Tag: US

  • US में F-35 का रिटायर्ड पायलट गिरफ्तार, चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त प्रशिक्षण देने का आरोप

    US में F-35 का रिटायर्ड पायलट गिरफ्तार, चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त प्रशिक्षण देने का आरोप


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पर पूर्व अमेरिकी वायु सेना (American Air Force) के एलीट फाइटर पायलट और एफ-35 प्रशिक्षक (F-35 Trainer) गेराल्ड एडी ब्राउन जूनियर को चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त रूप से लड़ाकू प्रशिक्षण देने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि उन्हें शस्त्र निर्यात नियंत्रण अधिनियम (AECA) के उल्लंघन के तहत आरोपित किया गया है। उन्हें 26 फरवरी 2026 को इंडियाना के दक्षिणी जिले में मजिस्ट्रेट जज के समक्ष पेश किया जाना है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए आइजेनबर्ग ने कहा कि अमेरिकी वायु सेना ने मेजर ब्राउन को एक विशिष्ट लड़ाकू पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया था और राष्ट्र की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब उन पर चीनी सैन्य पायलटों को प्रशिक्षण देने का आरोप है। न्याय विभाग के अनुसार, 24 वर्ष से अधिक समय तक अमेरिकी वायु सेना में सेवा देने वाले पूर्व एफ-35 प्रशिक्षक पायलट ब्राउन ने कथित तौर पर अगस्त 2023 से चीनी सैन्य पायलटों (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स – PLAAF) को लड़ाकू विमान प्रशिक्षण प्रदान करने की साजिश रची। यह प्रशिक्षण अंतर्राष्ट्रीय शस्त्र व्यापार विनियम (ITAR) के तहत रक्षा सेवा माना जाता है, जिसके लिए स्टेट डिपार्टमेंट से लाइसेंस जरूरी था, जो ब्राउन के पास नहीं था।

    ब्राउन के सैन्य करियर में संवेदनशील इकाइयों का नेतृत्व, युद्ध अभियानों का संचालन और एफ-4, एफ-15, एफ-16, ए-10 तथा एफ-35 जैसे विमानों पर लड़ाकू पायलट एवं सिम्युलेटर प्रशिक्षक के रूप में सेवा शामिल थी। 1996 में सक्रिय सेवा छोड़ने के बाद उन्होंने वाणिज्यिक पायलट और अमेरिकी रक्षा ठेकेदारों के लिए अनुबंध सिम्युलेटर प्रशिक्षक के तौर पर काम किया। दिसंबर 2023 में ब्राउन चीन गए, जहां उन्होंने PLAAF पायलटों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। शिकायत के मुताबिक, पहले दिन उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के बारे में तीन घंटे तक सवालों के जवाब दिए, दूसरे दिन खुद के बारे में प्रस्तुति दी, और फरवरी 2026 की शुरुआत तक अमेरिका लौटने तक सिम्युलेटर एवं उड़ान प्रशिक्षण संचालित किया। उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के अभियानों पर विस्तृत जानकारी भी साझा की।

    एफबीआई के काउंटरइंटेलिजेंस और जासूसी प्रभाग के सहायक निदेशक रोमन रोजहाव्स्की ने कहा कि ब्राउन ने कथित तौर पर अपने देश के साथ विश्वासघात किया, क्योंकि उन्होंने चीनी पायलटों को उन लोगों के खिलाफ लड़ने का प्रशिक्षण दिया जिनकी रक्षा करने की उन्होंने शपथ ली थी। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है। यह गिरफ्तारी 2017 में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के पूर्व पायलट डैनियल एडमंड डुग्गन के खिलाफ इसी तरह के आरोपों के बाद हुई है। न्याय विभाग ने जोर दिया कि चीन अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नाटो और सहयोगी देशों के वर्तमान एवं पूर्व सैन्य कर्मियों को निशाना बनाना जारी रखे हुए है।

  • अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल

    अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल


    वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने नई सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है।
    ‘खैबर’ नाम की इस चौथी पीढ़ी की मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 2000 किलोमीटर बताई जा रही है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार मिसाइल का प्रक्षेपण एक गोपनीय स्थान से किया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्रीय सुरक्षा हालात संवेदनशील बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच सैन्य तथा कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अमेरिका की ओर से खाड़ी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की खबरें भी सामने आती रही हैं।

    परमाणु वार्ता का तीसरा दौर शुरू

    इसी बीच दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का तीसरा दौर जेनेवा में शुरू हुआ। यह बातचीत ओमान की मध्यस्थता में हो रही है। वार्ता का उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करना और कूटनीतिक समाधान तलाशना है।

    ईरान ने परमाणु हथियार बनाने से किया इनकार

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि उनका देश परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम नहीं कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले ही परमाणु हथियारों के विकास पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।

    पेजेशकियन के अनुसार, “जब सर्वोच्च नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु हथियार नहीं बनाए जाएंगे, तो ईरान उसी नीति पर कायम है।”

    पुराना विवाद, नई कोशिश

    गौरतलब है कि 2000 के दशक की शुरुआत में खामेनेई ने एक धार्मिक आदेश (फतवा) जारी कर परमाणु हथियारों के निर्माण को प्रतिबंधित बताया था। इसके बावजूद अमेरिका लगातार ईरान पर परमाणु क्षमता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार, एक ओर जहां मिसाइल परीक्षण शक्ति प्रदर्शन का संकेत है, वहीं दूसरी ओर जारी कूटनीतिक वार्ता इस बात का संकेत देती है कि दोनों देश टकराव से बचते हुए समाधान की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं।

  • US में हिंदू सबसे अधिक शिक्षित धार्मिक समुदाय, प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    US में हिंदू सबसे अधिक शिक्षित धार्मिक समुदाय, प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में हुआ खुलासा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में हिंदू सबसे अधिक शिक्षित धार्मिक समूह (Hindus most Educated Religious Group) हैं। प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की नई रिपोर्ट (New report ) से यह सामने आया है। 2023-24 के रिलिजियस लैंडस्केप स्टडी (RLS) में पाया गया कि यूएस में रहने वाले 70 प्रतिशत हिंदू वयस्कों के पास कम से कम बैचलर डिग्री या उससे उच्च शिक्षा है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है, जहां सभी अमेरिकी वयस्कों में मात्र 35 प्रतिशत के पास ही बैचलर डिग्री या उससे ज्यादा है। यह अध्ययन अमेरिका में धर्म और सार्वजनिक जीवन पर सबसे व्यापक सर्वेक्षणों में से एक माना जाता है, जिसमें 36908 वयस्कों से जुलाई 2023 से मार्च 2024 तक जानकारी ली गई।

    रिपोर्ट 19 फरवरी 2026 को जारी की गई। हिंदू समुदाय की यह उपलब्धि इमिग्रेशन पैटर्न से जुड़ी हुई है, क्योंकि अधिकांश हिंदू उच्च शिक्षा या कुशल वीजा के माध्यम से अमेरिका आए हैं। इस अध्ययन में हिंदुओं के बाद यहूदी दूसरे स्थान पर हैं, जहां 65 प्रतिशत वयस्कों के पास बैचलर डिग्री या उससे अधिक शिक्षा है। मुसलमान, बौद्ध और ऑर्थोडॉक्स ईसाई भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर हैं। इनमें 40 प्रतिशत से अधिक (मुसलमानों में 44 प्रतिशत) वयस्कों के पास उच्च शिक्षा है। ये अल्पसंख्यक धार्मिक समूह अमेरिकी आबादी का छोटा हिस्सा हैं- हिंदू लगभग 0.5-1 प्रतिशत, मुसलमान 1-1.3 प्रतिशत और यहूदी लगभग 2 प्रतिशत।

