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  • ट्रंप को शांति पुरस्कार से सम्मानित करेगा इस्राइल …. नेतन्याहू बोले- इनके लिए हम तोड़ रहे परंपरा

    ट्रंप को शांति पुरस्कार से सम्मानित करेगा इस्राइल …. नेतन्याहू बोले- इनके लिए हम तोड़ रहे परंपरा


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को इस्राइल के सर्वोच्च नागरिक सम्मान (Israel’s highest civilian honor) इस्राइल शांति पुरस्कार (Israel Peace Prize) से सम्मानित किया जाएगा। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने सोमवार को फ्लोरिडा में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये एलान किया। नेतन्याहू ने एलान करते हुए कहा कि इस्राइली सरकार ने फैसला किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप को इस्राइल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाए। 80 साल में यह पुरस्कार किसी भी गैर इस्राइली नागरिक को नहीं दिया गया है और पहली बार है कि शांति श्रेणी में यह पुरस्कार दिया जाएगा।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस एलान पर खुशी जताई और कहा कि यह सम्मान उनके लिए अनापेक्षित था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस्राइली प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने लोगों को चौंकाने के लिए कई परंपराएं तोड़ी हैं, इसलिए हमने भी तय किया है कि हम भी एक परंपरा तोड़ेंगे और नई बनाएंगे। वो ये है कि इस्राइल सम्मान, जो 80 साल से किसी गैर इस्राइली नागरिक को नहीं दिया गया है, उससे राष्ट्रपति ट्रंप को सम्मानित किया जाएगा। भोजन के दौरान हमारे शिक्षा मंत्री ने इसका एलान किया था और यह पुरस्कार राष्ट्रपति ट्रंप के इस्राइली और यहूदी लोगों की भलाई में दिए गए योगदान के लिए दिया जाएगा।’

    इस्राइली प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आपने इस्राइली लोगों के लिए जो किया, हमारी आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई में जो मदद की, उसके लिए हम लोग आपके शुक्रगुजार हैं।’


    इस्राइस के स्वतंत्रता दिवस समारोह में किया जाएगा सम्मानित

    इस्राइल पुरस्कार, इस्राइल का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो पारंपरिक रूप से विज्ञान, कला और मानविकी जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने के लिए इस्राइली नागरिकों को दिया जाता है। शांति श्रेणी में यह पुरस्कार पहले कभी नहीं दिया गया था। जुलाई 2025 में, इस्राइल ने पुरस्कार नियमों में संशोधन किया ताकि यह सम्मान किसी विदेशी नागरिक को भी दिया जा सके, जिससे ट्रंप के चयन का रास्ता साफ हो गया। ट्रंप पुरस्कार लेने के लिए इस्राइल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी संकेत दिया कि वह समारोह में शामिल होने पर विचार करेंगे।

  • रूस- यूक्रेन युद्धः ट्रंप और जेलेंस्की यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत

    रूस- यूक्रेन युद्धः ट्रंप और जेलेंस्की यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत


    फ्लोरिडा।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने रविवार को संयुक्त बयान में कहा कि हम दोनों यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत हैं। दोनों नेताओं ने यहां के मार-ए-लागो में यूक्रेन-रूस के बीच शांति समझौते को लेकर अहम बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में यह बयान जारी किया। उन्होंने यूक्रेन-रूस युद्ध और संभावित शांति समझौते पर चर्चा की।

    सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा, “यह बैठक शानदार रही। मैंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर लगभग दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। अब लग रहा है कि हम शांति योजना पर बहुत करीब आ गए हैं। पुतिन और मैंने अभी यूरोपीय नेताओं से भी बात की। हमने यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने पर बहुत प्रगति की है। यह लड़ाई दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे घातक है।” जेलेंस्की ने कुछ दिन पहले इस मसले पर अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से बातचीत कर चुके हैं।

