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  • अब ट्रंप भारतीय छात्रों से बोले- आपको अमेरिका से कभी भी निकाला जा सकता है

    अब ट्रंप भारतीय छात्रों से बोले- आपको अमेरिका से कभी भी निकाला जा सकता है

    वॉशिंगटन । भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में पिछले कुछ महीनों में दरार देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विभिन्न फैसलों और बयानों से दोनों देशों में तनाव और बढ़ा है। इस बीच, अमेरिका ने बुधवार को अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को चेतावनी दी है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने दो टूक कहा है कि अमेरिकी कानूनों को तोड़ने से स्टूडेंट वीजा रद्द हो सकता है और यहां तक कि आपको देश से भी निकाला जा सकता है।

    भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”अमेरिकी कानूनों को तोड़ने पर आपके स्टूडेंट वीजा के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

    अगर आपको गिरफ्तार किया जाता है या आप कोई कानून तोड़ते हैं, तो आपका वीजा रद्द किया जा सकता है, आपको देश से निकाला जा सकता है, और आप भविष्य में अमेरिकी वीजा के लिए अयोग्य हो सकते हैं। नियमों का पालन करें और अपनी यात्रा को खतरे में न डालें। अमेरिकी वीजा एक सुविधा है, अधिकार नहीं।”

    अमेरिकी दूतावास समय-समय पर सोशल मीडिया के जरिए चेतावनियां जारी करता रहता है। पिछले दिनों उसने भारत से अमेरिका जाने वाले अवैध अप्रवासियों को एक सख्त पब्लिक चेतावनी जारी की थी।

    चेतावनी में साफ कहा गया कि इमिग्रेशन कानूनों का उल्लंघन करने पर ‘बड़ी क्रिमिनल सजा’ हो सकती है। चेतावनी का यह मैसेज सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, और यह यूनाइटेड स्टेट्स के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में इमिग्रेशन पर बढ़ती सख्ती के दौरान आया।

    अमेरिकी दूतावास ने एक्स पर लिखा था कि अगर आप अमेरिकी कानून तोड़ते हैं, तो आपको कड़ी क्रिमिनल सजा मिलेगी। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन अमेरिका में गैर-कानूनी इमिग्रेशन को खत्म करने और हमारे देश की सीमाओं और हमारे नागरिकों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वीजा नियमों के सख्त होने के कारण, पिछले साल नए इंटरनेशनल एनरोलमेंट में अमेरिका में स्टूडेंट वीजा पर आने वालों की संख्या में 17% की गिरावट आई है। इस बीच, H-1B वीजा आवेदकों को, जो कुशल इंटरनेशनल कर्मचारियों को अमेरिका में रोजगार खोजने की अनुमति देता है, अभूतपूर्व इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।

  • भारत के खास दोस्त समेत इन 4 देशों से तोड़ दो नाता… US का वेनेजुएला एक और फरमान

    भारत के खास दोस्त समेत इन 4 देशों से तोड़ दो नाता… US का वेनेजुएला एक और फरमान

    काराकास। निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका (America) और वेनेजुएला के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। इस बीच अमेरिका ने वेनेजुएला के लिए एक और फरमान जारी किया है। अमेरिका ने कहा है कि वेनेजुएला को चार दशों के साथ अपने संबंध कम करने चाहिए। इन देशों में एक भारत का करीबी दोस्त रूस भी शामिल है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के प्रशासन ने वेनेजुएला की अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिगेज को सख्त निर्देश दिए हैं कि उनका देश तेल उत्पादन में केवल अमेरिका के साथ विशेष साझेदारी करे और भारी कच्चे तेल की बिक्री में अमेरिका को प्राथमिकता दे। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका यह भी मांग कर रहा है कि वेनेजुएला चीन, रूस, ईरान और क्यूबा के साथ अपने संबंधों को कम करे और इन देशों को बाहर निकालकर आर्थिक संबंध पूरी तरह तोड़ दे।

    रिपोर्ट में तीन अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि वेनेजुएला को अधिक तेल उत्पादन की अनुमति तभी मिलेगी जब वह इन शर्तों को माने। वाइट हाउस ने इस रिपोर्ट पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है। यह मांगें ऐसे समय में आई हैं जब निकोलस मादुरो को अमेरिकी विशेष बलों द्वारा गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया है और डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया गया है।

    वेनेजुएला लंबे समय से चीन, रूस, ईरान और क्यूबा पर आर्थिक और सुरक्षा सहायता के लिए निर्भर रहा है, खासकर ह्यूगो शावेज और मादुरो के शासनकाल में। इन संबंधों को पूरी तरह तोड़ना वेनेजुएला की विदेश नीति में बड़ा उलटफेर होगा।

