पूर्व न्यूजीलैंड तेज गेंदबाज और आईपीएल में मुंबई इंडियंस का हिस्सा रह चुके मिशेल मैक्लेनाघन ने इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनका मानना था कि टीम को लंबे समय से नई गेंद से प्रभाव डालने की जरूरत थी और ऐसे में बुमराह जैसे अनुभवी गेंदबाज को शुरुआती ओवर में आक्रमण के लिए इस्तेमाल करना सही कदम था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गुजरात टाइटंस की ओपनिंग साझेदारी पर उनकी टीम काफी निर्भर रहती है और शुरुआती विकेट गिरने से उनका पूरा मध्यक्रम दबाव में आ जाता है। इस रणनीति ने मैच में वही प्रभाव पैदा किया और गुजरात की बल्लेबाजी बिखरती नजर आई।
मैक्लेनाघन के अनुसार, पिछले कुछ मैचों में बुमराह को विकेट हासिल करने में सफलता नहीं मिल रही थी, लेकिन इसके बावजूद टीम मैनेजमेंट ने उन पर भरोसा बनाए रखा। यह भरोसा आखिरकार रंग लाया और बुमराह ने महत्वपूर्ण विकेट लेकर अपनी लय में वापसी के संकेत दिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक तेज गेंदबाज के लिए सिर्फ रन रोकना ही नहीं बल्कि विकेट लेना भी उतना ही जरूरी होता है क्योंकि यही असली संतोष और आत्मविश्वास देता है। लगातार विकेट न मिलने का दबाव किसी भी गेंदबाज के लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन इस मैच में मिली सफलता ने बुमराह के लिए राहत का काम किया।
मैच की बात करें तो मुंबई इंडियंस ने बल्लेबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए निर्धारित ओवरों में पांच विकेट पर 199 रन बनाए। टीम के लिए सबसे बड़ी पारी तिलक वर्मा ने खेली, जिन्होंने नाबाद 101 रन बनाकर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। जवाब में गुजरात टाइटंस की टीम मुंबई की धारदार गेंदबाजी के सामने पूरी तरह संघर्ष करती नजर आई और केवल 100 रन पर सिमट गई। मुंबई इंडियंस ने यह मुकाबला 99 रन के बड़े अंतर से अपने नाम किया और अपने प्रदर्शन से एक मजबूत संदेश दिया।