    यहां यह महत्वपूर्ण है कि ट्रंप की 20 सूत्री योजना के मसौदे की अभी क्रेमलिन समीक्षा नहीं कर सका है। मॉस्को ने अब तक अपनी क्षेत्रीय मांगों पर कोई नरमी दिखाने के संकेत भी नहीं दिए हैं। जेलेंस्की ने जरूर रविवार को कहा कि वह और ट्रंप योजना पर 90 फीसद सहमत हैं। ट्रंप और जेलेंस्की ने डोनबास जैसे क्षेत्रीय मुद्दों को “बहुत कठिन सवाल” बताया। जेलेंस्की ने यूक्रेन के शुभचिंतक देशों से रूस के शनिवार को कीव पर हमला करने के बावजूद शांति योजना पर समर्थन जारी रखने का आग्रह किया।

    सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रपति ट्रपं के जनवरी में वाशिंगटन में यूरोपीय नेताओं की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में वह भी मौजूद रहेंगे। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने और जेलेंस्की ने फ्रांस, फिनलैंड, पोलैंड, नॉर्वे, इटली, यूके और जर्मनी के नेताओं के साथ नाटो और यूरोपीय आयोग के नेताओं से भी बात की। जेलेंस्की ने इस दौरान यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी के महत्व पर जोर दिया। युद्ध खत्म होने संभावित समय-सीमा के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि ” इसमें कुछ हफ्ते लग सकते हैं।

    ट्रंप और जेलेंस्की के बीच चली लगभग ढाई घंटे की बातचीत के दौरान मार-ए-लागो के डाइनिंग रूम में विटकॉफ और कुशनर, व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और युद्ध सचिव पीट हेगसेथ मौजूद रहे।

  • पिछले 6 माह में बिगड़े भारत से रिश्ते… अमेरिकी ही कर रहे राष्ट्रपति ट्रंप की नीति का विरोध

    पिछले 6 माह में बिगड़े भारत से रिश्ते… अमेरिकी ही कर रहे राष्ट्रपति ट्रंप की नीति का विरोध


    वाशिंगटन।
    भारत (India) और अमेरिका (America) के रिश्ते पिछले 6 महीनों से लगातार खराब स्थिति में हैं। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत ने खुले तौर पर अमेरिकी बयानों का विरोध किया, जिसके परिणाम स्वरूप ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) ने पाकिस्तान (Pakistan) के साथ अपनी नजदीकी बढ़ाते हुए भारत पर आर्थिक हमला करने की कोशिश की। राष्ट्रपति ट्रंप की इस नीति का अमेरिका में ही कई लोगों ने विरोध किया, यहां तक कि उनके सहयोगियों ने भी भारत को लेकर अपनाई जा रही इस नीति का विरोध ही किया। अब अमेरिकी वैश्विक मामलों के जानकार, लेखक और प्रोफेसर फ्रांसिस फुकुयामा ने ट्रंप की इस नीति को लेकर उन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने अपने निजी व्यवहार के लिए अमेरिका के हितों को दरकिनार कर दिया।

    एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति पर बात करते हुए प्रोफेसर ने कहा कि उनकी वैश्विक नीति क्या है इस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, “ट्रंप की वैश्विक नीति निजी लाभ पर आधारित है। उदाहरण के लिए पिछले 20 से 30 वर्षों में अमेरिका में किसी की भी सरकार रही हो, वह भारत के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश करती रही है। क्योंकि हम दक्षिण एशिया में चीन को काउंटर करना चाहते हैं। लेकिन ट्रंप ने भारत के साथ रिश्तों को केवल इसलिए खराब कर दिया क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नोबेल पीस प्राइज के लिए समर्थन नहीं किया था।”

    प्रोफेसर ने कहा, “ट्रंप के इस फैसले से आप पूरी तरह से समझ सकते हैं कि कैसे उन्होंने अपने निजी लाभ के लिए अमेरिकी हितों को अलग रख दिया। ऐसे में अगर कोई यह सोच रहा है कि ट्रंप प्रशासन की कोई वैश्विक नीति होगी, तो वह परेशान ही होगा।”

