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  • उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत

    उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले दस दिनों से जारी बारिश के कारण प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटीय गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। खेत, सड़कें और निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। कई स्थानों पर मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते दिखाई दिए, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।

    सोनभद्र जिले में घाघरा नदी के तेज बहाव ने जिला जेल को जोड़ने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा बहा दिया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। वहीं गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और चेतावनी स्तर के पार पहुंचने के बाद प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। जिले की सभी बाढ़ चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। पिछले एक सप्ताह में नदी करीब 10 फीट ऊपर आ चुकी है। अस्सी घाट से नमो घाट तक करीब 50 छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

    मौसम का असर राजधानी लखनऊ, नोएडा, कानपुर, आगरा और अन्य शहरों में भी देखने को मिल रहा है। बुधवार सुबह से कई स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 10 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।

    बारिश के बीच हादसों का सिलसिला भी जारी है। उन्नाव में तेज हवा के दौरान चलती बाइक पर अचानक पेड़ गिर गया, जिससे युवक की गर्दन टूट गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना लगातार खराब मौसम के बीच सावधानी बरतने की जरूरत को भी रेखांकित करती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में व्यापक बारिश हुई। अब मानसूनी ट्रफ दक्षिण की ओर खिसक रही है, जिससे अगले एक-दो दिनों में कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद बारिश में कुछ कमी आने की संभावना है, लेकिन 26 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होकर प्रदेश में तेज बारिश का नया दौर शुरू कर सकता है।

  • ओपी राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप, दलितों के उत्पीड़न और आपराधिक मामलों को लेकर अखिलेश यादव को दी नसीहत

    ओपी राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप, दलितों के उत्पीड़न और आपराधिक मामलों को लेकर अखिलेश यादव को दी नसीहत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और गरीबों के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर समाजवादी पार्टी को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।

    ओपी राजभर ने सार्वजनिक रूप से अखिलेश यादव से सवाल करते हुए कहा कि क्या उनकी पार्टी के लोगों को गरीबों, पिछड़ों और दलितों को परेशान करने में आनंद आता है। उनका दावा था कि प्रदेश में जब भी हत्या, मारपीट, जमीन विवाद, चोरी या अन्य आपराधिक घटनाओं की जांच होती है तो कई मामलों में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों के नाम सामने आने की बात कही जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों के खिलाफ पार्टी स्तर पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे गलत संदेश जाता है।

    राजभर ने आजमगढ़ जिले का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी के एक सांसद पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित सांसद और उनके परिजनों पर जमीन कब्जाने तथा स्थानीय लोगों को धमकाने जैसे आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो पार्टी नेतृत्व को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर गरीब और दलित परिवारों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई है।

    अपने बयान में राजभर ने एक दलित महिला की जमीन से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला की भूमि पर कब्जा करने के लिए दबाव बनाया गया और कथित रूप से धमकी तथा दुर्व्यवहार की घटनाएं हुईं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि विवादित जमीन के चारों ओर बिजली का करंट प्रवाहित करने वाले तार लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से भी इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    राजभर ने समाजवादी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विपक्ष को भविष्य में प्रभावी भूमिका निभानी है तो उसे अपने संगठन के भीतर अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि यदि पार्टी ऐसे विवादों पर समय रहते नियंत्रण नहीं करती है तो उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में एक मजबूत और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

    उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल को और गर्माने वाले माने जा रहे हैं। एक ओर सत्ता पक्ष विपक्ष पर कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं विपक्ष भी सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर लगातार हमलावर है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन आरोपों और उनके जवाब को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना बनी हुई है। फिलहाल ओपी राजभर के बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जबकि आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • सपा के प्रदर्शन पर सियासी संग्राम डिंपल यादव समेत कई सांसदों को पुलिस ने रोका यूपी से दिल्ली तक हंगामा

    सपा के प्रदर्शन पर सियासी संग्राम डिंपल यादव समेत कई सांसदों को पुलिस ने रोका यूपी से दिल्ली तक हंगामा


    उत्तर प्रदेश । दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सोमवार को समाजवादी पार्टी के विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया। पार्टी ने दावा किया कि सांसद डिंपल यादव इकरा हसन प्रिया सरोज और रुचि वीरा समेत कई सांसदों को संसद से जंतर मंतर तक निकाले जा रहे पैदल मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने रोककर कुछ समय के लिए हिरासत में रखा। बाद में सभी सांसदों को छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद सपा ने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया।

