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  • ट्रंप को खामेनेई ने ललकारा, कहा- तुम्‍हारा फिरौन और निमरोद जैसा हश्र होगा

    ट्रंप को खामेनेई ने ललकारा, कहा- तुम्‍हारा फिरौन और निमरोद जैसा हश्र होगा


    तेहरान। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रंप पर दुनिया को अहंकार के साथ परखने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि इतिहास में ऐसे घमंडी और अत्याचारी शासक अपने सत्ता-शिखर पर ही पतन का शिकार हुए हैं। एक्स पर जारी पोस्ट में खामेनेई ने कहा कि इतिहास गवाह है- फिरौन, निमरोद और ईरान के पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी जैसे शासकों का अंत तब हुआ, जब वे अपने घमंड की चरम अवस्था में थे।

    खामेनेई ने लिखा- ‘अमेरिकी राष्ट्रपति जो पूरी दुनिया के बारे में घमंड से फैसले करते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि दुनिया के तानाशाहों और घमंडी शासकों का पतन तब हुआ जब वे अपने घमंड के चरम पर थे।

    तुम्हारा भी पतन होगा।’ खामेनेई के बयान में धार्मिक और ऐतिहासिक प्रतीकों का संदर्भ था- फिरौन को इस्लामी और बाइबिल परंपराओं में अत्याचार के प्रतीक के रूप में देखा जाता है; निमरोद को अब्राहमिक ग्रंथों में निरंकुश शासक माना जाता है; मोहम्मद रजा पहलवी को 1979 की इस्लामी क्रांति में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था और जिनकी बाद में निर्वासन में मृत्यु हुई।
    फिरौन, निमरोद कौन थे?

    फिरौन मिस्र के प्राचीन बादशाहों की एक उपाधि थी, जैसे आज राजा या सम्राट कहते हैं। लेकिन कुरान और बाइबल में जब फिरौन का जिक्र आता है, तो ज्यादातर मामलों में वह हजरत मूसा के समय का मिस्र का वह क्रूर बादशाह होता है। वह खुद को खुदा/भगवान घोषित करता था। बनी इसराइल (यहूदियों) पर बहुत ज़ुल्म करता था। उनके नवजात बेटों को मार डालने का हुक्म देता था। आखिर में लाल सागर में डूबकर मर गया।

    निमरोद बाबुल/इराक (मेसोपोटामिया) का एक बहुत शक्तिशाली और अत्याचारी बादशाह था। वह हजरत इब्राहीम के समय का शासक माना जाता है। उसने भी खुद को खुदा घोषित किया था। हालांकि कुरान में उसका नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया गया, लेकिन सूरह अल-बकरह में वर्णित वह बादशाह जिसने इब्राहीम से खुदाई के बारे में बहस की थी, उसे इसी निमरोद से तस्सूर किया जाता है। इस्लामी रिवायतों में कहा जाता है कि उसकी मौत एक छोटे से मच्छर के काटने से हुई, जो उसके दिमाग में घुस गया था (अत्यंत छोटी चीज से बहुत बड़े अहंकारी का अंत)।
    Iran
    रजा पहलवी फिर सुर्खियों में

    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी एक बार फिर चर्चा में हैं। वे ईरान के आखिरी शाह- मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र हैं। हालांकि वह जमीनी स्तर पर प्रदर्शनों का नेतृत्व नहीं कर रहे, फिर भी इस्लामी गणराज्य के मुखर आलोचक के तौर पर उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में लगातार बयान दिए हैं।

    हालिया उथल-पुथल के दौरान रजा पहलवी ने ईरानियों से शांतिपूर्ण प्रतिरोध जारी रखने की अपील की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि वह शासक धार्मिक प्रतिष्ठान के बजाय ईरानी जनता का साथ दे।

    उन्होंने प्रदर्शनों को किसी एक नेता या विचारधारा से जुड़ी पहल नहीं, बल्कि आर्थिक बदहाली, दमन और दशकों से अधूरे वादों से उपजी जनआंदोलन बताया।

    एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में रजा पहलवी ने कहा कि वह गुरुवार रात को सड़कों पर उतरे हर व्यक्ति पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने लोगों से शुक्रवार रात फिर से बड़ी संख्या में बाहर निकलने का आह्वान किया और कहा कि भीड़ जितनी बड़ी होगी, दमनकारी ताकतें उतनी ही कमजोर पड़ेंगी। इंटरनेट पाबंदियों के बावजूद सड़कों पर डटे रहने का उन्होंने भरोसा जताया और कहा जीत आपकी होगी।
    कड़ा दमन, बढ़ता तनाव

    दूसरी ओर, ईरान ने संकेत दिए हैं कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे- यह ट्रंप की उस सार्वजनिक प्रतिबद्धता के उलट है, जिसमें उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के समर्थन की बात कही थी। एपी के अनुसार, हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 62 हो गई है।

    तेहरान में अपने परिसर में समर्थकों को संबोधित करते हुए खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शनकारी अपनी ही सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं ताकि अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश कर सकें, और कहा कि ट्रंप को अपने देश की हालत पर ध्यान देना चाहिए। ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों को निर्णायक, अधिकतम और बिना किसी कानूनी रियायत के सजा दी जाएगी।
  • ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    नई दिल्ली। ईरान में महंगाई और आर्थिक तंगी के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाला रूप ले चुका है। देश के 31 प्रांतों और 111 शहरों-कस्बों में विरोध प्रदर्शन फैल चुके हैं। हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 2,300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

    सुप्रीम लीडर खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों और विरोधी संगठनों से प्रेरित बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेताया कि कोई भी विदेशी दबाव ईरान की सत्ता को नहीं झुका पाएगा। खामेनेई ने आरोप लगाया कि आंदोलन विदेशी एजेंडों के तहत देश में उथल-पुथल और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है।

    सड़कों पर नारे और इंटरनेट बंदी

    ईरान के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने “आजादी-आजादी” के नारे लगाए। ऐसे में सरकार को इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल सेवाएं पूरी तरह बंद करनी पड़ी। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि कानून तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    खामेनेई का अमेरिका को चेतावनी संदेश

    सुप्रीम लीडर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी चेताया कि इतिहास में तानाशाहों का पतन तय रहा है और ट्रंप इससे अलग नहीं होंगे। उनका जोर था कि ईरान किसी भी विदेशी दबाव में नहीं झुकेगा और देश की सुरक्षा और एकता बनाए रखी जाएगी।

    रजा पहलवी का अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का आह्वान

    वहीं, निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लाखों ईरानी प्रदर्शनकारियों को हिंसा का सामना करना पड़ रहा है और संचार सेवाएं ठप हैं। रजा पहलवी ने खामेनेई पर आम जनता पर बर्बरता करने का आरोप लगाया और लोगों से एकजुट होकर प्रदर्शन जारी रखने की अपील की।

    उन्होंने चेताया कि समय तेजी से निकल रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल कदम उठाना होगा, ताकि देश में जारी हिंसा और दमन को रोका जा सके।

  • ट्रप ने 500% तक टैरिफ की अनुमति वाले बिल को दी मंजूरी… भारत-चीन ही नहीं, EU के लिए भी बड़ा अलार्म

    ट्रप ने 500% तक टैरिफ की अनुमति वाले बिल को दी मंजूरी… भारत-चीन ही नहीं, EU के लिए भी बड़ा अलार्म


    नई दिल्‍ली.
    रूस (Russia) से पेट्रोलियम आयात (Import Petroleum) करने वाले देशों (Countries) पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाले नए विधेयक को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) द्वारा मंजूरी दिए जाने से दुनिया में खलबली मची है. यह कदम सिर्फ भारत और चीन की नींद उड़ाने वाला नहीं है, बल्कि यूरोपीय संघ के लिए भी एक बड़ा ‘अलार्म’ है. अक्सर माना जाता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का निशाना सिर्फ प्रतिद्वंद्वी देश होते हैं, लेकिन यह नया विधेयक एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है. भले ही यूरोपीय संघ (EU) ने यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर मॉस्को की कड़ी निंदा की हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब भी रूसी संसाधनों पर निर्भर है.

