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  • एमएसपी सुरक्षा कवच का विस्तार: चार राज्यों में दालों-तिलहनों की रिकॉर्ड खरीद को मंजूरी, उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

    एमएसपी सुरक्षा कवच का विस्तार: चार राज्यों में दालों-तिलहनों की रिकॉर्ड खरीद को मंजूरी, उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

    नई दिल्ली । किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और कृषि बाजार में मूल्य अस्थिरता के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दालों और तिलहनों की बड़े पैमाने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद को मंजूरी दी है। यह निर्णय मूल्य समर्थन योजना के तहत लिया गया है और इससे विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु तथा हरियाणा के लाखों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि कई बार बाजार में कीमतों में गिरावट आने के कारण किसानों को अपनी उपज कम दाम पर बेचनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में एमएसपी आधारित खरीद किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए दालों और तिलहनों की सरकारी खरीद का दायरा बढ़ाया गया है, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित प्रतिफल मिल सके।

    इस निर्णय में सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश को मिला है। ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के लिए राज्य में मूंग, उड़द और मूंगफली की बड़ी मात्रा में खरीद को स्वीकृति दी गई है। राज्य में कुल स्वीकृत खरीद का मूल्य 1,490 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रदेश के दाल एवं तिलहन उत्पादक किसानों की आय को महत्वपूर्ण समर्थन मिलेगा और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिलेगी।

    उत्तर प्रदेश में मूंग और उड़द की खेती करने वाले किसानों के लिए यह फैसला विशेष महत्व रखता है। पिछले कुछ वर्षों में दालों के उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन कई बार मांग और आपूर्ति के असंतुलन के कारण किसानों को अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती। ऐसे में सरकारी खरीद किसानों के लिए स्थिर आय का आधार प्रदान करेगी।

    गुजरात के लिए भी सरकार ने ग्रीष्मकालीन सीजन के तहत मूंग की खरीद को मंजूरी दी है। राज्य में स्वीकृत खरीद का कुल मूल्य 160 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। इससे मूंग उत्पादक किसानों को सीधे लाभ मिलेगा और उन्हें खुले बाजार में कम कीमतों पर फसल बेचने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कृषि क्षेत्र में यह कदम उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ किसानों का भरोसा बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

    तमिलनाडु में सरकार ने पहले से निर्धारित खरीद सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया है। राज्य में मूंग की अतिरिक्त खरीद को मंजूरी मिलने से किसानों को अधिक मात्रा में अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को बेचने का अवसर मिलेगा। इससे फसल की बिक्री प्रक्रिया अधिक सुगम होगी और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

    हरियाणा में भी मूंग की खरीद के लिए स्वीकृति दी गई है। राज्य के किसानों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि मंत्रालय का मानना है कि यह निर्णय मूल्य समर्थन व्यवस्था को मजबूत करेगा और किसानों को बाजार में मूल्य गिरावट से सुरक्षा प्रदान करेगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार दालों और तिलहनों की एमएसपी खरीद का विस्तार केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में खाद्य सुरक्षा और तिलहन-दाल उत्पादन को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा, उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता को मजबूती मिलेगी।

  • बीज से बाजार तक बदली तस्वीर: मोदी सरकार के 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर योगी और धामी का बड़ा बयान

    बीज से बाजार तक बदली तस्वीर: मोदी सरकार के 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर योगी और धामी का बड़ा बयान


    नई दिल्ली ।
    केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कृषि क्षेत्र में हुए बदलाव और किसान कल्याण योजनाओं की उपलब्धियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसानों के हित में लागू की गई विभिन्न योजनाओं और नीतिगत सुधारों की सराहना करते हुए इन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाला कदम बताया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के अन्नदाता किसानों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के नए आयाम जुड़े हैं। उनके अनुसार केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए बीज से लेकर बाजार तक किसानों को केंद्र में रखकर योजनाएं तैयार की हैं। इन प्रयासों से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है।

    उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है, जबकि फसल बीमा योजना ने प्राकृतिक आपदाओं और नुकसान की स्थिति में सुरक्षा का भरोसा मजबूत किया है। इसके साथ ही सौर ऊर्जा आधारित पहल और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने डिजिटल कृषि बाजार व्यवस्था के विस्तार को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से किसानों को अपनी उपज के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध हुआ है, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि किसान समृद्धि ही राष्ट्र समृद्धि का आधार है और बीते वर्षों की नीतियां इसी सोच को आगे बढ़ाती हैं।

    वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारतीय कृषि व्यवस्था ने व्यापक परिवर्तन देखा है। उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल सुरक्षा योजनाएं और कृषि में तकनीकी नवाचारों ने किसानों की कार्यक्षमता तथा आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    धामी ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अनेक स्तरों पर काम किया गया है। उनके अनुसार कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से बाजारों तक पहुंच बढ़ाने, आधुनिक खेती को प्रोत्साहन देने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    उन्होंने उत्तराखंड में चल रही विभिन्न कृषि पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। बागवानी, प्राकृतिक खेती, मोटे अनाजों के उत्पादन, कृषि यंत्रीकरण तथा सीमांत किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है।

    दोनों मुख्यमंत्रियों के वक्तव्यों से स्पष्ट है कि कृषि क्षेत्र को देश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन क्षमता मजबूत करने तथा ग्रामीण विकास को गति देने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। कृषि क्षेत्र में तकनीक, वित्तीय सहायता, बाजार विस्तार और आधारभूत संरचना के विकास को आने वाले वर्षों में भी प्राथमिकता दिए जाने की बात दोहराई गई है।

  • हार्ड हिंदुत्व से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में योगी, सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे जवाबी मोर्चा संभाल रहे अखिलेश

    हार्ड हिंदुत्व से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में योगी, सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे जवाबी मोर्चा संभाल रहे अखिलेश

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय शेष है, लेकिन राज्य की राजनीति में चुनावी माहौल धीरे-धीरे आकार लेने लगा है। प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने और नई रणनीतियों के जरिए जनसमर्थन जुटाने में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की राजनीतिक शैली और चुनावी संदेशों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

    हाल के दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषणों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिंदुत्व, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को प्रमुखता मिलती दिखाई दी है। गौ संरक्षण, राम मंदिर, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दे उनके राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनाव में विकास और सुशासन के साथ-साथ अपने पारंपरिक वैचारिक आधार को भी मजबूती से सामने रख सकती है।

    योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न जनसभाओं में राम मंदिर निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा है। उनके हालिया बयानों को पार्टी के कोर समर्थक वर्ग को एकजुट रखने और चुनावी संदेश को स्पष्ट करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा नेतृत्व यह भी मानता है कि वैचारिक मुद्दों और विकास कार्यों का संयुक्त प्रस्तुतीकरण चुनावी दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है।

    दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी बदले हुए राजनीतिक माहौल के अनुरूप अपनी रणनीति में बदलाव करती नजर आ रही है। अखिलेश यादव ने पिछले कुछ समय में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी बढ़ाई है। मंदिरों के दर्शन, धार्मिक स्थलों के विकास संबंधी घोषणाएं और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर सकारात्मक रुख को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे के मुकाबले सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    साथ ही समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक सामाजिक गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के प्रयास में भी जुटी हुई है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि धार्मिक मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाते हुए व्यापक सामाजिक समूहों को साथ रखा जाए। यही कारण है कि हाल के महीनों में पार्टी के कई नेताओं को विवादित धार्मिक या जातीय टिप्पणियों से बचने की सलाह दी गई है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल वैचारिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। रोजगार, कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, किसानों की समस्याएं और युवाओं की आकांक्षाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि हिंदुत्व और सांस्कृतिक पहचान जैसे विषय चुनावी विमर्श का प्रमुख हिस्सा बने रह सकते हैं।

    भाजपा जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपने मजबूत संगठन और सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों, क्षेत्रीय मुद्दों और संतुलित राजनीतिक संदेश के जरिए मुकाबला करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    आने वाले महीनों में दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियां और अधिक तेज होने की संभावना है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई केवल विकास बनाम विकास की नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश, वैचारिक पहचान और सामाजिक संतुलन की भी होगी। ऐसे में 2027 का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है।

  • चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

    चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । देश के सर्राफा और कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजारों से लेकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) तक चांदी के दाम दबाव में दिखाई दिए, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच बाजार की दिशा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हाल के दिनों में लगातार ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही चांदी में आई यह गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    5 जून 2026 के कारोबारी सत्र में देश के कई प्रमुख बाजारों में चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के सर्राफा बाजारों में चांदी के भाव पिछले सत्रों की तुलना में नीचे आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल स्थानीय मांग और आपूर्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी बड़ा प्रभाव है।

    कमोडिटी बाजार में भी चांदी के वायदा कारोबार पर दबाव साफ दिखाई दिया। MCX पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों में प्रति किलोग्राम कई हजार रुपये तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि विभिन्न एक्सपायरी और कॉन्ट्रैक्ट अवधि के अनुसार दरों में अंतर बना रहा, फिर भी पूरे बाजार में कमजोरी का रुख स्पष्ट दिखाई दिया।

