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  • लखनऊ ट्रिपल मर्डर का खौफनाक वीडियो वायरल, पहले बेटे को मारी गोली फिर पिता और चाचा पर बरसाईं गोलियां, दो बार लोड की पिस्टल

    लखनऊ ट्रिपल मर्डर का खौफनाक वीडियो वायरल, पहले बेटे को मारी गोली फिर पिता और चाचा पर बरसाईं गोलियां, दो बार लोड की पिस्टल


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए सनसनीखेज ट्रिपल मर्डर मामले ने पूरे इलाके को दहला दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े नेता शिवा तिवारी उनके बेटे सुयश और भाई शिवेंद्र की हत्या का खौफनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। करीब दो मिनट 56 सेकेंड के इस वीडियो में आरोपी ऋषभ शुक्ला की पूरी वारदात कैमरे में कैद दिखाई दे रही है। वीडियो में आरोपी जिस तरह बेखौफ होकर एक के बाद एक गोलियां चलाता नजर आ रहा है उससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस हत्याकांड के सामने आने के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।

    वायरल वीडियो के मुताबिक वारदात की शुरुआत पड़ोसियों के बीच हुए विवाद से हुई थी। शिवा तिवारी और उनके पड़ोसी ऋषभ शुक्ला के बीच पेड़ के चबूतरे के निर्माण और वहां कार खड़ी करने को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। इसी बात को लेकर पहले ऋषभ और शिवा के बेटे सुयश के बीच कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद हाथापाई तक पहुंच गया। इसी दौरान ऋषभ ने पिस्टल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। वीडियो में दिखाई देता है कि उसने सबसे पहले सुयश को गोली मारी। गोली लगने के बाद सुयश जमीन पर गिर पड़ा।

    बेटे को गोली लगते देख शिवा तिवारी उसे बचाने के लिए दौड़े लेकिन आरोपी ने उन पर भी फायरिंग कर दी। शिवा के सिर में गोली लगी और वे जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद भी आरोपी नहीं रुका और उन पर दोबारा गोलियां चलाईं। घटनास्थल पर मौजूद परिवार की महिलाओं की चीख पुकार के बीच आरोपी लगातार आक्रामक बना रहा। वीडियो में उसकी हरकतों से साफ दिखाई देता है कि वह किसी को भी अपने सामने आने देने के लिए तैयार नहीं था।

    इसी बीच शिवा तिवारी के भाई शिवेंद्र भी मौके पर पहुंचे। आरोपी ने उन्हें भी निशाना बनाया और उन पर कई गोलियां चलाईं। इस दौरान शिवेंद्र की बेटी सुमेधा अपने पिता को बचाने के लिए आरोपी के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रही। वह लगातार रहम की गुहार लगाती रही लेकिन आरोपी ने उसकी बात नहीं मानी। वीडियो में परिवार के लोगों की बेबसी और आसपास मौजूद महिलाओं की चीखें सुनाई देती हैं। यह दृश्य पूरे घटनाक्रम को और भी भयावह बना देता है।

    वीडियो में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। फायरिंग के दौरान आरोपी की पिस्टल की मैगजीन खाली हो गई थी। इसके बाद उसने दोबारा मैगजीन लोड की और फिर से गोलियां चलानी शुरू कर दीं। तीन लोगों पर हमला करने के बाद भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ। आसपास के कुछ लोग जब घायलों की मदद के लिए आगे बढ़े तो आरोपी ने उन्हें भी पिस्टल दिखाकर पीछे हटने की धमकी दी। गोलियों की आवाज सुनते ही मोहल्ले में अफरा तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे।

    घटना का एक दूसरा वीडियो भी सामने आया है जिसमें पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचकर आरोपी ऋषभ को पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और उसके परिवार के कुछ सदस्यों को भी पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। इस हत्याकांड के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।

    एक मामूली पड़ोसी विवाद का इस तरह तीन लोगों की हत्या में बदल जाना कई सवाल खड़े करता है। पेड़ के चबूतरे और कार पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिर इतना हिंसक कैसे हो गया इसकी जांच की जा रही है। वायरल वीडियो ने इस घटना की भयावहता को सामने ला दिया है और अब सभी की नजर पुलिस की जांच तथा आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

  • 4800 ग्रेड पे और कैडर निर्माण की मांग पर अड़े CHO, 25 दिन से जारी प्रदर्शन, सरकार को विधानसभा घेराव की चेतावनी

