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  • चित्रकूट में NEET छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, तीन युवकों पर केस दर्ज, CCTV के आधार पर जांच तेज

    चित्रकूट में NEET छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, तीन युवकों पर केस दर्ज, CCTV के आधार पर जांच तेज


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में एक छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। घटना देवांगना घाटी क्षेत्र में हुई, जहां पीड़िता अपने परिचित के साथ गई थी। पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद तत्काल प्राथमिकी दर्ज की गई और आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चला रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 20 वर्षीय छात्रा राजस्थान के कोटा में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही है और मध्य प्रदेश के सतना जिले की निवासी है। वह घूमने के उद्देश्य से चित्रकूट आई थी। उसके साथ मौजूद किशोर ने पुलिस को बताया कि घटना के दौरान तीन युवकों ने उन्हें रोका और खुद को वन विभाग का कर्मचारी बताते हुए धमकाया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद किशोर को बांध दिया गया और छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

    पुलिस का कहना है कि घटना की सूचना मिलने के बाद मौके का निरीक्षण किया गया और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जांच के दौरान कुछ फुटेज में संदिग्ध व्यक्तियों के बाइक से गुजरने की जानकारी मिली है, जिसके आधार पर उनकी पहचान का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

    जांच अधिकारियों के अनुसार, पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया जा रहा है और उसके बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घटना के समय उसके साथ मौजूद किशोर से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

    जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमों को सक्रिय किया गया है। आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच के साथ स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित सुरागों पर काम किया जा रहा है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास जारी है।

    इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। समाजवादी पार्टी के विधायक अनिल प्रधान ने कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस स्थान पर यह घटना हुई, वह प्रशासनिक और महत्वपूर्ण संस्थानों से अधिक दूर नहीं है। उन्होंने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच की जाएगी तथा उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस ने लोगों से अफवाहों से बचते हुए केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

  • राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा दावा, विश्वविद्यालय हॉस्टलों में हो रही ड्रग्स की सप्लाई

    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा दावा, विश्वविद्यालय हॉस्टलों में हो रही ड्रग्स की सप्लाई


    उत्तर प्रदेश । मेरठ स्थित Chaudhary Charan Singh University के 38वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल Anandiben Patel ने विश्वविद्यालयों में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि कई विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में बाहर से आने वाले खाने के जरिए ड्रग्स की सप्लाई हो रही है और परिसर के बाहर शराब की बोतलें भी मिली हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह कई कुलपतियों और हॉस्टल प्रबंधन को तस्वीरें भी दिखा चुकी हैं।

    समारोह में राज्यपाल ने 199 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, प्रतिभा, स्वास्थ्य और परिवार की उम्मीदों को खत्म कर देता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर शिक्षा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

    राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने लगभग 15 विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों का निरीक्षण किया है, जहां कई चिंताजनक स्थितियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि चार पीढ़ियों से उनके परिवार में चाय तक नहीं पी जाती, जबकि आज के कई युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की अपील की।

    अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिना किसी विषय की पूरी जानकारी के केवल भीड़ का हिस्सा बन जाना उचित नहीं है। विद्यार्थियों को देशहित, संविधान और महापुरुषों के विचारों को समझकर आगे बढ़ना चाहिए।

    राज्यपाल ने बेटियों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस दीक्षांत समारोह में लगभग 75 प्रतिशत स्वर्ण पदक छात्राओं ने हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और समाज को उनके प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए।

    उन्होंने शिक्षकों से भी शोध और लेखन पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया। उनका कहना था कि लंबे समय तक अध्यापन करने वाले शिक्षकों को अधिक पुस्तकें और शोध कार्य प्रकाशित करने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को बेहतर शैक्षणिक सामग्री मिल सके।

    राज्यपाल ने अपने हालिया रेल सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रेलवे ट्रैक के आसपास गंदगी और जलभराव की तस्वीरें संबंधित अधिकारियों को भेजने के बाद सफाई कराई गई। साथ ही उन्होंने युवाओं से अंतरिक्ष विज्ञान, नई तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि देश के वैज्ञानिक और इंजीनियर वैश्विक स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।