    स्थानीय स्पॉट मार्केट में भी चांदी की कीमतें नरम रहीं। व्यापारियों के अनुसार हाल के उच्च स्तरों के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी का असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है। इसके कारण खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन निवेशकों के लिए बाजार की दिशा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसी धातुएं अपेक्षाकृत महंगी हो जाती हैं, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों को सुरक्षित रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

    भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है। हालांकि ऐसे समय में आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का व्यवहार अपेक्षाकृत सतर्क बना हुआ है।

    कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, अमेरिकी डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और बाजार के संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।

    चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट उन उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है जो निवेश या आभूषण खरीदारी की योजना बना रहे हैं। वहीं निवेशकों के लिए यह समय बाजार की गतिविधियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।

  • UP: 46 साल पुराने 1980 हत्या मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत चार दोषी करार, एमपी-एमएलए कोर्ट का बड़ा फैसला

    UP: 46 साल पुराने 1980 हत्या मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत चार दोषी करार, एमपी-एमएलए कोर्ट का बड़ा फैसला


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में एक बेहद पुराने और चर्चित हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट के जज योगेश कुमार तृतीय ने 1980 के प्रयागराज कचहरी परिसर में हुए दिनदहाड़े हत्या मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत चार लोगों को दोषी करार दिया है।

    यह मामला करीब 46 साल पुराना है, जिसमें आरोप है कि प्रयागराज कचहरी परिसर के भीतर ही एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में विजय मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया गया था। बताया जाता है कि विजय मिश्रा भदोही जिले से विधायक रह चुके हैं और सपा तथा निषाद पार्टी से भी राजनीतिक सफर कर चुके हैं। वर्तमान में वे जेल में बंद हैं।

    कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद अब सजा पर फैसला बाकी है। विशेष अदालत जल्द ही सभी दोषियों की सजा का ऐलान करेगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के गंभीर हत्या मामलों में उम्रकैद या कठोर कारावास की सजा हो सकती है।

    फैसले के बाद कोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।

  • महोबा में शादी की खुशियां मातम में बदलीं: ट्रक ने दुल्हन के दो भाइयों को रौंदा, मौके पर दर्दनाक मौत

    महोबा में शादी की खुशियां मातम में बदलीं: ट्रक ने दुल्हन के दो भाइयों को रौंदा, मौके पर दर्दनाक मौत


    नई दिल्ली। महोबा के पसवारा गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार दो युवकों को रौंद दिया, जिससे दुल्हन के सगे भाई और ममेरे भाई की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। दोनों युवक शादी समारोह के लिए जनरेटर में डीजल लेने जा रहे थे, तभी यह भीषण हादसा हो गया।

    जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के प्रकाश बम्हौरी गांव निवासी संतोष प्रजापति की बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं। हमीरपुर के देव गांव से बारात आनी थी और घर में रस्में पूरी हो रही थीं। इसी दौरान दुल्हन का भाई रामनरेश (22) और उसका ममेरा भाई नवाब (19) बाइक से डीजल लेने महोबा जा रहे थे।

    पसवारा गांव के पास पहुंचते ही तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि रामनरेश दूर जा गिरा, जबकि नवाब ट्रक के पहियों में फंस गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चालक ने वाहन रोकने के बजाय रफ्तार और बढ़ा दी, जिससे नवाब सड़क पर घिसटता हुआ बुरी तरह कुचल गया।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार ने आरोपी चालक पर सख्त कार्रवाई और आर्थिक सहायता की मांग की है।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, ट्रक को कब्जे में लेकर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले की जांच जारी है।

  • यूपी को मिलेगा विकास का नया रफ्तार-पथ, 37 हजार करोड़ की गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना तैयार

    यूपी को मिलेगा विकास का नया रफ्तार-पथ, 37 हजार करोड़ की गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना तैयार


    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार को नई दिशा देने वाली गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना अब पूरी तरह तैयार हो चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरदोई में किया जाएगा। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे देश के सबसे बड़े सड़क मार्गों में से एक माना जा रहा है, जो राज्य की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।

    करीब 37 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना लंबे समय से निर्माणाधीन थी, जिसे तेजी से पूरा करने के लिए अलग-अलग हिस्सों में बांटकर काम कराया गया। पूरे एक्सप्रेस-वे को चार बड़े पैकेज में विभाजित किया गया, जिससे निर्माण कार्य समानांतर रूप से आगे बढ़ सका और समय पर पूरा किया जा सका।

