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  • हिंदू कुश हिमालय पर मंडरा रहा जलवायु संकट, कम बारिश से बढ़ सकता है बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर झील फटने का खतरा

    हिंदू कुश हिमालय पर मंडरा रहा जलवायु संकट, कम बारिश से बढ़ सकता है बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर झील फटने का खतरा


    नई दिल्ली । मानसून के आगमन के साथ देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है, लेकिन इसी बीच हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों द्वारा जारी ताजा आकलन के अनुसार इस वर्ष मानसून के दौरान इस संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। इसके साथ ही तापमान भी औसत से अधिक रह सकता है, जिससे जलवायु संबंधी कई गंभीर चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

    इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ एटमॉस्फेरिक फिजिक्स द्वारा जारी HKH मॉनसून आउटलुक 2026 में संकेत दिए गए हैं कि कम बारिश और बढ़ते तापमान का संयुक्त प्रभाव इस क्षेत्र में सूखे, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और ग्लेशियर झील फटने जैसी घटनाओं के खतरे को बढ़ा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार अल नीनो जैसी मौसमीय परिस्थितियां मानसून को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे वर्षा का वितरण असंतुलित हो सकता है।

    हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र लगभग 3,500 किलोमीटर तक फैला हुआ है और अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, चीन तथा म्यांमार जैसे देशों को जोड़ता है। यह क्षेत्र केवल पर्वतों और ग्लेशियरों के लिए ही नहीं, बल्कि एशिया की कई महत्वपूर्ण नदी प्रणालियों का उद्गम स्थल होने के कारण भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, यांग्त्जी, मेकांग, इरावदी और अमू दरिया जैसी नदियां इसी क्षेत्र से जुड़ी हैं, जिन पर करोड़ों लोगों की जल, कृषि और आजीविका संबंधी जरूरतें निर्भर करती हैं।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले शीतकाल में बर्फ का टिकाव सामान्य से कम रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका अर्थ है कि क्षेत्र मानसून में अपेक्षाकृत कम जल भंडार के साथ प्रवेश कर रहा है। ऐसी स्थिति में स्थानीय समुदायों को वर्षा, भूजल और प्राकृतिक जल स्रोतों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। यदि बारिश उम्मीद से कम होती है, तो जल उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ जाएगी।

    विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि कम वर्षा का मतलब यह नहीं है कि प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कम हो जाएगा। कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की घटनाएं भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती हैं। अचानक आने वाली बाढ़, पहाड़ी ढलानों का खिसकना और ग्लेशियर झीलों का फटना ऐसे खतरे हैं जो कम बारिश वाले मौसम में भी सामने आ सकते हैं।

    रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन को भी एक प्रमुख कारण बताया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार बदलते मौसम पैटर्न के कारण हिमालयी क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील हो गया है। तापमान में वृद्धि और वर्षा की अनिश्चितता भविष्य में इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी, जल संसाधनों और स्थानीय आबादी पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन और नीति निर्माताओं को इन चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण और जलवायु अनुकूलन की रणनीतियों को मजबूत करना होगा। क्योंकि हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में होने वाले बदलाव केवल पर्वतीय इलाकों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका असर पूरे दक्षिण एशिया और उससे जुड़े करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है।

  • मौसम का बदलेगा मिजाज! आंधी, बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, कई राज्यों में राहत तो कहीं बढ़ेगी उमस

    मौसम का बदलेगा मिजाज! आंधी, बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, कई राज्यों में राहत तो कहीं बढ़ेगी उमस



    मध्य प्रदेशदेशभर में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 9 जून को कई राज्यों में तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, जिसके चलते कई क्षेत्रों में राहत की बारिश देखने को मिल सकती है, जबकि कुछ इलाकों में गर्मी और उमस का असर बरकरार रहेगा।

    मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और अन्य राज्यों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई है। कई स्थानों पर 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    मध्य प्रदेश में भी मौसम के तेवर बदले हुए नजर आ सकते हैं। भोपाल, सीहोर, विदिशा, सागर, सतना, उज्जैन और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। पिछले दिनों प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाएं दर्ज की गई थीं, जिससे तापमान में गिरावट और मौसम में बदलाव देखने को मिला था।

    दक्षिण भारत में मानसून की गतिविधियां तेज हो रही हैं। केरल और कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बाढ़ और जलभराव की आशंका को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

    पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और आसपास के राज्यों में व्यापक वर्षा के संकेत हैं। वहीं उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बादलों की आवाजाही के बावजूद उमस और गर्मी का असर महसूस किया जा सकता है।

    मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की प्रगति के साथ आने वाले दिनों में देश के अधिक हिस्सों में वर्षा गतिविधियां बढ़ेंगी। हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी गर्म और शुष्क हवाओं का प्रभाव बना रह सकता है। ऐसे में नागरिकों को मौसम विभाग की चेतावनियों और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की आवश्यकता है।

    कुल मिलाकर 9 जून का दिन मौसम के लिहाज से काफी सक्रिय रहने वाला है। कहीं बारिश राहत देगी तो कहीं तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा चुनौती बन सकता है। इसलिए घर से निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें और आवश्यक सावधानी बरतें।

  • शाजापुर में अगले 3 घंटे में आंधी-बारिश के आसार, उमस से लोग परेशान; 12 जून के बाद फिर बदलेगा मौसम

    शाजापुर में अगले 3 घंटे में आंधी-बारिश के आसार, उमस से लोग परेशान; 12 जून के बाद फिर बदलेगा मौसम


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में मौसम एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। पिछले कुछ दिनों से शाम के समय हो रही हल्की बारिश के बाद अब दिन के समय तेज गर्मी और उमस ने लोगों को परेशान कर दिया है।

    सोमवार सुबह से ही तेज धूप और नमी के कारण वातावरण भारी महसूस हुआ, जिससे आमजन को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा। मौसम में हल्की गिरावट के बावजूद गर्मी का असर लगातार बना हुआ है।

    मौसम विभाग के अनुसार, जिले में अधिकतम तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। साथ ही करीब 52 प्रतिशत आर्द्रता के कारण उमस का प्रभाव और बढ़ गया है। पश्चिमी-उत्तर पश्चिमी दिशा से लगभग 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं।

    विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले तीन घंटों के भीतर शाजापुर में आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इसके चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार से प्री-मानसून गतिविधियों में थोड़ी कमी आ सकती है, जिससे बारिश की तीव्रता घट सकती है। हालांकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्की गरज-चमक की स्थिति बनी रह सकती है।

    वहीं, अनुमान लगाया गया है कि 12 जून के बाद जिले में मौसम एक बार फिर सक्रिय होगा और बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट और मौसम में बदलाव की संभावना है।

  • गर्मी का कहर जारी, उमस ने बढ़ाई परेशानी; कुछ जगहों पर राहत की बूंदें संभव

    गर्मी का कहर जारी, उमस ने बढ़ाई परेशानी; कुछ जगहों पर राहत की बूंदें संभव


    मध्‍य प्रदेश 6 जून को मौसम का मिजाज अधिकतर इलाकों में गर्म और उमस भरा बना हुआ है। Monsoon की सक्रियता अभी सीमित है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान कर रखा है। दिन के समय तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

    सुबह से ही आसमान साफ और धूप तीखी रहने के कारण गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस किया गया। दोपहर के समय उमस का स्तर बढ़ने से लोगों को बेचैनी का सामना करना पड़ा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार नमी की अधिकता के कारण गर्मी और अधिक तीव्र महसूस हो रही है।

    हालांकि, मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। यह बारिश मुख्य रूप से स्थानीय बादलों के बनने और नमी के दबाव के कारण संभव है। इससे उन इलाकों में अस्थायी राहत मिल सकती है जहां तापमान अधिक है।

    ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गर्मी का असर समान रूप से देखा जा रहा है। दोपहर के समय बाजारों और सड़कों पर आवाजाही कम हो रही है, जबकि लोग दिन के गर्म हिस्से में घरों के अंदर रहना ही बेहतर समझ रहे हैं।

    मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि नमी और बादलों की गतिविधि बढ़ती है तो मौसम में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर बारिश की संभावना बनी हुई है।

    कुल मिलाकर, 6 जून का दिन गर्मी और उमस से भरा रहेगा, लेकिन कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश लोगों को थोड़ी राहत दे सकती है।

  • गर्मी से मिलेगी राहत, अगले 2-3 दिन में केरल पहुंचेगा मानसून; दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में अलर्ट

    गर्मी से मिलेगी राहत, अगले 2-3 दिन में केरल पहुंचेगा मानसून; दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में अलर्ट