    4800 ग्रेड पे और कैडर निर्माण की मांग पर अड़े CHO, 25 दिन से जारी प्रदर्शन, सरकार को विधानसभा घेराव की चेतावनी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों यानी सीएचओ का आंदोलन लगातार जारी है। नियमितीकरण वेतन विसंगति दूर करने और अलग कैडर बनाने समेत कई मांगों को लेकर प्रदेशभर के स्वास्थ्य अधिकारी इको गार्डन में धरना दे रहे हैं। गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। सीएचओ प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो प्रदेश के करीब 17 हजार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी सामूहिक इस्तीफा देने का कदम उठा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा का घेराव करने की भी चेतावनी दी है।

    प्रदर्शनकारियों के मुताबिक उनका धरना 25वें दिन भी जारी रहा। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रदेश के गांवों और ग्राम सभाओं में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में योगदान दे रहे हैं लेकिन वेतन और सेवा से जुड़ी समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हुआ है। सीएचओ संघ के प्रदेश सदस्य सनत सिंह ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में अलग कैडर का निर्माण हरियाणा की तर्ज पर 4800 ग्रेड पे और सातवें वेतनमान का लाभ शामिल है। इसके अलावा पीवीआई को मूल मानदेय में शामिल करने की मांग भी उठाई जा रही है। उनका कहना है कि शासन और विभागीय अधिकारियों के साथ कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।

    सीएचओ की अन्य मांगों में नियमितीकरण स्थानांतरण नीति लागू करना और कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे निर्धारित नियमों के अनुसार अपने अधिकार और सुविधाएं चाहते हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने के बावजूद उन्हें सेवा संबंधी लाभ और वेतनमान को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक महिला सीएचओ ने बताया कि वे 1956 की नियमावली के अनुसार व्यवस्था लागू करने कैडर निर्माण और वेतन विसंगति दूर करने की मांग कर रही हैं। उनके अनुसार दूसरे कैडरों के कर्मचारियों की तुलना में उन्हें लगभग पांच हजार रुपये कम वेतन मिलता है। उन्होंने पीवीआई को मूल मानदेय में शामिल करने की मांग भी दोहराई।

    प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर करीब दस बार मंत्रियों के आवास पर जाकर अपनी बात रख चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संगठन की प्रदेश उपाध्यक्ष रश्मि शर्मा ने कहा कि मांगों को लेकर संगठन पीछे हटने वाला नहीं है। जरूरत पड़ने पर एक से दो महीने तक भी धरना जारी रखा जाएगा। उनका कहना है कि वेतन और सेवा से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है ताकि स्वास्थ्य अधिकारी बिना परेशानी के अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।

    धरने में शामिल बदायूं के प्रतीक कुमार और फिरोजाबाद के अमित नायक ने भी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लगातार प्रदर्शन के बावजूद समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। सीएचओ प्रतिनिधियों के अनुसार प्रदेश में करीब 17 हजार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी गांवों और ग्राम सभाओं में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कामकाज पर असर पड़ने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमितीकरण कैडर निर्माण और वेतन विसंगति जैसे मुद्दों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। सामूहिक इस्तीफे और विधानसभा घेराव की चेतावनी के बीच अब निगाहें सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।

  • यूपी के विकास प्राधिकरणों में रिश्वतखोरी के आरोपों से मचा हड़कंप, गोरखपुर में कर्मचारी निलंबित, लखनऊ में 5 सदस्यीय जांच कमेटी गठित

    यूपी के विकास प्राधिकरणों में रिश्वतखोरी के आरोपों से मचा हड़कंप, गोरखपुर में कर्मचारी निलंबित, लखनऊ में 5 सदस्यीय जांच कमेटी गठित


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में नक्शा पास कराने और निर्माण संबंधी कामों में रिश्वत मांगने के आरोपों को लेकर कार्रवाई शुरू हो गई है। दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने आरोपी लिपिक निर्मल सिंह को निलंबित कर दिया है। वहीं लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वायरल ऑडियो और वीडियो में सामने आए आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। इन कार्रवाइयों के बाद अब जांच रिपोर्ट पर निगाहें टिकी हैं। अधिकारियों के मुताबिक जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

    गोरखपुर विकास प्राधिकरण में लिपिक निर्मल सिंह के खिलाफ कार्रवाई 20 अक्टूबर को दैनिक भास्कर में स्टिंग ऑपरेशन प्रकाशित होने के बाद की गई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि नक्शा पास कराने और निर्माण संबंधी कामों के लिए लोगों से पैसे मांगे जाते थे। मामले का संज्ञान लेते हुए प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने निर्मल सिंह को निलंबित कर दिया और आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। विशेष कार्याधिकारी संजीव कुमार दीक्षित को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। कमेटी को तीन दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आरोपों की समीक्षा होगी और नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। आरोपी लिपिक को लेकर अलग से आरोपपत्र जारी करने की भी तैयारी है।

