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  • ईरान के लिए ‘परमाणु हथियार’ जैसा है होर्मुज, पूर्व अमेरिकी जनरल ने बताया-इसे खोलना क्यों आसान नहीं

    ईरान के लिए ‘परमाणु हथियार’ जैसा है होर्मुज, पूर्व अमेरिकी जनरल ने बताया-इसे खोलना क्यों आसान नहीं

    तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब बातचीत के दौर में पहुंच चुका है, लेकिन Strait of Hormuz को लेकर हालात अब भी बेहद जटिल बने हुए हैं। Iran ने इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण सख्त कर रखा है, जबकि United States ने ईरानी जहाजों के खिलाफ नाकाबंदी कर दी है।

    इस बीच पूर्व अमेरिकी जनरल और नाटो के सुप्रीम अलाइड कमांडर रह चुके Wesley Clark ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जबरन होर्मुज को खोलने की कोशिश करता है, तो यह उसके लिए बेहद महंगा और लंबा सैन्य अभियान साबित हो सकता है।

    CNN से बातचीत में क्लार्क ने कहा कि मौजूदा हालात 1980 के दशक के “टैंकर युद्ध” से बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने साफ किया कि आज का ईरान पहले से कहीं ज्यादा तैयार और रणनीतिक रूप से मजबूत है। ऐसे में किसी भी सैन्य कार्रवाई की कीमत बहुत भारी हो सकती है।

    ‘ईरान का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है होर्मुज’

    क्लार्क ने होर्मुज की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि यह तेहरान के लिए किसी परमाणु बम से कम नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग का इस्तेमाल केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक दबाव के तौर पर भी कर रहा है।

    उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के सामने कई तरह के खतरे मौजूद हैं-समुद्री बारूदी सुरंगें, तेज रफ्तार हमलावर नौकाएं, मिसाइलें और आधुनिक ड्रोन। ये सभी मिलकर किसी भी ऑपरेशन को बेहद जोखिमभरा बना देते हैं।

    ‘किले में तब्दील हो चुका है यह रास्ता’

    क्लार्क के अनुसार, ईरान ने दशकों में होर्मुज को एक किलेबंद क्षेत्र में बदल दिया है। संकरे समुद्री मार्ग और आसपास की पहाड़ियों का फायदा उठाते हुए ईरानी सेना यहां हर गतिविधि पर नजर रख सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को उन्नत तकनीकी सहयोग, खासकर China से, उसकी सैन्य क्षमता को और मजबूत बनाता है।

    खोलना ही नहीं, सुरक्षित रखना भी चुनौती

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका किसी तरह इस समुद्री मार्ग को खोल भी ले, तब भी इसे सुरक्षित बनाए रखना आसान नहीं होगा। हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि ईरान ने सीमित हमलों के जरिए ही व्यापारिक जहाजों पर दबाव बना दिया, जिसके बाद कई जहाजों ने खुद ही उसके साथ तालमेल बैठा लिया।

    असल चुनौती यही है कि जब तक ईरान की सहमति न हो, तब तक Strait of Hormuz को पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू रूप से चालू रखना लगभग असंभव माना जा रहा है।

  • ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर

    ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर


    नई दिल्ली।
    इंटरनेशनल मार्केट (International Market) में क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में उथल-पुथल मची हुई है. एक द‍िन पहले ज‍िस क्रूड के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही थी, अगले द‍िन उसी में तेजी देखी जा रही है. दो द‍िन पहले की ही बात है जब ईरान ने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को कमर्श‍ियल श‍िप के लि‍ए पूरी तरह खोल द‍िया गया है. इसके बाद क्रूड के दाम 9 प्रत‍िशत तक टूट गए. लेक‍िन डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump.) की तरफ से जब यह बयान आया क‍ि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी झंडे वाला कार्गो जहाज को जब्‍त कर ल‍िया है. इसके बाद तेल की कीमत में तेजी देखी गई. अब फ‍िर क्रूड ऑयल के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही है।

    मंगलवार सुबह क्रूड ऑयल के दाम में फ‍िर से ग‍िरावट देखी जा रही है. WTI क्रूड के रेट में 0.87 डॉलर प्रत‍ि बैरल की ग‍िरावट देखी गई और यह 86.63 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह टूटकर 95.09 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद सीजफायर के बीच क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है. आने वाले समय में तेल की कीमत में अस्थिरता बनी रहने उम्मीद है. होर्मुज बंद होने के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन टूट चुकी है. दुन‍ियाभर के ऑयल मार्केट का 20 फीसदी इसी रास्ते से होकर गुजरता है।


