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  • बुलंदशहर के शिकारपुर विधायक अनिल शर्मा का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    बुलंदशहर के शिकारपुर विधायक अनिल शर्मा का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    बुलंदशहर। शिकारपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और पूर्व राज्यमंत्री अनिल शर्मा का बुधवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कैंसर का इलाज करा रहे थे। उनके निधन की खबर से बुलंदशहर जिले और शिकारपुर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। अनिल शर्मा योगी सरकार में वन राज्य मंत्री भी रह चुके थे। इलाज के दौरान दिल्ली के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

    कम उम्र में निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने गए थे
    अनिल शर्मा बुलंदशहर के शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र के सुरजावली गांव के रहने वाले थे। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और ग्राम सुरजावली के निर्विरोध प्रधान चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ते हुए विधानसभा चुनाव लड़ा।

    2002 में पहली बार बने विधायक
    अनिल शर्मा ने वर्ष 2002 में खुर्जा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद 2007 में भी उन्होंने खुर्जा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और लगातार दूसरी बार विधायक बने। वर्ष 2012 में उन्होंने शिकारपुर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।

    2017 में भाजपा के टिकट पर जीते, योगी सरकार में बने मंत्री
    भाजपा में शामिल होने के बाद अनिल शर्मा ने वर्ष 2017 में शिकारपुर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें प्रदेश की योगी सरकार में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2022 में भी उन्होंने भाजपा के टिकट पर शिकारपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस तरह वह शिकारपुर से भाजपा विधायक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर रहे थे। अनिल शर्मा के निधन से भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर है।

  • छत और छज्जे की ढलाई के दौरान बड़ा हादसा, शटरिंग गिरने से 3 की मौत; मजदूरों ने मांगा 50 लाख मुआवजा

    छत और छज्जे की ढलाई के दौरान बड़ा हादसा, शटरिंग गिरने से 3 की मौत; मजदूरों ने मांगा 50 लाख मुआवजा


    मथुरा  मथुरा के वृंदावन में निर्माणाधीन मॉल में शुक्रवार सुबह हुए दर्दनाक हादसे ने निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रुक्मणी विहार इलाके में निर्माणाधीन ओमेक्स मॉल में सुबह करीब सात बजे छत और छज्जे की ढलाई के दौरान अचानक शटरिंग और निर्माण सामग्री भरभराकर नीचे आ गिरी। हादसे के समय कुछ मजदूर नाइट शिफ्ट के बाद निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। अचानक हुए इस हादसे में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल पुलिस तथा राहत दल को सूचना दी गई।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन फायर ब्रिगेड और बचाव दल मौके पर पहुंचा। मलबे को हटाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। शुरुआती कार्रवाई में एक मजदूर का शव मौके से बाहर निकाला गया जबकि तीन मजदूर घायल अवस्था में मिले। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया लेकिन इलाज के दौरान दो और मजदूरों ने दम तोड़ दिया। इस तरह हादसे में मृतकों की संख्या तीन हो गई है। एक मजदूर का इलाज अभी जारी है और उसकी हालत को लेकर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है।