    आपको बता दें, इस साल जनवरी में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में आए थे, तो भारत में लोगों की राय यह थी कि भारत और अमेरिका के रिश्ते सही होंगे। ट्रंप और पीएम मोदी की निजी दोस्ती दोनों देशों के बीच में मजबूत साझेदारी का आधार बनेगी। शुरुआती समय में ऐसा दिखा भी। लेकिन मई के महीने में सबकुछ बदल गया।

    पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ से किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंप टीम का बयान दोस्ती वाला नहीं था। भारत सरकार के ऐलान करने से पहले ही ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए सीजफायर का ऐलान कर दिया। यह भारत सरकार के लिए असहज करने वाली स्थिति थी। इसके बाद ट्रंप लगातार इस बात को कहते रहे कि भारत और पाकिस्तान के बीच उन्होंने सीजफायर करवाया है, जबकि भारत ने शुरुआत से ही इस बात को कहा कि सीजफायर के लिए पाकिस्तानी डीजीएमओ की तरफ से फोन आया था इसके बाद यह हुआ।

    दोनों देशों के बीच बिगड़ती इस परिस्थिति का पाकिस्तान ने बड़ी अच्छी तरह से फायदा उठाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुले तौर पर इस सीजफायर के लिए ट्रंप को धन्यवाद किया और लगे हाथ उन्हें नोबेल पीस प्राइज के लिए समर्थन भी दे दिया। इस पूरे वाकये के बाद भारत और अमेरिका के संबंध लगातार गिरावट की तरफ जाने लगे। अमेरिका ने भारत के ऊपर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया। ट्रंप और उनकी टीम की तरफ से लगातार भारत के खिलाफ बयानबाजी की जाने लगी। भारत ने भी अपनी स्थिति को साफ किया और ट्रंप या अमेरिका के आगे किसी भी तरीके से झुकने से इनकार कर दिया।

    दरअसल, कश्मीर और पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय स्थिति पर भारत की स्थिति दशकों से साफ रही है कि भारत इसमें किसी भी तीसरे देश का दखल नहीं चाहता है। शिमला समझौते के तहत पाकिस्तान भी इस पर राजी है, लेकिन पाकिस्तान हमेशा से ही इस मुद्दे में तीसरे देश को शामिल करने के लिए तैयार रहता है। ऐसे में अगर पीएम मोदी नोबेल के लिए ट्रंप को समर्थन देते तो यह भारत की साख के लिए सही नहीं होता और न ही भारत के स्टैंड के मुताबिक होता।

  • US: अभी खत्म नहीं हुआ ट्रंप के Tariff का खेल, चाइना पर फिर फूटेगा टैरिफ बम

    US: अभी खत्म नहीं हुआ ट्रंप के Tariff का खेल, चाइना पर फिर फूटेगा टैरिफ बम


    वाशिगटन।
    डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ (Donald Trump Tariff) का खेल अभी खत्म नहीं हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति (American President) एक बार फिर चीन पर टैरिफ लगाने (US Tariff On China) के लिए तैयार हैं और इसके लिए तारीख भी तय कर दी गई है. जी हां, अमेरिका चीन से आयात सेमीकंडक्टर चिप (Tariff On Chinese chips) टैरिफ बढ़ाने की तैयारी में है और लेकिन इसे 18 महीने के लिए अभी टाला गया है. चाइनीज चिप आयात पर ट्रंप कितना टैरिफ लगाएंगे इसकी दर भी कम से कम एक महीने पहले तय की जाएगी।