    नई दिल्ली । देशभर में लंबे समय से पड़ रही भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो से तीन दिनों के भीतर केरल में प्रवेश कर सकता है। मानसून की यह प्रगति देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के स्वरूप को तेजी से बदलने वाली है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्र तक व्यापक स्तर पर वर्षा गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही कई राज्यों में तेज हवाएं, गरज-चमक और आंधी का दौर भी देखने को मिल सकता है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बन रही अनुकूल परिस्थितियों के कारण मानसून को आगे बढ़ने में सहायता मिल रही है। इसी वजह से केरल तट पर मानसून की दस्तक अब बेहद करीब मानी जा रही है। मानसून के सक्रिय होने के बाद दक्षिण भारत के राज्यों में अच्छी बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज हो सकती है। कृषि गतिविधियों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक मानसून की प्रगति पर निर्भर करती है। किसानों की नजरें भी मानसून की आधिकारिक शुरुआत पर टिकी हुई हैं।

    उत्तर भारत के कई राज्यों में भी मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर आंधी की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में भी गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बदल सकता है और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आ सकती हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी वर्षा गतिविधियां तेज होने की संभावना है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आगामी दिनों में व्यापक बारिश दर्ज की जा सकती है। वहीं असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में लगातार भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है। इन क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर और भूस्खलन जैसी संभावित परिस्थितियों पर भी निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां सामान्य से अधिक सक्रिय रह सकती हैं।

    हालांकि शुरुआती संकेतों के अनुसार इस वर्ष मानसून की कुल वर्षा सामान्य से थोड़ी कम रहने की आशंका जताई गई है। इसके बावजूद फिलहाल देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में गिरावट और गर्मी से राहत देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की आगामी प्रगति कृषि, जल संसाधनों और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसलिए आने वाले दिनों में मौसम विभाग के अपडेट पर लगातार नजर रखना आवश्यक होगा।

    मानसून की संभावित एंट्री ने देशभर में राहत की उम्मीद बढ़ा दी है। यदि वर्षा का क्रम अपेक्षित रूप से आगे बढ़ता है तो किसानों, जलाशयों और आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है, जबकि मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी भी अहम रहेगी।

  • झांसी में भीषण गर्मी का कहर: 41℃ तापमान, लू से जनजीवन प्रभावित

    झांसी में भीषण गर्मी का कहर: 41℃ तापमान, लू से जनजीवन प्रभावित

    झांसी। झांसी में मंगलवार की सुबह से ही तेज गर्मी और लू ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सुबह 10 बजे तक तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे शहर में भीषण गर्मी का असर साफ दिखाई देने लगा। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोग घरों से निकलते समय मुंह और सिर को कपड़े से ढककर बाहर निकलने को मजबूर हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार दोपहर तक हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं और तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। इसी वजह से जिले में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दिन के मध्य समय में हीटवेव का असर सबसे ज्यादा रहेगा, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

    गर्मी के कारण सुबह से ही शहर की सड़कों पर आवाजाही कम देखी गई। जो लोग जरूरी काम से बाहर निकले, वे धूप से बचने के लिए सिर और चेहरे को ढककर चलते नजर आए। बाजारों और चौराहों पर दोपहर से पहले ही सन्नाटा जैसा माहौल बन गया, जिससे गर्मी की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे बिना जरूरत धूप में न निकलें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की भी अपील की गई है, क्योंकि इस मौसम में वे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

    प्रशासन ने भी नागरिकों से सतर्क रहने और लू से बचाव के सभी जरूरी उपाय अपनाने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि गर्मी के इस प्रकोप में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

  • 2026 का दुर्लभ पंचांग संयोग: दो ज्येष्ठ मास, लेकिन नौतपा देगा सिर्फ एक बार प्रचंड गर्मी

    2026 का दुर्लभ पंचांग संयोग: दो ज्येष्ठ मास, लेकिन नौतपा देगा सिर्फ एक बार प्रचंड गर्मी



    नई दिल्ली(New Delhi)।
     साल 2026 हिंदू पंचांग के लिहाज से बेहद दुर्लभ और चर्चा में रहने वाला वर्ष माना जा रहा है। इस बार अधिक मास (मलमास) के कारण ज्येष्ठ मास दो बार पड़ने वाला है, जिससे लोगों के बीच यह सवाल तेज हो गया है कि क्या नौतपा भी दो बार पड़ेगा और क्या गर्मी पिछले वर्षों से कहीं ज्यादा खतरनाक हो जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह स्थिति पंचांगीय दृष्टि से विशेष जरूर है, लेकिन इसका असर नौतपा पर अलग तरीके से ही देखने को मिलेगा।

