Tag: Women Empowerment

  • प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा

    प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा


    नई दिल्ली/भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक पार्वती गिरि जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अदम्य साहसपूर्ण भूमिका और आजादी के बाद समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों को याद किया। स्वतंत्रता संग्राम की प्रखर नायिका प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पूर्व में ट्विटर पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि पार्वती गिरि जी ने विदेशी शासन के खिलाफ आंदोलन में बेहद सराहनीय भूमिका निभाई थी। मात्र 16 वर्ष की आयु में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी करने वाली पार्वती गिरि अपनी अटूट देशभक्ति के लिए जानी जाती हैं। उन्हें उनके सेवा भाव के कारण ‘ओडिशा की मदर टेरेसा’ के नाम से भी जाना जाता है।

    महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय कार्य प्रधानमंत्री ने पार्वती गिरि के सामुदायिक सेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण और संस्कृति के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उनके कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं। उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा को ही अपना धर्म माना। प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि उन्होंने पिछले महीने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम मन की बात में भी पार्वती गिरि जी के जीवन संघर्ष और उनकी महानता का विशेष उल्लेख किया था।   एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व पार्वती गिरि जी का जन्म 19 जनवरी 1926 को हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन अनाथों की सेवा और जेल सुधार जैसे रचनात्मक कार्यों में समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि उनकी जन्म शताब्दी पर देशवासी उनके आदर्शों को अपनाकर एक समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प लेंगे।

  • 55 साल की उम्र में सुनीता आहूजा कर रही हैं धमाल बोलीं– भूल गई हूं गोविंदा की पत्नी हूं

    55 साल की उम्र में सुनीता आहूजा कर रही हैं धमाल बोलीं– भूल गई हूं गोविंदा की पत्नी हूं


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा हमेशा अपने बेबाक और खुले अंदाज के लिए जानी जाती हैं। पिछले कुछ सालों से वह मीडिया और इंटरव्यूज में चर्चा में हैंलेकिन हाल ही में उन्होंने अपने जीवन और पहचान को लेकर एक खास खुलासा किया। सुनीता ने कहा कि अब वह 55 साल की उम्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैंऔर लोग उन्हें सिर्फ गोविंदा की पत्नी नहीं बल्कि सुनीता आहूजा के नाम से जानने लगे हैं।मिस मालिनी के साथ बातचीत में सुनीता ने बतायाआज मेरे नसीब ने 55 साल में नामइज्जत और शोहरत देने का मौका दिया है। लोग मुझे अब सुनीता आहूजा के नाम से जानते हैं। गोविंदा की पत्नी तो हूंयह सबको पता है। लेकिन मैंने अपनी भी तो पहचान बनानी है। यहां तक कि अब मैं भूल गई हूं कि मैं गोविंदा की पत्नी हूं! पति हैं लेकिन अपनी भी तो पहचान होनी चाहिए ना।

    सुनीता ने अपने उदाहरण में जया बच्चन को भी बताया। उन्होंने कहाजैसे जया जी को संसद में एक बार जया अमिताभ बच्चन कहकर बुलाया गया था। लेकिन वह जया भादुड़ी हैं! प्लीज सभी को यह समझना चाहिए कि उनके पास अमिताभ हैंलेकिन अपनी भी तो पहचान होनी चाहिए। दरअसलयह वह घटना थी जब जया बच्चन को उनके पति अमिताभ बच्चन के नाम से जोड़ा गया था और उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह अपने नाम और पहचान की वजह से अलग हैं।सुनीता आहूजा अब इसी रास्ते पर चल रही हैं। वह खुद को एक स्वतंत्र और पहचान बनाने वाली महिला के रूप में स्थापित करना चाहती हैं। उन्होंने अपने इंटरव्यूज में पति गोविंदा के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर भी बात की थीजिसके बारे में गोविंदा ने सफाई दी कि उनकी पत्नी किसी साजिश का शिकार हुई हैं।

    इस बीच सुनीता को उनके फैंस और मीडिया द्वारा मिली पहचान ने उन्हें और भी प्रेरित किया है। वह कहती हैं कि अब लोग उन्हें सिर्फ गोविंदा की पत्नी के रूप में नहीं देखतेबल्कि उनके अपने व्यक्तित्व और उपलब्धियों की वजह से जानते हैं। सुनीता का यह बेबाक अंदाज और अपने नाम के लिए जुझारूपन उन्हें और भी लोकप्रिय बनाता है।55 साल की उम्र में अपनी पहचान बनाने की यह कहानी बताती है कि उम्र कभी भी किसी की पहचान या महत्व को कम नहीं कर सकती। सुनीता आहूजा का यह उदाहरण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकता हैजो अपने जीवन में व्यक्तिगत पहचान बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

  • वर्ल्ड चैंपियन बनीं MP की ब्लाइंड बेटियां, लेकिन सम्मान से वंचित: न नौकरी, न इनाम-क्यों हो रहा दिव्यांग खिलाड़ियों से भेदभाव?