    यूरोपीय संघ (EU) में 27 सदस्य देश हैं, जिनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन और स्वीडन शामिल हैं. पहले ब्रिटेन (UK) भी ईयू में शामिल था लेकिन यह 2020 में इससे अलग हो गया था.

    ईयू भी खूब खरीद रहा रूसी तेल

    एक रिपोर्ट के अनुसार, सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. फरवरी 2022 से अब तक रूस ने ईंधन निर्यात से लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर की कमाई की है. रूस के खजाने को भरने में तेल का हिस्सा 68 प्रतिशत रहा है, जबकि बाकी हिस्सा गैस और कोयले से आया है. आयातकों की सूची में चीन 245 अरब डॉलर की खरीद के साथ शीर्ष पर बैठा है, जबकि भारत 168 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है. यूरोपीय संघ ने 125 अरब डॉलर का रूसी ईंधन खरीदा है. यह आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि ट्रंप की ‘टैरिफ गन’ की रेंज में यूरोपीय संघ के देश भी आएंगे.

    ट्रंप की धमकी का भारत पर असर नहीं
    नवंबर में चीन का रूस से तेल आया थोड़ा घटा, वहीं भारत का आयात अक्टूबर के 2.5 अरब यूरो से बढ़कर नवंबर में 2.6 अरब यूरो हो गया. भारत ने हमेशा अपने ‘व्यावसायिक हितों’ और ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है, लेकिन ट्रंप का यह 500% वाला नया समीकरण इस रणनीति की कड़ी परीक्षा लेने वाला है.

    दबाव की राजनीति या बातचीत का नया पैंतरा?
    विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कड़ा रुख वास्तव में रूस को झुकाने की सोची-समझी बिसात है. वे चाहते हैं कि रूस बातचीत की मेज पर आए और उन शर्तों को माने जो ट्रंप तय करना चाहते हैं. यह विधेयक रूस के आर्थिक रडार पर चलने वाले हर देश को एक संदेश है कि या तो वे अमेरिका के साथ व्यापार करें या फिर रूसी तेल की भारी कीमत चुकाने को तैयार रहें. हालांकि, ऊर्जा नीति विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा जैसे जानकारों का मानना है कि हमें जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए. उनका तर्क है कि विधेयक का पारित होना एक बात है और प्रशासन द्वारा उसे पूरी कड़ाई से लागू करना दूसरी.


    भारत की चुनौतियां

    रूस फिलहाल भारत के कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है. हालांकि, लुकोइल और रोसनेफ्ट जैसी रूसी कंपनियों पर बढ़ते प्रतिबंधों के कारण आने वाले समय में भारत की खरीद में कुछ गिरावट की संभावना है. भारत ने अब तक पश्चिमी दबाव को दरकिनार कर सस्ते रूसी तेल के दम पर अपनी अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचाया है, लेकिन यदि ट्रंप ने इस 500% टैरिफ के चाबुक को सच में चला दिया, तो भारत को अपने ऊर्जा विकल्पों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है.


    वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का दौर

    क्या दुनिया वास्तव में रूस से पूरी तरह किनारा कर पाएगी? या ट्रंप का यह विधेयक केवल एक रणनीतिक दबाव है? फिलहाल पूरी दुनिया ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है. लेकिन एक बात तय है कि वैश्विक ऊर्जा की शतरंज पर अब अगली चाल वाशिंगटन की होगी, और उसकी गूंज नई दिल्ली से लेकर बर्लिन तक सुनाई देगी. आने वाले महीने यह तय करेंगे कि दुनिया की अर्थव्यवस्था तेल की चमक से रोशन होगी या टैरिफ की आग में झुलसेगी।