    समाजवादी पार्टी के अनुसार सांसद छात्रों से जुड़े मुद्दों और विरोध प्रदर्शन के समर्थन में संसद से जंतर मंतर तक मार्च निकाल रहे थे। पार्टी का कहना है कि पुलिस ने बीच रास्ते में सभी को रोक लिया और करीब दो घंटे तक पार्लियामेंट थाना परिसर में बैठाए रखा। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने दावा किया कि सभी सांसदों को बाद में बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच के माध्यम से कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधियों को रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और छात्रों की आवाज दबाना उचित नहीं है।

    उधर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। राजधानी लखनऊ में विधानसभा की ओर बढ़ रहे सपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। विरोध स्वरूप कई कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाकर वाहनों के माध्यम से निर्धारित स्थान पर पहुंचाया। वाराणसी में भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच धक्का मुक्की और तीखी बहस देखने को मिली।

    बीएचयू और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में भी कुछ छात्र समूहों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारे लगाए और अपनी मांगों के समर्थन में पोस्टर लेकर मार्च निकाला। कुछ विदेशी छात्र भी प्रदर्शन में शामिल दिखाई दिए।

    इस बीच डिंपल यादव ने मीडिया से बातचीत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत आवश्यक कदम उठाए गए।

    फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बता रहा है वहीं प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

  • यूपी में मानसून का कहर सड़कों से लेकर मंदिरों तक पानी ही पानी सात की मौत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात

    यूपी में मानसून का कहर सड़कों से लेकर मंदिरों तक पानी ही पानी सात की मौत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में हालात बिगाड़ दिए हैं। राजधानी लखनऊ समेत कानपुर वाराणसी प्रयागराज अयोध्या गोरखपुर बरेली और प्रदेश के करीब 20 शहरों में सोमवार को दिनभर बारिश का दौर जारी रहा। लगातार बरसात के कारण कई स्थानों पर सड़कें धंस गईं अस्पतालों में पानी भर गया और धार्मिक स्थलों तक में जलभराव की स्थिति बन गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 69 शहरों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बारिश का सबसे अधिक असर फिरोजाबाद में देखने को मिला जहां सरकारी अस्पताल परिसर में पानी भर जाने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पुलिसकर्मी घुटनों तक भरे पानी में जूते हाथ में लेकर ड्यूटी करते दिखाई दिए। शामली जिले में नहर टूटने से आसपास की सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया और नहर का पानी गांवों तथा खेतों में फैल गया जिससे किसानों की फसलें प्रभावित होने लगी हैं।

    लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण प्रदेश की प्रमुख नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। वाराणसी और प्रयागराज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। काशी में प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर सहित अनेक छोटे मंदिरों में भी पानी भर गया है। वहीं अयोध्या में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे नदी किनारे के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

    बलिया में सरयू नदी और लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के किनारे कटान शुरू हो गया है। प्रशासन को आशंका है कि यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो बड़ी संख्या में गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। संतकबीरनगर में लगातार बारिश के कारण करीब तीन सौ वर्ष पुराना बाबा बैजूनाथ मंदिर भी ढह गया जिससे क्षेत्र में धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों में चिंता का माहौल है।

    पिछले चौबीस घंटों के दौरान बारिश और आकाशीय बिजली से जुड़े हादसों में सात लोगों की जान चली गई। मुजफ्फरनगर में कच्चा मकान गिरने से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई जबकि बलिया और चंदौली में खेतों में काम कर रहे दो किसानों की बिजली गिरने से मृत्यु हो गई। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और खेतों में जाने से बचने की अपील की है।

    मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने मौसमीय तंत्र और सक्रिय मानसूनी रेखा के कारण प्रदेश में अगले पांच से छह दिनों तक भारी वर्षा का सिलसिला जारी रह सकता है। 22 जुलाई तक कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जबकि उसके बाद भी कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।

    लगातार हो रही बारिश ने जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत दी है वहीं दूसरी ओर जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। अब सभी की नजर मौसम के अगले दौर पर है क्योंकि आने वाले कुछ दिन उत्तर प्रदेश के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त नई SIT बनाने के निर्देश राजनीति से दूर रहकर निष्पक्ष जांच पर जोर

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त नई SIT बनाने के निर्देश राजनीति से दूर रहकर निष्पक्ष जांच पर जोर


    उत्तर प्रदेश अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के चर्चित मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नई विशेष जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष पारदर्शी और बिना किसी राजनीतिक प्रभाव के होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और जांच ऐसे स्तर पर पहुंचे जिससे पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि नई एसआईटी का नेतृत्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करें ताकि जांच पेशेवर तरीके से आगे बढ़ सके। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार वरिष्ठ अधिकारियों के नाम के साथ नई टीम का प्रस्ताव पेश करे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी जहां सरकार नई जांच टीम की जानकारी अदालत के समक्ष रखेगी।

