Tag: Trump

  • ट्रंप के नए आयात टैरिफ पर बढ़ा विवाद, 20 से अधिक अमेरिकी राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

    ट्रंप के नए आयात टैरिफ पर बढ़ा विवाद, 20 से अधिक अमेरिकी राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) की नई वैश्विक आयात टैरिफ नीति को लेकर अमेरिका में बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। 20 से अधिक अमेरिकी राज्यों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया है। राज्यों का आरोप है कि राष्ट्रपति अपने अधिकारों से आगे बढ़कर आयात शुल्क लागू कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों और आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। इस मामले की सुनवाई United States Court of International Trade, न्यूयॉर्क में होगी।
    जानकारी के अनुसार, यह मुकदमा Oregon, Arizona, California और New York सहित कई डेमोक्रेटिक शासित राज्यों के अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर किया गया है। उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन कई देशों से आने वाले उत्पादों पर लगभग 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की योजना बना रहा है, जो कानून के दायरे से बाहर है।

    ट्रंप ने दी नीति की सफाई
    राष्ट्रपति Donald Trump का कहना है कि यह कदम अमेरिका के लंबे समय से जारी व्यापार घाटे को कम करने के लिए जरूरी है। उनके मुताबिक यह शुल्क Trade Act of 1974 की धारा 122 के तहत लगाया गया है। इस प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति अधिकतम 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगा सकते हैं और यह व्यवस्था पांच महीने तक लागू रह सकती है। आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाने का अधिकार कांग्रेस के पास होता है।

    राज्यों ने उठाए कानूनी सवाल
    मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का तर्क है कि इस धारा का इस्तेमाल केवल विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है, न कि विभिन्न देशों से आने वाले सामान पर व्यापक रूप से टैरिफ लगाने के लिए। राज्यों का कहना है कि इससे स्थानीय कारोबार, उद्योग और उपभोक्ताओं पर महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है।

    अदालत करेगी अंतिम फैसला
    मामले की सुनवाई न्यूयॉर्क स्थित United States Court of International Trade में होगी, जहां यह तय किया जाएगा कि ट्रंप का नया टैरिफ कानून के अनुरूप है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पिछले साल अदालत ने ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए कुछ टैरिफ को रद्द कर दिया था। इससे संकेत मिलता है कि न्यायपालिका राष्ट्रपति के व्यापार संबंधी फैसलों की समीक्षा कर सकती है।

  • टैरिफ विवाद पर ट्रंप का बड़ा झटका…. कोर्ट ने दिए रिफंड के आदेश, कहा- कंपनियों को लौटाएं पैसे

    टैरिफ विवाद पर ट्रंप का बड़ा झटका…. कोर्ट ने दिए रिफंड के आदेश, कहा- कंपनियों को लौटाएं पैसे


    न्यूयॉर्क।
    अमेरिका (America) में टैरिफ विवाद (Tariff Dispute) में बड़ा मोड़ आ गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (American Supreme Court) के फैसले के बाद अब न्यूयॉर्क की संघीय अदालत ने भी ट्रंप प्रशासन को झटका दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जिन कंपनियों ने ट्रंप सरकार की तरफ से लगाए गए आयात टैरिफ का भुगतान किया था, उन्हें अब पैसा वापस किया जाएगा। यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने कहा कि सभी आयातक कंपनियां यूएस सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का लाभ पाने की हकदार हैं, जिसमें पिछले महीने ट्रंप के कई टैरिफ को असंवैधानिक बताया गया था।

    फैसला सुनाते हुए यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में न्यायाधीश रिचर्ड ईटन ने कहा कि सभी आयातक रिकॉर्ड के मालिक इस फैसले का लाभ पाने के हकदार हैं। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय के बाद आया, जिसमें अमेरिकी टैरिफ को अवैध बताते हुए कहा गया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1977 की अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के तहत लगाए गए टैरिफ संविधान के खिलाफ हैं।


    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एक नजर

    इतना ही नहीं अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जोड़ा था कि राष्ट्रपति अकेले टैरिफ तय और बदल नहीं सकते, क्योंकि कर लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस का है। इस फैसले में पारस्परिक टैरिफ, जो लगभग सभी देशों पर लगाए गए थे, को भी अवैध घोषित किया गया।