    पुलिस के मुताबिक मृतकों में एक मजदूर नेपाल का रहने वाला था जबकि दो मजदूर पश्चिम बंगाल से संबंधित थे। मृतक की पहचान नेपाल के कैलाली जिले के सिमरी निवासी करीब 40 वर्षीय शिवराम के रूप में हुई है। उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। अस्पताल में इलाज के दौरान पश्चिम बंगाल के कूचबिहार निवासी रफीउल और आलम ने भी दम तोड़ दिया। पश्चिम बंगाल के ही एक अन्य मजदूर दिलबार का इलाज चल रहा है। हादसे की सूचना मिलने के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शटरिंग किस वजह से गिरी और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। निर्माण स्थल पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री और ढांचे की मजबूती की भी जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज और प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    मृतक शिवराम के परिवार की ओर से न्याय की मांग उठाई गई है। उनकी भतीजी मनीषा के मुताबिक शिवराम कुछ दिन पहले ही काम के लिए मथुरा आए थे। परिवार का कहना है कि निर्माण स्थल पर लंबे समय से काम चल रहा था लेकिन हादसे ने उनका सब कुछ छीन लिया। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    वहीं निर्माण स्थल पर काम कर रहे अन्य मजदूरों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाता तो इस तरह का हादसा शायद टाला जा सकता था। मजदूरों ने मृतकों के परिवारों के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग भी रखी है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    मॉल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि हादसे के समय चार से पांच मजदूर ही मौके पर काम कर रहे थे। प्रबंधन के अनुसार छज्जे का निर्माण करते समय अचानक शटरिंग गिर गई और हादसा हो गया। हादसा किस तकनीकी कारण से हुआ इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की जांच जारी है और पोस्टमॉर्टम तथा अन्य कानूनी प्रक्रिया के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे ने एक बार फिर बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में मजदूरों की सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • यूपी में मानसून बना मुसीबत कहीं सड़क पर नाव तो कहीं छत पर अंतिम संस्कार, 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान

    यूपी में मानसून बना मुसीबत कहीं सड़क पर नाव तो कहीं छत पर अंतिम संस्कार, 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान

    उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गंगा और घाघरा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं और प्रदेश के 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से टूटने लगा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया है जिससे सड़कें जलमग्न हो गई हैं और लोगों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।

    बहराइच में भी कई गांवों में पानी भर गया है। हालात का जायजा लेने पहुंचे मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने ट्रैक्टर के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और ग्रामीणों से मुलाकात कर उन्हें प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। दूसरी ओर प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। नदी का पानी रिवर फ्रंट रोड तक पहुंच गया है और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। गंगा का पानी लेटे हुए हनुमान मंदिर कॉरिडोर के आसपास भी पहुंच गया है।

    वाराणसी में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर जनजीवन और धार्मिक गतिविधियों पर असर डाल रहा है। विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार बंद करना पड़ा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के नियमित शवदाह स्थल पानी में डूब गए हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों और सीढ़ियों के आसपास अंतिम संस्कार किया गया जबकि मणिकर्णिका घाट पर छत के हिस्से में यह प्रक्रिया करनी पड़ी। दशाश्वमेध घाट की प्रसिद्ध गंगा आरती भी छत से कराई गई। नमो घाट का बड़ा हिस्सा भी जलमग्न हो चुका है।

    प्रयागराज में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। दारागंज करेली और सलोरी जैसे इलाकों में कई घरों में कई फीट तक पानी भरने की सूचना है। जलभराव और बिगड़ते हालात के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को हॉस्टल खाली करना पड़ा है। कौशांबी और आसपास के जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला है। फर्रुखाबाद में करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं और कई संपर्क मार्गों पर पानी बह रहा है। कुछ गांवों के टापू में बदल जाने के कारण प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए नावों तथा मोटर बोट की व्यवस्था की है।

    राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नदियों का जलस्तर लगातार निगरानी में है। घाघरा सरयू गंगा शारदा टोंस सोन और मंदाकिनी जैसी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। पिछले 72 घंटों में बारिश से जुड़े हादसों में मकान गिरने के कारण छह लोगों की मौत की भी सूचना है। इनमें मिर्जापुर जौनपुर और अमेठी के मामले शामिल हैं।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के बड़े हिस्से में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। हालांकि लखनऊ कानपुर और वाराणसी जैसे कई शहरों में फिलहाल मौसम अपेक्षाकृत साफ है लेकिन बादलों की आवाजाही बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के प्रभाव से उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी है और 25 अगस्त तक कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिन भी चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं और प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

  • ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा

    ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा


    नई दिल्ली । नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आई एक तस्वीर ने बारिश के दौरान एयरपोर्ट परिसर की तैयारियों और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। तस्वीर में एयरपोर्ट के आसपास बड़े स्तर पर पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है और पार्किंग तथा सड़क जैसे हिस्से भी जलमग्न नजर आ रहे हैं। तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि भारी बारिश के बाद जेवर एयरपोर्ट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। हालांकि तस्वीर और उसके साथ किए जा रहे दावे की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे वास्तविक स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    तस्वीर में एयरपोर्ट जैसी इमारत और उसके सामने बड़ी मात्रा में जमा पानी दिखाई देता है। कई वाहन पानी के बीच खड़े नजर आ रहे हैं जबकि आसपास के रास्ते भी जलभराव की चपेट में दिखाई दे रहे हैं। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे भारी बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था की परीक्षा के तौर पर देख रहे हैं तो कुछ लोग तस्वीर की वास्तविकता पर सवाल उठा रहे हैं।

    जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसे दिल्ली एनसीआर के लिए एक महत्वपूर्ण एयर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण से क्षेत्र में कारोबार पर्यटन रोजगार और रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जाती रही है। ऐसे में बारिश के दौरान जलभराव से जुड़ी कोई भी तस्वीर स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचती है।

    किसी भी बड़े एयरपोर्ट के लिए बारिश के पानी की निकासी बेहद महत्वपूर्ण होती है। रनवे टैक्सीवे पार्किंग एप्रन और यात्रियों के आवागमन वाले हिस्सों में जलभराव रोकना एयरपोर्ट संचालन की अहम जरूरत होती है। खासतौर पर मानसून के दौरान कम समय में होने वाली तेज बारिश के पानी को तेजी से बाहर निकालने के लिए प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम जरूरी होता है। अगर किसी एयरपोर्ट परिसर में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो इससे यातायात और संचालन के साथ बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।

    हालांकि वायरल तस्वीर को देखकर सीधे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरा एयरपोर्ट जलमग्न हो गया या परियोजना की पूरी व्यवस्था विफल हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों के साथ कई बार गलत संदर्भ भी जोड़ दिए जाते हैं। तस्वीर पुरानी हो सकती है किसी दूसरे स्थान की हो सकती है या डिजिटल रूप से बदली गई हो सकती है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि के बिना बड़े दावे को तथ्य मानने से बचना जरूरी है।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि एयरपोर्ट प्रबंधन या संबंधित प्रशासन की ओर से बारिश और जलभराव को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है। अगर वास्तव में परिसर के किसी हिस्से में पानी जमा हुआ है तो इसकी वजह और जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।

    फिलहाल वायरल तस्वीर ने जेवर एयरपोर्ट की बारिश से निपटने की तैयारियों को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। लेकिन तस्वीर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय रिपोर्ट का इंतजार करना ज्यादा उचित होगा।

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा में 9 अगस्त से प्रस्तावित कारसेवा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हेंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में 9 अगस्त को कारसेवा का शंखनाद किया जाएगा। आयोजन से पहले ही देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संतों का मथुरा पहुंचना शुरू हो गया है। कार्यक्रम में 13 अखाड़ों के महंतों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। आयोजन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी सतर्क हो गया है।

    श्रीराम मंदिर में लगे पत्थरों की पहली खेप पहुंची
    श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार देर रात चित्रगुप्त पीठ पहुंच गई। ये पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगाए गए हैं। इसी क्षेत्र के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज की ओर से इन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। रविवार से शंखनाद कार्यक्रम के लिए पत्थरों को तराशने का काम शुरू किए जाने की तैयारी है।

    5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का दिया गया है ऑर्डर
    स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अनुसार, 9 अगस्त को आश्रम से विधिवत कारसेवा की घोषणा की जाएगी। इसके लिए एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 13 अखाड़ों के साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया है। इसके लिए गुलाबी रंग के करीब 5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। इनमें से एक खेप शुक्रवार देर रात पहुंच चुकी है।

    अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का ऐलान
    स्वामी सच्चिदानंद ने इससे पहले 4 जुलाई को अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का ऐलान किया था। इसके बाद 12 जुलाई को उन्होंने हरिद्वार स्थित वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात कर इस अभियान के लिए समर्थन मांगा था।