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच जारी है। उन्होंने कहा कि पहले गठित एसआईटी ने प्रारंभिक जांच में इसे संज्ञेय अपराध माना था जिसके बाद नियमित पुलिस जांच शुरू हुई। इस पर अदालत ने कहा कि अब जांच को और अधिक प्रभावी तथा भरोसेमंद बनाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी आवश्यक है।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह भी मांग उठाई गई कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जहां भी विधिवत रसीद जारी की गई है वहां उसका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहना चाहिए। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि केवल दावों के आधार पर किसी वस्तु को दान मान लेना व्यावहारिक नहीं होगा और प्रत्येक दान का प्रमाण होना आवश्यक है।

    गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट की ओर से चढ़ावे की गिनती के दौरान अनियमितताओं की शिकायत की गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जून में विशेष जांच टीम गठित की थी जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। बाद में इस मामले में कई कर्मचारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन पर चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी और आभूषणों में कथित गड़बड़ी करने का आरोप है।

    जांच के दौरान ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी पर भी प्रक्रिया संबंधी लापरवाही के आरोप सामने आए। आरोप है कि चढ़ावा प्रबंधन के लिए निर्धारित दिशा निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया जिससे अनियमितताओं की आशंका बनी। इसी बीच ट्रस्ट के दो प्रमुख पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद अब पूरे मामले की जांच नए सिरे से वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में आगे बढ़ेगी। अदालत ने साफ कर दिया है कि धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अब सभी की नजर 27 जुलाई की अगली सुनवाई पर रहेगी जहां नई एसआईटी के गठन और जांच की प्रगति पर अदालत विस्तृत समीक्षा करेगी।

  • यूपी आईटीआई में बिना परीक्षा मिलेगा दाखिला, 8वीं, 10वीं और 12वीं पास युवाओं के लिए शुरू हुई ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया

    यूपी आईटीआई में बिना परीक्षा मिलेगा दाखिला, 8वीं, 10वीं और 12वीं पास युवाओं के लिए शुरू हुई ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसर तलाश रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान यानी आईटीआई में वर्ष 2026-27 सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इस बार भी उम्मीदवारों को किसी लिखित प्रवेश परीक्षा से नहीं गुजरना होगा। छात्रों का चयन उनकी पिछली कक्षा के अंकों के आधार पर तैयार की जाने वाली मेरिट सूची के माध्यम से किया जाएगा।

    उत्तर प्रदेश के आईटीआई संस्थानों में 8वीं, 10वीं और 12वीं पास छात्र अपनी योग्यता के अनुसार विभिन्न तकनीकी ट्रेड में प्रवेश ले सकते हैं। इन संस्थानों में युवाओं को रोजगार से जुड़े व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिससे वे कम समय में तकनीकी कौशल हासिल कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वेल्डर, मैकेनिक, प्लंबर, वायरमैन, टर्नर, ड्राफ्ट्समैन और कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट जैसे कई ट्रेड उपलब्ध हैं।

    उत्तर प्रदेश में आईटीआई प्रवेश और प्रशिक्षण व्यवस्था का संचालन राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी), लखनऊ द्वारा किया जाता है। यह संस्था सरकारी और निजी दोनों तरह के आईटीआई संस्थानों की निगरानी करती है। इसके अलावा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत संचालित संस्थान भी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होते हैं।

    वर्ष 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 11 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 4 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है और इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से ही अपना पंजीकरण कराना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    आईटीआई प्रवेश के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट आधारित होगी। उम्मीदवारों का चयन संबंधित ट्रेड और पाठ्यक्रम की योग्यता के अनुसार 8वीं, 10वीं या 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लिखित प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। मेरिट सूची जारी होने के बाद उपलब्ध सीटों के आधार पर काउंसलिंग और सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    आवेदक सरकारी आईटीआई, निजी आईटीआई या दोनों विकल्पों के लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 14 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि अधिकतम आयु सीमा तय नहीं की गई है। अधिकांश तकनीकी ट्रेड के लिए 10वीं पास होना आवश्यक है, जबकि कुछ शुरुआती स्तर के ट्रेड में 8वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

    प्रवेश के लिए उम्मीदवार का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना जरूरी है। दस्तावेज सत्यापन के समय वैध निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक विवरण, श्रेणी संबंधी जानकारी, फोटो, हस्ताक्षर और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे।