  • ड्रीम मिलिट्री बनाने ट्रंप का 1.5 ट्रिलियन बजट का ऐलान; भारत भी पीछे नहीं

    ड्रीम मिलिट्री बनाने ट्रंप का 1.5 ट्रिलियन बजट का ऐलान; भारत भी पीछे नहीं

    वाशिंगटन। अमेरिका 2027 में रक्षा पर पहले से ज्यादा खर्च करने पर विचार कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा बजट बढ़ाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने ज्यादा खर्च करने की क्षमता की वजह टैरिफ से होने वाली कमाई को बताया है। डिफेंस बजट बढ़ाए जाने की तैयारी ऐसे समय पर हो रही है, जब ट्रंप ने हाल ही में वेनेजुएला पर ऐक्शन लिया है और कई देशों पर कार्रवाई के संकेत दे रहे हैं।
    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘सीनेटर्स, कांग्रेसमैन, सेक्रेटरी और अन्य राजनेताओं से लंबी और मुश्किल बातचीत के बाद, मैंने तय किया है कि हमारी देश की भलाई के लिए 2027 के लिए सैन्य बजट 1 ट्रिलियन डॉलर की जगह 1.5 ट्रिलियन डॉलर होगा। खासतौर से ऐसे मुश्किल भरे और खतरनाक समय में।’

    उन्होंने कहा कि ज्यादा खर्च के जरिए अमेरिका ऐसी सेना तैयार कर सकता है, जो किसी भी दुश्मन से देश को सुरक्षित रख सके। अमेरिकी राष्ट्रपति इसे ‘ड्रीम मिलिट्री’ बता रहे हैं।
    टैरिफ को बताया वजह

    ट्रंप ने टैरिफ से होने वाली कमाई का हवाला देते हुए खर्च बढ़ाने की बात कही है। उन्होंने कहा, ‘अगर अन्य देशों से टैरिफ (सीमा शुल्क) के माध्यम से इतनी बड़ी मात्रा में राशि प्राप्त न हो रही होती, जिनमें से कई देशों ने अतीत में संयुक्त राज्य अमेरिका को ऐसे स्तरों पर ‘लूटा’ है जो पहले कभी नहीं देखे गए, तो मैं 1 ट्रिलियन डॉलर की संख्या पर ही टिका रहता।’

    भारत का कितना था 2025 का बजट

    साल 2025-26 के लिए रक्षा मंत्रालय को 6.81 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। खास बात है कि आंकड़े में 2024-25 की तुलना में 9.53 प्रतिशत का इजाफा किया गया था।

    रक्षा मंत्रालय की 1 फरवरी 2025 को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सशस्त्र बलों के पूंजीगत बजट के तहत 1.80 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। साथ ही घरेलू रक्षा उद्योगों से खरीद के लिए 1.12 लाख करोड़ रुपये निर्धारित हुए। रक्षा अनुसंधान और विकास बजट में 12% की बढ़त हुई थी। भारतीय तटरक्षक बल के पूंजी बजट में 43% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई थी।

  • अब ट्रंप भारतीय छात्रों से बोले- आपको अमेरिका से कभी भी निकाला जा सकता है

    अब ट्रंप भारतीय छात्रों से बोले- आपको अमेरिका से कभी भी निकाला जा सकता है

    वॉशिंगटन । भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में पिछले कुछ महीनों में दरार देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विभिन्न फैसलों और बयानों से दोनों देशों में तनाव और बढ़ा है। इस बीच, अमेरिका ने बुधवार को अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को चेतावनी दी है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने दो टूक कहा है कि अमेरिकी कानूनों को तोड़ने से स्टूडेंट वीजा रद्द हो सकता है और यहां तक कि आपको देश से भी निकाला जा सकता है।

    भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”अमेरिकी कानूनों को तोड़ने पर आपके स्टूडेंट वीजा के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

    अगर आपको गिरफ्तार किया जाता है या आप कोई कानून तोड़ते हैं, तो आपका वीजा रद्द किया जा सकता है, आपको देश से निकाला जा सकता है, और आप भविष्य में अमेरिकी वीजा के लिए अयोग्य हो सकते हैं। नियमों का पालन करें और अपनी यात्रा को खतरे में न डालें। अमेरिकी वीजा एक सुविधा है, अधिकार नहीं।”

