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  • क्यूबा के राष्ट्रपति की दो टूक…. बोले- US ने सैन्य कार्रवाई की तो उनका देश जवाब देने को तैयार….

    क्यूबा के राष्ट्रपति की दो टूक…. बोले- US ने सैन्य कार्रवाई की तो उनका देश जवाब देने को तैयार….


    हवाना।
    क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल (Cuban President Miguel Diaz-Canel) ने गुरुवार को कहा कि क्यूबा (Cuba) नहीं चाहता कि अमेरिका (America) उस पर सैन्य कार्रवाई करे। उन्होंने कहा, अगर ऐसा होता है तो उनका देश लड़ने के लिए तैयार है। डियाज-कैनेल ने यह बात एक रैली में कही, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। यह रैली क्यूबा की क्रांति के 65 साल पूरे होने पर आयोजित की गई थी, जब क्यूबा ने खुद को समाजवादी देश घोषित किया था।

    डियाज-कैनेल ने कहा, यह बेहद चुनौतीपूर्ण समय है और हमें एक बार फिर गंभीर खतरों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, जैसे 16 अप्रैल 1961 को थे। इन खतरों में (संभावित) सैन्य हमला भी शामिल है। हम यह नहीं चाहते, लेकिन इससे बचने के लिए तैयारी करना हमारा कर्तव्य है और अगर यह टालना संभव न हो, तो हमें इसे हराना होगा।


    अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या चेतावनी दी?

    उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही, जब दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। अमेरिका की ऊर्जा नाकेबंदी के कारण क्यूबा का संकट और गहरा गया है। इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ जंग खत्म होने के बाद उनका प्रशासन क्यूबा पर फोकस कर सकता है। उन्होंने कहा, हम इसे खत्म करने के बाद क्यूबा की ओर भी जा सकते हैं। उन्होंने क्यूबा को ‘विफल देश’ बताया और कहा कि यह लंबे समय से खराब तरीके से चलाया जा रहा है।

    जनवरी के शुरुआत में ट्रंप ने पहले भी क्यूबा में दखल की धमकी दी थी, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला किया और वहां से आने वाले तेल की आपूर्ति रोक दी। कुछ हफ्तों बाद ट्रंप ने उन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी, जो क्यूबा को तेल बेचते हैं या उपलब्ध कराते हैं। ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माता-पिता 1950 के दशक में क्रांति से पहले क्यूबा से प्रवास कर गए थे। दोनों ने क्यूबा की सरकार को अक्षम और दमनकारी बताया है।

    डियाज-कैनेल ने उन पर आरोप लगाया कि वे एक ऐसा ‘कहानी’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा, क्यूबा असफल देश नहीं है। क्यूबा एक घिरा हुआ देश है। क्यूबा एक ऐसा देश है, जो कई तरह के हमलों का सामना कर रहा है। इनमें आर्थिक युद्ध, कड़ी नाकेबंदी और ऊर्जा नाकेबंदी शामिल हैं।

    उन्होंने कहा, क्यूबा एक ऐसा देश है जिसे धमकाया जाता रहा है, लेकिन वह झुकता नहीं है। हर चीज के बावजूद समाजवाद की वजह से क्यूबा एक ऐसा देश है, जो संघर्ष करता है, आगे बढ़ता है और याद रखिए, यह देश जीतकर रहेगा।

    क्यूबा और अमेरिका दोनों ने माना है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत चल रही है। लेकिन इसके बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। क्यूबा के राष्ट्रपति ने क्रांति से मिली उपलब्धियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि देश की समाजवादी व्यवस्था के कारण निशुल्क शिक्षा मिली है, जिससे हजारों पेशेवर तैयार हुए। लेकिन अब संकट के कारण उनमें से कई लोगों को देश छोड़ना पड़ा है।

  • होर्मुज की नाकेबंदी….जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए US ने तैनात किए 15 युद्धपोत

    होर्मुज की नाकेबंदी….जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए US ने तैनात किए 15 युद्धपोत