    अब 9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ में होने वाले कार्यक्रम पर सभी की नजर है। साधु-संतों के जुटने और कारसेवा के ऐलान को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल


    वृंदावन।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने तीन दिवसीय प्रवास के तहत शनिवार सुबह वृंदावन पहुंचे। यहां उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम हॉस्पिटल का दौरा किया। अस्पताल पहुंचने पर सेवाश्रम के सचिव स्वामी सुप्रकाशानंद और अस्पताल प्रभारी स्वामी काली कृष्णानंद ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

    ‘शारदा ब्लॉक’ का किया अवलोकन
    ठाकुरजी के दर्शन के बाद रामनाथ कोविंद ने अस्पताल के ‘शारदा ब्लॉक’ का भी अवलोकन किया। यह वही ब्लॉक है जिसका उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लोकार्पण हुआ था। इस दौरान उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के संतों से मुलाकात की और उनके साथ आत्मीय संवाद किया।

    सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम का किया उद्घाटन
    रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के कार्यक्रम पूरे करने के बाद पूर्व राष्ट्रपति रुकमणि विहार स्थित ‘सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम’ पहुंचे। यहां उन्होंने आश्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर संतों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में रामनाथ कोविंद ने आश्रम परिसर में पौधरोपण भी किया। पौधरोपण के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

  • लखनऊ में कार के अंदर मिला फाइनेंस कर्मी का शव, दुर्गंध आने पर लोगों को हुई जानकारी

    लखनऊ में कार के अंदर मिला फाइनेंस कर्मी का शव, दुर्गंध आने पर लोगों को हुई जानकारी


    लखनऊ।
    आशियाना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को सड़क किनारे खड़ी एक कार से युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया। कार से दुर्गंध आने पर आसपास के लोगों को इसकी जानकारी हुई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    मृतक की पहचान रायबरेली जिले के बरहा, थाना कोतवाली निवासी ज्ञानेंद्र सिंह (36) के रूप में हुई है। वह पिछले कुछ दिनों से लखनऊ के आशियाना स्थित बंगला बाजार इलाके में पत्नी प्रियंका और साढ़े तीन साल की बेटी के साथ रह रहे थे।

    निजी कंपनी में करते थे लोन फाइनेंस का काम
    परिजनों के मुताबिक, ज्ञानेंद्र सिंह निजी क्षेत्र में लोन फाइनेंस का काम करते थे। शुक्रवार को उनका शव सड़क किनारे खड़ी कार के अंदर मिला। कार से दुर्गंध आने के बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही पुलिस टीम के साथ फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    मौत की वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम
    पुलिस के अनुसार, फिलहाल मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • UP में आटे में मिलावट का बड़ा खेल: पत्थर का चूरा मिलाकर बेच रहे सफेद आटा, आगरा की 30 मिलों पर छापे

    UP में आटे में मिलावट का बड़ा खेल: पत्थर का चूरा मिलाकर बेच रहे सफेद आटा, आगरा की 30 मिलों पर छापे

    आगरा। बाजार में बिकने वाले गेहूं के आटे को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुनाफे के लिए कुछ मिल संचालकों पर गेहूं के साथ सेलखड़ी यानी मुलायम पत्थर का चूरा पीसकर आटा तैयार करने का आरोप है। फिरोजाबाद में मिलावट पकड़े जाने के बाद आगरा में खाद्य एवं औषधि विभाग ने आटा मिलों के खिलाफ जांच अभियान तेज कर दिया है। पिछले एक सप्ताह में 30 इकाइयों से 35 से अधिक नमूने लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित मिल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    फिरोजाबाद की मिल में मिली 30 किलो सेलखड़ी
    मामला उस समय सामने आया जब मंगलवार शाम खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम ने फिरोजाबाद के रजावली क्षेत्र के रामनगर गांव स्थित शिवाय ट्रेडिंग कंपनी की आटा मिल पर छापा मारा। टीम को वहां 30 किलो सेलखड़ी मिली। आरोप है कि इसे गेहूं के साथ पीसकर राज रसोई प्रीमियम ब्रांड के आटे की पैकिंग की जा रही थी। जांच में सेलखड़ी की आपूर्ति आगरा से होने की जानकारी सामने आई। खाद्य सुरक्षा विभाग ने शिवाय ट्रेडिंग कंपनी के दो संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। दोनों फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

