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  • मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महिला सशक्तिकरण और योजनाओं पर करेंगे संबोधन…

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महिला सशक्तिकरण और योजनाओं पर करेंगे संबोधन…


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 15 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अभियान के अंतर्गत एक भव्य और वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन शहर के प्रतिष्ठित रवींद्र भवन में संपन्न होगा, जहां राज्य के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहकर संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक भागीदारी और उनके समग्र विकास की दिशा में सरकार की योजनाओं और प्रयासों को जन-जन तक पहुंचाना है।

    यह कार्यक्रम नारी शक्ति वंदन पखवाड़े का हिस्सा है, जो 25 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में विभिन्न गतिविधियों के साथ मनाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से महिलाओं के उत्थान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान को केंद्र में रखते हुए कई स्तरों पर जागरूकता और लाभकारी योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। राजधानी में होने वाला यह मुख्य कार्यक्रम इस पूरे अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नारी सशक्तिकरण पर विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। सरकार का मानना है कि बेटियों और बहनों का विकास ही समाज और प्रदेश के समग्र विकास की आधारशिला है। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि राज्य सरकार महिलाओं के हित में किस प्रकार निरंतर कार्य कर रही है।

    राज्य सरकार द्वारा लाडली बहना योजना को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। इस योजना के तहत प्रदेश की बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं। अब तक इस योजना के माध्यम से करोड़ों की राशि सीधे महिलाओं के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है, जिससे इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

    नारी शक्ति वंदन पखवाड़े के दौरान राज्यभर में जागरूकता कार्यक्रम, संवाद सत्र और विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देना ही नहीं बल्कि उन्हें समाज के हर क्षेत्र में समान भागीदारी के लिए प्रेरित करना भी है। इसी क्रम में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की दिशा में भी चर्चा और पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और निरंतर ऐसी नीतियां लागू की जा रही हैं जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए। इस आयोजन को प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की गंभीरता और संकल्प का प्रतीक माना जा रहा है।

  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में किया महत्वपूर्ण योगदान।

    प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में किया महत्वपूर्ण योगदान।


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 11 साल पूरे होने के अवसर पर इस योजना को देश की युवा और नारी शक्ति के लिए क्रांतिकारी बताया है। 8 अप्रैल 2015 को शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य देश के बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना ने न केवल नए उद्यमियों को सशक्त किया है, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन और आर्थिक समावेशन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि मुद्रा योजना की सफलता का रहस्य इसकी सुलभता और वित्तीय समावेशन में निहित है। बिना गिरवी के ऋण उपलब्ध कराकर इसने अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम की है और जमीनी स्तर पर ऋण अनुशासन को मजबूत किया है। योजना के माध्यम से पहली बार उद्यमिता की ओर बढ़ने वाले लोग, विशेषकर महिलाएं और वंचित समुदाय, अब अपने छोटे व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। इससे सूक्ष्म व्यवसायों का विकास हुआ है और धीरे-धीरे ये अनौपचारिक उद्यम भारत की औपचारिक आर्थिक संरचना का हिस्सा बन रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मुद्रा योजना ने युवा शक्ति और नारी शक्ति पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यह योजना अवसर सुलभ करने, नई पहलों को प्रोत्साहित करने और हर सपने को साकार करने के लिए समर्थन देने वाली आर्थिक सोच की मिसाल है। बीते 11 वर्षों में इस योजना ने करोड़ों युवाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाया है और देश में रोजगार सृजन की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    मुद्रा योजना के अंतर्गत अब तक कुल 52.37 करोड़ खाते खोले गए हैं और लगभग 33.65 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी का लोन प्रदान किया गया है। लाभार्थियों में करीब 70 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि कुल लाभार्थियों में 50 प्रतिशत एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग शामिल हैं। यह आंकड़े इस योजना की व्यापक पहुंच और समाज के हर वर्ग में आर्थिक सशक्तिकरण की सफलता को दर्शाते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना ने बेरोजगार युवाओं को जॉब सीकर्स की भूमिका से जॉब क्रिएटर्स की दिशा में आगे बढ़ाया है। छोटे ऋण और स्थानीय विचारों के जरिए युवा उद्यमियों ने अपने व्यवसाय शुरू किए हैं और आर्थिक परिवर्तन की नींव मजबूत की है। इससे छोटे उद्यमों का विकास हुआ है, स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं और देश की अर्थव्यवस्था की जमीनी संरचना मजबूत हुई है।