    वाशिंगटन।
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच गजब की तनातनी शुरू हो गई है। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में स्थित इस अहम समुद्री रास्ते पर ईरान के बाद अमेरिका ने पहरा लगा दिया है, जिसके बाद तनाव बढ़ता ही जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अपनी धमकियों के बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए पूरा दम लगा दिया है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए गए हैं, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों के आसपास नाकेबंदी लागू कर रहे हैं।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड फोर्स ने बताया है कि अमेरिका बहुत सख्ती से नाकेबंदी लागू कर रहा है। ऑपरेशन में अमेरिका का खास युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली (LHA-7) भी शामिल है। यहां से एफ-35बी लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट, एमवी-22 ओस्प्रे विमान और हेलिकॉप्टर लगातार होर्मुज की ओर भेजे जा रहे हैं। CENTCOM ने बताया कि यूएसएस ट्रिपोली खास तरह से डिजाइन किया गया है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा फाइटर जेट तैनात किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर यह जहाज 20 से ज्यादा एफ-35बी जेट ऑपरेट कर सकता है।


    नाकेबंदी शुरू

    CENTCOM के मुताबिक, यह नाकेबंदी तय समय से शुरू कर दी गई है और इसे सख्ती से लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले हर जहाज पर नजर रखी जाएगी। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि जो जहाज ईरान के अलावा दूसरे देशों के बंदरगाहों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे हैं, उन्हें नहीं रोका जाएगा। CENTCOM ने एक बयान में कहा, “नाकेबंदी सभी देशों के उन पोतों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी जाएगी।”

    वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान की कोई फास्ट अटैकर जहाज़ें नाकेबंदी के पास आईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। हालांकि विश्लेषकों का कहना कि अमेरिका के लिए केवल बल प्रयोग के जरिये जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा। फिलहाल यह स्पष्ट भी नहीं है कि नाकेबंदी कैसे काम करेगी या ईरान जवाब में क्या कदम उठाएगा।


    नहीं हो पाया था युद्धविराम

    इससे पहले अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी को हुए सशर्त युद्ध-विराम समझौते को स्थायी शांति में बदलने के लिए पिछले शनिवार को पाकिस्तान में हुई बातचीत बेनतीजा रही थी, जिसके बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को निशाना बनाया है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू होगी या नहीं, इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।


    ईरान ने दी बड़ी धमकी

    अमेरिकी एक्शन के जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के मुताबिक, “फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं।” ईरानी सेना ने कहा, “इस क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।”

  • US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… जानिए क्या है इसकी वजह?

    US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… जानिए क्या है इसकी वजह?


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी (Attorney General Pam Bondi) की सराहना करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त और वफादार सहयोगी बताया। ट्रंप ने बताया कि पैम बॉन्डी निजी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। ट्रंप ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के रूप में पैम ने देशभर में अपराध पर कड़ा प्रहार किया। वहीं, डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है।


    टॉड ब्लैंच संभालेंगे कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल का जिम्मा

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा, ‘पैम बॉन्डी एक महान अमेरिकी देशभक्त और एक वफादार दोस्त हैं, जिन्होंने पिछले एक साल से मेरे अटॉर्नी जनरल के तौर पर पूरी निष्ठा से सेवा की है। पैम ने पूरे देश में अपराधों पर नकेल कसने का जबरदस्त काम किया है, जिसके चलते हत्याओं की दर 1900 के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। हम पैम से बहुत प्यार करते हैं, और वह अब निजी क्षेत्र में एक बेहद जरूरी और अहम नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। वहीं, हमारे डिप्टी अटॉर्नी जनरल जो कि एक बेहद प्रतिभाशाली और सम्मानित कानूनी विशेषज्ञ हैं, टॉड ब्लैंच, अब कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के तौर पर कार्यभार संभालेंगे।’


    विवादों भरा पैम बॉन्डी का कार्यकाल

    पैम बॉन्डी के कार्यकाल में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया और कई अनुभवी अधिकारियों ने खुद इस्तीफा दे दिया। इससे विभाग के अंदर अस्थिरता और तनाव का माहौल बन गया। सबसे बड़ा विवाद जेफरी एपस्टीन केस से जुड़ा रहा। जेफरी एपस्टीन के ट्रैफिकिंग मामले की फाइलों को लेकर बॉन्डी पर भारी दबाव था। उन्होंने पहले दावा किया था कि उनके पास एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट मौजूद है, लेकिन बाद में विभाग ने माना कि ऐसा कोई दस्तावेज है ही नहीं। इस मामले को लेकर उन्हें अपने ही समर्थकों की आलोचना झेलनी पड़ी।