    कंपनियों के रिफंड पर कोर्ट सख्त

    न्यायाधीश ईटन ने अपने फैसले में कहा कि वह अकेले आईईईपीए टैरिफ की वापसी के मामलों को सुनेंगे। इससे यह साफ हुआ कि कंपनियों को टैरिफ लौटाने की प्रक्रिया कैसे होगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इसका जिक्र नहीं किया। इसपर वकील रयान मेजरस ने कहा कि सरकार शायद इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी या वापसी की प्रक्रिया को रोकने के लिए समय मांगेगी।


    ट्रंप ने 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर इकट्ठा किए थे

    बता दें कि अमेरिका सरकार ने अब तक इन टैरिफ से 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर इकट्ठा किए थे। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को कुल 175 बिलियन डॉलर तक की वापसी करनी पड़ सकती है। ऐसे में यह फैसला विशेष रूप से एटमस निस्पंदन, नाशविल, टेनेसी की कंपनी के मामले पर आया है, जिसने टैरिफ की वापसी का दावा किया था। यह कंपनी फिल्टर्स और अन्य फिल्ट्रेशन प्रोडक्ट बनाती है।

    इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि जब कोई सामान अमेरिका में आता है, तो यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन उसका अंतिम हिसाब करती है, जिसे लिक्विडेशन कहते हैं। लिक्विडेशन के बाद आयातकों को 180 दिन का समय मिलता है, जिसके अंदर वे टैरिफ पर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद यह हिसाब कानूनी रूप से अंतिम माना जाता है।


    न्यायाधीश ने कस्टम्स को दिए ये निर्देश

    न्यायाधीश ने आगे आदेश दिया कि कस्टम्स उन टैरिफ को इकट्ठा करना बंद करें, जो सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित किए। और यदि कोई सामान पहले ही लिक्विडेशन प्रक्रिया से गुजर चुका है, तो उसका हिसाब बिना टैरिफ के फिर से किया जाएगा। कोर्ट के इस फैसले के बाद न्यूयॉर्क लॉ स्कूल के प्रोफेसर बैरी एप्पलटन ने कहा कि यह आयातकों और उपभोक्ताओं के लिए बहुत अच्छा फैसला है। इससे कस्टम्स ब्रोकरों की भी बहुत व्यस्तता बढ़ेगी और कोर्ट के लिए प्रक्रिया आसान होगी।


    पिछले सोमवार को भी संघीय अदालत ने दिया था फैसला

    गौरतलब है कि पिछले सोमवार को एक अन्य संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन की वापसी रोकने की कोशिश को खारिज कर दिया। इसके बाद अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने इसे न्यूयॉर्क ट्रेड कोर्ट में भेजा, ताकि वहां वापसी की अगली प्रक्रिया शुरू हो सके। अब यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन को यह तय करना होगा कि बड़ी मात्रा में टैरिफ की वापसी कैसे की जाए। वकील एलेक्सिस अर्ली के मुताबिक, “कस्टम्स आमतौर पर गलती होने पर टैरिफ लौटाते हैं, लेकिन उनका सिस्टम बड़े पैमाने पर वापसी के लिए नहीं बना है। यहां सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक प्रक्रिया की होगी।

  • ट्रंप ने अपने सबसे लंबे संबोधन में बोले 5 बड़े झूठ… US के मीडिया ने ही किया फैक्ट चेक

    ट्रंप ने अपने सबसे लंबे संबोधन में बोले 5 बड़े झूठ… US के मीडिया ने ही किया फैक्ट चेक


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन (State of the Union Address) में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है।


    अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा

    डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं।


    एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच

    अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं।


    बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।


    गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है।


    8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें

    अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं।
     

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन (State of the Union Address) में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है।


    अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा

    डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं।


    एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच

    अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं।


    बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।


    गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है।


    8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें

    अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं।

  • SC के झटके के बाद ट्रंप की नई वार्निंग… बोले- कोई खेल करेगा तो उप पर लगेगा पहले से ज्यादा टैरिफ