    वर्ल्ड चैंपियन बनीं MP की ब्लाइंड बेटियां, लेकिन सम्मान से वंचित: न नौकरी, न इनाम-क्यों हो रहा दिव्यांग खिलाड़ियों से भेदभाव?


    मध्य प्रदेश।  भारत ने जब पहला ब्लाइंड विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप जीता तो यह सिर्फ एक खेल जीत नहीं थी बल्कि जज़्बे संघर्ष औरआत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक कहानी थी। इस जीत में मध्य प्रदेश की तीन बेटियों-सुनीता सराठे नर्मदापुरम सुषमापटेल दमोह और दुर्गा येवले बैतूल-ने अहम भूमिका निभाई। लेकिन विडंबना देखिए कि वर्ल्ड चैंपियन बनने के बावजूदइन बेटियों को अपने ही राज्य में अब तक न सम्मान मिला न पुरस्कार और न ही नौकरी की कोई घोषणा।इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट में भारतीय टीम पूरे सफर में अजेय रही। फाइनल मुकाबले में भारत ने नेपाल को 7 विकेट सेहराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। खास बात यह रही कि जीत दिलाने वाले प्रदर्शन में MP की बेटियों का योगदान निर्णायक था। इसके बावजूद राज्य सरकार की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।

    दूसरे राज्यों ने बढ़ाया मान MP पीछे क्यों?
    जहां ओडिशा सरकार ने अपनी खिलाड़ियों को 11 लाख रुपए और सरकारी नौकरी कर्नाटक ने 10 लाख रुपए और नौकरीऔर आंध्र प्रदेश ने 15 लाख रुपए देने की घोषणा की वहीं मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ। हैरानी की बात यह है कि इन तीनों खिलाड़ियों का आंध्र प्रदेश में भव्य सम्मान हुआ। वहां के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने प्रत्येक खिलाड़ी को 5-5 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी। यानी दूसरे राज्य ने MP की बेटियों को वह सम्मान दिया जो उनका अपना राज्य नहीं दे सका।

    क्रांति को फोन आया इन बेटियों को अपॉइंटमेंट भी नहीं
    क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड मध्य प्रदेश के जनरल सेक्रेटरी और कोच सोनू गोलकर ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ वर्ल्ड कप जीतकर लौटीं तो नेताओं के फोन आए घोषणाएं हुईं। लेकिन इन दिव्यांग बेटियों के लिए एक अपॉइंटमेंट तक नहीं मिल रहा।गोलकर ने सवाल उठाया- क्या ये बेटियां सिर्फ इसलिए नजरअंदाज की जा रही हैं क्योंकि ये दिव्यांग हैं? अगर सम्मान नहीं मिला तो यह सीधा भेदभाव है। खिलाड़ियों का दर्द: फोन पर बधाई मिली मिलने कोई नहीं आया वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली ऑलराउंडर सुनीता सराठे कहती हैं मैंने दो विकेट लिए छह रन आउट किए लेकिन सरकार ने न बुलाया न सम्मानित किया। विधायक-सांसदों ने फोन पर बधाई दी पर मिलने कोई नहीं आया। दुर्गा येवले बताती हैं कि उन्होंने तीन रन आउट और दो स्टंपिंग की फिर भी सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हम गांव से हैं परिवार हम पर निर्भर है। अगर नौकरी मिल जाए तो ज़िंदगी बदल सकती है।

    सुषमा पटेल का कहना है-
    यह हमारा पहला वर्ल्ड कप था और हम ट्रॉफी लेकर लौटे। सामान्य खिलाड़ियों को तुरंत सम्मान मिलता है लेकिन हमारे साथ भेदभाव क्यों? दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग स्पोर्ट्स पॉलिसी की मांग कोच सोनू गोलकर का कहना है कि जब तक दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग और ठोस स्पोर्ट्स पॉलिसी नहीं बनेगी तब तक ऐसी अनदेखी होती रहेगी। अगर क्रांति गौड़ के लिए खजाना खुल सकता है तो इन बेटियों के लिए क्यों नहीं? अब सवाल साफ है-क्या वर्ल्ड चैंपियन बनना भी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए काफी नहीं? क्या सम्मान सिर्फ कुछ चुनिंदा चेहरों तक सीमित है?