    पैम बॉन्डी पर लगे कई आरोप

    बॉन्डी पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच शुरू कराई। इनमें जेरोम पॉवेल, लेटिशिया जेम्स, जेम्स कोमी और जॉन ब्रेनन जैसे नाम शामिल थे। हालांकि इन मामलों में से कई को अदालतों ने खारिज कर दिया, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल और बढ़ गए। डेमोक्रेट नेताओं ने बॉन्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने न्याय विभाग को बदले का हथियार बना दिया। वहीं खुद बॉन्डी का कहना था कि वह विभाग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए काम कर रही थीं और पिछली सरकार में हुई कथित गलतियों को सुधार रही थीं।

    ट्रंप के साथ उनका रिश्ता बेहद करीबी माना जाता था। वह खुले तौर पर ट्रंप का समर्थन करती थीं और कई बार सार्वजनिक मंचों पर उनकी तारीफ भी करती थीं। लेकिन समय के साथ ट्रंप खुद भी उनके काम से नाखुश दिखे, खासकर तब जब वह उनके राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई नहीं कर पाईं। बॉन्डी के हटने के साथ ही ट्रंप के शासन में न्याय विभाग में लगातार हो रहे बदलाव की एक और कड़ी जुड़ गई है। उनके दोनों कार्यकाल में कई अटॉर्नी जनरल या तो हटाए गए या इस्तीफा देने पर मजबूर हुए, जिससे यह साफ होता है कि इस पद पर स्थिरता बनाए रखना ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।


    राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल का शपथ

    बता दें एक दिन पहले बुधवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कोलिन मैकडॉनल्ड को राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ दिलाई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ लेने से पहले कोलिन मैकडॉनल्ड का परिचय कराते हुए कहा, ‘कोलिन जिन कामों को करेंगे, उनमें से एक यह पक्का करना है कि कोई भी धोखाधड़ी इतनी छोटी या इतनी बड़ी न हो कि उसे नजरअंदाज किया जा सके।’ राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल की शपथ लेने के बाद कोलिन मैकडॉनल्ड ने कहा, ‘मैं दिन-रात बिना थके काम करूंगा, ताकि यह पक्का कर सकूं कि अगर कोई आपके टैक्स के पैसे चुराने की हिम्मत करता है तो उस गलत फैसले के बाद उसे एक संघीय अभियोजक का सामना करना पड़े।’

  • होर्मुज पर ट्रंप की नीति से भड़के अमेरिकी सांसद, युद्ध खर्च पर भी उठाए सवाल

    होर्मुज पर ट्रंप की नीति से भड़के अमेरिकी सांसद, युद्ध खर्च पर भी उठाए सवाल

    वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। डेमोक्रेटिक सांसद क्रिस मर्फी ने ट्रंप की रणनीति पर तीखा हमला करते हुए इसे “पागलपन” करार दिया है।

    मर्फी ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट खुला हुआ था, लेकिन अब अमेरिका उस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहा है जिसे उसने खुद पैदा किया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ संघर्ष पर अमेरिका प्रतिदिन करीब दो अरब डॉलर खर्च कर रहा है, जो बेहद बड़ी राशि है।

    सांसद ने यह भी कहा कि युद्ध में अमेरिकी नागरिकों की जान जा रही है और देश में कई परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष जारी रहा तो ऐसी संख्या और बढ़ सकती है। साथ ही वैश्विक स्तर पर ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल का भी जिक्र किया।

    होर्मुज पर बढ़ा तनाव
    अमेरिका और Israel के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्ती बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान कुछ मित्र देशों के जहाजों को ही गुजरने दे रहा है और अन्य टैंकरों पर हमले या शुल्क लगाने की चेतावनी दे रहा है।

    इस बीच ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ाते हुए कहा कि फिलहाल ईरानी ऊर्जा संयंत्रों पर बमबारी टाली जाएगी। हालांकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम वार्ता अभी भी गतिरोध में बताई जा रही है।
    ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps ने दावा किया कि उसने होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन जहाजों को चेतावनी देकर वापस भेज दिया। गार्ड्स के अनुसार यह मार्ग “दुश्मन देशों” से जुड़े जहाजों के लिए बंद है।