    अमेरिकी दूतावास समय-समय पर सोशल मीडिया के जरिए चेतावनियां जारी करता रहता है। पिछले दिनों उसने भारत से अमेरिका जाने वाले अवैध अप्रवासियों को एक सख्त पब्लिक चेतावनी जारी की थी।

    चेतावनी में साफ कहा गया कि इमिग्रेशन कानूनों का उल्लंघन करने पर ‘बड़ी क्रिमिनल सजा’ हो सकती है। चेतावनी का यह मैसेज सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, और यह यूनाइटेड स्टेट्स के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में इमिग्रेशन पर बढ़ती सख्ती के दौरान आया।

    अमेरिकी दूतावास ने एक्स पर लिखा था कि अगर आप अमेरिकी कानून तोड़ते हैं, तो आपको कड़ी क्रिमिनल सजा मिलेगी। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन अमेरिका में गैर-कानूनी इमिग्रेशन को खत्म करने और हमारे देश की सीमाओं और हमारे नागरिकों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वीजा नियमों के सख्त होने के कारण, पिछले साल नए इंटरनेशनल एनरोलमेंट में अमेरिका में स्टूडेंट वीजा पर आने वालों की संख्या में 17% की गिरावट आई है। इस बीच, H-1B वीजा आवेदकों को, जो कुशल इंटरनेशनल कर्मचारियों को अमेरिका में रोजगार खोजने की अनुमति देता है, अभूतपूर्व इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।

  • वेनेजुएला अब अमेरिका में बने उत्पाद ही खरीद सकता है … ट्रंप ने जारी किया नया फरमान

    वेनेजुएला अब अमेरिका में बने उत्पाद ही खरीद सकता है … ट्रंप ने जारी किया नया फरमान


    वॉशिंग्टन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बुधवार को बड़ी घोषणा करते हुए वेनेजुएला (Venezuela) के लिए नया फरमान जारी कर दिया है। ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला अब नए तेल सौदे से मिलने वाले पैसे से सिर्फ अमेरिकी-निर्मित उत्पाद (American-Made Products) ही खरीदेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने देश के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं देश की उपराष्ट्रपति ने फिलहाल यह जिम्मेदारी संभालते हुए अमेरिका के साथ सहयोग की बात कही है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “मुझे अभी-अभी बताया गया है कि वेनेजुएला हमारे साथ हुए नए तेल सौदे से मिलने वाले पैसे से सिर्फ अमेरिकी-निर्मित उत्पाद खरीदने जा रहा है। इनमें अमेरिकी कृषि उत्पाद, अमेरिका में बनीं दवाएं, मेडिकल उपकरण, और वेनेजुएला के इलेक्ट्रिक ग्रिड और ऊर्जा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए उपकरण शामिल होंगे।”

    ट्रंप ने आगे कहा, “दूसरे शब्दों में वेनेजुएला अमेरिका को अपना मुख्य भागीदार बनाकर व्यापार करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह एक समझदारी भरा फैसला है और वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों के लिए बहुत अच्छी बात। इस मामले पर आपके ध्यान के लिए धन्यवाद!”


    अमेरिका ही लेगा फैसले

    वहीं बुधवार को वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट ने एक ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला के अंतरिम नेताओं के साथ संपर्क में है। लेविट ने बताया, “ट्रंप सरकार वेनेजुएला में अंतरिम अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। अभी वेनेजुएला में अंतरिम अधिकारियों पर हमारा सबसे ज्यादा कंट्रोल है… उनके फैसले अमेरिका ही लेगा।”


    5 करोड़ बैरल तेल खरीदेगा अमेरिका

    इससे पहले मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को बाजार मूल्य पर तीन से पांच करोड़ बैरल ‘उच्च गुणवत्ता’ वाला तेल उपलब्ध कराएगा। ट्रंप ने लिखा था कि तेल जहाजों द्वारा सीधे अमेरिका पहुंचाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि राष्ट्रपति के रूप में इस पैसे पर उनका नियंत्रण होगा लेकिन इसका उपयोग वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों की भलाई के लिए किया जाएगा।