    18 महीने तक जीरो, फिर होगा फैसला

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चीनी चिप्स पर टैरिफ में 18 महीने बाद बढ़ोतरी करेगा. Donald Trump प्रशासन ने मंगलवार को फेडरल रजिस्टर में दाखिल एक दस्तावेज में साफ किया है कि अमेरिका जून 2027 में चीनी सेमीकंडक्टर आयात पर टैरिफ बढ़ाएगा और इसके लागू होने से महीनेभर पहले Tariff Rate भी तय कर दिया जाएगा।

    डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय द्वारा शेयर जानकारी में बताया गया है कि चीन से सेमीकंडक्टर आयात पर प्रारंभिक टैरिफ दर इन 18 महीनों के लिए शून्य (Zero Tariff) ही रहेगा. अमेरिका ने पाया है कि चीन सेमीकंडक्टर बिजनेस में अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त है. यह नोटिस पुराने चिप्स पर केंद्रित प्रोसेस का अगला चरण है, जो बिजनेस एक्ट की धारा 301 के तहत बाइडेन प्रशासन के दौरान शुरू हुई थी।


    23 जून की तारीख हो गई तय

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से फाइलिंग में कहा गया है कि दशकों से China ने इस उद्योग पर अपना दबदबा कायम करने का टारगेट बनाकर तेजी से आक्रामक और व्यापक गैर-बाजार नीतियों को अपनाया है. हालांकि, नए टैरिफ को कम से कम 18 महीनों के लिए टालने का Donald Trump का निर्णय इस बात का संकेत भी देता है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका और चीन के बीच किसी भी व्यापारिक शत्रुता को कम करने की कोशिश कर रहा है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीते अक्टूबर महीने में ट्रेड टेंशन को खत्म करने के लिए एक करार किया था, जिसके अमेरिका ने कुछ Tariff Cut किया और चीन ने दुर्लभ पृथ्वी धातुओं (Rare Earth Metals) के निर्यात की अनुमति दी थी. अमेरिकी आयकर विभाग (USTR) द्वारा मंगलवार को दाखिल किए गए दस्तावेज में US Tariff On China की डेट 23 जून 2027 तय की गई है।

    टैरिफ के असर पर बारीक नजर
    NYT की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ बढ़ाने के लिए तय की गई 2027 की नई तारीख अमेरिकी कंपनियों को स्पष्टता प्रदान करती है, जिन्होंने कहा है कि वे इस बात पर बारीकी से नजर रख रही हैं कि अमेरिकी टैरिफ उनके व्यवसायों या आपूर्ति श्रृंखलाओं को कैसे प्रभावित (US Tariff Imapct) कर सकते हैं. ये टैरिफ कानून की धारा 232 के तहत ट्रंप प्रशासन द्वारा चीनी चिप्स आयात (China Cips Import) पर लगाए जाने वाले अन्य शुल्कों से अलग हैं।

  • जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार

    जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार


    वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से चल रहे युद्ध के बीच अच्छी और बड़ी खबर सामने आई है। रूस की ओर से कहा गया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति वार्ता फ्लोरिडा में ‘रचनात्मक’ तरीके से आगे बढ़ रही है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि संबंधित पक्षों की बातचीत तेजी से प्रगति कर रही है। यह वार्ता ट्रंप प्रशासन द्वारा महीनों से किए जा रहे शांति प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें इस सप्ताह की शुरुआत में बर्लिन में यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ बैठकें भी शामिल हैं।

    रूसी सरकारी समाचार एजेंसी ‘आरआईए नोवोस्ती’ के अनुसार, रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि चर्चाएं रचनात्मक रूप से आगे बढ़ रही हैं। ये आज भी जारी हैं और कल भी जारी रहेंगी। खबर के मुताबिक, दिमित्रीव ने मियामी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से मुलाकात की।

    वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रविवार को टेलीग्राम पर लिखा कि राजनयिक प्रयास काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और फ्लोरिडा में हमारी टीम अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ काम कर रही है।

    जेलेंस्की के इस बयान से लग रहा है कि अब वे नरम पड़ गए हैं। इससे पहले, शुक्रवार को यूक्रेन के प्रमुख वार्ताकार ने कहा था कि अमेरिका में उनका प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी और यूरोपीय पक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें पूरी कर चुका है।