    निर्मल सिंह गोरखपुर विकास प्राधिकरण में मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पर आया था और कर्मचारी संयुक्त परिषद का अध्यक्ष भी रह चुका है। उस पर आरोप है कि वह अधिकारियों से नजदीकी और संगठन में अपनी सक्रियता का इस्तेमाल कर नक्शा पास कराने अवैध निर्माण से जुड़े कामों और आवासीय योजनाओं में फ्लैट आवंटन के नाम पर लोगों से पैसे लेता था। इसके अलावा पत्रकारपुरम और वसुंधरा एन्क्लेव में करीबियों के नाम पर फ्लैट लेकर मुनाफे में बेचने के आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

    दूसरी ओर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने भी अपने अधिकारी और कर्मचारी से जुड़े वायरल ऑडियो वीडियो की जांच शुरू कर दी है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने 21 अक्टूबर को पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। कमेटी में प्रभारी अधिकारी अधिष्ठान ओएसडी आईटी देवांश त्रिवेदी अधिशासी अभियंता मनोज सागर और लेखाधिकारी विनोद श्रीवास्तव को शामिल किया गया है। विनोद श्रीवास्तव को सदस्य संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी को सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है। जांच में जूनियर इंजीनियर राहुल प्रताप विश्वकर्मा और जोनल अधिकारी मान सिंह से जुड़े वायरल ऑडियो वीडियो की पड़ताल की जाएगी।

    दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने विकास प्राधिकरणों में कथित रिश्वतखोरी और निर्माण संबंधी अनियमितताओं की पड़ताल के लिए खुफिया कैमरे से बातचीत रिकॉर्ड की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि नक्शा और निर्माण संबंधी काम कराने के बदले पैसे मांगने की बातचीत सामने आई। इसके बाद यह सवाल उठा कि नियमों के तहत होने वाले सरकारी कामों के लिए आवेदकों से कथित तौर पर रकम क्यों मांगी जा रही है और ऐसी गतिविधियों पर विभागीय निगरानी कितनी प्रभावी है।

    अब दोनों प्राधिकरणों की जांच कमेटियों के सामने वायरल रिकॉर्डिंग की सत्यता और बातचीत की परिस्थितियों की जांच करना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही यह पता लगाना होगा कि क्या किसी सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगी गई और क्या इस मामले में अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल हैं। फिलहाल गोरखपुर में निलंबन और लखनऊ में जांच की कार्रवाई की गई है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे।

  • यूपी MLC चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर बवाल, वायरल सूची में अजीबोगरीब नामों का दावा, भाजपा की शिकायत पर जांच तेज

    यूपी MLC चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर बवाल, वायरल सूची में अजीबोगरीब नामों का दावा, भाजपा की शिकायत पर जांच तेज

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन सीटों पर मतदान से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इलाहाबाद झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की एक मतदाता सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल सूची में कुछ ऐसे नाम और पिता के नाम दर्ज होने का दावा किया गया है जिन्हें देखकर लोग हैरान हैं। मामला सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने जांच के निर्देश दिए हैं। झांसी के मंडलायुक्त से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है और गुरुवार दोपहर तक रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। शुक्रवार 23 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उठे इन सवालों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सूची में राम ने यादव को मारा और मूर्खचंद जैसे नामों का उल्लेख किया जा रहा है। कुछ प्रविष्टियों में मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम असामान्य बताए गए हैं। सूची में नरेंद्र यादव के पिता का नाम बीकाम लिखे होने और कुछ अन्य मतदाताओं के नामों में भी गड़बड़ी होने का दावा किया गया है। हालांकि इन वायरल प्रविष्टियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि ये वास्तविक मतदाता सूची की त्रुटियां हैं या किसी अन्य कारण से ऐसे नाम दर्ज दिखाई दे रहे हैं। निर्वाचन आयोग की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

    निर्वाचन आयोग ने आधी रात के बाद अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी दी कि इलाहाबाद झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में अजीब नाम होने की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है। इसके बाद झांसी के मंडलायुक्त को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। मंडलायुक्त इस निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी हैं। मतदान से कुछ घंटे पहले मामला सामने आने के कारण जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