    क्षेत्र में बढ़ते सैन्य जमावड़े के बीच अमेरिका ने अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं, जबकि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में Hezbollah के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए और सैनिक भेजे हैं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • ईरान को अमेरिका की चेतावनी- हार नहीं मानी तो होगा और भीषण हमला

    ईरान को अमेरिका की चेतावनी- हार नहीं मानी तो होगा और भीषण हमला


    वॉशिंगटन.
     अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब और गहरा होता जा रहा है। जहां एक ओर युद्धविराम को लेकर बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी और सैन्य दबाव तेज हो गया है। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि वार्ता अभी डेड एंड पर नहीं पहुंची है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज कर सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान अपनी सैन्य हार को स्वीकार नहीं करता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले से भी अधिक कड़ा कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

    पाकिस्तान में संभावित बैठक पर बयान

    लेविट ने कहा कि पाकिस्तान में ईरान से वार्ता को लेकर कई अटकलें हैं, लेकिन व्हाइट हाउस द्वारा आधिकारिक घोषणा के बिना किसी को भी इसे मान्य नहीं समझना चाहिए। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप धमकी नहीं देते, बल्कि कार्रवाई करते हैं। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि पिछली गलत गणना ने उनकी वरिष्ठ नेतृत्व टीम, नौसेना, वायुसेना और एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ तीन दिनों तक उपजाऊ बातचीत की, जिसके कारण कुछ हमलों को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया। ईरान के लिए यह एक और अवसर है कि वे अपने परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से छोड़ें और अमेरिका व उसके सहयोगियों को खतरा न बनें।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर फोकस
    अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी सैन्य रणनीति का एक प्रमुख लक्ष्य होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से तेल टैंकरों के गुजरने का निर्णय केवल राष्ट्रपति ट्रंप ही कर सकते हैं। फिलहाल इस बारे में कोई निश्चित समयसीमा नहीं है, लेकिन प्रशासन इस पर तेजी से काम कर रहा है।

    लेविट ने यह भी कहा कि ट्रंप ने यह दिखाया है कि वे मुक्त दुनिया के नेता और सबसे शक्तिशाली सेना के प्रमुख हैं। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों में यह साबित किया कि अमेरिका के सहयोगी उनके नेतृत्व में फैसलों का समर्थन करते हैं, जो अमेरिका और वैश्विक हितों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    ट्रंप-शी जिनपिंग शिखर वार्ता तय
    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने जानकारी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच लंबे समय से प्रस्तावित बैठक अब 14 और 15 मई को बीजिंग में आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह बैठक दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष का निष्कर्ष चर्चा का पूर्व शर्त नहीं था। केवल बैठक की तारीख को पुनर्निर्धारित किया गया।

    साथ ही, आगे चलकर राष्ट्रपति ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन की मेजबानी वॉशिंगटन डीसी में भी करेंगे। इस पारस्परिक दौरे की तारीखों की घोषणा फिलहाल बाद में की जाएगी। यह पहल दोनों वैश्विक शक्तियों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

    ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का असर
    प्रेस ब्रीफिंग में लेविट ने बताया कि अमेरिकी सेना द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अब तक बड़ी सफलता हासिल कर चुका है। उन्होंने दावा किया कि तीन हफ्तों के भीतर 9,000 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया है। उनके अनुसार, इस अभियान के बाद ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में लगभग 90% की कमी आई है। साथ ही, अमेरिका ने ईरान की नौसेना को भी भारी नुकसान पहुंचाया है और 140 से अधिक नौसैनिक जहाजों को नष्ट किया गया है।

    ईरान की नौसेना के 140 से अधिक जहाज, जिनमें लगभग 50 माइन लेयर शामिल हैं, नष्ट किए गए। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी तीन-सप्ताह के अभियान में सबसे बड़ी नौसेना ध्वंस कार्रवाई है। अमेरिका ईरान की रक्षा औद्योगिक क्षमता को भी व्यवस्थित नष्ट कर रहा है, ताकि भविष्य में क्षेत्रीय खतरे को रोका जा सके। लेविट ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ऊर्जा के मुक्त प्रवाह और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने पर पूरी तरह से केंद्रित है।