    आगरा में दो दिन से मिलों की जांच
    खाद्य एवं औषधि विभाग की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर प्रदेशभर की आटा मिलों की जांच शुरू की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले आटे में चावल के चूरे की मिलावट के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन सेलखड़ी मिलाने का मामला पहली बार सामने आया है।

    आगरा में बुधवार को बसई खुर्द स्थित श्याम भोग एंटरप्राइजेज से श्याम भोग ब्रांड का 1,496 किलो आटा सील किया गया। इसके बाद गुरुवार देर रात तक भी विभाग की कार्रवाई जारी रही। जांच के दौरान कुछ स्थानों पर ब्रांडेड आटे की पैकिंग वाली जगहों पर गंदगी भी मिली।

    30 मिलों से लिए गए 35 से ज्यादा नमूने
    सहायक आयुक्त खाद्य महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सेलखड़ी मिलाकर गेहूं के आटे की बिक्री की शिकायत पर मुख्यालय स्तर से जांच कराई जा रही है। आगरा में अब तक 30 आटा मिलों से 35 से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं। इनकी जांच रिपोर्ट में यदि मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    आटे में क्यों मिलाते हैं सेलखड़ी?
    अधिकारियों के अनुसार, मिल संचालक सेलखड़ी के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग कारण बताते हैं। कभी इसे अनाज को कीड़ों से बचाने और कभी प्लास्टिक की बोरियों को चिकना करने के लिए इस्तेमाल करने की बात कही जाती है। हालांकि, मजदूरों से पूछताछ में एक अलग वजह सामने आई। बताया गया कि घटिया या खराब गेहूं से तैयार आटे में हल्का कालापन आ जाता है। उसे सफेद और चमकदार दिखाने के लिए सेलखड़ी मिलाई जाती है।

    ऐसे कर सकते हैं आटे की जांच
    खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह के अनुसार, घर पर भी कुछ सामान्य तरीकों से आटे में मिलावट की आशंका की जांच की जा सकती है।

    एक कटोरी आटे में नींबू की कुछ बूंदें डालें। बुलबुले उठने पर मिलावट की आशंका हो सकती है। एक गिलास पानी में आटा डालकर चम्मच से मिलाएं। आटा नीचे बैठने पर मिलावट की आशंका जताई गई है। हथेली पर आटा रखकर रगड़ें। सामान्य आटा खुरदरा महसूस होता है, जबकि असामान्य चिकनाहट मिलावट का संकेत हो सकती है। हालांकि, घरेलू परीक्षण केवल प्रारंभिक संकेत दे सकते हैं। मिलावट की पक्की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही होगी।

    सेहत के लिए भी नुकसानदेह होने की आशंका
    सीएमओ आगरा डॉ. अरुण श्रीवास्तव के मुताबिक, लंबे समय तक सेलखड़ी शरीर में पहुंचने से पेट संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे पेट दर्द, अपच और आंतों में रुकावट का खतरा बढ़ने की बात कही गई है। कैल्शियम या सिलिकेट के बारीक कण शरीर में जमा होने पर गुर्दे में पथरी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा दांतों की ऊपरी परत को नुकसान और मसूढ़ों में जख्म होने की आशंका भी बताई गई है। सीने में सेलखड़ी के कण जमा होने से टीबी संक्रमण का खतरा बढ़ने की बात भी सामने आई है।

    शिकायत के लिए नंबर
    खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 18001805533 और कार्यालय नंबर 0562-2970049 पर संपर्क किया जा सकता है। कार्यालय में शिकायत का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक है।

