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  • औरत को तारीफ नहीं सम्मान चाहिए इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर समाज के आईने में झांकती एक बात

    औरत को तारीफ नहीं सम्मान चाहिए इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर समाज के आईने में झांकती एक बात


    नई दिल्ली:हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में International Women’s Day मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के सम्मान अधिकार और उपलब्धियों की बात की जाती है। लेकिन सच यही है कि हर साल यह दिन हमें यह याद दिला देता है कि समाज अब भी औरत के असली वजूद को पूरी तरह समझ नहीं पाया है।

    हम अक्सर कहते हैं कि हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं हैं लेकिन इस वाक्य के भीतर ही एक छिपा हुआ सच है कि कहीं न कहीं हम अभी भी बराबरी को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाए हैं। जब हम कहते हैं कि औरत आजाद है तो इसका मतलब यह भी होता है कि उसकी आजादी अभी अधूरी है। जब हम कहते हैं कि बेटियों को भी पढ़ाना चाहिए उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए तो यह भी इस बात का संकेत है कि इस दिशा में अभी बहुत काम बाकी है।

    आज की महिला जीवन के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। राजनीति से लेकर विज्ञान खेल से लेकर सेना और कला से लेकर व्यापार तक महिलाएं हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि उसे बार बार खुद को साबित करने की जरूरत क्यों पड़ती है। समाज अक्सर किसी महिला की सफलता को तब स्वीकार करता है जब वह उन सीमाओं को पार कर लेती है जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों ने तय किया था। कई बार तो महिला की कामयाबी को इस तरह देखा जाता है जैसे उसने किसी पुरुष की भूमिका निभाकर यह उपलब्धि हासिल की हो।

    असल में हमें यह समझना होगा कि औरत केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समाज का ताना बाना है। परिवार रिश्तों और भावनाओं को जोड़कर रखने वाली सबसे मजबूत कड़ी अक्सर वही होती है। बचपन से अपने सपनों को सहेजने वाली और फिर अपनों की खुशियों के लिए उन्हें पीछे छोड़ देने वाली भी अक्सर वही होती है। बेटी के रूप में वह रहमत है मां के रूप में जन्नत है बहन के रूप में इज्जत है और दोस्त के रूप में भरोसा है।

    लेकिन समाज का दूसरा चेहरा भी उतना ही कड़वा है। महिलाओं के साथ हिंसा और अपमान की घटनाएं समय समय पर सामने आती रहती हैं। देश में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने पूरे समाज को झकझोर दिया। Manipur women parading case 2023 हो या Kanjhawala case 2023 Delhi जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। इसी तरह Bilkis Bano का मामला भी बार बार यह सवाल उठाता है कि न्याय और संवेदनशीलता के मामले में समाज कहां खड़ा है।

    समस्या की जड़ कहीं और भी है। हम अक्सर महिलाओं का सम्मान उनके रिश्तों के आधार पर करते हैं। हमें लगता है कि हमें अपनी मां बहन बेटी या पत्नी की ही इज्जत करनी चाहिए। लेकिन असली सम्मान तब होगा जब सड़क पर चलने वाली या दफ्तर में काम करने वाली हर महिला को वही सम्मान मिले जो हम अपने घर की महिलाओं को देते हैं।

    हमारी संस्कृति और साहित्य में भी कई बार औरत की खूबसूरती को केवल उसके चेहरे उसकी आंखों या उसकी जुल्फों तक सीमित कर दिया गया है। शायरियों और कविताओं में उसकी आंखों की गहराई और उसके होंठों की नाजुकी का खूब जिक्र मिलता है। इसमें कोई शक नहीं कि महिला की सुंदरता बेमिसाल होती है लेकिन उसकी असली पहचान केवल उसके रूप में नहीं बल्कि उसके व्यक्तित्व उसकी सोच उसकी मेहनत और उसकी संवेदनशीलता में होती है।

    आज की महिला शायद केवल तारीफ नहीं चाहती बल्कि सम्मान चाहती है। उसे यह एहसास चाहिए कि समाज उसे बराबरी की नजर से देखता है। क्योंकि सच यही है कि किसी महिला को खूबसूरत कहना अच्छी बात हो सकती है लेकिन उसकी इज्जत करना उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत है।

  • लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की किस्मत: घर से शुरू किया सिलाई काम, आज चला रहीं रोजगार देने वाला सेंटर

    लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की किस्मत: घर से शुरू किया सिलाई काम, आज चला रहीं रोजगार देने वाला सेंटर


    भोपाल ।मध्यप्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। इस योजना के माध्यम से कई महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नर्मदापुरम जिले की रहने वाली मंजू यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई हैं जिन्होंने योजना से मिली आर्थिक सहायता का सदुपयोग करते हुए अपनी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। आज वे न केवल आत्मनिर्भर बन चुकी हैं बल्कि अपने प्रयासों से अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर रही हैं।

    नर्मदापुरम जिले के वार्ड क्रमांक 31 दीवान चौक ग्वालटोली निवासी 30 वर्षीय मंजू यादव कभी सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने परिवार का सहारा बनने का सपना देखती थीं। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उनके लिए यह सपना पूरा करना आसान नहीं था लेकिन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई। जून 2023 से उन्हें इस योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने लगी जिससे उन्हें अपने भविष्य के लिए कुछ नया करने का आत्मविश्वास मिला।

    मंजू यादव ने योजना से प्राप्त राशि को खर्च करने के बजाय सोच समझकर उसका उपयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने घर से ही सिलाई का छोटा सा काम शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने धीरे धीरे इस छोटे से प्रयास को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। आसपास के लोगों से कपड़ों की सिलाई के ऑर्डर मिलने लगे और उनका काम लगातार बढ़ने लगा।

    फरवरी 2026 तक मंजू यादव को योजना की 33वीं किश्त सहित कुल 43 हजार 500 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो चुकी है। इस आर्थिक सहयोग और सिलाई के काम से हुए मुनाफे को उन्होंने अपने व्यवसाय के विस्तार में लगाया। उन्होंने सिलाई के लिए अतिरिक्त मशीनें खरीदीं और धीरे धीरे अपने काम को बढ़ाते हुए एक सिलाई सेंटर की शुरुआत कर दी। आज उनके सेंटर में पांच सिलाई मशीनें संचालित हो रही हैं और काम भी नियमित रूप से मिल रहा है।

    मंजू यादव की इस पहल का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि उन्होंने केवल खुद को ही आत्मनिर्भर नहीं बनाया बल्कि अपने सिलाई सेंटर के माध्यम से अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान किया है। उनके साथ काम करने वाली कई महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो रही है।

    मंजू यादव भावुक होकर बताती हैं कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास और उम्मीद जगाई है। इस योजना ने उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया। आज वे गर्व के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं और अपने काम के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दे रही हैं कि सही अवसर और थोड़े से सहयोग से महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

    उनकी सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि यदि योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए तो वे न केवल व्यक्तिगत जीवन में बदलाव ला सकती हैं बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन की राह खोल सकती हैं।

  • सीएम रेखा गुप्ता का संदेश: बेटियों को अवसर और आजादी दें, समाज और परिवार भी उठाएं जिम्मेदारी

    सीएम रेखा गुप्ता का संदेश: बेटियों को अवसर और आजादी दें, समाज और परिवार भी उठाएं जिम्मेदारी

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन ‘भारती-नारी से नारायणी’ को संबोधित करते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर परिवार और समाज की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए लगातार योजनाएं चला रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें, लेकिन समाज को भी बेटियों को अवसर और आजादी देने की जिम्मेदारी उठानी होगी।

    सीएम रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने लाल किले से खुले में शौच बंद करने और शौचालय बनाने की बात की। इससे पहले समाज और राजनीति में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया था। प्रधानमंत्री की पहल से लाखों शौचालय बनाए गए और महिलाओं का जीवन आसान हुआ। पहले महिलाओं को घर में अंगीठी पर लकड़ी जलानी पड़ती थी, लेकिन अब गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनका जीवन सुरक्षित और आरामदायक हुआ।

    उन्होंने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक अधिकार भी दिए जाने का जिक्र किया। चाहे बैंक अकाउंट खोलना हो, मुद्रा लोन लेना हो, महिलाओं के नाम घर देना हो या राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण देना हो, सरकार और प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के लिए नए रास्ते खोले हैं।