    ट्रंप ने युद्ध को समाप्त करने के लिए व्यापक राजनयिक प्रयास शुरू किए हैं, लेकिन उनके प्रयासों को रूस और यूक्रेन की ओर से परस्पर विरोधी मांगों का सामना करना पड़ रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह यूक्रेन पर अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि भारी नुकसान के बावजूद रूसी सेनाएं युद्ध के मैदान में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं। शुक्रवार को पुतिन ने विश्वास जताया था कि यदि यूक्रेन शांति वार्ता में रूस की शर्तों को नहीं मानता, तो क्रेमलिन अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर लेगा।

    दूसरी ओर फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत करने की पुतिन की इच्छा का स्वागत किया और कहा कि वह ‘आने वाले दिनों में’ आगे की प्रक्रिया तय करेगा। इससे पहले खबर आई थी कि पुतिन अगर परस्पर राजनीतिक इच्छा हो तो फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। मैक्रों के कार्यालय ने कहा है कि किसी भी बातचीत का उद्देश्य राष्ट्रपति जेलेंस्की और हमारे यूरोपीय भागीदारों के साथ पूरी पारदर्शिता के साथ यूक्रेन और यूरोप के लिए एक ठोस और स्थायी शांति में योगदान देना होगा।

  • US: ट्रंप ने BBC पर ठोका मानहानि का केस… 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग

    US: ट्रंप ने BBC पर ठोका मानहानि का केस… 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग


    वाशिंगटन।
    एक भाषण को एडिट करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने मीडिया हाउस बीबीसी (BBC) पर मुकदमा ठोक दिया है। उन्होंने बीबीसी से 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग भी की है। उन्होंने ब्रिटिश प्रसारक पर मानहानि के साथ-साथ भ्रामक और अनुचित तरीके से व्यापार करने का आरोप लगाया। दरअसल 6 जनवरी 2021 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने समर्थकों को संबोधित किया था। इसके बाद उनके समर्थक कैपिटल हिल पर पहुंच गए और हिंसक हो गए।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक बीबीसी ने ट्रंप के भाषण के वीडियो में ‘फाइट लाइक हेल’ दिखाया लेकिन उनके दूसरे पार्ट को काट दिया जिसमें वह शांतिपूर्ण प्रदर्श की बात कर रहे थे। बीबीसी पर 33 पन्नों के इस मुकदमे में ट्रंप का ‘‘झूठा, मानहानिकारक, भ्रामक, अपमानजनक, भड़काऊ और दुर्भावनापूर्ण चित्रण’’ करने का आरोप लगाया गया है और इसे 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ‘‘हस्तक्षेप करने तथा उसे प्रभावित करने की निर्लज्ज कोशिश’’ बताया गया है।

    इसमें बीसीसी पर ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप के छह जनवरी, 2021 के भाषण के दो पूरी तरह से अलग-अलग अंशों को एक साथ जोड़ने’’ का आरोप लगाया गया ताकि ‘‘ट्रंप द्वारा कही गई बातों के अर्थ को जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।’’ बता दें कि बीबीसी की फंडिंग उसके दर्शकों से होती है। डोनाल्ड ट्रंप की लीगल टीम का कहना है कि बीबीसी लेफ्ट अजेंडा चलाता है और इसलिए डोनाल्ड ट्रंप को बदनाम करने की कोशिश में लगा रहता है।

    बीबीसी की तरफ इस मुकदमे को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले डॉक्युमेंट्री प्रकाशित करने को लेकर बीबीसी पहले से ही संकट का सामना कर रहा है। कई सीनियर अधिकारी इस्तीा दे चुके हैं। इससे बीबीसी की छवि भी खराब हुई है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। इस डॉक्युमेंट्री को अमेरिका में नहीं प्रसारित किया गया था। अब अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी वाले कानून से अपने मुद्दे को अलग करने के लिए ट्रंप को साबित करना होगा कि बीबीसी ने जो कुछ भी एडिट किया वह अपमानजनक था और दर्शकों में भ्रम फैलाने के लिए ही ऐसा किया गया था।

