परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल में तैनात नर्सिंग स्टाफ ने इलाज के बदले पचास हजार रुपये की मांग की थी। उनका कहना है कि पैसे न देने की वजह से ऑपरेशन में देरी की गई और मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों का दावा है कि अगर समय पर ऑपरेशन किया जाता तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।
सोमवार सुबह करीब पांच बजे संध्या की तबीयत अचानक अत्यंत गंभीर हो गई। इसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में माहौल तनावपूर्ण हो गया और परिजनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की।
घटना के बाद परिजनों का आक्रोश बढ़ता गया और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही का मामला नहीं है बल्कि गंभीर भ्रष्टाचार और अमानवीय व्यवहार का भी संकेत देता है। परिजनों ने आरोप लगाया कि गरीब मरीजों के साथ इलाज के नाम पर पैसों की मांग करना आम बात हो गई है और इस पर रोक लगनी चाहिए।
अस्पताल परिसर में हुए हंगामे के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए गए लेकिन अब तक बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इससे लोगों में और अधिक नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर सरकारी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहेंगे तो आम जनता का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था से उठ जाएगा।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच की बात कही है लेकिन परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। यह घटना एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीण और गरीब तबके के मरीजों के लिए बेहतर और पारदर्शी इलाज व्यवस्था की मांग तेज हो गई है।