    ज्येष्ठ मास दो बार, लेकिन नौतपा नहीं होगा डबल
    ज्योतिष विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि 2026 में ज्येष्ठ मास भले ही दो बार आए, लेकिन नौतपा केवल एक बार ही पड़ेगा। इसका कारण यह है कि नौतपा का संबंध महीनों से नहीं बल्कि सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश से होता है। सूर्य वर्ष में एक बार ही रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है और इसी अवधि में शुरुआती 9 दिन “नौतपा” कहलाते हैं। इसलिए पंचांग में बदलाव होने के बावजूद नौतपा की संख्या नहीं बदलती।

    कब पड़ेगा नौतपा और कितना रहेगा असर
    गणनाओं के अनुसार 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहने की संभावना है। इस अवधि को उत्तर और मध्य भारत में सबसे अधिक गर्म माना जाता है। इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है।

    मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस दौरान कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है, जबकि कुछ स्थानों पर यह 48 से 50 डिग्री तक भी पहुंच सकता है। तेज धूप के साथ लू (Heatwave) का असर भी बढ़ेगा, जिससे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    2026 का नौतपा क्यों माना जा रहा है खास
    ज्योतिषीय दृष्टि से 2026 का नौतपा एक और कारण से विशेष माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस अवधि में दो मंगलवार भी पड़ेंगे, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से “अग्नि तत्व” से जुड़ा माना जाता है। हालांकि वैज्ञानिक रूप से इसका तापमान पर सीधा प्रभाव साबित नहीं है, लेकिन परंपरागत मान्यताओं में इसे गर्मी की तीव्रता बढ़ाने वाला योग माना जाता है।

    मानसून से भी जुड़ी है मान्यता
    भारतीय परंपराओं में नौतपा को मानसून की तैयारी का संकेत भी माना जाता है। माना जाता है कि इस दौरान तेज गर्मी से लो प्रेशर सिस्टम बनता है, जो आगे चलकर मानसून को सक्रिय करने में मदद करता है। इसलिए नौतपा को सिर्फ गर्मी का समय नहीं बल्कि मौसम परिवर्तन का महत्वपूर्ण चरण भी माना जाता है।

    कुल मिलाकर 2026 का वर्ष पंचांग और मौसम दोनों दृष्टि से खास रहने वाला है। ज्येष्ठ मास के दो बार आने से जहां यह साल अनोखा बन रहा है, वहीं नौतपा अपने तय नियमों के अनुसार केवल एक बार ही भीषण गर्मी का असर दिखाएगा। इस दौरान लोगों को धूप, लू और डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

  • देशभर में मौसम का डबल अटैक: कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं लू का कहर, IMD ने जारी किया हाई अलर्ट

    देशभर में मौसम का डबल अटैक: कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं लू का कहर, IMD ने जारी किया हाई अलर्ट

    नई दिल्ली ।देशभर में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम ने अचानक करवट ले ली है। 22 मई को देश के कई हिस्सों में तेज आंधी, भारी बारिश और तूफान को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत तक कई राज्यों में मौसम बेहद खराब रहने की संभावना है। तेज हवाओं की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। कई इलाकों में बिजली गिरने, पेड़ उखड़ने और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। मौसम में इस अचानक बदलाव की वजह से लोगों को भीषण गर्मी से राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन तेज तूफान और बारिश नई परेशानियां भी खड़ी कर सकते हैं।

    मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हो गया है, जिसका असर कई राज्यों में दिखाई देगा। इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर मणिपुर तक मौसम प्रणाली मजबूत हो रही है। इसी कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, असम, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की गई है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश का असर देखने को मिल सकता है। गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, देवरिया, आजमगढ़ और आसपास के इलाकों में मौसम खराब रहने की संभावना है। वहीं बिहार के गया, दरभंगा, पूर्णिया, किशनगंज, सुपौल और भागलपुर जैसे जिलों में भारी बारिश और तूफान का खतरा बना हुआ है। झारखंड में भी रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर समेत कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों में भी मौसम बिगड़ सकता है और कई जिलों में तेज आंधी चलने की चेतावनी दी गई है।

    पहाड़ी राज्यों में भी मौसम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। उत्तराखंड के नैनीताल, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू, मंडी और कांगड़ा में भी तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने यात्रियों और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है क्योंकि खराब मौसम के कारण भूस्खलन और सड़क बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