  • US में लोकप्रियता की तुलना… एक्सपर्ट बोले- मोदी 10 साल से सत्ता में… ट्रंप 3 साल में हो जाएंगे बाहर

    US में लोकप्रियता की तुलना… एक्सपर्ट बोले- मोदी 10 साल से सत्ता में… ट्रंप 3 साल में हो जाएंगे बाहर


    वाशिंगटन।
    वेनेजुएला (Venezuela) के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की निगाहें दूसरे देशों पर भी हैं। वहीं, इसी बीच वह भारत (India) को टैरिफ को लेकर फिर से धमकाते नजर आ रहे हैं। अब जानकारों का मानना है कि वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद थोड़े समय के लिए मिल रहे ये फायदे ट्रंप के पद छोड़ने के बाद खत्म हो सकते हैं। साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की लोकप्रियता की तुलना की जा रही है।

    जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर को अमेरिका को होने वाले लॉन्ग टर्म फायदों पर संदेह है। उन्होंने कहा कि जब ट्रंप 2029 में दफ्तर छोड़ेंगे, तो ये थोड़े समय के फायदों पर विराम लग सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की तरह नहीं है, जहां प्रधानमंत्री मोदी लोकप्रियता के कारण 10 सालों से ज्यादा सत्ता में है। वहीं, ओवल ऑफिस में ट्रंप का कार्यकाल सीमित है।

    उन्होंने कहा कि चीन, रूस और भारत के विपरीत अमेरिका में हर चार साल में नेतृत्व बदलता है। उन्होंने कहा कि इसके चलते अमेरिका में सरकारी उपायों में निरंतरता नहीं रह जाती है और नतीजों में समय लगता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगला राष्ट्रपति ट्रंप के किए कई कामों को पलट सकता है, ठीक वैसे ही जैसे ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति के कामों के साथ किया।

    ब्रेमर ने कहा, ‘ट्रंप ने जो किया उसे अगला राष्ट्रपति बदल भी सकता है। यह शी जिनपिंग नहीं है, यह मोदी भी नहीं है जो 10 साल से ज्यादा समय से देश चला रहे हैं और लोकतंत्र में लोकप्रिय बने हुए हैं। यह ट्रंप हैं, जो 80 साल के हैं और अलोकप्रिय हैं और 3 साल में पद छोड़ देंगे।’

    तेल पर बोले
    ब्रेमर ने कहा कि तेल की वैश्विक दरें, वेनेजुएला में राजनीतिक स्थिरता और ट्रंप के बाद क्या होगा, ये सब तय करेंगे कि काराकास के तेल भंडार का अमेरिका को फायदा हो रहा है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘और तेल। आप जानते हैं कि वेनेजुएला अभी सिर्फ 8 लाख बैरल रोज बना रहा है। यह आंकड़ा 30 लाख बैरल हुआ करता था। इसे बढ़ाने के लिए आपको राजनीतिक स्थिरता चाहिए।’

    उन्होंने कहा, ‘आपको एक ऐसे आर्थिक पर्यावरण की जरूरत है, जिसमें तेल कंपनियां भरोसा कर सकें। आपको उस भरोसे की जरूरत है कि वो बैरल फायदेमंद होंगी और अभी एनर्जी की कीमतें काफी कम हैं।’

    उन्होंने वेनेजुएला से तेल निकाले जाने को लेकर कहा कि तेल कंपनियों का निवेश चक्र, दफ्तर में अमेरिकी राष्ट्रपतियों के रहने से ज्यादा होता है। उन्होंने कहा, ‘आपको इस भरोसे की भी जरूरत होगी कि जिस राजनीतिक व्यवस्था का समर्थन ट्रंप कर रहे हैं, वो 2029 में उनके जाने के बाद भी बनी रहेगी।’