    आवेदन शुल्क के रूप में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 250 रुपये का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। भुगतान नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई माध्यम से किया जा सकता है। आवेदन जमा करने और शुल्क भुगतान के बाद उम्मीदवारों को फॉर्म में सुधार के लिए 48 घंटे की अवधि भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    प्रवेश प्रक्रिया में पहले ऑनलाइन पंजीकरण, मोबाइल सत्यापन, आवेदन फॉर्म भरना, दस्तावेज अपलोड करना और शुल्क भुगतान जैसे चरण पूरे किए जाएंगे। इसके बाद योग्यता परीक्षा के अंकों के आधार पर मेरिट सूची जारी होगी। सीट उपलब्धता के अनुसार कई चरणों में काउंसलिंग आयोजित की जाएगी, जिससे पहले चरण में सीट नहीं पाने वाले उम्मीदवारों को आगे के अवसर मिल सकें।

    आईटीआई प्रवेश प्रक्रिया में राज्य सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षण व्यवस्था भी लागू होगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को निर्धारित नियमों के तहत लाभ मिलेगा। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले पात्रता, शुल्क और अन्य जरूरी जानकारियों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार जरूर कर लें, क्योंकि नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव हैं।

  • मथुरा में स्कूल बस से उतरते समय दर्दनाक हादसा, सात साल के छात्र की पहिए के नीचे आने से मौत

    मथुरा में स्कूल बस से उतरते समय दर्दनाक हादसा, सात साल के छात्र की पहिए के नीचे आने से मौत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में सात वर्षीय छात्र की मौत हो गई। घटना उस समय हुई जब छात्र स्कूल बस से उतर रहा था। आरोप है कि बस चालक ने लापरवाही बरतते हुए उसी समय वाहन आगे बढ़ा दिया, जिससे बच्चा असंतुलित होकर सड़क पर गिर गया और बस के पहिए की चपेट में आ गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।

    मृतक छात्र की पहचान नितिन के रूप में हुई है। वह मथुरा जिले के राल क्षेत्र स्थित तिलक सिंह इंटर कॉलेज में दूसरी कक्षा का छात्र था। बताया जा रहा है कि वह रोज की तरह गुरुवार सुबह स्कूल बस से विद्यालय पहुंचा था। बस से उतरते समय अचानक वाहन आगे बढ़ने से वह नीचे गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा इतना भयावह था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत घटना की जानकारी पुलिस और स्कूल प्रबंधन को दी। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और मासूम की मौत को लेकर उनका गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन किया और लापरवाही का आरोप लगाया।

    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। आक्रोशित लोगों को समझाकर शांत कराया गया। पुलिस ने बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में बस चालक की लापरवाही की बात सामने आई है, हालांकि पूरी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस फरार चालक की तलाश कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल ले जाने और वापस छोड़ने वाली बसों में चालकों की सतर्कता और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

    मासूम छात्र की मौत के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी तय की जाए। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।

  • मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोका, पार्टी ने पुलिस पर लगाए आरोप

    मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोका, पार्टी ने पुलिस पर लगाए आरोप

    मेरठ। मेरठ छात्रा हत्याकांड को लेकर पीड़ित परिवार की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) तक पहुंचाने जा रहे कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को सोमवार को मेरठ-दिल्ली हाईवे स्थित काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मौके पर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

    काशी टोल प्लाजा पर रोका गया काफिला
    कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल एसएसपी कार्यालय जाने के लिए मेरठ पहुंच रहा था। इसी दौरान पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर उनके काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    कांग्रेस ने पुलिस पर लगाए आरोप
    कांग्रेस नेताओं का कहना था कि वे केवल पीड़ित परिवार की शिकायत लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिलने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन रोक दिया। उनका आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है और इससे प्रदेश का माहौल प्रभावित होता है।

    प्रदेश सरकार पर भी साधा निशाना
    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार की भी आलोचना की। उनका आरोप था कि पुलिस को सरकार का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण आम लोगों के साथ मनमानी की जा रही है। नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इस पर नाराजगी जताई।

    प्रतिनिधिमंडल में ये नेता रहे शामिल
    कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा, उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र गौतम, सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और बाराबंकी से सांसद तनुज पूनिया सहित अन्य नेता शामिल थे।

  • राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन

    राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन


    अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है। ट्रस्ट की ओर से चयनित सीईओ को वेतन और आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पद पूरी तरह ट्रस्ट के अधीन होगा और नियुक्त अधिकारी वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में मंदिर के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    18 जुलाई तक किए जा सकेंगे आवेदन
    सीईओ चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने पात्रता के मानक तय कर दिए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 18 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। इस पद के लिए उम्मीदवार का स्नातक (Graduation) होना अनिवार्य है। साथ ही प्रशासन या वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। आवेदन करने वाले व्यक्ति का हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी आवश्यक शर्त रखी गई है। चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति तीन वर्ष के लिए की जाएगी।