    SC के झटके के बाद ट्रंप की नई वार्निंग… बोले- कोई खेल करेगा तो उप पर लगेगा पहले से ज्यादा टैरिफ


    वाशिंगटन।
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने टैरिफ फैसले (Tariff decision) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की रोक के बाद सोमवार को अदालत पर तीखा हमला बोला। उन्होंने फैसले को ‘बेवकूफाना’ करार देते हुए दावा किया कि इस निर्णय ने अनजाने में उनकी शक्तियों को और मजबूत कर दिया है। इस दौरान ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ को लेकर कोई देश अगर खेल करने की कोशिश करेगा, तो उस पर पहले से ज्यादा टैरिफ लगाया जाएगा।

    दरअसल, 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA ) के तहत लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ अवैध हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन शक्तियों के नाम पर राष्ट्रपति कांग्रेस के कराधान अधिकार, यानी टैरिफ लगाने की शक्ति का उपयोग नहीं कर सकते। फैसले के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लंबी पोस्ट लिखकर अदालत को हास्यास्पद, मूर्खतापूर्ण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभाजनकारी बताया।


    ट्रुथ सोशल पर ट्रंप की प्रतिक्रिया

    ट्रंप ने लिखा कि वे लाइसेंस व्यवस्था का इस्तेमाल विदेशी देशों, खासकर उन देशों के खिलाफ ‘कड़े’ कदम उठाने के लिए कर सकते हैं, जो उनके अनुसार दशकों से अमेरिका का शोषण करते रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अदालत के फैसले से उनकी शक्तियां कैसे बढ़ गईं। उन्होंने यह भी कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का जिक्र छोटे अक्षरों में करेंगे, जो उनके अनुसार ‘पूर्ण अनादर’ का संकेत है।

    उनकी पोस्ट में लाइसेंस और शुल्क को लेकर भ्रम की स्थिति भी दिखी। अदालत ने कहा था कि राष्ट्रपति आर्थिक आपातकाल में व्यापारिक लाइसेंस जारी कर सकते हैं, लेकिन उन्हें टैरिफ के रूप में शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। ट्रंप ने शिकायत की कि वे देशों से लाइसेंस लेने को तो कह सकते हैं, लेकिन उनसे लाइसेंस शुल्क नहीं वसूल सकते, जबकि हर कोई लाइसेंस पर शुल्क लेता है।

    इस दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि अदालत ने अन्य कई टैरिफ को मंजूरी दी है, जिन्हें वे पहले से अधिक प्रभावी तरीके से लागू कर सकते हैं। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करते हुए केवल तीन न्यायाधीशों ( ब्रेट कावानॉ, क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल अलिटो ) की सराहना की, जिन्होंने असहमति जताई थी।


    जन्मजात नागरिकता पर भी हमला

    अदालत पर हमला करते हुए ट्रंप ने जन्मजात नागरिकता के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि 14वां संशोधन ‘गुलामों के बच्चों’ के लिए नहीं लिखा गया था। जबकि संविधान का यही संशोधन कहता है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति, जो अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन है, नागरिक माना जाएगा।

    पिछले वर्ष ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर अवैध प्रवासियों या अस्थायी वीजा पर रहने वालों के बच्चों को जन्मजात नागरिकता से बाहर करने की कोशिश की थी। उनका तर्क था कि गृहयुद्ध के बाद जो संशोधन लाया गया, उसका उद्देश्य केवल मुक्त गुलामों के बच्चों को नागरिकता देना था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन समेत कुछ देश गर्भवती महिलाओं को अमेरिका भेजकर इस प्रावधान का ‘दुरुपयोग’ करते हैं।


    टैरिफ बढ़ाने की घोषणा

    शनिवार को अदालत द्वारा टैरिफ को 10 प्रतिशत तक सीमित करने के फैसले के बाद ट्रंप ने घोषणा की कि वे इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह कानूनी और अनुमत है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले महीनों में उनका प्रशासन नए और कानूनी रूप से वैध टैरिफ लागू करेगा, ताकि ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ की प्रक्रिया जारी रखी जा सकें।

  • टैरिफ पर ट्रंप को SC के बड़े झटके के बाद अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील…. अब नए सिरे से होगी चर्चा