    इस विवाद के बीच भाजपा ने भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव अधिकारियों से शिकायत की है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया है कि सूची में बड़ी संख्या में फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम शामिल हैं। भाजपा के चुनाव आयोग संपर्क विभाग के प्रदेश संयोजक अखिलेश कुमार अवस्थी ने दावा किया कि कुछ प्रभावशाली स्नातक नेताओं ने एक ही व्यक्ति के नाम को दो से तीन बार दर्ज कराया है। पार्टी की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ऐसे नामों की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

    भाजपा नेताओं के शिकायती पत्र के मुताबिक मतदाता सूची में कुल 4397 डुप्लीकेट मतदाता होने का दावा किया गया है। इनमें प्रयागराज में 3163 नाम होने की बात कही गई है। इसके अलावा कौशांबी में 320 जालौन में 179 झांसी में 178 बांदा में 140 फतेहपुर में 139 ललितपुर में 109 हमीरपुर में 81 चित्रकूट में 68 और महोबा में 20 डुप्लीकेट नाम होने का आरोप लगाया गया है। इन आंकड़ों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मतदाता सूची में उम्र और पात्रता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। भाजपा का कहना है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम सूची में शामिल हैं जिनकी जन्मतिथि के आधार पर उनकी पात्रता संदिग्ध है। स्नातक निर्वाचन में मतदान के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि यदि उनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है तो वे निर्धारित मतदान केंद्र पर ही वोट डालें। एक से अधिक स्थानों पर मतदान करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

    अब सबकी नजर निर्वाचन आयोग की जांच रिपोर्ट पर है। जांच से यह स्पष्ट होगा कि वायरल सूची में दिखाई गई गड़बड़ियां कितनी वास्तविक हैं और डुप्लीकेट नामों को लेकर किए गए दावों में कितनी सच्चाई है। मतदान से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

  • वृंदावन गुरुकुल में जहरीली गैस का कहर, टैंक में उतरे 4 छात्रों की मौत, साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा

    वृंदावन गुरुकुल में जहरीली गैस का कहर, टैंक में उतरे 4 छात्रों की मौत, साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा


    वृंदावन । वृंदावन के एक गुरुकुल में मंगलवार रात दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुलम में पानी के टैंक की सफाई करने उतरे चार छात्रों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। इस हादसे में एक अन्य छात्र भी बेहोश हो गया जिसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद पूरे गुरुकुल परिसर में अफरा तफरी मच गई और छात्रों तथा कर्मचारियों में दहशत फैल गई।

    जानकारी के मुताबिक हादसा रात करीब 10 बजे हुआ। गुरुकुल में मौजूद छात्र पानी के एक गहरे टैंक की सफाई कर रहे थे। बताया जा रहा है कि टैंक से पहले मोटर के जरिए पानी बाहर निकाला गया और इसके बाद बचा हुआ पानी बाल्टी से निकाला गया। पानी लगभग खत्म होने के बाद एक छात्र टैंक के अंदर सफाई के लिए उतरा लेकिन कुछ ही देर में वह बेहोश होकर गिर गया। ऊपर मौजूद छात्रों ने उसे आवाज लगाई लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो उसे बचाने के लिए दूसरे छात्र भी एक के बाद एक टैंक में उतरते चले गए।

    बताया जा रहा है कि टैंक के भीतर जहरीली गैस मौजूद थी जिसकी चपेट में आने से सभी छात्र बेहोश हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी छात्रों को टैंक से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने मनु कटारे उम्र 20 वर्ष देवांश उम्र 17 वर्ष विशु उम्र 18 वर्ष और आर्यन उम्र 18 वर्ष को मृत घोषित कर दिया। वहीं रुद्राक्ष उम्र 18 वर्ष की हालत गंभीर बताई गई।

    मृत छात्रों में मनु कटारे और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे जबकि आर्यन कौशांबी और विशु मेरठ का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिवारों में मातम पसर गया। गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य छात्र भी इस घटना से सदमे में हैं।
    मृत छात्रों में मनु कटारे और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे जबकि आर्यन कौशांबी और विशु मेरठ का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिवारों में मातम पसर गया। गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य छात्र भी इस घटना से सदमे में हैं।

    वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित इस गुरुकुल में करीब 120 छात्र पढ़ते हैं। तीन मंजिला इमारत में 43 कमरे हैं और यह संस्थान पिछले करीब तीन वर्षों से संचालित बताया जा रहा है। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह भी मौके पर पहुंचे और गुरुकुल से जुड़े लोगों तथा छात्रों से घटना की जानकारी ली।