    ट्रंप ने मंगलवार शाम कहा कि वेनेजुएला अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तेल भेजेगा, जिसकी कीमत वर्तमान बाजार मूल्य पर करीब 2.8 अरब डॉलर तक हो सकती है। उन्होंने घोषणा की कि यह तेल बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा और आय दोनों देशों के लाभ के लिए उपयोग की जाएगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि प्रशासन अगले सप्ताह अमेरिकी तेल कंपनियों से वेनेजुएला में निवेश पर चर्चा करेगा।

    वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका वेनेजुएला पर कब्जा नहीं करना चाहता, लेकिन ट्रंप ने बार-बार कहा है कि वह देश के भविष्य को निर्देशित करने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे, मुख्य रूप से तेल राजस्व से वित्तपोषित। यह घटनाक्रम वैश्विक तेल बाजार और भू-राजनीतिक संबंधों पर गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों वाला देश है।

  • US: अभी खत्म नहीं हुआ ट्रंप के Tariff का खेल, चाइना पर फिर फूटेगा टैरिफ बम

    US: अभी खत्म नहीं हुआ ट्रंप के Tariff का खेल, चाइना पर फिर फूटेगा टैरिफ बम


    वाशिगटन।
    डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ (Donald Trump Tariff) का खेल अभी खत्म नहीं हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति (American President) एक बार फिर चीन पर टैरिफ लगाने (US Tariff On China) के लिए तैयार हैं और इसके लिए तारीख भी तय कर दी गई है. जी हां, अमेरिका चीन से आयात सेमीकंडक्टर चिप (Tariff On Chinese chips) टैरिफ बढ़ाने की तैयारी में है और लेकिन इसे 18 महीने के लिए अभी टाला गया है. चाइनीज चिप आयात पर ट्रंप कितना टैरिफ लगाएंगे इसकी दर भी कम से कम एक महीने पहले तय की जाएगी।


    18 महीने तक जीरो, फिर होगा फैसला

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चीनी चिप्स पर टैरिफ में 18 महीने बाद बढ़ोतरी करेगा. Donald Trump प्रशासन ने मंगलवार को फेडरल रजिस्टर में दाखिल एक दस्तावेज में साफ किया है कि अमेरिका जून 2027 में चीनी सेमीकंडक्टर आयात पर टैरिफ बढ़ाएगा और इसके लागू होने से महीनेभर पहले Tariff Rate भी तय कर दिया जाएगा।

    डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय द्वारा शेयर जानकारी में बताया गया है कि चीन से सेमीकंडक्टर आयात पर प्रारंभिक टैरिफ दर इन 18 महीनों के लिए शून्य (Zero Tariff) ही रहेगा. अमेरिका ने पाया है कि चीन सेमीकंडक्टर बिजनेस में अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त है. यह नोटिस पुराने चिप्स पर केंद्रित प्रोसेस का अगला चरण है, जो बिजनेस एक्ट की धारा 301 के तहत बाइडेन प्रशासन के दौरान शुरू हुई थी।


    23 जून की तारीख हो गई तय

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से फाइलिंग में कहा गया है कि दशकों से China ने इस उद्योग पर अपना दबदबा कायम करने का टारगेट बनाकर तेजी से आक्रामक और व्यापक गैर-बाजार नीतियों को अपनाया है. हालांकि, नए टैरिफ को कम से कम 18 महीनों के लिए टालने का Donald Trump का निर्णय इस बात का संकेत भी देता है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका और चीन के बीच किसी भी व्यापारिक शत्रुता को कम करने की कोशिश कर रहा है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीते अक्टूबर महीने में ट्रेड टेंशन को खत्म करने के लिए एक करार किया था, जिसके अमेरिका ने कुछ Tariff Cut किया और चीन ने दुर्लभ पृथ्वी धातुओं (Rare Earth Metals) के निर्यात की अनुमति दी थी. अमेरिकी आयकर विभाग (USTR) द्वारा मंगलवार को दाखिल किए गए दस्तावेज में US Tariff On China की डेट 23 जून 2027 तय की गई है।

