनों की अहम पारी खेली थी, जिसकी बदौलत भारत ने 199 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य केवल 18.4 ओवर में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया था।

    उस मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में नौ विकेट के नुकसान पर 198 रन बनाए थे, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा जिस अंदाज में किया, उसने मेजबान टीम को पूरी तरह बेबस कर दिया। यही वजह है कि ब्रिस्टल का मैदान भारतीय टीम के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

    हालांकि मौजूदा सीरीज में परिस्थितियां भारत के पक्ष में नहीं हैं। तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई थी। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 201 रन बनाए। फिल साल्ट ने 70 रन की शानदार पारी खेली, जबकि जोस बटलर और सैम करन ने भी तेज बल्लेबाजी कर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।

    202 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाज पूरी तरह संघर्ष करते नजर आए। पूरी टीम केवल 76 रन पर सिमट गई और सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। यह हार भारतीय टीम की टी20 इतिहास की सबसे निराशाजनक हारों में गिनी जा रही है। अब बल्लेबाजों के सामने खुद को साबित करने और सीरीज में वापसी करने की बड़ी चुनौती है।

    दूसरी ओर इंग्लैंड का ब्रिस्टल में रिकॉर्ड भी बहुत प्रभावशाली नहीं रहा है। मेजबान टीम ने इस मैदान पर अब तक पांच टी20 मुकाबले खेले हैं, जिनमें केवल दो में जीत मिली जबकि तीन मैचों में हार का सामना करना पड़ा। हालांकि वर्ष 2025 में इंग्लैंड ने इसी मैदान पर वेस्टइंडीज को हराकर जीत दर्ज की थी, जिससे टीम का आत्मविश्वास भी ऊंचा है।

    अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारतीय टीम 2018 की सुनहरी यादों को दोहराते हुए ब्रिस्टल में एक बार फिर जीत हासिल कर पाएगी या इंग्लैंड इसी मैदान पर सीरीज अपने नाम करने में सफल रहेगा। क्रिकेट प्रेमियों को एक हाई-वोल्टेज मुकाबले की उम्मीद है जिसमें दोनों टीमें पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेंगी।

  • दूसरे टी20 में भारत का बड़ा फैसला, पहले गेंदबाजी का चुना रास्ता, दो नए खिलाड़ियों को मिला डेब्यू का मौका

    दूसरे टी20 में भारत का बड़ा फैसला, पहले गेंदबाजी का चुना रास्ता, दो नए खिलाड़ियों को मिला डेब्यू का मौका

    नई दिल्ली । भारत और आयरलैंड के बीच दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला का दूसरा और अंतिम मुकाबला बेलफास्ट में खेला जा रहा है। पहला मैच गंवाने के बाद भारतीय टीम के सामने श्रृंखला बराबर करने की चुनौती है। इसी उद्देश्य के साथ कप्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, ताकि लक्ष्य का पीछा करते हुए मुकाबले पर बेहतर नियंत्रण बनाया जा सके।

    इस मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण को लेकर काफी चर्चा थी। क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद थी कि उन्हें दूसरे टी20 में मौका मिल सकता है, लेकिन टीम प्रबंधन ने इस बार भी उन्हें अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया। ऐसे में उनका अंतरराष्ट्रीय डेब्यू फिलहाल टल गया है और इसके लिए उन्हें आगे का इंतजार करना होगा।

    हालांकि भारतीय टीम ने दो नए खिलाड़ियों को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का अवसर दिया है। टीम प्रबंधन ने पिछले मुकाबले के प्रदर्शन को देखते हुए संयोजन में बदलाव किया और नए खिलाड़ियों पर भरोसा जताया। माना जा रहा है कि इन बदलावों का उद्देश्य टीम को बेहतर संतुलन देना और गेंदबाजी आक्रमण को अधिक प्रभावी बनाना है।

    पहले टी20 मुकाबले में भारतीय टीम को 34 रन से हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के साथ आयरलैंड ने पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत को हराकर इतिहास रचा। भारतीय बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही विभाग अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके थे, जिसके कारण टीम को सीरीज में पिछड़ना पड़ा।

    दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम की कोशिश शुरुआती ओवरों से दबाव बनाने की होगी। गेंदबाजों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है, जबकि बल्लेबाजों के सामने लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा कर श्रृंखला बराबर करने की जिम्मेदारी रहेगी। टीम प्रबंधन को उम्मीद है कि नए खिलाड़ियों का उत्साह और अनुभवी खिलाड़ियों का अनुभव टीम के लिए निर्णायक साबित होगा।

    यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत जहां सीरीज 1-1 से बराबर करने के इरादे से मैदान में उतरा है, वहीं आयरलैंड की नजर ऐतिहासिक सीरीज जीत दर्ज करने पर है। ऐसे में बेलफास्ट में खेला जा रहा यह मुकाबला रोमांचक होने की पूरी संभावना है।

  • अभ्यास सुविधाओं की कमी के बीच भी चमके वैभव सूर्यवंशी, बेलफास्ट नेट सेशन में शानदार बल्लेबाजी ने बढ़ाईं टीम इंडिया की उम्मीदें

    अभ्यास सुविधाओं की कमी के बीच भी चमके वैभव सूर्यवंशी, बेलफास्ट नेट सेशन में शानदार बल्लेबाजी ने बढ़ाईं टीम इंडिया की उम्मीदें


    नई दिल्ली ।
    आयरलैंड के खिलाफ टी20 श्रृंखला के पहले मुकाबले से पहले बेलफास्ट में भारतीय क्रिकेट टीम का अभ्यास सत्र कुछ शुरुआती तकनीकी अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में रहा। हालांकि इन चुनौतियों का खिलाड़ियों की तैयारियों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। टीम प्रबंधन की त्वरित पहल के बाद अभ्यास सुविधाओं में आवश्यक सुधार किए गए, जिसके बाद पूरा सत्र सामान्य रूप से संपन्न हुआ। इस दौरान सबसे अधिक चर्चा युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की रही, जिन्होंने अपने पहले सीनियर टीम नेट सेशन में बेहतरीन बल्लेबाजी कर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

    अभ्यास की शुरुआत में एक नेट पर गेंदबाज के पीछे साइटस्क्रीन उपलब्ध नहीं होने से बल्लेबाजों को गेंद को स्पष्ट रूप से देखने में परेशानी हुई। भारतीय टीम के सहयोगी स्टाफ ने इस समस्या को तुरंत आयोजकों के सामने रखा। शिकायत मिलते ही संबंधित अधिकारियों ने व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए और कुछ ही समय में अभ्यास की परिस्थितियां पूरी तरह सामान्य हो गईं। इसके बाद खिलाड़ियों ने बिना किसी रुकावट के अपने निर्धारित अभ्यास कार्यक्रम को पूरा किया।

    व्यवस्था बहाल होने के बाद नेट्स में सबसे ज्यादा निगाहें 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी पर रहीं। सीनियर भारतीय टीम के साथ अपने पहले अभ्यास सत्र में उन्होंने पूरी सहजता और आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की। लंबे नेट सेशन के दौरान उन्होंने सीधे ड्राइव, कवर ड्राइव, पुल और आक्रामक स्ट्रोक्स के जरिए अपनी तकनीकी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कम उम्र के बावजूद उनकी बल्लेबाजी में संयम, संतुलन और परिस्थितियों के अनुरूप खेलने की समझ साफ दिखाई दी।

    आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद वैभव पहले ही भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में अपनी जगह बना चुके हैं। बेलफास्ट के अभ्यास सत्र में भी उन्होंने उसी लय को कायम रखते हुए टीम प्रबंधन, साथी खिलाड़ियों और मौजूद क्रिकेट प्रेमियों को प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार सीनियर टीम का हिस्सा बनने के बावजूद उनके व्यवहार और बल्लेबाजी में किसी प्रकार का दबाव नजर नहीं आया, जिसने उनके मानसिक संतुलन को भी रेखांकित किया।

    अभ्यास के दौरान मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी वैभव के साथ कुछ समय बिताया और उन्हें खेल के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। युवा खिलाड़ियों को भविष्य के लिए तैयार करने की टीम प्रबंधन की रणनीति के तहत यह संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गंभीर लगातार खिलाड़ियों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शांत रहने और अपनी स्वाभाविक खेल शैली पर भरोसा बनाए रखने की सलाह देते रहे हैं, जिसका सकारात्मक प्रभाव युवा खिलाड़ियों पर भी दिखाई दे रहा है।