    टैरिफ पर ट्रंप को SC के बड़े झटके के बाद अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील…. अब नए सिरे से होगी चर्चा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से टैरिफ (Tariff) को लेकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को करारा झटका लगने के बाद भारत (India) के साथ व्यापार समझौते (Trade Agreements) को अंतिम रूप देने के लिए प्रस्तावित बैठक को भी नए सिरे से तय करने का फैसला किया गया है। भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए वाशिंगटन में अपने मुख्य वार्ताकारों की प्रस्तावित बैठक को नए सिरे से तय करने का फैसला किया है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।


    फिर से तय की जाएगी तारीख

    भारतीय दल 23 फरवरी से तीन दिन की बैठक शुरू करने वाला था। वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव दर्पण जैन इस समझौते के लिए भारत के लिए मुख्य वार्ताकार हैं। एक सूत्र ने कहा, ”भारत-अमेरिका व्यापार करार के लिए भारतीय वार्ताकारों की अमेरिका यात्रा के संदर्भ में दोनों पक्षों का मानना है कि अब यह बैठक तब होनी चाहिए जबकि दोनों पक्ष ताजा घटनाक्रमों और उसके प्रभाव का आकलन कर लें। इसके लिए दोनों पक्षों को समय चाहिए। अब इस बैठक की तारीख दोनों पक्षों की सुविधा के हिसाब से नए सिरे से तय की जाएगी।’

    डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के पहले के बड़े शुल्क के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण हो जाता है। ट्रंप ने शुक्रवार को भारत समेत सभी देशों पर 24 फरवरी से 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लगाया था। हालांकि, शनिवार को उन्होंने शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की।

    ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उनके आर्थिक एजेंडा को एक बड़ा झटका देते हुए अमेरिकी शीर्ष अदालत ने उनके द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों पर लगाए गए शुल्कों को गैरकानूनी करार दिया है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक अधिकार कानून (आईईईपीए) का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है। अमेरिका ने अगस्त, 2025 में भारत पर 25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाया था। बाद में, रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया। इससे भारत पर कुल शुल्क दर 50 प्रतिशत हो गई थी।


    15 फीसदी किया टैरिफ

    भारत और अमेरिका इस महीने की शुरुआत में एक अंतरिम व्यापार करार को अंतिम रूप देने के लिए रूपरेखा पर सहमत हुए। इसके तहत अमेरिका शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। साथ ही रूस से तेल खरीद के लिए लगाए गए 25 प्रतिशत के अतिरिक्त शुल्क को भी हटाएगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने फिर से इन शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का ऐलान किया है। अगर यह शुल्क अधिसूचित होता है, तो यह अमेरिका में मौजूदा एमएफएन या आयात शुल्क के अलावा होगा।

    उदाहरण के लिए, अगर किसी उत्पाद पर पांच प्रतिशत एमएफएन शुल्क लगता है, तो 15 प्रतिशत और जोड़कर यह 20 प्रतिशत हो जाएगा। हालांकि, इस बारे में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है कि 150 दिन के समय के बाद भारत जैसे देशों पर अमेरिकी शुल्क क्या होगा। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत और आयात में 6.22 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2024-25 में, दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर था।

  • US: जेपीमॉर्गन ने 6 जनवरी 2021 के बाद बंद कर दिए थे ट्रंप के खाते… कोर्ट में बैंक ने पहली बार स्वीकारा

    US: जेपीमॉर्गन ने 6 जनवरी 2021 के बाद बंद कर दिए थे ट्रंप के खाते… कोर्ट में बैंक ने पहली बार स्वीकारा


    वॉशिंगटन।
    छह जनवरी 2021 को अमेरिकी कैपिटल (American Capitol) पर हुए हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप (President Trump) के बैंक खातों को बंद किए जाने का मामला फिर चर्चा में है। जेपीमॉर्गन चेज (JPMorgan Chase) ने पहली बार अदालत में स्वीकार किया है कि फरवरी 2021 में ट्रंप और उनकी कुछ कंपनियों के खाते बंद किए गए थे। यह स्वीकारोक्ति उस मुकदमे के दौरान सामने आई है जिसमें ट्रंप ने बैंक और उसके प्रमुख जेमी डाइमोन पर 5 अरब डॉलर का दावा ठोका है। ट्रंप का आरोप है कि उनके खाते राजनीतिक कारणों से बंद किए गए, जिससे उनके कारोबार को नुकसान हुआ।