    टैरिफ के असर पर बारीक नजर
    NYT की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ बढ़ाने के लिए तय की गई 2027 की नई तारीख अमेरिकी कंपनियों को स्पष्टता प्रदान करती है, जिन्होंने कहा है कि वे इस बात पर बारीकी से नजर रख रही हैं कि अमेरिकी टैरिफ उनके व्यवसायों या आपूर्ति श्रृंखलाओं को कैसे प्रभावित (US Tariff Imapct) कर सकते हैं. ये टैरिफ कानून की धारा 232 के तहत ट्रंप प्रशासन द्वारा चीनी चिप्स आयात (China Cips Import) पर लगाए जाने वाले अन्य शुल्कों से अलग हैं।

  • जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार

    जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार


    वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से चल रहे युद्ध के बीच अच्छी और बड़ी खबर सामने आई है। रूस की ओर से कहा गया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति वार्ता फ्लोरिडा में ‘रचनात्मक’ तरीके से आगे बढ़ रही है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि संबंधित पक्षों की बातचीत तेजी से प्रगति कर रही है। यह वार्ता ट्रंप प्रशासन द्वारा महीनों से किए जा रहे शांति प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें इस सप्ताह की शुरुआत में बर्लिन में यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ बैठकें भी शामिल हैं।

    रूसी सरकारी समाचार एजेंसी ‘आरआईए नोवोस्ती’ के अनुसार, रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि चर्चाएं रचनात्मक रूप से आगे बढ़ रही हैं। ये आज भी जारी हैं और कल भी जारी रहेंगी। खबर के मुताबिक, दिमित्रीव ने मियामी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से मुलाकात की।

    वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रविवार को टेलीग्राम पर लिखा कि राजनयिक प्रयास काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और फ्लोरिडा में हमारी टीम अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ काम कर रही है।

    जेलेंस्की के इस बयान से लग रहा है कि अब वे नरम पड़ गए हैं। इससे पहले, शुक्रवार को यूक्रेन के प्रमुख वार्ताकार ने कहा था कि अमेरिका में उनका प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी और यूरोपीय पक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें पूरी कर चुका है।

    ट्रंप ने युद्ध को समाप्त करने के लिए व्यापक राजनयिक प्रयास शुरू किए हैं, लेकिन उनके प्रयासों को रूस और यूक्रेन की ओर से परस्पर विरोधी मांगों का सामना करना पड़ रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह यूक्रेन पर अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि भारी नुकसान के बावजूद रूसी सेनाएं युद्ध के मैदान में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं। शुक्रवार को पुतिन ने विश्वास जताया था कि यदि यूक्रेन शांति वार्ता में रूस की शर्तों को नहीं मानता, तो क्रेमलिन अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर लेगा।

    दूसरी ओर फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत करने की पुतिन की इच्छा का स्वागत किया और कहा कि वह ‘आने वाले दिनों में’ आगे की प्रक्रिया तय करेगा। इससे पहले खबर आई थी कि पुतिन अगर परस्पर राजनीतिक इच्छा हो तो फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। मैक्रों के कार्यालय ने कहा है कि किसी भी बातचीत का उद्देश्य राष्ट्रपति जेलेंस्की और हमारे यूरोपीय भागीदारों के साथ पूरी पारदर्शिता के साथ यूक्रेन और यूरोप के लिए एक ठोस और स्थायी शांति में योगदान देना होगा।

  • US: ट्रंप ने BBC पर ठोका मानहानि का केस… 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग

    US: ट्रंप ने BBC पर ठोका मानहानि का केस… 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग


    वाशिंगटन।
    एक भाषण को एडिट करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने मीडिया हाउस बीबीसी (BBC) पर मुकदमा ठोक दिया है। उन्होंने बीबीसी से 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग भी की है। उन्होंने ब्रिटिश प्रसारक पर मानहानि के साथ-साथ भ्रामक और अनुचित तरीके से व्यापार करने का आरोप लगाया। दरअसल 6 जनवरी 2021 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने समर्थकों को संबोधित किया था। इसके बाद उनके समर्थक कैपिटल हिल पर पहुंच गए और हिंसक हो गए।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक बीबीसी ने ट्रंप के भाषण के वीडियो में ‘फाइट लाइक हेल’ दिखाया लेकिन उनके दूसरे पार्ट को काट दिया जिसमें वह शांतिपूर्ण प्रदर्श की बात कर रहे थे। बीबीसी पर 33 पन्नों के इस मुकदमे में ट्रंप का ‘‘झूठा, मानहानिकारक, भ्रामक, अपमानजनक, भड़काऊ और दुर्भावनापूर्ण चित्रण’’ करने का आरोप लगाया गया है और इसे 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ‘‘हस्तक्षेप करने तथा उसे प्रभावित करने की निर्लज्ज कोशिश’’ बताया गया है।

