ट्रंप का बड़ा बयान: ‘पागलों के हाथ में एटम बम नहीं दे सकते’, ईरान को लेकर फिर सख्त रुख


नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर बेहद सख्त और विवादित बयान दिया है। फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा, क्योंकि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मिडिल ईस्ट को उन्होंने एक बड़े परमाणु संकट से बचाया है।

ईरान को परमाणु हथियार से रोकने पर जोर

ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो ईरान के पास परमाणु हथियार होते और इसका असर इजराइल, यूरोप और पूरे मिडिल ईस्ट पर विनाशकारी हो सकता था। उनके मुताबिक, हम ऐसे लोगों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं जाने दे सकते जिन्हें वह ‘पागल’ बता रहे हैं।

उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को बातचीत से पहले अपने एनरिच्ड यूरेनियम को सौंपना होगा, तभी किसी भी तरह की डिप्लोमैटिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

ईरान के प्रस्ताव पर असहमति

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ईरान ने हाल ही में जो नया प्रस्ताव भेजा था, उसमें परमाणु कार्यक्रम का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। इसी बात से ट्रंप प्रशासन असंतुष्ट है। वहीं ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जबकि परमाणु मुद्दे पर बाद में बातचीत की जा सकती है।ट्रंप का रुख है कि दोनों मुद्दों को एक साथ हल किया जाना चाहिए, न कि अलग-अलग।

सैन्य कार्रवाई पर भी सख्त संकेत

ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने ऐसे मांग करने वालों को “देशभक्त नहीं” बताया। यह बयान अमेरिकी राजनीतिक हलकों में नए विवाद को जन्म दे सकता है।

मिडिल ईस्ट तनाव और वैश्विक असर

अमेरिका ने दावा किया है कि ईरान से जुड़े तनाव के चलते होर्मुज जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही करीब 90% तक कम हो गई है। पहले जहां रोजाना लगभग 130 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या 10 से भी कम रह गई है। इस स्थिति ने वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर गंभीर असर डाला है।

इसके अलावा अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी कंपनियां ईरान को इस क्षेत्र से गुजरने के लिए वित्तीय सहायता देंगी, उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, चाहे वह सहायता किसी चैरिटी के नाम पर ही क्यों न हो।

स्थिति अभी भी तनावपूर्ण

व्हाइट हाउस ने हालांकि यह भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष में कुछ हद तक कमी आई है, लेकिन अमेरिकी सेना अभी भी क्षेत्र में सक्रिय है। इसी बीच ट्रंप प्रशासन लगातार यह संदेश दे रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार किसी भी कीमत पर नहीं मिलने दिए जाएंगे।