आज का पंचांग: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर गणेश उपासना का विशेष योग…


नई दिल्ली।आज गुरुवार 5 फरवरी 2026, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी तिथि है। यह दिन भगवान गणेश की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत और रात्रि में चंद्र दर्शन से बुद्धि, विवेक और जीवन की बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गुरुवार है, जो देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। गुरु के प्रभाव से आज ज्ञान, शिक्षा, सलाह और सम्मान से जुड़े कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना रहती है।

तिथि, योग और करण:
पंचांग के अनुसार, आज कृष्ण चतुर्थी तिथि रात्रि 12:22 बजे (6 फरवरी) तक रहेगी। सुकर्मा योग रात्रि 12:04 बजे तक प्रभावी रहेगा। करण की बात करें तो दोपहर 12:10 बजे तक बव करण और इसके बाद बालव करण रहेगा।

सूर्य-चंद्र की स्थिति:
सूर्योदय प्रातः 7:07 बजे और सूर्यास्त सायं 6:03 बजे होगा। चंद्रोदय रात 9:35 बजे तथा चंद्रास्त सुबह 9:05 बजे होगा। व्रती चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करेंगे।

नक्षत्र और ग्रह स्थिति:
आज चंद्रमा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जो रात्रि 10:57 बजे तक रहेगा। यह नक्षत्र दान, सेवा और सामाजिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। ग्रहों की स्थिति के अनुसार सूर्य, मंगल और शुक्र मकर राशि में हैं, जबकि चंद्रमा कन्या राशि में स्थित है। गुरु मिथुन, शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं।

शुभ और अशुभ समय:
आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:57 बजे तक रहेगा, जो संपत्ति, निवेश और प्रशासनिक कार्यों के लिए अनुकूल है। वहीं राहुकाल दोपहर 1:57 से 3:19 बजे तक रहेगा, इस दौरान शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

द्विजप्रिय संकष्टी का धार्मिक महत्व:
इस दिन भगवान गणेश को दूर्वा, लाल पुष्प, सिंदूर और मोदक अर्पित करने का विधान है। यह व्रत पारिवारिक बाधाओं को दूर करता है और जीवन में स्थिरता लाता है। ब्राह्मण सेवा और दान का आज विशेष महत्व है।यह पंचांग धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत निर्णय हेतु विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।