Tag: Women Empowerment

  • महुआ और तेंदू पत्ते बेचने से इको-टूरिज्म तक का सफर, मैथिली भुए की कहानी ने जीता पीएम मोदी का ध्यान; 50 महिलाओं को ट्रेनिंग

    महुआ और तेंदू पत्ते बेचने से इको-टूरिज्म तक का सफर, मैथिली भुए की कहानी ने जीता पीएम मोदी का ध्यान; 50 महिलाओं को ट्रेनिंग


    नई दिल्ली। ओडिशा के संबलपुर जिले के देबरीगढ़ की रहने वाली मैथिली भुए की मेहनत और हौसले को अब देशभर में पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 137वें एपिसोड में मैथिली भुए के काम का जिक्र करते हुए उनकी सराहना की। इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने जंगलों के संरक्षण में योगदान देने और स्थानीय महिलाओं को रोजगार से जोड़ने वाली मैथिली के लिए यह पल बेहद खास रहा। प्रधानमंत्री की ओर से अपने काम की तारीफ किए जाने पर उन्होंने खुशी जाहिर की और इसे उनके जैसे ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए बड़ी प्रेरणा बताया।

    मैथिली भुए की कहानी आसान नहीं रही है। वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं और लंबे समय तक जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर रही हैं। तेंदू के पत्ते बांस महुआ कराडी और जलाऊ लकड़ी जैसे वन उत्पादों को इकट्ठा कर उन्हें बेचकर वह अपने परिवार का गुजारा करती थीं। सीमित संसाधनों के बीच जीवन आगे बढ़ रहा था लेकिन 2023 में देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी को एक नई दिशा मिली।

    इको-टूरिज्म ने न केवल मैथिली को रोजगार का नया जरिया दिया बल्कि उन्हें अपने आसपास की दूसरी महिलाओं के लिए भी अवसर पैदा करने की प्रेरणा दी। धीरे धीरे क्षेत्र की महिलाएं इस पहल से जुड़ने लगीं और अब मैथिली करीब 40 से 50 महिलाओं को इको-टूरिज्म तथा हॉस्पिटैलिटी से जुड़े अलग अलग कामों की ट्रेनिंग दे रही हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को नौकरी दिलाना नहीं बल्कि उन्हें इतना सक्षम बनाना है कि वे अपने दम पर बेहतर आजीविका हासिल कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

    मैथिली के मार्गदर्शन में महिलाएं पर्यटकों के साथ व्यवहार करने उनकी जरूरतों को समझने और उन्हें बेहतर सेवाएं देने की ट्रेनिंग ले रही हैं। देबरीगढ़ में इको-टूरिज्म से जुड़े कई क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इनमें स्मारिका की दुकानें चाय की दुकानें रेस्तरां नेचर कैंप और होमस्टे जैसे काम शामिल हैं। महिलाओं को उनकी जिम्मेदारी और काम की प्रकृति के अनुसार अलग अलग प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे पर्यटकों को बेहतर अनुभव दे सकें।

    मैथिली का मानना है कि पर्यटन के साथ स्थानीय समुदाय को जोड़ना क्षेत्र के विकास का मजबूत माध्यम बन सकता है। जब स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलता है तो उन्हें बेहतर आय का अवसर मिलता है और साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना भी मजबूत होती है। खास तौर पर महिलाओं के लिए इको-टूरिज्म आत्मनिर्भर बनने का प्रभावी रास्ता साबित हो सकता है।

    मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नाम लिए जाने के बाद मैथिली की कहानी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयासों को पहचान मिलना बेहद खुशी की बात है। मैथिली चाहती हैं कि आने वाले समय में और अधिक महिलाएं इको-टूरिज्म से जुड़ें और अपनी आजीविका का मजबूत आधार तैयार करें।

    उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। स्थानीय अवसरों की पहचान मेहनत और दूसरों को साथ लेकर आगे बढ़ने की इच्छा किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकती है। जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर निर्भर रहने वाली मैथिली भुए आज उसी प्राकृतिक विरासत को बचाने और उसके जरिए महिलाओं को रोजगार देने की मुहिम का हिस्सा बन चुकी हैं। मन की बात में मिली पहचान उनके इस सफर को नई ऊर्जा देने के साथ देबरीगढ़ के इको-टूरिज्म मॉडल को भी देश के सामने एक प्रेरक उदाहरण के रूप में पेश करती है।

  • बजट की कमी से थमी 'ड्रोन दीदी' योजना की रफ्तार, प्रशिक्षण के एक साल बाद भी नहीं मिले कृषि ड्रोन

    बजट की कमी से थमी 'ड्रोन दीदी' योजना की रफ्तार, प्रशिक्षण के एक साल बाद भी नहीं मिले कृषि ड्रोन

    झांसी। महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना झांसी में बजट के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रही है। बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिला किसानों ने एक वर्ष पहले लखनऊ में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण पूरा किया था, लेकिन अब तक उन्हें कृषि ड्रोन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के बावजूद वे स्वरोजगार की शुरुआत नहीं कर सकी हैं।

    प्रशिक्षण पूरा, लेकिन संसाधनों का इंतजार
    योजना के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का चयन कर उन्हें ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है, ताकि महिलाएं खेतों में उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव जैसी सेवाएं देकर आय अर्जित कर सकें।

    पिछले वर्ष बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिलाओं को लखनऊ में प्रशिक्षण दिलाया गया था। हालांकि, प्रशिक्षण पूरा हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बजट जारी न होने के कारण उन्हें अब तक ड्रोन नहीं मिल पाए हैं। इससे वे सीखी गई तकनीक का व्यावहारिक उपयोग नहीं कर पा रही हैं।

    एक ड्रोन की लागत करीब 10 लाख रुपये
    एनआरएलएम के तहत चयनित महिलाओं को लगभग 10 लाख रुपये लागत का कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इन ड्रोन की मदद से वे किसानों के खेतों में उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव कर नियमित आय अर्जित कर सकती हैं।

    पहले चयनित महिलाओं ने पेश की मिसाल
    योजना के सफल परिणाम भी सामने आ चुके हैं। करीब दो वर्ष पहले बड़ागांव क्षेत्र के गड़मऊ गांव की रानी देवी और हेमवती को हैदराबाद में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद दोनों को ड्रोन उपलब्ध कराए गए और वर्तमान में वे किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से छिड़काव कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि नई चयनित महिलाओं को भी समय पर ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएं तो वे भी इसी तरह अपना स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगी।

    क्या है ड्रोन दीदी योजना?
    ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ना है। इसके तहत महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है और बाद में कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इन ड्रोन की मदद से कम समय में उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है। इससे किसानों का समय और लागत दोनों बचते हैं, जबकि प्रशिक्षित महिलाओं के लिए आय का नया स्रोत तैयार होता है।

    बजट मिलते ही दिए जाएंगे ड्रोन
    एनआरएलएम, झांसी के प्रभारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि बजट उपलब्ध होते ही ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित महिला किसानों को कृषि ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएंगे, ताकि वे जल्द से जल्द कृषि सेवाएं शुरू कर सकें।

  • मदर्स डे पर भावनाओं का सैलाब: अन्ना कोनिडेला ने मातृत्व के हर रूप को दी दिल छू लेने वाली सलामी

    मदर्स डे पर भावनाओं का सैलाब: अन्ना कोनिडेला ने मातृत्व के हर रूप को दी दिल छू लेने वाली सलामी

    नई दिल्ली । मदर्स डे के अवसर पर इस बार भावनाओं का एक अलग ही रंग देखने को मिला, जहां मातृत्व को केवल एक परंपरा या उत्सव के रूप में नहीं बल्कि एक गहरे अनुभव के रूप में सामने रखा गया। इसी भावनात्मक माहौल में अभिनेता पवन कल्याण की पत्नी अन्ना कोनिडेला का संदेश लोगों के बीच खास चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने अपने शब्दों के जरिए मातृत्व की उन अनकही कहानियों को सामने रखा, जिन्हें अक्सर समाज नजरअंदाज कर देता है।

