MP में आज रीवा संभाग के 4 जिलों में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप


भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार को रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं, भोपाल और इंदौर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में धूप खिली रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिन तक प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है। इस बीच रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ने लगी है। पचमढ़ी में प्रदेश की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई।

अमरकंटक में 37.5 मिमी बारिश, रात में बढ़ी ठंडक

मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में मौसमी सिस्टम का असर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में अमरकंटक में करीब डेढ़ इंच यानी 37.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद प्रदेश के कई इलाकों में रात के तापमान में गिरावट आई है।

पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। अमरकंटक और इंदौर में न्यूनतम तापमान 17.9 डिग्री, छिंदवाड़ा में 18.1 डिग्री, कटनी के करौंदी में 18.8 डिग्री और शाजापुर में 19 डिग्री सेल्सियस रहा।

रात में ठंडक बढ़ने के बावजूद दिन में गर्मी का असर बना हुआ है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। बड़वानी के तालुन में पारा 37 डिग्री तक पहुंच गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक रहा।

3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर भी क्यों हो रही बारिश?

मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदा हो गया था। इस बार प्रदेश में मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। इसकी वजह चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन जैसे मौसमी सिस्टम का सक्रिय होना है।

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी मानसूनी सिस्टम की सक्रियता के चलते कुछ इलाकों में बारिश हुई है। हालांकि, शनिवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं, जबकि अगले तीन दिन प्रदेश में मौसम साफ रहने का अनुमान है।

जून की कम बारिश से सीजन का आंकड़ा 4% नीचे

इस साल जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में औसतन 35.8 इंच यानी 908.4 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य औसत 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है।

बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।

कम बारिश की प्रमुख वजह जून में बारिश का कोटा पूरा नहीं होना रहा। इस महीने सामान्य के मुकाबले 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से इसकी भरपाई की कोशिश हुई, लेकिन शुरुआती कमी के कारण पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से नीचे ही रहा।

25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

प्रदेश के 55 जिलों में से 25 में मानसून सीजन की सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

इन 25 जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज हुई: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।

कम बारिश वाले प्रमुख जिले: इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, देवास, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नीमच, मंदसौर और धार।

इस तरह मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण बारिश हो रही है। वहीं, रात के तापमान में गिरावट और दिन में तेज धूप के चलते मौसम में गर्मी और ठंडक का मिला-जुला असर बना हुआ है।