    बीबीसी कोर्ट में दावा कर सकता है कि उसने जो कुछ दिखाया वह सच था और जो कुछ भी ए़डिट किया गया है उससे जनता में कोई गलत संदेश नहीं गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ भी केस किया था। हालांकि दोनों ने किसी भी गलती से इनकार किया है।

  • ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच चीन का नया रिकॉर्ड, ट्रेड सरल्प्स 1 ट्रिलियन डॉलर के पार

    ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच चीन का नया रिकॉर्ड, ट्रेड सरल्प्स 1 ट्रिलियन डॉलर के पार


    हांगकांग।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के टैरिफ को लेकर बनाए गए दबाव और अमेरिका-चीन (America-China) के बीच छिड़े ट्रेड वॉर के बाद भी चीन ने पहली बार 1 हजार अरब डॉलर के सरप्लस के आंकड़े को पार कर लिया है। सोमवार को चीन द्वारा जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। जानकारी के मुताबिक अक्टूबर माह में आई अप्रत्याशित गिरावट के बाद चीन के निर्यात में नवंबर के दौरान वृद्धि दर्ज की गई जिससे 2025 में उसका व्यापार अधिशेष पहली बार 1,000 अरब डॉलर से अधिक हो गया।

    चीन के सीमा-शुल्क आंकड़ों के मुताबिक नवंबर महीने में डॉलर के संदर्भ में चीन का कुल निर्यात सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत और आयात करीब दो प्रतिशत बढ़ गया। हालांकि अमेरिका को चीन के निर्यात में एक साल पहले की तुलना में करीब 29 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह लगातार आठवें महीने दहाई अंकों में गिरावट है। वहीं चीन के दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित अन्य गंतव्यों को निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई।

    अमेरिकी बहुराष्ट्रीय वित्तीय सेवा फर्म मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2030 तक वैश्विक निर्यात में चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 16.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी जो फिलहाल करीब 15 प्रतिशत है। यह वृद्धि उन्नत विनिर्माण और इलेक्ट्रिक वाहन, रोबोटिक्स और बैटरी जैसे उच्च-विकासशील क्षेत्रों में निर्यात की बढ़त की वजह से होगी।

    इससे पहले चीन का निर्यात अक्टूबर में 1 प्रतिशत से अधिक गिर गया था। हालांकि नवंबर में इसका प्रदर्शन बेहतर रहा और दुनिया भर में निर्यात 330.3 अरब डॉलर रहा जो अर्थशास्त्रियों के अनुमान से काफी अधिक है। वहीं चीन का आयात नवंबर में कुल 218.6 अरब डॉलर रहा। फैक्टसेट द्वारा जारी आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के मुताबिक 2025 के पहले 11 महीनों के लिए लगभग 1080 अरब डॉलर का ट्रेड सरल्प्स एक रिकॉर्ड उच्च स्तर है जो 2024 की समान अवधि के 992 अरब डॉलर सरप्लस से अधिक है। आईएनजी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री लिन सोंग ने रिपोर्ट में लिखा, ‘‘संभवत: नवंबर के निर्यात में शुल्क कटौती का असर पूरी तरह नहीं दिखा है। इसका असर आने वाले महीनों में दिखाई देगा।’’

    गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अक्टूबर के अंत में दक्षिण कोरिया में हुई बैठक में दोनों देशों के बीच एक साल के लिए व्यापार-युद्ध को रोकने पर सहमति बनी थी। अमेरिका ने चीन पर अपने शुल्क कम कर दिए हैं और चीन ने दुर्लभ खनिजों से संबंधित अपने निर्यात नियंत्रणों को समाप्त करने का वादा किया है। एक आधिकारिक सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले महीने चीन की उत्पादन गतिविधि लगातार आठवें महीने घटी थीं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह निर्धारित करना अब भी जल्दबाजी होगी कि अमेरिका-चीन व्यापार समझौते के बाद बाहरी मांग में वास्तविक उछाल आया है या नहीं।

  • 🇺🇸 रूस को 'खतरा' नहीं मानेगा अमेरिका: ट्रम्प प्रशासन की NSS में बड़ा बदलाव!