    लेविट ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के प्रमुख सदस्य हैं और उन्होंने पूरे प्रशासनिक कार्यकाल में महत्वपूर्ण वार्ता में हिस्सा लिया है, जिनमें इस्राइल और गाजा के बीच युद्धविराम और बंधकों की रिहाई शामिल है।

    घरेलू मुद्दों पर भी हमला
    प्रेस सचिव ने इस दौरान अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सैंक्चुअरी सिटी नीतियों को लेकर डेमोक्रेटिक राज्यों की आलोचना करते हुए कहा कि अवैध प्रवासियों को सुरक्षा देना अमेरिकी नागरिकों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया आखिर कितने और अमेरिकियों की जान जाएगी, तब जाकर यह नीतियां खत्म होंगी?

  • UN में ब्रिटेन के खिलाफ किस प्रस्ताव पर भारत ने किया वोट? लंदन की बढ़ी टेंशन

    UN में ब्रिटेन के खिलाफ किस प्रस्ताव पर भारत ने किया वोट? लंदन की बढ़ी टेंशन


    संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन को एक बड़ा झटका लगा है. अफ्रीकी देशों की मांग पर UN जनरल असेंबली में एक प्रस्ताव पास किया गया है, जिसमें ब्रिटेन और अन्य पूर्व उपनिवेशवादी देशों से ट्रांसअटलांटिक गुलाम व्यापार के लिए मुआवजा देने की मांग की गई है. इस प्रस्ताव में गुलाम व्यापार को मानवता के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध बताया गया है.

    यह प्रस्ताव अफ्रीकी देश घाना की ओर से अफ्रीकी संघ के तत्वावधान में पेश किया गया था. इस पर हुए वोटिंग में 124 देशों ने समर्थन किया, जिसमें भारत भी शामिल है. इस प्रस्ताव का तीन देशों ने विरोध किया और 52 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

    इस बिल का विरोध करने वाले देशों में अमेरिका, इजराइल और अर्जेंटीना शामिल हैं. वहीं ब्रिटेन के साथ फ्रांस और यूरोपीय संघ (European Union) के कई देशों ने वोटिंग से परहेज किया है. ब्रिटेन ने साफ कर दिया कि वह इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है. ब्रिटेन के प्रतिनिधि ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव में इस्तेमाल की गई कानूनी भाषा पर आपत्ति है. ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा, “ब्रिटेन का रुख साफ है, हम मुआवजा नहीं देंगे.”

    यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह अफ्रीकी देशों के लिए एक बड़ी राजनयिक जीत है. अब अफ्रीकी देश इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं. उनका तर्क है कि गुलाम व्यापार की वजह से अफ्रीका का विकास रुका और आज भी इसकी वजह से नस्लभेद की समस्या बनी हुई है.

    अमेरिका ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि वह मानवता के खिलाफ अपराधों की रैंकिंग बनाने का विरोध करता है. अमेरिका ने उन मुस्लिम देशों के गुलाम व्यापार का भी मुद्दा उठाया जो 20वीं सदी तक जारी रहा. UN में ब्रिटेन के खिलाफ पारित इस प्रस्ताव में मुआवजे की मांग की गई है. भारत ने इसके समर्थन में वोट किया, जिससे ब्रिटेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अब अगला दौर अंतरराष्ट्रीय अदालत में लड़ा जा सकता है.

  • US में आंशिक शटडाउन के कारण 450 अधिकारियों ने दिया इस्तीफा… एयरपोर्ट पर लगी लंबी कतारें

    US में आंशिक शटडाउन के कारण 450 अधिकारियों ने दिया इस्तीफा… एयरपोर्ट पर लगी लंबी कतारें


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में आंशिक सरकारी शटडाउन (Partial Government Shutdown) शुरू होने के बाद से अब तक 450 से अधिक परिवहन सुरक्षा प्रशासन (TSA) अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। वेतन न मिलने की स्थिति में कर्मचारियों की अनुपस्थिति बढ़ने से अमेरिकी हवाई अड्डों (American Airports) पर लंबी कतारें लग गई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने इस संकट से निपटने के लिए आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) अधिकारियों को एयरपोर्ट सुरक्षा ड्यूटी पर लगाने का आदेश दिया है, जिससे कुछ सांसदों में चिंता व्यक्त की जा रही है।