    ईसाई समुदाय कुल आबादी का 70%
    अमेरिका में ईसाई समुदाय कुल आबादी का बड़ा हिस्सा लगभग 70 प्रतिशत है, लेकिन उनके कई उपसमूह जैसे इवैंजेलिकल प्रोटेस्टेंट (29 प्रतिशत) और ऐतिहासिक रूप से ब्लैक प्रोटेस्टेंट (24 प्रतिशत) में कॉलेज ग्रेजुएट्स का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से कम है। रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा स्तर में अंतर मुख्य रूप से इमिग्रेशन और जनसांख्यिकीय कारकों से जुड़ा है। हिंदू, मुसलमान और बौद्ध समुदायों में से अधिकांश विदेशी मूल के हैं, जो अमेरिका में उच्च शिक्षा या स्किल्ड जॉब वीजा पर आते हैं। इससे इन समूहों में उच्च शिक्षित व्यक्तियों का अनुपात बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए हिंदुओं में 77 प्रतिशत विदेश में जन्मे हैं।

    रिसर्च के नतीजे क्या कह रहे
    यह पैटर्न दिखाता है कि अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियां कुशल और शिक्षित प्रवासियों को आकर्षित करती हैं, जिससे छोटे धार्मिक समूहों में शिक्षा का स्तर ऊंचा रहता है। कुल मिलाकर यह अध्ययन US में धार्मिक विविधता और शिक्षा के बीच संबंध को उजागर करता है। हिंदू और यहूदी जैसे समूह सबसे आगे हैं, जबकि मुसलमान और अन्य अल्पसंख्यक भी औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह निष्कर्ष अमेरिकी समाज में अल्पसंख्यक समुदायों की सफलता और योगदान को सामने रखता है। साथ ही, इमिग्रेशन के सकारात्मक प्रभाव को भी दर्शाता है।

  • US: जेपीमॉर्गन ने 6 जनवरी 2021 के बाद बंद कर दिए थे ट्रंप के खाते… कोर्ट में बैंक ने पहली बार स्वीकारा

    US: जेपीमॉर्गन ने 6 जनवरी 2021 के बाद बंद कर दिए थे ट्रंप के खाते… कोर्ट में बैंक ने पहली बार स्वीकारा


    वॉशिंगटन।
    छह जनवरी 2021 को अमेरिकी कैपिटल (American Capitol) पर हुए हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप (President Trump) के बैंक खातों को बंद किए जाने का मामला फिर चर्चा में है। जेपीमॉर्गन चेज (JPMorgan Chase) ने पहली बार अदालत में स्वीकार किया है कि फरवरी 2021 में ट्रंप और उनकी कुछ कंपनियों के खाते बंद किए गए थे। यह स्वीकारोक्ति उस मुकदमे के दौरान सामने आई है जिसमें ट्रंप ने बैंक और उसके प्रमुख जेमी डाइमोन पर 5 अरब डॉलर का दावा ठोका है। ट्रंप का आरोप है कि उनके खाते राजनीतिक कारणों से बंद किए गए, जिससे उनके कारोबार को नुकसान हुआ।

    दायर हलफनामे में बैंक के पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डैन विल्कनिंग ने लिखा कि फरवरी 2021 में निजी बैंक और कमर्शियल बैंक से जुड़े कुछ खाते बंद करने की सूचना दी गई थी। अब तक बैंक केवल सामान्य तौर पर खाते बंद करने की नीतियों पर बात करता रहा था, लेकिन यह पहली बार है जब उसने सीधे तौर पर ट्रंप के खातों के बंद होने की पुष्टि की है। बैंक ने पहले कहा था कि यह मुकदमा बेबुनियाद है।


    ट्रंप ने क्या आरोप लगाए

    ट्रंप ने यह मुकदमा पहले फ्लोरिडा की अदालत में दायर किया था, जहां अब उनका मुख्य निवास है। उनका कहना है कि बैंक ने ‘ट्रेड लाइबल’ किया और फ्लोरिडा के अनुचित और भ्रामक व्यापार कानून का उल्लंघन किया। मुकदमे में आरोप है कि जब खाते बंद किए जा रहे थे, तब ट्रंप ने जेमी डाइमोन से व्यक्तिगत रूप से बात की थी और उन्होंने मामले को देखने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    ट्रंप के वकीलों ने आरोप लगाया है कि बैंक ने राष्ट्रपति और उनकी कंपनियों को एक ‘ब्लैकलिस्ट’ में डाल दिया। उनका कहना है कि इस सूची का उपयोग अन्य बैंक भी करते हैं। इससे भविष्य में नए खाते खोलने या सेवाएं लेने में दिक्कत आती है। वकीलों का दावा है कि इससे ट्रंप परिवार और उनके कारोबार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।