    22 जुलाई की बैठक से पहले हो सकता है चयन
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक से पहले ही नए सीईओ के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। नई दिल्ली में आयोजित चयन समिति की बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावरे शामिल हैं।

    चढ़ावा चोरी मामले के बाद तेज हुई प्रक्रिया
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।

    जांच में सामने आए नए खुलासे
    एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान कथित तौर पर करीब 20 लाख रुपये खर्च कर मकान बनवाया। इसके अलावा उसने अपने भाई के नाम पर एक ब्रेज़ा कार खरीदी और अपनी गर्लफ्रेंड को एक आईफोन तथा दो लाख रुपये भी दिए। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतापगढ़ निवासी अविनाश शुक्ला राम मंदिर में नौकरी मिलने से पहले पीने का पानी बेचने का काम करता था। मामले की जांच अभी जारी है।

  • योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले से यूपी की नौकरशाही में मचा हलचल

    योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले से यूपी की नौकरशाही में मचा हलचल


    उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एक साथ 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। देर रात जारी तबादला सूची के साथ ही प्रदेश की नौकरशाही में व्यापक फेरबदल देखने को मिला। इस निर्णय के तहत कई जिलों में उप जिलाधिकारी बदले गए हैं जबकि विकास प्राधिकरणों नगर निगमों आवास एवं विकास परिषद और राजस्व परिषद सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में भी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक गतिशील बनाना और जिलों में बेहतर प्रशासनिक समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है। व्यापक तबादला सूची में बड़ी संख्या में एसडीएम स्तर के अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है जिससे कई जिलों में प्रशासनिक नेतृत्व पूरी तरह बदल गया है।

    जारी आदेश के अनुसार प्रशांत कुमार को उन्नाव से बहराइच भेजा गया है जबकि ध्रुव शुक्ला को गाजीपुर का नया एसडीएम बनाया गया है। कुमार संजय को जालौन अभय कुमार सिंह को राजस्व परिषद में विशेष कार्याधिकारी मनोज प्रकाश को जालौन अरविंद कुमार सिंह को मैनपुरी और पुष्पेंद्र पटेल को अंबेडकरनगर में नई जिम्मेदारी दी गई है। योगेश कुमार गौड़ को सहारनपुर तथा ज्योति शर्मा को कानपुर नगर में एसडीएम बनाया गया है।

    इसके अलावा कई महिला अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। दीपिका मेहर को शामली सुरभि शर्मा को बागपत प्रतिभा मिश्रा को कानपुर देहात प्रीति तिवारी को बांदा आकांक्षा सिंह को चंदौली मधुमिता सिंह को अंबेडकरनगर रत्निका श्रीवास्तव को रामपुर और वंदना पांडेय को अयोध्या में एसडीएम के रूप में तैनाती मिली है। वहीं कई अधिकारियों को नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में विशेष कार्याधिकारी तथा सहायक नगर आयुक्त के पदों पर नियुक्त किया गया है।

    सरकार ने प्रयागराज कानपुर नगर लखनऊ नोएडा ग्रेटर नोएडा अलीगढ़ और अन्य विकास प्राधिकरणों में भी प्रशासनिक बदलाव किए हैं। कई अधिकारियों को औद्योगिक विकास प्राधिकरणों नगर निगमों और स्थानीय निकाय निदेशालय में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं जिससे शहरी प्रशासन को और मजबूत बनाने की तैयारी दिखाई दे रही है।

    तबादला सूची में बहराइच मैनपुरी गाजीपुर बाराबंकी उन्नाव जौनपुर मथुरा प्रयागराज बांदा बागपत लखीमपुर खीरी रायबरेली गोरखपुर अयोध्या देवरिया बिजनौर हरदोई बुलंदशहर गोंडा झांसी वाराणसी कुशीनगर सोनभद्र चित्रकूट और फर्रुखाबाद सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों को शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने सीमित फेरबदल के बजाय व्यापक प्रशासनिक पुनर्संरचना का फैसला किया है।

    प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर किए गए तबादलों का उद्देश्य शासन की योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारना और कानून व्यवस्था के साथ विकास कार्यों में नई गति लाना है। नए अधिकारियों के कार्यभार संभालने के बाद जिलों में प्रशासनिक कार्यशैली और योजनाओं के क्रियान्वयन में बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में सभी अधिकारी अपनी नई तैनाती वाले जिलों और विभागों में कार्यभार ग्रहण करेंगे जिसके बाद प्रशासनिक गतिविधियां नए सिरे से गति पकड़ेंगी।