  • मादुरो की गिरफ्तारी पर भड़के किम जोंग उन… ट्रंप को दी चेतावनी- मेरे दोस्त को छोड़ दो, वरना…

    मादुरो की गिरफ्तारी पर भड़के किम जोंग उन… ट्रंप को दी चेतावनी- मेरे दोस्त को छोड़ दो, वरना…


    सियोल।।
    वेनेजुएला (Venezuela) पर अमेरिका (America) की कार्रवाई और फिर राष्ट्रपति निकोलस (President Nicholas) की गिरफ्तारी के मामले ने वैश्विक राजनीति में गजब का तहलका मचा दिया है। दूसरी ओर इस पूरे मामले में वैश्विक राजनीति और गर्म तब हो गई जब इस पूरे मामले में उत्तर कोरिया (North Korea) के नेता किम जोंग उन (Kim Jong Un) भी कूद पड़े। किम जोंग ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर अमेरिका को खुलकर चेतावनी दी है। मादुरो को अपना दोस्त बताते हुए किम जोंग ने कहा कि अगर उन्हें तुरंत रिहा नहीं किया गया तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं।

    मीडिया रिपोर्टस में बताया गया है कि किम जोंग ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए ट्रंप को यहां तक चेताया कि यह टकराव विश्व युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर मादुरो को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की यह कार्रवाई सिर्फ वेनेजुएला ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की शांति के लिए खतरा है। किम जोंग ने यहां तक कह दिया कि ऐसी कार्रवाइयों से विश्व युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।


    किम जोंग ने अमेरिका पर लगाया आरोप

    इस दौरान उत्तर कोरियाई नेता ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में जबरन दखल दे रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। किम जोंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वेनेजुएला की संप्रभुता का सम्मान किया जाए और मादुरो को जल्द रिहा किया जाए।


    रूस समेत ये बड़े देश अमेरिका के खिलाफ

    बता दें कि वेनेजुएला पर अमेरिका के इस कार्रवाई को कई देशों ने गलत ठहराया है। रूस से लेकर कोलंबिया, क्यूबा, चिली, मेक्सिको, ब्राजील, ईरान, स्पेन और जर्मनी तक। इन सभी देशों ने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की है। रूस ने यहां तक कह दिया कि वेनेजुएला को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार है और बाहरी सैन्य हस्तक्षेप अस्वीकार्य है। रूस ने संवाद के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।

    वहीं कोलंबिया ने कहा कि वेनेजुएला पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। कोलंबिया ने यह साफ किया कि वह सैन्य टकराव नहीं चाहता, लेकिन शांति और मानव गरिमा की रक्षा जरूरी है। सुरक्षा कारणों से उसने वेनेजुएला सीमा पर अपनी सेना तैनात की।


    क्या वैश्विक मोड़ ले सकता है अमेरिका-वेनेजुएला तनाव?

    विशेषज्ञों का मानना है कि किम जोंग का यह बयान वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकता है, क्योंकि पहले ही अमेरिका की कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने चिंता जताई है। ऐसे में अमेरिका-वेनेजुएला विवाद अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

  • ट्रंप के बाद पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन ने भी किया सीजफायर कराने का दावा

    ट्रंप के बाद पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन ने भी किया सीजफायर कराने का दावा


    बीजिंग।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के बाद अब चीन (China) भी भारत और पाकिस्तान में सीजफायर (India-Pakistan, ceasefire) कराने का दावा कर रहा है।  चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया कि इस वर्ष चीन द्वारा ‘मध्यस्थता’ किए गए प्रमुख संवेदनशील मुद्दों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भी शामिल रहे। भारत लगातार यह कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है।

    भारत का यह कहना रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सात से 10 मई के दौरान संघर्ष का समाधान दोनों देशों की सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत के माध्यम से हुआ था। भारतीय सशस्त्र बलों ने सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था।

    बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर संगोष्ठी में वांग ने कहा, ‘इस साल, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से किसी भी समय की तुलना में स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के। भू-राजनीतिक उथल-पुथल लगातार फैलती जा रही है।’ उन्होंने कहा, ‘स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, हमने एक वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया है, और लक्षणों और मूल कारणों दोनों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।’