    डीएम ने बताया कि टैंक करीब 12 फीट गहरा था और उसमें बदबू आने के बाद उसकी सफाई की जा रही थी। प्रारंभिक तौर पर जहरीली गैस के कारण छात्रों के बेहोश होने और चार छात्रों की मौत की आशंका जताई गई है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि टैंक में जहरीली गैस कैसे बनी और सफाई के दौरान सुरक्षा के जरूरी इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

    हादसे के बाद गुरुकुल के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने भी घटना का संज्ञान लिया है और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है। हादसे ने एक बार फिर बंद टैंकों और गहरे जलाशयों की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खतरनाक परिणाम सामने ला दिए हैं।

  • झांसी में इलाज के लिए चार घंटे तक गुहार लगता रहा पति, पत्नी को नर्सिंगहोम के बाहर जमीन पर लिटाकर मांगी मदद

    झांसी में इलाज के लिए चार घंटे तक गुहार लगता रहा पति, पत्नी को नर्सिंगहोम के बाहर जमीन पर लिटाकर मांगी मदद

    झांसी। गंभीर हालत में पत्नी को लेकर इलाज की उम्मीद में नर्सिंगहोम पहुंचे पति की बेबसी का शुक्रवार को गुमनावारा में मार्मिक नजारा देखने को मिला। आरोप है कि डॉक्टर और कर्मचारी नर्सिंगहोम पर ताला लगाकर चले गए, जबकि पति करीब चार घंटे तक पत्नी को बाहर जमीन पर लिटाकर इलाज की गुहार लगाता रहा।

    महिला की हालत देखकर मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी गई। इसके बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष अग्निहोत्री मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिला को एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया। डिप्टी सीएमओ ने पुलिस के साथ नर्सिंगहोम की जांच कर संबंधित दस्तावेज कब्जे में लिए।

    प्रथम दृष्टया उन्होंने मामले को चिकित्सकीय नैतिक मानकों के विपरीत बताया। सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी के आदेश पर नर्सिंगहोम का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है। नर्सिंगहोम संचालक और संबंधित डॉक्टर को शनिवार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर कार्रवाई की बात कही गई है।

    जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद बिगड़ी हालत
    निवाड़ी निवासी राहुल आदिवासी ने बताया कि उसकी पत्नी रेखा आदिवासी के गर्भ में जुड़वा बच्चे थे। प्रसव के लिए वह उसे गुमनावारा स्थित नर्सिंगहोम लेकर आया था। वहां महिला डॉक्टर ने ऑपरेशन के जरिए दोनों बच्चों का जन्म कराया।

    राहुल के मुताबिक ऑपरेशन के बाद टांकों में संक्रमण हो गया और मवाद पड़ने लगा। इसके बाद रेखा को कई दिन तक नर्सिंगहोम में भर्ती रखकर उपचार किया गया। घर लौटने के बाद दोबारा परेशानी होने पर राहुल उसे लेकर नर्सिंगहोम पहुंचा। वहां जांच और उपचार के साथ बाहर से भी जांच कराई गई।

    बाद में रेखा को दूसरे नर्सिंगहोम भेजा गया। वहां डॉक्टर ने ऑपरेशन कर मवाद निकाला। कुछ दिन बाद टांकों की जगह से मल आने लगा। इसके बाद राहुल अपनी पत्नी को एक और नर्सिंगहोम लेकर पहुंचा। वहां डॉक्टरों ने बताया कि अब उसका उपचार एम्स जैसे बड़े संस्थान में ही संभव है।

    सुबह 9 बजे पत्नी को लेकर पहुंचा था
    राहुल के अनुसार शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे वह गंभीर हालत में पत्नी को लेकर संबंधित नर्सिंगहोम पहुंचा था। आरोप है कि उसे भर्ती करने के बजाय डॉक्टर और कर्मचारी नर्सिंगहोम पर ताला लगाकर चले गए।

    राहुल करीब चार घंटे तक पत्नी को नर्सिंगहोम के बाहर जमीन पर लिटाकर इलाज के लिए मदद की गुहार लगाता रहा। उसने बताया कि पत्नी के इलाज के लिए वह अपनी बाइक और जेवर तक गिरवी रख चुका है और अब उसके पास इलाज कराने के लिए पैसे भी नहीं हैं। महिला की गंभीर हालत और पति की बेबसी देखकर आसपास के लोग मौके पर जुटने लगे। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जानकारी दी गई।