    डीबैंकिंग को लेकर फिर बहस तेज

    यह मामला तथाकथित ‘डीबैंकिंग’ की बहस को फिर से तेज कर रहा है। डीबैंकिंग तब होता है जब बैंक किसी ग्राहक के खाते बंद कर देता है या उसे सेवाएं देने से मना कर देता है। पिछले कुछ वर्षों में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। कई रूढ़िवादी नेताओं का आरोप रहा है कि 6 जनवरी की घटना के बाद ‘जोखिम’ के नाम पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जेपीमॉर्गन अब इस केस को न्यूयॉर्क स्थानांतरित कराने की कोशिश कर रहा है, जहां खाते संचालित होते थे। यह ट्रंप का किसी बड़े बैंक के खिलाफ पहला मामला नहीं है। मार्च 2025 में ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने क्रेडिट कार्ड कंपनी कैपिटल वन पर भी इसी तरह का मुकदमा दायर किया था, जो अभी लंबित है।

  • एलियन, UAP और UFO से जुड़े सारे दस्तावेजों को सार्वजनिक करेगा US, ट्रंप ने दिए निर्देश

    एलियन, UAP और UFO से जुड़े सारे दस्तावेजों को सार्वजनिक करेगा US, ट्रंप ने दिए निर्देश


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि एलियन (Alien.), अनजान हवाई घटनाओ (UAP) और अनजान उड़ने वाले ऑब्जेक्ट्स (Unidentified Flying Objects- UFO) से जुड़ी घटनाओं और दस्तावेजों की पहचान करें और उन्हें जारी करें। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल हैंडल पर कहा, लोगों की रुचि को देखते हुए मैं युद्ध सचिवऔर अन्य एजेंसियों व वभागों को निर्देश देता हूं कि वे एलियन्स, न्य ग्रहों पर जीवन, यूएपी और यूएफओ से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू करें।

    ट्रंप ने कहा कि लोगों के इंटरेस्ट और इसकी अहमियत को देखते हुए जो फाइल्स जारी की जाएंगी उसने सभी जानकारियों को शामिल करने की कोशिश होगी। बता दें कि हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक पॉडकास्ट के दौरान एलियन्स की बातें की थीं। उन्होंने कहा था, एलियन वास्तव में हैं लेकिन मैंने अपनी आखों से उन्हें नहीं देखा है। यह बात भी सच है कि एरिया 51 में कोई एलियन नहीं है।


    ओबामा पर गुप्त जानकारी लीक करने का आरोप

    डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा पर आरोप लगाया कि ओबामा ने गुप्त जानकारियां लीक की हैं। ट्रंप ने कहा कि ओबामा ने बड़ी गलती कर दी है। मुझे भी नहीं पता कि एलियन हैं या नहीं लेकिन ओबामा ने जो सीक्रेट इन्फॉर्मेंशन लीक की है, उसकी कोई जरूरत नहीं थी।


    एलियन्स को लेकर क्या बोले थे बराक ओबामा

    ओबामा ने एलियन्स को लेकर सवाल किए जाने पर हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था कि यह ब्रह्मांड बहुत बड़ा है। ऐसे में धरती से बाहर के जीवन के बारे में नकारा तो नहीं जा सकता। उन्होंने कहा था,मेरे कार्यकाल के दौरान एलियन्स को लेकर कोई प्रमाण नहीं मिला था। एरिया 51 से जुड़े मामलों को लेकर उन्होंने कहा था कि वहां कोई एलियन या गुप्त जीव नहीं है। लोग मानते हैं कि एरिया 51 में एलियन के शव हैं लेकिन यह पूरी तरह से गलत धारणा है।

    ओबामा के बयान के बाद ही ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह बात लीक नहीं करनी चाहिए थे। उन्होंने कहा, ओबामा ने जो कुछ भी बताया है वह बेहद संवेदनशील जानकारी थी। हालांकि ट्रंप ने स्पष्ट तौर पर यह नहीं बताया कि आखिर उन्होंने कौन सी सीक्रेट जानकारी लीक कर दी है। ट्रंप से जब एलियन्स को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने खुद भी कहा कि उन्हें एलिन्स के अस्तित्व के बारे में कोई जानकारी नहीं है।


    क्या है एरिया 51?