    मुद्रा योजना ने महिलाओं और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। इससे न केवल आर्थिक रूप से उनका सशक्तिकरण हुआ है, बल्कि समाज में उनके महत्व और नेतृत्व की भावना भी बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना ने चुपचाप भारत की अर्थव्यवस्था की नींव को नया आकार दिया है और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।

  • भारत मंडपम में अमृत मित्र महोत्सव: महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास का संगम

    भारत मंडपम में अमृत मित्र महोत्सव: महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास का संगम


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में 13 मार्च को आयोजित होने वाले अमृत मित्र महोत्सव में देशभर से स्व-सहायता समूह की महिलाएँ शामिल होंगी। मध्यप्रदेश की लगभग 300 महिलाएँ इस राष्ट्रीय मंच पर अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए भाग लेंगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि राज्य के 55 नगरीय निकायों में 312 स्व-सहायता समूहों की 1 028 महिलाओं को अमृत मित्र के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन महिलाओं ने जल गुणवत्ता परीक्षण सार्वजनिक उद्यानों के रख-रखाव और केंद्र सरकार के पेड़ों के लिए महिलाएं कार्यक्रम के तहत पौधरोपण एवं सुरक्षा के कार्यों को सफलतापूर्वक निभाया है।

    यह महोत्सव भारत मंडपम नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है और इसमें उत्तर प्रदेश हरियाणा महाराष्ट्र राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों से भी अमृत मित्र महिलाएँ सम्मिलित होंगी। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता देना और शहरी विकास में उनके योगदान को रेखांकित करना है।

    केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर इस अवसर पर जल संरक्षण स्वच्छता और शहरी प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मानित करेंगे। यह न केवल महिलाओं की उपलब्धियों को पहचान देगा बल्कि महिला नेतृत्व के माध्यम से सतत शहरी विकास की संकल्पना को भी सुदृढ़ करेगा।

    आयुक्त संकेत भोंडवे ने नई दिल्ली जा रही सभी अमृत मित्र महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल शहरी विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश की महिलाएँ इस राष्ट्रीय मंच पर राज्य के नवाचारों और उत्कृष्ट कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी।

    अमृत मित्र पहल के तहत महिलाएँ केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय मंच पर भी शहरी विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभा रही हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण और शहरी प्रबंधन के संगम का प्रतीक बनकर सामने आई है। आयोजन में सहभागिता से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा और शहरी क्षेत्रों में सतत विकास के लिए उनका नेतृत्व और अधिक सशक्त होगा।

  • सास बहू से देवरानी जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से चमक रहा छिंदवाड़ा का ग्रामीण पर्यटन

    सास बहू से देवरानी जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से चमक रहा छिंदवाड़ा का ग्रामीण पर्यटन


    छिंदवाड़ा । छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्राम धीरे धीरे एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। सास बहू मां बेटी या देवरानी जेठानी जैसे रिश्ते अब केवल पारिवारिक संबंध नहीं बल्कि ग्रामीण पर्यटन की नई ताकत बन गए हैं। ग्राम धूसावानी में श्रीमती मनेशी धुर्वे और उनकी सास श्रीमती अलका धुर्वे इस बदलाव की मिसाल हैं। दोनों मिलकर अपने होम स्टे में पर्यटकों का स्वागत करती हैं भोजन तैयार करती हैं और पूरे उत्साह के साथ मेहमाननवाजी करती हैं।

    सावरवानी गांव में भी श्रीमती मालती यदुवंशी अपनी सास श्रीमती शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम स्टे का संचालन कर रही हैं। यह केवल दो परिवारों की कहानी नहीं बल्कि पूरे जिले में ग्रामीण पर्यटन में महिलाओं की भागीदारी की एक जीवंत तस्वीर है। इन होम स्टे से महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता तो मिल रही है साथ ही रिश्तों में विश्वास और सहयोग का नया आयाम भी देखने को मिल रहा है।