    पुलिस के साथ पहुंचकर डिप्टी CMO ने की जांच
    मामले की जानकारी मिलने पर डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष अग्निहोत्री मौके पर पहुंचे। महिला की हालत को देखते हुए उन्होंने तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था कराई और उसे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया। इसके बाद डिप्टी सीएमओ ने पुलिस के साथ नर्सिंगहोम की जांच की और वहां मौजूद संबंधित दस्तावेज कब्जे में लिए। उन्होंने प्रथम दृष्टया पूरे मामले को चिकित्सकीय नैतिक मानकों के विपरीत बताया।

    नोटिस के बाद होगी आगे की कार्रवाई
    डॉ. आशीष अग्निहोत्री के मुताबिक सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी के आदेश पर नर्सिंगहोम का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है। कोंच निवासी नर्सिंगहोम संचालक और संबंधित डॉक्टर को शनिवार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नोटिस के जवाब की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • लखनऊ: गोमती का जलस्तर बढ़ने से निवासियों की बढ़ी चिंता, प्रशासन से बचाव की तैयारियों की मांग

    लखनऊ: गोमती का जलस्तर बढ़ने से निवासियों की बढ़ी चिंता, प्रशासन से बचाव की तैयारियों की मांग

    लखनऊ। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से एमार गोमती ग्रीन्स के निवासियों की चिंता बढ़ गई है। जलस्तर में और इजाफा होने पर सोसाइटी के आसपास जलभराव की आशंका है, ऐसे में आरडब्ल्यूए ने प्रशासन से समय रहते बचाव की तैयारियां करने और विद्युत सब-स्टेशन समेत अन्य उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

    आरडब्ल्यूए ने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, नगर निगम और विद्युत विभाग से मौके का निरीक्षण कर संभावित स्थिति से निपटने के लिए जरूरी इंतजाम पहले से करने की अपील की है। आरडब्ल्यूए के मुताबिक, गोमती के जलस्तर पर लगातार निगरानी के साथ सोसाइटी के आसपास जलभराव की संभावित जगहों को भी चिह्नित किया जाना चाहिए।

    रात में बढ़ा जलस्तर तो मुश्किल बढ़ सकती है
    आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राज किशोर राजेश ने कहा कि यदि रात के समय भी गोमती का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो किसी आकस्मिक स्थिति में राहत और बचाव शुरू करने में समय लग सकता है। इसलिए प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच तत्काल समन्वय जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ते ही बिना देरी के राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए संभावित जलभराव वाले स्थानों पर पहले से पंप और जनरेटर की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही राहत एवं बचाव से जुड़े जरूरी उपकरण भी तैयार रखे जाएं।

    अफवाहों पर ध्यान न दें, आधिकारिक सूचना मानें
    आरडब्ल्यूए ने स्पष्ट किया कि प्रशासन से तैयारियां करने की मांग का उद्देश्य किसी तरह की दहशत फैलाना नहीं है। यह संभावित जोखिम को देखते हुए समय रहते संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है।

    निवासियों से भी अपील की गई है कि वे गोमती के बढ़ते जलस्तर को लेकर किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा न करें। प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य अधिकृत एजेंसियों की ओर से जारी सूचनाओं को ही सही मानें।

    सब-स्टेशन और बिजली उपकरणों की सुरक्षा पर जोर
    गोमती का जलस्तर बढ़ने पर सोसाइटी की विद्युत व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका है। इसे देखते हुए आरडब्ल्यूए ने विद्युत विभाग से इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन और अन्य विद्युत उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा करने की मांग की है।

    आरडब्ल्यूए ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी पहले से रखी जाए, ताकि जलभराव की स्थिति में सोसाइटी के निवासियों को अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।

    आरडब्ल्यूए ने सुझाए ये इंतजाम
    – गोमती नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जाए।
    – सोसाइटी के आसपास जलभराव वाले संभावित स्थानों का निरीक्षण किया जाए।
    – जरूरत वाले स्थानों पर पंप और जनरेटर की व्यवस्था पहले से रखी जाए।
    – राहत एवं बचाव से जुड़े उपकरण तैयार रखे जाएं।
    – आपदा प्रबंधन टीम के संपर्क नंबर निवासियों को उपलब्ध कराए जाएं।
    – जरूरत पड़ने पर निकासी और बचाव की योजना तत्काल लागू करने की तैयारी रखी जाए।