    इसमें बीसीसी पर ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप के छह जनवरी, 2021 के भाषण के दो पूरी तरह से अलग-अलग अंशों को एक साथ जोड़ने’’ का आरोप लगाया गया ताकि ‘‘ट्रंप द्वारा कही गई बातों के अर्थ को जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।’’ बता दें कि बीबीसी की फंडिंग उसके दर्शकों से होती है। डोनाल्ड ट्रंप की लीगल टीम का कहना है कि बीबीसी लेफ्ट अजेंडा चलाता है और इसलिए डोनाल्ड ट्रंप को बदनाम करने की कोशिश में लगा रहता है।

    बीबीसी की तरफ इस मुकदमे को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले डॉक्युमेंट्री प्रकाशित करने को लेकर बीबीसी पहले से ही संकट का सामना कर रहा है। कई सीनियर अधिकारी इस्तीा दे चुके हैं। इससे बीबीसी की छवि भी खराब हुई है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। इस डॉक्युमेंट्री को अमेरिका में नहीं प्रसारित किया गया था। अब अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी वाले कानून से अपने मुद्दे को अलग करने के लिए ट्रंप को साबित करना होगा कि बीबीसी ने जो कुछ भी एडिट किया वह अपमानजनक था और दर्शकों में भ्रम फैलाने के लिए ही ऐसा किया गया था।

    बीबीसी कोर्ट में दावा कर सकता है कि उसने जो कुछ दिखाया वह सच था और जो कुछ भी ए़डिट किया गया है उससे जनता में कोई गलत संदेश नहीं गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ भी केस किया था। हालांकि दोनों ने किसी भी गलती से इनकार किया है।

  • अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर नागरिकता हासिल करना तो अब लगेगा झटका

    अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर नागरिकता हासिल करना तो अब लगेगा झटका

    वॉशिंगटन । भारत में अमेरिकी दूतावास ने साफ किया है कि ऐसे लोगों को टूरिस्ट वीजा नहीं मिलेगा, जिनका मकसद अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर अमेरिकी नागरिकता हासिल करने का होगा। अमेरिकी दूतावास ने झटका देते हुए कहा कि अगर इस बात का कोई संकेत मिलता है कि टूरिस्ट अमेरिकी धरती पर बच्चे को जन्म देकर नागरिकता पाने का शॉर्टकट अपनाना चाहता है, तो अमेरिका वीजा एप्लीकेशन प्रोसेस नहीं करेगा।

    भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,, “अमेरिकी काउंसलर अधिकारी टूरिस्ट वीजा एप्लीकेशन को मना कर देंगे, अगर उन्हें लगता है कि यात्रा का मुख्य मकसद अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर बच्चे के लिए अमेरिकी नागरिकता हासिल करना है। इसकी इजाजत नहीं है।”

    इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दस लाख डॉलर की ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ योजना शुरु करने की घोषणा की है। यह एक वीजा कार्यक्रम है, जो अप्रवासियों को अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग प्रदान करेगा। ट्रंप का कहना है कि भारत और चीन जैसे देशों के छात्रों का अमेरिका के शीर्ष विश्वविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वदेश लौटना शर्मनाक है। बुधवार को घोषित किया गया ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ योजना एक ऐसा वीजा कार्यक्रम है जो अमेरिका को पर्याप्त लाभ प्रदान करने की किसी व्यक्ति की क्षमता पर आधारित है।

    ट्रंप ने दावा किया कि ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ योजना कंपनियों को देश में इस तरह की प्रतिभाओं को नियुक्त करने और बनाए रखने में सक्षम बनाएगी। व्हाइट हाउस में एक बैठक में ट्रंप ने कहा, ‘‘किसी महान व्यक्ति का हमारे देश में आना एक उपहार के समान है, क्योंकि हमें लगता है कि ये कुछ ऐसे असाधारण लोग होंगे जिन्हें यहां रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कॉलेज से स्नातक करने के बाद, उन्हें भारत वापस जाना पड़ता है, उन्हें चीन वापस जाना पड़ता है, उन्हें फ्रांस वापस जाना पड़ता है। उन्हें वापस वहीं जाना पड़ता है, जहां से वे आए थे। वहां रुकना बहुत मुश्किल है। यह शर्मनाक है। यह एक हास्यास्पद बात है। हम इस पर ध्यान दे रहे हैं।’’