    छिंदवाड़ा जिला अब मध्यप्रदेश के उन जिलों में शामिल है जहाँ सबसे अधिक होम स्टे संचालित हैं। जिले में लगभग 50 से अधिक होम स्टे हैं और इन सबका पंजीकरण महिलाओं के नाम पर है। संचालन की ज़िम्मेदारी भी अधिकांशतः महिलाएं ही संभालती हैं। सावरवानी चोपना काजरा देवगढ़ चिमटीपुर गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में महिलाएं स्थानीय संस्कृति खानपान और आतिथ्य के हर पहलू को संभाल रही हैं।

    पर्यटक इन होम स्टे में आने पर केवल ठहरने नहीं आते बल्कि ग्रामीण जीवन और संस्कृति के करीब से अनुभव करते हैं। महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक व्यंजन तैयार करती हैं लोकनृत्य और लोकगायन से उन्हें क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती हैं। इससे पर्यटकों को ग्रामीण अनुभव मिलता है और महिलाओं को आर्थिक सम्मान भी प्राप्त होता है।

    सास बहू मां बेटी देवरानी जेठानी जैसे रिश्तों की यह साझेदारी ग्रामीण पर्यटन के लिए नई पहचान बन गई है। महिलाएं स्वागत से लेकर भोजन आवास और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रबंधन तक पूरी जिम्मेदारी लेती हैं। यह पहल साबित कर रही है कि परिवार की महिलाएं मिलकर केवल घर ही नहीं बल्कि पूरे गांव की विकास यात्रा को आगे बढ़ा सकती हैं।

    स्थानीय लोग मानते हैं कि होम स्टे की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों का और विस्तार होने की संभावनाएं भी उज्ज्वल दिखाई दे रही हैं। छिंदवाड़ा का यह ग्रामीण पर्यटन मॉडल यह दिखाता है कि रिश्तों का सहयोग और विश्वास नई आर्थिक और सामाजिक दिशा में कैसे बदल सकता है।

  • महिलाओं की स्थिति से तय होती है राष्ट्र की प्रगति: न्यायाधीश दिलीप गुप्ता

    महिलाओं की स्थिति से तय होती है राष्ट्र की प्रगति: न्यायाधीश दिलीप गुप्ता


    भिण्ड। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले में महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय अस्मिता खेल कार्यक्रम का आयोजन राजीव गांधी स्टेडियम में किया गया। कार्यक्रम में जिलेभर से आई महिलाओं और छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और खेल गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पूरे आयोजन में ऊर्जा, उत्साह और आत्मविश्वास का माहौल देखने को मिला।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कुटुम्ब न्यायालय के न्यायाधीश दिलीप गुप्ता द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित महिलाओं और छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक आकलन वहां की महिलाओं की स्थिति से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी समाज में महिलाएं शिक्षित, सुरक्षित और सशक्त हैं तो वह समाज निश्चित रूप से विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता है।

    न्यायाधीश दिलीप गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के संघर्ष, साहस और उनकी असीम क्षमताओं को सम्मान देने का दिन है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी महिलाओं को अवसर मिला है, उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से हर क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की हैं।

    उन्होंने आगे कहा कि समाज की धुरी नारी है और उसके बिना किसी भी परिवार, समाज या राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। आज महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि न्यायपालिका, प्रशासन, शिक्षा, विज्ञान, खेल और रक्षा सहित हर क्षेत्र में अपनी योग्यता और क्षमता का लोहा मनवा रही हैं। उन्होंने छात्राओं और महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर जीवन में आगे बढ़ें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की भागीदार बनें।

    कार्यक्रम के दौरान विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिनमें छात्राओं और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने अपनी खेल प्रतिभा और टीम भावना का शानदार प्रदर्शन किया। आयोजन का उद्देश्य महिलाओं में खेल भावना को बढ़ावा देना, आत्मविश्वास विकसित करना और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से सशक्त बनाना था।

    इस अवसर पर जिला प्रशासन के अधिकारी, खेल विभाग के प्रतिनिधि, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्राएं और महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंत में प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया।

    आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं और समाज में उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को मजबूत करते हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम महिलाओं के सम्मान, समानता और सशक्तिकरण के संदेश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर दी मातृशक्ति को हार्दिक बधाई

