देश में मुस्लिम आबादी भले ही 14-15 फीसदी के बीच हो, लेकिन केरल में यह करीब 27 फीसदी और असम में 34-35 फीसदी तक है। ऐसे में इन राज्यों की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव काफी ज्यादा है और यही वजह है कि इस वोट बैंक पर सभी दलों की नजर है।
केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। केरल में मुस्लिम लीग कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है, जबकि असम में AIUDF और कांग्रेस अलग-अलग मैदान में हैं।
असम में बदरुद्दीन अजमल की चुनौती
असम की 126 सीटों पर 722 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जिसमें बदरुद्दीन अजमल की पार्टी 27 सीटों पर किस्मत आजमा रही है। पार्टी का फोकस निचले असम के उन इलाकों पर है, जो बांग्लादेश सीमा से जुड़े हैं और जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।
इस क्षेत्र की करीब 50 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है। 2021 में एनडीए ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस और एआईयूडीएफ गठबंधन को 27 सीटें मिली थीं। इस बार दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे अजमल को बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस से भी सीधी टक्कर मिल रही है।
धुबरी, बारपेटा और गोलपाड़ा जैसे इलाकों में मुस्लिम वोटरों की संख्या अधिक है। पिछली बार एआईयूडीएफ ने 16 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार समीकरण बदले हुए हैं। मुस्लिम वोटों को साधने के लिए अजमल ने असदुद्दीन ओवैसी को भी चुनाव प्रचार में उतारा है।
अजमल ने 2005 में एआईयूडीएफ की स्थापना की थी और मुस्लिम अल्पसंख्यकों, खासकर असमिया और बंगाली मूल के मुसलमानों के अधिकारों की राजनीति की। 2006 में पार्टी को 10 सीटें, 2011 में 18, 2016 में 13 और 2021 में 16 सीटें मिली थीं। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में अजमल को अपनी सीट गंवानी पड़ी, जिससे उनकी सियासी स्थिति कमजोर हुई है।
मुस्लिम वोटर किसके साथ?
असम में करीब 34 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जो पहले 32 सीटों पर निर्णायक थी, लेकिन परिसीमन के बाद अब यह प्रभाव करीब 22 सीटों तक सीमित हो गया है। कांग्रेस और एआईयूडीएफ दोनों ही इस वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं।
2021 में दोनों दल साथ थे, लेकिन इस बार अलग-अलग मैदान में हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि मुस्लिम वोटर किसे प्राथमिकता देंगे, खासकर तब जब हालिया चुनावों में अजमल के प्रति समर्थन में कमी देखी गई है।
केरल में मुस्लिम लीग की स्थिति
केरल में मुस्लिम आबादी करीब 27 फीसदी है और यहां मुस्लिम समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। मलप्पुरम, कोझिकोड और कन्नूर जैसे जिलों में इनका असर ज्यादा है।
राज्य की राजनीति में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की मजबूत पकड़ रही है। यह पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है और 140 में से 26 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। बाकी सीटों पर सहयोगी दलों को समर्थन दिया गया है।
मलप्पुरम, कोझिकोड और कासरगोड जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम लीग पारंपरिक रूप से मजबूत रही है। 1962 से अब तक पार्टी का हर लोकसभा में प्रतिनिधित्व रहा है और विधानसभा में भी इसकी निरंतर मौजूदगी बनी रही है।
केरल में 140 सीटों में से 32 मुस्लिम विधायक हैं, जिनमें से 15 मुस्लिम लीग से आते हैं। राज्य की करीब 43 सीटों पर मुस्लिम मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
पिछले कई दशकों से मुस्लिम लीग ने अपने वोट बैंक को संगठित रखा है और कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण वोटों का बिखराव भी नहीं होता। इस बार भी यूडीएफ और एलडीएफ के बीच मुकाबले में यूडीएफ का पलड़ा कुछ भारी माना जा रहा है, जो मुस्लिम लीग के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है।