    रेखा गुप्ता ने दिल्ली सरकार की नई योजना ‘लखपति बिटिया योजना’ का भी उल्लेख किया। इस योजना के तहत बेटी की शिक्षा को ग्रेजुएशन तक पूरा करने पर उसके खाते में जन्म से लेकर हर पड़ाव पर पैसा जमा किया जाएगा, जिससे लगभग सवा लाख रुपये तक की राशि बेटी को मिल सकेगी और वह आत्मनिर्भर बन सके। पहले यह योजना केवल दसवीं तक ही सीमित थी।

    सीएम ने समाजसेवा और महिलाओं की मदद के लिए काम करने वाले संगठनों, जैसे सेविका समिति का समर्थन करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने माता-पिता से कहा कि अपनी बेटियों को हर अवसर और निर्णय लेने की आजादी दें। जो मौके आपको नहीं मिले, वह अपनी बेटी को जरूर दें। जब हर मां अपनी बेटी के लिए रास्ता बनाएगी, तो समाज भी अपने आप ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला सशक्तीकरण केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं है। परिवार, समाज और संगठन मिलकर ही महिलाओं को वास्तविक अवसर और आजादी दे सकते हैं। तभी कोई महिला अपनी क्षमता और सोच के अनुसार किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती है।

    सीएम रेखा गुप्ता का यह संदेश महिलाओं के अधिकारों और समाज की भूमिका को उजागर करता है और हर स्तर पर महिला सशक्तीकरण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

  • जूट बैग, सिलाई और हस्तशिल्प से महिलाओं का आत्मनिर्भर सफर, प्रधानमंत्री योजना कारगर

    जूट बैग, सिलाई और हस्तशिल्प से महिलाओं का आत्मनिर्भर सफर, प्रधानमंत्री योजना कारगर

    उत्तराखंड के पर्वतीय जनपद चमोली में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक पहल देखने को मिल रही है। भारत सरकार की ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना’ के तहत महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपना व्यवसाय चला रही हैं। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें समाज में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाना है।

    चमोली में इस योजना के माध्यम से अब तक 200 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को जूट बैग निर्माण, सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने की विधिवत जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से या व्यक्तिगत स्तर पर अपने व्यवसाय शुरू कर रही हैं। इससे न सिर्फ उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी इजाफा हुआ है।

    महिलाओं का कहना है कि इस योजना ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। अब वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में सक्रिय योगदान दे रही हैं। प्रशिक्षण से महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं और नियमित आमदनी प्राप्त कर रही हैं। इसके साथ ही उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन से संबंधित जानकारी भी दी जा रही है, ताकि उनका उत्पाद व्यापक बाजार में पहुंच सके।

    लाभार्थी सीमा नेगी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान मुफ्त सिलाई सीखी और अब सिलाई मशीन से जूट बैग बना रही हैं। इसके अलावा वे महिलाओं के सूट और ब्लाउज सिलने का काम भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में सरकार की यह पहल बहुत महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण लेने के बाद महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं और किसी पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है।

    चमोली में इस योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं ने अपनी मेहनत और लगन से छोटे व्यवसाय स्थापित कर लिए हैं। जूट बैग और हस्तशिल्प उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे उन्हें नियमित आय मिल रही है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और परिवार में उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। महिलाएं अब अपने व्यवसाय को विकसित कर रही हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का यह कदम महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद और उत्साह लेकर आया है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि समाज में उनके स्थान और सम्मान में भी वृद्धि हुई है। प्रशिक्षण से प्राप्त कौशल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखाया है और उन्होंने इसे पूरी लगन से अपनाया है।

    चमोली में महिलाओं की इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बन रही है। यह योजना न सिर्फ रोजगार सृजन कर रही है, बल्कि ग्रामीण समाज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत कर रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

  • एमपी बजट 2026‑27: 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री, 15,000 शिक्षक भर्ती, लाड़ली बहनों के लिए 23,882 करोड़ का बड़ा प्रावधान

    एमपी बजट 2026‑27: 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री, 15,000 शिक्षक भर्ती, लाड़ली बहनों के लिए 23,882 करोड़ का बड़ा प्रावधान


    भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2026‑27 का बजट ₹4,38,317 करोड़ के प्रावधान के साथ पेश किया, जिसे सरकार गरीब, महिला, युवा, किसान और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित बताया। इस बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है और शिक्षा, महिला सशक्तिकरण व पोषण जैसे कई बड़े लाभार्थी कदम उठाए गए हैं।