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर दी मातृशक्ति को हार्दिक बधाई


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी महिलाओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने महिलाओं की समाज देश और परिवार में भूमिका को सराहा और कहा कि महिलाएं हर चुनौती का सामना साहस और धैर्य के साथ करती हैं। उन्होंने मातृशक्ति के योगदान को अद्भुत बताते हुए कहा कि देश की प्रगति समाज की मजबूती और परिवार की खुशहाली में महिलाओं का योगदान अनमोल है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि आज की महिलाएं शिक्षा स्वास्थ्य खेल कला विज्ञान और प्रशासन सभी क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। महिलाएं केवल घर या पारिवारिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रह गई हैं बल्कि हर क्षेत्र में अपनी क्षमताओं और प्रतिभा का परिचय दे रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं के प्रयासों और संघर्षों को नमन किया जाना चाहिए क्योंकि उनके बिना समाज का संतुलन अधूरा है।

    डॉ. यादव ने यह भी कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। महिला स्वास्थ्य शिक्षा सुरक्षा रोजगार और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि महिलाएं इन अवसरों का लाभ उठाकर अपने जीवन को और अधिक सशक्त और स्वतंत्र बनाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने महिलाओं से आह्वान किया कि वे हर चुनौती को अवसर में बदलें समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्रिय भूमिका निभाएं और नई मिसाल कायम करें। उन्होंने कहा कि महिला दिवस केवल समारोह या एक दिन की प्रतिबद्धता नहीं है बल्कि यह महिलाओं के सम्मान उनके अधिकारों और उनके योगदान की सराहना का दिन है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करें और उनके विकास में सहयोग दें।

    डॉ. यादव ने अपने संदेश में विशेष रूप से महिलाओं की बहुआयामी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार की रीढ़ होती हैं समाज की दिशा निर्धारित करती हैं और राष्ट्र की शक्ति का आधार होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं का हर क्षेत्र में योगदान प्रेरणादायक है और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके प्रयासों को उचित मान्यता और सम्मान मिले।

    अंत में मुख्यमंत्री ने सभी माताओं बहनों बेटियों और महिलाओं को एक बार फिर से शत-शत नमन करते हुए उनकी उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि मेरी मंगलकामनाएं हैं कि महिलाएं हर क्षेत्र में सफल हों नए प्रतिमान गढ़ें और समाज को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँ।

  • भोपाल में महिला कार रैली: साहस और आत्मविश्वास की चलती-फिरती मिसाल

    भोपाल में महिला कार रैली: साहस और आत्मविश्वास की चलती-फिरती मिसाल


    भोपाल। शनिवार दोपहर बंसल प्लाज़ा से तिरंगा झंडा लहराया गया, और यह केवल एक कार रैली की शुरुआत नहीं थी बल्कि पहियों पर सवार एक क्रांति थी। एग्रोहा क्लब द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की भव्य रैली नारी तू नारायणी ने शहर की सड़कों को महिलाओं के साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक बना दिया। इस आयोजन ने भोपाल की महिलाओं को अपनी ताकत और संभावनाओं का अहसास कराया।

    दोपहर 3 बजे रैली शुरू हुई और पूरा माहौल उत्साह और ऊर्जा से भर गया। सड़कों पर गूंजते नारों और रंग-बिरंगी कारों ने स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाएं अब अपनी राह खुद तय कर रही हैं। “नारी तू नारायणी” केवल नारा नहीं बल्कि आंदोलन बनकर सड़कों पर उतर आया।

    इस रैली में हर महिला ने किसी प्रसिद्ध महिला व्यक्तित्व का रूप धारण किया और अपनी कार को उसी थीम पर सजाया। रैली एक चलती-फिरती प्रदर्शनी बन गई जिसमें इतिहास और प्रेरणा का संगम दिखाई दिया। कुछ महिलाओं ने रानी लक्ष्मीबाई का रूप धारण किया, हाथ में तलवार लिए और साहस का परिचय दिया। कुछ प्रतिभागियों ने भारत महिला क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर उनकी उपलब्धियों को सलाम किया, तो कुछ महिलाओं ने अंतरिक्ष यात्री बनकर उन भारतीय बेटियों को याद दिलाया जिन्होंने आसमान से भी आगे जाकर इतिहास रचा।