    🇺🇸 रूस को 'खतरा' नहीं मानेगा अमेरिका: ट्रम्प प्रशासन की NSS में बड़ा बदलाव!


    नई दिल्ली ट्रम्प प्रशासन ने अपनी नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी NSSजारी की है जिसने अमेरिकी विदेश नीति की दिशा को पूरी तरह बदल दिया है। 29 पन्नों का यह दस्तावेज ट्रम्प के लचीले यथार्थवाद Flexible Realismसिद्धांत पर आधारित है। इसके तहत अब अमेरिका वैश्विक रिश्तों को सिर्फ एक पैमाने पर मापेगा जो अमेरिका के हित में है वही करो। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अमेरिका अब रूस को प्रत्यक्ष खतरा या दुश्मन नहीं कहेगा। रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने TASS को बताया कि अमेरिका की भाषा में यह नरमी एक सकारात्मक संकेत है।

    रूस पर नरमी यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म करने पर जोर
    2014 में क्रीमिया पर कब्जे और 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका रूस को सबसे बड़ा खतरा मानता रहा था। लेकिन नई NSS में रूस के साथ रणनीतिक स्थिरता बहाल करने और कुछ मुद्दों पर सहयोग की बात कही गई है।दस्तावेज में कहा गया है कि यूक्रेन युद्ध को जल्द समाप्त करना अमेरिका की प्राथमिकता है ताकि परमाणु टकराव और यूरोप में बड़े युद्ध का खतरा कम हो सके।

    ट्रम्प ने यह बदलाव क्यों किया? 5 बड़े कारण

    1. अमेरिका का फायदा रूस से दुश्मनी बेकार
    ट्रम्प हमेशा मानते रहे हैं कि रूस से टकराव अमेरिका को कोई लाभ नहीं देता। वे कई बार कह चुके हैं कि वे पुतिन से डील करके 24 घंटे में युद्ध खत्म कर सकते हैं।

    2. युद्ध का खर्च अरबों डॉलर से छुटकारा
    ट्रम्प नहीं चाहते कि अमेरिका यूक्रेन को हथियार भेजते हुए लगातार अरबों डॉलर झोंकता रहे। इसलिए वे समझौता चाहते हैं।

    3. चीन पर फोकस
    नई रणनीति चीन को सबसे बड़ा और दीर्घकालिक खतरा बताती है। ट्रम्प का तर्क है कि रूस के साथ तनातनी चीन को मजबूत होने का मौका देती है।

    4. यूरोप को ‘सबक सिखाने की नीति
    ट्रम्प का आरोप है कि यूरोपीय देश अपनी रक्षा पर खर्च नहीं करते लेकिन अमेरिका से सुरक्षा की उम्मीद रखते हैं। उनके शब्दों में
    अगर यूक्रेन की इतनी चिंता है तो खुद लड़ो।

    5. व्यापारिक लाभ
    विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध समाप्त होने के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण में अमेरिकी कंपनियों को बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिल सकते हैं। ट्रम्प के करीबी लोग खासकर रूस और खाड़ी देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।

    यूरोप पर ट्रम्प का सबसे कड़ा हमला: 20 साल में यूरोप का अस्तित्व मिट सकता है रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार नई NSS में यूरोप के लिए बेहद कठोर भाषा का इस्तेमाल किया गया है।
    दस्तावेज में चेतावनी दी गई है अगर यूरोप अपनी नीतियां नहीं बदलता तो 20 साल से भी कम समय में उसका अस्तित्व मिट जाएगा। 