    अमेरिका के नेवादा में एक बेहद गोपनीय अमेरिकी वायुसेना का अड्डा है जिसे एरिया 51 के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि यहां एलिनय के शवों और क्रैश हुए यूएफओ को रखा जाता है। 2013 में सीआईए ने इससे जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए बताया था कि शीत युद्ध के दौरान इस ठिकाने का इस्तेमाल जासूसी विमानों के परीक्षण के लिए किया जाता था। 2022 में भी अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने दावा किया था कि एलियन्स के धरती पर आने से संबंधित कोई सबूत नहीं मिला है। ऐसी अगर कोई भी वस्तु मिली है तो जांच के बाद ये सामान्य उपकरण या फिर तकनीकी भ्रम ही पाई गई हैं।

  • ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है US…. मिडल ईस्ट में तैनात किया बड़ा सैन्य बेड़ा!

    ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है US…. मिडल ईस्ट में तैनात किया बड़ा सैन्य बेड़ा!


    वाशिंगटन।
    ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi) और उनका प्रतिनिधिमंडल पिछले सप्ताह ओमान (Oman) में हुए अप्रत्यक्ष वार्ता के पहले दौर के बाद रविवार को स्विट्जरलैंड (Switzerland) की राजधानी जिनेवा (Geneva) पहुंचा है। ओमान जिनेवा में होने वाली वार्ता में मध्यस्थता करेगा।
    ×

    अमेरिका (America) ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है और अगर दोनों देशों के बीच जारी परमाणु वार्ता फेल हुई तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह दावे पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी (Former US Defense Official) ने किए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बीते कई हफ्तों से जारी तनाव के बीच अमेरिका की पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर इंटरनेशनल सिक्योरिटी अफेयर्स सेलेस्टे ए. वॉलेंडर (Celeste A. Wallander) ने कहा है कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बहुत बड़ा सैन्य बेड़ा तैनात कर दिया है और यह इस बात का इशारा है कि अगर बातचीत फेल होती है तो अमेरिका ईरान पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।

    पूर्व पेंटागन अधिकारी ने एक इंटरव्यू में यह बातें कही हैं। वॉलेंडर के मुताबिक अमेरिका ने इलाके में अपना सबसे बड़ा सैन्य बेड़ा यूंही नहीं भेजा है या यह सिर्फ संदेश देने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका ने ईरान पर पहले से कहीं ज्यादा दबाव बनाया है और उसे सामान्य डिटरेंस सिग्नलिंग के बजाय संभावित मिलिट्री एक्शन की चेतावनी के तौर पर समझा जाना चाहिए।

    युद्ध की तैयारी कर रहा अमेरिका
    वॉलेंडर ने कहा कि अमेरिका इमरजेंसी की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा, “अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में जिस तरह के मिलिट्री एयरक्राफ्ट कैरियर भेजे हैं, वे ईरान पर दबाव डालने के लिए अमेरिका द्वारा पहले की गई मिलिट्री डिप्लॉयमेंट की तुलना में काफी अलग हैं।” उन्होंने आगे कहा कि हालांकि इस तरह की तैनाती संदेश देने और डराने के लिए काम आ सकती हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति से पता चलता है कि अमेरिका सिर्फ ताकत नहीं दिखा रहा है। बल्कि अमेरिका इमरजेंसी के लिए तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ बातचीत करने के तरीके खोजने होंगे।”


    एक और युद्धपोत तैनात

    पूर्व पेंटागन अधिकारी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सबसे उन्नत और परमाणु संचालित विमानवाहक पोत ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ और उसके स्ट्राइक ग्रुप को कैरिबियन सागर से हटाकर पश्चिम एशिया में तैनात करने का आदेश दिया है। यह युद्धपोत अब फारस की खाड़ी और अरब सागर क्षेत्र में पहले से मौजूद ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ और उसके सहायक बेड़े के साथ शामिल हो गया है। इससे ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि ओमान में ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम पर चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता में कोई ठोस परिणाम ना मिलने से अमेरिका असंतुष्ट है।