    ट्रंप ने दी चेतावनी

    इससे पहले अमेर‍िका और ईरान की पाक‍िस्‍तान में सोमवार को होने वाली बातचीत से ईरान ने यह कहकर क‍िनारा कर ल‍िया क‍ि यूएस की लगातार बढ़ती मांगों और धमकी के आगे वह नहीं झुकेगा. इसके बाद दोनों देशों का तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है. दोनों पक्षों के बीच 8 अप्रैल को शुरू हुआ सीजफायद 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है. ईरान के बातचीत से क‍िनारा क‍िये जाने से नाराज ट्रंप ने कहा कि यद‍ि सीजफायर बिना किसी समझौते के मंगलवार शाम को खत्म हो जाता है तो फिर बहुत सारे बम फटने लगेंगे।


    भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल का हाल

    क्रूड के दाम में उठा-पटक का असर सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल के रेट पर देखा जाता है. प‍िछले द‍िनों क्रूड के दाम में तेजी आई तो तेल कंपन‍ियों के प्रॉफ‍िट पर सीधा असर पड़ा. इसे मैनेज करने के लि‍ए सरकार ने आम आदमी को राहत देते हुए एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती कर तेल कंपन‍ियों के दबाव को कम क‍िया. अगर क्रूड के दाम लंबे समय तक 100 डॉलर के आसपास बने रहे तो इसका असर आम आदमी पर देखने को म‍िल सकता है।


    पेट्रोल-डीजल के रेट

    > दिल्ली : पेट्रोल 94.77, डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर
    > मुंबई: पेट्रोल 103.54, डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर
    > चेन्नई: पेट्रोल 100.84, डीजल 92.48 रुपये प्रति लीटर
    > कोलकाता: पेट्रोल 105.45, डीजल 91.81 रुपये प्रति लीटर

  • होर्मुज को लेकर अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता ईरान… ट्रंप ने दी चेतावनी

    होर्मुज को लेकर अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता ईरान… ट्रंप ने दी चेतावनी


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान (Iran) को चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता। बता दें, शुक्रवार को लेबनान (Lebanon.) में हुए सीजफायर का स्वागत करते हुए ईरान (Iran) ने होर्मुज पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया था। हालांकि, जब ट्रंप होर्मुज के पास लगे अमेरिकी ब्लाकेड को हटाने से इनकार कर दिया, तो शनिवार को ईरान ने फिर से होर्मुज के दरवाजे बंद कर दिए।

    होर्मुज पर बदलते हालात पर ट्रंप ने शनिवार को ओवेल ऑफिस में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “हम उनसे बात कर रहे हैं। वे स्ट्रेट को फिर से बंद करना चाहते हैं। जैसा कि वे वर्षों से करते आ रहे हैं और वे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते।”

    इससे पहले ईरानी सेना की कमांड ने एक होर्मुज पर अमेरिकी कमांड को वादाखिलाफी बताया। ईरान की तरफ से कहा गया कि ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी ब्लाकेड को न हटाकर अमेरिका ने अपना वादा तोड़ा है। बयान में आगे कहा गया, “जब तक अमेरिका ईरान आने वाले सभी जहाजों के लिए आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल नहीं करता, होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सख्त नियंत्रण में रहेगी।”

    शनिवार सुबह होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को अपने देश और दुनिया के सामने रखते हुए ईरानी सरकारी टीवी ने बताया कि होर्मुज पर वापस नियंत्रण हासिल कर लिया गया है। ईरान की तरफ से होर्मुज पर नियंत्रण हासिल करने के प्रयास में ही दो भारतीय तेल टैंकरों के ऊपर गोलीबारी की खबर सामने आई है। इस घटना को लेकर सरकार ने ईरानी राजदूत को भी समन किया है।