  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सियासत तेज, पंखे से सड़क सुखाने के वीडियो पर अखिलेश का तंज

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सियासत तेज, पंखे से सड़क सुखाने के वीडियो पर अखिलेश का तंज


    लखनऊ।
    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मरम्मत के दौरान सड़क को पंखों से सुखाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, सड़क धंसने की घटनाओं के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की जांच आईआईटी खड़गपुर को सौंपी गई है।

    अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वायरल वीडियो साझा करते हुए तंज कसा, “भाजपाई तरक्की की नई हवा”। उन्होंने कहा कि जिस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कुछ ही दिन पहले हुआ हो, उसकी बार-बार मरम्मत होना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी पूछा कि जब सड़क उद्घाटन के दो-तीन सप्ताह के भीतर ही कई बार मरम्मत मांग रही है, तो उस पर तेज रफ्तार से सफर करने का जोखिम आखिर कौन उठाएगा।

    20 दिन में कई जगह सड़क धंसने के मामले
    करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के बाद करीब 20 दिनों के भीतर कई स्थानों पर सड़क धंसने और सतह खिसकने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

    NHAI ने शुरू की सख्त कार्रवाई
    लगातार शिकायतों के बाद NHAI ने निर्माण एजेंसी PNC Infratech के खिलाफ नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटाकर उनके मूल विभाग भेज दिया गया है। इसके अलावा पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को आरोपपत्र जारी किया गया है।

    साथ ही प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार और स्वतंत्र अभियंता टीम के प्रमुख सुरेंद्र कुमार को दो वर्षों के लिए NHAI और सड़क परिवहन मंत्रालय की परियोजनाओं से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

    IIT खड़गपुर करेगी तकनीकी जांच
    NHAI का कहना है कि लगातार बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी तक पानी पहुंचने से कुछ हिस्सों में स्लिपेज की स्थिति बनी है। हालांकि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है। इसके अलावा पूरे एक्सप्रेसवे का लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से परीक्षण कराया जा रहा है।

    मरम्मत तक नहीं लगेगा टोल
    प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित हिस्सों की मरम्मत पर आने वाला करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च निर्माण कंपनी ही वहन करेगी। मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी स्थगित रहेगी और इस दौरान यात्रियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। टोल से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी निर्माण एजेंसी से ही की जाएगी।

  • UP : बारिश बनी आफत: फिरोजाबाद में भरभराकर गिरा मकान, परिवार ने भागकर बचाई जान

    UP : बारिश बनी आफत: फिरोजाबाद में भरभराकर गिरा मकान, परिवार ने भागकर बचाई जान

    फिरोजाबाद। लगातार हो रही बारिश ने फिरोजाबाद में एक परिवार का आशियाना छीन लिया। थाना बसई मोहम्मदपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत सोफीपुर में बुधवार सुबह बारिश के चलते एक मकान अचानक भरभराकर ढह गया। गनीमत रही कि परिवार के सभी सदस्य समय रहते घर से बाहर निकल आए, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, मकान गिरने से लाखों रुपये का घरेलू सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया।

    पीड़ित राजन सिंह ने बताया कि पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण मकान में सीलन आ गई थी और उसकी हालत काफी जर्जर हो चुकी थी। बुधवार सुबह अचानक दीवार और छत एक साथ गिर गईं, जिससे वर्षों की मेहनत से बसाया गया घर मलबे में तब्दील हो गया।

    घटना की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दी गई, लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि काफी समय बीतने के बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसे लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी देखी गई।

    आर्थिक रूप से कमजोर राजन सिंह के सामने अब परिवार और छोटे बच्चों के लिए रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि वे अपने दम पर दोबारा मकान बनाने की स्थिति में नहीं हैं। पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और तहसील अधिकारियों से आर्थिक सहायता, तत्काल राहत और सरकारी आवास योजना के तहत मदद उपलब्ध कराने की मांग की है।