मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन दिवसीय इस आयोजन में कृषि के विभिन्न आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श होगा, जिसमें जमीनी स्तर के अनुभव, सफल प्रयोग और नवाचार साझा किए जाएंगे। यह मंच केवल चर्चा के लिए नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन योजना तैयार करने का माध्यम होना चाहिए, जिससे किसान सीधे लाभान्वित हों। उन्होंने राज्य के कृषि आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश की लगभग 16-17 प्रतिशत आबादी का घर है, जबकि यहां केवल 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि उपलब्ध है, फिर भी राज्य कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान देता है। योजनाबद्ध प्रयासों और प्रभावी नीतियों के माध्यम से कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंचाना उल्लेखनीय उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री ने भारत की ऐतिहासिक आर्थिक शक्ति का आधार कृषि बताया और कहा कि एक समय में भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत तक थी, जिसमें सशक्त कृषि तंत्र का योगदान महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि पहले किसान सिर्फ उत्पादक नहीं था, बल्कि कारीगर और उद्यमी भी था। समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर हुई और किसान केवल कच्चा माल उत्पादक बन गया, जिससे आर्थिक असंतुलन उत्पन्न हुआ।
उन्होंने आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक कृषि को नई दिशा दे सकते हैं। सेंसर आधारित तकनीक से मिट्टी की नमी और पोषण का डेटा प्राप्त कर किसान सटीक निर्णय ले सकते हैं। एआई के माध्यम से फसलों का वास्तविक समय विश्लेषण, रोग पहचान और उत्पादन का पूर्वानुमान संभव है। ड्रोन द्वारा उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव तथा सैटेलाइट के माध्यम से मौसम और भूमि की निगरानी कृषि को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बना रही है। बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग बदलते मौसम के अनुकूल बीज विकसित करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को दीर्घकालिक समाधान बताते हुए कहा कि यह लागत कम करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखती है। डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म, वन नेशन-वन मंडी प्रणाली, मंडी शुल्क में कमी और डिजिटल सॉयल हेल्थ कार्ड किसानों को सीधे बाजार, मौसम और मूल्य की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।
उन्होंने पारंपरिक ‘लैब टू लैंड’ मॉडल की जगह ‘लैंड इज लैब’ पर जोर देते हुए कहा कि अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाना होगा, जहां किसान और वैज्ञानिक मिलकर नवाचार स्थापित करें। कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
मुख्यमंत्री ने गन्ना क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अधिकांश मिलें 6-7 दिनों में भुगतान करती हैं। प्रदेश गन्ना उत्पादन में 55 प्रतिशत का योगदान देता है और एथेनॉल उत्पादन में देश में नंबर वन है। सिंचाई के लिए नलकूप और सोलर पैनल आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना और अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसे उपाय सुनिश्चित किए गए हैं। 89 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहे हैं।