    बता दें, 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हमले के बाद शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट ने पूरे विश्व को ऊर्जा संकट में धकेल दिया है। हमले के कुछ दिन बाद ही ईरान ने होर्मुज के ऊपर प्रतिबंध लगा दिया, जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। पांच हफ्तों की लड़ाई के बाद अमेरिका और ईरान ने सीजफायर की घोषणा कर दी, लेकिन इजरायल ने लेबनान पर हमला करना जारी रखा। इसकी वजह से ईरान ने होर्मुज को खोलने से इनकार कर दिया। अमेरिकी और ईरान के बीच हुई वार्ता के बाद इजरायल ने भी लेबनान के साथ सीजफायर का ऐलान कर दिया। इसके बाद ईरान ने शुक्रवार को सीजफायर की अवधि तक होर्मुज के रास्ते व्यापारिक जहाजों के लिए खोल दिए। लेकिन फिर ट्रंप के बायन के बाद व्यवस्था बिगड़ गई।

  • US-ईरान आज युद्धविराम को लेकर इस्लाबाद में होंगे आमने-सामने, ट्रंप बोले- अपने आप खुल जाएगा होर्मुज

    US-ईरान आज युद्धविराम को लेकर इस्लाबाद में होंगे आमने-सामने, ट्रंप बोले- अपने आप खुल जाएगा होर्मुज


    वाशिंगटन।
    दुनिया इस वक्त सांसें थामकर पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad.) की ओर देख रही है, जहां अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच युद्धविराम को एक स्थायी शांति समझौते (Ceasefire Permanent Peace Agreement) में बदलने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। हालांकि, बातचीत की मेज सजने से पहले ही बयानों की तल्खी और जमीन पर जारी हिंसा ने इस मिशन को ‘करो या मरो’ की स्थिति में ला खड़ा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने जहां विश्वास जताया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बहुत जल्द अपने आप खुल जाएगा, वहीं ईरान ने अपनी पूर्व शर्तों पर अड़कर कूटनीतिक पेच फंसा दिया है।

    वाशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब पूछा गया कि उनके लिए एक अच्छा समझौता क्या होगा तो उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया, “कोई परमाणु हथियार नहीं। बस, 99% समझौता यही है।”

    ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा संकट की सबसे बड़ी वजह बने स्ट्रेट हॉर्मुज पर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा, “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अपने आप खुल जाएगा। हम इसे बहुत जल्द खोल देंगे।” ट्रंप का यह बयान उन वैश्विक बाजारों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है जो तेल की आपूर्ति रुकने से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।


    इस्लामाबाद में आमने-सामने

    शुक्रवार को ईरानी संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच गया। दूसरी ओर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने के लिए पाकिस्तान के रास्ते में हैं।


    ईरान की शर्तें, अमेरिका की चेतावनी

    ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब अमेरिका लेबनान में इजराइली हमलों को रुकवाएगा और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को बहाल करेगा। जेडी वेंस ने इस्लामाबाद पहुंचने से पहले ही तेहरान को चेतावनी दी है कि वह वाशिंगटन के साथ खेलने की कोशिश न करे।

    पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कहा, “अस्थायी युद्धविराम तो हो गया, लेकिन अब असली चुनौती इसे स्थायी शांति में बदलने की है। यह बातचीत का वह चरण है जिसे ‘मेक ऑर ब्रेक’ कहा जाता है।”


    शांति वार्ता के बीच 357 मौतें

    एक तरफ इस्लामाबाद में शांति की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ लेबनान में इजराइली हवाई हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुक्रवार को दक्षिणी शहर नबातीह में एक हमले में लेबनान के 13 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बुधवार से जारी बड़े हमलों में मरने वालों की संख्या 357 तक पहुंच गई है, जबकि 1,223 लोग घायल हुए हैं। हिंसा का यह दौर ईरान के लिए वार्ता की मेज पर सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।


    क्या ईरान वाकई खत्म हो चुका है?