    सबसे बड़ा ऐलान लाड़ली बहना योजना के लिए ₹23,882 करोड़ के भारी प्रावधान का रहा, जिससे महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता जारी रहेगी। योजना के तहत लगभग 1.25 करोड़ महिलाएं प्रतिमाह ₹1,500 की राशि पा रही हैं और सरकार ने इसे प्राथमिकता देने की बात कही।

    शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने घोषणा की कि 8वीं कक्षा तक के सभी बच्चों को सरकारी स्कूलों में टेट्रा पैक दूध मुफ्त मिलेगा, जिससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार होगा और स्कूल उपस्थिति भी बढ़ेगी। इसके साथ ही 15,000 नए शिक्षकों की भर्ती की घोषणा कर शिक्षा तंत्र को और मजबूत किए जाने का लक्ष्य रखा गया।

    बजट में 5,700 वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाये जाने का प्रावधान किया गया है, जिससे कामकाजी महिलाओं को बेहतर आवास सुविधाएं मिल सकें, और पंचायत एवं ग्रामीण विकास के लिए लगभग ₹40,062 करोड़ आवंटित किया गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास व बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में कदम है।

    सरकार ने किसानों के लिए भी बड़े ऐलान किए। बजट में 1 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है, जिससे विद्युत लागत बचाने और सिंचाई क्षमताओं का विस्तार करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा जी‑राम‑जी योजना और पीएम जनमन योजना के लिए भी करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है।

    वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि यह बजट “PM के सपनों को साकार करने वाला बजट” और हर नारी को न्याय देने वाला है, जिससे प्रदेश को युवा, रोजगार और महिला सशक्तिकरण की नई दिशा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह पहला “रोलिंग बजट” है, जिसमें अगले तीन वित्तीय वर्षों के लिए योजनाएं शामिल की गई हैं।

    बजट पेश करते समय विधानसभा में विपक्ष के कुछ विधायकों ने विधायक निधि नहीं बढ़ाये जाने पर हंगामा भी किया। कांग्रेस विधायकों ने कर्ज बढ़ने की चिंता जताते हुए खाली डिब्बे और गुल्लक लेकर विरोध प्रदर्शन किया और बजट पर सवाल उठाये।

    कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश का यह बजट शिक्षा, पोषण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास पर बड़ी योजनाओं के साथ अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक कल्याण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी रूपरेखा पेश करता है।

  • लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सम्मान और स्मरण

    लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सम्मान और स्मरण


    नई दिल्ली । आज 13 फरवरी 2026 को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने हमारे देश की महान स्वतंत्रता सेनानी कवयित्री तथा समाज सुधारक श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर गहरी श्रद्धा व्यक्त की। इस भावपूर्ण कार्यक्रम में राज्य सभा के उपसभापति श्री हरिवंश कई संसद सदस्य पूर्व सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और उन्होंने भी सरोजिनी नायडू को याद करते हुए उनके योगदान को सम्मान दिया।

    लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सरोजिनी नायडू ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रखर भूमिका निभाई बल्कि उन्होंने अपनी कविताओं वक्तृत्व और महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किया। उन्हें भारत कोकिला के नाम से भी संबोधित किया जाता है जो उनकी साहित्यिक प्रतिभा और देशभक्ति की भावना का प्रतीक है।

    उपस्थित गणमान्य लोगों की मौजूदगी से सजी संविधान सदन की केंद्रीय कक्ष में पुष्पांजलि अर्पण की यह रस्म बेहद गंभीर और सम्मानपूर्वक संपन्न हुई। लोक सभा महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह ने भी श्रीमती सरोजिनी नायडू के चित्र पर श्रद्धांजलि दी जबकि कई सांसदों ने उनके जीवन विचारों और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला।

    सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। वे एक प्रतिभाशाली वक्ता सुप्रसिद्ध कवयित्री और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थीं जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। उनके नेतृत्व लेखन और देशप्रेम ने महिलाओं के शिक्षा और सशक्तिकरण को एक नई दिशा प्रदान की। उन्होंने दिल्ली में लेडी इरविन कॉलेज फॉर विमेन की स्थापना की जिससे उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिला।

    स्वतंत्रता के बाद श्रीमती सरोजिनी नायडू ने संयुक्त प्रांत अब उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल के रूप में भी सेवा की। उनका जीवन देश की सेवा के प्रति समर्पण और समाज की भलाई के लिए निरंतर प्रयास का आदर्श रहा है। वे महिलाओं के अधिकारों और समानता की प्रबल समर्थक थीं जिनके विचार आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