    बेलफास्ट में भारतीय टीम का अभ्यास देखने स्थानीय भारतीय समुदाय भी बड़ी संख्या में पहुंचा। वैभव सूर्यवंशी को लेकर दर्शकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रशंसकों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और ऑटोग्राफ लिए। युवा बल्लेबाज की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का संकेत भी है कि घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में उनकी उपलब्धियों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलानी शुरू कर दी है।

    पहले टी20 मुकाबले से पहले आयोजित यह अभ्यास सत्र भारतीय टीम के लिए केवल तकनीकी तैयारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवा प्रतिभाओं के आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं का भी परिचायक बना। वैभव सूर्यवंशी ने अपने प्रदर्शन से यह संकेत दिया कि बड़े मंच की चुनौतियां उनके आत्मविश्वास को प्रभावित नहीं कर रहीं। अब आगामी मुकाबलों में सभी की नजरें इस युवा बल्लेबाज पर रहेंगी कि वह नेट्स में दिखाई गई अपनी लय को मैच के दौरान कितनी प्रभावी बल्लेबाजी में बदल पाते हैं।

  • अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीम इंडिया ने रचा स्वर्णिम इतिहास, अफगानिस्तान को हराकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाला बना पहला देश

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीम इंडिया ने रचा स्वर्णिम इतिहास, अफगानिस्तान को हराकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाला बना पहला देश

    नई दिल्ली। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक ऐसा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है, जिसके आसपास फिलहाल दुनिया की कोई भी बड़ी क्रिकेट टीम नजर नहीं आती है। न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्टेडियम में खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में भारत ने अफगानिस्तान को पारी और 300 रनों के बेहद शर्मनाक अंतर से शिकस्त दे दी। इस विशाल जीत के साथ ही भारतीय टीम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में एक नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया है, जहां क्रिकेट की महाशक्तियां मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमें भारत के आसपास भी नहीं ठहरती हैं।

    यह मुकाबला जीतने के साथ ही अफगानिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम का बिना हारे लगातार 15 मैच खेलने का अनोखा सिलसिला पूरा हो चुका है। भारतीय टीम ने साल 2010 से लेकर 2026 तक के सफर में अफगानिस्तान के खिलाफ सभी प्रारूपों को मिलाकर कुल 15 मुकाबले खेले हैं, जिनमें से 12 मैचों में टीम इंडिया ने एकतरफा जीत हासिल की है। इस सफर के दौरान भारतीय टीम को एक भी मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा है, जिसने भारत को विश्व क्रिकेट इतिहास की सबसे लंबी अजेय स्ट्रीक का मालिक बना दिया है।

    इस वैश्विक सूची पर नजर डालें तो भारत के बाद दूसरे नंबर पर न्यूजीलैंड की टीम मौजूद है, जिसने आयरलैंड के खिलाफ लगातार 13 मुकाबलों में जीत दर्ज की थी। वहीं युगांडा ने नाइजीरिया के खिलाफ लगातार 13 मैच जीते थे। भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले गए इन 15 मुकाबलों के इतिहास में केवल एक मैच साल 2023 के टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान बारिश की भेंट चढ़ा था, जबकि दो बेहद रोमांचक मुकाबले टाई पर समाप्त हुए थे। इनमें से पहला टाई मुकाबला साल 2018 के एशिया कप के दौरान दुबई में खेला गया वनडे मैच था, जिसमें महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में विपक्षी टीम ने भारत को कड़ी टक्कर दी थी।

    इसके बाद साल 2024 में बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में दोनों देशों के बीच खेला गया द्विपक्षीय टी20 मुकाबला क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में शुमार हो गया था, जहां एक ही मैच में दो बार सुपर ओवर का ड्रामा देखने को मिला था। उस ऐतिहासिक मैच में कप्तान रोहित शर्मा के शानदार 121 रनों और रिंकू सिंह की आतिशी पारी के दम पर भारत ने विशाल स्कोर खड़ा किया था, जिसे अफगानिस्तान ने बराबर कर दिया था। अंततः रवि बिश्नोई की घातक गेंदबाजी के दम पर भारत ने वह दोहरा सुपर ओवर मुकाबला अपने नाम किया था।

    क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप यानी टेस्ट मैच में अफगानिस्तान को बेहद बुरी तरह रौंदकर भारत ने साफ कर दिया है कि खेल के हर फॉर्मेट में उसकी बादशाहत क्यों कायम है। मुल्लांपुर स्टेडियम की पिच पर भारतीय गेंदबाजों और बल्लेबाजों के संयुक्त प्रदर्शन ने विपक्षी टीम को मैच के किसी भी सत्र में संभलने का मौका नहीं दिया। भारतीय क्रिकेट के इस स्वर्णिम दौर में यह नया विश्व रिकॉर्ड खिलाड़ियों की निरंतरता और टीम के मजबूत बेंच स्ट्रेंथ को दर्शाता है, जिसने देश के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

  • सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना कीर्तिमान दांव पर, 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू की मांग तेज

    सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना कीर्तिमान दांव पर, 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू की मांग तेज

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इस समय केवल एक ही नाम की गूंज सुनाई दे रही है और वह नाम है 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी का। अपनी असाधारण प्रतिभा और मैदान के हर कोने में शॉट लगाने की काबिलियत से चयनकर्ताओं को प्रभावित करने वाले वैभव अब इतिहास रचने की दहलीज पर खड़े हैं। इस महीने के अंत में भारतीय क्रिकेट टीम को दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए आयरलैंड का दौरा करना है और इसके ठीक बाद टीम पांच मैचों की सीरीज के लिए इंग्लैंड रवाना होगी। इस व्यस्त शेड्यूल को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के शीर्ष अधिकारी सीनियर खिलाड़ियों को आराम देकर युवाओं को आजमाने की रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस दौड़ में वैभव सूर्यवंशी का नाम सबसे आगे चल रहा है क्योंकि आईपीएल के हालिया सीजन में उनके बल्ले से जो रनों का तूफान निकला है, उसने क्रिकेट पंडितों को हैरान कर दिया है। अगर चयन समिति उन्हें आयरलैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज के लिए टीम इंडिया की जर्सी सौंप देती है, तो वह भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का करीब 37 साल पुराना एक महाकीर्तिमान ध्वस्त कर देंगे।

    सचिन तेंदुलकर ने साल 1989 में जब पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा था, तब उनकी उम्र महज 16 साल थी और वह भारत के लिए डेब्यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। अब ठीक 37 साल बाद 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी इस चमत्कार को दोहराने के बेहद करीब नजर आ रहे हैं। अगर वह मैदान पर उतरते हैं, तो वह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले इतिहास के सबसे युवा क्रिकेटर बन जाएंगे। हालांकि सचिन तेंदुलकर के नाम टेस्ट और वनडे क्रिकेट में सबसे कम उम्र में पदार्पण करने का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में यह गौरव ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर के नाम है। सुंदर ने साल 2017 में श्रीलंका के खिलाफ 18 साल और 80 दिन की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच खेला था। ऐसे में यदि वैभव सूर्यवंशी आगामी सीरीज में भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनते हैं, तो वह वॉशिंगटन सुंदर के इस 9 साल पुराने रिकॉर्ड को भी बेहद आसानी से पीछे छोड़ देंगे।

    वैभव सूर्यवंशी की इस दावेदारी को उनके आईपीएल 2026 के अविश्वसनीय प्रदर्शन से सबसे ज्यादा मजबूती मिली है। उन्होंने इस सीजन के 16 मुकाबलों में लगभग 48.50 की बेहतरीन औसत और 237.30 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट के साथ कुल 776 रन कूटे हैं। इस दौरान उनके बल्ले से एक शानदार शतक और पांच अर्धशतक निकले हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 103 रन रहा है। इतना ही नहीं, अपनी आक्रामक शैली का मुजाहिरा पेश करते हुए उन्होंने पूरे सीजन में रिकॉर्डतोड़ 72 छक्के भी जड़े हैं। उनके इसी गैरमामूली टैलेंट को देखते हुए उन्हें पहले ही इंडिया ए टीम में शामिल किया जा चुका है, जहां वह श्रीलंका ए और अफगानिस्तान ए के खिलाफ होने वाली त्रिकोणीय सीरीज में हिस्सा लेने जा रहे हैं। इंडिया ए की इस टीम में वह कप्तान तिलक वर्मा के नेतृत्व में खेलेंगे, जबकि सीनियर खिलाड़ी ऋतुराज गायकवाड़ भी मार्गदर्शन के लिए टीम में मौजूद रहेंगे। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों के क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव की यह टाइमिंग और खेल की समझ उन्हें लंबी रेस का घोड़ा बनाती है। उपकप्तान रियान पराग के चोटिल होने के बाद वैभव के लिए मुख्य राष्ट्रीय टीम के दरवाजे और तेजी से खुल गए हैं और अब खेल प्रेमियों की नजरें चयनकर्ताओं के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