    ट्रंप प्रशासन लगातार दावा कर रहा है कि हफ्तों तक चले युद्ध में ईरानी सैन्य क्षमता पूरी तरह तबाह हो चुकी है। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के 13,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसमें उसकी वायु सेना और हथियार फैक्ट्रियां शामिल हैं। हालांकि, स्वतंत्र डेटा और जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

    अमेरिकी ग्रुप ACLED के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद से बुधवार तक ईरानी हमलों की रफ्तार में कोई बड़ी कमी नहीं आई है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही ईरान को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन वह अब भी जवाबी हमला करने या अपना बचाव करने की क्षमता रखता है।

  • शांति वार्ता से पहले ट्रंप का बड़ा बयान… बोले- डील हो या न हो, होर्मुज का खुलना तय

    शांति वार्ता से पहले ट्रंप का बड़ा बयान… बोले- डील हो या न हो, होर्मुज का खुलना तय


    वाशिंगटन।
    इस्लामाबाद (Islamabad.) में होने जा रही पाकिस्तान और अमेरिका (Pakistan and America) के बीच शांति वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump.) ने कहा है कि किसी भी कीमत पर होर्मुज (Hormuz.) को खुलवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि युद्धविराम को लेकर सहमति बने या ना बने, होर्मुज का खुलना तय है। डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कहते रहे हैं कि ईरान पर हमला करके उन्होंने अपने उद्देश्यों की पूर्ति कर ली है और अब उनका टार्गेट होर्मुज खुलवाना है। बता दें कि होर्मुज बंद होने की वजह से दुनिया के ज्यादातर देश बुरी तरह प्रभावित हैं। दुनिया का 20 फीसदी तेल व्यापार इसी समुद्री रास्ते से होता है।

    ट्रंप ने कहा, हमारी जीत हुई है और अब हम खाड़ी का यह रास्ता खोलने जा रहे हैं। इसके लिए कोई डील जरूरी नहीं है। ईरान को लेकर ट्रंप ने कहा, उनकी नौसेना चली गई, वायुसेना चली गई, बड़े नेता चले गए, अब उनके पास बचा ही क्या है। इस्लामाबाद के लिए रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, अगर ईरानी अच्छी भावना के साथ बात करने को तैया हैं तो हम भी उनका स्वागत करते हैं। अगर वे हमारे साथ कोई खेल खेलना चाहते हैं तो उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी।


    ईरान की तरफ से प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन

    ईरान की तरफ से बातचीत के लिए संसद के स्पीकर मोहम्मद बकर कलीबाफ और उनके साथ विदश मंत्री सैयद अब्बास अरागची, रधक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदियान और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुलनासिर हेम्माती इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। कलीबाफ ने कहा कि दोनों तरफ से दो वादे अभी पूरे नहीं हुए हैं। उनके पूरे होने के बाद ही बातचीत शुरू होगी।

    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरानी ‘आज इसलिए ज़िंदा हैं क्योंकि बातचीत हो रही है।’ उन्होंने कहा कि ईरानियों को शायद यह एहसास नहीं है कि उनके पास दुनिया से थोड़े समय के लिए ज़बरदस्ती वसूली करने के अलावा कोई और दांव नहीं है; यह वसूली वे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके करते हैं। इसके ज़रिए उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान के रणनीतिक नियंत्रण की ओर इशारा किया।

    उन्होंने ईरान पर तंज कसते हुए कहा कि वे (ईरानी) लड़ने के मुकाबले फेक न्यूज़ मीडिया और जनसंपर्क को संभालने में ज़्यादा माहिर हैं। ट्रंप की ये टिप्पणियाँ उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तब आईं, जब उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचा। ईरान ने अभी तक बातचीत के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा है।

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इस्लामाबाद रवाना होने से पहले कहा कि अगर ईरान ‘सद्भावना’ से काम करता है, तो वे उसके साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान “हमें बेवकूफ़ बनाने” की कोशिश करता है, तो अमेरिका इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने ज़ोर देकर कहा कि कोई भी बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में संघर्ष-विराम होना ज़रूरी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि वे लेबनान के साथ जल्द से जल्द बातचीत करने के लिए तैयार हैं।

  • ट्रंप ने खोली पाकिस्तान के दावे की पोल, शहबाज शरीफ के बयान पर उठे सवाल

    ट्रंप ने खोली पाकिस्तान के दावे की पोल, शहबाज शरीफ के बयान पर उठे सवाल


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम को लेकर पाकिस्तान के दावों पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि इस समझौते में लेबनान शामिल नहीं था जिससे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है।

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में कहा कि सीजफायर समझौते में लेबनान शामिल नहीं था। उन्होंने इसे गलतफहमी बताते हुए कहा कि संभवतः ईरान ने इसे अलग तरह से समझा। वेंस के मुताबिक यह युद्धविराम अमेरिका ईरान और उनके सहयोगियों जैसे इजरायल और अरब देशों पर केंद्रित है न कि लेबनान पर।