    अपने संदेश में अन्ना कोनिडेला ने मातृत्व को किसी एक परिभाषा में बांधने से इनकार करते हुए इसे एक व्यापक और विविध अनुभव बताया। उन्होंने उन महिलाओं का जिक्र किया जिन्होंने बहुत कम उम्र में मां बनने की जिम्मेदारी संभाली, और उन लोगों को भी याद किया जिन्होंने लंबे इंतजार और कठिन परिस्थितियों के बाद मातृत्व का सुख पाया। उनके अनुसार हर मां की यात्रा अलग होती है, लेकिन हर यात्रा में संघर्ष, प्रेम और त्याग समान रूप से मौजूद होते हैं।

    उन्होंने यह भी समझाया कि मां बनने का अनुभव केवल जैविक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। कई महिलाएं चिकित्सा प्रक्रियाओं, भावनात्मक संघर्षों और अनिश्चितताओं के बीच इस सफर को तय करती हैं। वहीं कुछ महिलाएं गोद लेकर भी मातृत्व का अनुभव प्राप्त करती हैं और समाज में प्रेम और जिम्मेदारी का नया उदाहरण पेश करती हैं। अन्ना के संदेश में यह स्पष्ट झलकता है कि मातृत्व का वास्तविक अर्थ केवल जन्म देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरी भावनात्मक यात्रा है।

    अपने संदेश में उन्होंने उन महिलाओं की पीड़ा को भी जगह दी, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया या गर्भपात जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना किया। ऐसे अनुभवों के बावजूद जीवन को संभालकर आगे बढ़ने वाली महिलाओं की ताकत को उन्होंने अत्यंत सम्मान के साथ प्रस्तुत किया। उनके शब्द यह बताते हैं कि दर्द और टूटन के बावजूद महिलाएं अपने भीतर एक नई ऊर्जा पैदा कर लेती हैं।

    इसके साथ ही उन्होंने उन माताओं का भी उल्लेख किया जो अकेले अपने बच्चों की परवरिश कर रही हैं। बिना किसी सहारे के जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए वे जिस तरह से अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने की कोशिश करती हैं, वह समाज के लिए एक प्रेरणा है। अन्ना का यह संदेश उन सभी महिलाओं की भूमिका को उजागर करता है, जिन्हें अक्सर उनके रोजमर्रा के संघर्षों के बावजूद पहचान नहीं मिल पाती।

    उनके पूरे संदेश में एक बात बार-बार सामने आती है कि मातृत्व कोई परफेक्ट स्थिति नहीं होती। यह भावनाओं, संघर्षों, थकान और असीम प्रेम का मिश्रण है, जिसमें हर दिन नई चुनौतियां और नए अनुभव शामिल होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज का दिन परफेक्ट होने के लिए नहीं है, बल्कि उन सभी महिलाओं को सम्मान देने के लिए है जो हर परिस्थिति में अपने परिवार और बच्चों के लिए मजबूत खड़ी रहती हैं।

    यह संदेश लोगों के बीच इसलिए भी गहराई से जुड़ा क्योंकि इसमें किसी आदर्श छवि के बजाय वास्तविक जीवन की सच्चाई दिखाई गई है। मातृत्व को एक सामान्य और मानवीय अनुभव के रूप में प्रस्तुत करते हुए अन्ना कोनिडेला ने हर महिला की कहानी को एक सम्मानजनक स्थान दिया है। उनका यह संदेश मदर्स डे को केवल एक उत्सव नहीं बल्कि एक भावनात्मक स्वीकार्यता में बदल देता है।

  • रियलिटी शो के मंच से अक्षय कुमार ने गृहणियों पर फिल्म बनाने की इच्छा जताई, समाज को दिया उनके योगदान का नया संदेश