  • यूपी में 15 IAS अफसरों के तबादले: जौनपुर-मऊ के CDO बदले, पंचायती राज से मेडिकल सप्लाई तक नई जिम्मेदारियां

    यूपी में 15 IAS अफसरों के तबादले: जौनपुर-मऊ के CDO बदले, पंचायती राज से मेडिकल सप्लाई तक नई जिम्मेदारियां


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश शासन ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए 15 आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। तबादला सूची में जौनपुर और मऊ के मुख्य विकास अधिकारियों (CDO) समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है।

    शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक जौनपुर के मुख्य विकास अधिकारी ध्रुव खांडिया का तबादला कर उन्हें मऊ का मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया है। वहीं मऊ के CDO विवेक कुमार श्रीवास्तव को राजस्व परिषद, प्रयागराज में सदस्य (न्यायिक) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    नरेंद्र बहादुर सिंह होंगे जौनपुर के नए CDO

    जौनपुर में अब नरेंद्र बहादुर सिंह मुख्य विकास अधिकारी की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले वह लखीमपुर खीरी में अपर जलाधिकारी (वित्त/राजस्व) के पद पर तैनात थे। शासन के इस फेरबदल के बाद जौनपुर और मऊ, दोनों जिलों के विकास प्रशासन में नए अधिकारियों की तैनाती हो गई है।

    पंचायती राज से चिकित्सा शिक्षा तक बदलाव

    तबादला सूची में कई अन्य विभागों के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। अमित कुमार सिंह को निदेशक, पंचायती राज के पद से हटाकर प्रबंध निदेशक, पीसीडीएफ बनाया गया है। वहीं प्रकाश बिंदु को प्रबंध निदेशक, पीसीडीएफ के पद से स्थानांतरित कर सचिव, चिकित्सा शिक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।

    इसी क्रम में डॉ. उज्ज्वल कुमार को उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक पद से हटाकर विशेष सचिव एवं निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म बनाया गया है।

    वहीं जे. रिभा को विशेष सचिव, भूतत्व एवं खनिकर्म के पद से स्थानांतरित कर प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    शासन के इस प्रशासनिक फेरबदल में पंचायती राज, चिकित्सा शिक्षा, भूतत्व एवं खनिकर्म, मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन समेत कई विभागों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं।

  • गोरखपुर में सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बवाल: पूर्व जिलाध्यक्ष को जड़ा थप्पड़, बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद

    गोरखपुर में सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बवाल: पूर्व जिलाध्यक्ष को जड़ा थप्पड़, बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद


    गोरखपुर।
    समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुक्रवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब नेताओं के बीच बैठने की जगह को लेकर शुरू हुई कहासुनी हाथापाई में बदल गई। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में चल रही प्रेस वार्ता के दौरान सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के साथ मारपीट और थप्पड़ मारने की घटना हुई। विवाद के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को बीच में ही रोकना पड़ा।

    घटना के दौरान मौके पर मौजूद पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर स्थिति संभालने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची, हालांकि घटना को लेकर किसी पक्ष की ओर से पुलिस को अभी तहरीर नहीं दी गई है।

    बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद
    दरअसल, लोकतंत्र बचाओ सप्ताह और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का आयोजन सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम की ओर से किया गया था।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा महानगर अध्यक्ष सबीर कुरैशी, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश यादव, पूर्व विधायक विजय बहादुर यादव, काजल निषाद, संजय पहलवान, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री डॉ. मोहसिन, जय प्रकाश यादव और रणजीत पासवान समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे।

    इसी दौरान सपा नेता अंशुमान सिंह के पुत्र कमलेश प्रेस क्लब पहुंचे। उन्होंने काजल निषाद के पास बैठने की कोशिश की, लेकिन वहां जगह नहीं थी। इसके बाद उनकी पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से बातचीत हुई। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

    कहासुनी के बाद हाथापाई, नगीना साहनी को थप्पड़
    मामूली विवाद देखते ही देखते बढ़ गया और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। आरोप है कि इस दौरान नगीना साहनी के साथ मारपीट की गई और उन्हें थप्पड़ भी मारा गया। घटना के दौरान अभद्र भाषा के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

    मौके पर मौजूद पार्टी के अन्य नेताओं ने दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। हंगामे के चलते प्रेस कॉन्फ्रेंस को बीच में ही रोकना पड़ा।