    दायर हलफनामे में बैंक के पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डैन विल्कनिंग ने लिखा कि फरवरी 2021 में निजी बैंक और कमर्शियल बैंक से जुड़े कुछ खाते बंद करने की सूचना दी गई थी। अब तक बैंक केवल सामान्य तौर पर खाते बंद करने की नीतियों पर बात करता रहा था, लेकिन यह पहली बार है जब उसने सीधे तौर पर ट्रंप के खातों के बंद होने की पुष्टि की है। बैंक ने पहले कहा था कि यह मुकदमा बेबुनियाद है।


    ट्रंप ने क्या आरोप लगाए

    ट्रंप ने यह मुकदमा पहले फ्लोरिडा की अदालत में दायर किया था, जहां अब उनका मुख्य निवास है। उनका कहना है कि बैंक ने ‘ट्रेड लाइबल’ किया और फ्लोरिडा के अनुचित और भ्रामक व्यापार कानून का उल्लंघन किया। मुकदमे में आरोप है कि जब खाते बंद किए जा रहे थे, तब ट्रंप ने जेमी डाइमोन से व्यक्तिगत रूप से बात की थी और उन्होंने मामले को देखने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    ट्रंप के वकीलों ने आरोप लगाया है कि बैंक ने राष्ट्रपति और उनकी कंपनियों को एक ‘ब्लैकलिस्ट’ में डाल दिया। उनका कहना है कि इस सूची का उपयोग अन्य बैंक भी करते हैं। इससे भविष्य में नए खाते खोलने या सेवाएं लेने में दिक्कत आती है। वकीलों का दावा है कि इससे ट्रंप परिवार और उनके कारोबार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।


    डीबैंकिंग को लेकर फिर बहस तेज

    यह मामला तथाकथित ‘डीबैंकिंग’ की बहस को फिर से तेज कर रहा है। डीबैंकिंग तब होता है जब बैंक किसी ग्राहक के खाते बंद कर देता है या उसे सेवाएं देने से मना कर देता है। पिछले कुछ वर्षों में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। कई रूढ़िवादी नेताओं का आरोप रहा है कि 6 जनवरी की घटना के बाद ‘जोखिम’ के नाम पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जेपीमॉर्गन अब इस केस को न्यूयॉर्क स्थानांतरित कराने की कोशिश कर रहा है, जहां खाते संचालित होते थे। यह ट्रंप का किसी बड़े बैंक के खिलाफ पहला मामला नहीं है। मार्च 2025 में ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने क्रेडिट कार्ड कंपनी कैपिटल वन पर भी इसी तरह का मुकदमा दायर किया था, जो अभी लंबित है।

  • SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया

    SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया


    नई दिल्ली/वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक बड़े फैसले के बाद हार मानने के बजाय अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं. कल सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ (Emergency Tariff) को अवैध करार दे दिया था. कोर्ट का कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है. इस फैसले से उन कंपनियों को बड़ी राहत मिली थी जो अरबों डॉलर का टैक्स भर रही थीं. लेकिन ट्रंप ने तुरंत पलटवार करते हुए नए ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का फैसला किया है.।

    ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ट्रेड पॉलिसी से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि वह ‘सेक्शन 122’ जैसी दूसरी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे. राष्ट्रपति का यह अड़ियल रवैया बता रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव और बढ़ेगा. इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल रिफंड को लेकर खड़ा हो गया है. कंपनियां अपने अरबों डॉलर वापस मांग रही हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी में है।


    1. सेक्शन 122 क्या है और ट्रंप इसे हथियार क्यों बना रहे हैं?

    सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप ने अब ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का सहारा लिया है. यह कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वह गंभीर व्यापार घाटे को रोकने के लिए 15% तक का अस्थाई टैरिफ लगा सकते हैं. हालांकि, इसकी एक बड़ी सीमा है कि यह सिर्फ 150 दिनों के लिए ही प्रभावी रह सकता है. इसके बाद राष्ट्रपति को संसद यानी कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी.