  • T20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का 'सिक्सर': सेमीफाइनल में एंट्री के साथ रचा इतिहास, मेजबान भारत के पास डबल धमाके का सुनहरा मौका

    T20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का 'सिक्सर': सेमीफाइनल में एंट्री के साथ रचा इतिहास, मेजबान भारत के पास डबल धमाके का सुनहरा मौका


    नई दिल्ली। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए ‘वर्चुअल क्वार्टर फाइनल’ मुकाबले में संजू सैमसन की नाबाद 97 रनों की तूफानी पारी ने न केवल कैरिबियाई टीम को धूल चटाई, बल्कि टीम इंडिया के लिए इतिहास के नए दरवाजे भी खोल दिए हैं। भारत ने इस जीत के साथ छठी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है, जो कि एक कीर्तिमान है। इस उपलब्धि के साथ ही भारत ने टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा बार सेमीफाइनल खेलने के पाकिस्तान के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। दिलचस्प बात यह है कि इस साल भारत के साथ-साथ इंग्लैंड भी छठी बार सेमीफाइनल का हिस्सा बन रहा है, जबकि पाकिस्तान सुपर-8 के दौर से ही बाहर होकर पिछड़ गया है।

    भारतीय क्रिकेट टीम का यह सफर साल 2007 के पहले एडिशन से शुरू हुआ था, जहाँ महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने न केवल सेमीफाइनल का सफर तय किया था बल्कि वर्ल्ड कप की ट्रॉफी भी चूमी थी। इसके बाद 2014, 2016, 2022 और 2024 के बाद अब 2026 में भी टीम इंडिया ने अंतिम चार में अपनी जगह पक्की की है। सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में यह टीम अब उस मुकाम पर खड़ी है जहाँ से इतिहास महज दो कदम दूर है। भारत इस समय न केवल डिफेंडिंग चैंपियन है, बल्कि इस टूर्नामेंट का मेजबान भी है, और यही दोनों कारक इस बार के सेमीफाइनल को और भी रोमांचक बना देते हैं।

    इतिहास गवाह है कि टी20 वर्ल्ड कप के अब तक के सफर में कोई भी टीम लगातार दो बार खिताब नहीं जीत पाई है। साथ ही, टूर्नामेंट के इतिहास में आज तक कोई भी मेजबान देश अपनी धरती पर ट्रॉफी उठाने में कामयाब नहीं रहा है। सूर्यकुमार यादव की ‘यंग ब्रिगेड’ के पास इन दोनों मिथकों को एक साथ तोड़ने का सुनहरा अवसर है। अगर भारत सेमीफाइनल में इंग्लैंड को शिकस्त देकर फाइनल जीतता है, तो वह न केवल अपने टाइटल को डिफेंड करने वाली पहली टीम बनेगा, बल्कि मेजबान के तौर पर खिताब जीतने का ‘सूखा’ भी खत्म कर देगा।

    सेमीफाइनल की राह अब एक चिर-परिचित प्रतिद्वंद्वी यानी इंग्लैंड की ओर जाती है। यह लगातार तीसरा मौका है जब टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत और इंग्लैंड की टक्कर हो रही है। एक तरफ जहाँ संजू सैमसन की लय और गेंदबाजों का अनुशासन भारत की सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ डिफेंडिंग चैंपियन होने का दबाव भी टीम को प्रेरित कर रहा है। पाकिस्तान और इंग्लैंड के साथ 6-6 बार सेमीफाइनल खेलने का रिकॉर्ड साझा करने के बाद, अब भारतीय प्रशंसकों की निगाहें केवल उस चमचमाती ट्रॉफी पर टिकी हैं जो भारत को क्रिकेट जगत का निर्विवाद राजा बना देगी।

    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन (Hindi):
    संजू सैमसन की शानदार पारी की बदौलत भारत ने वेस्टइंडीज को हराकर छठी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में प्रवेश किया, जहाँ उसका मुकाबला इंग्लैंड से होगा। पाकिस्तान के रिकॉर्ड की बराबरी करने के बाद अब सूर्यकुमार यादव की सेना लगातार दो खिताब जीतकर नया इतिहास रचने के करीब है।

    प्रभावी टैग्स (English):
    T20WorldCup2026, TeamIndia, IndiaVsEngland, SanjuSamson, CricketHistory

  • घर में शेर, पर वर्ल्ड कप में ढेर! श्रीलंका बाहर और अब भारत पर संकट; क्या मेजबान होना ही सबसे बड़ी हार है?