  • महिलाएं अकेले ट्रैवल की हिम्मत जुटा रही हैं पहाड़ से समुद्र तक सफर के लिए जानें 7 जरूरी बातें

    महिलाएं अकेले ट्रैवल की हिम्मत जुटा रही हैं पहाड़ से समुद्र तक सफर के लिए जानें 7 जरूरी बातें


    नई दिल्ली । आजकल महिलाएं अकेले यात्रा करने में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो रही हैं। यह एक अद्भुत अनुभव हैजो न केवल नया उत्साह देता है बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। लेकिन जैसा कि हर नया अनुभव थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता हैखासकर जब अकेले सफर किया जा रहा होकुछ जरूरी बातें ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। अगर आप भी पहली बार अकेली यात्रा करने की सोच रही हैंतो यहां कुछ महत्वपूर्ण टिप्स दी गई हैंजो आपकी यात्रा को सहज और सुरक्षित बना सकती हैं।

    टिकट बुकिंग से शुरुआत करें

    अकेले ट्रैवल की शुरुआत भरोसेमंद तरीके से करें। चाहे फ्लाइट होट्रेन हो या बसहमेशा आधिकारिक वेबसाइट या भरोसेमंद ऐप से ही टिकट बुक करें। अपने टिकट और होटल बुकिंग की सारी जानकारी एक ही जगह पर रखें ताकि आप उन्हें तुरंत एक्सेस कर सकें। इसके अलावायात्रा के दौरान समयसीट और कैंसलेशन पॉलिसी को भी चेक कर लें।

     मदद लेने में हिचकिचाएं नहीं

    अगर आप अकेले सफर कर रही हैं और अजनबी जगह पर हैंतो यह जरूरी नहीं है कि आपको हर चीज खुद ही संभालनी हो। अगर आप रास्ता भूल जाएं या कोई दिक्कत होतो नजदीकी होटल स्टाफपुलिस या स्थानीय लोगों से मदद लेने में कोई बुराई नहीं है। हालांकिअपनी पर्सनल जानकारी को ज्यादा साझा न करें और किसी संदिग्ध व्यक्ति से बचकर रहें।

     डर पर काबू पाएं

    पहली बार अकेले यात्रा करने पर डर लगना स्वाभाविक हैलेकिन यह जरूरी है कि आप अपनी चिंता को शांत करें और अपने डर को काबू में रखें। याद रखेंलाखों महिलाएं अकेले यात्रा करती हैं और यह अनुभव उन्हें आत्मनिर्भर और मजबूत बनाता है। आप भी छोटे-छोटे कदम उठाकर इस यात्रा को सफल बना सकती हैं।

     बुरे हालात में शांत रहें

    यात्रा के दौरान कभी-कभी किसी चीज़ के खो जानेरास्ता भटकने या होटल ढूंढने में मुश्किल हो सकती है। ऐसे समय में शांत रहें और सोचे-समझे फैसले लें। यह भी जरूरी है कि आप स्थानीय मोबाइल नेविगेशन का इस्तेमाल करें या पुलिस हेल्पलाइन से संपर्क करें।

    खुद पर भरोसा रखें

    अकेले यात्रा करने से आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ती है। जब आप अकेले टिकट बुक करती हैंहोटल चेक-इन करती हैं और नए रास्ते पर चलती हैंतो आपको खुद पर विश्वास होता है। यह आत्मविश्वास आपकी अगली यात्रा को और भी आसान और मजेदार बना देगा।

     कोई परेशान करे तो तुरंत कदम उठाएं

    अगर यात्रा के दौरान कोई आपको परेशान करता है या गलत व्यवहार करता हैतो तुरंत कदम उठाएं। बिना झिझक के उस व्यक्ति से दूरी बनाएंपास के लोगों को बताएं और होटल या पुलिस को शिकायत करें। आजकल वुमन सेफ्टी ऐप्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता हैजो संकट के समय में सहायक होते हैं।