    इस पूरी परियोजना में आधुनिक तकनीक और कड़े गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया है। निर्माण प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी गई, ताकि काम की गुणवत्ता और गति दोनों सुनिश्चित की जा सकें। चारों हिस्सों में अलग-अलग लंबाई और लागत के पैकेज शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक भाग अपने आप में एक बड़ा निर्माण कार्य रहा है।

    गंगा एक्सप्रेस-वे को केवल एक सड़क परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे एक बड़े आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है। इसके किनारे औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों की योजना बनाई गई है, जिससे रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

    यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा को आसान और तेज बनाएगा। इससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी, बल्कि माल ढुलाई की लागत भी घटेगी, जिससे व्यापार और उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।

    इस परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश को एक मजबूत औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में उभरने का अवसर मिलेगा। बेहतर सड़क नेटवर्क और तेज कनेक्टिविटी से राज्य में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी और यह परियोजना आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय विकास का एक बड़ा आधार साबित हो सकती है।

  • योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

    योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिससे प्रदेश आज कई स्वास्थ्य मानकों पर देश में अग्रणी बनकर उभरा है।

    सरकार ने इस दौरान केवल अस्पतालों के निर्माण तक ही ध्यान सीमित नहीं रखा, बल्कि डिजिटल हेल्थ, आपातकालीन सेवाएं, मातृ और शिशु देखभाल जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सुधार किए हैं। डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में प्रदेश ने 5.76 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल के जरिए रोगों की निगरानी और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाया गया है

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क अल्ट्रासाउंड ई-वाउचर की सुविधा दी गई है, जबकि जननी सुरक्षा योजना और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लाखों लोगों को लाभ मिला है। दस्तक अभियान के माध्यम से एईएस और जेई जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ भी सघन अभियान चलाया गया है

    प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हजारों की संख्या में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हो रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिला है और लाखों परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को बड़ी राहत मिली है

    स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में भी राज्य ने तेजी से प्रगति की है। जन औषधि केंद्रों की संख्या में वृद्धि के साथ सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वहीं, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन और अस्पतालों के नेटवर्क के मामले में भी प्रदेश देश में अग्रणी बना हुआ है

    आपातकालीन सेवाओं में सुधार करते हुए 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए करोड़ों लोगों को मदद पहुंचाई गई है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाई गई है और उनकी पहुंच को दोगुना किया गया है। इसके अलावा मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए दूरदराज के इलाकों में भी इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है

    योगी सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में निशुल्क डायलिसिस और सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं शुरू की हैं। टेलीमेडिसिन और टेली कंसल्टेशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुलभ हुई हैं

    दवाओं की गुणवत्ता और सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है। इसके साथ ही कई स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट भी प्राप्त हुआ है

    खाद्य सुरक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी राज्य ने कदम बढ़ाए हैं। मोबाइल लैब और माइक्रोबायोलॉजी लैब के जरिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। साथ ही फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नई संस्थाओं की स्थापना की गई है

     उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर एक समग्र और आधुनिक सिस्टम विकसित किया है, जो न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करता है बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार है

  • गाजियाबाद में नकली Liv-52 टैबलेट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, सरगना समेत 5 गिरफ्तार

    गाजियाबाद में नकली Liv-52 टैबलेट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, सरगना समेत 5 गिरफ्तार


    गाजियाबाद । मुरादनगर पुलिस ने एक बड़े पैमाने पर नकली दवा बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह ने नामी कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर Liv-52 टैबलेट नकली बनाकर बेचने का काम किया। पुलिस ने गिरोह के सरगना मयंक अग्रवाल सहित कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से लगभग 50,000 टैबलेट, डेढ़ हजार खाली डिब्बियां और रैपर बरामद किए गए हैं।

    पकड़े गए आरोपी और उनकी पहचान

    डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों में शामिल हैं:
    मयंक अग्रवाल (मोदीनगर, तिबड़ा रोड) – सरगना
    अनूप गर्ग (दिल्ली, उत्तम नगर)
    तुषार ठाकुर (नंदग्राम, सुभाषनगर)
    आकाश ठाकुर (नंदग्राम, हिंडन विहार)
    नितिन त्यागी (निवाड़ी)

    पुलिस अब अन्य छह साथियों की तलाश कर रही है। गिरफ्तार करने वाली टीम को 20,000 रुपये का इनाम भी मिला।