    जिस समय सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम मीडिया के सामने लोकतंत्र और वोट बचाने के मुद्दे पर पार्टी की बात रख रहे थे, उसी दौरान पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष के साथ हुई मारपीट से कार्यक्रम का पूरा माहौल बदल गया। राजनीतिक मुद्दों की जगह प्रेस क्लब में हुए विवाद और थप्पड़ कांड की चर्चा होने लगी।

    जिलाध्यक्ष बोले- निंदनीय घटना, राष्ट्रीय अध्यक्ष को देंगे जानकारी
    घटना पर सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम ने इसे निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को दी जाएगी और इस तरह की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के किसी कार्यक्रम में इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि मामले की जानकारी पार्टी नेतृत्व को देकर उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी।

    सूचना पर पहुंची पुलिस, नहीं मिली तहरीर
    प्रेस क्लब में विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत या तहरीर नहीं दी गई है।

    वहीं, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में प्रेस क्लब के भीतर नेताओं के बीच विवाद और हाथापाई का घटनाक्रम दिखाई दे रहा है। घटना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी के भीतर सामने आए विवाद को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

  • D-फार्मा से नर्सिंग तक फर्जी डिग्रियों का खेल चाय बेचने वाले के नाम दर्ज थी यूनिवर्सिटी पांच गिरफ्तार

    D-फार्मा से नर्सिंग तक फर्जी डिग्रियों का खेल चाय बेचने वाले के नाम दर्ज थी यूनिवर्सिटी पांच गिरफ्तार


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के एटा में फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने खुलासा किया है। मारहरा थाना क्षेत्र में सामने आए इस मामले में आरोप है कि वर्ष 2022 से छात्रों को मेडिकल से जुड़े अलग अलग पाठ्यक्रमों में दाखिला दिलाने के नाम पर रकम वसूली जा रही थी। छात्रों और उनके परिजनों को भरोसा दिलाया जाता था कि उन्हें मान्य डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराई जाएगी। पुलिस के मुताबिक इस पूरे खेल के जरिए अब तक दो करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ऐंठी जा चुकी है। मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से फर्जीवाड़े से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं।

    इस पूरे मामले का खुलासा भी बेहद चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद हुआ। पुलिस के मुताबिक 16 सितंबर को रामसेवक नाम के व्यक्ति ने डायल 112 पर सूचना दी कि उसके भाई सतेंद्र कुमार का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया है और उसकी रिहाई के बदले 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और सतेंद्र की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने उसे आगरा से सकुशल बरामद कर लिया। इसके बाद जब पूरे मामले की जांच आगे बढ़ी तो अपहरण की कहानी ही संदिग्ध निकली। पुलिस के अनुसार सतेंद्र ने कथित तौर पर खुद अपने अपहरण की साजिश रची थी। आरोप है कि छात्रों और उनके परिजनों से ली गई रकम वापस करने से बचने के लिए उसने यह पूरा ड्रामा रचा।

    जांच के दौरान पुलिस को कथित फर्जी यूनिवर्सिटी के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी के नाम से वर्ष 2022 से कई मेडिकल और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले कराए जा रहे थे। इनमें डी-फार्मा बी-फार्मा बीएससी नर्सिंग डीएमएलटी बीएमएलटी जीएनएम और एएनएम जैसे पाठ्यक्रम शामिल थे। छात्रों को इन पाठ्यक्रमों के बाद डिग्री और मार्कशीट देने का भरोसा दिया जाता था और इसी आधार पर उनसे फीस के नाम पर रकम ली जाती थी।

    मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि पुलिस के मुताबिक कथित यूनिवर्सिटी चाय बेचने वाले भगवान दास के नाम पर संचालित की जा रही थी। पुलिस ने इस मामले में सतेंद्र कुमार गौरव अग्रवाल भगवान दास नरेंद्र उर्फ पप्पू और मोहम्मद शरीफ कुरैशी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित फर्जी संस्थान के संचालन में और कौन लोग शामिल थे और छात्रों से वसूली गई रकम का नेटवर्क किस तरह काम करता था।

    पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप फर्जी चेक छात्रों के आई कार्ड फीस रसीदें अटेंडेंस शीट प्रश्नपत्र परीक्षा पुस्तिकाएं मार्कशीट मुहर और प्रचार सामग्री बरामद की है। इन सामानों की बरामदगी से पुलिस को कथित फर्जी शैक्षणिक संस्थान के कामकाज और छात्रों को दिए जाने वाले दस्तावेजों की जांच में मदद मिल रही है। सभी आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और फर्जी यूनिवर्सिटी के जरिए की गई कथित ठगी की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।