    सीनेटर गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के बजट गतिरोध को खत्म करने के लिए एक प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। इस समझौते में विभाग के अधिकांश कार्यों के लिए धन मुहैया कराने का प्रावधान है, जिसमें टीएसए के हवाई अड्डा कर्मचारियों को वेतन देना भी शामिल है। हालांकि, विवाद का मुख्य मुद्दा रहे अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICEA) के निष्कासन अभियानों को इस फंडिंग से बाहर रखा गया है। डीएचएस की देखरेख अब ओक्लाहोमा के सीनेटर मार्कवेन मुलिन कर रहे हैं, जिनके नामांकन को सीनेट ने सोमवार को 54-45 के मतभेद से मंजूरी दे दी। मुलिन ने खुद को स्थिर नेतृत्वकर्ता के रूप में पेश करते हुए कहा है कि विभाग को सुर्खियों से बाहर निकालना उनका प्रमुख लक्ष्य होगा।


    शिकागो के ओ’हेयर एयरपोर्ट पर दिखे आईसीई एजेंट्स

    मंगलवार को शिकागो के ओ’हेयर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा चौकी के पास हरे रंग की सामरिक जैकेट पहने संघीय अधिकारी टीएसए एजेंटों के साथ काम करते दिखे। एक अधिकारी की जैकेट पर आईसीई कर्मी की पहचान थी, जबकि दूसरे पर ‘संघीय एजेंट’ का बैज लगा था। एयरपोर्ट के पांच टर्मिनलों में से एक पर एक्स-रे मशीन के पास ये अधिकारी टीएसए टीम के साथ खड़े थे। हालांकि, ओ’हेयर पर सुरक्षा व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही थी और देरी के कोई बड़े संकेत नहीं थे। एसोसिएटेड प्रेस के फोटोग्राफर ने पांच एजेंटों को काली जैकेट में देखा, जो होमलैंड सिक्योरिटी अधिकारी लग रहे थे। ये एजेंट बाद में एक अलग टर्मिनल से होकर बाहर खड़ी गाड़ी में बैठ गए।


    शटडाउन के बाद टीएसए में भारी अनुपस्थिति

    डीएचएस के आंकड़ों के अनुसार, 14 फरवरी से शुरू हुए शटडाउन के बाद कम से कम 458 टीएसए अधिकारी पूरी तरह इस्तीफा दे चुके हैं। सोमवार को देशभर में टीएसए के लगभग 11 प्रतिशत यानी 3200 से अधिक कर्मचारी काम पर नहीं पहुंचे। कुछ प्रमुख हवाई अड्डों पर अनुपस्थिति दर तीन से चार गुना तक बढ़ गई…
    – ह्यूस्टन विलियम पी. हॉबी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: 40%
    – अटलांटा हार्ट्सफील्ड-जैक्सन: 37%
    – ह्यूस्टन जॉर्ज बुश इंटरकॉन्टिनेंटल: 36%
    – न्यूयॉर्क जॉन एफ. कैनेडी: 34%
    – न्यू ऑरलियन्स लुई आर्मस्ट्रांग: 35%
    – बाल्टीमोर-वाशिंगटन: 30%

    रिपोर्ट के अनुसार, ह्यूस्टन जॉर्ज बुश एयरपोर्ट पर मंगलवार को सामान्य स्क्रीनिंग के लिए औसत प्रतीक्षा समय चार घंटे तक पहुंच गया। मियामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने भी कुछ चेकपॉइंट्स पर प्रायोरिटी लेन अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। ह्यूस्टन जॉर्ज बुश इंटरकॉन्टिनेंटल एयरपोर्ट ने यात्रियों को चेतावनी दी है कि सुरक्षा लाइन में लगने से पहले बाथरूम का इस्तेमाल कर लें, क्योंकि कतारें मेट्रो सुरंग तक लंबी हो सकती हैं, जहां शौचालय या खाने-पीने की सुविधा नहीं है। न्यूयॉर्क के लागार्डिया, जेएफके और न्यू जर्सी के न्यूआर्क एयरपोर्ट पर यात्रियों को मंगलवार सुबह भी ऑनलाइन लाइव प्रतीक्षा समय नहीं दिख रहा था।