    ट्रंप का मानना है कि इससे उन्हें वह ताकत वापस मिल जाएगी जो कोर्ट ने उनसे छीनी है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों पर भी निशाना साधा और इसे देश के लिए एक बुरा फैसला बताया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें जांच की लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. वह इसे तुरंत लागू करके अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को बरकरार रखना चाहते हैं।


    2. इलिनोय के गवर्नर ने ट्रंप को 8.7 अरब डॉलर का बिल क्यों थमाया?

    इस पूरे विवाद में अब राजनीति भी गर्मा गई है. इलिनोय के गवर्नर जेबी प्रित्ज़कर ने ट्रंप को एक औपचारिक इनवॉइस यानी बिल भेजा है. इसमें उन्होंने ट्रंप से 8.68 अरब डॉलर के रिफंड की मांग की है. गवर्नर का तर्क है कि ट्रंप के अवैध टैरिफ की वजह से उनके राज्य के हर परिवार को करीब 1700 डॉलर का नुकसान हुआ है. उन्होंने इसे ‘पास्ट ड्यू’ यानी बकाया राशि बताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा।

    हालांकि, कानूनी तौर पर यह मामला इतना सीधा नहीं है. टैरिफ का भुगतान कंपनियां करती हैं, आम जनता नहीं. कंपनियां इस बोझ को ग्राहकों पर डालती हैं जिससे महंगाई बढ़ती है. ऐसे में अगर रिफंड मिलता भी है, तो वह कंपनियों को मिलेगा न कि सीधे आम लोगों को. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वॉलमार्ट या कॉस्टको जैसी कंपनियां ग्राहकों को पुराना पैसा वापस नहीं करेंगी।

    3. क्या रिफंड की जंग अगले 5 सालों तक खिंच सकती है?

    रिफंड के मुद्दे पर ट्रंप ने जो बयान दिया है, उसने बिजनेस जगत की नींद उड़ा दी है. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस पर अगले दो साल या शायद पांच साल तक मुकदमा चलेगा’. इसका मतलब है कि जिन कंपनियों ने पिछले साल अरबों डॉलर का टैक्स दिया है, उन्हें अपना पैसा वापस पाने के लिए कोर्ट के चक्कर काटने होंगे. ट्रंप प्रशासन ने पहले वादा किया था कि अगर कोर्ट का फैसला खिलाफ आया तो पैसा वापस कर दिया जाएगा।

    अब प्रशासन अपने ही वादे से मुकरता दिख रहा है. हजारों कंपनियों ने पहले ही सरकार पर केस कर रखा है. अब इन मामलों की सुनवाई ‘कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में होगी. छोटे व्यापारियों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, क्योंकि उनके पास लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए फंड नहीं है।


    4. भारत और ग्लोबल मार्केट पर इस फैसले का क्या असर होगा?

    भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत पर लगे कुछ पुराने टैरिफ अवैध हो गए हैं. लेकिन ट्रंप के नए 10-15% ग्लोबल टैरिफ ने फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है. भारत का वाणिज्य मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहा है. मंत्रालय ने कहा है कि वह कोर्ट के फैसले और ट्रंप के बयानों का एनालिसिस कर रहा है।


    5. क्या बर्बाद होगा ग्लोबल मार्केट?

    ट्रंप ने हिंट दिया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच वह तेल और अन्य चीजों पर दबाव बनाने के लिए मिलिट्री एक्शन भी ले सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी. भारतीय निर्यातकों के लिए आने वाले 150 दिन बहुत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप की नई नीति किसी भी वक्त लागू हो सकती है।

  • US में पाकिस्तान की बेइज्जती… ट्रंप ने भरी सभा में शहबाज को खड़ा कराया और बांधे मोदी की तारीफ के पुल

    US में पाकिस्तान की बेइज्जती… ट्रंप ने भरी सभा में शहबाज को खड़ा कराया और बांधे मोदी की तारीफ के पुल


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) के वाशिंगटन में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) के उद्घाटन सत्र में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जोर-शोर से हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अपने संबोधन के दौरान न केवल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को अपना बेहतरीन दोस्त बताया, बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Pakistan’s Prime Minister Shahbaz Sharif) को बीच भाषण में खड़ा कर भारत-पाक शांति का पूरा श्रेय खुद ले लिया।

    ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने के अपने दावे का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने शहबाज शरीफ की ओर देखते हुए उन्हें खड़ा होने के लिए कहा। जैसे ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खड़े हुए, ट्रंप ने अपनी शैली में प्रधानमंत्री मोदी और भारत का गुणगान शुरू कर दिया। ट्रंप ने वहां उपस्थित दुनियाभर के कई नेताओं और मीडिया के सामने कहा, “भारत और पाकिस्तान… वह एक बहुत बड़ा मामला था। मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है। वह बहुत उत्साहित हैं और वास्तव में वह अभी इस कार्यक्रम को देख रहे हैं।”

    ट्रंप ने आगे कहा, “भारत और पाकिस्तान, आप दोनों का बहुत शुक्रिया। मोदी एक महान व्यक्ति हैं और मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं।” यह नजारा काफी दिलचस्प था क्योंकि जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री प्रोटोकॉल के तहत खड़े होकर यह सब सुन रहे थे, वहीं भारत इस बैठक में केवल एक ‘पर्यवेक्षक’ के रूप में मौजूद था और पीएम मोदी स्वयं वहां उपस्थित नहीं थे।

    ट्रंप ने इस दौरान फिर से दोहराया कि उन्होंने पिछले साल भारत-पाक युद्ध को केवल एक फोन कॉल से रोक दिया था। उन्होंने कहा, “जब मुझे पता चला कि दोनों देश लड़ रहे हैं और विमान गिराए जा रहे हैं, तो मैंने फोन उठाया और कहा अगर युद्ध नहीं रुका, तो मैं दोनों देशों पर 200 प्रतिशत का व्यापारिक टैरिफ लगा दूंगा।”

    ट्रंप ने जिस तरह से सार्वजनिक मंच पर शहबाज शरीफ को खड़ा कर पीएम मोदी का जिक्र किया वह पाकिस्तान के लिए काफी असहज स्थिति थी। एक तरफ जहां पाकिस्तान खुद को ट्रंप का करीबी सहयोगी दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ट्रंप बार-बार अपनी बातचीत में भारत और मोदी को अधिक महत्व देते नजर आ रहे हैं।

  • एलियन, UAP और UFO से जुड़े सारे दस्तावेजों को सार्वजनिक करेगा US, ट्रंप ने दिए निर्देश

    एलियन, UAP और UFO से जुड़े सारे दस्तावेजों को सार्वजनिक करेगा US, ट्रंप ने दिए निर्देश


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि एलियन (Alien.), अनजान हवाई घटनाओ (UAP) और अनजान उड़ने वाले ऑब्जेक्ट्स (Unidentified Flying Objects- UFO) से जुड़ी घटनाओं और दस्तावेजों की पहचान करें और उन्हें जारी करें। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल हैंडल पर कहा, लोगों की रुचि को देखते हुए मैं युद्ध सचिवऔर अन्य एजेंसियों व वभागों को निर्देश देता हूं कि वे एलियन्स, न्य ग्रहों पर जीवन, यूएपी और यूएफओ से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू करें।

    ट्रंप ने कहा कि लोगों के इंटरेस्ट और इसकी अहमियत को देखते हुए जो फाइल्स जारी की जाएंगी उसने सभी जानकारियों को शामिल करने की कोशिश होगी। बता दें कि हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक पॉडकास्ट के दौरान एलियन्स की बातें की थीं। उन्होंने कहा था, एलियन वास्तव में हैं लेकिन मैंने अपनी आखों से उन्हें नहीं देखा है। यह बात भी सच है कि एरिया 51 में कोई एलियन नहीं है।


    ओबामा पर गुप्त जानकारी लीक करने का आरोप

    डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा पर आरोप लगाया कि ओबामा ने गुप्त जानकारियां लीक की हैं। ट्रंप ने कहा कि ओबामा ने बड़ी गलती कर दी है। मुझे भी नहीं पता कि एलियन हैं या नहीं लेकिन ओबामा ने जो सीक्रेट इन्फॉर्मेंशन लीक की है, उसकी कोई जरूरत नहीं थी।