    विशेष रूप से यह भी उल्लेखनीय है कि पहले भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 16 दिसंबर 1959 को संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सरोजिनी नायडू के चित्र का अनावरण किया था जो उनके योगदान और स्मरण को स्थायी रूप से सम्मानित करता है।

    इस अनुष्ठान में सदन के नेताओं ने उनके साहित्यिक सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए कहा कि सरोजिनी नायडू का जीवन और कार्य भारतीय जनता के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल उनके स्मरण को सम्मान दिया बल्कि यह याद दिलाया कि स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के प्रति उनके आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी श्रद्धांजलि देश सेवा, साहित्य और महिला सशक्तिकरण की अद्वितीय प्रतिष्ठा को किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी श्रद्धांजलि देश सेवा, साहित्य और महिला सशक्तिकरण की अद्वितीय प्रतिष्ठा को किया नमन


    भोपाल । मध्य प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी कवयित्री समाजसेवी और राजनीति की प्रखर हस्ती भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज उन्हें गहन श्रद्धा और सम्मान के साथ नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरोजिनी नायडू ने अपने जीवन को न केवल भारत की आजादी के संघर्ष के लिए समर्पित किया बल्कि साहित्यिक प्रतिभा और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी अपरिमेय योगदान दिया।

    मुख्यमंत्री के अनुसार सरोजिनी नायडू न केवल एक बड़ा कवि और स्वतंत्रता सेनानी थीं बल्कि उन्होंने महिलाओं को शिक्षा नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सरोजिनी नायडू का जीवन आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनकी कविताएँ तथा विचार सदैव राष्ट्र सेवा की भावना को उज्जवल बनाते रहेंगे।

    चर्चाओं में आज सरोजिनी नायडू का नाम भारत की कोकिला के रूप में विदित है जिन्होंने अंग्रेज़ों के शासन के विरोध में अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कांग्रेस के कई महत्वपूर्ण अधिवेशनों में भाग लिया और 1925 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष भी बनीं। स्वतंत्रता के पश्चात् वे उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल भी रहीं और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में याद की जाती हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से कहा कि सरोजिनी नायडू की कविताओं में देशभक्ति मानवीय संवेदनाओं और महिला अधिकारों की गूढ़ अभिव्यक्ति है जो आज भी युवाओं के हृदय में उमंग भरती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के उत्थान शिक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और सरोजिनी नायडू के आदर्शों को अपनाते हुए हर स्तर पर महिला सशक्तिकरण को और भी व्यापक बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरोजिनी नायडू के विचार उनकी लेखनी और मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण हम सबके लिए प्रेरणा के अनंत स्रोत हैं। आज हम उनके बलिदान और योगदान को नमन करते हैं और आशा करते हैं कि आने वाली पीढ़ियाँ भी उनके सिद्धांतों से प्रेरित होंगी।

  • मध्य प्रदेश का महाबजट तैयार, 4.70 लाख करोड़ के करीब आकार; 18 फरवरी को विधानसभा में होगा पेश

    मध्य प्रदेश का महाबजट तैयार, 4.70 लाख करोड़ के करीब आकार; 18 फरवरी को विधानसभा में होगा पेश


    भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार इस बार राज्य का बजट आकार करीब 4.70 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 4.21 लाख करोड़ रुपये के बजट से लगभग 12 प्रतिशत अधिक होगा। बजट 18 फरवरी को विधानसभा में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश की आर्थिक दिशा और विकास की प्राथमिकताएं स्पष्ट होंगी।

    बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बजट का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। बैठक में विकास योजनाओं वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति पर विशेष चर्चा हुई। सरकार इस बार राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने पर खास जोर दे रही है ताकि राज्य की वित्तीय स्थिति संतुलित और मजबूत बनी रहे। वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ विकास की रफ्तार बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती और प्राथमिकता दोनों है।

    सूत्रों के मुताबिक इस बार पूंजीगत व्यय कैपिटल एक्सपेंडिचर में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। इसका सीधा असर बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ेगा। सड़क पुल सिंचाई परियोजनाएं शहरी अधोसंरचना शिक्षा संस्थानों का विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर बड़े निवेश की तैयारी है। सरकार का मानना है कि पूंजीगत निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

    विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ हो रहा है। इस दौरान बजट प्रस्तुति के अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत विषयों पर चर्चा होगी। यह बजट मोहन यादव सरकार का तीसरा प्रमुख बजट माना जा रहा है जिससे जनता और विभिन्न वर्गों को काफी उम्मीदें हैं।

    सरकार के संकेत हैं कि इस बजट में किसान कल्याण योजनाओं को मजबूती दी जाएगी। कृषि क्षेत्र में तकनीकी सुधार सिंचाई विस्तार और समर्थन मूल्य से जुड़ी व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के लिए प्रावधान बढ़ने की संभावना है। युवाओं के लिए कौशल विकास स्टार्टअप प्रोत्साहन और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाने जैसे कदम भी बजट का हिस्सा बन सकते हैं।

    ग्रामीण विकास पेयजल बिजली और आवास योजनाओं के लिए भी पर्याप्त राशि आवंटित किए जाने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि यह बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का मॉडल पेश करेगा और प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा। अब निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हैं जब विधानसभा में इस ‘महाबजट का औपचारिक ऐलान होगा।

  • सशक्त बेटी, समृद्ध मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटियों को दी शुभकामनाएं

    सशक्त बेटी, समृद्ध मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटियों को दी शुभकामनाएं


    भोपाल । राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की सभी बेटियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। मुख्यमंत्री ने बेटियों को राष्ट्र और समाज की आधारशिला बताते हुए उनके सशक्तिकरण के प्रति अपनी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। शनिवार 24 जनवरी को जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बेटियाँ केवल हमारे घरों की रौनक ही नहीं बल्कि हमारी गौरवशाली संस्कृति मानवीय संवेदनाओं और भविष्य के उज्ज्वल भारत की नींव हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जब बेटियों को सही शिक्षा सुरक्षा और समान अवसर मिलते हैं तो वे अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्र को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का सामर्थ्य रखती हैं।

    बेटियां हमारी संस्कृति और भविष्य की आधारशिला

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालिकाओं के आत्मविश्वास को बढ़ावा देते हुए कहा आज हमारी बेटियां शिक्षा और तकनीक से लेकर खेल के मैदान तक हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं। मैं कामना करता हूँ कि वे पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार करें। मध्य प्रदेश सरकार हर बेटी को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित है।

    मध्य प्रदेश: बेटियों के लिए अनुकूल नीतियां

    मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि राज्य सरकार लाड़ली लक्ष्मी जैसी अभिनव योजनाओं के माध्यम से बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा और विवाह तक सहायता सुनिश्चित कर रही है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां हर बालिका स्वयं को सुरक्षित महसूस करे और उसे विकास के पर्याप्त अवसर मिलें। राष्ट्रीय बालिका दिवस के इस मौके पर प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से बेटियों के अधिकारों, उनके पोषण और शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा

    प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा


    नई दिल्ली/भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक पार्वती गिरि जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अदम्य साहसपूर्ण भूमिका और आजादी के बाद समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों को याद किया। स्वतंत्रता संग्राम की प्रखर नायिका प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पूर्व में ट्विटर पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि पार्वती गिरि जी ने विदेशी शासन के खिलाफ आंदोलन में बेहद सराहनीय भूमिका निभाई थी। मात्र 16 वर्ष की आयु में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी करने वाली पार्वती गिरि अपनी अटूट देशभक्ति के लिए जानी जाती हैं। उन्हें उनके सेवा भाव के कारण ‘ओडिशा की मदर टेरेसा’ के नाम से भी जाना जाता है।

    महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय कार्य प्रधानमंत्री ने पार्वती गिरि के सामुदायिक सेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण और संस्कृति के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उनके कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं। उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा को ही अपना धर्म माना। प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि उन्होंने पिछले महीने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम मन की बात में भी पार्वती गिरि जी के जीवन संघर्ष और उनकी महानता का विशेष उल्लेख किया था।   एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व पार्वती गिरि जी का जन्म 19 जनवरी 1926 को हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन अनाथों की सेवा और जेल सुधार जैसे रचनात्मक कार्यों में समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि उनकी जन्म शताब्दी पर देशवासी उनके आदर्शों को अपनाकर एक समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प लेंगे।