  • रूसी तेल को लेकर अमेरिका पर ईरान का तंज, कहा- 'भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका'

    रूसी तेल को लेकर अमेरिका पर ईरान का तंज, कहा- 'भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका'


    तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्‍बास अराघची (Abbas Araghchi) ने रूसी तेल के मुद्दे पर अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो अमेरिका (United States) पहले भारत समेत कई देशों पर रूस (Russia) से तेल आयात रोकने के लिए दबाव बना रहा था, वही अब दुनिया के देशों से रूसी कच्चा तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है।

    अराघची ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर की। उन्होंने अपनी पोस्ट में Financial Times की एक रिपोर्ट भी साझा की, जिसमें कहा गया है कि ईरान से जुड़े युद्ध ने रूस की तेल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा पहुंचाया है।

    अमेरिका पर साधा निशाना

    अराघची ने पोस्ट में लिखा कि अमेरिका ने महीनों तक India को रूस से तेल आयात बंद करने के लिए धमकाया। लेकिन ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्ध के बाद अब White House दुनिया के देशों—जिनमें भारत भी शामिल है—से रूसी कच्चा तेल खरीदने की अपील कर रहा है।
    उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप को लगा था कि ईरान के खिलाफ कथित अवैध युद्ध का समर्थन करने से उसे रूस के खिलाफ अमेरिका का साथ मिलेगा।

    रूसी तेल खरीदने पर अस्थायी राहत

    अराघची की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने हाल ही में कहा कि अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर लगे प्रतिबंध में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है।
    उन्होंने बताया कि वित्त विभाग ने 30 दिनों के लिए उस रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी है जो पहले से समुद्र में मौजूद है। कुछ दिन पहले भारत को भी इसी तरह की राहत दी गई थी।

    बेसेंट के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखना और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना है। उन्होंने कहा कि इससे रूस को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि जिस तेल को मंजूरी दी गई है वह पहले से ही समुद्र में है।

    ईरान युद्ध से रूस को बड़ा फायदा

    वहीं Financial Times की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से जुड़े युद्ध और तेल संकट के कारण रूस को रोजाना लगभग 150 मिलियन डॉलर (करीब 1389 करोड़ रुपये) की अतिरिक्त कमाई हो रही है। इसकी एक वजह यह भी बताई जा रही है कि ईरान ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष के शुरुआती 12 दिनों में ही रूस ने तेल निर्यात से लगभग 1.3 से 1.9 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय अर्जित की। यदि मौजूदा कीमतें इसी तरह बनी रहती हैं तो महीने के अंत तक Moscow को 3.3 अरब से 5 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।

  • अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू

    अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू


    नई दिल्ली। अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन सहित 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ नई जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई ‘सेक्शन 301’ के तहत की जा रही है, जो अमेरिकी ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 का हिस्सा है और अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैरिफ या प्रतिबंध लगाने की शक्ति देती है, जो अमेरिकी कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान पहुंचा रहे हों।

    इस कदम के पीछे पिछली घटनाओं का संदर्भ है। फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने 150 दिनों के लिए 10% का अस्थायी टैरिफ लागू किया। अब नई जांच के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि टैरिफ का दबाव जारी रहे और ट्रेडिंग पार्टनर्स को बातचीत की मेज पर लाया जा सके।

    यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने बताया कि यह जांच भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे पर केंद्रित है। अगर जांच में इन देशों की नीतियां अनुचित व्यापार व्यवहार के तहत पाई गईं, तो उन पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।

    जांच का मुख्य फोकस उन देशों पर है, जो जरूरत से अधिक उत्पादन कर अमेरिकी बाजार में सस्ते दाम पर माल बेचते हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी देश में जूतों की फैक्ट्री सालाना 100 जूते बना सकती है, लेकिन घरेलू मांग केवल 20 जूते की है, तो शेष 80 जूते सस्ते दाम पर अमेरिका में भेज दिए जाते हैं। अमेरिका इसे मार्केट डंपिंग और अनुचित व्यापार व्यवहार मानता है।

