फिल्मी सितारों के ग्लैमर और राजनीति के चाणक्यों के बीच सीधी जंग, क्या थलपति विजय बनेंगे सियासत के नए 'थलापति'?

नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति का सिनेमा के साथ अटूट और दशकों पुराना रिश्ता रहा है, लेकिन साल 2026 का विधानसभा चुनाव इस रिश्ते को एक नए और निर्णायक मोड़ पर ले जाता दिख रहा है। इस बार चुनावी मैदान में केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि फिल्मी पर्दे के वे महानायक भी उतरे हैं जिनकी एक झलक पाने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ती है। राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए इस बार ग्लैमर और जनसेवा का ऐसा मेल देखने को मिल रहा है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सुपरस्टार विजय थलपति से लेकर खुशबू सुंदर और उदयनिधि स्टालिन जैसे चर्चित चेहरों ने इस चुनावी जंग को न केवल रोचक बना दिया है, बल्कि राजनीतिक समीकरणों को भी पूरी तरह से उलझा दिया है।

इस पूरे चुनावी परिदृश्य में सबसे बड़ा नाम बनकर उभरे हैं जोसेफ विजय चंद्रशेखर, जिन्हें दुनिया ‘विजय थलपति’ के नाम से जानती है। अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के साथ पहली बार चुनावी मैदान में उतरे विजय ने राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है। अपनी पार्टी को अकेले चुनाव लड़ाने के फैसले के साथ विजय ने यह साफ कर दिया है कि वह केवल एक विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि सत्ता के मुख्य दावेदार के रूप में उभरे हैं। उनके विशाल फैन बेस और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता ने सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और विपक्षी AIADMK के लिए कड़ी चुनौती पेश कर दी है। विजय की सभाओं में उमड़ रही भीड़ इस बात का संकेत है कि तमिलनाडु की जनता अब नए चेहरों और नई सोच की ओर आकर्षित हो रही है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी की ओर से खुशबू सुंदर एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरी हैं। बीजेपी की उपाध्यक्ष और मशहूर अभिनेत्री खुशबू ने राजनीति के साथ-साथ अपने अभिनय करियर को भी बखूबी संभाला है, लेकिन इस चुनाव में उनकी पूरी ताकत पार्टी के विस्तार और एनडीए की सीटों को बढ़ाने में लगी है। वहीं, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन सत्ता को बचाए रखने के लिए फ्रंटफुट पर खेल रहे हैं। उदयनिधि ने भले ही सिनेमा को अलविदा कह दिया हो, लेकिन युवाओं के बीच उनकी पकड़ और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर उनका नियंत्रण उन्हें इस चुनाव का सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी बनाता है।

इस चुनावी बिसात पर केवल ये तीन नाम ही नहीं, बल्कि गौतमी ताड़ीमाल्ला और आर. सरथकुमार जैसे दिग्गज भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। गौतमी जहां AIADMK के टिकट पर चुनावी समर में कूदी हैं, वहीं सरथकुमार अपनी पार्टी के बीजेपी में विलय के बाद एनडीए के लिए जोरदार प्रचार कर रहे हैं। इनके साथ ही नाम तमिलर काची (NTK) के प्रमुख सीमैन अपनी क्षेत्रीय पहचान की राजनीति के साथ मजबूती से डटे हुए हैं। कुल मिलाकर, 2026 का यह चुनाव केवल वोट और जीत का आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की उस विरासत की परीक्षा है जहां सिनेमाई नायक अक्सर राजनीतिक भाग्य विधाता बनते रहे हैं। अब देखना यह है कि जनता इस बार पर्दे के किस नायक को असल जिंदगी का जननायक चुनती है।