  • बागपत में नम आंखों से अंतिम विदाई, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ अनुराग धनखड़ का अंतिम संस्कार

    बागपत में नम आंखों से अंतिम विदाई, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ अनुराग धनखड़ का अंतिम संस्कार


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में बुधवार को त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सुबह उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। श्मशान घाट पर पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और इसके बाद उनके बेटे अभिषेक ने मुखाग्नि देकर पिता को अंतिम विदाई दी।

    मंगलवार देर रात जब अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर उनके पैतृक निवास बड़ौत पहुंचा, तो वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। उनकी मां बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर बिलख पड़ीं। उन्होंने गाल सहलाकर आखिरी बार बेटे को दुलार किया और बार-बार “मेरे बच्चे” कहकर रोती रहीं। पत्नी कल्पना भी पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। बेटे अभिषेक ने मां को संभालने की कोशिश की, लेकिन खुद भी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और पिता के शव से लिपटकर रो पड़े।

    अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर त्रिपुरा से एयर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली लाया गया था। वहां से सड़क मार्ग से बागपत के बड़ौत स्थित उनके घर पहुंचाया गया। अंतिम यात्रा में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग शामिल हुए।

    इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री असीम अरुण ने भी परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अनुराग धनखड़ एक समर्पित और कुशल पुलिस अधिकारी थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मृत्यु के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

    पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष वेदपाल सहित कई स्थानीय लोगों ने भी इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उनका कहना है कि इतने वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, इसका निष्पक्ष और विस्तृत खुलासा होना चाहिए।

    गौरतलब है कि अनुराग धनखड़ का शव 20 जुलाई को त्रिपुरा पुलिस मुख्यालय में मिला था। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया है, हालांकि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही उनकी मौत के कारणों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

  • उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत

    उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले दस दिनों से जारी बारिश के कारण प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटीय गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। खेत, सड़कें और निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। कई स्थानों पर मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते दिखाई दिए, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।

    सोनभद्र जिले में घाघरा नदी के तेज बहाव ने जिला जेल को जोड़ने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा बहा दिया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। वहीं गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और चेतावनी स्तर के पार पहुंचने के बाद प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। जिले की सभी बाढ़ चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। पिछले एक सप्ताह में नदी करीब 10 फीट ऊपर आ चुकी है। अस्सी घाट से नमो घाट तक करीब 50 छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

    मौसम का असर राजधानी लखनऊ, नोएडा, कानपुर, आगरा और अन्य शहरों में भी देखने को मिल रहा है। बुधवार सुबह से कई स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 10 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।

    बारिश के बीच हादसों का सिलसिला भी जारी है। उन्नाव में तेज हवा के दौरान चलती बाइक पर अचानक पेड़ गिर गया, जिससे युवक की गर्दन टूट गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना लगातार खराब मौसम के बीच सावधानी बरतने की जरूरत को भी रेखांकित करती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में व्यापक बारिश हुई। अब मानसूनी ट्रफ दक्षिण की ओर खिसक रही है, जिससे अगले एक-दो दिनों में कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद बारिश में कुछ कमी आने की संभावना है, लेकिन 26 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होकर प्रदेश में तेज बारिश का नया दौर शुरू कर सकता है।

  • ओपी राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप, दलितों के उत्पीड़न और आपराधिक मामलों को लेकर अखिलेश यादव को दी नसीहत

    ओपी राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप, दलितों के उत्पीड़न और आपराधिक मामलों को लेकर अखिलेश यादव को दी नसीहत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और गरीबों के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर समाजवादी पार्टी को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।

    ओपी राजभर ने सार्वजनिक रूप से अखिलेश यादव से सवाल करते हुए कहा कि क्या उनकी पार्टी के लोगों को गरीबों, पिछड़ों और दलितों को परेशान करने में आनंद आता है। उनका दावा था कि प्रदेश में जब भी हत्या, मारपीट, जमीन विवाद, चोरी या अन्य आपराधिक घटनाओं की जांच होती है तो कई मामलों में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों के नाम सामने आने की बात कही जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों के खिलाफ पार्टी स्तर पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे गलत संदेश जाता है।