    उन्होंने कहा, ‘गतिरोध वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए चीन के इस दृष्टिकोण का अनुसरण करते हुए, हमने उत्तरी म्यांमा, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजरायल के मुद्दों तथा कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।’


    पाकिस्तान को दी थी मदद

    इस वर्ष 7 से 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में चीन की भूमिका, विशेष रूप से उसके द्वारा पाकिस्तान को प्रदान की गई सैन्य सहायता, गंभीर जांच और आलोचना के दायरे में आ गई। कूटनीतिक मोर्चे पर, चीन ने सात मई को भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने का आह्वान किया था।

    चीन की विदेश नीति संबंधी पहल पर अपने संबोधन में वांग ने भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की अच्छी गति का जिक्र किया। साथ ही अगस्त में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बीजिंग द्वारा आमंत्रित किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘इस वर्ष हमने भारत और उत्तर कोरिया के नेताओं को चीन में आमंत्रित किया। चीन-भारत संबंधों में अच्छी गति देखने को मिली और उत्तर कोरिया के साथ पारंपरिक मित्रता और मजबूत हुई तथा उसे और बढ़ावा मिला।’ उन्होंने यह भी कहा कि एससीओ शिखर सम्मेलन एक शानदार सफलता थी। वांग यी ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ चीन का जुड़ाव अब साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के एक नए चरण में प्रवेश कर गया है, जो अब और तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

  • यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी

    यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी


    मास्को।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia and Ukraine war) को खत्म करने की कोशिशों के बीच एक बार फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. रूस ने सोमवार को आरोप लगाया कि यूक्रेन (Ukraine) ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) के उत्तरी रूस में स्थित एक आवास पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की. रूस का दावा है कि इस कथित हमले में कुल 91 ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिन्हें रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते मार गिराया. शांति समझौतों पर बातचीत के बीच हुए इस हमले से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप खासा नाराज हैं. उनकी पुतिन से बात भी हुई है।

    यूक्रेन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे रूस की ओर से “झूठ का एक और दौर” बताया और कहा कि ऐसे बयान शांति वार्ता को कमजोर करने के लिए दिए जा रहे हैं. इस आरोप-प्रत्यारोप के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है।

    इस पूरे मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बीच में आना पड़ा. ट्रंप ने बताया कि खुद राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें फोन कर इस कथित ड्रोन हमले की जानकारी दी. फ्लोरिडा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात से पहले ट्रंप ने मीडिया से कहा कि पुतिन ने सुबह-सुबह उन्हें बताया कि उन पर हमला हुआ है. ट्रंप ने कहा कि वह इस बात से नाराज हैं, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि यह दावा गलत भी हो सकता है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “एक बात युद्ध के दौरान हमला करने की होती है और दूसरी बात किसी नेता के घर पर हमला करने की. यह ऐसा करने का सही समय नहीं है.” उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर यह घटना सच साबित होती है, तो यह तनाव को और बढ़ा सकती है.

    बीते 24 घंटों में ट्रंप ने पुतिन से दो बार बात की है. इससे एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी. ट्रंप के मुताबिक, पुतिन के साथ उनकी बातचीत “काफी सकारात्मक” रही और कुछ जटिल मुद्दों के बावजूद शांति की उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है.

    हालांकि, इसी बीच राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सैन्य बलों को यूक्रेन के जापोरिज़िया क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण हासिल करने के अभियान को तेज करने के निर्देश दिए हैं. क्रेमलिन ने एक बार फिर मांग की है कि यूक्रेन अपने सैनिकों को डोनबास के उन इलाकों से हटा ले, जहां अब भी उसकी मौजूदगी है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ड्रोन हमले का यह दावा सच साबित होता है, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध में एक और बड़ा तनावपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिससे पहले से नाजुक शांति प्रयासों को गंभीर झटका लग सकता है.