    नई दिल्ली। फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन पर भी सक्रिय अभिनेता अक्षय कुमार ने एक बार फिर समाज के एक अहम वर्ग की ओर ध्यान आकर्षित किया है। एक क्विज रियलिटी शो के सेट पर उन्होंने गृहणियों को घर का सुपरस्टार बताते हुए उनके जीवन पर आधारित फिल्म बनाने की अपनी इच्छा साझा की। उनकी यह सोच न केवल भावनात्मक बल्कि सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान अक्षय कुमार ने कहा कि वह लंबे समय से ऐसी फिल्म बनाना चाहते हैं, जिसमें महिलाओं की भूमिका को केंद्र में रखा जाए और यह दिखाया जाए कि किस तरह घर की जिम्मेदारियां निभाने वाली महिलाएं परिवार की रीढ़ होती हैं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर उनके पास पूरी स्क्रिप्ट तैयार है, लेकिन अभी तक इसे लेकर प्रोडक्शन स्तर पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है।

    सेट पर मौजूद महिला प्रतिभागियों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनके अनुभव सुने और महसूस किया कि उनकी वास्तविक जीवन की कहानियां उस फिल्म के विचार से काफी मेल खाती हैं, जिसे वह पर्दे पर उतारना चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गृहणियों का योगदान अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि उनका काम लगातार, जिम्मेदारी भरा और बेहद महत्वपूर्ण होता है।

    अक्षय कुमार का मानना है कि समाज में गृहणियों की भूमिका को सही पहचान मिलनी चाहिए और सिनेमा इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्म का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं होगा, बल्कि यह उन महिलाओं के संघर्ष, समर्पण और ताकत को सामने लाने का प्रयास भी होगा, जो बिना किसी पहचान या सराहना के अपने परिवार के लिए दिन-रात काम करती हैं।

    फिलहाल इस प्रस्तावित फिल्म को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस विचार को व्यापक समर्थन मिल रहा है। दर्शक भी इस तरह की कहानी को बड़े पर्दे पर देखने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं।

    टेलीविजन पर उनकी सक्रियता भी लगातार बढ़ रही है और वह अपने क्विज शो के जरिए दर्शकों से जुड़ाव बनाए हुए हैं। शो के नए सीजन को भी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि वह छोटे पर्दे पर भी अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहे हैं।

  • नई दिल्ली में महिला आरक्षण को लेकर बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना

    नई दिल्ली में महिला आरक्षण को लेकर बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना


    नई दिल्ली।
    दिल्ली से जुड़े व्यापक राजनीतिक माहौल के बीच लखनऊ में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर एक विशाल जन आक्रोश महिला पदयात्रा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम ने राजनीतिक स्तर पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिसमें हजारों महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर विधानसभा तक पैदल मार्च किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ इस पदयात्रा में शामिल हुए और पूरे समय जनता के बीच सक्रिय रूप से मौजूद रहे। लगभग एक दशमलव सात पांच किलोमीटर लंबी इस यात्रा ने राजनीतिक वातावरण को और अधिक गरमा दिया।

    विधानसभा के बाहर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अपनी संकीर्ण सोच के कारण इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और लगातार इस दिशा में कार्य कर रही है।

    उन्होंने यह भी कहा कि समाज में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और उन्हें राजनीति एवं निर्णय प्रक्रिया में अधिक अवसर देने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश के विकास में महिला, युवा, गरीब और किसान चार प्रमुख आधार हैं जिनमें महिलाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

    उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी करने वाले राजनीतिक दलों को जनता भविष्य में जवाब देगी। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू होने तक यह संघर्ष जारी रहेगा। वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस प्रदर्शन को महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और शक्ति का प्रतीक बताया।

  • Femina Miss India 2026 में गोवा की साध्वी सैल बनीं विजेता, देश को मिला नया चेहरा

    Femina Miss India 2026 में गोवा की साध्वी सैल बनीं विजेता, देश को मिला नया चेहरा


    नई दिल्ली।
    देश की प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता Femina Miss India 2026 का ताज इस वर्ष गोवा की साध्वी सतीश सैल के नाम रहा। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित ग्रैंड फिनाले में देशभर से आई 30 प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिसमें साध्वी सैल ने अपने आत्मविश्वास, स्पष्ट विचार और प्रभावशाली मंचीय प्रस्तुति से निर्णायकों को प्रभावित किया।