    कानून की जानकारी जरूरी है

    अकेले यात्रा करने से पहलेहमेशा स्थानीय और राष्ट्रीय कानूनों की जानकारी रखें। खासकर अगर आप विदेश यात्रा कर रही हैंतो विदेशी यात्रा नियमहेल्पलाइन नंबर 1121091 और सुरक्षा नियमों को पहले से जान लें। यह जानकारी आपको किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा का अहसास दिलाएगी।

    अकेले यात्रा करना न केवल एक रोमांचक अनुभव हैबल्कि यह आपके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को भी नया आकार देता है। सही तैयारी और सुरक्षा उपायों के साथमहिलाएं किसी भी यात्रा को सुरक्षित और आनंददायक बना सकती हैं। यदि आप पहली बार सोलो ट्रिप पर जा रही हैंतो इन 7 जरूरी बातों को ध्यान में रखें और अपनी यात्रा का पूरी तरह से आनंद लें।

  • मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर  50 लाख तक का लोन और सब्सिडी

    मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर 50 लाख तक का लोन और सब्सिडी


    भोपाल। 
    मध्यप्रदेश सरकार राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें व्यवसायिक रूप से प्रगति करने के लिए कई योजनाओं को लागू कर रही है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को रोजगार की तलाश तक सीमित न रखकर उन्हें उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करना है। इसके लिए सरकार उन्हें लोन ट्रेनिंग सब्सिडी और अन्य वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना रही हैं।

    महिलाओं के लिए उद्यमिता योजनाएं

    मध्यप्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए कई तरह की उद्यमिता योजनाएं शुरू की हैं जिनके जरिए महिलाएं अपने छोटे-से-व्यवसाय की शुरुआत कर सकती हैं। इन योजनाओं के तहत महिलाओं को न केवल व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन और सब्सिडी मिल रही है बल्कि उन्हें विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग भी दी जा रही है जिससे वे अपनी क्षमताओं को पहचान सकें और व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं से अवगत हो सकें।

    सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इन योजनाओं के तहत महिलाओं को एक मजबूत आर्थिक आधार प्रदान किया जाए। इसके लिए राज्य में कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जिसमें महिलाएं अपने कौशल को सुधार सकती हैं और विभिन्न उद्योगों में कदम रख सकती हैं। इसके अलावा सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए लोन के साथ-साथ मार्जिन मनी और सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी प्रदान कर रही है।

    ₹50 लाख तक का लोन और वित्तीय सहायता

    मध्यप्रदेश सरकार महिलाओं के लिए व्यवसाय स्थापित करने के लिए ₹50 लाख तक का लोन उपलब्ध करवा रही है। यह लोन उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराता है। इसके अलावा महिलाओं को रेडीमेड गारमेंट उद्योग जैसी क्षेत्रों में भी विशेष सहायता दी जा रही है जहां उन्हें प्रति माह ₹5000 की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। यह राशि महिलाओं को उनके व्यवसाय के संचालन में सहायक साबित हो रही है और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही है।

    इसके अतिरिक्त अक्टूबर 2025 तक MSME सूक्ष्म लघु और मझोले उद्योग क्षेत्र में 850 से अधिक इकाइयों को कुल ₹275 करोड़ की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। यह वित्तीय सहायता महिला उद्यमियों के लिए एक मजबूत आधार बनी है जो उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करती है।

    महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार के कदम

    मध्यप्रदेश सरकार ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए हैं। उदाहरण के लिए महिलाएं अब विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत स्वयं सहायता समूह बना सकती हैं और इन्हें सरकार से सहायता मिल सकती है। इसके अलावा महिलाओं को छोटे से लेकर बड़े स्तर तक व्यवसाय स्थापित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा समर्थन और मार्गदर्शन भी प्रदान किया जा रहा है।

    इसके साथ ही महिलाएं अब अधिक से अधिक व्यवसायों के लिए सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं जो न केवल उनकी व्यक्तिगत स्थिति को मजबूत कर रहे हैं बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह पहल महिलाओं को नए अवसरों की ओर मार्गदर्शन करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद कर रही है।

    मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक सकारात्मक कदम है। लोन ट्रेनिंग सब्सिडी और अन्य सुविधाओं के माध्यम से महिलाओं को व्यवसाय स्थापित करने का एक मजबूत मंच मिल रहा है। इससे न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है बल्कि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। सरकार की इस पहल से महिलाओं को रोजगार की दिशा में एक नई राह मिल रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।