नुमान जन्मोत्सव 2026 में महिलाओं के लिए खास नियम जानें पूजा में छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी


नई दिल्ली: हनुमान जन्मोत्सव का पर्व भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और पावन अवसर माना जाता है इस दिन श्रद्धालु पूरी आस्था और भक्ति के साथ बजरंगबली की पूजा अर्चना करते हैं मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते हैं और सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था और वर्ष 2026 में यह पर्व 2 अप्रैल को मनाया जाएगा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की पूजा में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं खासकर महिलाओं के लिए कुछ अलग सावधानियां रखने की परंपरा रही है इन नियमों का पालन श्रद्धा और मर्यादा के साथ करना शुभ माना जाता है

सबसे पहले यह ध्यान रखना जरूरी है कि महिलाएं हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श न करें मान्यता के अनुसार हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं इसलिए उनकी प्रतिमा को बिना छुए ही फूल और प्रसाद अर्पित करना उचित माना जाता है भक्तिभाव से दूर से ही प्रणाम करना भी उतना ही फलदायी माना गया है

इसी प्रकार पूजा के दौरान पंचामृत स्नान कराने से भी महिलाओं को बचना चाहिए हालांकि हनुमान जी की पूजा में पंचामृत का विशेष महत्व है लेकिन परंपरा के अनुसार महिलाओं द्वारा यह क्रिया करना उचित नहीं माना गया है इसे मर्यादा का पालन समझा जाता है

हनुमान जयंती के दिन महिलाओं को हनुमान जी के चरण स्पर्श करने से भी बचना चाहिए धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी सभी महिलाओं को माता सीता के रूप में देखते हैं ऐसे में उनके चरण स्पर्श करना उचित नहीं माना गया है महिलाएं हाथ जोड़कर विनम्रता से आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं

सिंदूर चढ़ाने को लेकर भी विशेष नियम बताए गए हैं हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है लेकिन महिलाओं को स्वयं सिंदूर अर्पित करने से बचना चाहिए इसके बजाय वे दीप जलाकर और भोग अर्पित करके अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकती हैं

पाठ और मंत्रों के संदर्भ में भी कुछ सावधानियां रखनी चाहिए परंपरानुसार महिलाओं को बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए हालांकि वे हनुमान चालीसा और आरती का पाठ कर सकती हैं जिससे उन्हें समान रूप से पुण्य फल प्राप्त होता है

शुद्धता का विशेष ध्यान रखना भी आवश्यक है यदि महिलाएं मासिक धर्म के दौरान हों तो उन्हें पूजा से दूरी बनानी चाहिए इसके अलावा यदि घर में सूतक की स्थिति हो तो भी पूजा करना वर्जित माना जाता है ऐसे समय में मानसिक रूप से स्मरण करना अधिक उचित होता है

अंत में यह भी ध्यान रखें कि हनुमान जन्मोत्सव पर चोला और जनेऊ अर्पित करने की परंपरा है लेकिन महिलाओं को यह कार्य नहीं करना चाहिए इन सभी नियमों का उद्देश्य केवल परंपरा और आस्था की मर्यादा को बनाए रखना है

हनुमान जी की सच्ची भक्ति मन की पवित्रता और श्रद्धा में होती है यदि कोई भक्त सच्चे मन से उनका स्मरण करता है तो उसे अवश्य ही बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है