    राजभर ने आजमगढ़ जिले का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी के एक सांसद पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित सांसद और उनके परिजनों पर जमीन कब्जाने तथा स्थानीय लोगों को धमकाने जैसे आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो पार्टी नेतृत्व को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर गरीब और दलित परिवारों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई है।

    अपने बयान में राजभर ने एक दलित महिला की जमीन से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला की भूमि पर कब्जा करने के लिए दबाव बनाया गया और कथित रूप से धमकी तथा दुर्व्यवहार की घटनाएं हुईं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि विवादित जमीन के चारों ओर बिजली का करंट प्रवाहित करने वाले तार लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से भी इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    राजभर ने समाजवादी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विपक्ष को भविष्य में प्रभावी भूमिका निभानी है तो उसे अपने संगठन के भीतर अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि यदि पार्टी ऐसे विवादों पर समय रहते नियंत्रण नहीं करती है तो उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में एक मजबूत और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

    उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल को और गर्माने वाले माने जा रहे हैं। एक ओर सत्ता पक्ष विपक्ष पर कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं विपक्ष भी सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर लगातार हमलावर है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन आरोपों और उनके जवाब को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना बनी हुई है। फिलहाल ओपी राजभर के बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जबकि आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • सपा के प्रदर्शन पर सियासी संग्राम डिंपल यादव समेत कई सांसदों को पुलिस ने रोका यूपी से दिल्ली तक हंगामा

    सपा के प्रदर्शन पर सियासी संग्राम डिंपल यादव समेत कई सांसदों को पुलिस ने रोका यूपी से दिल्ली तक हंगामा


    उत्तर प्रदेश । दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सोमवार को समाजवादी पार्टी के विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया। पार्टी ने दावा किया कि सांसद डिंपल यादव इकरा हसन प्रिया सरोज और रुचि वीरा समेत कई सांसदों को संसद से जंतर मंतर तक निकाले जा रहे पैदल मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने रोककर कुछ समय के लिए हिरासत में रखा। बाद में सभी सांसदों को छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद सपा ने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया।

    समाजवादी पार्टी के अनुसार सांसद छात्रों से जुड़े मुद्दों और विरोध प्रदर्शन के समर्थन में संसद से जंतर मंतर तक मार्च निकाल रहे थे। पार्टी का कहना है कि पुलिस ने बीच रास्ते में सभी को रोक लिया और करीब दो घंटे तक पार्लियामेंट थाना परिसर में बैठाए रखा। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने दावा किया कि सभी सांसदों को बाद में बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच के माध्यम से कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधियों को रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और छात्रों की आवाज दबाना उचित नहीं है।

    उधर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। राजधानी लखनऊ में विधानसभा की ओर बढ़ रहे सपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। विरोध स्वरूप कई कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाकर वाहनों के माध्यम से निर्धारित स्थान पर पहुंचाया। वाराणसी में भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच धक्का मुक्की और तीखी बहस देखने को मिली।

    बीएचयू और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में भी कुछ छात्र समूहों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारे लगाए और अपनी मांगों के समर्थन में पोस्टर लेकर मार्च निकाला। कुछ विदेशी छात्र भी प्रदर्शन में शामिल दिखाई दिए।

    इस बीच डिंपल यादव ने मीडिया से बातचीत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत आवश्यक कदम उठाए गए।

    फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बता रहा है वहीं प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

  • यूपी में मानसून का कहर सड़कों से लेकर मंदिरों तक पानी ही पानी सात की मौत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात

    यूपी में मानसून का कहर सड़कों से लेकर मंदिरों तक पानी ही पानी सात की मौत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में हालात बिगाड़ दिए हैं। राजधानी लखनऊ समेत कानपुर वाराणसी प्रयागराज अयोध्या गोरखपुर बरेली और प्रदेश के करीब 20 शहरों में सोमवार को दिनभर बारिश का दौर जारी रहा। लगातार बरसात के कारण कई स्थानों पर सड़कें धंस गईं अस्पतालों में पानी भर गया और धार्मिक स्थलों तक में जलभराव की स्थिति बन गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 69 शहरों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बारिश का सबसे अधिक असर फिरोजाबाद में देखने को मिला जहां सरकारी अस्पताल परिसर में पानी भर जाने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पुलिसकर्मी घुटनों तक भरे पानी में जूते हाथ में लेकर ड्यूटी करते दिखाई दिए। शामली जिले में नहर टूटने से आसपास की सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया और नहर का पानी गांवों तथा खेतों में फैल गया जिससे किसानों की फसलें प्रभावित होने लगी हैं।

    लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण प्रदेश की प्रमुख नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। वाराणसी और प्रयागराज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। काशी में प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर सहित अनेक छोटे मंदिरों में भी पानी भर गया है। वहीं अयोध्या में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे नदी किनारे के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

    बलिया में सरयू नदी और लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के किनारे कटान शुरू हो गया है। प्रशासन को आशंका है कि यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो बड़ी संख्या में गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। संतकबीरनगर में लगातार बारिश के कारण करीब तीन सौ वर्ष पुराना बाबा बैजूनाथ मंदिर भी ढह गया जिससे क्षेत्र में धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों में चिंता का माहौल है।

    पिछले चौबीस घंटों के दौरान बारिश और आकाशीय बिजली से जुड़े हादसों में सात लोगों की जान चली गई। मुजफ्फरनगर में कच्चा मकान गिरने से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई जबकि बलिया और चंदौली में खेतों में काम कर रहे दो किसानों की बिजली गिरने से मृत्यु हो गई। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और खेतों में जाने से बचने की अपील की है।

    मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने मौसमीय तंत्र और सक्रिय मानसूनी रेखा के कारण प्रदेश में अगले पांच से छह दिनों तक भारी वर्षा का सिलसिला जारी रह सकता है। 22 जुलाई तक कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जबकि उसके बाद भी कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।

    लगातार हो रही बारिश ने जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत दी है वहीं दूसरी ओर जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। अब सभी की नजर मौसम के अगले दौर पर है क्योंकि आने वाले कुछ दिन उत्तर प्रदेश के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त नई SIT बनाने के निर्देश राजनीति से दूर रहकर निष्पक्ष जांच पर जोर

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त नई SIT बनाने के निर्देश राजनीति से दूर रहकर निष्पक्ष जांच पर जोर


    उत्तर प्रदेश। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के चर्चित मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नई विशेष जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष पारदर्शी और बिना किसी राजनीतिक प्रभाव के होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और जांच ऐसे स्तर पर पहुंचे जिससे पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि नई एसआईटी का नेतृत्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करें ताकि जांच पेशेवर तरीके से आगे बढ़ सके। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार वरिष्ठ अधिकारियों के नाम के साथ नई टीम का प्रस्ताव पेश करे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी जहां सरकार नई जांच टीम की जानकारी अदालत के समक्ष रखेगी।

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच जारी है। उन्होंने कहा कि पहले गठित एसआईटी ने प्रारंभिक जांच में इसे संज्ञेय अपराध माना था जिसके बाद नियमित पुलिस जांच शुरू हुई। इस पर अदालत ने कहा कि अब जांच को और अधिक प्रभावी तथा भरोसेमंद बनाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी आवश्यक है।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह भी मांग उठाई गई कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जहां भी विधिवत रसीद जारी की गई है वहां उसका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहना चाहिए। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि केवल दावों के आधार पर किसी वस्तु को दान मान लेना व्यावहारिक नहीं होगा और प्रत्येक दान का प्रमाण होना आवश्यक है।

    गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट की ओर से चढ़ावे की गिनती के दौरान अनियमितताओं की शिकायत की गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जून में विशेष जांच टीम गठित की थी जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। बाद में इस मामले में कई कर्मचारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन पर चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी और आभूषणों में कथित गड़बड़ी करने का आरोप है।

    जांच के दौरान ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी पर भी प्रक्रिया संबंधी लापरवाही के आरोप सामने आए। आरोप है कि चढ़ावा प्रबंधन के लिए निर्धारित दिशा निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया जिससे अनियमितताओं की आशंका बनी। इसी बीच ट्रस्ट के दो प्रमुख पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद अब पूरे मामले की जांच नए सिरे से वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में आगे बढ़ेगी। अदालत ने साफ कर दिया है कि धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अब सभी की नजर 27 जुलाई की अगली सुनवाई पर रहेगी जहां नई एसआईटी के गठन और जांच की प्रगति पर अदालत विस्तृत समीक्षा करेगी।