    घर में शेर, पर वर्ल्ड कप में ढेर! श्रीलंका बाहर और अब भारत पर संकट; क्या मेजबान होना ही सबसे बड़ी हार है?


    नई दिल्ली। क्रिकेट की दुनिया में एक कहावत है कि अपने घर में खेलना सबसे बड़ा फायदा होता है। अपनी पिच, अपनी मिट्टी और अपने दर्शकों का शोर किसी भी टीम के लिए ’12वें खिलाड़ी’ का काम करता है। लेकिन जब बात टी20 वर्ल्ड कप की आती है, तो यह ‘एडवांटेज’ एक भयानक ‘श्राप’ या ‘पनौती’ में तब्दील होता नजर आता है। इतिहास गवाह है कि 2007 से लेकर अब तक, जिस भी देश ने इस छोटे फॉर्मेट के महाकुंभ की मेजबानी की है, उसके हाथों से ट्रॉफी फिसल गई है। साल 2026 में एक बार फिर भारत और श्रीलंका संयुक्त रूप से इस टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहे हैं, और शुरुआती संकेतों ने प्रशंसकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। श्रीलंका पहले ही टूर्नामेंट से बाहर होकर इस ‘मिथक’ को सच साबित कर चुका है, और अब करोड़ों भारतीय फैंस की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या टीम इंडिया इस ऐतिहासिक बाधा को पार कर पाएगी या वह भी इस ‘मेजबान के श्राप’ का शिकार बनेगी।

    टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास के पन्ने पलटें तो तस्वीर काफी डरावनी नजर आती है। साल 2007 में जब इस टूर्नामेंट का आगाज साउथ अफ्रीका में हुआ, तो प्रोटियाज टीम अपने ही घर में सुपर-8 से बाहर हो गई। इसके बाद 2009 में क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले इंग्लैंड और 2010 में कैरेबियाई धरती पर वेस्टइंडीज भी अपनी मेजबानी का फायदा नहीं उठा पाए और सेमीफाइनल तक का सफर तय करने में नाकाम रहे। 2012 में पहली बार ऐसा लगा कि श्रीलंका इस ‘जिंक्स’ को तोड़ देगा। लंकाई टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन खिताबी मुकाबले में वेस्टइंडीज ने उन्हें 36 रनों से हराकर करोड़ों फैंस का दिल तोड़ दिया। श्रीलंका इकलौती ऐसी टीम बनी जो मेजबान होते हुए फाइनल तक का सफर तय कर सकी, लेकिन जीत वहां भी नसीब नहीं हुई।

    इसके बाद का इतिहास भी कमोबेश ऐसा ही रहा। 2014 में बांग्लादेश सुपर-10 से आगे नहीं बढ़ पाया, तो वहीं 2016 में जब भारत में टी20 वर्ल्ड कप हुआ, तब टीम इंडिया का सपना सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज ने ही चकनाचूर किया। 2021 में यूएई और ओमान ग्रुप स्टेज से बाहर हुए, और 2022 के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया अपने ही घर में सुपर-12 की बाधा पार नहीं कर सके। यहां तक कि 2024 में यूएसए और वेस्टइंडीज की संयुक्त मेजबानी भी इस सिलसिले को नहीं बदल सकी; भारत ने वहां खिताब जीता लेकिन दोनों मेजबान सुपर-8 में ही सिमट गए।

    अब सवाल 2026 का है। श्रीलंका की विदाई ने यह साफ कर दिया है कि घरेलू परिस्थितियों का दबाव कभी-कभी प्रतिभा पर भारी पड़ जाता है। भारत के पास दुनिया की सबसे मजबूत टीम और आईपीएल जैसा अनुभव है, लेकिन आंकड़ों का यह भूत रह-रहकर डरा रहा है। क्या रोहित ब्रिगेड या टीम इंडिया की नई पीढ़ी उस मानसिक दीवार को गिरा पाएगी जिसे पिछले 9 एडिशन में कोई पार नहीं कर पाया? क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, लेकिन ‘मेजबानी की पनौती’ एक ऐसा कड़वा सच बन चुका है जिसे झुठलाने के लिए भारत को न केवल विरोधी टीमों से, बल्कि इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड से भी लड़ना होगा।