    ट्रंप ने भी किया इनकार

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्पष्ट कहा कि लेबनान को समझौते में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि इसकी वजह हिज्बुल्लाह है और वहां की स्थिति अलग तरह की झड़प का हिस्सा है।

    शहबाज शरीफ के बयान से बढ़ा विवाद

    इससे पहले शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि ईरान अमेरिका और उनके सहयोगी लेबनान समेत सभी क्षेत्रों में तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए दोनों पक्षों को इस्लामाबाद में आगे की वार्ता के लिए आमंत्रित भी किया था। उनके इस बयान के बाद अब अमेरिका के स्पष्ट रुख से पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।

    इजरायल पहले ही कर चुका था साफ इनकार

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही कह चुके थे कि यह युद्धविराम लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई पर लागू नहीं होगा। सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान में हमले भी जारी रखे। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम 89 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए। इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई हिज्बुल्लाह के खिलाफ जारी रहेगी।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बंद बढ़ा तनाव
    लेबनान में हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया जिसे लेकर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है और यह आशंका पैदा हो गई है कि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम आगे टिक पाएगा या नहीं।

  • 48 घंटे में खोलो होर्मुज स्ट्रेट, डेडलाइन पार हुई बरपेगा कहर… ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी

    48 घंटे में खोलो होर्मुज स्ट्रेट, डेडलाइन पार हुई बरपेगा कहर… ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी


    वाशिंगटन।
    मिडिल ईस्ट (Middle East.) में तनाव चरम पर है. ईरान और अमेरिका (America) के बीच को भी पीछे हटने या झुकने को तैयार नहीं है. सीजफायर की कोशिशों के बीच लगातार हमले जारी है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खोलने की तय समय सीमा का पालन नहीं किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आक्रामक अंदाज में लिखा कि समय तेजी से खत्म हो रहा है. ईरान को समझौते और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए पहले ही समय दिया गया था, लेकिन अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं. यदि ये डेडलाइन पार हुई, तो ईरान पर अमेरिका कहर बनकर टूटेगा. हैरानी की बात ये है कि कुछ दिन पहले तक ट्रंप का रुख अपेक्षाकृत नरम दिखाई दे रहा था।

    उन्होंने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर उम्मीद जताई थी और समय सीमा को 10 दिन तक बढ़ाते हुए 6 अप्रैल तक का वक्त दिया था. यह कदम संकेत दे रहा था कि वाशिंगटन अभी भी कूटनीतिक रास्ता खुला रखना चाहता है. लेकिन अब उनके तेवर बदल चुके हैं. उन्होंने साफ संदेश दे दिया है कि धैर्य की सीमा खत्म होने के करीब है. इसके बाद भीषण हमले किए जाएंगे।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. इससे अमेरिका मुद्दे को सिर्फ क्षेत्रीय विवाद के तौर पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता से जुड़ा मामला मानता है.

    ट्रंप की बातों से साफ है कि अब यह मामला सिर्फ कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रहा. 48 घंटे की चेतावनी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिन बेहद अहम होने वाले हैं. ईरान की ओर से अभी तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जिस तरह से हालात तेजी से बदल रहे हैं, उससे दोनों देशों के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंच सकता है।

    28 फरवरी को जब डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का आगाज किया तब उनके इरादे बिल्कुल साफ थे. दोनों ईरान की मिसाइल शक्ति को मिट्टी में मिलाना चाहते थे. उसके परमाणु ख्वाबों पर हमेशा के लिए ताला जड़ना चाहते थे. लेकिन युद्ध के पांचवें हफ्ते तक आते-आते अमेरिकी प्रशासन के ये लक्ष्य किसी पहेली की तरह उलझ गए हैं।