    कारों पर प्रेरक संदेश और महान महिलाओं की तस्वीरें सजाई गईं जिनमें शामिल थीं – द्रौपदी मुर्मू भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति, निर्मला सीतारमण देश की वित्त मंत्री, लता मंगेशकर जिनकी आवाज करोड़ों दिलों की धड़कन बनी, सुधा मूर्ति समाजसेवा और शिक्षा की प्रेरक हस्ती, किरण बेदी भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी, सुष्मिता सेन मिस यूनिवर्स का ताज जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली।

    कारों पर लिखे संदेश भी उतने ही प्रेरक थे-गांव की पगडंडियों से देश की अगुवाई तक, Each One Teach One, नारी शक्ति का यह कारवां छुएगा आसमान।

    पूरे आयोजन में नई पीढ़ी की ऊर्जा स्पष्ट दिखाई दी। महिलाएं कारों से हाथ हिलातीं, नारे लगातीं और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ती रहीं। हर सजी हुई कार साहस, आत्मविश्वास और सपनों की कहानी कह रही थी। यह वही पीढ़ी है जो दंगल और मैरी कॉम जैसी कहानियां देखकर बड़ी हुई और अब अपनी जगह खुद बना रही है।

    दिन का सबसे प्रेरक संदेश तब आया जब एक प्रतिभागी, अंतरिक्ष यात्री की पोशाक में, बोली -महिलाएं सिर्फ घर से बाहर ही नहीं निकल सकतीं, वे अंतरिक्ष तक भी पहुंच सकती हैं। आज महिला दिवस पर हम उन बेटियों को सलाम करते हैं जिन्होंने अपने सपनों के लिए सब कुछ दे दिया – कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स। उनका साहस और समर्पण हमें हमेशा प्रेरित करेगा।

    रैली के समापन पर बेस्ट ड्रेस्ड पर्सनालिटी, बेस्ट एम्पावरमेंट स्लोगन और बेस्ट डेकोरेटेड कार जैसी श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। एग्रोहा क्लब की नारी तू नारायणी महिला कार रैली 2026 ने दिखा दिया कि महिला दिवस सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि प्रेरणा का माध्यम भी बन सकता है। भोपाल की महिलाओं ने इंतजार नहीं किया, उन्होंने स्टीयरिंग अपने हाथों में ली और नारी शक्ति का संदेश पूरे शहर में फैलाया।
  • महिला दिवस पर चर्चा: किरण चोपड़ा ने कहा, फिल्मों और मीडिया से महिलाओं पर पड़ रहा गलत प्रभाव

    महिला दिवस पर चर्चा: किरण चोपड़ा ने कहा, फिल्मों और मीडिया से महिलाओं पर पड़ रहा गलत प्रभाव

    नई दिल्ली। महिला दिवस के मौके पर दिल्ली के Vigyan Bhawan में दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला विचारक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में महिलाओं के उत्थान, समाज में उनकी भूमिका और उनके सशक्तिकरण पर गहन चर्चा की गई।

    कार्यक्रम के दूसरे दिन मंच पर सात वक्ताओं ने भाग लिया और अपने अनुभवों को साझा करते हुए महिलाओं की स्थिति पर अपने विचार रखे। इस दिन की थीम थी ‘प्रकृति और संस्कृति’, जिसमें सिनेमा और मीडिया द्वारा महिलाओं की छवि पर पड़ने वाले सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पर चर्चा हुई। पैनल में दंगल, एनिमल, कबीर सिंह और मिर्जापुर जैसी फिल्मों का जिक्र किया गया, जिनमें महिलाओं को वस्तु की तरह दिखाया गया और खुले तौर पर नशे को बढ़ावा देने वाले दृश्य शामिल थे।

    इस विषय पर अपनी बात रखते हुए पत्रकार और विचारक Kiran Chopra ने कहा कि सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म दर्शकों पर बहुत बड़ा प्रभाव डालते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दंगल फिल्म में पहलवानी सीखती लड़की को दिखाया गया, जिससे लोगों को प्रेरणा मिली और बेटियों को आगे बढ़ाने की सोच उत्पन्न हुई। वहीं दूसरी ओर ऐसी फिल्में भी आईं, जिनमें शराब का गिलास सिर पर रखकर डांस किया गया और इसके बाद यह ट्रेंड सोशल मीडिया और घरों तक फैल गया।