  • अमेरिका को NATO से निकालो, US कांग्रेस में पेश हुआ बिल

    अमेरिका को NATO से निकालो, US कांग्रेस में पेश हुआ बिल

    बिल को पेश करते हुए कहा है कि यह सैन्य गठबंधन अब भी कोल्ड वॉर की मानसिकता से गुजर रहा है और इससे अमेरिकी टैक्सपेयर्स के ट्रिलियन डॉलर बर्बाद हो रहे हैं।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक केंटकी के सांसद थॉमस मैसी ने बीते मंगलवार को यह बिल कांग्रेस में पेश किया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि NATO उस वक्त बनाया गया था, जब सोवियत यूनियन मौजूद था, लेकिन अब वह खतरा खत्म हो चुका है।

    मैसी ने कहा, “अमेरिका को NATO से बाहर निकलना चाहिए और उस पैसे को अपने देश की सुरक्षा पर लगाना चाहिए, ना कि सोशलिस्ट देशों पर। NATO की वजह से अमेरिकी टैक्सपेयर्स के ट्रिलियन डॉलर खर्च हुए हैं और इससे अमेरिका के वैश्विक जंगों में उलझने का भी जोखिम बना रहता है।” सांसद ने कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया के लिए सुरक्षा कवच नहीं बन सकता, खासकर तब जब अमीर देश अपनी खुद की रक्षा पर खर्च नहीं करना चाहते।”

    जानकारी के मुताबिक अगर यह बिल संसद से पास हो जाता है, तो अमेरिकी सरकार को औपचारिक रूप से NATO को सूचित करना होगा कि वह सदस्यता खत्म कर रही है। साथ ही, अमेरिका से NATO के बजट में जाने वाला पैसा भी रोक दिया जाएगा।
    पहले भी उठी है मांग

    इससे पहले रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने भी पिछले साल इस तरह की साल उठाई थी। माइक ली ने कहा था कि NATO में बने रहना अब अमेरिका की रणनीतिक जरूरतों से मेल नहीं खाता।वहीं पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके कई रिपब्लिकन सहयोगी लंबे समय से NATO पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि अमेरिका इस गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी से कई गुना ज्यादा पैसा खर्च करता है।

  • US को भारत का ऑफर पसंद है तो उसे तुरंत कर देना चाहिए FTA पर साइन: पीयूष गोयल

    US को भारत का ऑफर पसंद है तो उसे तुरंत कर देना चाहिए FTA पर साइन: पीयूष गोयल


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री (Minister of Commerce and Industry) पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने गुरुवार को कहा कि अगर वॉशिंगटन (Washington) को भारत का ऑफर (India’s offer) पसंद है, तो अमेरिका ((America) को भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free trade agreements- FTA) पर तुरंत साइन कर देने चाहिए. पीयूष गोयल ने ट्रंप प्रशासन की ओर से भारत के प्रस्ताव की सराहना किए जाने का स्वागत किया, लेकिन भारत-अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित इस ट्रेड डील पर साइन होने की कोई समयसीमा बताने से इनकार कर दिया.

    पीयूष गोयल अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को भारत की ओर से ‘अब तक का सबसे अच्छा ऑफर’ मिला है. उन्होंने कहा, ‘अगर वे खुश हैं, तो उन्हें तुरंत साइन कर देना चाहिए.’ उन्होंने भारत के प्रस्ताव के बारे में बताने से मना कर दिया.

    ‘भारत-US में ट्रेड डील जल्द…’, अब ट्रंप के अधिकारी बोले- दोनों हैं अच्छे दोस्त
    मंत्री ने बताया कि ट्रेड डील पर अब तक पांच दौर की बातचीत हो चुकी है और वर्तमान में भारत आए अमेरिका के डिप्टी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव रिक स्विट्जर की यात्रा किसी नए दौर की बातचीत के लिए नहीं है, बल्कि एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझने के लिए है.

    ‘डेडलाइन के दबाव में डील नहीं होनी चाहिए’
    पीयूष गोयल हाल के महीनों में चिली, इजरायल और न्यूजीलैंड समेत कई देशों के साथ FTA पर काम कर रहे हैं. इस बीच, जब उनसे मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की उस टिप्पणी पर सवाल पूछा गया कि यह डील अगले साल मार्च तक साइन हो जाएगी, तो गोयल ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है और वे किसी समयसीमा पर टिप्पणी नहीं करना चाहते. उन्होंने कहा, ‘डील तभी होती है जब दोनों पक्षों को फायदा हो. डेडलाइन के दबाव में समझौता नहीं होना चाहिए.’