    ट्रंप ने फिर दिया सत्ता परिवर्तन का इशारा

    इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिनों एक बार फिर कहा है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता। ईरान में इस्लामी शासन के अंत के प्रयासों के बारे में पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने कहा, ”इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता। वे 47 सालों से सिर्फ बातें कर रहे हैं।” वहीं विमानवाहक पोत की तैनाती के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, “अगर हम कोई समझौता नहीं कर पाए, तो हमें इसकी जरूरत पड़ेगी।” हालांकि अरब देशों ने पहले ही चेतावनी दी है कि किसी भी हमले से क्षेत्रीय संघर्ष भड़क सकता है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया अब भी गाजा पट्टी में इजराइल-हमास युद्ध के प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहा है।


    दूसरे दौर की बातचीत जल्द

    इस बीच ईरान और अमेरिका मंगलवार को जिनेवा में अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के दूसरे दौर में प्रवेश करेंगे। ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त रवांची ने तेहरान में बीबीसी को दिए साक्षात्कार में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि किसी समझौते तक पहुंचने के लिए अमेरिका को अपनी गंभीरता साबित करनी होगी। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईमानदारी दिखाता है, तो दोनों पक्षों के बीच पुनः शुरू हुई अप्रत्यक्ष वार्ताएं किसी समझौते तक पहुंच सकती हैं। बता दें कि दोनों देशों के बीच वार्ता का पहला दौर छह फरवरी को ओमान की राजधानी मस्कट में हुआ था। रवांची ने कहा कि ईरान की ओर से 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम को काफी हद तक निष्क्रिय (डायल्यूट) करने की पेशकश इस बात का प्रमाण है कि देश समझौता करना चाहता है। उन्होंने कहा, “अगर वे प्रतिबंधों पर बात करने को तैयार हैं, तो हम इस मुद्दे और अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अन्य विषयों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।”

  • भारत से व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटा अमेरिका…डील में रूस से तेल खरीदी बंद करने का जिक्र

    भारत से व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटा अमेरिका…डील में रूस से तेल खरीदी बंद करने का जिक्र


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ (White House) ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका और भारत व्यापार (USA-India Trade) पर अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। ‘व्हाइट हाउस’ ने एक दस्तावेज (फैक्ट शीट) में कहा कि दोनों देश सेवाओं एवं निवेश, श्रम तथा सरकारी खरीद सहित शेष मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत जारी रखेंगे।

    फैक्टशीट में लिखा है कि व्यापार समझौता भारत के 140 करोड़ से अधिक लोगों के बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोल देगा। राष्ट्रपति ट्रंप भारत द्वारा रूसी तेल खरीदना बंद करने की प्रतिबद्धता को देखते हुए, भारतीय आयात पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटाने पर सहमत हैं और राष्ट्रपति ने शुक्रवार को कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर उसे हटा भी दिया है। साथ ही, अमेरिका पारस्परिक टैरिफ को 25 से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।


    अमेरिका के कृषि उत्पादों पर जीरो टैरिफ

    फैक्टशीट के मुताबिक, भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों, सूखे अनाज, लाल ज्वार, मेवे, ताजे-प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब, स्पिरिट अन्य उत्पादों सहित अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ को समाप्त या कम करेगा।


    भारत डिजिटल सेवा कर हटाएगा:

    भारत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करेगा। साथ ही, भारत अपने डिजिटल सेवा करों को हटाएगा।


    बाधाएं हटाने को जारी रखेगा बातचीत

    अमेरिका और भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते के संदर्भ की शर्तों में निर्धारित रोडमैप के अनुरूप कई मुद्दों पर बातचीत जारी रखेंगे। इसमें शेष टैरिफ बाधाओं, अतिरिक्त गैर-टैरिफ बाधाओं, व्यापार में तकनीकी बाधाओं, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, अच्छी नियामक प्रथाओं, व्यापार उपचारों, सेवाओं और निवेश, बौद्धिक संपदा, श्रम, पर्यावरण, सरकारी खरीद और राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों की व्यापार-विकृत या अनुचित प्रथाओं को संबोधित करना शामिल होगा।

  • Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील

    Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) में जल्द ही बड़ी ट्रेड डील (Big Trade Deal) होने के आसार हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (Indian Foreign Minister S. Jaishankar) की आगामी अमेरिका यात्रा के दौरान डील पर बड़ा फैसला आ सकता है। इसी बीच एक सर्वे से पता चला है कि भारतीय चाहते हैं कि भारत सरकार टैरिफ का जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को टैरिफ से ही दे।

    एक सर्वे के अनुसार, उत्तर देने वाले करीब 45 फीसदी लोगों ने मोदी सरकार से जवाबी टैरिफ लगाने की अपील की है। सर्वे से पता चला है कि सिर्फ 6 प्रतिशत ही मानते हैं कि भारत सरकार को ट्रंप की मांगों को स्वीकार कर लेना चाहिए। जबकि, 34 फीसद उत्तरदाता जीएसटी में कमी और ऐसे ही उपाय करने के पक्ष में हैं।


    भारत और ईयू में हुई बड़ी डील

    भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एफटीए पर वार्ता के समापन की घोषणा की थी। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को 27 देशों वाले यूरोपीय संघ में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय संघ से लग्जरी कारों और वाइन का आयात सस्ता हो जाएगा।

    करीब दो दशक तक चली बातचीत के बाद हुए इस समझौते से भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग दो अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और यूरोपीय संघ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक इकाई है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ किया गया मुक्त व्यापार समझौता (FTA) महत्वाकांक्षी भारत के लिए है और इससे देश के विनिर्माताओं के लिए नए बाजार खुलेंगे। उन्होंने उद्योग जगत से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।

  • अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत

    अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत


    नई दिल्ली। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रम्प सरकार भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में से आधा हटाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी कम कर दी है। बेसेंट ने यह दावा किया कि 25% टैरिफ ने भारत की रूसी तेल खरीद घटाने में असर दिखाया है और अब राहत देने का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया और कहा कि टैरिफ अभी भी लागू हैं,
    लेकिन धीरे-धीरे इन्हें हटाने की संभावना है।

    अमेरिका ने अगस्त 2025 में भारत पर दो बार 25-25% टैरिफ लगाए थेपहला व्यापार घाटे के आधार पर और दूसरा रूस से तेल खरीदने के कारण। बेसेंट ने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देश भारत पर टैरिफ इसलिए नहीं लगा रहे क्योंकि वे भारत के साथ बड़े व्यापार समझौते के लिए इच्छुक हैं, जबकि यूरोप खुद रिफाइंड तेल खरीदकर रूस की मदद कर रहा है।

    बेसेंट 500% टैरिफ के प्रस्ताव पर भी बोले
    बेसेंट ने कहा कि रूसी तेल खरीदने पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर ग्राहम ने रखा है, लेकिन ट्रम्प को इसकी जरूरत नहीं है।

    राष्ट्रपति के पास पहले से ही IEEPA कानून के तहत राष्ट्रीय आपात स्थिति का हवाला देकर अन्य देशों पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

    भारत ने रूस से तेल खरीद घटाई, पर पूरी तरह नहीं रोकी
    अमेरिकी दावों के बावजूद भारत सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीद अभी भी जारी है और भारत अपनी ऊर्जा नीति अपने हितों के आधार पर तय करता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में भारत की रूस से तेल खरीद में गिरावट आई और वह तीसरे नंबर पर खिसक गया। वहीं तुर्की दूसरे सबसे बड़े खरीदार बन गया।

    चीन अभी भी रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है।

    भारत की खरीद में गिरावट का कारण
    रूस ने अब तेल की छूट घटा दी है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत भी कम हो गई है, जिससे भारत के लिए रूस से तेल खरीदना पहले जैसा लाभकारी नहीं रहा। इसके अलावा शिपिंग, बीमा और भुगतान में दिक्कतें भी बढ़ीं। इसी वजह से भारत सऊदी, UAE और अमेरिका जैसे स्थिर सप्लायर्स से भी तेल खरीद बढ़ा रहा है।

    अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता और टैरिफ में नरमी
    अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की बातचीत चल रही है, ऐसे में टैरिफ घटाने के संकेत दोनों देशों के रिश्तों में नरमी की तरफ माना जा रहा है।
    अमेरिका के टैरिफ में राहत के संकेत से भारत-यूएस संबंधों में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन रूस से तेल खरीद पर भारत की नीति अभी भी अपने हितों पर आधारित है।

  • अमेरिका ने 75 देशों के लिए सस्पेंड किया वीजा, पाकिस्तान ने तोड़ी चुप्‍पी – हम US के साथ…

    अमेरिका ने 75 देशों के लिए सस्पेंड किया वीजा, पाकिस्तान ने तोड़ी चुप्‍पी – हम US के साथ…

    वाशिंगटन। अमेरिका ने पाकिस्तान समेत 75 देशों को बड़ा झटका दिया है। उसने 21 जनवरी से इन देशों के लिए इमिग्रेशन वीजा को सस्पेंड करने का फैसला लिया है। ट्रंप सरकार का यह फैसला पाकिस्तानियों के लिए किसी बेइज्जती से कम नहीं है, क्योंकि पिछले कुछ समय में पाकिस्तान और अमेरिका की करीबी बढ़ी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर व्हाइट हाउस का दौरा कर चुके हैं, जहां ट्रंप ने उनकी जमकर तारीफ भी की थी। ऐसे में अब उसे वीजा बैन वाले 75 देशों की लिस्ट में डालना पाकिस्तान को उसकी हैसियत दिखाने जैसा है।

    इस मामले पर पाकिस्तान ने गुरुवार को चुप्पी तोड़ी है। उसने नपे-तुले अंदाज में कहा है कि हम अमेरिका के साथ संपर्क में है।

    पाकिस्तान ने कहा कि वह अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है और उम्मीद है कि वॉशिंगटन द्वारा अपने इमिग्रेशन सिस्टम की अंदरूनी समीक्षा पूरी करने के बाद रूटीन वीजा प्रोसेसिंग फिर से शुरू हो जाएगी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसने इस घोषणा पर ध्यान दिया है और इस कदम के दायरे और अवधि के बारे में स्पष्टीकरण के लिए अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क में है।

    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, “हम और जानकारी हासिल करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं। यह एक बदलती हुई खबर है जिस पर हम नजर रख रहे हैं। हम समझते हैं कि यह अमेरिकी इमिग्रेशन नीतियों और सिस्टम की समीक्षा की एक आंतरिक प्रक्रिया है।” प्रवक्ता ने आगे कहा कि पाकिस्तान इस घटनाक्रम को अमेरिका की आंतरिक नीति समीक्षा का हिस्सा मानता है और उम्मीद जताई कि समीक्षा पूरी होने के बाद सामान्य वीजा प्रोसेसिंग फिर से शुरू हो जाएगी।

    पाकिस्तान के साथ-साथ बांग्लादेश को भी झटका

    75 देशों के नागरिकों के लिए वीजा जारी करने की प्रक्रिया रोकने वाले अमेरिकी फैसले से सिर्फ पाकिस्तान को ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश को भी झटका लगा है। दरअसल, इस लिस्ट में बांग्लादेश भी शामिल है। यह कदम ऐसे प्रवासियों पर नकेल कसने के प्रयासों का हिस्सा है जो सरकार पर बोझ बन सकते हैं। अमेरिका के विदेश विभाग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अमेरिकी विदेश विभाग उन 75 देशों के लिए आप्रवासी वीजा जारी नहीं करेगा जिनके प्रवासी अमेरिकी जनता की कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग करते हैं। यह प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा जब तक अमेरिका यह सुनिश्चित नहीं कर लेता कि नए आप्रवासी अमेरिकी जनता से धन संसाधन का दोहन नहीं करेंगे।”