    भारत के लिए यह चिंता का विषय है। 2024 में भारत का अमेरिका के साथ गुड्स ट्रेड सरप्लस 58,216 मिलियन डॉलर था, जो 2025 में घटकर 45,801 मिलियन डॉलर रह गया। इस कमी के बावजूद भारत इस जांच की सूची में शामिल है। यदि भारत की नीतियां ‘अनुचित’ पाई गईं, तो भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ या प्रतिबंध लग सकते हैं।

    इसके अलावा, अमेरिका फोर्स्ड लेबर पर भी अलग जांच कर रहा है। इसका उद्देश्य है बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना। पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अब यह कार्रवाई अन्य देशों पर भी लागू हो सकती है।

    जांच की टाइमलाइन भी निर्धारित कर दी गई है। 15 अप्रैल तक आम जनता और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं, इसके बाद 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी। लक्ष्य है कि जुलाई में अस्थायी टैरिफ खत्म होने से पहले नए टैरिफ प्रस्ताव और जांच के नतीजे तैयार हो जाएं।

    जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को बचाना है। साथ ही ट्रेडिंग पार्टनर्स को चेतावनी दी गई है कि वे मौजूदा व्यापार समझौतों का पालन करें, अन्यथा भारी टैक्स या प्रतिबंध झेलना पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस जांच का असर टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा। व्यवसायियों, निर्यातकों और आयातकों को अमेरिकी पॉलिसी पर लगातार नजर रखनी होगी, क्योंकि जुलाई के बाद अमेरिकी बाजार में कीमतों और टैरिफ में बड़े बदलाव संभव हैं।

    यह कदम व्यापार के वैश्विक परिदृश्य में भारत और अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है। यदि व्यापारिक नीतियों में सुधार नहीं हुआ, तो अमेरिकी टैरिफ की मार व्यापार घाटे और निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर गहरा असर डाल सकती है।

  • बिना युद्ध के अमेरिका को चुनौती: दुर्लभ खनिजों के जरिए चीन की नई रणनीति

    बिना युद्ध के अमेरिका को चुनौती: दुर्लभ खनिजों के जरिए चीन की नई रणनीति



    नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव के बीच चीन एक ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे वह बिना युद्ध किए भी अमेरिका की सैन्य ताकत को चुनौती दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने दुर्लभ खनिजों यानी Rare Earth Elements की आपूर्ति और तकनीकी सप्लाई चेन पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इन खनिजों का उपयोग आधुनिक सैन्य उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है, जिनमें अमेरिकी F-35 Lightning II जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट भी शामिल हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार चीन की रणनीति इन महत्वपूर्ण कच्चे संसाधनों के उत्पादन और प्रोसेसिंग पर नियंत्रण बनाए रखने की है। अगर भविष्य में इन खनिजों की आपूर्ति सीमित होती है, तो इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के कई उन्नत हथियारों के निर्माण और रखरखाव पर असर पड़ सकता है। आधुनिक जेट इंजन, रडार सिस्टम, सेंसर और मिसाइल तकनीक में इन धातुओं की अहम भूमिका होती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि चीन पहले से ही दुनिया में रेयर अर्थ खनिजों की प्रोसेसिंग का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है। हाल के वर्षों में उसने इनके निर्यात नियमों को भी सख्त किया है। इसके साथ ही चीन अपनी औद्योगिक नीतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों पर भी तेजी से काम कर रहा है, ताकि तकनीकी और औद्योगिक बढ़त बनाए रखी जा सके।

    दूसरी ओर United States भी इस संभावित खतरे को समझ चुका है। अमेरिकी सरकार ने 2027 तक रक्षा क्षेत्र में चीनी रेयर अर्थ खनिजों पर निर्भरता कम करने की योजना बनाई है। इसके लिए नई खदानों के विकास और घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम शुरू किया गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया में समय लगेगा।

    विश्लेषकों के अनुसार भविष्य में महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल सैन्य ताकत से नहीं बल्कि संसाधनों, तकनीक और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर नियंत्रण से तय होगी। ऐसे में रेयर अर्थ खनिजों पर चीन की मजबूत पकड़ अमेरिका और अन्य देशों के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती बन सकती है।

    कीवर्ड: चीन, अमेरिका, रेयर अर्थ खनिज, एफ-35 फाइटर जेट, वैश्विक रणनीति