    गिरोह का काम करने का तरीका

    जांच में पता चला कि गिरोह ने लगभग चार महीने पहले ही यह नेटवर्क तैयार किया। आरोपियों ने सफेद डिब्बी और ढक्कन मेरठ के एक प्लास्टिक उद्योग से बनवाए, रैपर की प्रिंटिंग प्रेस खैरनगर चौपला में करवाई। टैबलेट सोनीपत की सुबको लेबोरेट्रीज़ से बनवाई जाती थी। सभी सामग्री इकट्ठा कर मुरादनगर निवासी जोनी और फरमान के साथ मिलकर पैक की जाती थी। फर्म में मुकेश कुमार को मालिक बनाया गया था और फरमान जीएसटी की फर्जी बिलिंग तैयार करता था।

    जिम्मेदारी बांटी गई थी
    मयंक – सोनीपत की लेबोरेट्री से दवा बनवाता
    तुषार – मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के साथ दवा की सप्लाई और कुरियरिंग
    नितिन – नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष, प्रशासनिक मदद

    50,000 से अधिक गोलियां सप्लाई
    जांच में पता चला कि गिरोह ने पिछले चार महीनों में अलीगढ़, मथुरा, बिजनौर, आगरा, मेरठ, शामली और अन्य जिलों में 50,000 से अधिक नकली टैबलेट सप्लाई की। दवा को बाजार भाव से 20% कम पर मेडिकल स्टोर संचालकों को दिया गया। डीसीपी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया, “पुलिस ने नामी कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर Liv-52 बनाने वाले गिरोह के पांच आरोपी गिरफ्तार किए। दवाइयों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।”

  • अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात

    अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं के घोषणाएं और वादे चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये देने का वादा किया है। उन्होंने इसे बीजेपी के बिहार चुनाव में दिए गए 10,000 रुपये के वादे का जवाब बताया। इस घोषणा पर अयोध्या की महिलाओं की क्या राय है, यह जानने के लिए यूपी Tak की टीम ने गांव में जाकर उनकी प्रतिक्रिया ली।

    महिलाओं ने की उम्मीदें जाहिर

    अयोध्या के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने इस योजना पर अपनी राय दी और अपनी उम्मीदों का इज़हार किया। एक स्थानीय महिला सुंदर कली ने कहा, अखिलेश यादव का यह प्रस्ताव अच्छा है, हम लोग मजदूरी करते हैं, इससे अच्छा होगा कि हमें पैसा मिले। अभी सरकार की तरफ से हमें कुछ नहीं मिलता, केवल मजदूरी करते हैं। अगर अखिलेश यादव देंगे तो ठीक है, नहीं तो हम अपना काम करते रहेंगे।

    विकास की उम्मीदें भी बनीं मुद्दा

    वहीं कश्मीरा देवी ने कहा, हम लोग मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं। अगर सरकार कुछ मदद करेगी तो अच्छा रहेगा, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। सरकार बढ़िया नहीं काम कर रही है, जो विकास करेगा हम उसके साथ रहेंगे। विमला देवी ने भी कहा, समाजवादी सरकार के समय पेंशन मिलती थी और सड़कें बनती थीं। अब कुछ नहीं मिल रहा है। हमें विकास और रोजगार दोनों चाहिए।

    महिलाओं की मांग-पैसा नहीं, विकास और रोजगार भी चाहिए

    ममता नाम की महिला ने कहा, यह अच्छा है कि पैसा मिलेगा, इससे हमारी रोज़ी-रोटी में मदद होगी। गरीब बच्चों को भी फायदा होगा, लेकिन सिर्फ पैसा नहीं, हमें काम भी चाहिए। अगर पैसा मिलेगा तो वोट देंगे, नहीं मिला तो कोई बात नहीं। वहीं अन्य महिलाओं ने भी इस योजना का स्वागत किया, लेकिन साफ किया कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो वे वोट नहीं देंगी।

    योगी सरकार से तुलना

    महिलाओं ने योगी सरकार की योजनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें विधवा पेंशन के रूप में 2,000 रुपये मिलते हैं, लेकिन इसके बावजूद गांव में विकास की कमी महसूस हो रही है। रोज़मर्रा की सुविधाओं और रोजगार के मामले में उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    समाजवादी पार्टी और बीजेपी का मुकाबला

    अखिलेश यादव का यह वादा महिलाओं के बीच उम्मीद और नाखुशी का मिश्रित असर छोड़ रहा है। हालांकि, उनका कहना है कि वे सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि स्थिरता, रोजगार और विकास के लिए भी वोट देंगे। यह साफ है कि महिलाएं अपनी जिंदगी में सुधार और अपने गांव के विकास को भी उतना ही महत्व देती हैं जितना कि चुनावी वादों को।