    कभी ट्रंप आक्रामकता की बात करते हैं, तो कभी अपने ही पुराने बयानों का खंडन कर दुनिया को हैरत में डाल देते हैं. इस टकराव का सबसे विचित्र पहलू ट्रंप के विरोधाभासी बयान रहे हैं. युद्ध के शुरुआती हफ्तों में उन्होंने बड़े आत्मविश्वास से कहा था कि इस लड़ाई का तेल से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन कुछ ही समय बाद उनके सुर बदल गए. अब ईरान के तेल पर कब्जे की बात करते हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट पर भी वॉशिंगटन का रुख डगमगाता दिखता है. पहले ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के हटने पर दूसरे देश इसे खोल सकते हैं, लेकिन महज कुछ ही दिनों में उन्होंने जोर देकर कहा कि वो आसानी से खुद संभाल सकते हैं. कभी वे जंग खत्म होने का ऐलान करते हैं, तो कभी बुनियादी ढांचे पर हफ्तों तक बमबारी की चेतावनी देते हैं. यह अनिश्चितता वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का सबब बन गई है।

  • ट्रंप ने ईरान युद्ध के बीच फोड़ा टैरिफ बम… दवाओं पर 100, स्टील-एल्यूमीनियम पर 50 शुल्क का ऐलान

    ट्रंप ने ईरान युद्ध के बीच फोड़ा टैरिफ बम… दवाओं पर 100, स्टील-एल्यूमीनियम पर 50 शुल्क का ऐलान


    वॉशिंगटन।
    ईरान युद्ध (Iran War) के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने गुरुवार को अपनी “अमेरिका फर्स्ट” वाली आर्थिक नीति को और अधिक कड़ा करते हुए स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और विदेशी दवाओं पर नए आयात शुल्क नियमों की घोषणा की है। इन बदलावों का उद्देश्य न केवल आयात प्रक्रिया को सरल बनाना है, बल्कि विदेशी दवा कंपनियों और धातु निर्यातकों पर दबाव डालना है ताकि वे अपनी निर्माण यूनिट अमेरिका में स्थापित करें।

    ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 232 के तहत स्टील, एल्युमीनियम और तांबे के आयात पर 50% का आयात शुल्क बरकरार रखा है। हालांकि, अब इसे गणना करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यह शुल्क आयातित वस्तु के उस मूल्य पर लगेगा जो अमेरिकी ग्राहक भुगतान करते हैं, न कि केवल धातु की मात्रा पर।

    ट्रंप ने क्यों लगाए नए टैरिफ?
    इस बदलाव के पीछे का मुख्य कारण ‘अंडर-रिपोर्टिंग’ को रोकना है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कई आयातक शुल्क कम करने के लिए कृत्रिम रूप से आयात मूल्य को कम दिखाते थे। नया नियम इस विसंगति को दूर करेगा।

    यदि किसी उत्पाद में धातु का वजन 15% से कम है, तो उस पर से 50% का पिछला शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया है। 15% से अधिक धातु सामग्री वाले भारी मशीनों, वाशिंग मशीन या गैस स्टोव जैसे उत्पादों पर अब धातु की मात्रा के बजाय पूरे उत्पाद के मूल्य पर 25% फ्लैट शुल्क लगेगा। विदेश में बने लेकिन पूरी तरह से अमेरिकी स्टील या तांबे से निर्मित उत्पादों पर रियायती दर से केवल 10% शुल्क लगेगा। बिजली ग्रिड और औद्योगिक उपकरणों के लिए टैरिफ को 50% से घटाकर 15% कर दिया गया है, ताकि अमेरिका में बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लाई जा सके।

    विदेशी दवाओं पर 100% तक शुल्क
    ट्रंप ने दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से एक बड़ा दांव खेला है। कुछ खास आयातित दवाओं पर अब 100% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। यह नया नियम उन पेटेंट दवाओं पर लागू होगा जो उन देशों में बनती हैं जिनका अमेरिका के साथ कोई टैरिफ समझौता नहीं है। बड़ी दवा कंपनियों के लिए ये नियम 120 दिनों में लागू होंगे, जबकि छोटे निर्माताओं को 180 दिनों की मोहलत दी गई है। यह कदम सीधे तौर पर उन कंपनियों को टारगेट करता है जिन्होंने अमेरिका के साथ ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ मूल्य निर्धारण समझौता नहीं किया है।


    राजस्व में होगा इजाफा

    वाइट हाउस का मानना है कि पहले का टैरिफ ढांचा अत्यंत जटिल था, जिससे आयातकों को हर पुर्जे में धातु की मात्रा निर्धारित करने में सिरदर्द होता था। प्रशासन के अधिकारी ने कहा, “अब यह आसान, सरल और सीधा है। कई उत्पादों के लिए दरें कम होंगी, कुछ के लिए थोड़ी बढ़ेंगी, लेकिन कुल मिलाकर यह उद्योग के लिए अनुकूल है।” प्रशासन को उम्मीद है कि इस नए ढांचे से सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी क्योंकि अब शुल्क पूरे बिक्री मूल्य पर वसूला जाएगा।

    यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका पहले से ही ईरान के साथ युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों से जूझ रहा है। रक्षा सचिव द्वारा हाल ही में किए गए सैन्य फेरबदल और अब इन कड़े व्यापारिक नियमों से साफ है कि ट्रंप प्रशासन अपने दूसरे कार्यकाल में आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर एक आक्रामक और आत्मनिर्भर अमेरिका की छवि पेश करना चाहता है।

  • US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… जानिए क्या है इसकी वजह?

    US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… जानिए क्या है इसकी वजह?


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी (Attorney General Pam Bondi) की सराहना करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त और वफादार सहयोगी बताया। ट्रंप ने बताया कि पैम बॉन्डी निजी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। ट्रंप ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के रूप में पैम ने देशभर में अपराध पर कड़ा प्रहार किया। वहीं, डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है।


    टॉड ब्लैंच संभालेंगे कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल का जिम्मा

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा, ‘पैम बॉन्डी एक महान अमेरिकी देशभक्त और एक वफादार दोस्त हैं, जिन्होंने पिछले एक साल से मेरे अटॉर्नी जनरल के तौर पर पूरी निष्ठा से सेवा की है। पैम ने पूरे देश में अपराधों पर नकेल कसने का जबरदस्त काम किया है, जिसके चलते हत्याओं की दर 1900 के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। हम पैम से बहुत प्यार करते हैं, और वह अब निजी क्षेत्र में एक बेहद जरूरी और अहम नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। वहीं, हमारे डिप्टी अटॉर्नी जनरल जो कि एक बेहद प्रतिभाशाली और सम्मानित कानूनी विशेषज्ञ हैं, टॉड ब्लैंच, अब कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के तौर पर कार्यभार संभालेंगे।’


    विवादों भरा पैम बॉन्डी का कार्यकाल

    पैम बॉन्डी के कार्यकाल में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया और कई अनुभवी अधिकारियों ने खुद इस्तीफा दे दिया। इससे विभाग के अंदर अस्थिरता और तनाव का माहौल बन गया। सबसे बड़ा विवाद जेफरी एपस्टीन केस से जुड़ा रहा। जेफरी एपस्टीन के ट्रैफिकिंग मामले की फाइलों को लेकर बॉन्डी पर भारी दबाव था। उन्होंने पहले दावा किया था कि उनके पास एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट मौजूद है, लेकिन बाद में विभाग ने माना कि ऐसा कोई दस्तावेज है ही नहीं। इस मामले को लेकर उन्हें अपने ही समर्थकों की आलोचना झेलनी पड़ी।


    पैम बॉन्डी पर लगे कई आरोप

    बॉन्डी पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच शुरू कराई। इनमें जेरोम पॉवेल, लेटिशिया जेम्स, जेम्स कोमी और जॉन ब्रेनन जैसे नाम शामिल थे। हालांकि इन मामलों में से कई को अदालतों ने खारिज कर दिया, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल और बढ़ गए। डेमोक्रेट नेताओं ने बॉन्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने न्याय विभाग को बदले का हथियार बना दिया। वहीं खुद बॉन्डी का कहना था कि वह विभाग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए काम कर रही थीं और पिछली सरकार में हुई कथित गलतियों को सुधार रही थीं।

    ट्रंप के साथ उनका रिश्ता बेहद करीबी माना जाता था। वह खुले तौर पर ट्रंप का समर्थन करती थीं और कई बार सार्वजनिक मंचों पर उनकी तारीफ भी करती थीं। लेकिन समय के साथ ट्रंप खुद भी उनके काम से नाखुश दिखे, खासकर तब जब वह उनके राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई नहीं कर पाईं। बॉन्डी के हटने के साथ ही ट्रंप के शासन में न्याय विभाग में लगातार हो रहे बदलाव की एक और कड़ी जुड़ गई है। उनके दोनों कार्यकाल में कई अटॉर्नी जनरल या तो हटाए गए या इस्तीफा देने पर मजबूर हुए, जिससे यह साफ होता है कि इस पद पर स्थिरता बनाए रखना ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।


    राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल का शपथ

    बता दें एक दिन पहले बुधवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कोलिन मैकडॉनल्ड को राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ दिलाई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ लेने से पहले कोलिन मैकडॉनल्ड का परिचय कराते हुए कहा, ‘कोलिन जिन कामों को करेंगे, उनमें से एक यह पक्का करना है कि कोई भी धोखाधड़ी इतनी छोटी या इतनी बड़ी न हो कि उसे नजरअंदाज किया जा सके।’ राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल की शपथ लेने के बाद कोलिन मैकडॉनल्ड ने कहा, ‘मैं दिन-रात बिना थके काम करूंगा, ताकि यह पक्का कर सकूं कि अगर कोई आपके टैक्स के पैसे चुराने की हिम्मत करता है तो उस गलत फैसले के बाद उसे एक संघीय अभियोजक का सामना करना पड़े।’

  • ईरान युद्ध के बीच ट्रंप की धमकी… 4 साल से जंग लड़ रहा ये छोटा सा देश बन सकता है बलि का बकरा!

    ईरान युद्ध के बीच ट्रंप की धमकी… 4 साल से जंग लड़ रहा ये छोटा सा देश बन सकता है बलि का बकरा!


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) नाटो (NATO) समूह के अन्य साथी देशों पर बुरी तरह भड़के हुए हैं। ईरान युद्ध (Iran War) के बीच नाटो देशों ने अमेरिका को एक के बाद एक झटके दिए हैं जिससे ट्रंप खिसियाए हुए हैं और यह धमकी भी दी है कि अमेरिका खुद को नाटो से अलग कर लेगा। इस बीच अब खबर है कि इन सब का खामियाजा एक छोटे से देश को भुगतना पड़ सकता है। यह देश है यूक्रेन। बीते 4 सालों से खुद रूस के साथ जंग लड़ रहा यूक्रेन अब ईरान युद्ध में बलि का बकरा बन सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने के लिए ट्रंप यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई पर रोक लगाने की बात कर रहे हैं।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने हाल ही में यूक्रेन के लिए हथियारों की सप्लाई रोकने की धमकी दी है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप की इस धमकी का मकसद पश्चिमी देशों पर दबाव डालना है ताकि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के अमेरिका की मदद करें। विश्लेषकों के अनुसार, यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध के बीच नाटो सहयोगियों के लिए ट्रंप का यह बयान बेहद चिंता का विषय है।

    कई देशों ने दिया झटका
    ट्रंप की यह धमकी नाटो देशों से मिले झटके के बाद आई है। फ्रांस, स्पेन, इटली समेत कई देशों ने ट्रंप को करारा झटका देते हुए ट्रंप को अपने बेस इस्तेमाल करने देने से इनकार कर दिया है। वहीं कई पश्चिमी देशों ने ट्रंप के उस प्लान का हिस्सा बनने से भी इनकार दिया, जिसके तहत ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए एक गठबंधन बनाने का ऐलान किया था। यूरोपीय देशों ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया है कि यह उनकी लड़ाई नहीं है।

    बता दें कि ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्ग में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है और ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना रहा है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके बाद अब ट्रंप इस रास्ते को खुलवाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।

    नाटो को बताया ‘कागजी शेर’
    इसके बाद से ट्रंप नाटो देशों पर लगातार हमलवार हैं। ट्रंप ने टेलीग्राफ को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि वह उस नाटो सदस्यता को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने नाटो से संभावित अलगाव पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, “हां, यह अब इस पर विचार किया जा रहा है। कभी भी नाटो से प्रभावित नहीं रहा। मुझे हमेशा पता था कि यह एक ‘पेपर टाइगर’ है, और (रूस के राष्ट्रपति) व्लादिमीर पुतिन भी यह जानते हैं।”

    लंबे समय से की है आलोचना
    गौरतलब है कि ट्रंप लंबे समय से नाटो की आलोचना करते रहे हैं और इसे अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर बताते हुए कई बार इससे बाहर निकलने की चेतावनी दे चुके हैं। हालांकि अमेरिकी कानून के तहत नाटो से बाहर निकलने या सदस्यता निलंबित करने के लिए वाइट हाउस को सीनेट की “सलाह और सहमति” प्राप्त करनी होती है, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है।