    दस्तावेज में यूरोप के बारे में यह आरोप लगाए गए:

    अनियंत्रित आव्रजन जन्म दर में भारी गिरावट राष्ट्रीय पहचान कमजोर होना अभिव्यक्ति की आजादी पर बढ़ते प्रतिबंध यूरोपीय संघ और अन्य संस्थाओं द्वारा सदस्य देशों की संप्रभुता कमजोर करना साथ ही इसमें यूरोप में उभर रहे देशभक्त राजनीतिक दलों की तारीफ की गई है और कहा गया है कि अमेरिका अपने सहयोगियों से अपेक्षा करता है कि वे राष्ट्रीय भावना पुनर्जीवित करें।

    ट्रम्प का दावा: यह दस्तावेज अमेरिका को ‘मानव इतिहास का सबसे महान राष्ट्र बनाए रखेगा  ट्रम्प ने अपनी नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को अमेरिका के भविष्य का रोडमैप बताया है। उनका कहना है हम ताकतवर हैं और जरूरत पड़े तो ताकत का इस्तेमाल करेंगे लेकिन बेवजह युद्ध नहीं लड़ेंगे।नई NSS स्पष्ट करती है कि आने वाले समय में अमेरिकी विदेश नीति का केंद्र होगा अमेरिका के हित अमेरिका की प्राथमिकताएं और अमेरिका की ताकत।

  • नोबेल तो नहीं… मगर ट्रंप को मिला शांति पुरस्कार, इतने खुश हुए…खुद ही उठाकर पहन लिया

    नोबेल तो नहीं… मगर ट्रंप को मिला शांति पुरस्कार, इतने खुश हुए…खुद ही उठाकर पहन लिया


    वाशिंगटन।
    नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) की मांग कर रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को नोबेल तो नहीं लेकिन फीफा शांति पुरस्कार (FIFA Peace Prize) जरूर मिल गया है। फुटबॉल की वैश्विक संस्था (FIFA) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने नए फीफा शांति पुरस्कार (FIFA Peace Prize) से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार खेल से इतर वैश्विक शांति को ध्यान में रखकर बनाया गया है और ट्रंप इसके पहले विजेता हैं।


    फीफा ने क्यों दिया यह पुरस्कार

    डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि फीफा द्वारा इस साल से शुरू किया जा रहा है शांति पुरस्कार ट्रंप को ही मिलेगा। वैसे बी फीफा के वर्तमान अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को ट्रंप का करीबी माना जाता है। वह कई बार खुले तौर पर इस बात को कह चुके हैं कि गाजा संघर्ष में युद्धविराम करवाने के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए।

    फीफा के अगले विश्वकप के लिए आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में जियानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए ट्रंप को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “यह आपके लिए एक सुंदर मेडल है, जिसे आप जहां चाहें, वहां पहन सकते हैं।” इसके बाद ट्रंप ने तुरंत ही इसे अपने गले में डाल लिया। इसके साथ ही ट्रंप को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें ट्रंप को ‘दुनिया में शांति और एकता बढ़ाने में योगदान’ देने वाला बताया गया।

    इसके अलावा जियानी ने ट्रंप को एक सोने की ट्राफी भी भेंट की। इस पर आगे ट्रंप का नाम लिखा हुआ था। उन्होंने कहा, “आप इस शांति पुरस्कार के योग्य हैं, अपनी कोशिशों और उपलब्धियों के लिए।

    फीफा शांति पुरस्कार मिलने के बाद ट्रंप उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा, “यह मेरे जीवन के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है।” इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, खासतौर पर अपनी पत्नी मेलानिया का धन्यवाद दिया और मेजबान देशों कनाडा और मेक्सिको के नेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह तीनों देशों के लिए बेहतर रहेगा।