    राजधानी दिल्ली में भी 22 मई की शाम मौसम अचानक बदल सकता है। यहां तेज धूलभरी आंधी चलने की संभावना जताई गई है। हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। हालांकि तापमान अभी भी काफी ऊंचा बना रहेगा और अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अभी भी भीषण गर्मी और लू का असर जारी रहेगा। जयपुर, ग्वालियर, उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों में गर्म हवाएं लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

    दक्षिण भारत के राज्यों में भी मौसम सक्रिय हो गया है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कई स्थानों पर तेज बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है। वहीं अंडमान-निकोबार क्षेत्र में भी मौसम खराब रह सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून आगे बढ़ सकता है, जिसके कारण बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

    मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है क्योंकि तेज आंधी और बारिश से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

  • एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट

    एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट


    नई दिल्ली। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून सामान्य समय से पहले 26 मई के आसपास केरल पहुंच सकता है, लेकिन इसके बावजूद देश में मौसम का मिजाज चिंताजनक बना हुआ है। अमेरिकी एजेंसी NOAA की रिपोर्ट के अनुसार इस साल सुपर अल-नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे मानसून कमजोर रह सकता है और देश के कई हिस्सों में सूखा व भीषण गर्मी बढ़ सकती है।

    अल-नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने से मानसूनी हवाओं की दिशा प्रभावित होती है, जिससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम होने और तापमान बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण इस बार बारिश सामान्य से कम और गर्मी अधिक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून केरल से 1 जून के बजाय 26 मई के आसपास प्रवेश कर सकता है, लेकिन इसके बाद अलग-अलग राज्यों में इसकी गति अलग-अलग रहेगी। अनुमान के अनुसार राजस्थान में 20 जून, मध्य प्रदेश में 12 जून, उत्तर प्रदेश में 18 जून और बिहार में 8 से 10 जून के बीच मानसून पहुंच सकता है।

    फिलहाल देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का असर जारी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड और विदर्भ में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है, जहां तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। कई इलाकों में रात के समय भी लू चलने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश के भोपाल में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जिससे सड़कों का डामर तक पिघलने की स्थिति बन गई। वहीं राजस्थान के फलौदी में 44.8 डिग्री और महाराष्ट्र के अमरावती में 45.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिससे कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    इसके साथ ही मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान के अलर्ट भी जारी किए हैं। झारखंड में ऑरेंज अलर्ट, बिहार और हरियाणा के कुछ जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी है, जबकि जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।

    वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र में हीटवेव का असर अगले एक सप्ताह तक जारी रहने की आशंका है। कई राज्यों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
     

  • यूपी में 18 जून तक मानसून की दस्तक संभव, भीषण गर्मी और लू से बढ़ी परेशानी

    यूपी में 18 जून तक मानसून की दस्तक संभव, भीषण गर्मी और लू से बढ़ी परेशानी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मानसून इस बार 18 जून के आसपास दस्तक दे सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून केरल में 26 मई के करीब पहुंचेगा और वहां से आगे बढ़ते हुए 18 जून तक गोरखपुर के रास्ते यूपी में प्रवेश कर सकता है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों ने इसे संभावित तारीख बताया है और स्पष्टता मानसून की वास्तविक गति के आधार पर ही आएगी।

    लखनऊ स्थित मौसम वैज्ञानिक Atul Kumar Singh ने बताया कि मौजूदा मौसम परिस्थितियों को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि जब मानसून केरल से आगे बढ़ेगा, तभी इसकी सटीक तारीख तय की जा सकेगी।

    फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है और तेज धूप के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गर्मी का असर तेज है और कई जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। झांसी और ललितपुर सहित करीब 8 जिलों में लू चलने की चेतावनी दी गई है।

    पिछले 24 घंटों में कुछ जिलों में हल्की बारिश जरूर दर्ज की गई है, लेकिन उससे गर्मी में कोई खास राहत नहीं मिली। बांदा प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान 47 डिग्री तक भी जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म हो चुका है, जिसके कारण अब दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म रहेंगी। हीटवेव की स्थिति और तेज होने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग ने यह भी बताया कि इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इसके पीछे प्रशांत महासागर में अल नीनो जैसी परिस्थितियों का प्रभाव और उत्तरी गोलार्ध में कम बर्फबारी को कारण माना जा रहा है, जिससे वर्षा प्रभावित हो सकती है।

    हालांकि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में मानसून अपेक्षाकृत बेहतर रहा था और सामान्य से 10 से 15 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई थी। लेकिन इस बार मौसम पैटर्न बदलने से बारिश कम होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे कृषि और जलस्तर पर असर पड़ सकता है।