  • यूपी आईटीआई में बिना परीक्षा मिलेगा दाखिला, 8वीं, 10वीं और 12वीं पास युवाओं के लिए शुरू हुई ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया

    यूपी आईटीआई में बिना परीक्षा मिलेगा दाखिला, 8वीं, 10वीं और 12वीं पास युवाओं के लिए शुरू हुई ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसर तलाश रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान यानी आईटीआई में वर्ष 2026-27 सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इस बार भी उम्मीदवारों को किसी लिखित प्रवेश परीक्षा से नहीं गुजरना होगा। छात्रों का चयन उनकी पिछली कक्षा के अंकों के आधार पर तैयार की जाने वाली मेरिट सूची के माध्यम से किया जाएगा।

    उत्तर प्रदेश के आईटीआई संस्थानों में 8वीं, 10वीं और 12वीं पास छात्र अपनी योग्यता के अनुसार विभिन्न तकनीकी ट्रेड में प्रवेश ले सकते हैं। इन संस्थानों में युवाओं को रोजगार से जुड़े व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिससे वे कम समय में तकनीकी कौशल हासिल कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वेल्डर, मैकेनिक, प्लंबर, वायरमैन, टर्नर, ड्राफ्ट्समैन और कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट जैसे कई ट्रेड उपलब्ध हैं।

    उत्तर प्रदेश में आईटीआई प्रवेश और प्रशिक्षण व्यवस्था का संचालन राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी), लखनऊ द्वारा किया जाता है। यह संस्था सरकारी और निजी दोनों तरह के आईटीआई संस्थानों की निगरानी करती है। इसके अलावा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत संचालित संस्थान भी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होते हैं।

    वर्ष 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 11 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 4 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है और इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से ही अपना पंजीकरण कराना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    आईटीआई प्रवेश के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट आधारित होगी। उम्मीदवारों का चयन संबंधित ट्रेड और पाठ्यक्रम की योग्यता के अनुसार 8वीं, 10वीं या 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लिखित प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। मेरिट सूची जारी होने के बाद उपलब्ध सीटों के आधार पर काउंसलिंग और सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    आवेदक सरकारी आईटीआई, निजी आईटीआई या दोनों विकल्पों के लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 14 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि अधिकतम आयु सीमा तय नहीं की गई है। अधिकांश तकनीकी ट्रेड के लिए 10वीं पास होना आवश्यक है, जबकि कुछ शुरुआती स्तर के ट्रेड में 8वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

    प्रवेश के लिए उम्मीदवार का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना जरूरी है। दस्तावेज सत्यापन के समय वैध निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक विवरण, श्रेणी संबंधी जानकारी, फोटो, हस्ताक्षर और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे।

    आवेदन शुल्क के रूप में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 250 रुपये का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। भुगतान नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई माध्यम से किया जा सकता है। आवेदन जमा करने और शुल्क भुगतान के बाद उम्मीदवारों को फॉर्म में सुधार के लिए 48 घंटे की अवधि भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    प्रवेश प्रक्रिया में पहले ऑनलाइन पंजीकरण, मोबाइल सत्यापन, आवेदन फॉर्म भरना, दस्तावेज अपलोड करना और शुल्क भुगतान जैसे चरण पूरे किए जाएंगे। इसके बाद योग्यता परीक्षा के अंकों के आधार पर मेरिट सूची जारी होगी। सीट उपलब्धता के अनुसार कई चरणों में काउंसलिंग आयोजित की जाएगी, जिससे पहले चरण में सीट नहीं पाने वाले उम्मीदवारों को आगे के अवसर मिल सकें।

    आईटीआई प्रवेश प्रक्रिया में राज्य सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षण व्यवस्था भी लागू होगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को निर्धारित नियमों के तहत लाभ मिलेगा। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले पात्रता, शुल्क और अन्य जरूरी जानकारियों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार जरूर कर लें, क्योंकि नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव हैं।