CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला, टिप्पणी से किया इनकार


नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन पर पहली बार पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से CJP आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम पर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह भारत का घरेलू विषय है और पाकिस्तान ऐसे मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करता।

पांचवें सप्ताह में पहुंचा आंदोलन
CJP का प्रदर्शन अब पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

‘संसद चलो’ मार्च के बाद बढ़ा तनाव
20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया गया।

पेपर लीक मामलों पर सरकार का सख्त रुख
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सरकार ने फिर दिया बातचीत का प्रस्ताव
केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की पहल भी दोहराई है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार सरकार चार बार CJP को बातचीत का प्रस्ताव दे चुकी है और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, CJP ने नड्डा के आवास या कार्यालय में बैठक करने से इनकार करते हुए किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग रखी है।

सोनम वांगचुक ने समाप्त किया अनशन
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 25 दिन से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावना को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।