    किरण चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को मीडिया और सिनेमा में वस्तु की तरह दिखाया जाना गलत है। उन्होंने कहा कि महिलाएं भावनात्मक रूप से संवेदनशील होती हैं और कभी-कभी अपने कदम उठाने में हिचकिचाती हैं, लेकिन उन्हें अपनी शक्तियों का एहसास होना चाहिए। महिला जब अपने भीतर की क्षमता को पहचान लेगी तब समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

    सम्मेलन में संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष Sandhya Purecha ने भी महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सौंदर्यशास्त्र और वेद-पुराणों में स्त्री को शक्ति का रूप माना गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं, जबकि हमारे पुराणों में यह अपराध माना गया है। उन्होंने अतीत की शिक्षाओं से सीख लेकर महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

    सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि महिला सशक्तिकरण केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भर बनने के अवसर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस आयोजन ने सिनेमा और मीडिया में महिलाओं की छवि सुधारने की दिशा में एक चेतावनी और सुझाव के रूप में काम किया।

  • औरत को तारीफ नहीं सम्मान चाहिए इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर समाज के आईने में झांकती एक बात

    औरत को तारीफ नहीं सम्मान चाहिए इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर समाज के आईने में झांकती एक बात


    नई दिल्ली:हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में International Women’s Day मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के सम्मान अधिकार और उपलब्धियों की बात की जाती है। लेकिन सच यही है कि हर साल यह दिन हमें यह याद दिला देता है कि समाज अब भी औरत के असली वजूद को पूरी तरह समझ नहीं पाया है।

    हम अक्सर कहते हैं कि हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं हैं लेकिन इस वाक्य के भीतर ही एक छिपा हुआ सच है कि कहीं न कहीं हम अभी भी बराबरी को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाए हैं। जब हम कहते हैं कि औरत आजाद है तो इसका मतलब यह भी होता है कि उसकी आजादी अभी अधूरी है। जब हम कहते हैं कि बेटियों को भी पढ़ाना चाहिए उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए तो यह भी इस बात का संकेत है कि इस दिशा में अभी बहुत काम बाकी है।

    आज की महिला जीवन के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। राजनीति से लेकर विज्ञान खेल से लेकर सेना और कला से लेकर व्यापार तक महिलाएं हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि उसे बार बार खुद को साबित करने की जरूरत क्यों पड़ती है। समाज अक्सर किसी महिला की सफलता को तब स्वीकार करता है जब वह उन सीमाओं को पार कर लेती है जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों ने तय किया था। कई बार तो महिला की कामयाबी को इस तरह देखा जाता है जैसे उसने किसी पुरुष की भूमिका निभाकर यह उपलब्धि हासिल की हो।

    असल में हमें यह समझना होगा कि औरत केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समाज का ताना बाना है। परिवार रिश्तों और भावनाओं को जोड़कर रखने वाली सबसे मजबूत कड़ी अक्सर वही होती है। बचपन से अपने सपनों को सहेजने वाली और फिर अपनों की खुशियों के लिए उन्हें पीछे छोड़ देने वाली भी अक्सर वही होती है। बेटी के रूप में वह रहमत है मां के रूप में जन्नत है बहन के रूप में इज्जत है और दोस्त के रूप में भरोसा है।

    लेकिन समाज का दूसरा चेहरा भी उतना ही कड़वा है। महिलाओं के साथ हिंसा और अपमान की घटनाएं समय समय पर सामने आती रहती हैं। देश में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने पूरे समाज को झकझोर दिया। Manipur women parading case 2023 हो या Kanjhawala case 2023 Delhi जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। इसी तरह Bilkis Bano का मामला भी बार बार यह सवाल उठाता है कि न्याय और संवेदनशीलता के मामले में समाज कहां खड़ा है।