    एलियन्स को लेकर क्या बोले थे बराक ओबामा

    ओबामा ने एलियन्स को लेकर सवाल किए जाने पर हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था कि यह ब्रह्मांड बहुत बड़ा है। ऐसे में धरती से बाहर के जीवन के बारे में नकारा तो नहीं जा सकता। उन्होंने कहा था,मेरे कार्यकाल के दौरान एलियन्स को लेकर कोई प्रमाण नहीं मिला था। एरिया 51 से जुड़े मामलों को लेकर उन्होंने कहा था कि वहां कोई एलियन या गुप्त जीव नहीं है। लोग मानते हैं कि एरिया 51 में एलियन के शव हैं लेकिन यह पूरी तरह से गलत धारणा है।

    ओबामा के बयान के बाद ही ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह बात लीक नहीं करनी चाहिए थे। उन्होंने कहा, ओबामा ने जो कुछ भी बताया है वह बेहद संवेदनशील जानकारी थी। हालांकि ट्रंप ने स्पष्ट तौर पर यह नहीं बताया कि आखिर उन्होंने कौन सी सीक्रेट जानकारी लीक कर दी है। ट्रंप से जब एलियन्स को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने खुद भी कहा कि उन्हें एलिन्स के अस्तित्व के बारे में कोई जानकारी नहीं है।


    क्या है एरिया 51?

    अमेरिका के नेवादा में एक बेहद गोपनीय अमेरिकी वायुसेना का अड्डा है जिसे एरिया 51 के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि यहां एलिनय के शवों और क्रैश हुए यूएफओ को रखा जाता है। 2013 में सीआईए ने इससे जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए बताया था कि शीत युद्ध के दौरान इस ठिकाने का इस्तेमाल जासूसी विमानों के परीक्षण के लिए किया जाता था। 2022 में भी अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने दावा किया था कि एलियन्स के धरती पर आने से संबंधित कोई सबूत नहीं मिला है। ऐसी अगर कोई भी वस्तु मिली है तो जांच के बाद ये सामान्य उपकरण या फिर तकनीकी भ्रम ही पाई गई हैं।

  • ईरान का ट्रंप को साफ संदेश: ‘ना डरते हैं, ना किसी का हुक्म मानेंगे’

    ईरान का ट्रंप को साफ संदेश: ‘ना डरते हैं, ना किसी का हुक्म मानेंगे’


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और फिलहाल युद्ध के खतरे को पूरी तरह टाला नहीं जा सका है। बातचीत की कोशिशों के बीच रविवार को ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना रुख फिर स्पष्ट कर दिया। ईरान ने कहा कि वह अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को किसी भी दबाव के बावजूद नहीं छोड़ेगा और किसी अन्य देश के आदेश में काम नहीं करेगा।

    तेहरान में एक सार्वजनिक मंच से बोलते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अपनी परमाणु नीति किसी से डरकर नहीं बदलेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दर्शकों के सामने कहा कि यूरेनियम संवर्धन उनके लिए गैर-समझौते वाला मुद्दा है।अराघची ने कहा, “हम संवर्धन क्यों करते हैं और इसे छोड़ने से इंकार क्यों करते हैं, भले ही युद्ध का खतरा हो? क्योंकि किसी को भी हम पर हुक्म चलाने का अधिकार नहीं है।”

    अमेरिका पर भरोसा नहीं

    ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को दबाव बनाने की कमजोर रणनीति बताया। अराघची ने कहा, “क्षेत्र में उनकी सैन्य तैनाती हमें डराती नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। अराघची ने बताया कि कुछ संकेत अमेरिकी गंभीरता दिखाते हैं, जबकि कई संकेत इसे झूठा साबित करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान के खिलाफ जारी प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अमेरिका की गंभीरता पर सवाल खड़े करती हैं।

    समझौते के लिए ईरान की शर्तें

    अराघची ने कहा कि ईरान सभी संकेतों का मूल्यांकन करेगा। उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत समझौते की राह खोल सकती है, लेकिन केवल तभी जब अमेरिकी मांगें वास्तविक और न्यायसंगत हों। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका का दृष्टिकोण सम्मानजनक और आपसी हितों पर आधारित होगा, तभी समझौता संभव है।”