    विजेता की घोषणा के साथ ही पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा और यह क्षण दर्शकों के लिए यादगार बन गया। इस जीत के साथ साध्वी सैल ने न केवल राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया बल्कि अब वे Miss World 2027 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों में प्रतिभागियों का मूल्यांकन व्यक्तित्व, संवाद क्षमता, सामाजिक दृष्टिकोण और आत्मविश्वास के आधार पर किया गया।

    फाइनल राउंड में साध्वी सैल ने अपने संतुलित उत्तरों और मंच पर आत्मविश्वासपूर्ण उपस्थिति से निर्णायक मंडल को खासा प्रभावित किया। इस प्रतियोगिता में महाराष्ट्र की राजनंदिनी पवार को फर्स्ट रनर-अप और केंद्र शासित प्रदेश की श्री अद्वैता को सेकंड रनर-अप घोषित किया गया। पूरे आयोजन में प्रतिभागियों ने उच्च स्तर का प्रदर्शन किया, जिससे चयन प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण रही।

    Femina Miss India को देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक माना जाता है, जो वर्षों से भारतीय प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का माध्यम रहा है। यह प्रतियोगिता केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें नेतृत्व क्षमता, सामाजिक समझ और व्यक्तित्व विकास को भी प्रमुखता दी जाती है।

    साध्वी सैल गोवा की रहने वाली हैं और उन्होंने अर्थशास्त्र तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शिक्षा प्राप्त की है। उनकी बहुभाषी क्षमता और सात भाषाओं का ज्ञान उनके व्यक्तित्व को और भी विशिष्ट बनाता है। यह उनकी अकादमिक और व्यक्तिगत विविधता को दर्शाता है।

    आयोजकों के अनुसार इस वर्ष की प्रतियोगिता अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक रही, जिसमें हर चरण में प्रतिभागियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। निर्णायकों ने चयन प्रक्रिया में व्यक्तित्व संतुलन, आत्मविश्वास और सामाजिक दृष्टिकोण को प्रमुख आधार बनाया।

    साध्वी सैल की जीत को युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। यह उपलब्धि विशेष रूप से छोटे राज्यों और क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं के लिए एक सकारात्मक संदेश देती है कि अवसर और सफलता किसी भौगोलिक सीमा पर निर्भर नहीं होते।

    अब साध्वी सैल आने वाले महीनों में Miss World 2027 की तैयारी में जुटेंगी, जहां वे भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व का प्रदर्शन करेंगी।

  • महिला आरक्षण बिल पर असफलता से बढ़ा सियासी तनाव, रूपाली गांगुली का तीखा बयान..

    महिला आरक्षण बिल पर असफलता से बढ़ा सियासी तनाव, रूपाली गांगुली का तीखा बयान..


    नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल को आवश्यक दो तिहाई बहुमत न मिलने के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से गरमा गया है। बिल के समर्थन में पर्याप्त संख्या में वोट न जुट पाने के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। प्रस्ताव के लिए जहां 352 वोटों की आवश्यकता थी, वहीं 298 वोट ही पक्ष में पड़ सके। इस परिणाम के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़ा यह मुद्दा फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है।

    इस घटनाक्रम पर टीवी अभिनेत्री और राजनीतिक रूप से सक्रिय रूपाली गांगुली ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस फैसले को लेकर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि जिस देश में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, वहां वास्तविक जीवन में उनके अधिकारों को लेकर अभी भी संघर्ष जारी है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक विफलता नहीं बल्कि सामाजिक असमानता का संकेत बताया।

    अपने संदेश में रूपाली गांगुली ने कहा कि महिला आरक्षण का उद्देश्य संसद और अन्य संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में समानता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से इस विषय पर चर्चा होती रही है लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। उनके अनुसार यह स्थिति महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सीमित करने वाली सोच को दर्शाती है।

    उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात तो अक्सर की जाती है लेकिन जब वास्तविक अवसर देने की बात आती है तो बाधाएं सामने आ जाती हैं। उनके अनुसार यह केवल एक कानून का मामला नहीं बल्कि सोच और व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं की भागीदारी किसी एक वर्ग या समूह का विषय नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास से जुड़ा हुआ प्रश्न है।

    रूपाली गांगुली ने अपने संदेश में अपने लोकप्रिय धारावाहिक का संदर्भ देते हुए कहा कि समाज में महिलाओं को अक्सर सीमित भूमिकाओं में देखने की प्रवृत्ति रही है। उन्होंने कहा कि वास्तविक जीवन में भी कई बार महिलाओं को यही संदेश दिया जाता है कि उनकी भूमिका सीमित है, जो बदलने की आवश्यकता है।

    इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक बड़ा अवसर मानते हैं, जबकि कुछ इसे संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बताते हैं। हालांकि यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण जैसे विषय पर देश में व्यापक सहमति अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।

  • बांसुरी स्वराज ने नारी शक्ति के सशक्तीकरण और प्रतिनिधित्व पर दिया जोर..

    बांसुरी स्वराज ने नारी शक्ति के सशक्तीकरण और प्रतिनिधित्व पर दिया जोर..


    नई दिल्ली:लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। इस बहस में भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने विधेयक का समर्थन करते हुए महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और विपक्ष पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की नारी शक्ति अब पहले से अधिक जागरूक और सक्षम है तथा उसे निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिलना चाहिए।

    अपने संबोधन में बांसुरी स्वराज ने कहा कि भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल एक नीति नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संतुलन की आवश्यकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका केवल मतदाता तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया में भी समान अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार जब महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं तो राजनीतिक क्षेत्र में भी उनकी भागीदारी को मजबूत करना समय की मांग है।

    बांसुरी स्वराज ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को लेकर जो आपत्तियां सामने आ रही हैं, वे उचित नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस दिशा में पहले सहमति बन चुकी थी तो अब इसके क्रियान्वयन में देरी क्यों की जा रही है। उनके अनुसार यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समान अधिकारों से जुड़ा है।

    उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसे किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए परिसीमन एक आवश्यक कदम है, जिससे प्रतिनिधित्व का संतुलन बेहतर बनाया जा सकता है।

    अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनसंख्या संरचना में समय के साथ बड़ा बदलाव आया है और ऐसे में संसदीय व्यवस्था में भी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

    बांसुरी स्वराज ने यह भी कहा कि महिला सशक्तीकरण को लेकर किसी प्रकार का भ्रम फैलाना उचित नहीं है और इस दिशा में उठाए गए कदमों को सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

  • महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, इसे बताया ऐतिहासिक और निर्णायक कदम..

    महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, इसे बताया ऐतिहासिक और निर्णायक कदम..

    नई दिल्ली:लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश की आधी आबादी को नीति निर्माण में समान भागीदारी देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उनके अनुसार ऐसे मौके बार-बार नहीं आते और इन्हें देश के भविष्य को मजबूत करने के लिए पूरी गंभीरता से लेना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रही है, और समय समय पर इसमें नए आयाम जुड़ते रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसा निर्णय देश की शासन व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाने में मदद करेगा। उनके अनुसार जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी होती है, तो नीतियां अधिक संतुलित और प्रभावी बनती हैं।

    उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास केवल आर्थिक प्रगति या बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक भागीदारी और समान अवसर भी शामिल हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में महिला आरक्षण को लेकर कई बार चर्चा हुई है और अलग अलग समय पर इसके विरोध के स्वर भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने मत और निर्णय के माध्यम से जवाब देती है और समय के साथ समाज की सोच भी बदलती है। उनके अनुसार महिलाओं की भागीदारी को लेकर देश में लगातार सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विधेयक केवल एक कानून नहीं बल्कि एक ऐसी शुरुआत है जो देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने कहा कि इससे आने वाले समय में महिलाओं की भूमिका और अधिक मजबूत होगी और शासन व्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार होगा।