    समस्या की जड़ कहीं और भी है। हम अक्सर महिलाओं का सम्मान उनके रिश्तों के आधार पर करते हैं। हमें लगता है कि हमें अपनी मां बहन बेटी या पत्नी की ही इज्जत करनी चाहिए। लेकिन असली सम्मान तब होगा जब सड़क पर चलने वाली या दफ्तर में काम करने वाली हर महिला को वही सम्मान मिले जो हम अपने घर की महिलाओं को देते हैं।

    हमारी संस्कृति और साहित्य में भी कई बार औरत की खूबसूरती को केवल उसके चेहरे उसकी आंखों या उसकी जुल्फों तक सीमित कर दिया गया है। शायरियों और कविताओं में उसकी आंखों की गहराई और उसके होंठों की नाजुकी का खूब जिक्र मिलता है। इसमें कोई शक नहीं कि महिला की सुंदरता बेमिसाल होती है लेकिन उसकी असली पहचान केवल उसके रूप में नहीं बल्कि उसके व्यक्तित्व उसकी सोच उसकी मेहनत और उसकी संवेदनशीलता में होती है।

    आज की महिला शायद केवल तारीफ नहीं चाहती बल्कि सम्मान चाहती है। उसे यह एहसास चाहिए कि समाज उसे बराबरी की नजर से देखता है। क्योंकि सच यही है कि किसी महिला को खूबसूरत कहना अच्छी बात हो सकती है लेकिन उसकी इज्जत करना उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत है।

  • लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की किस्मत: घर से शुरू किया सिलाई काम, आज चला रहीं रोजगार देने वाला सेंटर

    लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की किस्मत: घर से शुरू किया सिलाई काम, आज चला रहीं रोजगार देने वाला सेंटर


    भोपाल ।मध्यप्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। इस योजना के माध्यम से कई महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नर्मदापुरम जिले की रहने वाली मंजू यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई हैं जिन्होंने योजना से मिली आर्थिक सहायता का सदुपयोग करते हुए अपनी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। आज वे न केवल आत्मनिर्भर बन चुकी हैं बल्कि अपने प्रयासों से अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर रही हैं।

    नर्मदापुरम जिले के वार्ड क्रमांक 31 दीवान चौक ग्वालटोली निवासी 30 वर्षीय मंजू यादव कभी सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने परिवार का सहारा बनने का सपना देखती थीं। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उनके लिए यह सपना पूरा करना आसान नहीं था लेकिन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई। जून 2023 से उन्हें इस योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने लगी जिससे उन्हें अपने भविष्य के लिए कुछ नया करने का आत्मविश्वास मिला।

    मंजू यादव ने योजना से प्राप्त राशि को खर्च करने के बजाय सोच समझकर उसका उपयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने घर से ही सिलाई का छोटा सा काम शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने धीरे धीरे इस छोटे से प्रयास को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। आसपास के लोगों से कपड़ों की सिलाई के ऑर्डर मिलने लगे और उनका काम लगातार बढ़ने लगा।

    फरवरी 2026 तक मंजू यादव को योजना की 33वीं किश्त सहित कुल 43 हजार 500 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो चुकी है। इस आर्थिक सहयोग और सिलाई के काम से हुए मुनाफे को उन्होंने अपने व्यवसाय के विस्तार में लगाया। उन्होंने सिलाई के लिए अतिरिक्त मशीनें खरीदीं और धीरे धीरे अपने काम को बढ़ाते हुए एक सिलाई सेंटर की शुरुआत कर दी। आज उनके सेंटर में पांच सिलाई मशीनें संचालित हो रही हैं और काम भी नियमित रूप से मिल रहा है।

    मंजू यादव की इस पहल का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि उन्होंने केवल खुद को ही आत्मनिर्भर नहीं बनाया बल्कि अपने सिलाई सेंटर के माध्यम से अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान किया है। उनके साथ काम करने वाली कई महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो रही है।

    मंजू यादव भावुक होकर बताती हैं कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास और उम्मीद जगाई है। इस योजना ने उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया। आज वे गर्व के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं और अपने काम के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दे रही हैं कि सही अवसर और थोड़े से सहयोग से महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

    उनकी सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि यदि योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए तो वे न केवल व्यक्तिगत जीवन में बदलाव ला सकती हैं बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन की राह खोल सकती हैं।